परमेश्वर का प्रकटन और कार्य

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 46

स्तुति सिय्योन तक आ गई है और परमेश्वर का निवास स्थान प्रकट हो गया है। महिमाशाली पवित्र नाम का परमेश्वर के चुने असंख्य लोग गुणगान कर रहे हैं और यह फैलता जा रहा है। आह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! ब्रह्मांड का मुखिया, अंत के दिनों का मसीह—वह जगमगाता सूर्य है जो पूरे ब्रह्मांड में उदित हुआ है, प्रतापी और भव्य पर्वत सिय्योन के ऊपर ...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम हर्षोल्लास में तुझे पुकारते हैं; हम नाचते और गाते हैं। तू वास्तव में हमारा मुक्तिदाता, ब्रह्मांड का महान सम्राट है! तूने विजेताओं का एक समूह बनाया है और परमेश्वर की प्रबंधन योजना पूरी की है। परमेश्वर के चुने हुए असंख्य लोग नदी की तरह इस पर्वत की ओर बढ़ेंगे। वे सिंहासन के सामने घुटने टेकेंगे! तू एकमात्र सच्चा परमेश्वर है और तू महिमा और सम्मान के योग्य है। समस्त महिमा, स्तुति और अधिकार सिंहासन का हो! जीवन का झरना सिंहासन से प्रवाहित होता है, जो परमेश्वर के समस्त लोगों को सींचता और पोषित करता है। हमारा जीवन प्रतिदिन बदलता है; नई रोशनी और नए प्रकाशन हमारा अनुसरण करते हैं, जो लगातार परमेश्वर के बारे में नई अंतर्दृष्टियाँ देते हैं। अनुभवों के बीच हम परमेश्वर के बारे में पूर्ण निश्चितता पर पहुँचते हैं। उसके वचन निरंतर प्रकट होते हैं, सही लोगों के भीतर प्रकट होते हैं। हम सचमुच बहुत धन्य हैं! हम प्रतिदिन परमेश्वर से रूबरू होते हैं, हम सभी चीजों में परमेश्वर के साथ संगति करते हैं और परमेश्वर को हर चीज का प्रभार लेने देते हैं। हम सावधानीपूर्वक परमेश्वर के वचन पर विचार करते हैं, हमारे हृदय परमेश्वर में शांति पाते हैं और इस प्रकार हम परमेश्वर के सामने आते हैं, जहाँ हमें उसकी रोशनी मिलती है। हम प्रतिदिन अपने जीवन, क्रियाकलापों, शब्दों, सोच और विचारों में परमेश्वर के वचन के भीतर जीते हैं और हम हमेशा चीजों का भेद पहचानने में सक्षम होते हैं। परमेश्वर का वचन सुई में धागा पिरोता है; अप्रत्याशित ढंग से हमारे भीतर छिपी हुई चीजें एक के बाद एक प्रकाश में आती हैं। परमेश्वर के साथ संगति देर सहन नहीं करती; हमारी सोच और विचार परमेश्वर द्वारा उघाड़कर रख दिए जाते हैं। हर पल हम मसीह के आसन के सामने जी रहे हैं, जहाँ हम न्याय से गुजरते हैं। हमारे शरीर के भीतर हर जगह पर शैतान का कब्जा बना रहता है। आज परमेश्वर का राजपद बहाल करने के लिए उसके मंदिर को शुद्ध करना होगा। पूरी तरह से परमेश्वर के कब्जे में होने के लिए हमें जीवन-मरण के संघर्ष से गुजरना होगा। जब हमारी पुरानी मानव प्रकृति सलीब पर चढ़ाई जा चुकी होगी केवल तभी मसीह का पुनरुत्थित जीवन सर्वोच्च शासन कर सकता है।

अब पवित्र आत्मा हमारे उद्धार की लड़ाई लड़ने के लिए हमारे हर कोने में धावा बोलता है! जब तक हम अपने आपको नकारने और परमेश्वर के साथ सहयोग करने के लिए राजी हैं, तब तक परमेश्वर निश्चित रूप से हमें हर समय भीतर से रोशन और शुद्ध करेगा और जिस पर शैतान ने कब्जा कर रखा है उसे नए सिरे से प्राप्त करेगा, ताकि हम परमेश्वर द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण किए जा सकें। समय बरबाद मत करो—हर क्षण परमेश्वर के वचन के भीतर रहो। संतों के साथ उन्नति करो, राज्य में लाए जाओ और परमेश्वर के साथ महिमा में प्रवेश करो।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 1

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 47

फिलाडेल्फिया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है जो पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है। संतों में परमेश्वर-प्रेमी हृदय उत्पन्न हुए हैं और वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर डगमगाते नहीं हैं। वे अपने इस विश्वास पर दृढ़ रहते हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीजों पर शासन करता है : इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और यह पूरी तरह निर्विवाद है! और यह कभी नहीं बदलेगा!

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आज तुम ही हो, जिसने हमारी आध्यात्मिक आँखें खोल दी हैं, जिससे अंधे देख रहे हैं, अपाहिज चल रहे हैं और कुष्ठरोगी चंगे हो रहे हैं। यह तुम ही हो जिसने स्वर्ग की खिड़की खोल दी है, हमें आध्यात्मिक जगत के रहस्यों को देखने दिया है। तुम्हारे पवित्र शब्द हमारे भीतर समा गए हैं और शैतान द्वारा भ्रष्ट की गई हमारी मानवता से हम बचा लिए गए हैं। ऐसा तुम्हारा अपरिमेय महान काम है और तुम्हारी महान अपरिमेय दया है। हम तुम्हारे गवाह हैं!

तुम लंबे समय से खामोशी से विनम्र और छिपे रहे हो। तुमने मृत्यु से पुनरुत्थित होने का और सूली पर चढ़ने की पीड़ा सहने का, मानव जीवन के सुखों और दुखों का, और साथ-साथ उत्पीड़न और क्लेश का अनुभव किया है; तुमने मानव संसार के दर्द का अनुभव और स्वाद लिया है, और तुम्हें युग द्वारा त्यागा गया है। देहधारी परमेश्वर स्वयं परमेश्वर है। तुमने हमें परमेश्वर की इच्छा की खातिर मैले के ढेर से बचाया है, हमें अपने दाहिने हाथ से उठाया है और मुक्त रूप से अपना अनुग्रह हम पर बरसाया है। कोई प्रयास बाकी न रखते हुए, तुमने अपना जीवन हममें गढ़ा है; तुम्हारे दिल का खून और जो कीमत तुमने चुकाई है, वह संतों में ठोस रूप में उपस्थित है। हम तुम्हारे दिल के खून के परिणाम[क] हैं; हम वह कीमत हैं जो तुमने चुकाई है।

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारी प्रेमपूर्ण उदारता और दया, तुम्हारी धार्मिकता और प्रताप, तुम्हारी पवित्रता और विनम्रता के कारण ही तुम्हारे चुने हुए असंख्य लोग तुम्हारे सामने झुकेंगे और अनंत काल तक तुम्हारी आराधना करेंगे।

आज तुमने सभी कलीसियों को पूर्ण किया है—फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया—और तुम्हारी 6,000 साल की प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। सभी संत अब नम्रता से तुम्हारे सामने समर्पित हो सकते हैं; वे एक दूसरे से आत्मा में जुड़े हुए हैं और एक दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक आगे बढ़ते हैं। वे झरने के स्रोत से जुड़े हैं। जीवन का जीवित पानी निरंतर बहता है और वह कलीसिया की सभी गंदगी और कीचड़ को बहा ले जाता और दूर कर देता है, और एक बार फिर तुम्हारे मंदिर को शुद्ध करता है। हमने व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर को जाना है, उसके वचनों में चले हैं, और अपने कार्यों और कर्तव्यों को पहचाना है, कलीसिया के लिए खुद को खपाने के लिए जो कुछ हम कर सकते थे वो हम करते हैं। तुम्हारे सामने हर एक पल शांत रहते हुए, हमें पवित्र आत्मा के काम पर ध्यान देना चाहिए ताकि तुम्हारी इच्छा हमारे भीतर अवरुद्ध न हो। संतों के बीच आपसी प्रेम है, और कुछ की मज़बूतियां दूसरों की कमियों की भरपाई करेंगी। वे हर पल आत्मा में चल सकते हैं और पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध और रोशन किए गए हैं। सत्य समझने के तुरंत बाद वे उसे अभ्यास में ले आते हैं। वे नई रोशनी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हैं।

सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो; उसे अधिकार का इस्तेमाल करने देने का अर्थ है उसके साथ चलना। हमारे सभी विचार, धारणाएँ, सोच और सांसारिक उलझनें, धुएं की तरह हवा में गायब हो जाती हैं। हम परमेश्वर को अपनी आत्माओं पर शासन करने देते हैं, उसके साथ चलते हैं और इस तरह उत्थान हासिल करते हुए दुनिया पर विजय प्राप्त करते हैं, और हमारी आत्माएं मुक्त हो जाती हैं और रिहाई प्राप्त करती हैं : जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर राजा के रूप में राज करता है तो ये परिणाम होते हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि हम नृत्य न करें और स्तुति में न गाएं, अपनी प्रशंसा भेंट न करें, और अपने नए भजन न पेश करें?

वास्तव में परमेश्वर की स्तुति करने के कई तरीके हैं : उसका नाम पुकारना, उसके पास आना, उसके बारे में सोचना, प्रार्थना-पाठ करना, संगति में शामिल होना, चिंतन करना, सोच-विचार करना, प्रार्थना करना और प्रशंसा के गीत गाना। इस तरह की स्तुति में आनंद है, और अभिषेक है। स्तुति में शक्ति है और एक भार भी है। स्तुति में विश्वास है, और एक नई अंतर्दृष्टि भी है।

सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो, सेवा में सहयोग करो और एक हो जाओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इरादों को पूरा करो, एक पवित्र आध्यात्मिक शरीर बनने के लिए जल्दी करो, शैतान को कुचलो, और उसकी नियति समाप्त करो। फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया परमेश्वर के सामने उठा ली गई है और परमेश्वर की महिमा में प्रकट की जाती है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 2

फुटनोट :

क. मूल पाठ में, “के परिणाम” यह वाक्यांश नहीं है।


परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 48

विजयी राजा अपने गौरवशाली सिंहासन पर विराजमान है। उसने छुटकारे का कार्य संपन्न कर लिया है और वह अपने सारे लोगों को महिमा में प्रकट होने लाया है। सारी चीजें उसके हाथों में रहती हैं और उसने अपनी दिव्य बुद्धि और पराक्रम से सिय्योन को निर्मित और मजबूत कर दिया है। अपने प्रताप से वह पापी दुनिया का न्याय करता है; उसने असंख्य देशों और लोगों, पृथ्वी और समुद्रों और उनमें रहने वाले सभी जीवों और व्यभिचार की मदिरा से मदहोश लोगों का न्याय किया है। परमेश्वर उनका न्याय अवश्य करेगा और वह यकीनन उनसे क्रोधित होगा और उसका प्रताप प्रकट किया जाएगा। उसका न्याय त्वरित होगा और बिना देरी के किया जाएगा। उसके क्रोध की अग्नि यकीनन उनके घृणित पापों को भस्म कर देगी और किसी भी क्षण उन पर विपत्ति टूटेगी; उन्हें बचने के किसी भी मार्ग का पता नहीं होगा और उनके पास छिपने का कोई स्थान नहीं होगा, वे रोएंगे और अपने दाँत पीसेंगे और स्वयं अपना विनाश कर लेंगे।

परमेश्वर के प्यारे विजयी पुत्र निश्चित रूप से सिय्योन में रहेंगे, इससे कभी बाहर नहीं जाएंगे। परमेश्वर के चुने हुए असंख्य लोग ध्यान से उसकी आवाज सुनेंगे, वे सावधानी से उसके क्रियाकलापों पर ध्यान देंगे और उनकी प्रशंसा की आवाजें कभी बंद नहीं होंगी। एकमात्र सच्चा परमेश्वर प्रकट हुआ है! हम आत्मा में उसके बारे में निश्चित होंगे और करीब से उसका अनुसरण करेंगे; हम अपनी पूरी ताकत से आगे बढ़ेंगे और अब और नहीं झिझकेंगे। दुनिया का नतीजा हमारे सामने प्रकट हो रहा है; कलीसिया के एक उपयुक्त जीवन के साथ-साथ लोग, घटनाएँ और चीजें, जिनसे हम घिरे हैं, हमारे प्रशिक्षण को तेज कर रही हैं। आओ, जल्दी से अपने हृदयों को वापस लें, जो दुनिया से बहुत प्रेम करते हैं! आओ, जल्दी से अपनी दृष्टि वापस लें, जो इतनी धुँधली है! आओ, अपने कदम रोक लें, ताकि हम सीमाएँ न लाँघ जाएँ। आओ, अपना मुँह बंद करें, ताकि हम परमेश्वर के वचन के अनुसार चल सकें, और अब अपनी लाभ-हानियों पर झगड़ा न करें। आह, सांसारिक दुनिया और धन-दौलत के प्रति अपना लालची अनुराग—इसे त्याग दो! पतियों, बेटियों और बेटों के साथ तुम्हारा अडिग लगाव—इससे अपने को मुक्त करो! आह, तुम्हारे दृष्टिकोण और पूर्वाग्रह—इनकी ओर पीठ कर लो! आह, जागो; समय कम है! ऊपर देखो, ऊपर देखो, आत्मा के भीतर से और परमेश्वर को नियंत्रण लेने दो। कुछ भी हो जाए, दूसरी लूत की पत्नी न बनो। छोड़ दिया जाना कितना दयनीय होता है! सचमुच, कितना दयनीय! आह, जागो!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 3

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 49

पर्वत और नदियाँ बदल जाती हैं, धाराएँ अपनी दिशा में बहती रहती हैं और मनुष्य का जीवन उतना स्थायी नहीं होता जितना पृथ्वी और आकाश का। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही शाश्वत और पुनर्जीवित जीवन है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी शाश्वत रूप से चलता रहता है! सभी चीज़ें और घटनाएं उसके हाथों में हैं, और शैतान उसके पैरों तले है।

आज परमेश्वर अपने पूर्व-निर्धारित चयन के कारण ही हम लोगों को शैतान के चंगुल से बचाता है। वह वास्तव में हमारा उद्धारक है। मसीह का शाश्वत, पुनर्जीवित जीवन हमारे भीतर वास्तव में गढ़ दिया गया है, जो हमें परमेश्वर के जीवन से जुड़ने के लिए नियत कर रहा है, ताकि हम वास्तव में उसके रूबरू आएँ, उसे खाएँ, उसे पिएँ और उसका आनंद लें। यह परमेश्वर के दिल के खून की निःस्वार्थ भेंट है।

