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सूचीपत्र

मसीह-विरोधी किसे कहते हैं? एक मसीह-विरोधी को कैसे पहचाना जा सकता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

उन दिनों में, जब परमेश्वर ने देहधारण नहीं किया था, तब क्या किसी मनुष्य ने परमेश्वर का विरोध किया है इसका मापन इस बात पर आधारित था कि क्या मनुष्य ने स्वर्ग के अदृश्य परमेश्वर की आराधना की और उनकी खोज की। "परमेश्वर के प्रति विरोध" की परिभाषा उस समय इतनी वास्तविक नहीं थी, क्योंकि तब मनुष्य परमेश्वर को समझ नहीं सकता था और न ही उसकी छवि को या इस बात को जान सकता था कि उन्होंने कैसे कार्य किया और कैसे वचन बोले। मनुष्य की परमेश्वर के बारे में कोई अवधारणा नहीं थी, और वह परमेश्वर पर अस्पष्ट रूप में विश्वास करता था, क्योंकि वे मनुष्यों पर प्रकट नहीं हुए थे। इस कारण, मनुष्य ने अपनी कल्पनाओं में परमेश्वर पर जैसे भी विश्वास किया, परमेश्वर ने मनुष्य की निंदा नहीं की या मनुष्यों से अधिक कुछ नहीं माँगा, क्योंकि मनुष्य परमेश्वर को बिल्कुल भी नहीं देख सकता था। जब परमेश्वर ने देहधारण किया और मनुष्यों के बीच काम करने आया, तो सभी ने उन्हें देखा और उसके वचनों को सुना, और सभी ने देह में परमेश्वर के कार्यों को देखा। उस समय, मनुष्य की जितनी भी अवधारणाएँ थी, वे सब मानो साबुन के झाग में घुल कर बह गईं। वे जो परमेश्वर को देहधारण करते हुए देखते हैं, और अपने-अपने हृदयों में आज्ञाकारी हैं, उन सभी की निंदा नहीं की जाएगी, जबकि वे जो जानबूझकर परमेश्वर के विरुद्ध खड़े होते हैं, परमेश्वर का विरोध करने वाले माने जाएँगे। ऐसे लोग ईसा-विरोधी हैं और शत्रु हैं जो जानबूझकर परमेश्वर के विरोध में खड़े होते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं" से उद्धृत

यदि तुमने वर्षों तक परमेश्वर पर विश्वास किया है, फिर भी कभी भी उसका आज्ञापालन नहीं किया है या उसके सभी वचनों को स्वीकार नहीं किया है, बल्कि उसके बजाए परमेश्वर से समर्पण करने को और तुम्हारी अवधारणाओं के अनुसार कार्य करने को कहा है, तो तुम सब से अधिक विद्रोही व्यक्ति हो, और तुम एक अविश्वासी हो। एक ऐसा व्यक्ति कैसे परमेश्वर के कार्य और वचनों का पालन करने में समर्थ हो सकता है जो मनुष्य की अवधारणाओं के अनुरूप नहीं है? सबसे अधिक विद्रोही मनुष्य वह है जो जानबूझकर परमेश्वर की अवहेलना करता है और उसका विरोध करता है। वह परमेश्वर का शत्रु है और मसीह विरोधी है। ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के नए कार्य के प्रति निरंतर शत्रुतापूर्ण रवैया रखता है, ऐसे व्यक्ति ने कभी भी समर्पण करने का जरा सा भी इरादा नहीं दिखाया है, और कभी भी खुशी से समर्पण नहीं दिखाया है और अपने आपको दीन नहीं बनाया है। वह दूसरों के सामने अपने आपको ऊँचा उठाता है और कभी भी किसी के प्रति भी समर्पण नहीं दिखाता है। परमेश्वर के सामने, वह स्वयं को वचन का उपदेश देने में सबसे ज़्यादा निपुण समझता है और दूसरों पर कार्य करने में अपने आपको सबसे अधिक कुशल समझता है। वह उस अनमोल "ख़जाने" को कभी नहीं छोड़ता है जो पहले से ही उसके अधिकार में है, बल्कि आराधना करने, दूसरों को उसके बारे में उपदेश देने के लिए, उन्हें अपने परिवार की विरासत मानता है, और उन मूर्खों को उपदेश देने के लिए उनका उपयोग करता है जो उसकी पूजा करते हैं। कलीसिया में वास्तव में कुछ संख्या में ऐसे लोग हैं। ऐसा कहा जा सकता है कि वे "अदम्य नायक" हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी परमेश्वर के घर में डेरा डाले हुए हैं। वे वचन (सिद्धांत) का उपदेश देना अपना सर्वोत्तम कर्तव्य समझते हैं। साल दर साल और पीढ़ी दर पीढ़ी वे अपने "पवित्र और अनुलंघनीय" कर्तव्य को जोशपूर्वक लागू करने की कोशिश करते रहते हैं। कोई उन्हें छूने का साहस नहीं करता है और एक भी व्यक्ति खुलकर उनकी निन्दा करने का साहस नहीं करता है। वे परमेश्वर के घर में "राजा" बन गए हैं, और युगों-युगों से दूसरों पर क्रूरतापूर्वक शासन करते हुए उच्छृंखल चल रहे हैं। दुष्टात्माओं का यह झुंड संगठित होकर काम करता है और मेरे कार्य का विध्वंस करने की कोशिश करता है; मैं इन जीवित दुष्ट आत्माओं को अपनी आँखों के सामने अस्तित्व में रहने की अनुमति कैसे दे सकता हूँ?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे" से उद्धृत

