13.3. मनुष्य के लिए परमेश्वर की चेतावनियाँ

644. जो लोग मसीह द्वारा बोले गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करना चाहते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे बेतुके लोग हैं, और जो मसीह द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते, वे कोरी कल्पना में खोए हैं। और इसलिए मैं कहता हूँ कि जो लोग अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करते, उनसे परमेश्वर हमेशा घृणा करेगा। अंत के दिनों में मसीह राज्य के लिए मनुष्य का प्रवेशद्वार है और ऐसा कोई नहीं है जो उसे लाँघकर निकल सके। मसीह के माध्यम के अलावा किसी भी दूसरे तरीके से किसी को भी परमेश्वर द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता। तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, इसलिए तुम्हें उसके वचन स्वीकारने चाहिए और उसके वचन के प्रति समर्पण करना चाहिए। सत्य और जीवन के प्रावधान को स्वीकारने में असमर्थ रहते हुए केवल आशीष प्राप्त करने की मत सोचो। मसीह अंत के दिनों में इसलिए आया है ताकि वह उन सबको जीवन प्रदान कर सके जो उसमें ईमानदारी से विश्वास रखते हैं। यह कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है, और यह कार्य वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वाले सभी लोगों को अपनाना ही चाहिए। यदि तुम मसीह को नहीं स्वीकारते और यही नहीं, उसकी भर्त्सना, ईशनिंदा या उसका उत्पीड़न करते हो, तो तुम्हें अनंतकाल तक जलाया जाना तय है और तुम परमेश्वर के राज्य में कभी प्रवेश नहीं करोगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मसीह स्वयं पवित्र आत्मा की अभिव्यक्ति है, परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वह है जिसे परमेश्वर ने अपना कार्य पृथ्वी पर करने के लिए सौंपा है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि तुम वह सब स्वीकार नहीं करते जो अंत के दिनों के मसीह द्वारा किया जाता है, तो तुम पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करते हो। पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करने वाले जिस प्रतिफल के पात्र हैं, वह सभी को स्वतः स्पष्ट है। मैं तुम्हें यह भी बताता हूँ : अगर तुम अंत के दिनों के मसीह का प्रतिरोध करते हो, अगर तुम अंत के दिनों के मसीह को नकारते हो तो कोई भी अन्य तुम्हारे बदले में इसका अंजाम नहीं भुगत सकता है। इतना ही नहीं, उस बिंदु के बाद तुम्हें परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करने का अवसर कभी नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने तौर-तरीके सुधारना भी चाहो, तब भी तुम दोबारा कभी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। ऐसा इसलिए क्योंकि तुम जिसका प्रतिरोध कर रहे हो वह मानव नहीं है, तुम जिसे अस्वीकार कर रहे हो वह कोई तुच्छ व्यक्ति नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम जानते हो कि इसके क्या दुष्परिणाम हैं? तुम कोई छोटी-मोटी गलती नहीं कर रहे हो, बल्कि एक जघन्य पाप कर रहे हो। और इसलिए मैं हर व्यक्ति को सलाह देता हूँ कि सत्य के सामने अपने नुकीले दाँत और पंजे मत दिखाओ या मनमानी टिप्पणियाँ मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुम्हें जीवन दिला सकता है, और सत्य के अलावा कुछ भी तुम्हें पुनः जन्म लेने या दोबारा परमेश्वर का चेहरा देखने में सक्षम नहीं बना सकता।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है

645. हम सबको विश्वास है कि परमेश्वर जो कुछ हासिल करने का इरादा रखता है उसे कोई भी देश या ताकत बाधित नहीं कर सकती और जो लोग परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करते हैं, परमेश्वर के वचनों का विरोध करते हैं, और परमेश्वर की योजना में विघ्न डालते और उसे बिगाड़ने की कोशिश करते हैं वे अंततः परमेश्वर द्वारा दंडित किए जाएँगे। जो भी व्यक्ति परमेश्वर के कार्य का प्रतिरोध करता है उसे परमेश्वर नरक भेजेगा; जो भी देश परमेश्वर के कार्य का प्रतिरोध करता है उसे परमेश्वर नष्ट कर देगा; जो भी राष्ट्र परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए उठता है उसे परमेश्वर इस पृथ्वी से मिटा देगा और उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मैं सभी राष्ट्रों और सभी देशों और यहाँ तक कि सभी उद्योगों के लोगों से यह प्रबल आग्रह करता हूँ कि वे आकर परमेश्वर की वाणी को सुनें, परमेश्वर के कार्य को देखें और मानवजाति के भाग्य पर ध्यान दें, और इस तरह परमेश्वर को मानवजाति के बीच सर्वाधिक पवित्र, सर्वाधिक सम्माननीय, सर्वोच्च और आराधना का एकमात्र पात्र बनाएँ, और संपूर्ण मानवजाति को परमेश्वर के आशीष के बीच जीने में सक्षम बनाएँ, ठीक उसी तरह जैसे अब्राहम के वंशज यहोवा की प्रतिज्ञा के अधीन रहे और ठीक उसी तरह जैसे आदम और हव्वा, जिन्हें परमेश्वर ने आदि में बनाया था, अदन के बगीचे में रहे।

परमेश्वर का कार्य एक प्रचंड लहर के समान आगे बढ़ता है। परमेश्वर को कोई नहीं थाम सकता है और कोई भी उसके कदमों को रोक नहीं सकता। जो उसके वचन सावधानीपूर्वक सुनते हैं, और जो उसे खोजते हैं और उसके लिए लालायित रहते हैं, वे ही उसके पदचिह्नों का अनुसरण कर सकते हैं और उसकी प्रतिज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। जो ऐसा नहीं करते, वे प्रचंड आपदा और यथोचित दंड भुगतेंगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 2 : परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य पर संप्रभु है

646. परमेश्वर उन लोगों की खोज कर रहा है जो उसके प्रकट होने की लालसा करते हैं। वह उन लोगों की खोज कर रहा है जो उसके वचनों को सुनते हैं, जो उसके आदेश को नहीं भूलते और अपना तन-मन उसे समर्पित करते हैं। वह उनकी खोज कर रहा है जो उसके सामने शिशुओं के समान समर्पित और प्रतिरोध न करने वाले हों। यदि तुम किसी भी बल से बाधित हुए बिना खुद को परमेश्वर के प्रति समर्पित करते हो, तो परमेश्वर तुम्हारे ऊपर अनुग्रह की दृष्टि डालेगा और तुम्हें अपने आशीष प्रदान करेगा। यदि तुम्हारे पास ऊँचा रुतबा है, अत्यधिक प्रतिष्ठा है, प्रचुर ज्ञान है, असंख्य संपत्तियाँ हैं और बहुत-से लोगों का सहारा है, लेकिन तुम इन बातों से अप्रभावित रहते हो और परमेश्वर की पुकार और आदेश को स्वीकार करने और परमेश्वर तुमसे जो कुछ कहता है वह करने के लिए अभी भी उसके सम्मुख आते हो तो फिर तुम जो कुछ भी करोगे वह सब पृथ्वी पर सर्वाधिक सार्थक ध्येय होगा और मनुष्य का सर्वाधिक न्यायसंगत उपक्रम होगा। यदि तुम अपने रुतबे या लक्ष्यों की खातिर परमेश्वर के आह्वान को अस्वीकार करोगे, तो जो कुछ भी तुम करोगे, वह परमेश्वर द्वारा शापित किया जाएगा, और भी अधिक यह उसके लिए घृणित होगा। शायद तुम कोई प्रधानमंत्री, कोई वैज्ञानिक, कोई पादरी या कोई एल्डर हो, किंतु इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा पद कितना उच्च है, यदि तुम अपनी योग्यता और ज्ञान का उपयोग अपना खुद का उपक्रम चलाने में करते हो, तो तुम हमेशा असफल रहोगे, और हमेशा परमेश्वर के आशीषों से वंचित रहोगे, क्योंकि परमेश्वर ऐसा कुछ भी स्वीकार नहीं करता जो तुम करते हो, वह यह नहीं मानता कि तुम्हारा उपक्रम न्यायसंगत है या यह नहीं मानता कि तुम मानवजाति के भले के लिए कार्य कर रहे हो। वह कहेगा कि जो कुछ भी तुम करते हो, वह परमेश्वर द्वारा मनुष्य की सुरक्षा को दूर ढकेलने की कोशिश में इंसानी ज्ञान और ताकत का उपयोग करना है और यह परमेश्वर के आशीषों को नकारना है। वह कहेगा कि तुम मानवजाति को अंधकार की ओर, मृत्यु की ओर और एक ऐसे अंतहीन अस्तित्व के आरंभ की ओर ले जा रहे हो जिसमें मनुष्य परमेश्वर के बिना है और उसने उसके आशीष खो दिए हैं।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 2 : परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य पर संप्रभु है

647. क्या तुम लोग इसकी जड़ जानना चाहते हो कि फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया? क्या तुम लोग फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे भी ज़्यादा, उन्होंने केवल इस पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, फिर भी जीवन सत्य का अनुसरण नहीं किया। इसलिए वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि उन्हें जीवन के मार्ग का कोई ज्ञान नहीं है, और वे नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है। तुम्हीं लोग बताओ ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर का आशीष कैसे प्राप्त कर सकते हैं? क्या वे मसीहा को देख सकते हैं? उन्होंने यीशु का विरोध किया क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु द्वारा बताए गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे और इससे भी अधिक इसलिए क्योंकि वे मसीहा को नहीं समझते थे। और चूँकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था और कभी मसीहा के साथ नहीं जुड़े थे, उन्होंने मसीहा के बस नाम के साथ चिपके रहने की ग़लती की, जबकि हर मुमकिन ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का आज्ञापालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत था : इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता, तुम मसीह नहीं हो। क्या यह सोच हास्यास्पद और बेतुकी नहीं है? मैं तुम लोगों से आगे पूछता हूँ : क्या तुम लोगों के लिए वो गलतियाँ करना बेहद आसान नहीं जो उस समय के फरीसियों ने की थीं, क्योंकि तुम लोगों के पास यीशु की थोड़ी-भी समझ नहीं है? क्या तुम सत्य के मार्ग का भेद पहचान सकते हो? क्या तुम सचमुच विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने में समर्थ हो? यदि तुम नहीं जानते कि तुम मसीह का विरोध करोगे या नहीं, तो मेरा कहना है कि तुम पहले ही मौत की कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने वाले कार्य करने, यीशु को अस्वीकार करने, उसे बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा-भला कहने में सक्षम हैं। इससे भी अधिक, वे यीशु के लौटने को शैतान द्वारा गुमराह किए जाने की तरह देखने में सक्षम हैं और ज्यादातर लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इस सब से तुम लोगों को डर नहीं लगता? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के खिलाफ निंदा होगी, कलीसियाओं के लिए कहे गए पवित्र आत्मा के वचनों को चीरना होगा और यीशु द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम हठपूर्वक होश में आने से इनकार करते हो तो तुम लोग उस कार्य को कैसे समझ सकते हो जिसे यीशु श्वेत बादल पर देह में लौटने पर करता है? मैं तुम लोगों को यह बताता हूँ : जो लोग सत्य स्वीकार नहीं करते, फिर भी अंधों की तरह श्वेत बादलों पर यीशु के आगमन का इंतजार करते हैं, वे निश्चित रूप से वो लोग हैं जो पवित्र आत्मा की ईश-निंदा करते हैं और ये वो वर्ग है जो निश्चित तौर पर नष्ट कर दिया जाएगा। तुम लोग सिर्फ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो और सिर्फ स्वर्ग के सुखद क्षेत्र का आनंद लेना चाहते हो, तुमने यीशु के कहे वचनों का कभी पालन नहीं किया और जब यीशु देह में लौटता है तो उसके द्वारा व्यक्त किए गए सत्य को तुमने कभी नहीं स्वीकारा। यीशु के एक श्वेत बादल पर लौटने के तथ्य के बदले तुम लोग क्या दोगे? क्या वही ईमानदारी जिससे तुम लोग बार-बार पाप करते हो और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? श्वेत बादल पर लौटने वाले यीशु को तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या यह कार्य के कई वर्षों की वह पूँजी है, जिसके जरिए तुम लोग अपनी बड़ाई करते हो? तुम किस चीज को पेश करोगे, ताकि लौटकर आए यीशु को तुम पर भरोसा हो? क्या वह तुम लोगों की अभिमानी प्रकृति है, जो किसी भी सत्य को समर्पित नहीं होती?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा

648. मैं तुम लोगों को बता दूँ कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से वह श्रेणी होगी, जो नष्ट की जाएगी। जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकारने में अक्षम हैं, वे निश्चित ही नरक के वंशज, महा देवदूत के वंशज हैं, उस श्रेणी में हैं जो हमेशा के लिए नष्ट कर दी जाएगी। बहुत-से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु फिर भी मैं यीशु का अनुसरण करने वाले हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे तो यह धार्मिकता के सूर्य के सार्वजनिक प्रकटन का समय होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा। हालाँकि तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे तो यह वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे, वह समय होगा जब परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा की जा चुकी होगी और जब परमेश्वर अच्छे लोगों को पुरस्कार और बुरे लोगों को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय उस समय से पहले ही समाप्त हो चुका होगा जब मनुष्य चिह्न देखता है, जब सिर्फ सत्य की अभिव्यक्ति होती है। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और चिह्न नहीं खोजते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए जा चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि “ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है” अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो चिह्न प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को स्वीकार नहीं करते जो कड़ा न्याय अभिव्यक्त करता है और जीवन और सच्चा मार्ग प्रदान करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे तो वह उनसे निपटे। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अहंकारी हैं। ऐसे नीच लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं? यीशु की वापसी उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है, जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, पर जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं उनके लिए यह दोषी ठहराए जाने का संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के खिलाफ ईशनिंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करता हो और सत्य के लिए प्यासा होकर इसकी खोज करता हो; सिर्फ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। स्वेच्छाचारी रूप से निष्कर्ष पर मत पहुँचो; और परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और ढीले-ढाले तो और भी मत रहो। तुम लोगों को जानना चाहिए कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उनके पास विनम्र और परमेश्वर का भय मानने वाला दिल होना चाहिए। जिन्होंने सत्य सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक-भौंह सिकोड़ते हैं, वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जो सत्य को सुन चुके हैं और फिर भी लापरवाही से निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या इसे दोषी ठहराते हैं वे अहंकारी लोग हैं। जो भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को शाप देने या निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसके पास विवेक है और जो सत्य स्वीकार करता है। शायद सत्य का मार्ग सुन लेने और जीवन का वचन पढ़ लेने के बाद तुम्हें यह लगता है कि इन वचनों में से केवल दस हजार में एक वचन तुम्हारी समझ और बाइबल के अनुरूप है और फिर तुम्हें इन्हीं वचनों के उस दस हजारवें हिस्से में खोज जारी रखनी चाहिए। मैं तुम्हें सुझाव भी देता हूँ कि विनम्र बनो, अति-आत्मविश्वासी न बनो और बहुत अभिमानी न बनो। तुम्हारे पास परमेश्वर का भय मानने वाला जो थोड़ा-सा दिल है उसके चलते तुम और अधिक रोशनी प्राप्त करोगे। यदि तुम इन वचनों की सावधानी से जाँच करो और इन पर बार-बार मनन करो, तब तुम समझोगे कि वे सत्य हैं या नहीं, वे जीवन हैं या नहीं। शायद, केवल कुछ वाक्य पढ़कर, कुछ लोग इन वचनों की आँखें मूँदकर यह कहते हुए निंदा करेंगे, “यह पवित्र आत्मा की थोड़ी प्रबुद्धता से अधिक कुछ नहीं है” या “यह एक झूठा मसीह है जो लोगों को गुमराह करने आया है।” जो लोग ऐसी बातें कहते हैं वे बहुत अज्ञानी हैं! तुम परमेश्वर के कार्य और बुद्धि को बहुत कम समझते हो और मैं तुम्हें पुनः शुरू से आरंभ करने की सलाह देता हूँ! तुम लोगों को सिर्फ इस वजह से कि अंत के दिनों में झूठे मसीह प्रकट होंगे, परमेश्वर द्वारा अभिव्यक्त वचनों की आँख मूँदकर निंदा नहीं करनी चाहिए, तुम्हें गुमराह होने के डर से ऐसा व्यक्ति नहीं बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करता हो। क्या यह बहुत ही पछतावे की बात नहीं होगी? यदि बार-बार जाँच के बाद अब भी तुम्हें लगता है कि ये वचन सत्य नहीं हैं, मार्ग नहीं हैं और परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हैं, तो फिर अंततः तुम दंडित किए जाओगे और आशीष के बिना होगे। यदि तुम ऐसा सत्य, जो इतने सादे और स्पष्ट ढंग से कहा गया है, स्वीकार नहीं कर सकते, तो क्या तुम परमेश्वर के उद्धार के अयोग्य नहीं हो? क्या तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जिसमें परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आने की यह आशीष ही नहीं है? इस बारे में सोचो! उतावले और अविवेकी न बनो और परमेश्वर में विश्वास के साथ खेल की तरह पेश न आओ। अपनी मंज़िल के लिए, अपनी संभावनाओं के वास्ते, अपने जीवन के लिए सोचो और स्वयं को मूर्ख न बनाओ। क्या तुम इन वचनों को स्वीकार कर सकते हो?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा

649. अंत के दिनों का मसीह दुनिया भर के लोगों को सिखाने के लिए और उन्हें सभी सत्यों का ज्ञान कराने के लिए सत्य का उपयोग करेगा। यह परमेश्वर के न्याय का कार्य है। कई लोग परमेश्वर के दूसरे देहधारण को लेकर असहज महसूस करते हैं, क्योंकि लोगों को यह बात मानने में कठिनाई होती है कि परमेश्वर न्याय का कार्य करने के लिए देह धारण करेगा। फिर भी, मुझे तुम्हें यह अवश्य बताना होगा कि प्रायः परमेश्वर का कार्य मनुष्य की अपेक्षाओं से बहुत आगे तक जाता है, और मनुष्य के मन के लिए इसे स्वीकार करना कठिन होता है। क्योंकि लोग पृथ्वी पर मात्र भुनगों के समान हैं, जबकि परमेश्वर वह सर्वोच्च सत्ता है जो पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है; मनुष्य का मन गंदे पानी से भरे हुए एक गड्ढे के सदृश है, जो केवल भुनगों को ही उत्पन्न करता है, जबकि परमेश्वर के विचारों द्वारा निर्देशित कार्य का प्रत्येक चरण परमेश्वर की बुद्धि का परिणाम है। लोग हमेशा परमेश्वर के साथ संघर्ष करने की कोशिश करते हैं, जिसके बारे में मैं कहता हूँ कि यह स्वतः स्पष्ट है कि अंत में कौन हारेगा। मैं तुम सबको प्रोत्साहित करता हूँ कि अपने आपको स्वर्ण से अधिक मूल्यवान मत समझो। जब दूसरे लोग परमेश्वर का न्याय स्वीकार कर सकते हैं, तो तुम क्यों नहीं? तुम दूसरों से कितने ऊँचे हो? अगर दूसरे लोग सत्य के आगे सिर झुका सकते हैं, तो तुम भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते? परमेश्वर का कार्य अटल है। वह सिर्फ तुम्हारे द्वारा किए गए “योगदान” के कारण न्याय के कार्य को फिर से नहीं दोहराएगा, और तुम इतने अच्छे अवसर के हाथ से निकल जाने पर पछतावे से भर जाओगे। अगर तुम्हें मेरे वचनों पर विश्वास नहीं है, तो फिर आकाश में स्थित उस महान श्वेत सिंहासन द्वारा तुम्हारा “न्याय” किए जाने की प्रतीक्षा करो! तुम्हें अवश्य पता होना चाहिए कि सभी इजराइलियों ने यीशु को खारिज और अस्वीकार किया था, और फिर भी यीशु द्वारा मानवजाति के छुटकारे का तथ्य पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के छोरों तक फैल गया। क्या यह परमेश्वर द्वारा बहुत पहले पूरा किया गया तथ्य नहीं है? अगर तुम अभी भी यीशु द्वारा स्वयं को स्वर्ग में ले जाए जाने का इंतज़ार कर रहे हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम एक हठी निर्जीव काठ का बेकार टुकड़ा हो। यीशु तुम जैसे किसी भी झूठे विश्वासी को स्वीकार नहीं करेगा, जो सत्य के प्रति निष्ठाहीन है और केवल आशीष चाहता है। इसके विपरीत, वह तुम्हें दसियों हज़ार वर्षों तक जलने देने के लिए आग की झील में फेंकने में कोई दया नहीं दिखाएगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मसीह सत्य के द्वारा न्याय का कार्य करता है