मौसम आते हैं, जाते हैं, परमेश्वर आँधी-तूफान से गुजरते हुए, जीवन की कितनी ही पीड़ाओं, उत्पीड़न और क्लेशों को झेलता है, दुनिया के इतने अधिक अस्वीकरण और बदनामी को बर्दाश्त करते हुए, सरकार के कितने ही झूठे आरोपों का सामना करता है, फिर भी न तो परमेश्वर का विश्वास और न ही उसका संकल्प जरा-सा कम होता है। तहेदिल से परमेश्वर की इच्छा और परमेश्वर के प्रबंधन और योजना को पूरा करने के लिए समर्पित रहते हुए, वह अपने जीवन को दरकिनार कर देता है। अपने सभी लोगों के लिए, वह कोई प्रयास नहीं छोड़ता, सावधानी से उनका पोषण और सिंचन करता है। हम चाहे कितने भी मूर्ख हों, या कितने भी जिद्दी हों, हमें केवल उसके प्रति समर्पित होने की ज़रूरत है, और मसीह का पुनर्जीवित जीवन हमारी पुरानी प्रकृति को बदल देगा...। इन सभी पहलौठे पुत्रों के लिए, वह दिन-रात अथक परिश्रम करता है, खाने और आराम की परवाह नहीं करता। कितने ही दिन और रात गुज़रें, कितनी ही तेज़ गर्मी और जमाने वाली ठंड से गुज़रना पड़े, वह सिय्योन में तहेदिल से निगरानी करता है।

दुनिया, घर, काम और हर चीज को प्रसन्नता और स्वेच्छा से पूरी तरह त्याग देता है, सांसारिक सुख-सुविधाओं से उसे कोई लेना-देना नहीं...। उसके मुँह के वचन हमारे भीतर वास्तव में वार करते हैं, हमारे दिल में गहरी छिपी चीज़ों को उजागर करते हैं। हम कैसे आश्वस्त नहीं हो सकते? उसके मुँह से निकलने वाला हर वाक्य हमारे भीतर किसी भी समय सच साबित हो सकता है। हम जो भी करते हैं, उसके सामने या उससे छिपाकर, ऐसा कुछ नहीं है जो वह नहीं जानता, ऐसा कुछ नहीं है जो वह नहीं समझता। हमारी योजनाओं और व्यवस्थाओं के बावजूद सब कुछ निश्चय ही उसके सामने प्रकट किया जाता है।

उसके सामने बैठकर, अपनी आत्मा में प्रसन्नता महसूस करते हुए, सुखी और शांत रहते हुए, फिर भी हमेशा खालीपन और परमेश्वर के प्रति सचमुच ऋणी महसूस करना : यह एक अकल्पनीय आश्चर्य है और इसे हासिल करना असंभव है। पवित्र आत्मा पर्याप्त रूप से साबित करता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सच्चा परमेश्वर है! यह एक अकाट्य प्रमाण है! इस समूह के हम लोग, वास्तव में अवर्णनीय रूप से धन्य हैं! यदि परमेश्वर का अनुग्रह और दया नहीं होती, तो हम बरबादी की ओर चले जाते और शैतान का अनुसरण करने लगते। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही हमें बचा सकता है!

अहा! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यावहारिक परमेश्वर! तुम ही हो जिसने हमारी आध्यात्मिक आंखें खोली हैं, और हमें आध्यात्मिक क्षेत्र के रहस्य दिखाए हैं। राज्य की संभावनाएँ अनंत हैं। आओ, सावधान रहकर प्रतीक्षा करें। वह दिन बहुत दूर नहीं हो सकता।

युद्ध की लपटें चक्कर लगाती हैं, तोप का धुआँ हवा में भर गया है, मौसम गर्म हो रहा है, जलवायु परिवर्तित हो रही है, महामारी फैलेगी, लोग मरेंगे और बचने की कोई उम्मीद न होगी।

आह! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यावहारिक परमेश्वर! तुम हमारा मजबूत किला हो। तुम हमारा आश्रय हो। हम तुम्हारे पंखों के नीचे सिमटते हैं, और आपदा हम तक नहीं पहुंच सकती। ऐसी है तुम्हारी दिव्य सुरक्षा और देखभाल।

हम सब ऊँचे सुर में गाते हैं; स्तुति करते हैं और हमारा स्तुति-गान पूरे सिय्योन में गूँजता है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यावहारिक परमेश्वर ने हमारे लिए वह खूबसूरत मंजिल तैयार की है। सावधान रहो—नज़र रखो! अभी भी वह घड़ी दूर नहीं है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 5

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 50

जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर—राज्य के राजा—की गवाही दी गई है, तब से पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर के प्रबंधन का दायरा पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। परमेश्वर के प्रकटन की गवाही न केवल चीन में दी गई है, बल्कि सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही दी गई है। वे सभी इस पवित्र नाम को पुकार रहे हैं, किसी भी तरह से परमेश्वर के साथ सहभागिता करने का प्रयास कर रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इरादों को समझ रहे हैं और कलीसिया में सहयोग देते हुए सेवा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा इसी अद्भुत तरीके से काम करता है।

विभिन्न राष्ट्रों की भाषाएँ एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आत्मा एक ही है। यह आत्मा ब्रह्मांड भर की कलीसियाओं को जोड़ता है और बिना किसी अंतर के, परमेश्वर के साथ पूरी तरह एक है, और इसमें कोई शक नहीं है। पवित्र आत्मा अब उन्हें पुकारता है और सतर्क रखता है। यह परमेश्वर की दया की वाणी है। वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पवित्र नाम को पुकार रहे हैं! वे स्तुति भी करते हैं और गाते भी हैं। पवित्र आत्मा के कार्य में कभी भी कोई विचलन नहीं हो सकता; और सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाते हैं, वे पीछे नहीं हटते हैं—चमत्कारों पर चमत्कार होते रहते हैं। लोगों के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है और इसका अनुमान लगाना उन्हें असंभव लगता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ब्रह्मांड में जीवन का राजा है! वह महिमामय सिंहासन पर बैठता है और दुनिया का न्याय करता है, सभी पर संप्रभुता रखता है, और सभी राष्ट्रों पर शासन करता है; सभी लोग उसके सामने घुटने टेकते हैं, उससे प्रार्थना करते हैं, उसके करीब आते हैं और उसके साथ संवाद करते हैं। चाहे तुमने परमेश्वर में कितने भी लम्बे समय से विश्वास रखा हो, चाहे तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊंचा हो या तुम्हारी वरिष्ठता कितनी भी अधिक हो, यदि तुम अपने दिल में परमेश्वर का विरोध करते हो तो तुम्हारा न्याय किया जाना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सामने दंडवत होकर दर्द भरा अनुनय-विनय करना चाहिए; यह वास्तव में तुम्हारा अपने कर्मों के फल को भुगतना है। यह विलाप का स्वर आग और गंध की झील में यातना सहने का स्वर है, और यह परमेश्वर की लोहे की छड़ी से ताड़ना पाने का क्रंदन है; यह मसीह के आसन के सामने किया गया न्याय है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 8

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 51

सभी कलीसियाओं में परमेश्वर का प्रकटन पहले ही हो चुका है। यह आत्मा ही है जो बोलता है; वह एक प्रबल अग्नि है, उसमें प्रताप है और वह न्याय कर रहा है; वह मनुष्य का पुत्र है, जो पाँवों तक का वस्त्र पहने हुए है और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए है। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन के समान उज्ज्वल हैं, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं; उसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, मानो भट्ठी में तपे हुए हों; और उसका शब्द अनेक जल के शब्द के समान है। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है, और उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित है, जैसे सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता हो!

मनुष्य के पुत्र की गवाही दी जा चुकी है, और स्वयं परमेश्वर खुले रूप से प्रकट हो चुका है। जमकर चमकते सूरज की तरह परमेश्वर की महिमा प्रकट की गई है! परमेश्वर का तेजस्वी मुख अपनी चमक से चकाचौंध करता है; किसकी आंखें उसके विरोध की हिम्मत कर सकती हैं? प्रतिरोध मृत्यु की ओर ले जाता है! अपने दिल में जो कुछ भी तुम सोचते हो, जो भी शब्द तुम कहते हो या जो कुछ भी तुम करते हो, उसके लिए थोड़ी-सी भी दया नहीं दिखाई जाती है। तुम लोग सब समझोगे और देखोगे कि तुम लोगों ने क्या पाया है—मेरे न्याय के अलावा कुछ नहीं! अगर तुम लोग मेरे वचनों को खाने और पीने के लिए अपना प्रयास नहीं करते हो, बल्कि मनमाने ढंग से गड़बड़ी करते हो और मेरा निर्माण नष्ट करते हो, तो क्या मैं इसे बरदाश्‍त कर सकता हूँ? मैं इस तरह के व्यक्ति के साथ नरमी नहीं करूँगा! यदि तुम्हारा व्यवहार और अधिक बिगड़ा, तो तुम आग में भस्म हो जाओगे! सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक आध्यात्मिक शरीर में प्रकट हुआ है, और सिर से पैर तक देह या रक्त से बिल्‍कुल जुड़ा नहीं है। वह ब्रह्मांडीय दुनिया से परे है, और तीसरे स्वर्ग के गौरवशाली सिंहासन पर बैठा सभी चीजों पर शासन करता है! ब्रह्मांड और सभी चीजें मेरे हाथों में हैं। मैं कहता हूँ और यह अस्तित्व में आ जाता है। मैं नियत करता हूँ और यह इस प्रकार नियत हो जाता है। शैतान मेरे पैरों के तले है; वह एक अथाह कुंड में है! जब मेरी वाणी प्रकट होगी, स्वर्ग और पृथ्वी गायब हो जाएंगे और उनका कोई अस्तित्‍व नहीं रहेगा! सभी चीज़ें नवीनीकृत हो जाएंगी; यह एक सदा अपरिवर्तनीय सत्य है जो पूरी तरह सही है। मैंने दुनिया को जीत लिया है, सभी बुरों पर विजय प्राप्त की है। मैं यहाँ बैठा तुम लोगों से बात कर रहा हूँ; जिनके पास कान हैं, उन्हें सुनना चाहिए और जो जीवित हैं, उन्हें स्वीकार करना चाहिए।

दिन समाप्त हो जाएंगे; दुनिया की सभी चीजें खत्म हो जाएँगी, और सब कुछ नया बनकर उत्पन्न होगा। यह याद रखना! याद रखो! तुम इस बारे में लापरवाही नहीं कर सकते। आकाश और पृथ्वी का अवसान हो जाएगा, लेकिन मेरे वचनों का अवसान नहीं होगा! एक बार फिर तुम लोगों को प्रोत्साहित करता हूँ : व्यर्थ में भागो मत! जागो! मुड़ो और किनारा निकट है! मैं पहले ही तुम लोगों के बीच प्रकट हो चुका हूँ और मेरी वाणी उदित हो चुकी है। मेरी वाणी तुम लोगों के सामने उदित हो चुकी है, हर दिन वह तुम लोगों के सामने, तुमसे रूबरू होती है, हर दिन वह ताजी और नई होती है। तुम मुझे देखते हो और मैं तुम्हें देखता हूँ; मैं तुमसे निरंतर बात करता हूँ और तुम्हारे साथ आमने-सामने होता हूँ। फिर भी तुम मुझे अस्वीकार करते हो, तुम मुझे नहीं जानते हो; मेरी भेड़ें मेरी वाणी सुन सकती हैं, और फिर भी तुम लोग संकोच करते हो! तुम लोग संकोच करते हो! तुम्हारा दिल सुन्न हो गया है, तुम्हारी आँखों को शैतान ने अंधा कर दिया है, और तुम मेरा गौरवशाली मुख देख नहीं पाते हो—तुम कितने दयनीय हो! कितने दयनीय!

मेरे सिंहासन के सामने उपस्थित सात आत्माओं को पृथ्वी के सभी कोनों में भेजा गया है और मैं कलीसियाओं से बात करने के लिए अपना संदेशवाहक भेजूंगा। मैं धार्मिक और विश्वासयोग्य हूँ; मैं वह परमेश्वर हूँ जो मनुष्यों के दिल के सबसे गहरे हिस्सों की पड़ताल करता है। पवित्र आत्मा कलीसियाओं से बात करता है और ये मेरे वचन मेरे पुत्र के भीतर से निकलते हैं। जिनके कान हैं उन सभी को सुनना चाहिए! जो जीवित हैं उन सभी को स्वीकारना चाहिए! बस उन्हें खाओ और पिओ, और संदेह न करो। जो समर्पण करेंगे और मेरे वचनों पर ध्यान देंगे, उन सभी को महान आशीष प्राप्त होंगे! जो ईमानदारी से मेरे मुखमंडल की खोज करेंगे, उन सभी के पास निश्चित रूप से नई रोशनी, नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि होगी; सब कुछ ताज़ा और नया होगा। मेरे वचन तुम्हारे लिए किसी भी समय प्रकट होंगे और वे तुम्हारी आध्यात्मिक आँखें खोल देंगे ताकि तुम आध्यात्मिक क्षेत्र के सभी रहस्यों को देख सको। राज्य मनुष्य के बीच है। शरण में प्रवेश करो और समस्त अनुग्रह और आशीष तुम्हें प्राप्त होंगे; अकाल और महामारी तुम्हारे पास नहीं आ पाएंगे और भेड़िए, साँप, बाघ और तेंदुए तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाएंगे। तुम मेरे साथ जाओगे, मेरे साथ चलोगे और मेरे साथ महिमा में प्रवेश करोगे!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 15

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 52

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसने अपना गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट कर दिया है, उसका पवित्र आध्यात्मिक शरीर प्रकट हो चुका है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और उसकी देह दोनों ही बदल गई हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्‍यक्तित्‍व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सुनहरा पटुका बाँधे हुए है और दुनिया व सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें ज्वालाओं के समान हैं, उसके मुख में पैनी दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम रूप से उज्ज्वल है और उसकी महिमामयी रोशनी उदित होती और चमकती है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्‍य मग्‍न हैं और सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, उस एक सच्चे परमेश्वर की विजयी वापसी का स्वागत करते हैं जो अपनी छह हजार वर्ष की प्रबंधन योजना पूरी कर चुका है। खुशी से सब कूद और नाच रहे हैं! खुशी मनाओ! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज प्रतापी, भव्‍य सिय्योन पर्वत पर ऊँचा लहराता है! हर राष्ट्र खुशी मना रहा है, परमेश्वर के असंख्य चुने हुए लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्‍नता से हँस रहा है और परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का मुखमंडल देखूँगा, फिर भी आज मैंने इसे देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने मैं उससे बात करता हूँ और अपना दिल खोलकर रखता हूँ। खाने और पीने का सभी कुछ वह प्रचुरता से प्रदान करता है। उसकी महिमामयी रोशनी जीवन में, वचनों में, क्रियाकलापों में, सोच में और विचारों में रोशन होती है, वह मार्ग के हर कदम की अगुआई करता है और अगर कोई दिल से विद्रोह करता है तो उसका न्याय तेजी से आता है।