ज्ञात हो कि तुम लोग परमेश्वर के कार्य का विरोध करते हो, या आज कार्य को मापने के लिए अपनी धारणा का उपयोग करते हो, क्योंकि तुम लोग परमेश्वर के कार्य के सिद्धान्तों को नहीं जानते हो, और क्योंकि तुम पवित्र आत्मा के कार्य को पर्याप्त गम्भीरता से नहीं लेते हो। तुम लोगों का परमेश्वर के प्रति विरोध और पवित्र आत्मा के कार्य में अवरोध तुम लोगों की धारणा और तुम लोगों के अंतर्निहित अहंकार के कारण है। ऐसा इसलिए नहीं कि परमेश्वर का कार्य ग़लत है, बल्कि इसलिए कि तुम लोग प्राकृतिक रूप से बहुत ही ज्यादा अवज्ञाकारी हो। परमेश्वर में विश्वास हो जाने के बाद भी, कुछ लोग यकीन से यह नहीं कह सकते हैं कि मनुष्य कहाँ से आया, फिर भी वे पवित्र आत्मा के कार्यों के सही और गलत होने के बारे में बताते हुए सार्वजनिक भाषण देने का साहस करते हैं। और वे यहाँ तक कि प्रेरितों को भी व्याख्यान देते हैं जिनके पास पवित्र आत्मा का नया कार्य है, उन पर टिप्पणी करते हैं और बेसमय बोलते रहते हैं; उनकी मानवता बहुत ही कम होती है, और उनमें बिल्कुल भी समझ नहीं होती है। क्या वह दिन नहीं आएगा जब इस प्रकार के लोग पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा अस्वीकृत कर दिए जाएँगे, और नरक की आग द्वारा जलाए जाएँगे? वे परमेश्वर के कार्यों को नहीं जानते हैं, फिर भी उसके कार्य की आलोचना करते हैं और परमेश्वर को यह निर्देश देने की कोशिश करते हैं कि कार्य किस प्रकार किया जाए। इस प्रकार के अविवेकी लोग परमेश्वर को कैसे जान सकते हैं? मनुष्य परमेश्वर को खोजने और अनुभव करने की प्रक्रिया के दौरान परमेश्वर को जान जाता है; यह नहीं कि वह अपनी सनक में उसकी आलोचना करने से पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता के माध्यम से परमेश्वर को जान जाएगा है। जितना अधिक परिशुद्ध परमेश्वर के बारे में लोगों का ज्ञान होता है, उतना ही कम वे उसका विरोध करते हैं। इसके विपरीत, लोग जितना कम परमेश्वर के बारे में जानते हैं, उतना ही ज्यादा परमात्मा का विरोध करने की उनकी संभावना होती है। तुम्हारी धारणाएँ, तुम्हारी पुरानी प्रकृति, और तुम्हारी मानवता, चरित्र और नैतिक दृष्टिकोण वह "पूँजी" है जिससे तुम परमेश्वर का प्रतिरोध करते हो, और तुम जितना अधिक भ्रष्ट, तुच्छ और निम्न होगे, उतना ही अधिक तुम परमेश्वर के शत्रु बन जाते हो। जो लोग गम्भीर धारणाएँ रखते हैं और आत्मतुष्ट स्वभाव के हैं वे और भी अधिक देहधारी परमेश्वर के साथ शत्रुता में हैं और इस प्रकार के लोग मसीह-विरोधी हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" से उद्धृत