650. परमेश्वर ने इस संसार की सृष्टि की, उसने इस मानवजाति को बनाया, और इतना ही नहीं, वह प्राचीन यूनानी संस्कृति और मानव-सभ्यता का वास्तुकार भी था। केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति को आराम देता है और केवल परमेश्वर ही रात-दिन इस मानवजाति की देखभाल करता है। मानव का विकास और प्रगति परमेश्वर की संप्रभुता से अविभाज्य हैं, और मानवजाति का इतिहास और भविष्य परमेश्वर के हाथों द्वारा की गई व्यवस्थाओं से बच नहीं सकता। यदि तुम एक सच्चे ईसाई हो, तो तुम निश्चित ही इस बात पर विश्वास करोगे कि किसी भी देश या राष्ट्र का उत्थान या पतन परमेश्वर की व्यवस्थाओं के अनुसार होता है। केवल परमेश्वर ही किसी देश या राष्ट्र के भाग्य को जानता है और केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति की दिशा नियंत्रित करता है। यदि मानवजाति अच्छा भाग्य पाना चाहती है, यदि कोई देश अच्छा भाग्य पाना चाहता है, तो सभी को परमेश्वर के सामने झुकना और उसकी आराधना करनी होगी और परमेश्वर के सामने पश्चात्ताप करने और उसके सामने पाप कबूलने के लिए आना होगा, अन्यथा मनुष्य का भाग्य और गंतव्य एक अपरिहार्य विनाश बन जाएँगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 2 : परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य पर संप्रभु है

651. अपनी नियति की खातिर तुम लोगों को परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करनी चाहिए। कहने का अर्थ है, चूँकि तुम लोग यह स्वीकार करते हो कि तुम परमेश्वर के घर के सदस्य हो, इसलिए तुम्हें हर तरह से परमेश्वर के मन को चिंता मुक्त करना चाहिए और सभी चीजों में उसे संतुष्ट करना चाहिए—यानी तुम लोगों को सिद्धांत के साथ और सत्य के अनुसार कार्य करना चाहिए। यदि तुम इसे हासिल नहीं कर सकते हो, तो तुम परमेश्वर द्वारा तिरस्कृत किए जाओगे और हर व्यक्ति द्वारा घृणापूर्वक ठुकरा दिए जाओगे। एक बार जब तुम ऐसी दुर्दशा में पड़ गए, तो फिर तुम परमेश्वर के घर के सदस्यों में नहीं गिने जा सकते, जो परमेश्वर द्वारा स्वीकृति न दिए जाने का सटीक अर्थ है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तीन चेतावनियाँ

652. मेरी माँगें सरल हो सकती हैं, लेकिन मैं जो तुम्हें बता रहा हूँ, वह उतना सरल नहीं है जितना एक जमा एक बराबर दो। अगर तुम लोग बस इस बारे में लापरवाही से बात करोगे, या खोखले, सुनने में ऊँचे लगने वाले वक्तव्यों के बारे में बोलते चले जाओगे तो फिर भविष्य के लिए तुम्हारी योजनाएँ और ख़्वाहिशें धरी की धरी रह जाएँगी। मुझे तुममें से ऐसे लोगों के साथ कोई सहानुभूति नहीं होगी, जो बरसों कष्ट झेलते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन उनके पास कोई नतीजा नहीं होता। इसके विपरीत, जिन्होंने मेरी माँगें पूरी नहीं की हैं उनके लिए मेरे पास पुरस्कार नहीं केवल दंड ही है, उनसे सहानुभूति तो बिल्कुल नहीं है। तुम लोग सोचते होगे कि बरसों अनुयायी बने रहकर तुमने बहुत मेहनत कर ली है, और बात चाहे जो भी हो, तुम श्रमिक हो सकते हो और तुम्हें परमेश्वर के घर में गारंटीयुक्त जीवनयापन का स्रोत मिल जाएगा। मैं कहूँगा कि तुममें से अधिकतर ऐसा ही सोचते हैं, क्योंकि तुम लोगों ने हमेशा चीज़ों का फ़ायदा उठाने के सिद्धांत का पालन किया है, न कि अपना फायदा उठाने देने का। इस प्रकार, मैं तुम लोगों को अब पूरी गंभीरता से बता रहा हूँ : मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि यदि तुमने बहुत कड़ी मेहनत की है और प्रमुख योगदान दिए हैं, कि तुम बहुत अधिक वरिष्ठ हो, कि तुम मेरा निकटता से अनुसरण करते हो, कि तुम बहुत प्रसिद्ध हो या कि तुम्हारा रवैया सुधर गया है; अगर तुमने मेरी माँगों के अनुसार कार्य नहीं किया है, तो तुम कभी भी मेरी स्वीकृति प्राप्त नहीं कर पाओगे। तुम लोगों के लिए बेहतर होगा कि तुम जल्द से जल्द अपने उन सभी विचारों और योजनाओं को त्याग दो और मेरी अपेक्षाओं को गंभीरता से लो। अन्यथा मैं सभी को राख में बदल दूँगा, इस प्रकार अपने काम को समाप्त कर दूँगा; ज़्यादा से ज़्यादा, मेरे वर्षों के काम और कष्ट व्यर्थ हो जाएँगे—क्योंकि मैं अपने दुश्मनों और उन लोगों को, जिनसे बुराई की दुर्गंध आती है और जिनमें वही पुरानी शैतानी छवि है, अपने राज्य में नहीं ला सकता या उन्हें अगले युग में नहीं ले जा सकता।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपराध मनुष्य को नरक में ले जाएँगे

653. अब वह समय है जब मेरा आत्मा महान कार्य करता है और वह समय है जब मैं अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच अपना कार्य शुरू करता हूँ। इससे भी बढ़कर यह वह समय है जब मैं सभी सृजित प्राणियों को वर्गीकृत करता हूँ, हर एक को उसकी संबंधित श्रेणी में रखता हूँ ताकि मेरा कार्य और अधिक तेजी से आगे बढ़ सके और नतीजे हासिल करने में अधिक सक्षम हो। और इसलिए मैं तुमसे अभी भी यही माँग करता हूँ कि तुम अपने पूरे अस्तित्व को मेरे संपूर्ण कार्य के लिए अर्पित कर दो; और इससे भी अधिक तुम मेरे द्वारा तुम पर किए गए संपूर्ण कार्य का स्पष्ट रूप से भेद पहचान लो और इसे सटीकता से देख लो और अपनी पूरी ऊर्जा खपा दो ताकि मेरा कार्य और बड़े नतीजे हासिल कर सके। यही चीज तुम्हें समझ लेनी चाहिए। एक-दूसरे से होड़ लेने, वैकल्पिक योजना तलाशने या अपनी देह के लिए आराम तलाशने से बाज आओ ताकि मेरे कार्य में विलंब करने और अपने अद्भुत भविष्य में बाधा डालने से बच सको। ऐसा करने से तुम्हें सुरक्षा मिलनी तो दूर रही, तुम खुद पर केवल बरबादी ले आओगे। क्या यह तुम्हारी मूर्खता नहीं होगी? जिसमें तुम आज लिप्त हो वही चीज तुम्हारे भविष्य को बरबाद कर रही है, जबकि आज तुम जो पीड़ा सहते हो वही चीज तुम्हारी सुरक्षा कर रही है। तुम्हें इन चीजों का स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए ताकि तुम उन प्रलोभनों का शिकार होने से बच सको जिनसे बाहर निकलना तुम्हें कठिन लगेगा और ताकि तुम घने कोहरे में गलती से घुसने और फिर कभी सूर्य को न खोज पाने से बच सको। जब घना कोहरा छँटेगा, तुम अपने आपको महान दिन के न्याय के मध्य पाओगे। उस समय तक मेरा दिन मानवजाति के करीब आ चुका होगा। तुम मेरे न्याय से कैसे बच निकलोगे? तुम सूर्य की झुलसा देने वाली गर्मी को कैसे सह पाओगे? जब मैं मनुष्य को अपनी विपुलता प्रदान करता हूँ, तो वह उसे छाती से नहीं लगाता, बल्कि उसे ऐसी जगह पर फेंक देता है, जहाँ उस पर कोई ध्यान नहीं देता। जब मेरा दिन मनुष्य पर उतरेगा, तो वह मेरी विपुलता को खोज पाने या सत्य के उन कड़वे वचनों का पता लगा पाने में समर्थ नहीं होगा, जो मैंने उसे बहुत पहले बोले थे। वह बिलखेगा और रोएगा, क्योंकि उसने प्रकाश की चमक खो दी है और अंधकार में गिर गया है। आज तुम लोग जो देखते हो वह मात्र मेरे मुँह की तीखी तलवार है; तुमने मेरे हाथ में छड़ी नहीं देखी है और न ही वह ज्वाला देखी है जिससे मैं मनुष्य को जलाता हूँ। इसी कारण तुम लोग मेरी उपस्थिति में अभी भी अभिमानी और असंयमी हो और इसी कारण तुम लोग अभी भी मेरे घर में मुझसे लड़ते हो, उस बात पर अपनी इंसानी जबान से विवाद करते हो जो मैंने अपने मुँह से कही है। मनुष्य मुझसे नहीं डरता और आज तक उसने मेरे साथ शत्रुता कायम रखी है, अब भी बिल्कुल भय महसूस नहीं करता है। तुम लोगों के मुँह में अधर्मियों की जिह्वा और दाँत हैं। तुम लोगों के शब्द और कर्म उस साँप के समान हैं जिसने हव्वा को पाप करने के लिए बहकाया था। तुम एक-दूसरे से आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत की माँग करते हो और मेरी उपस्थिति में तुम अपने लिए पद, प्रतिष्ठा और लाभ झपटने के लिए संघर्ष करते हो, फिर भी तुम लोग नहीं जानते कि मैं तुम्हारे शब्दों और कर्मों को गुप्त रूप से देख रहा हूँ। इससे पहले कि तुम लोग मेरी निगाह में भी आओ, मैंने तुम लोगों के हृदयों की गहराइयों की थाह ले ली है। मनुष्य हमेशा मेरे हाथ की पकड़ से बच निकलना और मेरी आँखों की जाँच-पड़ताल से बचना चाहता है, किंतु मैंने उसके शब्दों या कर्मों को कभी नहीं टाला है। इसके बजाय, मैं उद्देश्यपूर्वक उन शब्दों और कर्मों को अपनी निगाह में आने देता हूँ, ताकि मैं मनुष्य की अधार्मिकता को ताड़ना दे सकूँ और उसके विद्रोहीपन का न्याय कर सकूँ। इस प्रकार, मनुष्य के गुप्त शब्द और कर्म हमेशा मेरे न्याय के आसन के सामने रहते हैं और मेरा न्याय मनुष्य को छोड़कर कभी नहीं गया है, क्योंकि उसका विद्रोहीपन बहुत ही ज्यादा है। मेरा कार्य मनुष्य के उन सभी शब्दों और कर्मों को जलाना और शुद्ध करना है, जो मेरे आत्मा की उपस्थिति में कहे और किए गए थे। इस तरह से,[क] जब मैं पृथ्वी से चला जाऊँगा, तब भी लोग मेरे प्रति वफादारी बनाए रखेंगे और वे तब भी मेरे कार्य के प्रति वैसे ही पेश आने में सक्षम होंगे जैसे मेरे पवित्र सेवक मेरी सेवा करने में पेश आते हैं और वे पृथ्वी पर मेरे कार्य को उस दिन तक जारी रहने देंगे जब तक यह पूरा न हो जाए।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्य को बचाने का कार्य भी है

फुटनोट :

क. मूल पाठ में, “इस तरह से” यह वाक्यांश नहीं है।


654. पृथ्वी पर सब प्रकार की बुरी आत्माएँ हमेशा किसी विश्राम-स्थल की तलाश में रहती हैं; वे निरंतर उन लोगों के शवों की खोज करती रहती हैं जिन्हें वे निगल सकें। मेरे लोगो! तुम्हें मेरी देखभाल और सुरक्षा के भीतर रहना चाहिए। कभी उच्छृंखल न बनो! कभी दुस्साहसपूर्ण व्यवहार न करो! तुम्हें मेरे घर में अपनी निष्ठा अर्पित करनी चाहिए और केवल निष्ठा से ही तुम दानवों के षड्यंत्रों के विरुद्ध पलटवार कर सकते हो। किन्हीं भी परिस्थितियों में तुम्हें वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जैसा तुमने अतीत में किया था, मेरे सामने कुछ करना और मेरी पीठ पीछे कुछ और करना; यदि तुम इस तरह करते हो, तो तुम पहले ही छुटकारे से परे हो। क्या मैं इस तरह के वचन बहुत बार नहीं कह चुका हूँ? बिलकुल इसीलिए क्योंकि मनुष्य की पुरानी प्रकृति सुधार से परे है, मुझे लोगों को बार-बार स्मरण दिलाना पड़ा है। ऊब मत जाना! जो मैं कहता हूँ, वह पूरी तरह से तुम लोगों की नियति की खातिर है! गंदा और मैला-कुचैला स्थान ही वह स्थान होता है जो शैतान को चाहिए होता है; तुम जितने अधिक दयनीय ढंग से सुधार के अयोग्य होते हो, और जितने अधिक उच्छृंखल होते हो और संयम के आगे समर्पण करने से इनकार करते हो, सभी प्रकार की अशुद्ध आत्माएँ तुम्हारे भीतर घुसपैठ करने के किसी भी अवसर का उतना ही अधिक लाभ उठाएँगी। यदि तुम इस बिंदु तक पहुँच चुके हो तो तुम लोगों की निष्ठा कोरी बकवास के अलावा और कुछ नहीं होगी, जिसमें किसी भी प्रकार की कोई वास्तविकता नहीं होगी और तुम लोगों का संकल्प अशुद्ध आत्माओं द्वारा निगल लिया जाएगा और उसे विद्रोह तथा मेरे कार्य में गड़बड़ करने के शैतान के षड्यंत्रों में बदल दिया जाएगा, जिससे तुम किसी भी समय और किसी भी स्थान पर मेरे द्वारा मार गिराए जाओगे। कोई भी इस स्थिति की गंभीरता को नहीं समझता है; वे सब कुछ सुनकर भी इसके लिए बहरे बने रहते हैं और ज़रा भी चौकन्ने नहीं रहते हैं। मैं वह याद नहीं रखता, जो अतीत में किया गया था; क्या तुम सच में अब भी एक बार और “याद न रखकर” अपने प्रति मेरे उदार होने की प्रतीक्षा कर रहे हो?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 10

655. बहुत-से लोग ईमानदारी से बोलने और कार्य करने के बजाय नरक में डाले जाना पसंद करेंगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि जो बेईमान हैं उनसे निपटने के लिए मेरे पास अन्य तरीके भी तैयार हैं। बेशक मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि तुम लोगों के लिए ईमानदार लोग होना कितना मुश्किल है। चूँकि तुम सभी बहुत “चतुर” हो, अपनी घटिया मानसिकता के आधार पर, उच्च नैतिक चरित्र वाले लोगों के हृदय का मूल्यांकन करने में बहुत अच्छे हो, इससे मेरा कार्य और आसान हो जाता है। और चूँकि तुममें से हरेक अपने भेदों को अपने सीने में भींचकर रखता है, तो ठीक है, मैं तुम लोगों को एक-एक करके आपदा में डाल दूँगा जिससे कि अग्नि तुम्हें “सबक सिखाए,” ताकि उसके बाद तुम मेरे वचनों पर अडिग विश्वास रखने लगो। अंततः, मैं तुम लोगों के मुँह से ये शब्द निकलवा लूँगा—“परमेश्वर एक विश्वासयोग्य परमेश्वर है,” तब तुम लोग अपनी छाती पीटोगे और विलाप करोगे, “इंसान का हृदय कितना कपटी है!” उस समय तुम्हारी मनोस्थिति क्या होगी? निश्चित रूप से तुम घमंड में उतना नहीं बहोगे जितना तुम अभी बहते हो! और तुम लोग अब की तुलना में इतने “गहन और गूढ़” तो और भी कम होगे। कुछ लोग परमेश्वर की उपस्थिति में नियम-निष्ठ और उचित शैली में व्यवहार करते हैं, वे विशेष रूप से “शिष्ट व्यवहार” करते हैं, फिर भी आत्मा की उपस्थिति में वे अपने दाँत और पंजे दिखाने लगते हैं। क्या तुम लोग ऐसे इंसानों को ईमानदार लोगों की श्रेणी में गिनोगे? यदि तुम पाखंडी और ऐसे व्यक्ति हो जो “व्यक्तिगत संबंधों” में कुशल है तो मैं कहता हूँ कि तुम निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति हो जो परमेश्वर से खिलवाड़ करने का प्रयास करता है। यदि तुम्हारी बातें बहानों और बेकार तर्कों से भरी हैं, तो मैं कहता हूँ कि तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य का अभ्यास करने में अनिच्छुक है। यदि तुम्हारे पास ऐसे बहुत-से निजी मामले हैं जिनके बारे में बात करना मुश्किल है, और यदि तुम प्रकाश के मार्ग की खोज करने के लिए दूसरों के सामने अपने रहस्य यानी अपनी कठिनाइयाँ उजागर करना नहीं चाहते हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम्हें उद्धार प्राप्त करने में बड़ी मुश्किल आएगी और तुम्हें अंधकार से बाहर निकलने में कठिनाई होगी। ... अंत में किसी व्यक्ति का भाग्य कैसा होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या उसके अंदर एक ईमानदार और रक्तिम हृदय है और क्या उसकी आत्मा शुद्ध है। यदि तुम ऐसे इंसान हो जो बहुत बेईमान है, जिसका हृदय अत्यन्त दुर्भावना से भरा है, जिसकी आत्मा अशुद्ध है, तो तुम अंत में निश्चित रूप से ऐसी जगह जाओगे जहाँ इंसान को दंड दिया जाता है, जैसा कि तुम्हारे भाग्य के अभिलेख में लिखा है। यदि तुम बहुत ईमानदार होने का दावा करते हो, मगर तुम कभी सत्य के अनुसार कार्य नहीं कर पाए हो या सत्य का एक शब्द भी नहीं बोल पाए हो, तो क्या तुम तब भी परमेश्वर से पुरस्कृत किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम तब भी परमेश्वर से आशा करते हो कि वह तुम्हें अपनी आँख का तारा समझे? क्या ऐसी सोच हास्यास्पद नहीं है? यदि तुम हर चीज में परमेश्वर को धोखा देते हो, तो परमेश्वर का घर तुम जैसे इंसान को, जिसके हाथ अशुद्ध हैं, जगह कैसे दे सकता है?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तीन चेतावनियाँ

