सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना

ठोस रंग

विषय-वस्तुएँ

फॉन्ट

फॉन्ट का आकार

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

0 खोज परिणाम

कोई परिणाम नहीं मिला

`

विश्वासियों को परमेश्वर में क्या खोजना चाहिए

I

कितना कार्य तुम में ईश्वर ने किया है?

कितना तुमने अनुभव किया है?

वो तुम्हें परखता है, अनुशासित करता है,

वो तुमपे अपना कार्य पूरा कर रहा है।

जैसे हो कोई ऐसा जो ईश्वर की पूर्णता मांगता है,

क्या तुम उसके हर काम को व्यक्त कर सकते हो,

दूसरों को प्रदान कर सकते हो अनुभव के द्वारा

और खुद को ख़र्च कर सकते हो करने को उसके कार्य?

ईश्वर के कार्यों को व्यक्त करो।

बनो एक सच्चे अभिव्यक्ति और उसकी अभिव्यंजना।

उसके द्वारा इस्तेमाल के योग्य बनो।

II

ईश्वर के कार्यों की गवाही देने के लिए,

अपने अनुभवों से दूसरों को दिखाओ,

और ज्ञान से और पीड़ा से जो तुमने सहे।

चाहो और, वो तुम्हें पूर्ण करेगा।

यदि तुम ईश्वर की पूर्णता मांगो केवल अंत में उसकी आशीष पाने के लिए,

यह साबित करता है कि तुम्हारा नज़रिया ईश्वर में आस्था पे अपवित्र है।

ईश्वर के कार्यों को व्यक्त करो।

बनो एक सच्चे अभिव्यक्ति और उसकी अभिव्यंजना।

उसके द्वारा इस्तेमाल के योग्य बनो।

III

वास्तविक जीवन में

तुम्हें सदा ईश्वर के कर्मों को देखने की कोशिश करनी चाहिए

और कैसे उसको संतुष्ट करना है जब वो अपनी इच्छा तुमपे दर्शाये।

उसकी विस्मयता और प्रज्ञा की तुम्हें गवाही देना चाहिए,

सीखना चाहिए कि तुम्हें कैसे है दिखाना

उसके अनुशासन और व्यवहार तुम पर।

यदि तुम्हारा प्रेम केवल उसकी महिमा को साझा करना है,

यह उसकी अपेक्षाओं तक न पहुंच पाएगा।

उसके कर्मों के साक्षी बनो, उसके मांगों को पूरा करो,

लोगों पर उसके कार्यों को अनुभव करो।

चाहे दर्द, आसूं या दुःख हो, अभ्यास में इनका अनुभव करो।

ईश्वर का साक्षी बनने को तुम्हें इन सब कार्यो को करना होगा।

ईश्वर के कार्यों को व्यक्त करो।

बनो एक सच्चे अभिव्यक्ति और उसकी अभिव्यंजना।

उसके द्वारा इस्तेमाल के योग्य बनो।

ईश्वर के कार्यों को व्यक्त करो।

बनो एक सच्चे अभिव्यक्ति और उसकी अभिव्यंजना।

उसके द्वारा इस्तेमाल के योग्य बनो, उसके द्वारा इस्तेमाल के योग्य बनो।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:सबसे असल है परमेश्वर का प्रेम

अगला:इंसान से परमेश्वर की उम्मीदें बदली नहीं हैं

शायद आपको पसंद आये

बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं? केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है