ऐसे लोग जो परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझते हैं वे लोग हैं जो परमेश्वर के विरुद्ध खड़े होते हैं, और इससे भी अधिक वे लोग हैं जो परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य से अवगत हैं फिर भी परमेश्वर को संतुष्ट करने का प्रयास नहीं करते हैं। वे जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में बाइबल पढ़ते हैं, वे हर दिन बाइबल पढ़ते हैं, फिर भी उनमें से एक भी परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझता है। एक भी इंसान परमेश्वर को नहीं जान पाता है; और यही नहीं, उनमें से एक भी परमेश्वर के हृदय के अनुरूप नहीं है। वे सबके सब व्यर्थ, अधम लोग हैं, जिनमें से प्रत्येक परमेश्वर को सिखाने के लिए ऊँचे पर खड़ा हैं। यद्यपि वे परमेश्वर के नाम पर धमकी देते हैं, किंतु वे जानबूझ कर उसका विरोध करते हैं। यद्यपि वे स्वयं को परमेश्वर का विश्वासी दर्शाते हैं, किंतु ये वे लोग हैं जो मनुष्यों का मांस खाते और रक्त पीते हैं। ऐसे सभी मनुष्य शैतान हैं जो मनुष्यों की आत्माओं को निगल जाते हैं, मुख्य राक्षस हैं जो जानबूझकर उन्हें विचलित करते हैं जो सही मार्ग पर कदम बढ़ाना चाहते हैं या सही मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं, और वे बाधाएँ हैं जो परमेश्वर को खोजने वालों के मार्ग में रुकावट उत्पन्न करती हैं। यद्यपि वे "मज़बूत देह" वाले हैं, किंतु उसके अनुयायियों को कैसे पता चलेगा कि वे ईसा-विरोधी हैं जो लोगों को परमेश्वर के विरोध में ले जाते हैं? वे कैसे जानेंगे कि ये जीवित शैतान हैं जो निगलने के लिए विशेष रूप से आत्माओं को खोज रहे हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

