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अध्याय 38

ऐसा नहीं कि तुम्हारा विश्वास अच्छा और शुद्ध है, बल्कि इसके बजाय, मेरे कार्य चमत्कारिक हैं! यह सब कुछ मेरी दया के कारण है! तुम में थोड़ा भी स्वार्थ या दम्भ का भ्रष्ट स्वभाव अवश्य नहीं होना चाहिए, अन्यथा तुम पर मेरा कार्य प्रगति नहीं करेगा। तुम्हें यह अवश्य स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि चाहे मनुष्य गिरें या दृढ़ता से खड़ा रहें, यह उनकी वजह से नहीं है, यह मेरी वजह से है। आज यदि तुम इस कदम को स्पष्ट रूर, नहीं समझते हो तो तुम राज्य में प्रवेश नहीं कर सकोगे! तुम्हें यह अवश्य समझना चाहिए कि आज जो किया जा रहा है[क] वह परमेश्वर का चमत्कारिक कार्य है; इसका मनुष्य से कोई मतलब नहीं है। मनुष्य के कार्य किसके लिए महत्व रखते हैं? जब वे स्वार्थी, दम्भी, अभिमानी और घमंडी नहीं हो रहे तो तब वे परमेश्वर के प्रबंधन में रुकावट बन रहे होते और उनकी योजनाओं को नष्ट कर रहे होते हैं। ओह, भ्रष्टजनो! तुम्हें आज मुझ पर भरोसा अवश्य करना चाहिए; यदि तुम न करते हो, तो आज मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम कभी भी कोई चीज प्राप्त नहीं होगी! सब कुछ व्यर्थ होगा और तुम्हारे उपक्रम मूल्यहीन होंगें!

न विलंब करें, न हिचकिचाएँ; आज प्रत्येक वह व्यक्ति जो मुझसे प्रेम रखता है वह अपने ऊपर मेरे चमत्कारिक कार्यों को करवाएगा। जो स्वयं को विनम्र नहीं बनाते हैं, वे मेरे किसी उपयोग के नहीं हैं, और आज मैं केवल उनका उपयोग करता हूँ जो पूर्णत: विनम्र हैं। केवल वे लोग जो मुझे सच्चे दिल से प्रेम करते हैं, जिन्हें दूसरे तुच्छ समझते हैं और जो खुद को मेरे प्रति पूरी तरह खोल पाते हैं, उनके लिए मैं भी पूरी तरह खुलूँगा। तरह खुलूँगा। मैं उन्हें अपने इरादों को समझने दूँगा और वे मेरी आशीषें प्राप्त करते हुए हर समय मेरे सम्मुख हैं। आज जो अपने आप को मेरे लिए खपाते हैं, अपने आप को मेरे लिए अर्पित करते और मेरे लिए बोझ सहन हैं, मैं उनके साथ कभी भी अनुचित व्यवहार नहीं करूँगा और उससे मेरी धार्मिकता प्रकट होगी। मेरे बारे में शिकायत ना करो; मेरा अनुग्रह तुम लोगों के लिए काफी है। तुम भी आकर इसे ग्रहण कर सकते हो ताकि तुम अतुलनीय मधुरता का स्वाद ले सको। यह न केवल मेरे प्रति तुम्हारे प्रेम का सृजन करेगा, बल्कि यह उस प्रेम को गहरा भी करेगा।

मेरा कार्य उत्तरोतर किया जाता है, और वह निश्चित रूप से लापरवाह से या अस्पष्ट नहीं होता है। मेरा अनुसरण करने के लिए तुम लोगों को भी यह अवश्य करना चाहिए: मेरा आचरण देखो और ध्यान दो कि मैं क्या करता हूँ; इस प्रकार से, यदि तुम मेरे पदचिन्हों का अनुसरण करते हो तो तुम लोगों को राज्य की अभिव्यक्ति में लाया जाएगा। एक स्वर से जयकार करो! मेरे पुत्रो! परमेश्वर का कार्य तुम लोगों के इस समूह पर सम्पन्न होगा। क्या तुम लोग धन्य महसूस नहीं करते हो?

इस की थाह लेना सचमुच कठिन है! मैं तुम लोगों को आज यहाँ लाया हूँ ताकि मेरे चमत्कारिक कार्य को देख सको!

फुटनोट:

क. मूल पाठ में "जो किया जा रहा है" यह वाक्‍यांश नहीं है।

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