परमेश्वर के साथ खाना, रहना और जीना, उसके साथ होना, साथ चलना, साथ आनंद लेना, साथ-साथ महिमा और आशीष प्राप्त करना, परमेश्वर के साथ राजाओं की तरह शासन साझा करना और राज्य में एक साथ होना—कितना आनंददायक है! यह कितना मधुर है! हम हर दिन उसके साथ आमने-सामने होते हैं, वह हर दिन बोलता है और निरंतर हमसे बातें करता है, हमें हर दिन नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। हमारी आध्यात्मिक आँखें खुल जाती हैं, हम सब कुछ देखते हैं; आत्मा के रहस्य हमारे सामने प्रकट किए जाते हैं। पवित्र जीवन कितना निश्चिंत है; तेज़ी से भागो और रुको मत, निरंतर आगे बढ़ो—आगे इससे भी अधिक अद्भुत एक जीवन है। केवल मिठास चखकर संतुष्ट मत हो जाओ; निरंतर दौड़कर परमेश्वर में जाओ। वह सर्वसमावेशी और प्रचुर है और उसके पास वे तमाम तरह की चीजें हैं जिनकी हममें कमी है। सक्रियता से सहयोग करो, उसके अंदर प्रवेश करो और कुछ भी कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा। हमारा जीवन उदात्त होगा और कोई भी व्यक्ति, घटना या चीज हमें परेशान नहीं कर पाएगी।

पारलौकिकता! पारलौकिकता! सच्ची पारलौकिकता! परमेश्वर का पारलौकिक जीवन अंतर्निहित है और सारी चीजें वास्तव में सहज हो गई हैं! हम दुनिया और सांसारिक चीज़ों से परे चले जाते हैं, पतियों या बच्चों से कोई मोह नहीं रहता। बीमारी और परिवेश की बाध्यताओं के परे चले जाते हैं। शैतान हमें परेशान करने की हिम्मत नहीं कर सकता है। हम सारी आपदाओं से परे हो जाते हैं—यह परमेश्वर को राजपद सँभालने देना है! हम शैतान को अपने कदमों के तले कुचल देते हैं, कलीसिया के लिए अपनी गवाही में अडिग रहते हैं और पूरी तरह से शैतान के बदसूरत चेहरे को बेनकाब करते हैं। कलीसिया का निर्माण मसीह में है और गौरवशाली शरीर का उदय हुआ है—यह उठा लिए जाने की दशा में जीना है!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 15

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 53

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, शाश्वत पिता, शांति का राजकुमार, हमारा परमेश्वर राजा है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने चरण जैतून के पर्वत पर रखता है। यह कितना खूबसूरत है! सुनो! हम प्रहरी पुकार रहे हैं; एक-साथ गा रहे हैं, क्योंकि परमेश्वर सिय्योन में लौट आया है। हम अपनी आँखों से यरूशलेम की वीरानी देख रहे हैं। तेज स्वर में उमंग से एक-साथ गाओ, क्योंकि परमेश्वर ने हमें शांति दी है और यरूशलेम को छुड़ा लिया है। परमेश्वर ने सारे राष्ट्रों के सामने अपनी पवित्र भुजा प्रकट की है, परमेश्वर का वास्तविक स्वरूप प्रकट हुआ है! पृथ्वी के सभी छोरों ने हमारे परमेश्वर के उद्धार को देखा है।

हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तेरे समस्त रहस्य उजागर करने के लिए तेरे सिंहासन से सात आत्माएँ प्रत्येक कलीसिया में भेजी गई हैं। अपने महिमा के सिंहासन पर बैठकर तूने अपने राज्य का संचालन किया है और इसे न्याय और धार्मिकता द्वारा मजबूत और स्थिर बनाया है, और तूने सभी राष्ट्रों को अपने अधीन कर लिया है। हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तूने राजाओं का कमरबंद ढीला कर दिया है, अपने सामने फाटक फिर कभी बंद न होने के लिए खोल दिए हैं। क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है और तेरी महिमा उदित हो गई है और अपनी चमक बिखेर रही है। पृथ्वी पर अँधियारा और लोगों पर घोर अंधकार छाया हुआ है। किंतु हे परमेश्वर! तू हमारे सामने प्रकट हुआ है, और तूने अपना प्रकाश हम पर चमकाया है और तेरी महिमा हम पर देखी जाएगी; सारे राष्ट्र तेरी रोशनी में और सारे राजा तेरी चमक में आ जाएँगे। तू अपनी आँखें उठाकर चारों ओर देखता है : तेरे पुत्र तेरे सामने इकट्ठे हो रहे हैं और वे बहुत दूर से आए हैं, तेरी पुत्रियाँ जब आती हैं तो वे हाथों में उठाकर लाई जा रही हैं। हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर, तेरे महान प्रेम ने हमें अपनी गिरफ्त में ले लिया है; यह तू ही है जो हमें अपने राज्य के मार्ग पर आगे बढ़ाता है, और ये तेरे पवित्र वचन ही हैं जो हमें भिगोते हैं।

हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम तुझे धन्यवाद देते हैं और तेरी प्रशंसा करते हैं! हमें अपना सम्मान करने दे, अपनी गवाही देने दे, अपनी बड़ाई करने दे, और निष्कपट, शांत और अखंड हृदय से अपने लिए गाने दे। हमें एकचित्त हो जाने दे और एक ही गठन बन जाने दे, और काश! तू जल्दी ही हमें उन जैसा बना दे, जो तेरे इरादों अनुरूप हैं, ताकि तेरे द्वारा हमारा उपयोग किया जा सके। तेरी इच्छा पृथ्वी पर बिना किसी बाधा के पूरी हो।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 25

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 54

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सर्वशक्तिसंपन्न, सर्वस्व प्राप्त करने वाला और पूरा सच्चा परमेश्वर है! वह न केवल सात सितारों को थामता है, सात आत्माओं को धारण करता है, उसकी सात आँखें हैं, वह सात मुहरें तोड़ता है और पुस्तक को खोलता है, लेकिन उससे भी अधिक वह सात विपत्तियों और सात कटोरों का प्रशासन करता है और सात गर्जनों को खोलता है। बहुत पहले उसने भी सात तुरही बजाई हैं! उसके द्वारा बनाई और पूर्ण की गई सभी चीज़ों को उसकी प्रशंसा करनी चाहिए, उसे महिमा देनी चाहिए और उसके सिंहासन को ऊंचा करना चाहिए। हे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम सर्वस्व हो, तुमने सब कुछ पूरा कर लिया है और तुम्हारे साथ सब कुछ पूर्ण है, सब कुछ उज्ज्वल, बंधन से मुक्त, स्वतंत्र, मजबूत और शक्तिशाली है! गुप्त या छिपा हुआ बिल्कुल भी कुछ नहीं है; तुम्हारे साथ सभी रहस्य प्रकट हो जाते हैं। इसके अलावा, तुमने अपने बहुसंख्य दुश्मनों का न्याय किया है, तुम अपना प्रताप प्रदर्शित करते हो, अपनी उग्रता की आग दिखाते हो, अपना क्रोध दिखाते हो और उससे भी अधिक तुम अपनी अभूतपूर्व, अनंत, पूरी तरह से असीम महिमा को प्रदर्शित करते हो! सभी लोगों को जागृत होना चाहिए और बिना किसी झिझक के जय-जयकार और गायन करना चाहिए, इस सर्वशक्तिमान, सर्वथा-सच्चे, सर्वथा-जीवंत, उदार, महिमावान और सच्चे परमेश्वर का गुणगान करना चाहिए, जो हमेशा से चिरस्थायी है। उसके सिंहासन को लगातार सराहना चाहिए, उसके पवित्र नाम की प्रशंसा और महिमा करनी चाहिए। यह मेरे—परमेश्वर का—शाश्वत इरादा है और यह वह अनंत आशीर्वाद है, जो वह हमारे लिए प्रकट करता है और हमें देता है! हममें से कौन इसका वारिस नहीं है? परमेश्वर के आशीर्वाद को विरासत में पाने के लिए, व्यक्ति को परमेश्वर के पवित्र नाम को सराहना चाहिए और सिंहासन की चारों ओर से आराधना करने के लिए आना चाहिए। वे सभी लोग जो उसके सामने अन्य उद्देश्यों और इरादों के साथ जाते हैं, वे उसकी उग्र आग से पिघल जाएँगे। आज वह दिन है, जब उसके दुश्मनों का न्याय किया जाएगा और वे इसी दिन नष्ट भी हो जाएँगे। इसके अलावा, यही वह दिन है, जब मैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट होऊँगा और महिमा और सम्मान प्राप्त करूँगा। सारे लोगों! उस सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सराहना और स्वागत करने के लिए शीघ्र उठो, जो सदा-सर्वदा के लिए हमें प्रेमपूर्ण दयालुता देता है, उद्धार को अमल में लाता है, हमें आशीर्वाद प्रदान करता है, अपने पुत्रों को पूरा करता है और सफलतापूर्वक अपने राज्य को हासिल करता है! यह परमेश्वर का अद्भुत कर्म है! यह परमेश्वर का शाश्वत प्रारब्ध और व्यवस्था है-कि हमें बचाने, हमें पूरा करने और हमें महिमा में लाने के लिए वह स्वयं ही आया है।

वे सभी जो उठकर गवाही नहीं देते हैं, वे अंधों के अग्रगामी हैं और अज्ञानता के राजा हैं। वे शाश्वत अज्ञानी, सतत मूर्ख बनेंगे; अनंत काल के लिए मृतक, जो अंधे हैं। इसलिए हमारी आत्माओं को जागृत होना चाहिए! सभी लोगों को उठ खड़े होना चाहिए! महिमा के राजा, दया के पिता, उद्धार के पुत्र, उदार सात आत्माओं की, सर्वशक्तिमान परमेश्वर जो प्रतापी उग्र आग और धार्मिक न्याय लाता है और जो सर्व-पर्याप्त, उदार, सर्वशक्तिमान और पूर्ण है, उसकी अनंत जय-जयकार, प्रशंसा और सराहना करो। उसके सिंहासन की हमेशा के लिए सराहना होगी! सभी लोगों को देखना चाहिए कि यह परमेश्वर की बुद्धि है; उद्धार का यह उसका अद्भुत तरीका है और उसकी महिमामय इच्छा की पूर्ति है। अगर हम नहीं उठते हैं और गवाही नहीं देते हैं, तो इस पल के बीत जाने के बाद, हम लौट कर नहीं जा सकेंगे। हम आशीर्वाद प्राप्त करेंगे या दुर्भाग्य, यह हमारी यात्रा के इस वर्तमान चरण में तय किया जा रहा है, अर्थात इस समय हम क्या करते हैं, क्या सोचते हैं और अभी कैसे जीते हैं। तो तुम सभी को कैसे कार्य करना चाहिए? गवाही दो और परमेश्वर की हमेशा सराहना करो; सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा—शाश्वत, अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का उत्कर्ष करो!

अब से तुम्हें स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि जो लोग परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते—जो अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते, साथ ही जो उसके बारे में संदेह रखते हैं—वे सभी बीमार और मरे हुए लोग हैं और ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर की अवज्ञा करते हैं! प्राचीन काल से ही परमेश्वर के वचन सच साबित हो चुके हैं : जो लोग मेरे साथ नहीं हैं, वे बिखर जाते हैं, और जो भी मेरे साथ नहीं हैं, वे मेरे विरुद्ध हैं; पत्थर में तराशा गया यह एक अटल सत्य है! जो लोग परमेश्वर के लिए गवाही नहीं देते, वे शैतान के अनुचर हैं। ये लोग परमेश्वर की संतानों को बाधित और गुमराह करने और उसके प्रबंधन में गड़बड़ी करने के लिए आए हैं; उनका निपटान तलवार से किया जाना चाहिए! जो कोई भी उनके प्रति अच्छे इरादे प्रकट करते हैं, वो अपना विनाश चाहते हैं। तुम्हें परमेश्वर के आत्मा के कथनों को सुनना और उन पर विश्वास करना चाहिए, परमेश्वर के आत्मा के मार्ग पर चलना चाहिए और परमेश्वर के आत्मा के वचनों को जीना चाहिए। उससे भी बढ़कर, तुम्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सिंहासन की अंत के दिनों तक सराहना करनी चाहिए!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सात आत्माओं का परमेश्वर है! सात आँखों और सात तारों वाला भी, वही है; वह सात मुहरों को खोलता है और सारी पुस्तक भी उसी के द्वारा खोली गई है! उसने सात तुरहियों को बजाया है, सात कटोरे और सात विपत्तियाँ भी उसी के नियंत्रण में हैं, जिन्हें वह अपनी इच्छानुसार उपयोग में लाता है। ओह, वे सात गर्जनाएं जो हमेशा मुहर-बंद थीं! उन्हें प्रकट करने का समय आ गया है! वह, जो उन सात गर्जनाओं को खोलेगा, पहले ही हमारी आँखों के सामने प्रकट हो चुका है!

हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारे साथ सब कुछ बंधनमुक्त और स्वतंत्र होता है; कोई कठिनाइयाँ नहीं होती हैं और सब कुछ आसानी से चलता है! तुम्हें कुछ भी अवरुद्ध या बाधित करने का साहस नहीं कर सकता और सभी तुम्हारे सामने समर्पित हो जाते हैं। जो समर्पण नहीं करते, मृत्यु को प्राप्त होंगे!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, सात आँखों वाले परमेश्वर! सब कुछ पूर्ण रूप से स्पष्ट है, सब कुछ उज्ज्वल है और खुला हुआ है और सभी कुछ प्रकट और अनावृत किया गया है। उसके होते हुए, सब कुछ बिल्कुल साफ़ है और न केवल स्वयं परमेश्वर इस तरह है, बल्कि उसके पुत्र भी ऐसे ही हैं। कोई भी व्यक्ति, वस्तु को और कोई भी बात, परमेश्वर या उसके पुत्रों से छिपाकर नहीं रखी जा सकती!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सात सितारे उज्ज्वल हैं! कलीसिया को उसके द्वारा परिपूर्ण किया गया है; वह कलीसिया के संदेशवाहकों को निर्धारित करता है और समग्र कलीसिया उसकी देखरेख में होती है। वह सभी सात मुहरों को खोलता है, वह स्वयं अपनी प्रबंधन योजना को और उसे पूरा करने की अपनी इच्छा को लाता है। वह पुस्तक उसकी प्रबंधन योजना की रहस्यमयी आध्यात्मिक भाषा है और उसने इसे खोलकर प्रकट कर दिया है!

