अपने पुनरूत्थान के बाद अपने चेलों के लिए यीशु के वचन

(यूहन्ना 20:26-29) आठ दिन के बाद उसके चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उनके साथ था; और द्वार बन्द थे, तब यीशु आया और उनके बीच में खड़े होकर कहा, "तुम्हें शान्ति मिले।" तब उसने थोमा से कहा, "अपनी उँगली यहाँ लाकर मेरे हाथों…

2018-05-29 23:34:35

अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है

(लूका 24:30-32) जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उनकी आँखों से छिप गया। उन्होंने आपस में कहा, "जब वह मार्ग…

2018-05-29 23:39:23

मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है

1. (मत्ती 12:1) उस समय यीशु सब्त के दिन खेतों में से हो कर जा रहा था, और उसके चेलों को भूख लगी तो वे बालें तोड़-तोड़कर खाने लगे। 2. (मत्ती12:6-8) पर मैं तुम से कहता हूँ कि यहाँ वह है जो मन्दिर से भी बड़ा है। यदि तुम इसका…

2018-05-29 22:52:16

खोई हुई भेड़ का दृष्टान्त

(मत्ती18:12-14) क्या तुम समझते हो? यदि किसी मनुष्य की सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक भटक जाए, तो क्या वह निन्यानबे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को ना ढूँढ़ेगा? और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हू…

2018-05-29 22:56:58

प्रभु का प्रेम

सात बार के सत्तर गुने तक क्षमा करो। प्रभु का प्रेम

1. सात बार के सत्तर गुने तक क्षमा करो। (मत्ती18:21-22) तब पतरस ने आकर उस से कहा, "हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूँ, क्या सात बार तक?" यीशु ने उससे कहा, मैं तुझ से यह नहीं कहता कि सा…

2018-05-29 23:02:37

प्रभु यीशु के दृष्टान्त

पहाड़ी उपदेश प्रभु यीशु के दृष्टान्त आज्ञाएँ

1. पहाड़ी उपदेश 1) धन्य वचन (मत्ती 5:3-12) 2) नमक और ज्योति (मत्ती 5:13-16) 3) व्यवस्था (मत्ती 5:17-20) 4) क्रोध (मत्ती 5:21-26) 5) व्यभिचार (मत्ती 5:27-30) 6) तलाक (मत्ती 5:31-32) 7) मन्नतें (मत्ती 5:33-37) 8) आँ…

2018-05-29 23:14:46

यीशु अद्भुत काम करता है।

1) यीशु पाँच हज़ार को भोजन कराता है (यूहन्ना 6:8-13) उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उससे कहा, "यहाँ एक लड़का है जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो मछलियाँ हैं; परन्तु इतने लोगों के लिए वे क्या हैं?" यीशु …

2018-05-29 23:21:50

यीशु फरीसियों को डाँटता है

1. फरीसियों के द्वारा यीशु पर दोष लगाया जाना (मरकुस 3:21-22) जब उसके कुटुम्बियों ने यह सुना, तो उसे पकड़ने के लिए निकले; क्योंकि वे कहते थे कि उस का चित ठिकाने नहीं है। शास्त्री भी जो यरूशलेम से आए थे, यह कहते थे, कि "…

2018-05-29 23:27:34