हालांकि मसीह-विरोधी बाहर से परमेश्वर के वचनों की सहभागिता करते हैं, सत्य के ज्ञान और अनुभव की सहभागिता करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि उनके पास पवित्र आत्मा का प्रबोधन और प्रकाशन है, क्योंकि पवित्र आत्मा उन पर काम नहीं करता है। लेकिन वे दूसरों के वचनों को चुरा सकते हैं, उन वचनों को जो अनुभव और समझ दिखाते हैं, और वे इन वचनों का स्वयं को संवारने के लिए उपयोग कर सकते हैं। वे उन वचनों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो सत्य की समझ के समान लगते हैं, और लोगों को धोखा देने के लिए वे इन वचनों को हड़प कर अपने शब्दों के रूप में उनका उपयोग करते हैं। जब लोग इन शब्दों को सुनते हैं, तो वे सोचते हैं, "यह व्यक्ति जो कहता है वह सही और अच्छा है। उसके पास वास्तव में पवित्र आत्मा का प्रबोधन और प्रकाशन है।" लोग उसकी आराधना करते हैं। वास्तव में, ये सारे शब्द दूसरों से चुराए गए हैं। मुझे बताओ, क्या भ्रष्ट मानवजाति इन चालों का उपयोग करती है? पूरी भ्रष्ट मानवजाति जानती है कि चोरी कैसे करें, ढोंग कैसे करें, वेश कैसे बदलें। किसी और के शब्दों को चुराना बहुत आसान है। किसी और की सहभागिता को सुन लेने के बाद, वे गुप्त रूप से सबसे शक्तिशाली और सर्वोत्तम शब्दों को लिख लेते हैं, और उन्हें तोते की तरह कई बार दुहरा कर याद कर लेते हैं, और फिर वे दूसरों के साथ संवाद करने जाते हैं। कभी-कभी वे एक स्थान में सुनते हैं और दूसरे स्थान पर उसे बोलते हैं। वे सब कुछ इतनी तेज़ी से करते हैं कि वे इसे पल भर में अपना बना लेते हैं। वे लोग ऐसा करने में सक्षम हैं। यह सामान्य ज्ञान है। चूंकि मसीह-विरोधी लोग गलत राह पर हैं, उनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं होता है। इसलिए उनके पास परमेश्वर के वचन और सत्य की वास्तविक समझ का होना असंभव है। लेकिन जब एक मसीह-विरोधी कुछ ऐसे शब्दों को बोलता है जो प्रशंसनीय हैं, तो हर कोई सोचता है, "वाह, क्या यह पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है? अन्यथा, उसे परमेश्वर के वचनों और सत्य की ऐसी समझ कैसे हो सकती है?" इस तरह की सोच गलत है क्योंकि ऐसे शब्दों को चुराया जा सकता है। वह व्यक्ति दूसरों के शब्दों की नकल कर सकता है। आजकल, ऐसे कई धार्मिक पादरी हैं जो परमेश्वर के वचनों और परमेश्वर के घर की सहभागिता को पा लेते हैं। उन्हें पढ़ने के बाद, वे उन्हें रविवार को विश्वासियों के लिए अपने उपदेश के रूप में प्रचारित करते हैं। जब लोग उन्हें सुनते हैं, तो वे सोचते हैं, "ओह, यह उपदेश इतनी अच्छी तरह से बोला गया है। वास्तव में इसमें सत्य है।" फिर वे सभी उत्साहपूर्वक दान करते हैं। इस तरह, उनकी आजीविका अब सुनिश्चित है। क्या धार्मिक दुनिया में ऐसे कई प्रचारक हैं? जब तुम उन्हें सही मार्ग दिखाते हो, तो वे इसे स्वीकार नहीं करते हैं। लेकिन वे चोरी से परमेश्वर के घर से ली गई आध्यात्मिक किताबों का गुप्त रूप से फायदा उठाते हैं और प्रचार के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। वे धन कमाने के लिए, लोगों को धोखा देने के लिए और खुद को बड़ा बनाने के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। वे उन वचनों को लेते हैं जो मूल रूप से परमेश्वर के वचनथे, और दावा करते हैं कि वे सब उनके अपने अनुभव और ज्ञान हैं। यह मसीह-विरोधियों द्वारा दूसरों को धोखा देने का घृणित तरीका है।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (II) में "एक झूठे मसीह और एक मसीह-विरोधी के छल को कैसे पहचानें" से उद्धृत

ईसा-विरोधी दुष्टों को पहचानने के लिए, उनकी प्रकृति के सात अभिलक्षणों को जानना ज़रूरी है। यह ईसा-विरोधी दुष्टों के असली शैतानी चेहरे को स्पष्ट रूप से पहचानने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति के सात अभिलक्षणों की व्याख्या नीचे दी गई है:

सबसे पहले, सभी ईसा-विरोधी अभिमानी और दंभी होते हैं; वे किसी का भी आज्ञापालन करने से इनकार करते हैं, केवल स्वयं का उत्कर्ष करते हैं, चीजों को करने के अपने तरीके से चिपके रहते हैं। वे दूसरों को तुच्छ समझते हैं, उनके हृदयों में परमेश्वर के लिए कोई जगह नहीं होती, और उन्हें परमेश्वर का किसी तरह का कोई डर नहीं होता है। कलीसिया में ईसा-विरोधी के साथ किसी भी नहीं बनती, और कोई उन्हें नियंत्रित कर पाता। कलीसियाओं के सभी स्तरों के अगुवा और कार्यकर्ता उनके लिए दुश्मन की तरह होते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ लोग कहते हैं: "मैं केवल परमेश्वर का आज्ञापालन करता हूँ और किसी का नहीं।" या वे कहते हैं: "मैं केवल फलाना-फलाना का आज्ञापालन करता हूँ, लेकिन मैं किसी अन्य का आज्ञापालन नहीं करूँगा" इत्यादि। इससे यह देखा जा सकता है कि ऐसे सभी लोगों में हैवान शैतानी प्रकृति होती है, यही कारण है कि यह बिल्कुल भी आश्चर्य की बात नहीं है कि वे स्वयं को बड़ा बताने में सक्षम होते हैं, वे आत्मसंतुष्ट होते हैं और आगे बढ़ने के अनिच्छुक होते हैं, और इस बात की गवाही देने के लिए बेताब रहते हैं कि वे परमेश्वर के ज्येष्ठ पुत्र, उसके प्रिय पुत्र हैं। ऐसे सभी दुष्ट लोग सामर्थ्य प्राप्त करते ही प्रामाणिक ईसा-विरोधी दुष्ट बन जाते हैं। किसी का भी आज्ञापालन करने से इनकार करना और स्वयं को बड़ा बताना—यह ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति का पहला अभिलक्षण है।

दूसरा, चूँकि ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति होती है, यानी वे सत्य से प्रेम नहीं करते और यहाँ तक कि नफ़रत करते हैं और सत्य का विरोध करते हैं और साथ ही परमेश्वर का विरोध करते हैं, इसलिए ईसा-विरोधी परमेश्वर के वचनों केखाने-पीने को कभी भी गंभीरता से नहीं लेते हैं। उन्होंने कभी भी परमेश्वर के वचनों को असल में खाया या पिया नहीं है, और न ही वे परमेश्वर के वचनों और सत्य को स्वीकार करते हैं। तदनुसार, उनके पास परमेश्वर के वचनों से पवित्र आत्मा की कोई प्रबुद्धता या रोशनी नहीं होती है, और इसके अलावा वे वास्तव में परमेश्वर के वचनों के माध्यम से अपनी स्वयं के भ्रष्टता की सच्चाई को नहीं जानते हैं। इसलिए, ईसा-विरोधी दुष्ट कभी भी स्वयं को जानने के बारे में बात नहीं करते हैं, स्वयं का विश्लेषण करने और स्वयं को प्रकट करने की तो बात ही छोड़ो, मानो कि उनमें भ्रष्टता ही न हो। उन्होंने परमेश्वर के वचनों और सत्य के सच्चे ज्ञान पर कभी भी संगति नहीं की, और इसके अलावा वे परमेश्वर के कार्य और उसके स्वरूप की गवाही नहीं दे सकते हैं। वे जो कुछ करना जानते हैं वह है स्वयं को ऊँचा बनाना और स्वयं की गवाही दना। वे यह भी गवाही देने की हिम्मत करते हैं कि वे परमेश्वर के ज्येष्ठ पुत्र, प्यारे पुत्र हैं, और कि वे सिद्ध बनाए जा चुके हैं। वे वास्तव में अत्यधिक नीच और बेशर्म हैं। यह ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति का दूसरा अभिलक्षण है।