सभी लोगों को उसकी सात गुंजायमान तुरहियों को ध्यान लगाकर सुनना चाहिए। उसके साथ सब कुछ स्पष्ट कर दिया जाता है, फिर कभी न छिपने के लिए और अब कोई दुख नहीं होता। सब कुछ प्रकट है, सब कुछ विजयी है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सात तुरहियाँ खुली, महिमामय और विजयी तुरहियाँ हैं! यही वो तुरहियाँ भी हैं, जो उसके शत्रुओं का न्याय करती हैं! उसकी विजय के बीच, उसके सींग को ऊँचा उठाया जाता है! वह पूरे ब्रह्मांड पर राज्य करता है!

उसने विपत्तियों के सात कटोरे तैयार किए हैं, उसके शत्रुओं पर निशाना लगाया गया है और वे चरम सीमा तक खोले गए हैं और वे शत्रु उसकी उग्र आग की लपटों में भस्म हो जाएँगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने अधिकार की शक्ति दिखाता है और उसके सभी शत्रु नष्ट हो जाते हैं। अंतिम सात गर्जनाएं अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने मुहर-बंद नहीं हैं; वे सभी प्रकट हैं! वे सभी प्रकट हैं! उन सात गर्जनाओं के साथ वह अपने शत्रुओं को मौत के घाट उतारता है, ताकि पृथ्वी स्थिर हो जाए, उसकी सेवा कर सके, और फिर से बर्बाद न हो!

हे धार्मिक सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम निरंतर तुम्हारा गुणगान करते हैं! तुम अनंत प्रशंसा, अनंत अभिनन्दन और अनंत सराहना के योग्य हो! तुम्हारी सात गर्जनाएं केवल तुम्हारे न्याय के लिए ही नहीं हैं, बल्कि उससे भी ज्यादा वे तुम्हारी महिमा और तुम्हारे अधिकार के लिए हैं, ताकि सब कुछ पूर्ण हो सके!

सभी लोग सिंहासन के सामने खुशियाँ मनाते हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा का गुणगान और उसकी स्तुति करते हैं! उनकी आवाजें समस्त विश्व को गर्जना की तरह कँपाती हैं! सभी चीज़ें बिलकुल उसी के कारण मौजूद हैं और उसी से उत्पन्न होती हैं। कौन है जो उसे समस्त महिमा, सम्मान, अधिकार, ज्ञान, पवित्रता, विजय और प्रकटन का पूर्ण श्रेय न देने का साहस करेगा? यह उसकी इच्छा की उपलब्धि है और यह उसके प्रबंधन की रचना का अंतिम समापन है!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 34

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 55

सिंहासन से सात गर्जनें निकलती हैं, वे ब्रह्मांड को हिला देती हैं, स्वर्ग और पृथ्वी को उलट-पुलट कर देती हैं, और आकाश में गूँजती हैं! यह आवाज़ कानों के परदे फाड़ देती है, लोग न तो इससे बचकर भाग सकते हैं, और न ही इससे छिप सकते हैं। बिजली की चमक और गरज की गूँजें फूट निकलती हैं, एक क्षण में स्वर्ग और पृथ्वी दोनों रूपांतरित हो जाते हैं, और लोग मृत्यु की कगार पर हैं। फिर, आकाश से बरसता एक प्रचंड तूफ़ान बिजली की रफ़्तार से समस्त ब्रह्माण्ड को अपनी लपेट में ले लेता है! धरती के सुदूर कोनों तक, मूसलाधार वर्षा के समान सब कुछ को सिर से पैर तक धो डालता है, कहीं एक दाग़ तक बाक़ी नहीं रहता है; उससे कुछ भी छिपा नहीं रह सकता है और न ही कोई व्यक्ति इससे बचाया जा सकता है। बिजली की कौंध की तरह ही, गर्जन की गड़गड़ाहट, सर्द रोशनी के साथ दमकती है और मनुष्यों को भय से थरथरा देती है! तेज दुधारी तलवार विद्रोह के पुत्रों को मार गिराती है और शत्रुओं को घोर विपत्ति का सामना करना पड़ता है, ऐसा कोई आश्रय नहीं बचता है जहाँ वे भाग कर छिप सकें; आँधी-बरसात की प्रचंडता से वे चकरा जाते हैं, और उसके वार से लड़खड़ाते हुए वे तुरंत बेहोश होकर बहते पानी में गिर जाते हैं और बहा लिए जाते हैं। केवल मौत होती है, उनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं होता। सात गर्जनें मुझसे निकलती हैं, और मिस्र के ज्येष्ठ पुत्रों को मार गिराने, बुरे लोगों को दंडित करने और मेरी कलीसियाओं को शुद्ध करने के मेरे इरादे को व्यक्त करती हैं, ताकि सभी कलीसियाएँ एक-दूसरे से निकटता से जुड़ी रहें, भीतर-बाहर से एक हों, और वे मेरे साथ एक ही दिल की हों, ताकि ब्रह्मांड की सभी कलीसियाओं को एक बनाया जा सके। यह मेरा उद्देश्य है।

गर्जना होती है, और रोने-चीखने की आवाज़ें फूट निकलती हैं। कुछ अपनी नींद से जगा दिए जाते हैं, और, बहुत घबड़ा कर, वे अपनी आत्माओं को गहराई से जाँचते हुए सिंहासन के सामने वापस भाग आते हैं। वे अपनी अनियंत्रित चालाकी, नीच हरकतें करना बंद कर देते हैं; ऐसे लोगों के जागने में अभी देर नहीं हुई है। मैं सिंहासन से देखता हूँ। मैं लोगों के दिलों की गहराई में झाँकता हूँ। मैं उन लोगों को बचाता हूँ जो मुझे ईमानदारी और लगन से चाहते हैं, और मैं उन पर दया करता हूँ। मैं अनंत काल तक उन लोगों को बचाऊँगा जो अपने दिलों में मुझे सब से अधिक प्यार करते हैं, जो मेरे इरादे समझते हैं, और जो मार्ग के अंत तक मेरा अनुसरण करते हैं। मेरा हाथ उन्हें सुरक्षित रखेगा ताकि वे इस परिस्थिति का सामना न करें और उन्हें कोई भी नुकसान न पहुँचे। जब कुछ लोग चमकती बिजली के इस दृश्य को देखते हैं, तो उनके दिल में एक ऐसा क्लेश होता है जिसे व्यक्त करना उनके लिए बहुत कठिन होता है, और उन्हें अत्यधिक पश्चाताप होता है। अगर वे इस तरह के व्यवहार करते रहते हैं, तो उनके लिए बहुत देर हो चुकी है। ओह, सब कुछ, सब कुछ! यह सब कुछ किया जाएगा। यह भी उद्धार के मेरे साधनों में से एक है। मैं उन लोगों को बचाता हूँ जो मुझसे प्यार करते हैं और बुरे लोगों को मार गिराता हूँ। मैं पृथ्वी पर अपने राज्य को स्थायी और सुस्थिर बनाता हूँ सभी राष्ट्रों और लोगों को, कायनात में और पृथ्वी के अंतिम छोरों के सभी लोगों को पता लगने देता हूँ कि मैं प्रताप हूँ, मैं भड़कती आग हूँ, मैं वो परमेश्वर हूँ जो हर व्यक्ति के अंतरतम हृदय की जांच करता है। इस समय से, महान श्वेत सिंहासन का न्याय लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट किया जाता है और सभी लोगों के सामने यह घोषणा की जाती है कि न्याय शुरू हो गया है! यह बात संदेह से परे है कि जिनकी बात दिल से नहीं निकलती है, जो संदेह करते हैं और निश्चित होने की हिम्मत नहीं रखते हैं, समय बर्बाद करने वाले, जो मेरी आकांक्षाएँ समझते तो हैं लेकिन उन्हें अभ्यास में लाने के इच्छुक नहीं हैं, उनका न्याय किया जाना चाहिए। तुम लोगों को अपने इरादों और उद्देश्यों की सावधानी से जाँच करनी चाहिए, और अपना उचित स्थान ले लेना चाहिए; मेरे वचनों का गंभीरता से अभ्यास करो, अपने जीवन के अनुभवों को महत्व दो, ऊपरी जोश से काम मत करो, बल्कि अपने जीवन का विकास करो, उसे परिपक्व, स्थिर और अनुभवी बनाओ, केवल तब ही तुम मेरे इरादे से मेल खाओगे।

शैतान के अनुचरों और उन दुष्ट आत्माओं को जो मेरे निर्माण को बाधित और नष्ट करने का कार्य करते हैं, उन्हें चीज़ों के शोषण का कोई भी मौका न दो। उन्हें कठोरता से सीमित और नियंत्रित किया जाना चाहिए; उनके साथ केवल तेज़ तलवार से निपटा जा सकता है। उनमें जो सबसे बुरे हैं, उन लोगों को तत्काल जड़ से उखाड़ दिया जाना चाहिए ताकि वे भविष्य में कोई खतरा पैदा न करें। और कलीसिया को पूर्ण किया जाएगा, किसी भी विरूपता से मुक्त, और वह स्वास्थ्य, जीवनशक्ति और ऊर्जा से भरपूर होगी। चमकती बिजली के बाद, गड़गड़ाहटें गूँज उठती हैं। तुम लोगों को उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, और हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि जो छूट गया है उसे पकड़ने का पूरा प्रयास करना चाहिए, और तुम सब निश्चित रूप से देख सकोगे कि मेरा हाथ क्या करता है, मैं क्या हासिल करना चाहता हूँ, किसे हटाना चाहता हूँ, किसे पूर्ण करना चाहता हूँ, किसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता हूँ, और किसे मार गिराना चाहता हूँ। यह सब तुम लोगों की आँखों के सामने घटित होगा ताकि तुम सब स्पष्ट रूप से मेरी सर्वशक्तिमत्ता को देख सको।

सिंहासन से लेकर पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के सिरों तक, सात गर्जनें गूँज उठती हैं। लोगों का एक बड़ा समूह बचाया जाएगा और वे मेरे सिंहासन के सामने आत्मसमर्पण करेंगे। जीवन के इस प्रकाश का अनुसरण करते हुए लोग जीवित रहने के साधनों को तलाशते हैं और वे स्वयं को मेरे पास आकर, घुटने टेककर आराधना करने अपने मुंह से सर्वशक्तिमान सच्चे परमेश्वर के नाम को पुकारने, और अपनी प्रार्थनाओं को व्यक्त करने से नहीं रोक पाते। लेकिन जो लोग मेरा विरोध करते हैं, जो अपने दिल को कठोर कर लेते हैं, उनके कानों में गर्जन गूँजती है और बिना किसी संदेह के, उन्हें मरना ही होगा। उनके लिए केवल यही अंतिम परिणाम प्रतीक्षारत है। मेरे प्यारे पुत्र जो विजयी हैं, सिय्योन में रहेंगे और सभी लोग देखेंगे कि वे क्या प्राप्त करेंगे, और तुम सब के सामने विशाल महिमा प्रकट होगी। सचमुच यह एक महान आशीर्वाद है, और ऐसी मधुरता है जिसका वर्णन करना मुश्किल है।

गर्जन के सात शब्दों की गड़गड़ाहट गूँज आ रही है, जो मुझसे प्यार करते हैं, जो मुझे सच्चे दिल से चाहते हैं, ये उन लोगों का उद्धार है। जो मेरे हैं और जिन्हें मैंने पूर्वनिर्धारित किया और चुना है, वे सभी मेरे नाम की शरण में आ पाते हैं। वे मेरी आवाज़ सुन सकते हैं, जो उनके लिए परमेश्वर की पुकार है। पृथ्वी के सिरों पर रहने वालों को देखने दो कि मैं धार्मिक हूँ, मैं वफ़ादार हूँ, मैं प्रेममय दया हूँ, मैं करुणा हूँ, मैं प्रताप हूँ, मैं प्रचंड अग्नि हूँ, और अंततः मैं निर्मम न्याय हूँ।

दुनिया में सभी को देखने दो कि मैं वास्तविक और संपूर्ण परमेश्वर स्वयं हूँ। सभी मनुष्य पूरी तरह आश्वस्त हैं और फिर से कोई भी मेरा विरोध, मेरी आलोचना करने की, या मेरी निंदा करने की हिम्मत नहीं करता है। अन्यथा, उन्हें तुरंत शाप मिलता है और उन पर विपत्ति आती है। वे केवल रो सकते हैं और अपने दांत पीस सकते हैं चूंकि वे खुद अपना विनाश लाए हैं।

सभी लोगों को जान लेने दो, पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के सिरों को ज्ञात होने दो और प्रत्येक गृहस्थी और सभी लोग ये जान जाएँ : सर्वशक्तिमान परमेश्वर एकमात्र सच्चा परमेश्वर है। सभी लोग एक के बाद एक घुटने टेक कर मेरी आराधना करेंगे और यहाँ तक कि वे बच्चे भी जिन्होंने अभी बात करना सीखा ही है, वे भी “सर्वशक्तिमान परमेश्वर” बोल उठेंगे! सत्ताधारी अधिकारी अपनी ही आँखों के सामने सच्चे परमेश्वर को प्रकट होते देखेंगे और वे भी उपासना में साष्टांग करेंगे, दया और क्षमा की भीख माँगेंगे, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है क्योंकि उनकी मृत्यु का समय आ चुका है। उन्हें तो बस खत्म करके असीम रसातल की सज़ा ही दी जा सकती है। मैं पूरे युग को समाप्त कर दूँगा, और अपने राज्य को और भी मजबूत करूँगा। सभी राष्ट्र और समस्त लोग अनंत काल के लिए मेरे सामने झुक जाएँगे!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 35

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 56

सर्वशक्तिमान सच्चा परमेश्वर, सिंहासन पर विराजमान राजा, समस्त राष्ट्रों और लोगों की ओर मुख किए हुए पूरे ब्रह्मांड पर शासन करता है और परमेश्वर का भव्य प्रकाश दुनिया भर में चमकता है। ब्रह्मांड में और पृथ्वी के अंतिम छोरों तक सभी जीवित प्राणी देखेंगे। सच्चे परमेश्वर के मुखमंडल के प्रकाश में पर्वतों, नदियों, झीलों, भूमियों, महासागरों और सभी जीवित प्राणियों ने अपने पर्दे खोल दिए हैं और वे पुनर्जीवित हो गए हैं, मानो किसी सपने से जाग उठे हों, मानो वे मिट्टी को चीरकर निकलने वाले अंकुर हों!