656. अब तुम लोगों का प्रयास प्रभावी रहा है या नहीं, यह इस बात से मापा जाता है कि इस समय तुम लोगों के अंदर क्या है। तुम लोगों के परिणाम का निर्धारण करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है; कहने का अर्थ है कि तुम लोगों ने जो भी त्याग किए हैं और जो कुछ काम किए हैं, उनके आधार पर तुम लोगों के परिणाम का खुलासा किया जाता है। तुम लोगों के अनुसरण से, तुम लोगों की आस्था से और तुम लोगों ने जो कुछ किया है उनसे, तुम लोगों के परिणाम का खुलासा किया जा सकता है। तुम लोगों में, बहुत-से ऐसे हैं जो पहले ही उद्धार से परे हो चुके हैं, क्योंकि आज का दिन लोगों के परिणाम को उजागर करने का दिन है, और मैं अपने काम में भ्रमित नहीं रहूँगा; मैं अगले युग में उन लोगों को नहीं ले जाऊँगा जो पूरी तरह से उद्धार से परे हैं। एक समय आएगा, जब मेरा कार्य पूरा हो जाएगा। मैं उन दुर्गंधयुक्त, बेजान लाशों पर कार्य नहीं करूँगा जिन्हें बिल्कुल भी बचाया नहीं जा सकता; अब इंसान के उद्धार के अंतिम दिन हैं, और मैं निरर्थक कार्य नहीं करूँगा। स्वर्ग और धरती के बारे में शिकायत मत करो—दुनिया का अंत आ रहा है, यह अपरिहार्य है। चीजें इस मुकाम तक आ गयी हैं, और उन्हें रोकने के लिए तुम इंसान के तौर पर कुछ नहीं कर सकते; तुम अपनी इच्छानुसार चीजों को बदल नहीं सकते। कल, तुमने सत्य का अनुसरण करने के लिए कीमत अदा नहीं की थी और तुम समर्पित नहीं थे; आज, समय आ चुका है, तुम उद्धार से परे हो; और कल तुम्हें निकाल दिया जाएगा, और तुम्हारे उद्धार की कोई गुंजाइश नहीं होगी। भले ही मैं दयालु और कोमल हृदय वाला हूँ और मैं तुम्हें बचाने के लिए सब कुछ कर रहा हूँ, अगर तुम अपने स्तर पर प्रयास नहीं करते या अपने लिए विचार नहीं करते, तो इसका मुझसे क्या लेना-देना? जो लोग केवल अपने देह-सुख की सोचते हैं और सुख-साधनों का आनंद लेते हैं; जो विश्वास रखते हुए प्रतीत होते हैं लेकिन सचमुच विश्वास नहीं रखते; जो दानवी चिकित्सा प्रथाओं और जादू-टोने में लिप्त रहते हैं; जो व्यभिचारी और पतित हैं; जो यहोवा के चढ़ावे और उसकी संपत्ति को चुराते हैं; जिन्हें रिश्वत पसंद है; जो व्यर्थ में स्वर्गारोहित होने के सपने देखते हैं; जो अहंकारी और दंभी हैं, जो केवल व्यक्तिगत प्रसिद्धि और लाभ के लिए होड़ करते हैं; जो अवमाननापूर्ण शब्दों को फैलाते हैं; जो स्वयं परमेश्वर की निंदा करते हैं; जो स्वयं परमेश्वर की आलोचना और बुराई करने के अलावा कुछ नहीं करते; जो अपना अलग गुट बनाते हैं और परमेश्वर के खिलाफ विद्रोह करते हैं; जो परमेश्वर का उत्कर्ष करने से कहीं अधिक खुद का उत्कर्ष करते हैं; वे छिछोरे नौजवान, अधेड़ उम्र के लोग और बुज़ुर्ग स्त्री-पुरुष जो व्यभिचार में फँसे हुए हैं; जो स्त्री-पुरुष व्यक्तिगत प्रसिद्धि और लाभ का आनंद लेते हैं और लोगों के बीच निजी रुतबा तलाशते हैं; जिन लोगों को कोई मलाल नहीं है और जो पाप में फँसे हुए हैं—क्या वे तमाम लोग उद्धार से परे नहीं हैं? व्यभिचार, पाप, दानवी चिकित्सा प्रथाएँ, जादू-टोना, ईशनिंदा वाले शब्द और अवमाननापूर्ण शब्द, सब तुम लोगों में निरंकुशता से फैल रहे हैं; सत्य और जीवन के वचन तुम लोगों के बीच कुचले जाते हैं और तुम लोगों के मध्य पवित्र शब्द मलिन किए जाते हैं। तुम मलिनता और विद्रोहशीलता से भरे हुए अन्य-जाति राष्ट्र के लोगों! तुम लोगों का परिणाम क्या होगा? जिन्हें देह-सुख से प्यार है, जो देह का जादू-टोना करते हैं, और जो व्यभिचार के पाप में फँसे हुए हैं, वे जीते रहने का दुस्साहस कैसे कर सकते हैं! क्या तुम नहीं जानते कि तुम जैसे लोग कीड़े-मकौड़े हैं जो उद्धार से परे हैं? किसी भी चीज की माँग करने का हक तुम्हें किसने दिया? आज तक, उन लोगों में जरा-सा भी परिवर्तन नहीं आया है जिन्हें सत्य से प्रेम नहीं है, जो केवल देह से प्यार करते हैं—ऐसे लोगों को कैसे बचाया जा सकता है? जो जीवन के मार्ग से प्रेम नहीं करते, जो परमेश्वर का उत्कर्ष नहीं करते और उसकी गवाही नहीं देते, जो अपने रुतबे के लिए षडयंत्र रचते हैं, जो स्वयं का उत्कर्ष करते हैं—क्या वे आज भी वैसे ही नहीं हैं? उन्हें बचाने का क्या मूल्य है? तुम्हें बचाया जा सकता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर नहीं है कि तुम कितने वरिष्ठ हो या तुम कितने साल से काम कर रहे हो, और इस बात पर तो बिल्कुल भी निर्भर नहीं है कि तुमने कितनी योग्यताएँ हासिल कर ली हैं। बल्कि इस बात पर निर्भर है कि क्या तुम्हारा अनुसरण फलीभूत हुआ है। तुम्हें यह जानना चाहिए कि जिन्हें बचाया जाता है वे ऐसे “वृक्ष” होते हैं जिन पर फल लगते हैं, ऐसे वृक्ष नहीं जो हरी-भरी पत्तियों और फूलों से तो लदे होते हैं, लेकिन जिन पर फल नहीं आते। अगर तुम बरसों तक भी गलियों की खाक छानते रहे हो, तो उससे क्या फर्क पड़ता है? तुम्हारी गवाही कहाँ है? तुम्हारे पास खुद से प्रेम करने वाले और अपनी वासनायुक्त कामनाओं से भरे दिल की तुलना में परमेश्वर का भय मानने वाला दिल बहुत कम है—क्या इस तरह का व्यक्ति पतित नहीं है? वे उद्धार के लिए नमूना और मॉडल कैसे हो सकते हैं? तुम्हारी प्रकृति सुधर नहीं सकती, तुम बहुत अधिक विद्रोहशीलता के अधीन हो, तुम छुटकारा पाने से परे हो! क्या ऐसे लोगों को हटा नहीं दिया जाएगा? क्या मेरे कार्य के समाप्त हो जाने का समय तुम्हारा अंत आने का समय नहीं है? मैंने तुम लोगों के बीच बहुत सारा कार्य किया है और बहुत सारे वचन बोले हैं—इनमें से कितने सच में तुम लोगों के कानों में गए हैं? इनमें से कितनों के प्रति तुम लोगों ने कभी समर्पण किया है? जब मेरा कार्य समाप्त होगा, तो यह वो समय होगा जब तुम मेरा विरोध करना बंद कर दोगे, तुम मेरे खिलाफ खड़ा होना बंद कर दोगे। जब मैं काम करता हूँ, तो तुम लोग लगातार मेरे खिलाफ काम करते रहते हो; तुम लोग कभी मेरे वचनों का अनुपालन नहीं करते। मैं अपना कार्य करता हूँ, और तुम अपना “काम” करते हो, और अपना छोटा-सा राज्य बनाते हो। तुम लोग लोमड़ियों और कुत्तों के झुंड हो, तुम लोग मेरे खिलाफ काम करने के अलावा कुछ नहीं करते हो! तुम लोग लगातार उन्हें अपने आगोश में लाने का प्रयास कर रहे हो जो तुम लोगों के प्रति अपना अविभक्त प्रेम समर्पित करते हैं—तुम लोगों के भय मानने वाले दिल कहाँ हैं? तुम्हारा हर काम कपट से भरा होता है! तुम्हारे अंदर न समर्पण है, न भय है, तुम्हारा हर काम कपटपूर्ण और ईश-निंदा करने वाला होता है! क्या ऐसे लोगों को बचाया जा सकता है? जो पुरुष यौन-संबंधों में अनैतिक और लंपट होते हैं, वे हमेशा कामोत्तेजक वेश्याओं को आकर्षित करके उनके साथ मौज-मस्ती करना चाहते हैं। मैं ऐसे काम-वासना में लिप्त अनैतिक राक्षसों को कतई नहीं बचाऊँगा। मैं तुम घिनौने राक्षसों से पूरी तरह घृणा करता हूँ, तुम्हारा व्यभिचार और तुम्हारी कामुक अदाएँ तुम लोगों को नरक में धकेल देंगे। तुम लोगों को अपने बारे में क्या कहना है? घिनौने राक्षसो और दुष्ट आत्माओ, तुम लोग बेहद घृणित हो! तुम बेहद घृणित हो! ऐसे कूड़े-करकट को कैसे बचाया जा सकता है? क्या ऐसे लोगों को जो पाप में फँसे हुए हैं, उन्हें अब भी बचाया जा सकता है? आज, तुम लोगों के दिल इस सत्य, इस मार्ग और इस जीवन की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। बल्कि, वे पाप, और पैसे, रुतबे, प्रसिद्धि, लाभ, देह के सुखों, और पुरुषों के सौंदर्य और महिलाओं की कामुक अदाओं की ओर आकर्षित होते हैं। यह तुम लोगों को मेरे राज्य में प्रवेश करने के योग्य कैसे बनाता है? तुम लोगों की छवियाँ परमेश्वर की छवि से भी बड़ी हैं, तुम लोगों का रुतबा परमेश्वर के रुतबे से भी ऊँचा है, लोगों के बीच तुम लोगों की प्रतिष्ठा की तो बात ही छोड़ दो—तुम लोग वास्तव में ऐसी मूर्तियाँ बन गए हो जिनकी लोग आराधना करते हैं। क्या तुममें से हर एक प्रधान दूत नहीं बन गया है? जब लोगों के परिणामों का खुलासा किया जाता है, जो वह समय भी है जब उद्धार का कार्य समाप्ति के करीब होने लगेगा, तो तुम लोगों में से बहुत-से ऐसी लाश होंगे जो उद्धार से परे होंगे और जिन्हें हटा दिया जाना होगा। उद्धार-कार्य के दौरान, मैं सभी लोगों के प्रति दयालु और नेक होता हूँ। जब कार्य समाप्त होता है, तो अलग-अलग किस्म के लोगों का परिणाम प्रकट किया जाएगा, और उस समय, मैं दयालु और नेक नहीं रहूँगा, क्योंकि लोगों के परिणामों का खुलासा हो चुका होगा, और हरेक अपनी किस्म के अनुसार छाँटा गया होगा, फिर और अधिक उद्धार-कार्य करने का कोई मतलब नहीं होगा, क्योंकि उद्धार का युग गुजर चुका होगा, और गुजर जाने के बाद वह वापस नहीं आएगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अभ्यास (7)

657. मैंने तुम लोगों को कई चेतावनियाँ दी हैं और तुम लोगों को जीतने के इरादे से बहुत-से सत्य प्रदान किए हैं। अब तुम सभी लोग पहले की तुलना में भीतर से बहुत अधिक परिपूर्ण महसूस करते हो, स्व-आचरण के कई सिद्धांतों को समझ चुके हो और उतनी सारी सामान्य समझ हासिल कर चुके हो जो विश्वसनीय लोगों में होनी चाहिए। यह सब वह फसल है जो तुम लोगों ने कई वर्षों में प्राप्त की है। मैं तुम लोगों की उपलब्धियों से इनकार नहीं करता, लेकिन मुझे काफी स्पष्ट रूप से कहना होगा कि मैं उन अनेक विद्रोहों और विश्वासघातों से भी इनकार नहीं करता जो तुम लोगों ने इन बहुत-से वर्षों में मेरे खिलाफ किए हैं, क्योंकि तुम लोगों में एक भी व्यक्ति पवित्र नहीं है—तुम लोग, बिना किसी अपवाद के, ऐसे लोग हो जिन्हें शैतान द्वारा भ्रष्ट किया गया है, तुम लोग मसीह के दुश्मन हो। आज तक, तुम लोगों के अपराध और विद्रोह इतने अधिक हैं कि गिने नहीं जा सकते, इसलिए इसे शायद ही अजीब माना जा सकता है कि मैं हमेशा तुम लोगों को बार-बार याद कराता रहता हूँ। मैं तुम लोगों के साथ इस तरह से जुड़ना नहीं चाहता—लेकिन तुम्हारे भविष्य के लिए, तुम्हारी मंजिलों के लिए, मैं यहाँ और अभी तुम्हें एक बार फिर याद दिलाऊँगा। मुझे उम्मीद है कि तुम लोग समझ दिखाओगे, तुम लोग मेरे द्वारा कहे गए हर एक वचन पर विश्वास करोगे और मेरे वचनों के पीछे के गहरे इरादों को समझोगे। मेरे कहे पर संदेह न करो, मेरे वचनों को लापरवाही से लेकर फिर उन्हें दरकिनार तो बिल्कुल ना करो; यह मुझे असहनीय मालूम देता है। मेरे वचनों की आलोचना मत करो, उन्हें हल्के में तो और भी मत लो, यह न कहो कि मैं हमेशा तुम लोगों की परीक्षा लेता रहता हूँ, यह तो बिल्कुल ना कहो कि मैंने तुमसे जो कुछ कहा है, वह सही नहीं है—मुझे ये चीज़ें असहनीय मालूम देती हैं। चूँकि तुम लोग हमेशा मेरे और मेरी कही बातों के बारे में संदेह से भरे रहते हो, हमेशा मुझे नज़रअंदाज़ करते हो और मेरी कही गई बातों की उपेक्षा करते हो, इसलिए मैं तुम सब लोगों से पूरी गंभीरता से कहता हूँ : मेरी कही बातों को फलसफे से मत जोड़ो; मेरे वचनों को एक धोखेबाज़ के झूठ से मत जोड़ो। तुम्हें मेरे वचनों के प्रति तिरस्कार के साथ लापरवाही तो बिल्कुल भी नहीं दिखानी चाहिए। शायद भविष्य में कोई भी तुम लोगों को वह नहीं बता पाएगा जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ या तुम लोगों से इतनी दयालुता से बात नहीं कर पाएगा या फिर इतने धैर्य के साथ कदम-दर-कदम तुम लोगों का मार्गदर्शन करना तो और भी संभव नहीं होगा। तुम लोग आने वाले उन दिनों को अच्छे समय को याद करते हुए बिताओगे या जोर-जोर से रोते हुए या दर्द में कराहते हुए बिताओगे या फिर तुम लोग सत्य या जीवन की किसी भी आपूर्ति के बिना अंधेरी रातों में जी रहे होगे या बस इंतजार कर रहे होगे, लेकिन आशा की एक भी किरण के बिना या इतने कड़वे अफसोस में रह रहे होगे कि तुम लोग सारा विवेक खो दोगे...। तुम लोगों में से कोई भी इन संभावनाओं से बच नहीं सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम लोगों में से कोई भी उस स्थान पर नहीं है जहाँ से तुम वास्तव में परमेश्वर की आराधना करते हो, बल्कि तुम व्यभिचार और बुराई की दुनिया में घुलमिल जाते हो, अपने विश्वास में, अपनी आत्माओं, प्राणों और शरीरों में, इतनी सारी चीजें मिलाते हो जिनका जीवन और सत्य से कोई लेना-देना नहीं है और जो वास्तव में उनके विपरीत हैं। इसलिए तुम लोगों के लिए मेरी आशा है कि तुम प्रकाश का मार्ग प्राप्त कर सको। मेरी एकमात्र आशा है कि तुम लोग खुद को संजो सको और खुद को महत्व दे सको, तुम अपने व्यवहार और अपराधों को उदासीनता से देखते हुए अपनी मंजिल पर इतना अधिक जोर न दो।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपराध मनुष्य को नरक में ले जाएँगे

658. तुम जितने अधिक अपराध करोगे, उतने ही कम अवसर तुम्हें अच्छी मंज़िल पाने के लिए मिलेंगे। इसके विपरीत, तुम जितने कम अपराध करोगे, परमेश्वर की स्वीकृति पाने के तुम्हारे अवसर उतने ही बेहतर हो जाएँगे। यदि तुम्हारे अपराध इतने बढ़ जाएँ कि मैं भी तुम्हें क्षमा न कर सकूँ तो तुम क्षमा किए जाने के अपने अवसर पूरी तरह से गँवा दोगे। इस तरह, तुम्हारी मंज़िल ऊपर नहीं, नीचे होगी। यदि तुम्हें मेरी बातों पर यकीन न हो तो बेधड़क गलत काम करो और उसके नतीजे देखो। यदि तुम ऐसे व्यक्ति हो जिसका सत्य का अभ्यास बहुत गंभीर है तो तुम्हें अपने अपराधों के लिए क्षमा किए जाने का अवसर अवश्य मिलेगा और विद्रोह करने की बारंबारता कम हो जाएगी। और यदि तुम ऐसे व्यक्ति हो, जो सत्य का कतई अभ्यास नहीं करना चाहता तो परमेश्वर के समक्ष तुम्हारे अपराधों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ जाएगी और तुम तब तक अधिक निरंतरता के साथ विद्रोह करोगे जब तक कि सीमा पार नहीं कर लोगे, जो तुम्हारी पूरी तबाही का समय होगा। यह तब होगा, जब आशीष पाने का तुम्हारा सुहाना सपना चूर-चूर हो चुका होगा। अपने अपराधों को किसी अपरिपक्व या मूर्ख व्यक्ति की गलतियाँ मात्र मत समझो; यह बहाना मत करो कि तुमने सत्य का अभ्यास इसलिए नहीं किया, क्योंकि तुम्हारी ख़राब काबिलियत ने उसे असंभव बना दिया था। इससे भी अधिक, स्वयं द्वारा किए गए अपराधों को किसी अज्ञानी व्यक्ति के कृत्य भी मत समझ लेना। यदि तुम स्वयं को क्षमा करने और अपने साथ उदारता का व्यवहार करने में अच्छे हो, तो मैं कहता हूँ, तुम एक कायर हो, जिसे कभी सत्य हासिल नहीं होगा, न ही तुम्हारे अपराध तुम्हें सताना बंद करेंगे, वे तुम्हें कभी सत्य की माँगें पूरी नहीं करने देंगे और तुम्हें हमेशा के लिए शैतान का वफ़ादार साथी बनाए रखेंगे। तुम्हें मेरी सलाह अभी भी यही है : अपने गुप्त अपराधों को देखने में चूक जाते हुए केवल अपनी मंज़िल पर ध्यान मत दो; अपने अपराधों को गंभीरता से लो, अपनी मंज़िल की चिंता में उनमें से किसी को नज़रअंदाज़ मत करो।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपराध मनुष्य को नरक में ले जाएँगे

