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पवित्र आत्मा के कार्य के सिद्धांत

I

पवित्र आत्मा इक-तरफा कार्य नहीं करता,

इंसान नहीं कर सकता काम अकेले।

पवित्र आत्मा इक-तरफा कार्य नहीं करता,

इंसान नहीं कर सकता काम अकेले।

इंसान काम परमेश्वर के आत्मा के साथ-साथ करता है।

ये काम दोनों के मिलने से होता है।

इंसान के प्रयास और पवित्र आत्मा के कार्य से

मिलता है परमेश्वर के वचनों का ज्ञान।

इस तरह रोज़ चलते रहने से,

पूर्ण बनाया जा सकता है इंसान।

सहयोग से, सक्रिय प्रार्थना से, खोज से, और करीब आकर परमेश्वर के,

सहयोग से, सक्रिय प्रार्थना से, खोज से, और करीब आकर परमेश्वर के,

पवित्र आत्मा से प्रबोधन, प्रकाशन पा सकता है इंसान।

II

परमेश्वर नहीं करता है कार्य जो अलौकिक हैं,

पर इंसान सोचता है परमेश्वर सब कुछ करता है।

न वचन पढ़ता है, न प्रार्थना करता है,

वो आत्मा के स्पर्श का बस इंतज़ार करता है।

मगर जो जानते हैं, सोचते हैं इस तरह:

जैसा बर्ताव होगा मेरा वैसा ही परमेश्वर कार्य करेगा।

मुझ पर निर्भर है उसके काम का प्रभाव।

परमेश्वर के वचन को खोजने का मुझे, प्रयास करना चाहिये।

सहयोग से, सक्रिय प्रार्थना से, खोज से, और करीब आकर परमेश्वर के,

सहयोग से, सक्रिय प्रार्थना से, खोज से, और करीब आकर परमेश्वर के,

पवित्र आत्मा से प्रबोधन, प्रकाशन पा सकता है इंसान।

लोग अपने हिस्से का जितना काम करना सीखते हैं,

परमेश्वर की अपेक्षाओं के स्तर को पाने का प्रयास जितना करते हैं,

पवित्र आत्मा का कार्य उतना ही होगा महान।

सहयोग से, सक्रिय प्रार्थना से, खोज से, और करीब आकर परमेश्वर के,

सहयोग से, सक्रिय प्रार्थना से, खोज से, और करीब आकर परमेश्वर के,

पवित्र आत्मा से प्रबोधन, प्रकाशन पा सकता है इंसान।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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