आह! एकमात्र सच्चा परमेश्वर दुनिया के लोगों के सामने प्रकट होता है। उससे प्रतिरोधपूर्वक पेश आने का दुस्साहस कौन करता है? सभी भय से काँपते हैं। सभी पूरी तरह से अधीन हो जाते हैं और सभी बारम्बार उसकी दया और क्षमा की याचना करते हैं। असंख्य लोग उसके सामने घुटने टेक देते हैं और असंख्य मुँह उसकी आराधना करते हैं! महाद्वीप, महासागर, पर्वत, नदियाँ और सब वस्तुएँ उसकी निरंतर प्रशंसा करती हैं! वसंत की महक से भरी गर्म बयार अपने साथ हल्की, निरंतर वसंत-वर्षा लाती है। कलकल बहती सरिताएँ और जनसमूह समान हैं, दोनों शोक और आनंद से भरे हुए ऋणभाव और आत्मग्लानि के आँसू बहाते हैं। नदियाँ, झीलें, लहरें और हिलोरें, सभी सच्चे परमेश्वर के पवित्र नाम की प्रशंसा करते हुए गा रही हैं! प्रशंसा की ध्वनि इतनी स्पष्ट सुनाई देती है! पुरानी चीजें, जिन्हें कभी शैतान ने भ्रष्ट कर दिया था—उनमें से प्रत्येक अब नवीनीकृत और परिवर्तित होकर पूर्णतः एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेगी ...

यह पवित्र तुरही है और इसने बजना शुरू कर दिया है! ध्यान से सुनो। यह इतनी मधुर ध्वनि सिंहासन का कथन है। यह प्रत्येक राष्ट्र और परमेश्वर के चुने हुए प्रत्येक इंसान के लिए घोषणा कर रही है कि समय आ गया है, अंत के दिनों का परिणाम आ गया है। मेरी प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। मेरा राज्य पृथ्वी पर खुलकर प्रकट हो गया है और दुनिया के राज्य मेरे, यानी परमेश्वर के राज्य बन गए हैं। सिंहासन से मेरी सात तुरहियाँ बजती हैं और ऐसी चमत्कारी चीजें घटित होंगी! धरती के कोने-कोने से लोग हिमस्खलन और वज्रपात की प्रचंडता के साथ हर दिशा से एक-साथ लपककर आते हैं, कुछ समुद्र की यात्रा करते हुए, तो कुछ विमानों में उड़कर, कुछ हर आकार और स्वरूप के वाहनों पर सवार होकर, तो कुछ घोड़ों की सवारी करके।

मैं अपने लोगों को आनंदित होकर देखता हूँ, जो मेरी वाणी सुन पाते हैं और हर राष्ट्र और भूमि से इकट्ठे होते हैं। सच्चे परमेश्वर का नाम हमेशा अपने मुख पर रखकर जनसमूह अनवरत रूप से उसकी स्तुति करते और उछलते-कूदते हैं! वे दुनिया के लोगों को गवाही देते हैं और सच्चे परमेश्वर के लिए उनकी गवाही की आवाज अनेक जलधाराओं की गर्जना जैसी है। जनसमूह मेरे राज्य में उमड़ पड़ेंगे।

मेरी सात तुरहियाँ बजकर सोए हुए लोगों को जगाती हैं! जल्दी उठो, ज्यादा देर नहीं हुई। अपने जीवन की ओर झुको! अपनी आँखें खोलो और देखो कि अभी क्या समय हुआ है। खोजने लायक क्या चीज़ है? सोचने के लिए क्या रखा है? और चिपके रहने के लिए क्या है? क्या तुमने कभी मेरे जीवन को पाने और उन सभी चीज़ों को पाने के मूल्य के अंतर पर विचार नहीं किया, जिनसे तुम प्यार करते हो और जिनसे चिपके रहते हो? अब और मनमाने मत बनो या खिलवाड़ मत करो। इस अवसर को मत गँवाओ। यह समय फिर नहीं आएगा! तुरंत खड़े हो जाओ, अपनी आत्मा से काम लेने का अभ्यास करने में खुद को प्रशिक्षित करने में सक्षम बनो और शैतान की अनेक साजिशों और चालों की असलियत जानने और उन्हें नाकाम करने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करने में सक्षम बनो, और शैतान पर विजय प्राप्त करो, ताकि तुम्हारे जीवन का अनुभव गहरा हो सके और तुम मेरे स्वभाव को जी सको, ताकि तुम्हारा जीवन परिपक्व और अनुभवी बन सके और तुम हमेशा मेरे पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाकर चल सको। न तो हतोत्साहित हो और न ही कमजोर बनो, बल्कि हमेशा कदम-दर-कदम, ठीक मार्ग के अंत तक आगे बढ़ते रहो!

जब सात तुरहियाँ फिर से बजेंगी, तो यह न्याय की तुरही की जोरदार आवाज होगी, विद्रोह के पुत्रों के न्याय के लिए, अनगिनत राष्ट्रों और लोगों के न्याय के लिए, और प्रत्येक राष्ट्र परमेश्वर के सामने झुकेगा। परमेश्वर का भव्य मुख-मंडल निश्चित रूप से अनगिनत राष्ट्रों और लोगों के सामने प्रकट होगा। हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त हो जाएगा, और निरंतर सच्चे परमेश्वर को पुकारेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर और अधिक महिमा-मंडित होगा, और मेरे पुत्र और मैं एक साथ महिमा प्राप्त करेंगे और शासन करेंगे, अनगिनत राष्ट्रों और लोगों का न्याय करेंगे, बुरे को दंडित करेंगे और जो मेरे द्वारा चुने गए हैं उन्हें बचाएँगे और उन पर दया करेंगे, और राज्य को ठोस और स्थिर बनाएँगे। सात तुरहियों की आवाज़ से बहुत सारे लोगों को बचाया जाएगा, जो निरंतर प्रशंसा के साथ मेरे सामने घुटने टेकने और मेरी आराधना करने के लिए लौट आएँगे!

जब सात तुरहियाँ एक बार फिर से बजेंगी, तो यह युग का समापन होगा, दानवों और शैतान पर जीत का तूर्यनाद, पृथ्वी पर राज्य में खुलकर जीने की शुरुआत की सूचना देने वाली सलामी! कितनी बुलंद आवाज़ है, वह आवाज़ जो सिंहासन के चारों ओर गूँजती है, यह तूर्यनाद स्वर्ग और पृथ्वी को हिला देता है, जो मेरी प्रबंधन योजना की जीत का संकेत है, और जो शैतान का न्याय है; यह इस पुरानी दुनिया को पूरी तरह से मौत की सज़ा और अथाह कुंड में डाल देने की सज़ा देता है! तुरही का यह तूर्यनाद दर्शाता है कि अनुग्रह का द्वार बंद होने वाला है, पृथ्वी पर राज्य का जीवन शुरू होगा, जो पूरी तरह से उचित और उपयुक्त है। परमेश्वर उन्हें बचाता है, जो उससे प्रेम करते हैं। एक बार जब वे उसके राज्य में वापस लौट जाएँगे, तो धरती पर लोग अकाल और महामारी का सामना करेंगे, और परमेश्वर के सात कटोरे और सात विपत्तियाँ एक के बाद एक सामने आ जाएँगी। पृथ्वी और स्वर्ग मिट जाएँगे, परंतु मेरा वचन नहीं!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 36

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 57

अंत के दिनों का मसीह जीवन लाता है, और सत्य का स्थायी और शाश्वत मार्ग लाता है। यह सत्य वह मार्ग है, जिसके द्वारा मनुष्य जीवन प्राप्त करता है, और यही एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह द्वारा प्रदान किया गया जीवन का मार्ग नहीं खोजते, तो तुम यीशु की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं करोगे, और स्वर्ग के राज्य के द्वार में प्रवेश करने के योग्य कभी नहीं हो पाओगे, क्योंकि तुम इतिहास की कठपुतली और कैदी दोनों ही हो। जो लोग विनियमों से, शब्दों से और इतिहास की बेड़ियों से नियंत्रित होते हैं, वे न तो कभी जीवन प्राप्त कर पाएँगे और न ही जीवन का अनंत मार्ग प्राप्त कर पाएँगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वे जो प्राप्त करते हैं वह सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन के जल के बजाय बस मैला पानी ही है, जिससे वे हजारों सालों से चिपके हुए हैं। जिन्हें जीवन के जल की आपूर्ति नहीं की जाती, वे हमेशा मुर्दे, शैतान के खिलौने और नरक की संतानें बने रहेंगे। फिर वे कैसे परमेश्वर के दर्शन कर सकते हैं? तुम केवल अतीत को पकड़े रखने की खोज में रहते हो, स्थिर खड़े रहने और चीजों को वैसे ही रखने की कोशिश करते हो और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को छोड़ने की खोज में नहीं रहते, इसलिए क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरोधी नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के कदम उमड़ती लहरों और घुमड़ते गर्जनों की तरह जबरदस्त और शक्तिशाली हैं—फिर भी तुम निष्क्रियता से बैठकर तबाही का इंतजार करते हो, उससे चिपके रहते हो जो पुराना है और चीजों के अपनी गोद में आ गिरने की प्रतीक्षा करते हो। इस तरह, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? यह कैसे दिखा सकता है कि तुम जिस परमेश्वर को थामे हो, वह वही परमेश्वर है जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? और तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के शब्द तुम्हें पार कराकर नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के चरणों को खोजने में तुम्हारी अगुआई कैसे कर सकते हैं? और वे तुम्हें ऊपर स्वर्ग में कैसे ले जा सकते हैं? जिन्हें तुम अपने हाथों में थामे हो, वे केवल शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना दे सकते हैं, वे तुम्हें जीवन देने में सक्षम सत्य नहीं हैं। धर्मशास्त्र के शब्द जिन्हें तुम पढ़ते हो, वे केवल तुम्हारी जिह्वा को समृद्ध कर सकते हैं; वे बुद्धिमानी के शब्द नहीं हैं जो मानव जीवन को जानने में तुम्हारी मदद कर सकते हों, उनके तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाने वाला मार्ग होने की बात तो दूर रही। क्या यह विसंगति तुम्हारे लिए चिंतन का कारण नहीं है? क्या यह तुम्हें इसके भीतर समाहित रहस्यों के बारे में अंतर्दृष्टि नहीं देती है? क्या तुम अपने बल पर परमेश्वर से मिलने के लिए अपने आप को स्वर्ग भिजवाने में समर्थ हो? परमेश्वर के आए बिना, क्या तुम परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनंद मनाने के लिए अपने आप को स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? तो मेरा उपदेश यह है कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो और उसकी ओर देखो जो अभी कार्य कर रहा है—देखो कि अब अंत के दिनों में मनुष्य को बचाने का कार्य कौन कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो तुम कभी भी सत्य प्राप्त नहीं करोगे, और न ही कभी जीवन प्राप्त करोगे।

जो लोग मसीह द्वारा बोले गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करना चाहते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे बेतुके लोग हैं, और जो मसीह द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते, वे कोरी कल्पना में खोए हैं। और इसलिए मैं कहता हूँ कि जो लोग अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करते, उनसे परमेश्वर हमेशा घृणा करेगा। अंत के दिनों में मसीह राज्य के लिए मनुष्य का प्रवेशद्वार है और ऐसा कोई नहीं है जो उसे लाँघकर निकल सके। मसीह के माध्यम के अलावा किसी भी दूसरे तरीके से किसी को भी परमेश्वर द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता। तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, इसलिए तुम्हें उसके वचन स्वीकारने चाहिए और उसके वचन के प्रति समर्पण करना चाहिए। सत्य और जीवन के प्रावधान को स्वीकारने में असमर्थ रहते हुए केवल आशीष प्राप्त करने की मत सोचो। मसीह अंत के दिनों में इसलिए आया है ताकि वह उन सबको जीवन प्रदान कर सके जो उसमें ईमानदारी से विश्वास रखते हैं। यह कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है, और यह कार्य वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वाले सभी लोगों को अपनाना ही चाहिए। यदि तुम मसीह को नहीं स्वीकारते और यही नहीं, उसकी भर्त्सना, ईशनिंदा या उसका उत्पीड़न करते हो, तो तुम्हें अनंतकाल तक जलाया जाना तय है और तुम परमेश्वर के राज्य में कभी प्रवेश नहीं करोगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मसीह स्वयं पवित्र आत्मा की अभिव्यक्ति है, परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वह है जिसे परमेश्वर ने अपना कार्य पृथ्वी पर करने के लिए सौंपा है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि तुम वह सब स्वीकार नहीं करते जो अंत के दिनों के मसीह द्वारा किया जाता है, तो तुम पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करते हो। पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करने वाले जिस प्रतिफल के पात्र हैं, वह सभी को स्वतः स्पष्ट है। मैं तुम्हें यह भी बताता हूँ : अगर तुम अंत के दिनों के मसीह का प्रतिरोध करते हो, अगर तुम अंत के दिनों के मसीह को नकारते हो तो कोई भी अन्य तुम्हारे बदले में इसका अंजाम नहीं भुगत सकता है। इतना ही नहीं, उस बिंदु के बाद तुम्हें परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करने का अवसर कभी नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने तौर-तरीके सुधारना भी चाहो, तब भी तुम दोबारा कभी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। ऐसा इसलिए क्योंकि तुम जिसका प्रतिरोध कर रहे हो वह मानव नहीं है, तुम जिसे अस्वीकार कर रहे हो वह कोई तुच्छ व्यक्ति नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम जानते हो कि इसके क्या दुष्परिणाम हैं? तुम कोई छोटी-मोटी गलती नहीं कर रहे हो, बल्कि एक जघन्य पाप कर रहे हो। और इसलिए मैं हर व्यक्ति को सलाह देता हूँ कि सत्य के सामने अपने नुकीले दाँत और पंजे मत दिखाओ या मनमानी टिप्पणियाँ मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुम्हें जीवन दिला सकता है, और सत्य के अलावा कुछ भी तुम्हें पुनः जन्म लेने या दोबारा परमेश्वर का चेहरा देखने में सक्षम नहीं बना सकता।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 58