तीसरा, चूँकि अपनी शैतानी फ़ितरतों के कारण ईसा-विरोधी सत्य से प्रेम नहीं करते हैं और यहाँ तक कि सत्य से घृणा भी करते हैं, सत्य का विरोध करते हैं और परमेश्वर का विरोध करते हैं, इसलिए कोई भी कभी भी ईसा-विरोधी को सत्य को अभ्यास में लाते हुए नहीं देखता है। ईसा-विरोधी दुष्ट कभी भी सच्चाई का अभ्यास नहीं करते हैं, और इसकी मुख्य अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार हैं: 1. वे कभी भी परमेश्वर के न्याय, उसकी ताड़नाओं, उसके परीक्षणों और शुद्धिकरण के प्रति समर्पण नहीं करते हैं; 2. वे कभी भी परमेश्वर के वचनों या सत्य के प्रति समर्पण नहीं करते हैं; 3. वे कभी भी सत्य को स्वीकार नहीं करते; 4. वे कभी भी काट-छाँट किए जाना और निपटे जाना स्वीकार नहीं करते हैं; 5. वे कभी भी ऐसे किसी का आज्ञापालन नहीं करते हैं जो संगति करने और सत्य का अभ्यास करने में समर्थ है—वे किसी का भी आज्ञापालन नहीं करते हैं; 6. वे हमेशा दूसरों की तुलना में ऊँची स्थिति से अथवा यहाँ तक कि परमेश्वर की स्थिति से भी बोलते हैं, हमेशा लोगों को व्याख्यान देते हैं। वे परमेश्वर के वचनों को ग़लत तरीके से समझने, सत्य को विकृत करने, सही को ग़लत और गलत को सही ठहराने, झूठे प्रत्यारोप करने, मनमाने ढंग से दूसरों की निंदा करने और उनके बारे में राय बनाने में माहिर होते हैं। वे अक्सर दूसरे लोगों को धोखा देते हैं, उनके बारे में राय बनाते हैं, उनकी निंदा करते हैं और उन्हें फँसाते हैं। इसके अलावा, वे परमेश्वर के चुने हुए लोगों के प्रति शत्रुता से खौलते रहते हैं। इसलिए यह साबित करता है कि ईसा-विरोधी वे लोग हैं जो कभी भी सत्य का अभ्यास नहीं कर सकते हैं। यह ईसा-विरोधियों की दुष्ट प्रकृति का तीसरा अभिलक्षण है।

चौथा, ईसा-विरोधियों के कार्य और व्यवहार सभी सामर्थ्य और लाभ के वास्ते लड़ने, और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को नियंत्रित करने तथा अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हैं। ईसा-विरोधी केवल हैसियत और सामर्थ्य के पीछे भागते हैं और शैतानी ताक़तों की चरम सीमा तक आराधना करते हैं। हैसियत, सामर्थ्य और धन ईसा-विरोधियों के आदर्श और ऐसे लक्ष्य हैं जिनका वे पीछा करते हैं। यह ईसा-विरोधी की प्रकृति का सार है। मात्र जिन चीज़ों को ईसा-विरोधी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं और जिनके लिए वे कड़ी मेहनत करते हैं, वे हैसियत और सामर्थ्य हैं। यदि कोई कार्य हैसियत और सामर्थ्य के लिए नहीं है, तो वे उसे नहीं करेंगे। वे ऐसा कुछ भी करने को तैयार रहते हैं जिससे उनकी हैसियत और सामर्थ्य की लड़ाई को फायदा हो। हैसियत की तलाश के वास्ते, वे किसी भी तरह से दूसरों को दंडित करने, फँसाने या नुकसान पहुँचाने में संकोच नहीं करेंगे। ईसा-विरोधियों की दृष्टि में, हैसियत और सामर्थ्य से वे हर चीज़ हासिल कर सकते हैं, जबकि हैसियत और सामर्थ्य को गँवाने का अर्थ है सब कुछ गँवा देना। यह पूरी तरह से बड़े लाल अजगर की दुष्ट प्रकृति के सार की अभिव्यक्ति है। यह ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति का चौथा अभिलक्षण है।

