वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु

मनुष्य की निहित पहचान और उसका मूल्य क्या है

तुम लोग कीचड़ से अलग किये गए थे और हर हाल में, तुम सब मैल में से चुने गए थे, गंदे और परमेश्वर द्वारा घृणित थे। तुम लोग शैतान के थे [अ] और एक बार उसके द्वारा कुचले और दूषित किये गये थे। इसीलिए यह कहा जाता है कि तुम सब कीचड़ से अलग किये गए थे, और तुम लोग पवित्र नहीं हो, बल्कि तुम सभी वे गैर-मानव वस्तुएँ हो जिनमें से शैतान ने काफी समय से मूर्ख बनाये थे। यह तुम सब के लिए सबसे उपयुक्त वर्णन है। तुम्हें एहसास होना चाहिए कि तुम सब रुके हुए पानी और कीचड़ में पाई जाने वाली गन्दगी हो, मछली और चिंराट जैसी वांछनीय पकड़ के विपरीत, क्योंकि तुम सब से कोई आनंद नहीं मिल सकता है। इसे साफ़-साफ़ कहें तो, तुम लोग सबसे हीन सामाजिक वर्ग के सदस्य हो, सूअरों और कुत्तों से भी बदतर जानवर हो। सच कहूँ तो, तुम सब को इस तरह से संबोधित करना अतिरेक या अतिशयोक्ति नहीं हैं, बल्कि यह इस मुद्दे को सरल बनाने का एक तरीका है। तुम सभी को ऐसे शब्दों में संबोधित करना वास्तव में तुम्हें सम्मान देने का एक तरीका है। तुम लोगों की अंतर्दृष्टि, बोलचाल, मनुष्यों के रूप में आचरण और तुम्हारी ज़िंदगी की सभी चीज़ें—कीचड़ में तुम्हारी स्थिति सहित—यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि तुम लोगों की पहचान ‘असाधारण’ है।

पादटीका (फुटनोट) :

[अ] मूल पाठ में "यह" लिखा गया है।