यह पूरी तरह से मेरे अनुग्रह और दया की वजह से ही है कि मेरे रहस्य प्रकट और खुले तौर पर व्यक्त होते हैं, और अब छिपे नहीं हैं। और यही नहीं, मेरे वचन का मनुष्यों के बीच प्रकट होना और उनका छिपा न रहना भी मेरे अनुग्रह और मेरी दया की वजह से ही है। मैं उन सभी से प्यार करता हूँ, जो सच्चे मन से मेरे लिए स्वयं को खपाते हैं और खुद को मुझे सौंप देते हैं। मैं उन सभी से घृणा करता हूँ, जो मुझसे जन्मे हैं, फिर भी, मुझे नहीं जानते, यहाँ तक कि मेरा प्रतिरोध भी करते हैं। मैं ऐसे किसी भी व्यक्ति का परित्याग नहीं करूँगा, जो ईमानदारी से मेरे प्रति समर्पित है; बल्कि मैं उसके आशीष दोगुने कर दूँगा। जो लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं, उन्हें मैं दोगुनी सजा दूँगा और मैं बिल्कुल भी उन्हें आसानी से नहीं छोड़ूँगा। मेरे राज्य में कोई कुटिलता या कपट नहीं है, और कोई सांसारिकता नहीं है; अर्थात् वहाँ मृतकों की कोई गंध नहीं है। बल्कि सब कुछ सत्यनिष्ठा और धार्मिकता है; सब कुछ शुद्ध सरलता और खुलापन है, और कुछ भी छिपाया या गुप्त नहीं रखा गया है। सब-कुछ ताजा है, सब-कुछ आनंद है, और सब-कुछ आत्मिक उन्नति है। जिस किसी से अभी भी मृतकों की दुर्गंध आती है, वह किसी भी तरीके से मेरे राज्य में नहीं रह सकता, बल्कि उसे मेरी लोहे की छड़ द्वारा शासित किया जाएगा। अनादि काल से लेकर आज तक के सभी अंतहीन रहस्य पूरी तरह से तुम लोगों पर प्रकट किए जाते हैं—उन लोगों के समूह पर, जिन्हें अंत के दिनों में मेरे द्वारा प्राप्त किया जाता है। क्या तुम धन्य महसूस नहीं करते? वे दिन, जब सब खुले तौर पर प्रकट किया जाता है, यही नहीं, वे दिन, जिनमें तुम लोग मेरा शासन साझा करते हो।

लोगों का वह समूह, जो वास्तव में राजाओं की तरह शासन करता है, मेरे द्वारा पूर्वनियत किए जाने और चुने जाने पर निर्भर करता है, और इसमें बिलकुल भी कोई मानव-इच्छा नहीं होती। जो कोई इसमें हिस्सा लेने की हिम्मत करेगा, उसे मेरे हाथ का प्रहार झेलना होगा, और ऐसे लोग मेरी प्रचंड अग्नि के पात्र बनेंगे; यह मेरी धार्मिकता और प्रताप का दूसरा पहलू है। मैंने कहा है कि मैं सभी चीजों पर शासन करता हूँ, मैं वह बुद्धिमान परमेश्वर हूँ जो पूर्ण अधिकार का उपयोग करता है, और मैं किसी के प्रति भी उदार नहीं हूँ; मैं अत्यंत निष्ठुर हूँ, व्यक्तिगत भावनाओं से पूरी तरह रहित हूँ। मैं हर किसी से अपनी धार्मिकता, सत्यपरायणता और प्रताप के साथ व्यवहार करता हूँ (चाहे कोई कितना भी अच्छा क्यों न बोलता हो, मैं उसे नहीं छोड़ूँगा), और इस बीच मैं हर किसी को अपने कर्मों का चमत्कार बेहतर ढंग से देखने और साथ ही अपने कर्मों का अर्थ समझने में सक्षम बनाता हूँ। एक-एक करके मैंने दुष्ट आत्माओं को उनके द्वारा किए जाने वाले सभी प्रकार के कर्मों के लिए दंडित किया, और प्रत्येक को अथाह कुंड में फेंक दिया। यह काम मैंने समय के शुरू होने से पहले किया, और उनके लिए न कोई पद छोड़ा, न ही कार्य करने की कोई जगह छोड़ी। मेरे चुने हुए लोगों—मेरे द्वारा पूर्वनियत किए गए और चुने गए लोगों—में से कोई भी कभी किसी दुष्टात्मा द्वारा ग्रस्त नहीं किया जा सकता, और वे हमेशा पवित्र रहेंगे। जहाँ तक उनकी बात है, जिन्हें मैंने पूर्वनियत नहीं किया और चुना नहीं है, उन्हें मैं शैतान को सौंप दूँगा और उन्हें अब रहने नहीं दूँगा। सभी पहलुओं में, मेरे प्रशासनिक आदेशों में मेरी धार्मिकता और मेरा प्रताप शामिल हैं। मैं उन लोगों में से एक को भी नहीं छोडूँगा, जिन पर शैतान कार्य करता है, बल्कि उन्हें सशरीर रसातल में डाल दूँगा, क्योंकि मैं शैतान से घृणा करता हूँ। मैं उसे किसी भी तरह आसानी से नहीं छोड़ूँगा, बल्कि उसे पूरी तरह से नष्ट कर दूँगा, और उसे अपना कार्य करने का जरा-सा भी मौका नहीं दूँगा। जिन्हें शैतान ने एक निश्चित सीमा तक भ्रष्ट कर दिया है, वे (अर्थात् वे, जो आपदा के पात्र हैं), मेरे अपने हाथ की बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवस्था के अधीन हैं। यह मत सोचो कि ऐसा शैतान की क्रूरता की वजह से हुआ है; जान लो कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ, जो ब्रह्मांड और सभी चीजों पर शासन करता है! मेरे लिए ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे सुलझाया नहीं जा सकता, ऐसी कोई चीज या ऐसा कोई वचन तो बिल्कुल भी नहीं है, जिसे पूरा नहीं किया जा सकता या कहा नहीं जा सकता। मनुष्यों को मेरे सलाहकारों की तरह कार्य नहीं करना चाहिए। मेरे हाथों मारे जाने और रसातल में डाल दिए जाने से सावधान रहो। मैं तुम्हें यह बताता हूँ! जो लोग आज मेरे साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं, वे सबसे चतुर हैं, और वे नुकसान से बचेंगे और न्याय की पीड़ा से भी बचे रहेंगे। ये सब मेरी व्यवस्थाएँ हैं, मेरे द्वारा पूर्वनियत हैं। यह सोचकर कि तुम बहुत महान हो, अविवेकपूर्ण टीका-टिप्पणियाँ और बड़ी-बड़ी बातें मत करो। क्या यह सब मेरे द्वारा पूर्वनियत किए जाने से नहीं है? तुम लोगों को, जो मेरे सलाहकार होगे, कोई शर्म नहीं है! तुम अपना आध्यात्मिक कद नहीं जानते; वह कितना दयनीय रूप से छोटा है! फिर भी, तुम्हें लगता है कि यह कोई बड़ा मामला नहीं है, और खुद को नहीं जानते। बार-बार तुम लोग मेरे वचन अनसुने कर देते हो, जिससे मेरे कठिन प्रयास व्यर्थ हो जाते हैं, और यह बिलकुल नहीं समझते कि वे मेरे अनुग्रह और दया की अभिव्यक्तियाँ हैं। इसके बजाय, तुम बार-बार अपनी चालाकी दिखाने की कोशिश करते हो। क्या तुम्हें यह याद है? उन लोगों को कैसी ताड़ना मिलनी चाहिए, जिन्हें लगता है कि वे बहुत चतुर हैं? मेरे वचनों के प्रति उदासीन और निष्ठाहीन रहकर, और उन्हें अपने हृदय में न उकेरकर तुम लोग तमाम चीजें करने के लिए दिखावे के रूप में मेरा उपयोग करते हो। कुकर्मियो! तुम लोग कब मेरे हृदय पर पूरी तरह से ध्यान दे पाओगे? तुम उसके प्रति बिलकुल भी विचारशील नहीं हो, इसलिए तुम लोगों को “कुकर्मी” कहना तुम लोगों के प्रति दुर्व्यवहार करना नहीं है। यह तुम्हारे लिए बिलकुल उपयुक्त है!

आज मैं तुम लोगों को एक-एक करके वे चीजें दिखा रहा हूँ, जो कभी छिपी हुई थीं। बड़े लाल अजगर को अथाह कुंड में फेंक दिया गया है और उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है, क्योंकि उसे बनाए रखने का कोई फायदा न होता; इसका अर्थ है कि वह मसीह की सेवा नहीं कर सकता। इसके बाद, लाल चीजें अब अस्तित्व में नहीं रहेंगी; धीरे-धीरे उन्हें मिटकर शून्य हो जाना होगा। मैं जो कहता हूँ वह करता हूँ; यह मेरे कार्य की पूर्णता है। इंसानी धारणाएँ हटा दो, मैंने जो कुछ भी कहा है, उसे किया है। जो कोई चालाक बनने का प्रयास करता है, वह खुद पर विनाश और तिरस्कार ला रहा है, और जीना नहीं चाहता। इसलिए, मैं तुम्हें संतुष्ट करूँगा और निश्चित रूप से ऐसे लोगों को नहीं रखूँगा। इसके बाद, आबादी उत्कृष्टता में बढ़ेगी, जबकि मेरे साथ सक्रिय रूप से सहयोग न करने वालों का नामो-निशान तक मिटा दिया जाएगा। जिन्हें मैंने स्वीकार किया है, वे वो लोग हैं जिन्हें मैं पूर्ण करूँगा, और किसी एक को भी नहीं निकालूँगा। मैं जो कहता हूँ, उसमें कोई विरोधाभास नहीं है। जो लोग मेरे साथ सक्रिय रूप से सहयोग नहीं करते, वे और ताड़ना भुगतेंगे, हालाँकि अंततः मैं उन्हें निश्चित रूप से बचाऊँगा। लेकिन उस समय तक उनका जीवन-विस्तार काफी अलग होगा। क्या तुम ऐसा व्यक्ति बनना चाहते हो? उठो और मेरे साथ सहयोग करो! मैं निश्चित रूप से उन लोगों के साथ क्षुद्रता से व्यवहार नहीं करूँगा, जो ईमानदारी से खुद को मेरे लिए खपाते हैं। तुम सब जो अपने आप को ईमानदारी से मेरे प्रति समर्पित करते हो, मैं अपने सभी आशीष तुम्हें प्रदान करूँगा। अपने आप को पूरी तरह से मेरे प्रति अर्पित कर दो! तुम जो खाते हो, जो पहनते हो, और तुम्हारा भविष्य, ये सब मेरे हाथों में हैं; मैं सब ठीक प्रकार से व्यवस्थित कर दूँगा, तुम्हें अनंत आनंद पाने और कभी न खत्म होने वाली आपूर्ति की अनुमति दूँगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मैंने कहा है, “तुममें से जो लोग ईमानदारी से मेरे लिए स्वयं को खपाते हैं, मैं निश्चित रूप से उन सबको बहुत आशीष दूँगा।” हर उस व्यक्ति पर, जो खुद को ईमानदारी से मेरे लिए खपाता है, सारे आशीष आएँगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 70

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 59

मेरे लोगों की भीड़ मेरी जय-जयकार करती है, मेरे लोगों की भीड़ मेरी स्तुति करती है; असंख्य मुख एकमात्र सच्चे परमेश्वर का गुणगान करते हैं, अनगिनत लोग मेरे कर्मों को देखने के लिए अपनी आँखें उठाकर दूर निहारते हैं। राज्य मनुष्यों के जगत में अवतरित होता है, मेरा व्यक्तित्व समृद्ध और प्रचुर है। इस पर कौन खुश नहीं होगा? कौन आनंदित होकर नृत्य नहीं करेगा? ओह, सिय्योन! मेरा जश्न मनाने के लिए अपनी विजय-पताका उठाओ! मेरा पवित्र नाम घोषित करने के लिए अपना विजय-गीत गाओ! पृथ्वी की समस्त सृष्टि! जल्दी से स्वयं को शुद्ध करो, ताकि तुम मुझे अर्पित की जा सको! ऊपर के असंख्य तारो! नभ-मंडल में मेरा प्रबल सामर्थ्य दिखाने के लिए जल्दी से अपने स्थानों पर लौट जाओ! मैं पृथ्वी पर अपने लोगों की आवाजें ध्यान से सुनने के लिए कान लगाता हूँ, जो मेरे प्रति अपना असीम प्रेम और श्रद्धा गीत में उड़ेलते हैं! इस दिन, जब पूरी सृष्टि पुनर्जीवित होती है, मैं मनुष्य के जगत में आता हूँ। ठीक इसी पल, सभी फूल जोरों से खिलते हैं, सभी पक्षी एक सुर में गाते हैं, सभी चीजें उल्लास से इकट्ठा झूम उठती हैं! राज्य की तोप की सलामी के बीच शैतान का राज्य ध्वस्त हो जाता है, राज्य-गान की गड़गड़ाहट में नष्ट हो जाता है, और फिर कभी सिर नहीं उठा पाता!

पृथ्वी पर कौन सिर उठाने और प्रतिरोध करने का साहस करता है? जब मैं पृथ्वी पर उतरता हूँ तो दाह लाता हूँ, कोप लाता हूँ, सभी प्रकार की आपदाएँ लाता हूँ। पृथ्वी के राज्य अब मेरा राज्य हैं! ऊपर आकाश में बादल लुढ़कते और लहराते हैं; आकाश के नीचे झीलें और नदियाँ आनंदपूर्वक उमड़-घुमड़कर उद्वेलित करने वाला राग उत्पन्न करती हैं। विश्राम करते जानवर अपनी माँदों से बाहर निकलते हैं, और मेरे असंख्य लोग मेरे द्वारा अपनी नींद से जगा दिए जाते हैं। असंख्य लोग जिस दिन की प्रतीक्षा में थे, वह दिन आखिरकार आ ही गया! वे मुझे सर्वाधिक सुंदर गीत भेंट करते हैं!

इस खूबसूरत पल में, इस आह्लादक समय में,

ऊपर स्वर्ग में और नीचे पृथ्वी पर सब जगह स्तुति गूँजती है। इस पर कौन उल्लसित न होगा?

किसका दिल हलका नहीं होगा? इस दृश्य पर कौन नहीं रोएगा?

आकाश अब पुराना आकाश नहीं है, अब यह राज्य का आकाश है।

पृथ्वी अब वह पृथ्वी नहीं है जो पहले थी, अब यह पवित्र धरती है।

घनघोर वर्षा के बाद गंदी पुरानी दुनिया पूरी तरह से नई बना दी गई है।

पर्वत बदल रहे हैं ... नदियाँ बदल रही हैं ...

लोग भी बदल रहे हैं ... हर चीज बदल रही है...।

आह, शांत पर्वतो! उठो और मेरे लिए नृत्य करो!

आह, अचल नदियों! बहते रहो!

सपनों में खोए मनुष्यो! उठो और लक्ष्य के पीछे दौड़ो!