पाँचवाँ, सामर्थ्य और हैसियत की खोज से प्रेम करने के अलावा, ईसा-विरोधी सभी दुष्ट लोगों के साथ साँठ-गाँठ करना और उनके साथ जुड़े रहना पसंद करते हैं। वे ऐसे किसी भी व्यक्ति की ओर खिंच जाते हैं जो उनके समान ही सड़ी हुई प्रवृत्तियों को साझा करते हैं और उनके लिए सेवा कर सकते हैं; वे ऐसे किसी भी व्यक्ति को पसंद करते हैं और उनके साथ जुड़े रहते हैं जो उनकी आराधना करते हैं और उनकी चापलूसी करते हैं। ईसा-विरोधियों द्वारा बहकाए गए वे सभी लोग दुष्ट और जंगली जानवर, आत्माहीन जानवर हैं। ईसा-विरोधी दुष्ट कभी भी ईमानदार लोगों के साथ जुड़ना पसंद नहीं करते हैं जो सही रास्ते पर चलते हैं और सत्य की खोज करते हैं। वे कभी भी दयालु, अच्छे लोगों को पसंद नहीं करते हैं, और वे सत्य को मोड़ने में भी समर्थ होते हैं और यह दावा करने के लिए सही को ग़लत और ग़लत को सही ठहराते हैं कि दुष्ट लोग अच्छे होते हैं और अच्छे लोग दुष्ट होते हैं। वे दूसरों से बदला लेने और उन्हें दंडित करने, दुर्भावनापूर्ण रूप से उनकी निंदा करने, दूसरे पर आरोप लगाकर अपने पापों को ढकने और बेतहाशा कार्य करने के लिए कुछ भी करने से नहीं चूकते हैं। इससे हर जगह कलीसियाओं में अराजकता पैदा होती है। यह ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति का एक प्रमाण है। जिससे सभी ईसा-विरोधी दुष्ट सबसे ज्यादा घृणा करते हैं वह है अच्छे लोग जो सत्य की खोज करते हैं, सिद्धांतों को बनाए रखते हैं, और जिनके पास न्याय की समझ है। ये लोग सबसे अधिक घृणा उन लोगों से करते हैं जिनके पास उनके बारे में विवेक है, जो बुराई से घृणा करते हैं, और सत्य और मानवता को धारण करते हैं। यही कारण है कि ईसा-विरोधी अच्छे लोगों को सताने, फँसाने, नुकसान पहुँचाने और साथ ही सभी स्तरों के अगुवाओं और कार्यकर्ताओं का विरोध करने में समर्थ होते हैं। यह ईसा-विरोधियों की दुष्ट प्रकृति का पाँचवाँ अभिलक्षण है।