659. यद्यपि परमेश्वर के सार में प्रेम का अंश है और वह हर एक व्यक्ति के प्रति दयालु है, फिर भी लोगों ने इस तथ्य को अनदेखा कर दिया है और भुला दिया है कि उसका सार गरिमा से युक्त है। उसमें प्रेम होने का यह अर्थ नहीं है कि लोग जब चाहें तब उसके खिलाफ अपराध कर सकते हैं और उसे कुछ महसूस नहीं होगा या वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा; उसमें दया होने का यह अर्थ नहीं है कि लोगों के साथ पेश आने का उसका कोई सिद्धांत नहीं है। परमेश्वर एक जीवित परमेश्वर है; उसका अस्तित्व बहुत ही वास्तविक है। वह न तो कोई काल्पनिक कठपुतली है और न ही कोई अन्य वस्तु। चूँकि उसका अस्तित्व है, इसलिए हमें हर समय उसके हृदय की वाणी पर ध्यान देना चाहिए, उसके रवैये पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए। परमेश्वर को सीमित करने के लिए इंसानी कल्पनाओं का उपयोग मत करो और उस पर मानव मन के विचारों या मानव इच्छा की कामनाओं को मत थोपो और परमेश्वर से यह मत कहो कि वह इंसानी तरीकों का उपयोग करके और इंसानी कल्पनाओं के आधार पर लोगों के साथ पेश आए। यदि तुम ऐसा करते हो, तो तुम परमेश्वर का गुस्सा भड़का रहे हो, उसके क्रोध की परीक्षा ले रहे हो और उसकी गरिमा को चुनौती दे रहे हो! इस प्रकार, एक बार जब तुम लोग इस मामले की गंभीरता को समझ जाते हो, तो मैं तुम लोगों में से हर एक से आग्रह करता हूँ कि अपने कार्यकलापों और अपनी बोली में सावधान और विवेकशील रहो और परमेश्वर से संबंधित मामलों से निपटने में अत्यधिक सावधानी और विवेक का प्रयोग करो! जब तुम यह नहीं समझते कि परमेश्वर का रवैया क्या है, तो मनमाने ढंग से मत बोलो, मनमाने ढंग से कार्य मत करो या मनमाने ढंग से ठप्पे मत लगाओ; इससे भी बढ़कर, मनमाने ढंग से निष्कर्ष मत निकालो। इसके बजाय, तुम्हें प्रतीक्षा करनी चाहिए और खोजना चाहिए। ये परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने की अभिव्यक्तियाँ हैं। यदि तुम इसे हासिल कर सकते हो और सबसे पहले यह रवैया रख सकते हो, तो परमेश्वर तुम्हारी मूर्खता, अज्ञानता और चीजों की समझ की कमी के लिए तुम्हें दोषी नहीं ठहराएगा; इसके बजाय, तुम्हारे रवैये के कारण—परमेश्वर को नाराज करने के तुम्हारे भय, उसके इरादों के प्रति तुम्हारे सम्मान और उसके प्रति समर्पण करने की तुम्हारी इच्छा के कारण—परमेश्वर तुम्हें याद रखेगा, तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा और तुम्हें प्रबुद्ध करेगा या तुम्हारी अपरिपक्वता और अज्ञानता के प्रति सहिष्णुता दिखाएगा। अन्यथा, उसके प्रति तुम्हारे इस श्रद्धाहीन रवैये के परिणामस्वरूप—अपनी मर्जी से उसका आकलन करने या मनमाने ढंग से उसके इरादों के बारे में अटकलें लगाने और उन्हें निर्धारित करने के परिणामस्वरूप—परमेश्वर तुम्हें दोषी ठहराएगा, तुम्हें अनुशासित करेगा और यहाँ तक कि तुम्हें दंड देगा; या वह तुम्हारे बारे में कुछ कहेगा और शायद वह जो कहेगा उसका संबंध तुम्हारे परिणाम से होगा। इसलिए, मैं एक बार फिर से इस बात पर जोर दूँगा : परमेश्वर से आने वाली हर चीज के प्रति तुममें से प्रत्येक को सावधान और विवेकशील रहना चाहिए। लापरवाही से मत बोलो या कार्य मत करो। कुछ भी कहने से पहले तुम्हें विचार करना चाहिए, “क्या मेरा यह कृत्य परमेश्वर को क्रोधित करेगा? क्या ऐसा करके मेरे मन में परमेश्वर के प्रति भय है?” यहाँ तक कि साधारण मामलों में भी, तुम्हें इन प्रश्नों पर अधिक मनन करना चाहिए और उन पर अधिक विचार करना चाहिए। यदि तुम हर चीज में, हर समय, इन सिद्धांतों के अनुसार सही मायने में अभ्यास करो, विशेष रूप से इस तरह की प्रवृत्ति तब अपना सको, जब कोई चीज तुम्हारी समझ में न आए, तो परमेश्वर तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा, और तुम्हें अनुसरण योग्य मार्ग देगा। तुम्हारा प्रदर्शन चाहे जैसा भी हो, परमेश्वर के लिए यह सब देखना काफी स्पष्ट और साफ है और वह तुम्हारे प्रदर्शन का सटीक और उपयुक्त मूल्यांकन प्रदान करेगा। तुम्हारे अंतिम परीक्षण से गुजरने के बाद, परमेश्वर तुम्हारे समस्त व्यवहार को लेगा और उसका पूरी तरह से सारांश निकालेगा और इस तरह तुम्हारा परिणाम निर्धारित करेगा। यह परिणाम हर एक व्यक्ति को पूरी तरह से आश्वस्त कर देगा। मैं तुम्हें यह बताना चाहता हूँ कि तुम लोगों का हर कर्म, हर कार्यकलाप, हर विचार तुम्हारे भाग्य को निर्धारित करता है।

—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, परमेश्वर का स्वभाव और उसका कार्य जो नतीजा हासिल करेगा, उसे कैसे जानें

660. जहाँ तक सवाल यह है कि लोग परमेश्वर का अनुसरण कैसे करते हैं, कैसे परमेश्वर से पेश आते हैं तो यहाँ लोगों के रवैये प्राथमिक महत्व के होते हैं। परमेश्वर को बस हवा समझकर अपने मन के पीछे मत धकेल दो; बल्कि तुम्हें हमेशा यह सोचना चाहिए कि जिस परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास है वह एक जीवित परमेश्वर, एक वास्तविक परमेश्वर है। वह तीसरे स्वर्ग में हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठा है। बल्कि, वह लगातार हर एक के दिल की पड़ताल कर रहा है, हर एक के कार्यकलापों की पड़ताल कर रहा है, तुम्हारे हर शब्द और हर कर्म की पड़ताल कर रहा है, इस बात की पड़ताल कर रहा है कि तुम कैसा व्यवहार करते हो और उसके प्रति तुम्हारा रवैया क्या है। तुम स्वयं को परमेश्वर को सौंपने के लिए तैयार हो या नहीं, तुम्हारा समस्त व्यवहार और तुम्हारी सोच और विचार उसके सामने रखे हैं और उसके द्वारा उनकी पड़ताल की जा रही है। तुम्हारे व्यवहार, तुम्हारे कर्मों, और परमेश्वर के प्रति तुम्हारे रवैये के अनुसार ही तुम्हारे बारे में उसकी राय, और तुम्हारे प्रति उसका रवैया लगातार बदल रहा है। फिर भी, मुझे तुममें से कुछ लोगों को सलाह देनी चाहिए : स्वयं को परमेश्वर के हाथों में एक शिशु मत समझो, जैसे कि वह तुम पर बहुत जान छिड़कता हो, जैसे कि वह तुम्हारे बिना कुछ सँभाल ही नहीं सकता हो और जैसे कि तुम्हारे प्रति उसका रवैया तय हो और कभी बदल नहीं सकता हो—सपने देखना छोड़ दो! परमेश्वर हर एक व्यक्ति के साथ अपने व्यवहार में धार्मिक है और लोगों पर विजय पाने और उनका उद्धार करने का कार्य बड़ी गंभीरता के साथ करता है। यह उसका प्रबंधन है। वह हर एक व्यक्ति के साथ गंभीरता से पेश आता है; वह उनके साथ किसी पालतू जानवर की तरह पेश नहीं आता और उन्हें फुसलाता और उनके साथ खेलता नहीं है। मनुष्य के लिए परमेश्वर का प्रेम बहुत लाड़-प्यार या बिगाड़ने वाला प्रेम नहीं है, न ही मनुष्य के प्रति उसकी करुणा और सहिष्णुता आसक्तिपूर्ण या अहस्तक्षेप नीति वाली है। इसके विपरीत, मनुष्य के लिए परमेश्वर के प्रेम में उन्हें सँजोना, उनके प्रति दया दिखाना और जीवन का सम्मान करना शामिल है; उसकी दया और सहिष्णुता अपने भीतर मनुष्य से उसकी अपेक्षाओं को वहन करती हैं और वो आधार हैं जो मनुष्य के जीने के लिए जरूरी हैं। परमेश्वर जीवित है, वास्तव में उसका अस्तित्व है; मनुष्य के प्रति उसका रवैया सिद्धांतनिष्ठ है, यह किसी तरह का विनियम बिल्कुल भी नहीं है, और यह बदल सकता है। मानवजाति के लिए उसके इरादे उभरती परिस्थितियों के आधार पर और प्रत्येक व्यक्ति के रवैये के साथ धीरे-धीरे समय के साथ परिवर्तित एवं रूपांतरित हो रहे हैं। इसलिए तुम्हें पूरी स्पष्टता के साथ जान लेना चाहिए कि परमेश्वर का सार अपरिवर्तनीय है और उसका स्वभाव अलग-अलग समय और संदर्भों के अनुसार व्यक्त किया जाएगा। शायद तुम्हें यह कोई गंभीर मामला न लगे और हो सकता है तुम यह कल्पना करने के लिए कि परमेश्वर को कैसे कार्य करना चाहिए, अपनी व्यक्तिगत धारणाओं को इस्तेमाल कर लो। परंतु कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि बिल्कुल विपरीत बात सही हो और अपनी व्यक्तिगत धारणाओं का इस्तेमाल करके परमेश्वर को आंकने के द्वारा तुमने उसे क्रोधित कर दिया हो। क्योंकि परमेश्वर उस तरह बिल्कुल कार्य नहीं करता जैसा तुम सोचते हो, और वह उस मसले के साथ वैसे बिल्कुल पेश नहीं आएगा जैसा कि तुम कहते हो। इसलिए मैं तुम्हें याद दिलाता हूँ कि तुम आसपास की हर एक चीज के प्रति अपने व्यवहार में सावधान एवं विवेकशील रहो, और सीखो कि किस प्रकार हर चीज में “परमेश्वर के भय मानने और बुराई से दूर रहने वाले परमेश्वर के मार्ग का अनुसरण करने के सिद्धांत” का अभ्यास करना चाहिए। तुम्हें परमेश्वर के इरादों और परमेश्वर के रवैये के मामलों को सटीकता से निर्धारित अवश्य करना चाहिए; तुम्हें प्रबुद्ध लोगों को खोजना चाहिए जो इस पर तुम्हारे साथ संगति करें और ईमानदारी खोज करनी चाहिए। अपने विश्वास में परमेश्वर को एक कठपुतली मत समझो—मनमाने ढंग से उसकी आलोचना मत करो, उसके बारे में मनमाने निष्कर्षों पर मत पहुँचो, और उसके साथ असम्मानजनक तरीके से पेश मत आओ। जब परमेश्वर तुम्हारा उद्धार कर रहा होता है, तुम्हारा परिणाम निर्धारित कर रहा होता है, वह तुम्हारे प्रति दया और सहिष्णुता दिखा सकता है या तुम पर न्याय और ताड़ना लागू कर सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में तुम्हारे प्रति उसका रवैया स्थिर नहीं होता है। यह परमेश्वर के प्रति तुम्हारे रवैये पर और परमेश्वर की तुम्हारी समझ पर निर्भर करता है। केवल इसलिए परमेश्वर को हमेशा के लिए सीमित मत करो क्योंकि तुम्हें उसके किसी एक पहलू का कुछ ज्ञान या समझ है। किसी मृत परमेश्वर में विश्वास मत करो; जीवित परमेश्वर में विश्वास करो।

—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, परमेश्वर का स्वभाव और उसका कार्य जो नतीजा हासिल करेगा, उसे कैसे जानें

661. तुम लोग लालायित रहते हो कि परमेश्वर तुम पर प्रसन्न हो, मगर तुम लोग परमेश्वर से दूर हो। यह क्या मामला है? तुम लोग केवल उसके वचनों को स्वीकार करते हो, उसके द्वारा काट-छाँट को नहीं, उसकी हर व्यवस्था को स्वीकार करने, उस पर पूर्ण आस्था रखने में तो तुम बिल्कुल भी समर्थ नहीं हो। तो आखिर मामला क्या है? अंतिम विश्लेषण में तुम लोगों की आस्था अंडे के खाली खोल के समान है, जो कभी चूजा पैदा नहीं कर सकता। क्योंकि तुम लोगों की आस्था तुम्हारे लिए सत्य लेकर नहीं आई है या उसने तुम्हें जीवन नहीं दिया है, बल्कि इसके बजाय तुम लोगों को सहारा और आशा का एक भ्रामक बोध दिया है। सहारे और आशा का बोध ही परमेश्वर पर तुम लोगों के विश्वास का उद्देश्य है, सत्य और जीवन नहीं। इस प्रकार मैं कहता हूँ कि परमेश्वर में तुम्हारी आस्था की प्रक्रिया और कुछ नहीं, बल्कि परमेश्वर का अनुग्रह पाने का चापलूस और बेशर्म तरीका रहा है, और उसे किसी भी तरह से सच्ची आस्था नहीं माना जा सकता। इस प्रकार के विश्वास से कोई चूज़ा कैसे पैदा हो सकता है? दूसरे शब्दों में, इस तरह की आस्था से क्या हासिल हो सकता है? परमेश्वर में तुम लोगों की आस्था का प्रयोजन अपने लक्ष्य पूरे करने में उसका उपयोग करना है। क्या यह तुम्हारे द्वारा परमेश्वर के स्वभाव के अपमान का एक और तथ्य नहीं है? तुम लोग स्वर्ग के परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास करते हो, परंतु पृथ्वी के परमेश्वर के अस्तित्व से इनकार करते हो; लेकिन मैं तुम लोगों के विचार स्वीकार नहीं करता; मैं केवल उन लोगों को स्वीकार करता हूँ, जो अपने पैरों को मजबूती से जमीन पर रखते हुए पृथ्वी के परमेश्वर की सेवा करते हैं, किंतु उनकी सराहना कभी नहीं करता, जो पृथ्वी के मसीह को स्वीकार नहीं करते। ऐसे लोग स्वर्ग के परमेश्वर के प्रति कितने भी वफादार क्यों न हों, अंत में वे कुकर्मियों को दंड देने वाले मेरे हाथ से बचकर नहीं निकल सकते। ये लोग बुरे हैं; ये वे बुरे लोग हैं, जो परमेश्वर का विरोध करते हैं और जिन्होंने कभी खुशी से मसीह के प्रति समर्पण नहीं किया है। निस्संदेह, उनकी संख्या में वे सब सम्मिलित हैं जो मसीह को नहीं जानते, और इसके अलावा, उसे स्वीकार नहीं करते। क्या तुम समझते हो कि जब तक तुम स्वर्ग के परमेश्वर के प्रति वफादार हो, तब तक मसीह के प्रति जैसा चाहो वैसा व्यवहार कर सकते हो? गलत! मसीह के प्रति तुम्हारी अज्ञानता स्वर्ग के परमेश्वर के प्रति अज्ञानता है। तुम स्वर्ग के परमेश्वर के प्रति चाहे कितने भी वफादार क्यों न हो, यह मात्र खोखली बात और दिखावा है, क्योंकि पृथ्वी का परमेश्वर मनुष्य के लिए न केवल सत्य प्राप्त करने और अधिक गहरा ज्ञान रखने में सहायक है, बल्कि इससे भी अधिक, मनुष्य को दोषी ठहराने और उसके बाद दुष्टों को दंडित करने के लिए तथ्य हासिल करने में सहायक है। क्या तुमने यहाँ लाभदायक और हानिकारक परिणामों को समझ लिया है? क्या तुमने उनका अनुभव किया है? मैं चाहता हूँ कि तुम लोग शीघ्र ही किसी दिन इस सत्य को समझो : परमेश्वर को जानने के लिए तुम्हें न केवल स्वर्ग के परमेश्वर को जानना चाहिए, बल्कि, इससे भी अधिक महत्वपूर्ण रूप से, पृथ्वी के परमेश्वर को भी जानना चाहिए। अपनी प्राथमिकताओं को गड्डमड्ड मत करो या गौण को मुख्य की जगह मत लेने दो। केवल इसी तरह से तुम परमेश्वर के साथ वास्तव में एक अच्छा संबंध बना सकते हो, परमेश्वर के नज़दीक हो सकते हो, और अपने हृदय को उसके और अधिक निकट ले जा सकते हो। यदि तुम काफी वर्षों से विश्वासी रहे हो और लंबे समय से मुझसे जुड़े हुए हो, किंतु फिर भी मुझसे दूर हो, तो मैं कहता हूँ कि अवश्य ही तुम प्रायः परमेश्वर के स्वभाव को नाराज करते हो और तुम्हारे परिणाम का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल होगा। यदि मेरे साथ कई वर्षों का संबंध न केवल तुम्हें ऐसा मनुष्य बनाने में असफल रहा है जिसमें मानवता और सत्य हो, बल्कि, इससे भी अधिक, उसने तुम्हारे दुष्ट तौर-तरीकों को तुम्हारी प्रकृति में बद्धमूल कर दिया है, और न केवल तुम्हारा अहंकार पहले से दोगुना हो गया है, बल्कि मेरे बारे में तुम्हारी गलतफहमियाँ भी कई गुना बढ़ गई हैं, यहाँ तक कि तुम मुझे अपना छोटा-सा लँगोटिया यार मान लेते हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम्हारा रोग अब त्वचा में ही नहीं रहा, बल्कि तुम्हारी हड्डियों तक में घुस गया है। तुम्हारे लिए बस यही शेष बचा है कि तुम अपने अंतिम संस्कार की व्यवस्था किए जाने की प्रतीक्षा करो। तब तुम्हें मुझसे प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं है कि मैं तुम्हारा परमेश्वर बनूँ, क्योंकि तुमने मृत्यु के योग्य पाप किया है, एक अक्षम्य पाप किया है। मैं तुम्हें बख्श भी दूँ, तो भी स्वर्ग का परमेश्वर तुम्हारा जीवन लेने पर जोर देगा, क्योंकि परमेश्वर के स्वभाव के प्रति तुम्हारा अपराध कोई साधारण समस्या नहीं है, बल्कि बहुत ही गंभीर प्रकृति का है। जब समय आएगा, तो मुझे दोष मत देना कि मैंने तुम्हें पहले नहीं बताया था। फिर से बात वहीं आ जाती है : जब तुम मसीह—पृथ्वी के परमेश्वर—से एक साधारण मनुष्य के रूप में जुड़ते हो, अर्थात् जब तुम यह मानते हो कि यह परमेश्वर एक व्यक्ति के अलावा कुछ नहीं है, तो तुम नष्ट हो जाओगे। तुम सबके लिए मेरी यही एकमात्र चेतावनी है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, पृथ्वी के परमेश्वर को वास्तव में कैसे जानें

