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219 परमेश्वर के वचनों ने मेरे दिल को जगा दिया

1 मैंने बरसों परमेश्वर में विश्वास रखा, हालाँकि मैं अक्सर सभाओं में शामिल होकर परमेश्वर के वचनों को पढ़ती थी, लेकिन मैंने कभी भी अपना विश्लेषण और जाँच करने के लिए परमेश्वर के वचनों के न्याय को स्वीकार नहीं किया। मैंने केवल अपनी भ्रष्टता को स्वीकार किया मगर कभी अपनी प्रकृति या सार को नहीं जाना। सिद्धांत को थोड़ा-बहुत समझने पर ही मैं अहंकार में आ गई और सोचा कि यही वास्तविकता है। मैंने कार्य और प्रचार किया लेकिन परमेश्वर के वचनों का अभ्यास या अनुभव करने पर कोई ध्यान नहीं दिया। पौलुस की तरह, मुझे केवल प्रतिष्ठा और रुतबे के लिए काम करना आता था। मुझे मज़ा आता था कि लोग मेरी सराहना करें और मुझे पूजें, मेरे दिल में कोई भय नहीं था। मैंने अपने रास्ते पर चलने पर ही ज़ोर दिया, फिर भी मैं आत्म-संतुष्ट थी और मुझे कोई होश नहीं था।

2 नाकामियाँ और रुकावटों का अनुभव करके ही, मुझे साफ़ तौर पर अपने असली कद का पता चला। जब परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना से मेरा सामना हुआ, तो मैंने बहस की और अपना बचाव किया। यह तो मुझे अच्छी तरह से पता था कि सत्य लोगों के जीवन के लिए फायदेमंद है, लेकिन मैं इसे स्वीकार या इसका आज्ञापालन नहीं कर पाती थी। मैं सत्य के किसी भी सिद्धांत के बिना अपना कर्तव्य निभाती थी, और वही करती थी जो मेरा मन कहता था। जब कभी कोई रुकावट आती, तो मैं नकारात्मक और कमजोर हो जाती, और अपना चित्रण करती थी। परीक्षणों के ज़रिये मैंने जाना कि मेरी कद-काठी कितनी अपरिपक्व है, मैं इतनी बेचारी और दयनीय हूँ। मुझे अपने बारे में तो कुछ पता नहीं था, लेकिन दिखावा ख़ूब करती थी, यह बहुत ही शर्मनाक था। सच्चाई का सामना करते हुए, मेरी अकड़ी हुई गर्दन शर्म से झुक गई।

3 परमेश्वर के न्याय, परीक्षणों और खुलासे का अनुभव करके, अब मैं ख़ुद को जान गई हूँ। हालाँकि मैं अच्छा बर्ताव करती दिखती हूँ, लेकिन मेरे दिल में परमेश्वर का कोई डर नहीं है। अभी भी मेरे दिल में परमेश्वर के कार्य को लेकर धारणाएँ हैं, मैं सच्चे मन से समर्पण नहीं कर पाती। मैं शैतानी स्वभाव भरी, मैं अभी भी परमेश्वर को धोखा देने और उसका विरोध करने के लिए पाखंडपूर्ण तरीके से काम करती हूँ। इतने बरसों के विश्वास के बावजूद, सत्य या जीवन को प्राप्त नहीं करना बेहद अपमानजनक है। अंतत: मुझे समझ में आ गया कि सत्य का अनुसरण न करना वक्त की बर्बादी है। केवल परमेश्वर के न्याय और ताड़ना की वजह से मैं सच्चा प्रायश्चित कर पाई। मैं चाहती हूँ कि परमेश्वर और भी अधिक मेरा न्याय करे, मुझे ताड़ना दे, परीक्षा ले, मेरा शुद्धिकरण करे, ताकि मैं शैतानी स्वभाव से मुक्त हो जाऊं और मैं परमेश्वर का गौरवगान करने के लिए एक इंसान की ज़िंदगी जी सकूँ।

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