मैं आ गया हूँ ... मैं ही राजा हूँ...।

सभी अपनी आँखों से मेरा चेहरा देखेंगे, अपने कानों से मेरी आवाज सुनेंगे,

वे स्वयं राज्य का जीवन जीएँगे...।

कितना मधुर ... कितना सुंदर...।

अविस्मरणीय ... अविस्मरणीय...।


मेरे क्रोध की ज्वाला में बड़ा लाल अजगर जद्दोजहद कर रहा है;

मेरे प्रतापी न्याय में दानव अपना वास्तविक रूप दिखाते हैं;

मेरे कड़े वचनों के कारण सभी लोग गहरी शर्म महसूस करते हैं, छिपने को जगह नहीं पाते।

वे अतीत को याद करते हैं, कैसे वे मेरा उपहास करते थे और मेरी हँसी उड़ाते थे,

कैसे कभी ऐसा कोई समय नहीं था जब उन्होंने दिखावा नहीं किया, कभी ऐसा समय नहीं था जब उन्होंने मेरे खिलाफ विद्रोह नहीं किया।

और फिर भी आज कौन नहीं रोता? कौन खुद को दोषी नहीं ठहराता?

पूरा ब्रह्मांड जगत आँसुओं में डूबा है ...

हर्षोल्लास के स्वरों से भरा है ... हँसी-खुशी के स्वरों से भरा है...।

अतुलनीय प्रसन्नता ... अतुलनीय प्रसन्नता...।


हल्की बारिश बुदबुदाए ... भारी बर्फ फड़फड़ाए...।

लोगों में गम और खुशी दोनों का मिश्रण है ... कुछ हँस रहे हैं ...

कुछ सुबक रहे हैं ... और कुछ जयजयकार कर रहे हैं...।

मानो सब भूल गए हों ... कि यह बादलों और बारिश से भरा वसंत है,

जोरों से खिलते फूलों वाली ग्रीष्म ऋतु, भरपूर फसलों वाली शरद ऋतु,

या बर्फ और तुषार की ठिठुरती सर्दी, नहीं जानता कोई...।

आकाश में बादल तैर रहे हैं, पृथ्वी पर समुद्र उफन रहे हैं।

मेरी संतानों की भीड़ अपनी बाहें लहराती है ... नृत्य में मेरे लोगों की भीड़ के पैर थिरकते हैं...।

स्वर्गदूत काम में लगे हैं ... स्वर्गदूत चरवाही कर रहे हैं...।

धरती पर लोगों की चहलपहल है और धरती पर सभी चीजें बढ़ती जा रही हैं।


—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, राज्य-गान

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 60

मनुष्यजाति में प्रत्येक व्यक्ति को मेरे आत्मा की पड़ताल को स्वीकार करना चाहिए, अपने हर वचन और कार्य की बारीकी से जाँच करनी चाहिए, और इसके अलावा, मेरे चमत्कारिक कर्मों पर विचार करना चाहिए। पृथ्वी पर राज्य के आगमन के समय तुम लोग कैसा महसूस करते हो? जब मेरी संतान एवं लोग मेरे सिंहासन की ओर उमड़ पड़ते हैं, तो मैं महान सफेद सिंहासन के सम्मुख औपचारिक रूप से न्याय आरम्भ करता हूँ। इसका अर्थ यह है कि जब मैं पृथ्वी पर व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य आरम्भ करता हूँ, और जब न्याय का युग अपने समापन के समीप होता है, तो मैं अपने वचनों को संपूर्ण ब्रह्मांड की ओर भेजना आरम्भ करता हूँ और अपने आत्मा की आवाज को संपूर्ण ब्रह्मांड में जारी करता हूँ। अपने वचनों के माध्यम से, मैं स्वर्ग और पृथ्वी और सभी चीजों के बीच मौजूद हर व्यक्ति और चीज को निर्मल कर दूँगा, ताकि भूमि अब और गंदी और व्यभिचारी न रहे, बल्कि एक पवित्र राज्य बन जाए। मैं सभी चीजों को नया कर दूँगा, ताकि वे मेरे उपयोग के लिए उपलब्ध हों, ताकि उनमें फिर कभी मिट्टी का सार न हो और वे कभी फिर धरती की गंध से दूषित न हों। पृथ्वी पर, मनुष्य ने मेरे वचनों के लक्ष्य और मूल की टोह ली है, और मेरे कर्मों को देखा है, फिर भी कभी किसी ने वास्तव में मेरे वचनों के मूल को नहीं जाना है, और किसी ने भी, कभी भी, वास्तव में मेरे कर्मों की चमत्कारिकता को नहीं देखा है। ऐसा यह केवल आज ही हुआ है कि मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच आया हूँ और अपने वचन कहे हैं कि मनुष्य के पास मेरे बारे में कुछ ज्ञान है, और वो अपने विचारों में से “मेरे” द्वारा लिए गए स्थान को हटा रहे हैं, और उसके बजाय अपनी चेतना में व्यावहारिक परमेश्वर के लिए स्थान बना रहे हैं। मनुष्य की अपनी धारणाएँ हैं और वह उत्सुकता से भरा है; परमेश्वर को कौन नहीं देखना चाहेगा? कौन परमेश्वर से संपर्क नहीं करना चाहेगा? फिर भी केवल वह परमेश्वर जो मनुष्य को अस्पष्ट और अमूर्त लगता है वही मनुष्य के हृदय में एक निश्चित स्थान रखता है। यदि मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से न बताया होता तो कौन इसे जान पाता? कौन सचमुच यकीन करता कि वाकई मेरा अस्तित्व भी है? क्या वाकई उन्हें इसे लेकर लेशमात्र भी संदेह नहीं होगा? मनुष्य के हृदय में “मैं” और असलियत के “मैं” के बीच बहुत बड़ा अंतर है, और उनके बीच तुलना करने में कोई भी सक्षम नहीं है। यदि मैं देहधारी न होता, तो मनुष्य ने मुझे कभी भी न जाना होता, और यदि उसने मुझे जान भी लिया होता, तो क्या इस प्रकार का ज्ञान अभी भी एक धारणा न होता? प्रत्येक दिन मैं लोगों के निर्बाध प्रवाह के बीच चलता हूँ, और प्रत्येक दिन मैं प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कार्य करता हूँ। जब मनुष्य मुझे वास्तव में देख लेगा, तो वह मुझे मेरे वचनों में जान पाएगा, और वह उस ढंग को समझ पाएगा जिसके माध्यम से मैं बोलता हूँ, साथ ही वह मेरे इरादे भी समझ जाएगा।

जब राज्य औपचारिक तौर पर पृथ्वी पर आता है, तो सभी चीजों में वह कौन-सी चीज है, जो शांत नहीं होती? सभी लोगों में वह कौन है, जो भयभीत नहीं होता? मैं संपूर्ण ब्रह्मांड में हर जगह चलता हूँ, और हर चीज व्यक्तिगत रूप से मैं ही व्यवस्थित करता हूँ। इस समय, कौन नहीं जानता कि मेरे कार्य अद्भुत हैं? मेरे हाथ सभी चीजों को थामते हैं, फिर भी मैं सभी चीजों से ऊपर हूँ। आज मैंने देहधारण किया है और व्यक्तिगत रूप से मैं मनुष्यों के बीच आया हूँ—क्या यह मेरी विनम्रता और अदृश्यता का सही अर्थ नहीं है? बाहरी तौर पर, बहुत-से लोग नेक कहकर मेरी सराहना करते हैं, और सुंदर कहकर मेरी प्रशंसा करते हैं, किन्तु वास्तव में मुझे जानता कौन है? आज, मैं क्यों माँग करता हूँ कि तुम लोग मुझे जानो? क्या मेरा लक्ष्य बड़े लाल अजगर को शर्मिंदा करना नहीं है? मैं नहीं चाहता कि मनुष्य को मेरी प्रशंसा करने के लिए बाध्य होना पड़े, बल्कि चाहता हूँ कि वह मुझे जाने, जिसके जरिए वह मुझे प्रेम करने लगेगा, और इस तरह मेरी प्रशंसा करेगा। ऐसी प्रशंसा नाम के अनुरूप सार्थक होती है, और निरर्थक बात नहीं होती; केवल इस प्रकार की प्रशंसा ही मेरे सिंहासन तक पहुँच सकती है और आसमान में ऊँची उड़ान भर सकती है। क्योंकि मनुष्य को शैतान द्वारा प्रलोभित और भ्रष्ट किया गया है, क्योंकि उस पर धारणाओं और सोच ने क़ब्ज़ा कर लिया है, इसलिए व्यक्तिगत तौर पर संपूर्ण मानवजाति को जीतने, मनुष्य की सभी धारणाओं को उजागर करने, और मनुष्य की सोच की धज्जियां उड़ाने के उद्देश्य से मैं देहधारी बना हूँ। परिणामस्वरूप, मनुष्य मेरे सामने अब और आडंबर नहीं करता, तथा अपनी धारणाओं के जरिए मेरी सेवा नहीं करता, और इस प्रकार मनुष्य की धारणाओं में से “मैं” पूरी तरह हटा दिया जाता है। जब राज्य आता है, तो मैं सबसे पहले इस चरण का कार्य आरम्भ करता हूँ, और मैं ऐसा अपने लोगों के बीच करता हूँ। मेरे लोग जो बड़े लाल अजगर के देश में पैदा हुए हैं, निश्चित रूप से तुम लोगों के भीतर बड़े लाल अजगर के जहर का थोड़ा-सा या अंश-मात्र ही नहीं है। इस प्रकार, मेरे कार्य का यह चरण मुख्य रूप से तुम लोगों पर केंद्रित है, और चीन में मेरे देहधारण के महत्व का एक पहलू है। अधिकांश लोग मेरे बोले गए वचनों के एक अंश को भी समझने में असमर्थ हैं, और जब वे समझते भी हैं, तो उनकी समझ धुँधली और उलझी हुई होती है। यह उस विधि में एक अहम मोड़ है जिसके द्वारा मैं बोलता हूँ। यदि सभी लोग मेरे वचनों को पढ़ने में समर्थ होते और उनके अर्थ को समझ पाते, तो मनुष्यों में से कौन रसातल में गिर जाएगा? जब मनुष्य मुझे जान लेगा और मेरे सामने समर्पण करेगा तभी मैं आराम करूँगा, और वही वह समय होगा जब मनुष्य मेरे वचनों का अर्थ समझने में समर्थ हो पाएगा। आज, तुम लोगों का आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है—यह बिल्कुल ही दयनीय रूप से छोटा है, इतना कि इसे उठाया तक नहीं जा सकता—मेरे बारे में तुम लोगों के ज्ञान को लेकर तो कहना ही क्या।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 11

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 61

जब पूर्व से बिजली चमकती है, यह निश्चित रूप से वही क्षण भी होता है जब मैं अपने वचन बोलना आरंभ करता हूँ—जब बिजली चमकती है, तो सभी स्वर्ग रोशन हो उठते हैं और सभी तारों का रूपान्तरण हो जाता है। पूरी मानवजाति ऐसी है मानो शुद्धिकरण से गुजर चुकी हो। पूर्व से आने वाले इस प्रकाश की चमक में, समस्त मानवजाति अपने मूल स्वरूप में प्रकट हो जाती है, उनकी आँखें चुँधिया जाती हैं, उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करें, और यह तो वे और भी नहीं समझ पाते कि अपने कुरूप चेहरों को कैसे छिपाएँ। वे पशुओं जैसे भी हैं, मेरे प्रकाश से दूर भाग रहे हैं और पहाड़ी गुफाओं में शरण ले रहे हैं; फिर भी, मेरे प्रकाश में से कुछ भी नहीं मिटाया जा सकता है। सभी मनुष्य भौचक्के हैं, सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन के लिए सौभाग्यशाली महसूस करते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोसते हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को व्यक्त करना कठिन है; आत्म-ताड़ना के आँसुओं की नदियाँ बन जाती हैं और वे एक के बाद एक व्यापक जल प्रवाह में बह जाती हैं और फिर पल भर में ही उनका नामोनिशान मिट जाता है। एक बार फिर, मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जागृत कर रहा है और मानवजाति को एक और नई शुरुआत दे रहा है। मेरा हृदय उमड़ता है और पहाड़ लयबद्ध, आनन्दमय संगत में उछलते हैं, समुद्र खुशी से नाचते हैं और लहरें चट्टानों पर थाप देती हैं। जो मेरे हृदय में है, उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं सभी अशुद्ध चीजों को अपनी नजरों के अधीन भस्म कर दूँगा; मैं विद्रोह के सारे पुत्रों को अपनी नजरों के सामने से ओझल कर दूँगा, उनका आगे से कोई अस्तित्व ही नहीं रहेगा। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरुआत की है, बल्कि समस्त ब्रह्मांड में एक नए कार्य की शुरुआत भी की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य बन जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य, मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए अस्तित्वहीन हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी होकर लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा में, बड़ा लाल अजगर मेरी योजना में रुकावट डालने का हर हथकंडा आज़मा चुका है, लेकिन क्या मैं उसकी साजिशों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या मैं उसकी धमकियों से डरकर आत्मविश्वास खो सकता हूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी एक भी ऐसा प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैंने अपनी हथेली में न रखा हो; बड़े लाल अजगर के बारे में यह बात कैसे और भी अधिक सच है जो मेरे लिए एक विषमता की तरह है? क्या वह भी ऐसी चीज नहीं है जिसे मैं अपने हाथों अपने हिसाब से चलाता हूँ?

