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जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए

I

जब तुम जानते नहीं परमेश्वर को और उसके स्वभाव को,

तुम्हारे हृदय खुल नहीं सकते सचमुच, परमेश्वर के लिए।

जब समझ लेते हो तुम सब परमेश्वर को, तुम समझ पाओगे क्या है हृदय में उसके,

ले पाते हो आनंद जो है उसके भीतर, अपने पूरे विश्वास और ध्यान से।

जब तुम लेते हो आनंद जो है उसके भीतर का, थोड़ा-थोड़ा कर के, एक-एक दिन कर के,

जब तुम लेते हो आनंद जो है उसके भीतर का,

तुम्हारा हृदय खुल जाएगा परमेश्वर के लिए।

II

जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है, जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है,

तुम्हें होगी घृणा,

आएगी शर्म तुम्हें अपने अत्यधिक और स्वार्थी अनुरोधों पर।

जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है, जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है,

तो परमेश्वर के हृदय में दिखेगी एक अनंत दुनिया,

अनकही आश्चर्य की दुनिया में खुद को पाओगे।

ख़त्म होता है अंधकार, बुराई, और झूठ,

जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए।

सिर्फ़ सच्चाई, सिर्फ़ विश्वास, सिर्फ़ रोशनी, सिर्फ़ न्याय,

जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए।

III

वो है प्रेम, वो है दयालु, अनंत करूणा से भरपूर।

महसूस करोगे तुम सिर्फ़ सुख, जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए।

उसकी समझ और शक्ति, उसके अधिकार और प्रेम से, भर जाती है ये दुनिया।

देखोगे तुम परमेश्वर का स्वरूप क्या है,

क्या दे उसे ख़ुशी, क्या तोड़े उसका दिल,

क्या करता है उसे दुखी और क्रोधित, देख पाता है हर एक,

जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए,

और अंदर आने की देते हो इजाज़त।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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