छठा, पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए गए व्यक्ति के प्रति सभी ईसा-विरोधी दुष्टों में गहराई तक घृणा भरी होती है, और वे उसे बदलने का षड़यंत्र रचते हैं। वे गुस्से और उन्माद में होते हैं। जब वे कलीसियाओं को लोकतांत्रिक चुनाव करते हुए देखते हैं और देखते हैं कि परमेश्वर के चुने हुए लोग अपने विश्वास में सही रास्ते से प्रवेश करना शुरू कर रहे हैं, तो वे कलीसिया के चुनावों को बाधित करने के लिए अपना पूरा प्रयास करते हुए क्रोधावेश में प्रचण्ड पलटवार करते हैं। वे परमेश्वर के चुने हुए लोगों को गुमराह करने के लिए सभी प्रकार की भ्रांतियों और अपधर्मों का प्रसार करते हैं और परमेश्वर के घर में सभी स्तरों के अगुवाओं और कार्यकर्ताओं पर नक़ली के रूप में हमला करने, उन्हें दंड देने और उनकी निंदा करने की हद तक चले जाते हैं। ऐसा इसलिए है ताकि वे परमेश्वर के चुने हुए लोगों और सभी स्तरों के अगुवाओं और कार्यकर्ताओं के बीच कलह पैदा कर सकें। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को धोखा देने और उन्हें नियंत्रित करने के वास्ते, वे यहाँ तक कि बेशर्मी से दूसरों से उनके लिए वोट डलवाने और उनके प्रति समर्पण करवाने की हद तक चले जाते हैं बजाए इसके कि दूसरे उन लोगों को चुनें जो सत्य की खोज करते हैं, परमेश्वर के कार्य का वास्तव में पालन करते हैं और किसी भी स्तर के अगुवा और कार्यकर्ता बनने के लिए सत्य में प्रवेश कर चुके हैं। यह कलीसिया पर हावी होने और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को नियंत्रित करने की ईसा-विरोधियों की महत्वाकांक्षा को बिना किसी लाग-लपेट स्पष्ट बनाता है। इससे हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सभी ईसा-विरोधी दुष्ट पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए जाने वाले व्यक्ति और साथ ही परमेश्वर के घर में सभी स्तरों के अगुवाओं और कार्यकर्ताओं से विशेष रूप से घृणा करते हैं। यह ईसा-विरोधी दुष्टों के घिनौने इरादों को और भी अधिक उजागर करता है, जो परमेश्वर के घर में शासन करने वाले सत्य से सर्वाधिक डरते हैं और उनसे सर्वाधिक डरते हैं जो परमेश्वर के घर में शासन करने वाले सत्य की खोज करते हैं। इसका कारण यह है कि जिस दिन परमेश्वर के घर में सत्य और सत्य की खोज करने वाले लोग शासन करेंगे, यह वह दिन होगा, जब ईसा-विरोधियों का अंत हो जाएगा। जाहिर है, ईसा-विरोधी दुष्ट जिनसे सबसे ज्यादा नफ़रत करते हैं वे पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किये जाने वाले व्यक्ति और सत्य की खोज करने वाले सभी स्तरों के अगुवा और कार्यकर्ता हैं। यह ईसा-विरोधियों की दुष्ट प्रकृति का छठा अभिलक्षण है।

सातवाँ, ईसा-विरोधी दुष्ट कभी भी वास्तव में पश्चाताप नहीं करते हैं, चाहे वे कितनी भी बुरी हार या अस्वीकृति का सामना क्यों न करें, और न ही वास्तव में स्वयं को जानने के लिए आत्म-चिंतन करेंगे। हालाँकि कुछ हैवान आँसू बहा सकते हैं, किन्तु ये पश्चाताप के आँसू नहीं हैं, बल्कि गलत बर्ताव किए जाने के, अवज्ञा के, घृणा के आँसू होते हैं। वे निश्चित रूप से खेद या कृतज्ञता के आँसू नहीं होते हैं। इसका कारण यह है कि वे सभी अंतरात्मा या तर्क से रहित हैवान हैं, और सभी हैवानों में रत्ती भर भी मानवता नहीं होती। वे सभी शैतान की किस्म हैं और परमेश्वर द्वारा बिल्कुल नहीं बचाए जाएँगे। ईसा-विरोधी दुष्ट सभी हैवान शैतान की प्रकृति को धारण करते हैं और उद्धार से परे हैं, इस प्रकार वे कभी भी स्वयं को नहीं जान पाएँगे और वास्तव में पश्चाताप नहीं कर पाएँगे। वे कभी भी सत्य को स्वीकार नहीं करेंगे और वास्तव में परमेश्वर का आज्ञापालन नहीं करेंगे। यह ईसा-विरोधियों की शैतानी प्रकृति का सातवाँ अभिलक्षण है।

उपरोक्त सात अभिलक्षण शैतानी सार और ईसा-विरोधी दुष्टों की प्रकृति का एक पूरा आशुचित्र हैं। वे सभी जो ईसा-विरोधियों के इन सात अभिलक्षणों को धारण करते हैं, वे प्रामाणिक शैतान और हैवान हैं। वे सभी हैवानों से पुनर्जन्म लेने वाले शैतान के अनुचर हैं...।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कार्य-व्यवस्था के चयनित वार्षिकवृतांत में "शैतान के ख़िलाफ़ वाकई विद्रोह करने और उस पर विजय पाने के लिए मसीह-विरोधियों को पूरी तरह से बहिष्कृत कर देना चाहिए" से उद्धृत

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