662. हर व्यक्ति ने परमेश्वर में आस्था का जीवन जीने के दौरान ऐसी चीजें की हैं जो परमेश्वर का प्रतिरोध करती हैं और उसे धोखा देती हैं। उनमें से कुछ चीजों को दोषों के रूप में दर्ज करने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ अक्षम्य होती हैं, क्योंकि बहुत-सी ऐसी चीजें हैं जो प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करती हैं—ऐसी चीजें जो परमेश्वर के स्वभाव को नाराज़ करती हैं। अपने भाग्य को लेकर चिंतित बहुत-से लोग पूछ सकते हैं कि ये चीजें कौन-सी हैं। तुम लोगों को यह पता होना चाहिए कि तुम प्रकृति से अहंकारी और दंभी हो और तथ्यों के प्रति समर्पण करने के इच्छुक नहीं हो। यही वजह है कि जब तुम लोग आत्म-चिंतन कर लोगे, तो मैं थोड़ा-थोड़ा करके तुम लोगों को बताँऊगा। मेरी नसीहत है कि तुम लोग प्रशासनिक आदेशों की विषयवस्तु को समझने का वास्तविक प्रयास और परमेश्वर के स्वभाव को जानने का प्रयत्न करो। वरना तुम लोगों के लिए अपनी जबान बंद रखना मुश्किल होगा, तुम्हारी जबानें बहुत उन्मुक्त हो जाएंगी और तुम लंबी-चौड़ी बातें हाँकोगे, अनजाने में परमेश्वर के स्वभाव का अपमान करोगे और अंधकार में जा गिरोगे, पवित्र आत्मा की उपस्थिति और रोशनी गँवा दोगे। चूँकि तुम लोग अपने क्रियाकलापों में सिद्धांतहीन हो, तुम वह करते और बोलते हो जो तुम्हें नहीं करना और बोलना चाहिए, इसलिए तुम्हें वह प्रतिफल मिलेगा जिसके तुम लायक हो। तुम्हें पता होना चाहिए कि भले ही तुम अपनी कथनी और करनी में सिद्धांतहीन हो, लेकिन इन दोनों मामलों में परमेश्वर अत्यंत सिद्धांतनिष्ठ है। तुम्हें प्रतिफल मिलने का कारण यह है कि तुमने परमेश्वर का अपमान किया है, किसी इंसान का नहीं। यदि तुम अपने जीवन में परमेश्वर के स्वभाव के विरुद्ध बहुत-से अपमान करते हो, तो तुम निश्चित रूप से नरक की संतान ही बनोगे। इंसान को ऐसा प्रतीत हो सकता है कि तुमने कुछ ही कर्म ऐसे किए हैं जो सत्य के अनुरूप नहीं हैं और इससे अधिक कुछ नहीं किया। लेकिन क्या तुम जानते हो कि परमेश्वर की निगाह में, तुम पहले ही एक ऐसे इंसान हो जिसके लिए अब कोई पाप-बलि नहीं है? क्योंकि तुमने एक से अधिक बार परमेश्वर के प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन किया है और फिर तुमने पश्चात्ताप करने या वापस लौटने का कोई लक्षण भी नहीं दिखाया है, इसलिए तुम्हारे पास नरक में फेंके जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, जहाँ परमेश्वर इंसान को दंड देता है। परमेश्वर का अनुसरण करते समय, कुछ थोड़े-से लोगों ने कुछ ऐसे कर्म किए हैं जिनसे सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ, लेकिन काट-छाँट और मार्गदर्शन के बाद, उन्हें धीरे-धीरे अपनी भ्रष्टता का पता चल गया, उसके बाद उन्होंने वास्तविकता के सही मार्ग में प्रवेश किया और आज तक व्यावहारिक हैं। वे ऐसे लोग हैं जो अंत में जीवित रहेंगे। फिर भी, मैं ईमानदार इंसान को चाहता हूँ; यदि तुम एक ईमानदार इंसान हो और सिद्धांत के अनुसार कार्य करते हो, तो तुम परमेश्वर के विश्वासपात्र हो सकते हो। यदि अपने क्रियाकलापों में तुम परमेश्वर के स्वभाव को नाराज़ नहीं करते हो और परमेश्वर की इच्छाएँ खोजते हो और तुममें परमेश्वर का भय मानने वाला हृदय है, तो तुम्हारी आस्था मानक-स्तरीय है। जो भी व्यक्ति परमेश्वर का भय नहीं मानता और उसका हृदय डर से नहीं काँपता, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि वह परमेश्वर के प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करेगा। बहुत-से लोग अपने जुनून के बल पर परमेश्वर की सेवा तो करते हैं, लेकिन उन्हें परमेश्वर के प्रशासनिक आदेशों की कोई समझ नहीं होती, उसके वचनों में छिपे अर्थों का तो उन्हें कोई भान तक नहीं होता। इसलिए, अपने नेक इरादों के बावजूद वे प्रायः ऐसे काम कर बैठते हैं जिनसे परमेश्वर के प्रबंधन में विघ्न पहुँचता है। गंभीर मामलों में, उन्हें परमेश्वर के घर से निष्कासित कर दिया जाता है, आगे से परमेश्वर का अनुसरण करने के किसी भी अवसर से वंचित कर दिया जाता है, नरक में फेंक दिया जाता है और परमेश्वर के घर के साथ उनके सभी संबंध समाप्त हो जाते हैं। ये लोग अपने नादान नेक इरादों की शक्ति के आधार पर परमेश्वर के घर का काम करते हैं, और अंत में परमेश्वर के स्वभाव को क्रोधित कर बैठते हैं। लोग अधिकारियों और स्वामियों की सेवा करने के अपने तरीकों को परमेश्वर के घर में ले आते हैं और व्यर्थ में यह सोचते हुए कि ऐसे तरीकों को यहाँ आसानी से लागू किया जा सकता है, उन्हें उपयोग में लाने की कोशिश करते हैं। वे यह अनुमान भी नहीं लगा सकते कि परमेश्वर का स्वभाव किसी मेमने का नहीं बल्कि एक सिंह का स्वभाव है। इसलिए, जो लोग पहली बार परमेश्वर से जुड़ते हैं, वे उससे संवाद नहीं कर पाते, क्योंकि परमेश्वर का हृदय इंसान के हृदय की तरह नहीं है। जब तुम बहुत-से सत्य समझ जाते हो, तभी तुम परमेश्वर को निरंतर जान पाते हो। यह ज्ञान शब्दों और धर्म-सिद्धांतों से नहीं बनता, बल्कि इसे एक खजाने के रूप में उपयोग किया जा सकता है जिससे तुम परमेश्वर के साथ गहरा विश्वास पैदा कर सकते हो और इसे एक प्रमाण के रूप में उपयोग कर सकते हो कि वह तुमसे प्रसन्न होता है। यदि तुममें ज्ञान की वास्तविकता का अभाव है और तुम सत्य से युक्त नहीं हो, तो उत्साह में की गई तुम्हारी सेवा से परमेश्वर को तुमसे सिर्फ घृणा और नफरत ही होगी।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तीन चेतावनियाँ

663. मेरे द्वारा कहे गए हर वाक्य में परमेश्वर का स्वभाव निहित है। मेरे वचनों की ध्यान से जाँच करना तुम लोगों के लिए अच्छा होगा, और निश्चित ही तुम्हें उनसे बहुत लाभ होगा। परमेश्वर के सार को समझना बहुत कठिन है, किंतु मुझे विश्वास है कि तुम सभी को परमेश्वर के स्वभाव के बारे में कम से कम कुछ तो पता है। तो फिर, मैं आशा करता हूँ कि तुम लोगों के पास मुझे दिखाने के लिए तुम्हारे द्वारा की गई ऐसी ज्यादा चीजें होंगी, जो परमेश्वर के स्वभाव को अपमानित नहीं करतीं। तभी मैं आश्वस्त हो पाऊँगा। उदाहरण के लिए, परमेश्वर को हर समय अपने दिल में रखो। जब तुम कार्य करो, तो उसके वचनों के अनुसार करो। सभी चीजों में उसकी इच्छाओं की खोज करो, और ऐसा काम करने से बचो, जिससे परमेश्वर का अनादर और अपमान हो। अपने हृदय के भावी शून्य को भरने के लिए तुम्हें परमेश्वर की उपेक्षा तो बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम परमेश्वर के स्वभाव को नाराज़ करोगे। एक दूसरे उदाहरण में अगर तुम अपने पूरे जीवन में परमेश्वर के विरुद्ध कभी ईशनिंदा की टिप्पणी या शिकायत नहीं करते, या तुम अपने संपूर्ण जीवन में, जो कुछ उसने तुम्हें सौंपा है, उसे उचित रूप से करने में समर्थ हो, और साथ ही उसके सभी वचनों के प्रति समर्पित रहते हो, तो तुम प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करने से बच जाओगे। उदाहरण के लिए, अगर तुमने कभी ऐसा कहा है, “मुझे ऐसा क्यों नहीं लगता कि वह परमेश्वर है?”, “मुझे लगता है कि ये शब्द पवित्र आत्मा के कुछ प्रबोधन से अधिक कुछ नहीं हैं,” “मेरी राय में, परमेश्वर जो कुछ करता है, जरूरी नहीं कि वह सब सही हो,” “परमेश्वर की मानवता मेरी मानवता से बढ़कर नहीं है,” “परमेश्वर के वचन विश्वास करने योग्य हैं ही नहीं,” या इस तरह की अन्य आलोचनात्मक टिप्पणियाँ, तो मैं तुम्हें अधिक बार अपने पापों को स्वीकार करने और पश्चात्ताप करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। वरना तुम्हें क्षमा पाने का कभी अवसर नहीं मिलेगा, क्योंकि तुमने किसी मनुष्य को नाराज़ नहीं किया, बल्कि स्वयं परमेश्वर को नाराज़ किया है। तुम मान सकते हो कि तुम एक मनुष्य की आलोचना कर रहे हो, किंतु परमेश्वर का आत्मा इसे इस तरह नहीं देखता है। तुम्हारा उसके देह के प्रति अनादर उसका अनादर करने के बराबर है। ऐसा होने पर, क्या तुमने जो किया है उससे परमेश्वर के स्वभाव को नाराज़ नहीं किया है? तुम्हें याद रखना चाहिए कि जो कुछ भी परमेश्वर के आत्मा द्वारा किया जाता है, वह उसके देह में किए गए कार्य की सुरक्षा के लिए किया जाता है और इसलिए किया जाता है, ताकि उस कार्य को भली-भाँति किया जा सके। अगर तुम इसे नजरअंदाज करते हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम वो शख्स हो, जो परमेश्वर पर विश्वास करने में कभी सफल नहीं हो पाएगा। चूँकि तुमने परमेश्वर का क्रोध भड़का दिया है, इसलिए वह तुम्हें सबक सिखाने के लिए उचित दंड देगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर के स्वभाव को समझना बहुत महत्वपूर्ण है

664. परमेश्वर के स्वभाव और स्वरूप को समझने के बाद क्या तुम लोगों ने कोई निष्कर्ष निकाला है कि तुम लोगों को परमेश्वर के साथ कैसा बरताव करना चाहिए? अंत में, इस प्रश्न के उत्तर में, मैं तुम लोगों को तीन सलाहें देना चाहूँगा : पहली, परमेश्वर की परीक्षा मत लो। चाहे तुम परमेश्वर के बारे में कितना भी क्यों न समझते हो, चाहे तुम उसके स्वभाव के बारे में कितना भी क्यों न जानते हो, उसकी परीक्षा बिल्कुल मत लो। दूसरी, रुतबे के लिए परमेश्वर के साथ होड़ करने की कोशिश मत करो। चाहे परमेश्वर तुम्हें किसी भी प्रकार का रुतबा दे या वह तुमसे किसी भी प्रकार के कार्य का बोझ उठवाए, चाहे वह तुम्हें किसी भी प्रकार का कर्तव्य करने के लिए बड़ा करे, और चाहे तुमने परमेश्वर के लिए खुद को कितना भी खपाया और त्याग किया हो, उसके साथ रुतबे के लिए होड़ करने की कोशिश बिल्कुल मत करो। तीसरी, परमेश्वर से मुकाबला मत करो। परमेश्वर तुम्हारे साथ जो कुछ भी करता है, जो भी वह तुम्हारे लिए व्यवस्था करता है, और जो चीज़ें वह तुम पर लाता है, तुम उन्हें समझते हो या नहीं या उनके प्रति समर्पण कर सकते हो या नहीं, परमेश्वर से मुकाबला बिल्कुल मत करो। यदि तुम इन तीन सलाहों पर चल सकते हो, तो तुम अपेक्षाकृत सुरक्षित रहोगे, और तुम परमेश्वर को क्रोधित करने की ओर प्रवृत्त नहीं होगे।

—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III

665. हो सकता है कि आज के दिन तक पहुँचने से ठीक पहले तक तुमने अत्यधिक पीड़ा सही हो, परन्तु तुम अभी भी कुछ नहीं समझते; तुम जीवन की प्रत्येक बात के विषय में अज्ञानी हो। यद्यपि तुम्हें ताड़ना दी गई और तुम्हारा न्याय किया गया; फिर भी तुम बिल्कुल भी नहीं बदले और तुम ने भीतर तक जीवन ग्रहण ही नहीं किया है। जब तुम्हारे कार्य को जाँचने का समय आएगा, तुम अग्नि जैसे परीक्षण और अधिक बड़े क्लेश का अनुभव करोगे। जब यह अग्नि तुम पर आ पड़ेगी, तो तुम्हारा सम्पूर्ण अस्तित्व राख में बदल जाएगा। तुम्हारे पास जीवन नहीं है, तुम्हारे भीतर रत्ती भर भी शुद्ध स्वर्ण नहीं है, तुम अभी भी पुराने भ्रष्ट स्वभाव में फँसे हुए हो, यहाँ तक कि तुम एक अच्छी विषमता भी नहीं हो सकते, तो तुम्हें क्यों नहीं हटाया जाएगा? विजय-कार्य में क्या किसी ऐसे व्यक्ति का उपयोग किया जा सकता है, जिसका मूल्य एक पाई भी नहीं है और जिसके पास जीवन ही नहीं है? जब वह समय आएगा, तो तुम सब के दिन नूह और सदोम के दिनों से भी अधिक कठिन होंगे! तुम किसी भी तरह से प्रार्थना करो, इससे तुम्हारा कोई भला नहीं होगा। उद्धार का कार्य पहले ही समाप्त हो चुकने पर क्या तुम वापस आकर नए सिरे से पश्चात्ताप करना आरंभ कर सकते हो? एक बार जब उद्धार का सम्पूर्ण कार्य पूरा हो जाएगा, तब उद्धार का कोई और कार्य नहीं रहेगा; उसके बाद केवल बुरे लोगों को दंड देने का कार्य आरम्भ होगा। तुम प्रतिरोध करते हो, तुम विद्रोह करते हो, और तुम जानबूझकर गलत काम करते हो। क्या तुम कठोर दण्ड के लक्ष्य नहीं हो? मैं आज यह तुम्हारे लिए स्पष्ट रूप से बोल रहा हूँ। यदि तुम अनसुना करते हो, तो जब बाद में तुम पर विपत्ति टूटेगी, यदि तुम तब विश्वास और पछतावा करना आरम्भ करोगे, तो क्या इसमें तब बहुत देर नहीं हो चुकी होगी? मैं तुम्हें आज पश्चात्ताप करने का एक अवसर प्रदान कर रहा हूँ, लेकिन तुम ऐसा नहीं करते हो। तुम और कितनी प्रतीक्षा करना चाहते हो? ताड़ना के दिन तक? मैं आज तुम्हारे पिछले अपराध याद नहीं रखता हूँ; मैं तुम्हें बार-बार क्षमा करता हूँ, मात्र तुम्हारे सकारात्मक पक्ष को देखने के लिए मैं तुम्हारे नकारात्मक पक्ष को अनदेखा करता हूँ, क्योंकि मेरे समस्त वर्तमान वचन और कार्य तुम्हें बचाने के लिए हैं। तुम्हारे प्रति मैं कोई बुरा इरादा नहीं रखता। फिर भी तुम प्रवेश करने से इन्कार करते हो; तुम भले और बुरे में अंतर नहीं कर सकते और दयालुता की कद्र करना नहीं जानते हो। क्या ऐसे लोग बस दण्ड और धार्मिक प्रतिफल की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, विजय के कार्य की वास्तविक कहानी (1)

666. तुम लोगों के बीच मेरा कार्य करना इस्राएल में यहोवा के कार्य करने के समान बिल्कुल नहीं है, और इससे भी बढ़कर, यह वैसा कार्य नहीं है जैसा यीशु ने यहूदिया में किया था। मैं बड़ी सहिष्णुता के साथ बोलता और कार्य करता हूँ, और मैं क्रोध और न्याय के साथ इन पतितों को जीतता हूँ। यह यहोवा द्वारा इस्राएल में अपने लोगों की अगुआई करने जैसा नहीं है। इस्राएल में उसका कार्य भोजन और जीवन का जल प्रदान करना था, और अपने लोगों का भरण-पोषण करते हुए वह उनके लिए दया और करुणा से परिपूर्ण था। आज का कार्य उन शापग्रस्त लोगों के देश में किया जाता है, जिन्हें चुना नहीं जाता। वहाँ प्रचुर मात्रा में भोजन नहीं है, न ही प्यास बुझाने वाले जीवन के जल का पोषण है, और वहाँ प्रचुर मात्रा में भौतिक वस्तुओं की आपूर्ति तो बिल्कुल भी नहीं है; वहाँ केवल प्रचुर मात्रा में न्याय, शाप और ताड़ना की आपूर्ति है। गोबर के ढेर में रहने वाले ये भुनगे मवेशियों और भेड़ों से भरी पहाड़ियाँ, महान संपत्ति, और पूरी भूमि पर सबसे सुंदर बच्चे, जो मैंने इस्राएल को प्रदान किए थे, प्राप्त करने के सर्वथा अयोग्य हैं। समकालीन इस्राएल वेदी पर मवेशी और भेड़ें तथा सोने और चाँदी की वस्तुएँ चढ़ाता है, जिनसे मैं उसके लोगों का पोषण करता हूँ, जो व्यवस्था के तहत यहोवा द्वारा आवश्यक दसवें हिस्से को पार कर जाता है, और इसलिए मैंने उन्हें और भी अधिक प्रदान किया है—व्यवस्था के तहत जो इस्राएल द्वारा प्राप्त किया जाना था, उससे एक सौ गुना से भी अधिक। मैं जिससे इस्राएल का पोषण करता हूँ, वह उस सबसे बढ़कर है जो अब्राहम ने प्राप्त किया था, और उस सबसे बढ़कर है जो इसहाक ने प्राप्त किया था। मैं इस्राएल के परिवार को फलदायक और बहुगुणित बना दूँगा, और मैं इस्राएल के अपने लोगों को पूरी दुनिया में फैलाऊँगा। मैं जिन्हें आशीष देता हूँ और जिनकी देखभाल करता हूँ, वे अभी भी इस्राएल के चुने हुए लोग हैं, अर्थात्, ऐसे लोग जो मुझे वह सब कुछ समर्पित करते हैं जो उन्होंने मुझसे प्राप्त किया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वे मुझे ध्यान में रखते हैं और मेरी पवित्र वेदी पर अपने पहलौठे बछड़ों और मेमनों का बलिदान करते हैं और उनके पास जो कुछ भी है, उसे मेरे सामने अर्पित करते हैं, यहाँ तक कि मेरे लौटने की प्रत्याशा में अपने नवजात प्रथम पुत्रों को भी अर्पित कर देते हैं। और तुम लोगों के बारे में क्या है? तुम मेरे क्रोध को भड़काते हो, मुझसे माँग करते हो और उन लोगों की भेंटों की चोरी कर लेते हो, जो मुझे चीजें चढ़ाते हैं और तुम नहीं जानते कि तुम लोग मुझे नाराज कर रहे हो; इस प्रकार तुम सब लोग अँधेरे में विलाप और दंड प्राप्त करते हो। तुम लोगों ने मेरा क्रोध कई बार भड़काया है, मैंने अपनी जलती हुई अग्नियों की इस तरह से वर्षा की है कि बहुत-से लोगों का दुःखद अंत हो गया है और खुशहाल घर उजाड़ कब्र बन गए हैं। इन भुनगों के लिए मेरे पास बस अनंत क्रोध है, और इन्हें आशीष देने का मेरा कोई इरादा नहीं है। यह तो केवल अपने कार्य की खातिर मैंने एक अपवाद के रूप में तुम लोगों का उत्थान किया है, बहुत अपमान सहा है और तुम लोगों के बीच कार्य किया है। यदि यह मेरे पिता की इच्छा के लिए नहीं होता, तो मैं गोबर के ढेर में चारों ओर घूमते हुए भुनगों के साथ एक ही घर में कैसे रह सकता था? मुझे तुम लोगों के सभी कार्यों और शब्दों से अत्यंत घृणा महसूस होती है, लेकिन फिर भी, चूँकि मुझे तुम लोगों की गंदगी और विद्रोहशीलता में कुछ “रुचि” है, इसलिए यह मेरे वचनों का एक बड़ा संकलन बन गया है। अन्यथा, मैं तुम लोगों के बीच इतने लंबे समय तक बिल्कुल न रहता। इसलिए, तुम लोगों को यह जान लेना चाहिए कि तुम लोगों के प्रति मेरा रवैया सिर्फ सहानुभूति और तरस का है, जिसमें लेश मात्र भी प्रेम नहीं है और मुझमें तुम लोगों के लिए मात्र सहिष्णुता है, क्योंकि मैं यह केवल अपने कार्य के वास्ते करता हूँ। और तुम लोगों ने मेरे कर्मों को केवल इसलिए देखा है, क्योंकि मैंने गंदगी और विद्रोहशीलता को “कच्चे माल” के रूप में चुना है; अन्यथा मैं अपने कर्मों को इन भुनगों के सामने बिल्कुल भी प्रकट न करता। मैं सिर्फ अनिच्छा से तुम लोगों पर कार्य करता हूँ; उस तत्परता और इच्छा के साथ बिल्कुल नहीं, जिससे मैंने इस्राएल में अपना कार्य किया था। मैं अपने आप को तुम लोगों के बीच बोलने के लिए मज़बूर करते हुए अपने क्रोध को सहन कर रहा हूँ। यदि यह मेरे बृहत्तर कार्य के लिए नहीं होता, तो मेरी आँखें इस तरह के भुनगों के निरंतर अस्तित्व को कैसे सहन कर सकती थीं? यदि यह मेरे नाम के वास्ते नहीं होता, तो मैंने बहुत पहले ही उच्चतम ऊँचाइयों पर आरोहण कर लिया होता और इन भुनगों को इनके गोबर के ढेर के साथ ही पूरी तरह से भस्म कर दिया होता! यदि यह मेरी महिमा के वास्ते नहीं होता, तो मैं कैसे अपनी आँखों के सामने इन दुष्ट राक्षसों को अपने सिर हिलाते हुए खुलेआम मेरा विरोध करने दे सकता था? यदि यह थोड़ी-सी भी बाधा के बिना अपना कार्य निर्विघ्न रूप से करवाने के लिए नहीं होता, तो मैं कैसे इन भुनगे-जैसे लोगों को मनमाने ढंग से मुझसे दुर्व्यवहार करने दे सकता था? यदि इस्राएल के किसी गाँव में एक सौ लोग इस तरह से मेरा विरोध करने के लिए उठ खड़े होते, तो भले ही उन्होंने मेरे लिए भेंटें दी होतीं, मैं फिर भी उन्हें जमीन की दरारों में डालकर मिटा देता ताकि दूसरे शहरों के लोग कभी भी दोबारा विरोध न कर सकें। मैं एक सर्वभक्षी अग्नि हूँ और मैं अपमान बरदाश्त नहीं करता। क्योंकि सभी मानव मेरे द्वारा बनाए गए थे, इसलिए मैं जो कुछ कहता और करता हूँ, उसके प्रति उन्हें समर्पण करना चाहिए और वे विरोध नहीं कर सकते। लोगों को मेरे कार्य में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, और वे इस बात का विश्लेषण करने के योग्य तो बिल्कुल नहीं हैं कि मेरे कार्य और मेरे वचनों में क्या सही या गलत है। मैं सृष्टिकर्ता हूँ और सृजित प्राणियों को मेरा भय मानने वाले हृदय के साथ वह सब कुछ हासिल करना चाहिए, जिसकी मुझे अपेक्षा है; उन्हें मेरे साथ बहस नहीं करनी चाहिए, और विशेष रूप से उन्हें मेरा विरोध नहीं करना चाहिए। मैं अपने अधिकार के साथ अपने लोगों पर शासन करता हूँ और मेरे द्वारा बनाए गए सभी सृजित प्राणियों को मेरे अधिकार के प्रति समर्पण करना चाहिए। यद्यपि आज तुम लोग मेरे सामने दबंग और धृष्ट हो, यद्यपि तुम उन वचनों के खिलाफ विद्रोह करते हो जिनसे मैं तुम लोगों को शिक्षा देता हूँ और डरना नहीं जानते हो, फिर भी मैं तुम लोगों की विद्रोहशीलता का केवल सहिष्णुता से सामना करता हूँ; मैं केवल इसलिए गुस्से से आगबबूला नहीं होऊँगा कि छोटे, तुच्छ भुनगों ने गोबर में हलचल मचा दी है, क्योंकि ऐसा करना मेरे कार्य को प्रभावित होने देना होगा। मैं अपने पिता की इच्छा के लिए उन सभी चीजों के निरंतर अस्तित्व को सहता हूँ जिनसे मैं बेहद घृणा करता हूँ और उन सभी चीजों को भी जिनसे मैं नफरत करता हूँ; मैं अपने कथन पूरे होने तक, अपने अंतिम क्षण तक ऐसा करूँगा। चिंता मत करो! मैं किसी गुमनाम भुनगे के स्तर तक नहीं गिरूँगा और मैं अपने कौशल की तुम्हारे कौशल के साथ तुलना नहीं करूँगा। मैं तुमसे घृणा करता हूँ, किंतु मैं सहने में सक्षम हूँ। तुम मुझसे विद्रोह करते हो, किंतु तुम उस दिन से नहीं बच सकते, जब मैं तुम्हारी ताड़ना करूँगा, जिसका मेरे पिता ने मुझसे वादा किया है। क्या एक सृजित भुनगा सृष्टिकर्ता पर हावी हो सकता है? शरद ऋतु में झड़ते हुए पत्ते अपनी जड़ों की ओर लौट जाते हैं; तुम अपने “पिता” के घर लौट जाओगे, और मैं अपने पिता के पास लौट जाऊँगा। मेरे साथ मेरे पिता का कोमल स्नेह होगा, और तुम अपने पिता के द्वारा कुचले जाओगे। मेरे पास मेरे पिता की महिमा होगी, और तुम्हारे पास तुम्हारे पिता की शर्मिंदगी होगी। मैं उस ताड़ना का उपयोग करूँगा, जिसे मैंने तुम्हारा साथ देने के लिए लंबे समय से रोककर रखा है और तुम अपनी दुर्गंधयुक्त देह से, जो लाखों साल से भ्रष्ट हो चुकी है, मेरी ताड़ना का सामना करोगे। मैंने सहिष्णुता के साथ तुम पर वचनों के अपने कार्य का समापन कर लिया होगा और तुम मेरे वचनों में बोले गए हाय को भोगने की भूमिका निभाना शुरू करोगे। मैं इस्राएल में बहुत आनंदित होऊँगा और कार्य करूँगा; तुम रोओगे और अपने दाँत पीसोगे और कीचड़ में जीते और मरते रहोगे। मैं अपना मूल स्वरूप पुनः प्राप्त कर लूँगा और तुम्हारे साथ अब और गंदगी में नहीं रहूँगा, जबकि तुम अपनी मूल कुरूपता को पुनः प्राप्त कर लोगे और गोबर के ढेर के इर्द-गिर्द बिल बनाते रहोगे। जब मेरा कार्य और वचन पूरे हो जाएँगे, तो वह मेरे लिए खुशी का दिन होगा। जब तुम्हारा प्रतिरोध और विद्रोहशीलता पूरे हो जाएँगे, तो वह तुम्हारे लिए रोने का दिन होगा। मैं तुमसे सहानुभूति नहीं रखूँगा, और तुम मुझे पुनः कभी नहीं देखोगे। मैं तुम्हारे साथ और अधिक संवाद में संलग्न नहीं होऊँगा, और तुम्हारा मुझसे कभी सामना नहीं होगा। मैं तुम्हारी विद्रोहशीलता से नफरत करूँगा और तुम्हें मेरी मनोहरता याद आएगी। मैं तुम पर प्रहार करूँगा और तुम मुझे याद करोगे। मैं खुशी से तुमसे दूर चला जाऊँगा और तुम मेरे प्रति ऋणी महसूस करोगे। मैं तुम्हें फिर कभी नहीं देखूँगा, लेकिन तुम हमेशा मुझे देखने की आशा करोगे। मैं तुमसे नफ़रत करूँगा क्योंकि तुम वर्तमान में मेरा विरोध करते हो, और तुम्हें मेरी याद आएगी क्योंकि मैं वर्तमान में तुम्हें ताड़ना देता हूँ। मैं तुम्हारे साथ रहने का इच्छुक नहीं होऊँगा, लेकिन तुम इसके लिए बुरी तरह लालायित रहोगे और अनंत काल तक रोओगे, क्योंकि तुम्हें उस सबके लिए पछतावा होगा, जो तुमने मेरे साथ किया है। तुम्हें अपनी विद्रोहशीलता और अपने प्रतिरोध के लिए ग्लानि होगी, यहाँ तक कि तुम पछतावे में औंधे मुँह जमीन पर उल्टा लेट जाओगे, मेरे सामने गिर जाओगे और फिर कभी मुझसे विद्रोह न करने की कसम खाओगे। हालाँकि, अपने हृदय में तुम केवल मुझे प्यार करोगे, मगर तुम कभी भी मेरी आवाज नहीं सुन पाओगे। मैं तुम्हें तुमसे ही शर्मिंदा करवाऊँगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब झड़ते हुए पत्ते अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे, तो तुम्हें अपनी की हुई सभी बुराइयों पर पछतावा होगा

667. अब मैं तुम्हारी आसक्ति भरी देह को देख रहा हूँ जो मुझे चापलूसी से मनाने का प्रयास करती है और मेरे पास तुम्हारे लिए केवल एक छोटी-सी चेतावनी है, हालाँकि मैं ताड़ना से तुम्हारी “सेवा” नहीं करूँगा। तुम्हें पता होना चाहिए कि तुम मेरे कार्य में क्या भूमिका निभाते हो, और तब मैं संतुष्ट रहूँगा। इससे परे के मामलों में, यदि तुम मेरा विरोध करते हो या मेरे पैसे खर्च करते हो, या मुझ यहोवा के लिए चढ़ाई गई भेंटें खा जाते हो, या तुम भुनगे एक-दूसरे को काटते हो, या तुम कुत्ते-जैसे प्राणी आपस में संघर्ष या एक-दूसरे का अतिक्रमण करते हो—तो मेरी इनमें से किसी में भी दिलचस्पी नहीं है। तुम लोगों को केवल इतना ही जानने की आवश्यकता है कि तुम लोग किस प्रकार की चीजें हो, और मैं संतुष्ट हो जाऊँगा। इस सबके अलावा, यदि तुम लोग एक-दूसरे पर हथियार तानना चाहते हो या शब्दों से एक-दूसरे के साथ लड़ना चाहते हो, तो ठीक है; ऐसी चीजों में हस्तक्षेप करने की मेरी कोई इच्छा नहीं है और मनुष्य के मामलों का मुझसे बिल्कुल भी कोई संबंध नहीं है। ऐसा इसलिए नहीं है कि मैं तुम लोगों के बीच के टकरावों की परवाह नहीं करता, बल्कि ऐसा इसलिए है कि मैं तुम लोगों में से एक नहीं हूँ, मैं उन मामलों में भाग नहीं लेता जो तुम लोगों के बीच होते हैं। मैं स्वयं एक सृजित प्राणी नहीं हूँ और दुनिया का नहीं हूँ, इसलिए मैं लोगों के हलचल भरे जीवन से और उनके बीच उलझे हुए, अनुचित संबंधों से घृणा करता हूँ। मैं विशेष रूप से कोलाहलपूर्ण भीड़ से घृणा करता हूँ। हालाँकि, मुझे प्रत्येक सृजित प्राणी के हृदय की अशुद्धियों की गहरी जानकारी है, और तुम लोगों को सृजित करने से पहले से ही मैं मानव-हृदय में गहराई से विद्यमान अधार्मिकता को जानता था, और मुझे मानव-हृदय की सारी धूर्तता और कुटिलता की जानकारी थी। इसलिए, भले ही जब लोग अधार्मिक कार्य करते हैं, तब उसका बिल्कुल भी कोई निशान दिखाई न देता हो, किंतु मुझे तब भी पता चल जाता है कि तुम लोगों के हृदयों में समाई अधार्मिकता उन सभी चीजों की प्रचुरता को पार कर जाती है, जो मैंने बनाई हैं। तुम लोगों में से हर एक आम लोगों के शिखर तक उठ चुका है; तुम आम लोगों के पूर्वजों के रूप में आरोहित हो चुके हो। तुम लोग अत्यंत स्वेच्छाचारी हो और तुम तमाम भुनगों के बीच बेकाबू होकर घूमते हो—आराम के स्थान की तलाश में रहते हो और इस भ्रम में हो कि तुम उन भुनगों को निगल जाओगे जो तुमसे छोटे हैं। अपने हृदयों में तुम लोग दुर्भावनापूर्ण और कपटी हो और समुद्र-तल की गहराई में डूबे हुए भूतों को भी पीछे छोड़ चुके हो। तुम गोबर की तली में रहते हो और ऊपर से नीचे तक भुनगों को तब तक परेशान करते हो, जब तक कि वे बिल्कुल अशांत न हो जाएँ, और थोड़ी देर एक-दूसरे से लड़ने-झगड़ने के बाद शांत होते हो। तुम लोगों को अपनी जगह का पता नहीं है, फिर भी तुम लोग गोबर में एक-दूसरे के साथ लड़ाई करते हो। इस तरह की लड़ाई से तुम क्या हासिल कर सकते हो? यदि तुम लोगों के हृदय वास्तव में मेरा भय मानते, तो तुम लोग मेरी पीठ पीछे एक-दूसरे के साथ होड़ कैसे कर सकते थे? तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊँचा क्यों न हो, क्या तुम फिर भी गोबर में एक बदबूदार छोटा-सा कीड़ा ही नहीं हो? क्या तुम पंख उगाकर आकाश में उड़ने वाला कबूतर बन पाओगे? बदबूदार छोटे कीड़ो, तुम लोग मुझ यहोवा की वेदी के चढ़ावे चुराते हो; ऐसा करके क्या तुम लोग अपनी बरबाद, ध्वस्त प्रतिष्ठा बचा सकते हो और इस्राएल के चुने हुए लोग बन सकते हो? तुम लोग बेशर्म कमीने हो! वेदी पर वे भेंटें उन लोगों द्वारा स्नेह के प्रतीक के रूप में मुझे चढ़ाई गई थीं जो मेरा भय मानते हैं। वे मेरे नियंत्रण और मेरे उपयोग के लिए होती हैं, तो लोगों द्वारा मुझे दिए गए छोटे जंगली कबूतर तुम मुझसे कैसे लूट सकते हो? क्या तुम एक यहूदा बनने से नहीं डरते? क्या तुम इस बात से नहीं डरते कि तेरी भूमि रक्त का मैदान बन सकती है? बेशर्म चीज़! क्या तुम्हें लगता है कि लोगों द्वारा चढ़ाए गए जंगली कबूतर तुम जैसे भुनगे का पेट भरने के लिए हैं? मैंने तुम्हें जो दिया है, वह वही है जिससे मैं संतुष्ट हूँ और तुम्हें देने का इच्छुक हूँ; मैंने तुम्हें जो नहीं दिया है, वह मेरी इच्छा पर निर्भर होना चाहिए। तुम बस मेरे चढ़ावे चुरा नहीं सकते। वह जो कार्य करता है, वह मैं, यहोवा—सृष्टिकर्ता—हूँ, और लोग मेरी वजह से भेंटें चढ़ाते हैं। क्या तुम्हें लगता है कि तुम जो दौड़-भाग करते हो, यह उसकी भरपाई है? तुम सच में बेशर्म हो! तुम किसके लिए दौड़-भाग करते हो? क्या यह तुम्हारे अपने लिए नहीं है? तुम मेरी भेंटें क्यों चुराते हो? तुम मेरे बटुए में से पैसे क्यों चुराते हो? क्या तुम यहूदा इस्करियोती के बेटे नहीं हो? मुझ यहोवा को चढ़ाई गई भेंटें याजकों द्वारा उपभोग किए जाने के लिए हैं। क्या तुम याजक हो? तुम मेरी भेंटें दंभ के साथ खाने की हिम्मत करते हो, यहाँ तक कि उन्हें मेज पर छोड़ देते हो; तुम किसी लायक नहीं हो! नालायक कमीने! मुझ यहोवा की आग तुम्हें भस्म कर देगी!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब झड़ते हुए पत्ते अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे, तो तुम्हें अपनी की हुई सभी बुराइयों पर पछतावा होगा

668. मैंने इस तरह से तुम लोगों के बीच कार्य किया और बात की है, मैंने बहुत सारी ऊर्जा और हृदय का रक्त व्यय किया है, फिर भी तुम लोगों ने कब वह सुना है, जो मैं तुम लोगों से सीधे तौर पर कहता हूँ? तुम लोग कहाँ मुझ सर्वशक्तिमान के सामने दंडवत हुए हो? तुम लोग मुझसे ऐसा व्यवहार क्यों करते हो? क्यों जो तुम लोग कहते और करते हो, वह मेरे क्रोध को उकसाता है? तुम्हारे हृदय इतने कठोर क्यों हैं? क्या मैंने कभी भी तुम्हें मार गिराया है? क्यों तुम लोग मुझे दुःखी और चिंतित करने के अलावा और कुछ नहीं करते? क्या तुम लोग अपने ऊपर मेरे, यहोवा के, क्रोध के दिन के आने की प्रतीक्षा में हो? क्या तुम लोग प्रतीक्षा कर रहे हो कि मैं तुम्हारे विद्रोहीपन से उकसाए गए क्रोध को भेजूँ? क्या मैं तुम लोगों के लिए जो कुछ करता हूँ, वह तुम्हारी खातिर नहीं होता है? फिर भी तुम लोग मुझ यहोवा के साथ सदैव इस तरह पेश आए हो : मेरे बलिदान को चुराना, मेरी वेदी के चढ़ावों को अपने घर भेड़िये की माँद में ले जाकर शावकों और शावकों के शावकों को खिलाना; लोगों का एक दूसरे से लड़ना, गुस्से से घूरते हुए और तलवारों व भालों के साथ एक दूसरे का सामना करना, मुझ सर्वशक्तिमान के वचनों को मलमूत्र के समान गंदा करने के लिए शौचालय में उछालना। तुम लोगों की ईमानदारी कहाँ है? तुम लोगों की मानवता पाशविकता बन गई है! तुम लोगों के हृदय बहुत पहले पत्थरों में बदल गए हैं। क्या तुम लोग नहीं जानते हो कि जब मेरे क्रोध का दिन आएगा, तब मुझ सर्वशक्तिमान के विरुद्ध आज की गई तुम लोगों की दुष्टता का मैं न्याय करूँगा? क्या तुम लोगों को लगता है कि मुझे इस प्रकार से बेवकूफ़ बनाकर, मेरे वचनों को कीचड़ में फेंककर और उन पर ध्यान न देकर—क्या तुम लोगों को लगता है कि मेरी पीठ पीछे ऐसा करके तुम लोग मेरी क्रोधित नज़रों से बच सकते हो? क्या तुम लोग नहीं जानते कि जब तुम लोग मेरे बलिदान चुराते थे और मेरी वस्तुओं के लिए लालायित होते थे, तो तुम मुझ यहोवा की आँखों द्वारा पहले ही देखे जा चुके होते थे? क्या तुम लोग नहीं जानते कि जब तुम लोगों ने मेरे बलिदान चुराए, तो यह उस वेदी के सामने किया, जिस पर बलिदान चढ़ाए जाते हैं? तुम लोग कैसे मान सकते हो कि तुम इतने चालाक हो और मुझे इस तरह से धोखा दे सकते हो? मेरा क्रोध तुम लोगों के जघन्य पापों से दूर कैसे जा सकता है? मेरा प्रचंड क्रोध कैसे तुम लोगों के बुरे कर्मों को नज़रंदाज़ कर सकता है? आज तुम लोग जो बुराई करते हो, वह तुम लोगों के लिए कोई बचने का मार्ग नहीं खोलती, बल्कि तुम्हारे कल के लिए ताड़ना इकट्ठी करती है; यह तुम लोगों के प्रति मुझ सर्वशक्तिमान की ताड़ना को उकसाती है। कैसे तुम लोगों के दुष्कृत्य और बुरे वचन मेरी ताड़ना से बच सकते हैं? कैसे तुम लोगों की प्रार्थनाएँ मेरे कानों तक पहुँच सकती हैं? तुम लोगों की अधार्मिकता के लिए मैं दंड से बचने का उपाय कैसे खोल सकता हूँ? मेरे विरुद्ध विद्रोह करने पर मैं कैसे तुम लोगों के दुष्कृत्यों को बख्श सकता हूँ? ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं तुम लोगों की ज़ुबानें काटकर अलग न कर दूँ, जो साँप के समान ज़हरीली हैं? तुम लोग मुझे अपनी धार्मिकता के वास्ते नहीं पुकारते, बल्कि इसके बजाय अपनी अधार्मिकता के परिणामस्वरूप मेरा क्रोध संचित करते हो। मैं तुम लोगों को कैसे क्षमा कर सकता हूँ? मेरी, सर्वशक्तिमान की नजरों में तुम लोगों के शब्द और क्रियाकलाप दोनों ही मलिन के रूप में देखे जाते हैं। मेरी, सर्वशक्तिमान की नजरों में तुम लोगों की अधार्मिकता निरंतर ताड़ना के रूप में देखी जाती है। मेरी धार्मिक ताड़ना और न्याय तुम लोगों से दूर कैसे हो सकता है? क्योंकि तुम लोग मेरे साथ ऐसे पेश आते हो, मुझे दुःखी और क्रोधित करते हो, तो मैं कैसे तुम लोगों को अपने हाथों से बचकर जाने दे सकता हूँ और उस दिन से दूर होने दे सकता हूँ जब मैं, यहोवा तुम लोगों को ताड़ना और शाप दूँगा? क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोगों के सभी बुरे वचन और कथन बहुत पहले ही मेरे कानों तक पहुँच चुके हैं? क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोगों की अधार्मिकता ने बहुत पहले ही मेरी धार्मिकता के पवित्र लबादे को गंदा कर दिया है? क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोगों के विद्रोहीपन ने बहुत पहले से ही मेरे प्रचुर क्रोध को भड़का दिया है? क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोगों ने बहुत पहले से ही मुझे अति कुपित कर रखा है और मैंने बहुत समय तक तुम्हें सहा है? क्या तुम लोग नहीं जानते कि मैं जिस देह में हूँ उसे तुम पहले ही क्षत-विक्षत कर चुके हो, इसे चिथड़ा-चिथड़ा कर चुके हो? मैंने अब तक इतना सहा है कि मैं तुम लोगों के प्रति अब और सहिष्णु नहीं होता और अपना क्रोध प्रकट करता हूँ। क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोगों के दुष्कृत्य पहले ही मेरी आँखों के सामने आ चुके हैं और मेरी पुकारें पहले ही मेरे पिता के कानों तक पहुँच चुकी हैं? वह कैसे तुम लोगों को मेरे साथ ऐसा व्यवहार करने दे सकता है? क्या मैं तुम लोगों पर जो भी कार्य करता हूँ, वह तुम लोगों के वास्ते नहीं है? फिर भी मैं, यहोवा, जो कार्य करता हूँ उसके वास्ते तुम लोगों में से किसकी भलमनसाहत बढ़ी है? क्या मैं अपने पिता की इच्छा के प्रति असमर्पित हो सकता हूँ क्योंकि मैं कमजोर हूँ और क्योंकि मैंने पीड़ा सही है? क्या तुम लोग मेरे हृदय को नहीं समझते? मैं तुम लोगों से उसी तरह बोलता हूँ जैसे यहोवा बोलता था; क्या मैंने तुम लोगों के लिए बहुत ज्यादा बलिदान नहीं किया है? भले ही मैं अपने पिता के कार्य के वास्ते यह सारा कष्ट सहने को तैयार हूँ, फिर भी मेरे कष्ट सहने के कारण तुम लोग उस ताड़ना से कैसे मुक्त हो सकते हो जो मैं तुम पर लाता हूँ? क्या तुम लोगों ने मेरा बहुत आनंद नहीं लिया है? आज, मैं अपने परमपिता द्वारा तुम लोगों को प्रदान किया गया हूँ; क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोग मेरे उदार वचनों से कहीं अधिक का आनंद लेते हो? क्या तुम लोग नहीं जानते कि मेरा जीवन तुम लोगों के जीवन और जिन चीजों का तुम आनंद लेते हो उनके बदले दिया गया था? क्या तुम लोग नहीं जानते कि मेरे पिता ने शैतान के साथ युद्ध के लिए मेरे जीवन का उपयोग किया और कि उसने मेरा जीवन तुम लोगों को प्रदान किया है, तुम लोगों को सौ गुना प्राप्त कराया है और तुम लोगों को कितने ही प्रलोभनों से बचाया है? क्या तुम लोग नहीं जानते कि यह केवल मेरे कार्य के माध्यम से ही है कि तुम लोगों को कई प्रलोभनों और कई उग्र ताड़नाओं से छूट दी गई है? क्या तुम लोग नहीं जानते कि यह केवल मेरे ही कारण है कि मेरे पिता ने तुम लोगों को अभी तक आनंद लेने दिया है? आज तुम लोग इतने अड़ियल कैसे बने रह सकते हो, इतना कि जैसे तुम्हारे हृदयों के ऊपर घट्टे उग आए हों? वह दुष्टता जो तुम आज करते हो, कैसे उस क्रोध के दिन से बच सकती है, जो पृथ्वी से मेरे जाने के बाद आएगा? कैसे मैं उन अड़ियल लोगों को यहोवा के क्रोध से बचने दे सकता हूँ?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, कोई भी जो देह में है, क्रोध के दिन से नहीं बच सकता

669. अतीत के बारे में सोचो : कब तुम लोगों के प्रति मेरी दृष्टि क्रोधित, और मेरी आवाज़ कठोर हुई है? मैंने कब तुम लोगों में मीनमेख निकाली है? मैंने कब तुम लोगों को अनुचित रूप से फटकारा है? मैंने कब तुम लोगों को तुम्हारे मुँह पर डाँटा है? क्या यह मेरे कार्य के वास्ते नहीं है कि मैं तुम लोगों को हर प्रलोभन से बख्श देने के लिए अपने परमपिता को पुकारता हूँ? तुम लोग मेरे साथ इस प्रकार का व्यवहार क्यों करते हो? क्या मैंने कभी भी अपने अधिकार का उपयोग तुम लोगों की देह को मार गिराने के लिए किया है? तुम लोग मुझे इस प्रकार का प्रतिफल क्यों दे रहे हो? मेरे प्रति कभी हाँ और कभी ना करने के बाद, तुम लोग न हाँ में हो और न ही ना में, और फिर तुम मुझे मनाने और मुझसे बातें छिपाने का प्रयास करते हो और तुम लोगों के मुँह अधार्मिक लोगों के थूक से भरे हुए हैं। क्या तुम लोगों को लगता है कि तुम लोगों की ज़ुबानें मेरे आत्मा को धोखा दे सकती हैं? क्या तुम लोगों को लगता है कि तुम लोगों की ज़ुबानें मेरे क्रोध से बच सकती हैं? क्या तुम लोगों को लगता है कि तुम लोगों की ज़ुबानें मुझ यहोवा के कार्यों की, जैसी चाहे वैसी आलोचना कर सकती हैं? क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ जिसकी मनुष्य आलोचना करता है? क्या मैं छोटे से भुनगे को इस प्रकार अपनी ईशनिंदा करने दे सकता हूँ? मैं ऐसे विद्रोह के पुत्रों को कैसे अपने अनंत आशीषों के बीच रख सकता हूँ? तुम लोगों के वचनों और कार्यों ने तुम लोगों को काफी समय तक उजागर और निंदित किया है। जब मैंने स्वर्ग का विस्तार किया और सभी चीज़ों का सृजन किया, तो मैंने अपने अलावा किसी भी प्राणी को उसके मन मुताबिक़ भाग लेने की अनुमति नहीं दी, मैं किसी भी चीज को उसकी इच्छानुसार मेरे कार्य और मेरे प्रबंधन में गड़बड़ करने की अनुमति तो बिल्कुल नहीं देता। मैं किसी भी मनुष्य या वस्तु को सहन नहीं करता; मैं कैसे उन लोगों को छोड़ सकता हूँ, जो मेरे प्रति क्रूर और अमानवीय हैं? मैं कैसे उन लोगों को क्षमा कर सकता हूँ, जो मेरे वचनों से विश्वासघात करते हैं? मैं कैसे उन्हें छोड़ सकता हूँ, जो मुझसे विद्रोह करते हैं? क्या मनुष्य की नियति मुझ सर्वशक्तिमान के हाथों में नहीं है? मैं कैसे तुम्हारी अधार्मिकता और विद्रोहीपन को पवित्र मान सकता हूँ? तुम्हारे पाप मेरी पवित्रता को कैसे मैला कर सकते हैं? मैं अधर्मी की गंदगी से दूषित नहीं होता, न ही मैं अधर्मियों के चढ़ावों का आनंद लेता हूँ। यदि तुम मुझ यहोवा के प्रति वफादार होते, तो क्या तुम मेरी वेदी से बलिदानों को अपने लिए ले सकते थे? क्या तुम मेरे पवित्र नाम की ईशनिंदा के लिए अपनी विषैली ज़ुबान का उपयोग कर सकते थे? क्या तुम इस प्रकार मेरे वचनों से विश्वासघात कर सकते थे? क्या तुम मेरी महिमा और पवित्र नाम को, एक दुष्ट, शैतान की सेवा के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग कर सकते थे? मेरा जीवन पवित्र लोगों के आनंद के लिए प्रदान किया जाता है। मैं तुम्हें कैसे तुम्हारी इच्छानुसार मेरे जीवन के साथ एक खेलने की वस्तु की तरह पेश आने और तुम लोगों के बीच के संघर्ष में इसे एक उपकरण के रूप में उपयोग करने की इजाज़त दे सकता हूँ? मेरे प्रति व्यवहार में तुम लोग इतने निर्दयी और अच्छाई के मार्ग से इतने वंचित कैसे हो सकते हो? क्या तुम लोग नहीं जानते कि मैंने पहले ही तुम लोगों के दुष्कृत्यों को जीवन के इन वचनों में लिख दिया है? तुम लोग कोप के उस दिन से कैसे बच सकते हो जब मैं मिस्र को ताड़ना दूँगा? मैं कैसे तुम लोगों को इस तरह बार-बार मेरा विरोध और मुझसे विद्रोह करने की अनुमति दे सकता हूँ? मैं तुम लोगों को सीधे तौर पर कहता हूँ कि जब वह दिन आएगा, तो तुम लोगों की ताड़ना मिस्र की ताड़ना की अपेक्षा अधिक असहनीय होगी! तुम लोग कैसे मेरे कोप के दिन से बच सकते हो? मैं तुम लोगों से सत्य कहता हूँ : मेरी सहनशीलता तुम लोगों के दुष्कृत्यों के लिए तैयार की गई थी और उस दिन तुम लोगों की ताड़ना के लिए मौजूद है। एक बार जब मेरी सहनशीलता चुक गई, तो क्या तुम लोग वह नहीं होगे जो कुपित न्याय भुगतेंगे? क्या सभी चीज़ें मुझ सर्वशक्तिमान के हाथों में नहीं हैं? मैं कैसे इस प्रकार स्वर्ग के नीचे तुम लोगों को मुझसे विद्रोह करने दे सकता हूँ? तुम लोगों का जीवन अत्यंत कठोर होगा क्योंकि तुम लोग मसीहा से मिल चुके हो, जिसके बारे में कहा गया था कि वह आएगा, फिर भी जो कभी नहीं आया। क्या तुम लोग उसके शत्रु नहीं हो? यीशु तुम लोगों का मित्र रहा है, फिर भी तुम लोग मसीहा के शत्रु हो। क्या तुम लोग नहीं जानते कि यद्यपि तुम लोग यीशु के मित्र हो, पर तुम लोगों के दुष्कृत्यों ने उन लोगों के पात्रों को भर दिया है, जो घृणा योग्य हैं? यद्यपि तुम लोग यहोवा के बहुत करीबी हो, पर क्या तुम लोग नहीं जानते कि तुम लोगों के बुरे वचन यहोवा के कानों तक पहुँचकर उसके क्रोध को भड़का चुके हैं? वह तुम्हारा करीबी कैसे हो सकता है, और वह कैसे तुम्हारे उन पात्रों को नहीं जला सकता, जो दुष्कृत्यों से भरे हुए हैं? कैसे वह तुम्हारा शत्रु नहीं हो सकता?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, कोई भी जो देह में है, क्रोध के दिन से नहीं बच सकता

670. तुम सभी शानदार कुर्सियों पर बैठते हो और युवा पीढ़ी के अपनी किस्म के लोगों को अपने पास बैठाकर भाषण देते हो। तुम लोग कैसे नहीं जान सकते कि तुम्हारे इन “वंशजों” की साँस बहुत पहले ही उखड़ चुकी है और वे मेरा कार्य खो चुके हैं? मेरी महिमा पूरब की भूमि से लेकर पश्चिम की भूमि तक चमकती है, लेकिन जब वह पृथ्वी के छोर तक फैलकर, उठने और चमकने लगेगी, तो मैं उसे पूरब से हटाकर पश्चिम में ले आऊँगा, ताकि तब से अँधेरे के लोग, जिन्होंने पूरब में मुझे त्याग दिया है, रोशनी से वंचित हो जाएँ। जब ऐसा होगा, तब तुम लोग परछाई की घाटी में रहोगे। भले ही आज के लोग पहले से सौ गुना बेहतर हों, फिर भी वे मेरी अपेक्षाएँ पूरी नहीं कर सकते, और वे अभी भी मेरी महिमा के गवाह नहीं हैं। यह जो तुम लोग पहले से सौ गुना बेहतर हो पाए हो, यह पूरी तरह से मेरे कार्य का नतीजा है; यह पृथ्वी पर मेरे कार्य का फल है। लेकिन मुझे फिर भी तुम लोगों के वचनों और कर्मों के लिए और साथ ही तुम्हारे चरित्र के लिए घृणा महसूस होती है, और जिस तरह से तुम मेरे सामने कार्य करते हो, उसके प्रति मुझे अत्यधिक आक्रोश महसूस होता है, क्योंकि तुम्हें मेरे बारे में कोई समझ नहीं है। तो फिर तुम मेरी महिमा को कैसे जी सकते हो, और मेरे भविष्य के कार्य के प्रति पूरी तरह से कैसे लगनशील रह सकते हो? तुम लोगों का विश्वास बहुत सुंदर है; तुम्हारा कहना है कि तुम अपना सारा जीवन-काल मेरे कार्य के लिए खपाने को तैयार हो, और तुम इसके लिए अपने प्राणों का बलिदान करने को तैयार हो, लेकिन तुम्हारे स्वभाव में अधिक बदलाव नहीं आया है। तुम लोग बस घमंड से बोलते हो, बावजूद इस तथ्य के कि तुम्हारा वास्तविक व्यवहार बहुत दयनीय है। यह ऐसा है जैसे कि लोगों की जीभ और होंठ तो स्वर्ग में हों, लेकिन उनके पैर बहुत नीचे पृथ्वी पर हों, परिणामस्वरूप उनके वचन और कर्म तथा उनकी प्रतिष्ठा अभी भी चिथड़ा-चिथड़ा और विध्वस्त हैं। तुम लोगों की प्रतिष्ठा नष्ट हो गई है, तुम्हारा ढंग निम्नस्तरीय है, तुम्हारे बोलने का तरीका निम्न कोटि का है, तुम्हारा जीवन घृणित है; यहाँ तक कि तुम्हारी सारी मनुष्यता नीच अधमता की है। तुम दूसरों के प्रति संकीर्ण सोच रखते हो और छोटी-छोटी बात पर बखेड़ा करते हो। तुम अपनी प्रतिष्ठा और हैसियत को लेकर इस हद तक झगड़ते हो कि नरक और आग की झील में उतरने तक को तैयार रहते हो। तुम लोगों के वर्तमान वचन और कर्म मेरे लिए यह तय करने के लिए काफी हैं कि तुम लोग पापी हो। मेरे कार्य के प्रति तुम लोगों का रवैया मेरे लिए यह तय करने के लिए काफी है कि तुम लोग अधर्मी हो, और तुम लोगों के समस्त स्वभाव यह इंगित करने के लिए पर्याप्त हैं कि तुम लोग गंदी आत्माएँ हो, जो घृणित चीजों से भरी हैं। तुम लोगों की अभिव्यक्तियाँ और जो कुछ भी तुम प्रकट करते हो, वह यह कहने के लिए पर्याप्त हैं कि तुम वे लोग हो, जिन्होंने अशुद्ध आत्माओं का पेट भरकर रक्त पी लिया है। जब स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने का जिक्र होता है, तो तुम लोग अपनी भावनाएँ जाहिर नहीं करते। क्या तुम लोग मानते हो कि तुम्हारा मौजूदा ढंग तुम्हें मेरे स्वर्ग के राज्य के द्वार में प्रवेश कराने के लिए पर्याप्त है? क्या तुम लोग मानते हो कि तुम मेरे कार्य और वचनों की पवित्र भूमि में प्रवेश पाने की अनुमति प्राप्त कर सकते हो, इससे पहले कि मैं तुम लोगों के वचनों और कर्मों का परीक्षण करूँ? कौन है, जो मेरी आँखों में धूल झोंक सकता है? तुम लोगों का घृणित, नीच व्यवहार और बातचीत मेरी दृष्टि से कैसे छिपे रह सकते हैं? तुम लोगों के जीवन मेरे द्वारा उन अशुद्ध आत्माओं का रक्त और मांस पीने और खाने वालों के जीवन के रूप में तय किए गए हैं, क्योंकि तुम लोग रोज़ाना मेरे सामने उनका अनुकरण करते हो। मेरे सामने तुम्हारा व्यवहार विशेष रूप से ख़राब और नीचतापूर्ण रहा है, तो मैं तुम्हें घिनौना कैसे न समझता? तुम्हारे शब्दों में अशुद्ध आत्माओं की अपवित्रताएँ है : तुम फुसलाते हो, भेद छिपाते हो चापलूसी करते हो, ठीक उन लोगों की तरह जो टोने-टोटकों में संलग्न रहते हैं और उनकी तरह भी जो कपट करते हैं और अधर्मियों का खून पीते हैं। मनुष्य की समस्त अभिव्यक्तियाँ बेहद अधार्मिक हैं, तो फिर सभी लोगों को पवित्र भूमि में कैसे रखा जा सकता है, जहाँ धर्मी रहते हैं? क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारा यह घिनौना व्यवहार तुम्हें उन अधर्मी लोगों से पवित्र ठहराकर अलग कर देता है? तुम्हारी साँप जैसी जीभ अंततः तुम्हारी इस देह का नाश कर देगी, जो तबाही बरपाती है और घृणापूर्ण कार्य करती है, और तुम्हारे वे हाथ भी, जो अशुद्ध आत्माओं के रक्त से सने हैं, अंततः तुम्हारी आत्मा को नरक में खींच लेंगे। तो फिर तुम मैल से सने अपने हाथों को साफ़ करने का यह मौका क्यों नहीं लपकते? और तुम अधर्मी शब्द बोलने वाली अपनी इस जीभ को काटकर फेंकने के लिए इस अवसर का लाभ क्यों नहीं उठाते? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम अपने हाथों, जीभ और होंठों के लिए नरक की आग में जलने के लिए तैयार हो? मैं तमाम लोगों के हृदयों की अपनी दोनों आँखों से पड़ताल करता हूँ, क्योंकि मानव-जाति के निर्माण से बहुत पहले मैंने उनके दिलों को अपने नियंत्रण में ले लिया था। मैंने बहुत पहले लोगों के दिलों की असलियत जान ली थी, इसलिए उनके विचार मेरी दृष्टि से कैसे बच सकते थे? मेरे आत्मा की आग से जलने से बचने के लिए उनके पास अभी भी समय कैसे हो सकता है?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम सभी कितने नीच चरित्र के हो!

671. मैं कई वसंत और पतझड़ से तुम लोगों के बीच में चलता रहा हूँ; मैं लंबे समय तक तुम लोगों के बीच जीया हूँ, और तुम लोगों के साथ जीया हूँ। तुम लोगों का कितना घृणित व्यवहार मेरी आँखों के सामने से फिसला है? तुम्हारे वे हृदयस्पर्शी शब्द लगातार मेरे कानों में गूँजते हैं; तुम लोगों के हज़ारों-करोड़ों संकल्प मेरी वेदी पर रखे गए हैं—इतने ज्यादा कि उन्हें गिना भी नहीं जा सकता। लेकिन तुम लोगों का जो समर्पण है और जितना तुम अपने आपको खपाते हो, वह रंचमात्र भी नहीं है। मेरी वेदी पर तुम लोग ईमानदारी की एक नन्ही बूँद भी नहीं रखते। मुझ पर तुम लोगों के विश्वास के फल कहाँ हैं? तुम लोगों ने मुझसे अनंत अनुग्रह प्राप्त किया है और तुमने स्वर्ग के अनंत रहस्य देखे हैं; यहाँ तक कि मैंने तुम लोगों को स्वर्ग की लपटें भी दिखाई हैं, लेकिन मैं तुम लोगों को जलाना सह नहीं सकता था। फिर भी, बदले में तुम लोगों ने मुझे कितना दिया है? तुम लोग मुझे कितना देने के लिए तैयार हो? तुम्हारे हाथ में जो भोजन है जो मैंने प्रदान किया है, पलटकर उसी को तुम मुझे चढ़ा देते हो, यह तक कहते हो कि वह तुम्हें अपनी कड़ी मेहनत के पसीने के बदले मिला है और तुम अपना सर्वस्व मुझे चढ़ा रहे हो। तुम यह कैसे नहीं जानते कि मेरे लिए तुम्हारा “योगदान” बस वे सभी चीजें हैं, जो मेरी ही वेदी से चुराई गई हैं? इतना ही नहीं, अब तुम वे चीज़ें मुझे चढ़ा रहे हो, क्या तुम मुझे धोखा नहीं दे रहे? तुम यह कैसे नहीं जान पाते कि आज जिन भेंटों का आनंद मैं उठा रहा हूँ, वे मेरी वेदी पर चढ़ाई गई सभी भेंटें हैं, न कि जो तुमने अपनी कड़ी मेहनत से कमाई हैं और फिर मुझे चढ़ावा दिया है? तुम लोग वास्तव में मुझे इस तरह धोखा देने की हिम्मत करते हो, इसलिए मैं तुम लोगों को कैसे माफ़ कर सकता हूँ? तुम लोग मुझसे इसे और सहने की अपेक्षा कैसे कर सकते हो? मैंने तुम लोगों को सब कुछ प्रदान किया है, मैंने तुम लोगों के लिए सब कुछ खोलकर रख दिया है और तुम्हारी ज़रूरतें पूरी की हैं, तुम लोगों की सोच के दायरे को बहुत बढ़ाया है, फिर भी तुम लोग अपनी अंतरात्मा की अनदेखी कर इस तरह मुझे धोखा देते हो। मैंने निःस्वार्थ भाव से अपना सब कुछ तुम लोगों को प्रदान किया है, ताकि तुम लोग अगर पीड़ित भी होते हो, तो भी तुम लोगों को मुझसे वह सब मिल जाए, जो मैं स्वर्ग से लाया हूँ। फिर भी, तुम लोगों में बिल्कुल भी समर्पण नहीं है, और अगर तुमने कोई छोटा-मोटा योगदान किया भी हो, तो बाद में तुम मुझसे उसका “हिसाब बराबर” करने की कोशिश करते हो। क्या तुम्हारा योगदान शून्य नहीं माना जाएगा? तुमने मुझे मात्र रेत का एक कण चढ़ाया है, जबकि माँगा एक टन सोना है। क्या तुम बस बेतुके ढंग से माँग करने वाले नहीं बन रहे हो? मैं तुम लोगों के बीच काम करता हूँ। उस दस प्रतिशत का भी कोई नामोनिशान नहीं है, जो मुझे मिलना चाहिए, अतिरिक्त बलिदानों की तो बात ही छोड़ दो। इसके अलावा, धर्मपरायण लोगों द्वारा भेंट चढ़ाए जाने वाले उस दस प्रतिशत को भी बुरे लोगों द्वारा छीन लिया जाता है। क्या तुम सभी मुझसे तितर-बितर नहीं हो गए हो? क्या तुम सब मेरे विरोधी नहीं हो? क्या तुम सब मेरी वेदी को नष्ट नहीं कर रहे हो? ऐसे लोगों को मेरी आँखें एक खज़ाने के रूप में कैसे देख सकती हैं? क्या वे सुअर और कुत्ते नहीं हैं, जिनसे मैं घृणा करता हूँ? मैं तुम लोगों के बुरे कर्मों को खज़ाना कैसे कह सकता हूँ? मेरा कार्य वास्तव में किसके लिए किया जाता है? क्या इसका प्रयोजन केवल मेरे द्वारा तुम लोगों को मार गिराकर अपना अधिकार प्रकट करना हो सकता है? क्या तुम सबके जीवन मेरे एक ही वचन पर नहीं टिके हैं? ऐसा क्यों है कि मैं तुम लोगों को निर्देश देने के लिए केवल वचनों का प्रयोग कर रहा हूँ, और मैंने जितनी जल्दी हो सके, तुम लोगों को मार गिराने के लिए अपने वचनों को तथ्यों में नहीं बदला है? क्या मेरे वचनों और कार्य का उद्देश्य केवल लोगों पर प्रहार करना ही है? क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ, जो अंधाधुंध निर्दोषों को मार डालता है? इस समय तुम लोगों में से कितने मानव-जीवन का सही मार्ग खोजने के लिए अपने पूर्ण अस्तित्व के साथ मेरे सामने आ रहे हैं? मेरे सामने केवल तुम लोगों के शरीर हैं, तुम्हारे दिल अभी भी निरंकुश और मुझसे बहुत, बहुत दूर हैं। चूँकि तुम लोग नहीं जानते कि मेरा कार्य वास्तव में क्या है, इसलिए तुम लोगों में से कई ऐसे हैं, जो मुझे छोड़ जाना और मुझसे दूरी बनाना चाहते हैं, और इसके बजाय ऐसे आनंद के संसार में रहने की आशा करते हैं, जहाँ कोई ताड़ना या न्याय नहीं है। क्या लोग अपने दिलों में इसी की कामना नहीं करते? मैं तुम्हें बाध्य करने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ। तुम जो भी मार्ग अपनाते हो, वह तुम्हारी अपनी पसंद है। आज के मार्ग के साथ न्याय और शाप है, लेकिन तुम सबको पता होना चाहिए कि जो कुछ भी मैंने तुम लोगों को दिया है—चाहे वह न्याय हो या ताड़ना—वे सर्वोत्तम उपहार हैं जो मैंने तुम लोगों को दिए हैं, और वे सब वे चीजें हैं जिनकी तुम लोगों को तत्काल आवश्यकता है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम सभी कितने नीच चरित्र के हो!

672. शैतान द्वारा भ्रष्ट की गई सभी आत्माएँ, शैतान की सत्ता के नियंत्रण में हैं। केवल वे लोग जो मसीह में विश्वास करते हैं उन्हें ही अलग किया गया है, शैतान के शिविर से बचाया गया है और वे आज के राज्य में लाए गए हैं। अब ये लोग शैतान के प्रभाव में नहीं रहते हैं। फिर भी, मनुष्य की प्रकृति अभी भी मनुष्य के शरीर में जड़ जमाए हुए है, कहने का अर्थ है कि भले ही तुम लोगों की आत्माएँ बचा ली गई हैं, तुम लोगों की प्रकृति अभी भी पहले जैसी ही है और इस बात की अभी भी सौ प्रतिशत संभावना है कि तुम लोग मेरे साथ विश्वासघात करोगे। यही कारण है कि मेरा कार्य इतने लंबे समय तक चलता है, क्योंकि तुम लोगों की प्रकृति अड़ियल है। तुम लोग अपने कर्तव्य निभाते हुए अभी अपनी पूरी क्षमता से कष्ट उठा रहे हो, फिर भी यह एक अखंडनीय तथ्य है कि तुम लोगों में से प्रत्येक मुझे धोखा देने और शैतान की सत्ता में लौटने, उसके शिविर में लौटने, और अपने पुराने जीवन में वापस जाने में सक्षम है। उस समय, तुम लोगों के लिए संभव नहीं होगा कि तुम लेशमात्र भी वैसी इंसानियत या मनुष्य से समानता दिखा सको, जैसी तुम अब दिखा रहे हो। गंभीर मामलों में, तुम लोगों को नष्ट कर दिया जाएगा और इससे भी बढ़कर तुम लोगों को अनंत सर्वनाश के हवाले कर दिया जाएगा, गंभीर रूप से दंडित किया जाएगा, फिर कभी भी पुनर्जन्म लेने नहीं दिया जाएगा। यह तुम लोगों के सामने रखी गई समस्या है। मैं तुम लोगों को इस तरह से याद दिला रहा हूँ ताकि पहले तो, मेरा कार्य व्यर्थ नहीं जाएगा और दूसरे, ताकि तुम सभी लोग प्रकाश के दिनों में रह सको। वास्तव में, मेरा कार्य व्यर्थ होगा या नहीं, यह महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि तुम लोग एक खुशहाल जीवन और एक अद्भुत भविष्य पाने में सक्षम हो। मेरा कार्य लोगों की आत्माओं को बचाने का कार्य है। यदि तुम्हारी आत्मा शैतान के हाथों में पड़ जाती है तो तुम्हारी देह शांति में नहीं रहेगी। यदि मैं तुम्हारी देह की रक्षा कर रहा हूँ तो तुम्हारी आत्मा भी निश्चित रूप से मेरी देखभाल के अधीन होगी। यदि मैं तुमसे सच में घृणा करूँ तो तुम्हारी देह और आत्मा तुरंत शैतान के हाथों में पड़ जाएँगे। क्या तुम कल्पना कर सकते हो कि तब तुम्हारी दशा किस तरह की होगी? यदि किसी दिन मेरे वचनों का तुम पर कोई असर न हुआ तो या तो मैं तुम सभी लोगों को शैतान को सौंप दूँगा और तुम्हें दी जाने वाली यातना को प्रचंड करने की अनुमति दे दूँगा जब तक कि मेरा गुस्सा पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता, अथवा मैं कभी न सुधर सकने योग्य तुम मानवों को व्यक्तिगत रूप से दंडित करूँगा क्योंकि मेरे साथ विश्वासघात करने वाले तुम लोगों के हृदय कभी नहीं बदले होंगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, एक बहुत गंभीर समस्या : विश्वासघात (2)

673. मैं केवल यह उम्मीद करता हूँ कि मेरे कार्य के अंतिम चरण में तुम लोग अपने सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन में सक्षम होंगे, और तुम स्वयं को पूरे मन से समर्पित करोगे, अधूरे मन से नहीं। बेशक, मैं यह उम्मीद भी करता हूँ कि तुम सभी लोगों को अच्छा गंतव्य प्राप्त हो सके। फिर भी, मेरी तुमसे अपेक्षा है, और वह यह है कि तुम लोग मुझे अपनी एकमात्र और अंतिम वफादारी समर्पित करने में सर्वोत्तम निर्णय लो। अगर किसी में वह एकमात्र वफादारी नहीं है, तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से शैतान की सँजोई हुई संपत्ति है और मैं आगे उसे इस्तेमाल करने के लिए नहीं रखूँगा, बल्कि उसे उसके माता-पिता द्वारा देखभाल किए जाने के लिए घर भेज दूँगा। मेरा कार्य तुम लोगों के लिए एक बड़ी मदद है; मैं तुम लोगों से एक ईमानदार और ऊपर उठने का आकांक्षी हृदय पाने की उम्मीद करता हूँ, लेकिन मेरे हाथ अभी तक खाली हैं। इस बारे में सोचो : अगर मैं किसी दिन अब भी ऐसी अकथनीय वेदना में हूँ, तो फिर तुम लोगों के प्रति मेरा रवैया क्या होगा? क्या मैं तब भी तुम्हारे प्रति वैसा ही सौम्य रहूँगा, जैसा अब हूँ? क्या मेरा हृदय तब भी उतना ही शांत होगा, जितना अब है? क्या तुम लोग उस व्यक्ति की भावनाएँ समझते हो, जिसने कड़ी मेहनत से खेत जोता हो और उसे फसल की कटाई में अन्न का एक दाना भी नसीब न हुआ हो? क्या तुम लोग यह समझते हो कि आदमी को बड़ा आघात लगने पर उसके दिल को कितनी भारी चोट पहुँचती है? क्या तुम लोग उस व्यक्ति की कड़वाहट का अंदाज़ा लगा सकते हो, जो कभी आशा से भरा हो, पर जिसे मनमुटाव के साथ विदा होना पड़ा हो? क्या तुम लोगों ने उस व्यक्ति का गुस्सा देखा है, जिसे भड़काया गया हो? क्या तुम लोग उस व्यक्ति की बदला लेने की आतुरता जानते हो, जिसके साथ शत्रुता और धोखे का व्यवहार किया गया हो? अगर तुम इन लोगों की मानसिकता समझ सकते हो, तो मैं सोचता हूँ, तुम्हारे लिए यह कल्पना करना कठिन नहीं होना चाहिए कि अपने प्रतिशोध के समय परमेश्वर का रवैया क्या होगा! अंत में, मुझे उम्मीद है कि तुम सब अपने गंतव्य के लिए गंभीर प्रयास करोगे; हालाँकि, अच्छा होगा कि तुम अपने प्रयासों में धोखा देने वाले साधन न अपनाओ, अन्यथा मैं अपने दिल में तुमसे निराश बना रहूँगा। और यह निराशा कहाँ ले जाती है? क्या तुम लोग स्वयं को ही बेवकूफ नहीं बना रहे हो? जो लोग अपने गंतव्य के विषय में सोचते हैं, पर फिर भी उसे बरबाद कर देते हैं, उनके बचाए जाने की संभावना सबसे कम है। यहाँ तक कि अगर वे बेहद नाराज और क्रोधित भी हो जाएँ, तो ऐसे लोगों पर कौन दया करेगा? संक्षेप में, मैं अभी भी तुम लोगों के लिए ऐसे गंतव्य की कामना करता हूँ, जो उपयुक्त और सुंदर दोनों हो, और उससे भी बढ़कर, मैं उम्मीद करता हूँ कि तुम लोगों में से कोई भी विपत्ति में नहीं फँसेगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, गंतव्य के बारे में

674. मेरा अंतिम कार्य केवल मनुष्यों को दंड देने के लिए ही नहीं है, बल्कि मनुष्य की मंजिल की व्यवस्था करने के लिए भी है। इससे भी अधिक, यह सभी लोगों से मेरे कर्म और कार्य स्वीकार करवाने की खातिर है। मैं हर एक मनुष्य को दिखा दूँगा कि जो कुछ मैंने किया है, वह सही है, और वह मेरे स्वभाव की अभिव्यक्ति है, कि यह मनुष्य का कार्य नहीं है, और प्रकृति तो वह बिल्कुल भी नहीं है जिसने मानवजाति की रचना की है, और इसके बजाय यह मैं हूँ जो सभी चीजों में हर जीव का पोषण करता है। मेरे अस्तित्व के बिना मानवजाति केवल नष्ट होगी और आपदा का दंड भोगेगी। कोई भी मानव फिर कभी सुंदर सूर्य और चंद्रमा या हरे-भरे संसार को नहीं देखेगा; मानवजाति केवल काली, शीत रात्रि और मृत्यु की छाया की निर्मम घाटी देखेगी। मैं ही मानवजाति का एकमात्र उद्धार हूँ। मैं ही मानवजाति की एकमात्र आशा हूँ, और इससे भी बढ़कर, मैं ही वह हूँ जिस पर संपूर्ण मानवजाति का अस्तित्व निर्भर करता है। मेरे बिना मानवजाति तुरंत अवरुद्ध हो जाएगी, मेरे बिना मानवजाति केवल बर्बाद कर देने वाला विनाश झेलेगी और सभी प्रकार के भूतों द्वारा कुचली जाएगी, इसके बावजूद कोई मुझ पर ध्यान नहीं देता। मैंने वह काम किया है जो किसी दूसरे के द्वारा नहीं किया जा सकता, और मैं केवल यह आशा करता हूँ कि मनुष्य कुछ अच्छे कर्मों से मुझे प्रतिफल दे सके। यद्यपि कुछ ही लोग मुझे प्रतिफल दे पाए हैं, फिर भी मैं मनुष्यों के संसार में अपनी यात्रा पूरी करूँगा और अपने उस कार्य का अगला कदम आरंभ करूँगा जो अभी खुलने वाला है, क्योंकि इन अनेक वर्षों में मनुष्यों के बीच मेरे आने-जाने की सारी भागदौड़ फलदायक रही है, और मैं अति प्रसन्न हूँ। मैं जिस चीज की परवाह करता हूँ, वह मनुष्यों की संख्या नहीं, बल्कि उनके अच्छे कर्म हैं। किसी भी स्थिति में, मैं आशा करता हूँ कि तुम लोग अपनी मंजिल के लिए पर्याप्त अच्छे कर्म तैयार करोगे। तभी मुझे संतुष्टि होगी; अन्यथा तुम लोगों में से कोई भी उस आपदा के हमले से नहीं बचेगा। आपदा मेरे द्वारा शुरू की जाती है और निश्चित रूप से मेरे द्वारा ही आयोजित की जाती है। यदि तुम लोग मेरी नजरों में अच्छे दिखाई नहीं दे सकते, तो तुम लोग आपदा भुगतने से नहीं बच सकते। क्लेश के बीच तुम लोगों के कार्य और कर्म पूरी तरह से उचित नहीं माने गए, क्योंकि तुम लोगों की आस्था और प्रेम खोखले थे और तुम लोगों ने स्वयं को केवल डरपोक या मजबूत दिखाया। इस संबंध में, मैं केवल भले या बुरे का ही न्याय करूँगा। मेरे लिए अब भी सबसे महत्वपूर्ण तुम लोगों में से प्रत्येक के क्रियाकलाप, कर्म और समस्त अभिव्यक्तियाँ ही हैं, जिनके आधार पर मैं तुम लोगों के परिणाम निर्धारित करूँगा। हालाँकि, मुझे यह स्पष्ट कर देना चाहिए : मैं उन लोगों पर अब और दया नहीं करूँगा, जिन्होंने क्लेश के समय में मेरे प्रति रत्ती भर भी निष्ठा नहीं दिखाई, क्योंकि मेरी दया का विस्तार केवल इतनी दूर तक ही है। इसके अतिरिक्त, मुझे ऐसा कोई इंसान पसंद नहीं जिसने कभी मेरे साथ विश्वासघात किया हो और ऐसे लोगों के साथ जुड़ना तो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं जो अपने मित्रों के हितों के साथ गद्दारी करते हैं। चाहे जो भी व्यक्ति हो, मेरा यही स्वभाव है। मुझे तुम लोगों को यह बता देना चाहिए : जो कोई भी पूरी तरह से मेरा दिल तोड़ता है, उसे मुझसे दूसरी बार क्षमा नहीं मिलेगी, और जो कोई मेरे प्रति वफादार रहा है, वह सदैव मेरे दिल में रहेगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपनी मंजिल के लिए पर्याप्त अच्छे कर्म तैयार करो

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परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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