मानव जगत में मेरे देहधारण के दौरान मानवजाति मेरे मार्गदर्शन में अनजाने में इस दिन तक आ पहुँची है, और अनजाने में मुझे जान गयी है। लेकिन जहाँ तक इसकी बात है कि जो मार्ग सामने है उस पर कैसे चला जाए, तो किसी को कोई आभास नहीं है, कोई नहीं जानता है और किसी के पास इसका कोई सुराग तो और भी नहीं है कि वह मार्ग उन्हें किस दिशा में ले जाएगा। सर्वशक्तिमान की निगरानी में ही कोई भी मार्ग पर अंत तक चल पाएगा; केवल चमकती पूर्वी बिजली के मार्गदर्शन से ही कोई भी मेरे राज्य तक ले जाने वाली दहलीज़ को पार कर पाएगा। लोगों में कभी ऐसा कोई नहीं हुआ है जिसने मेरा चेहरा देखा हो, जिसने चमकती पूर्वी बिजली को देखा हो; ऐसा कौन हुआ है जिसने मेरे सिंहासन से जारी कथनों को सुना हो? वास्तव में, प्राचीन काल से ही कोई भी मनुष्य सीधे मेरे व्यक्तित्व के सम्पर्क में नहीं आया है; केवल आज जबकि मैं संसार में आ चुका हूँ, तो लोगों के पास मुझे देखने का अवसर है। किंतु आज भी लोग मुझे नहीं जानते, ठीक वैसे ही जैसे वे बस मेरा चेहरा देखते हैं और केवल मेरी आवाज सुनते हैं, लेकिन मेरा अभिप्राय नहीं समझते। सभी मनुष्य ऐसे ही हैं। मेरे लोगों में से एक होने के नाते, जब तुम लोग मेरा चेहरा देखते हो, तो क्या तुम लोग बहुत ज़्यादा गर्व महसूस नहीं करते? और क्या तुम लोग शर्मिन्दगी महसूस नहीं करते क्योंकि तुम लोग मुझे नहीं जानते? मैं लोगों के बीच चलता-फिरता हूँ और उन्हीं के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैंने देहधारण कर लिया है और मानव जगत में आ गया हूँ। मेरा उद्देश्य मात्र इतना नहीं है कि इंसान मेरे देह को देख पाए; अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इंसान मुझे जान सके। इसके अलावा मैं अपने देहधारण के माध्यम से मानवजाति को उसके पापों का दोषी सिद्ध करूँगा। मैं अपने देहधारण के माध्यम से उस बड़े लाल अजगर को परास्त करूँगा और उसके अड्डे को नष्ट कर दूँगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 12

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 62

पूरे ब्रह्मांड में सभी लोग मेरे दिन के आगमन का उत्सव मनाते हैं, और स्वर्गदूत मेरे चुने हुए लोगों के बीच घूमते-फिरते हैं। जब शैतान विघ्न पैदा करता है, तो स्वर्गदूत, स्वर्ग में अपनी सेवाओं की वजह से, हमेशा मेरे लोगों की सहायता करते हैं। स्वर्गदूत मानवीय कमजोरियों के कारण दानव के हाथों गुमराह नहीं होते, बल्कि अंधकार की शक्तियों के आक्रमण की वजह से कोहरे में लिपटे इंसानी जीवन का कहीं ज़्यादा अनुभव प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। मेरे सभी चुने हुए लोग मेरे नाम के नीचे झुकते हैं, और कभी भी कोई खुलकर मेरा विरोध करने के लिए खड़ा नहीं होता। स्वर्गदूतों के कार्य की वजह से, इंसान मेरे नाम को स्वीकार करता है और सभी मेरे कार्य के प्रवाह में आ जाते हैं। संसार ढह रहा है! बेबीलोन लकवाग्रस्त है! ओह, धार्मिक संसार! धरती पर मेरे अधिकार से यह कैसे नष्ट न होता? अब भी किसकी हिम्मत है कि मेरे खिलाफ विद्रोह और मेरा विरोध करे? शास्त्रियों की? सभी धार्मिक अधिकारियों की? पृथ्वी के शासकों और अधिकारियों की? स्वर्गदूतों की? कौन मेरे शरीर की पूर्णता और विपुलता का उत्सव नहीं मनाता? मेरे चुने हुए असंख्य लोगों में से कौन है जो मेरे कारण स्तुति अनवरत नहीं गाता और कौन है जो मेरे कारण हमेशा खुश नहीं रहता? मैं बड़े लाल अजगर की माँद के देश में रहता हूँ, फिर भी मैं इस वजह से डर कर काँपता या भागता नहीं हूँ, क्योंकि उसके लोगों ने पहले ही उससे नफरत करनी शुरू कर दी है। किसी भी चीज ने कभी भी अजगर के सामने उसकी खातिर अपने “कर्तव्य” का निर्वहन नहीं किया है; बल्कि, सभी चीज़ें जैसा उचित समझती हैं वैसा ही करती हैं, और हर कोई अपने रास्ते चला जाता है। पृथ्वी के राष्ट्रों का विनाश कैसे नहीं होगा? पृथ्वी के राष्ट्रों का पतन कैसे नहीं होगा? मेरे लोग आनंदित कैसे नहीं होंगे? वे खुशी के गीत कैसे न गाएँगे? क्या यह मनुष्य का कार्य है? क्या यह इंसानी हाथों का कृत्य है? मैंने इंसान को उसके अस्तित्व का आधार दिया है और उसे भौतिक वस्तुएँ प्रदान की हैं, फिर भी वह अपनी वर्तमान परिस्थितियों से असंतुष्ट होकर मेरे राज्य में प्रवेश करना चाहता है। लेकिन वह इतनी आसानी से, बिना कोई कीमत चुकाए, और निःस्वार्थ लगन अर्पित करने की इच्छा न रखते हुए मेरे राज्य में प्रवेश कैसे कर सकता है? इंसान से कुछ वापस लेने के बजाए, मैं उससे अपेक्षाएँ करता हूँ, ताकि पृथ्वी पर मेरा राज्य महिमा से भर जाए। मैं इंसान को वर्तमान युग में लेकर आया हूँ जिससे वह इस स्थिति में जी रहा है, और मेरे प्रकाश के मार्गदर्शन में रह रहा है। यदि ऐसा न हुआ होता, तो पृथ्वी के लोगों में ऐसा कौन है जो अपने भविष्य के बारे में जान पाता? कौन मेरे इरादे समझ पाता? मैं अपनी शर्तें मनुष्य की अपेक्षाओं से जोड़ देता हूँ; क्या यह प्रकृति के नियमों के अनुसार नहीं है?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 22

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 63

राज्य में, सभी चीज़ें पुनर्जीवित होना और प्राणशक्ति उत्सर्जित करना आरम्भ करती हैं। पृथ्वी की अवस्था में परिवर्तनों के कारण, एक तथा दूसरी भूमि के बीच सीमाएँ भी खिसकने लगती हैं। मैं भविष्यवाणी कर चुका हूँ कि जब ज़मीन को ज़मीन से अलग किया जाता है, और जब ज़मीन ज़मीन से जुड़ती है, यही वह समय होगा जब मैं हरेक राष्ट्र के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। इस समय, मैं सभी चीज़ों को फिर नया करूँगा और बदल दूँगा और समस्त ब्रह्माण्ड को पुनर्विभाजित करूँगा, इस प्रकार पूरे ब्रह्माण्ड को व्यवस्थित करूँगा, और पुराने को नए में रूपान्तरित कर दूँगा—यह मेरी योजना है और ये मेरे कर्म हैं। जब हर देश और मेरे चुने लोगों में से हरेक मेरे सिंहासन के सामने लौटेगा, तब मैं इसके साथ स्वर्ग की सारी प्रचुरता मानव संसार को प्रदान करूँगा, जिससे, मेरी बदौलत, वह संसार बेजोड़ प्रचुरता से लबालब भर जाएगा। पुराने संसार के अस्तित्वमान रहते हुए, मैं अपना क्रोध हर देश के ऊपर पूरी जोर से बरसाऊंगा और प्रशासनिक आदेश लागू करूँगा जो समूचे ब्रह्मांड में सार्वजनिक किए जाते हैं और जो कोई भी उनका उल्लंघन करेगा उन्हें ताड़ना दी जाएगी :

जब मैं पूरे ब्रह्मांड से बोलता हूँ, सब लोग मेरी आवाज सुनते हैं, यानी सभी लोग उन सभी कर्मों को देखते हैं जिन्हें मैंने समूचे ब्रह्मांड में अंजाम दिया है। जो मेरे इरादों के विरुद्ध जाते हैं, अर्थात जो मनुष्य के कर्मों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के बीच गिरेंगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को नया बनाऊँगा; मेरी बदौलत, सूर्य और चंद्रमा नए हो जाएँगे, आकाश अब वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; और पृथ्वी पर सभी चीजें फिर से नई बना दी जाएँगी—यह सब मेरे वचनों के कारण संपन्न किया जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर सारे देशों को नए सिरे से बाँटा जाएगा और मेरे राज्य द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिससे पृथ्वी पर विद्यमान देश हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे, और केवल वह राज्य होगा जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी देशों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर मनुष्यों में से वे सभी जो दानवों के हैं पूर्णतया नष्ट कर दिए जाएँगे। वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं वे मेरी जलती हुई आग के बीच गिर पड़ेंगे—अर्थात् उनको छोड़कर जो अभी धारा के अन्तर्गत हैं, शेष सभी को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं प्रत्येक जनसमूह को ताड़ना दूँगा तो धार्मिक समुदाय मेरे राज्य में अलग-अलग पैमाने पर लौट आएँगे और मेरे कर्मों के माध्यम से जीत लिए जाएँगे, क्योंकि वे यह देख चुके होंगे कि “सफेद बादल पर सवार पवित्र दिव्य जन” पहले ही आ चुका है। सब लोग अपनी किस्म के अनुसार छाँटे जाएँगे और वे अपने क्रियाकलापों के अनुरूप विविध प्रकार की ताड़नाएँ प्राप्त करेंगे; वे सब जिन्होंने मेरा प्रतिरोध किया है नष्ट हो जाएँगे और जहाँ तक उनकी बात है जिनके पृथ्वी पर कर्मों ने मुझे शामिल नहीं किया है, उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया है उस कारण वे पृथ्वी पर मेरी संतान और मेरे लोगों के शासन के अधीन अस्तित्व में बने रहेंगे। मैं असंख्य देशों और असंख्य लोगों के सामने प्रकट होऊँगा और अपनी वाणी को पृथ्वी पर व्यक्त करूँगा, अपने महान कार्य के पूरे होने की उद्घोषणा करूँगा और सब लोगों को अपनी-अपनी आँखों से यह देखने दूँगा।

जैसे-जैसे मेरे कथन गहन होते जाते हैं, मैं ब्रह्मांड की दशा को भी देखता हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से सभी चीजें नई बन जाती हैं। स्वर्ग बदल जाता है और पृथ्वी भी बदल जाती है। मनुष्य को उसके मूल रूप में उजागर किया जाता है और धीरे-धीरे लोगों को अपनी किस्म के अनुसार छाँटा जाता है और अनजाने में अपने “परिवारों” में लौटा दिया जाता है। इससे मुझे अत्यधिक प्रसन्नता होती है। मैं विघ्न से मुक्त हो जाता हूँ और किसी को पता चले बिना मेरा महान कार्य संपन्न होता है और सभी चीजें भी बदल जाती हैं। जब मैंने संसार की सृष्टि की थी, मैंने सभी चीजों को उनकी किस्म के अनुसार छाँट दिया था, सभी आकार वाली चीजों का वर्गीकरण किया था। जब मेरी प्रबंधन योजना समापन के निकट आएगी, मैं सृष्टि की पूर्व दशा बहाल कर दूँगा, मैं हर चीज को उसी प्रकार बहाल कर दूँगा जैसी वह मूलतः थी, प्रत्येक चीज को पूरी तरह बदल दूँगा और हर चीज को अपनी योजना में शामिल करूँगा। समय आ चुका है! मेरी योजना का अंतिम चरण पूरा होने वाला है। आह, गंदी पुरानी दुनिया! इसका मेरे वचनों के बीच पतन तय है! यह पक्का मेरी योजना से मिट्टी में मिल जाएगी! आह, सारी चीजें! वे सब मेरे वचनों के बीच नया जीवन प्राप्त करेंगी—उनके पास उनका संप्रभु होगा! आह, पवित्र और निष्कलंक नया संसार! यह पक्का मेरी महिमामई रोशनी के भीतर पुनर्जीवित होगा! आह, सिय्योन पर्वत! अब और मौन मत रह। मैं विजयी बनकर लौट आया हूँ! मैं सभी चीजों के बीच समूची पृथ्वी को देखता हूँ। पृथ्वी पर रहने वाले लोगों ने नए जीवन की शुरुआत कर दी है और उनके पास नई आशाएँ हैं। आह, मेरे लोगो! ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम मेरे प्रकाश के बीच पुनर्जीवित न होओ? ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम लोग मेरे मार्गदर्शन में आनन्द से न उछलो? भूमि उल्लास से गूँज रही है, जल हर्षोल्लासपूर्ण ठहाकों से गूँज रहा है! आह, पुनर्जीवित इस्राएल! मेरे द्वारा पूर्वनिर्धारित किए जाने की वजह से तुम कैसे गर्व महसूस नहीं कर सकते हो? कौन रोया है? किसने विलाप किया है? पहले का इस्राएल समाप्त हो गया है, और आज के इस्राएल का उदय हुआ है, जो संसार में सीधा और बहुत ऊँचा खड़ा है, और समस्त मानवता के हृदय में तनकर डटा हुआ है। आज का इस्राएल मेरे लोगों के माध्यम से अस्तित्व का आधार निश्चित रूप से प्राप्त करेगा! आह, घृणास्पद मिस्र! कहीं तू अब भी मेरा प्रतिरोध तो नहीं कर रहा है? तू कैसे मेरी दया का लाभ उठा सकता है और मेरी ताड़ना से बचने की कोशिश कर सकता है? ऐसा कैसे हो सकता है कि तू मेरी ताड़ना के दायरे में न रहे? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरा प्रतिरोध करते हैं, निश्चय ही अनन्त काल तक मेरे द्वारा ताड़ित किए जाएँगे। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ और मैं सभी लोगों को उनकी करनी के लिए हल्के में नहीं छोड़ूँगा। मैं पूरी पृथ्वी की पड़ताल करूँगा और धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ संसार के पूरब में प्रकट होते हुए मैं खुद को असंख्य मनुष्यों के सामने प्रकट करूँगा!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 26

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 64

जब स्वर्गदूत मेरी स्तुति में संगीत बजाते हैं, यह और कुछ नहीं बल्कि मनुष्य के प्रति मेरी सहानुभूति को उकसा देता है। मेरा हृदय तत्काल उदासी से भर जाता है, और मेरे लिए इस कष्टदायक भावना से स्वयं को मुक्त कर पाना असंभव हो जाता है। मनुष्य से पृथक होने और फिर एक होने के आनंद और विषाद में, हम भावनाओं का आदान-प्रदान नहीं कर पाते हैं। ऊपर स्वर्ग और नीचे पृथ्वी पर अलग-अलग होकर, बिरले ही मैं और मनुष्य मिल सकते हैं। पूर्व की भावनाओं के प्रति ललक से कौन मुक्त हो सकता है? अतीत के बारे में स्मरण करना कौन बंद कर सकता है? अतीत के मनोभावों की निरंतरता की आशा कौन नहीं करेगा? मेरी वापसी के लिए कौन लालायित नहीं होगा? मनुष्य के साथ मेरे पुनर्मिलन की लालसा कौन नहीं करेगा? मेरा हृदय अत्यंत अशांत है, और मनुष्य की आत्मा गहराई तक चिंतामग्न हैं। आत्माओं में एक समान होते हुए भी, हम प्रायः एक साथ नहीं हो सकते हैं, और हम प्रायः एक दूसरे को नहीं देख सकते हैं। इस प्रकार समस्त मानवजाति का जीवन व्यथा से भरा है और प्राणशक्ति से रिक्त है, क्योंकि मनुष्य मेरे लिए हमेशा तड़पा है। यह ऐसा है मानो मानवजाति स्वर्ग से ठोकर मारकर गिराई गई वस्तुएँ हों; वे धरती से मेरी ओर अपनी नज़र उठाते हुए, पृथ्वी से मेरा नाम पुकारते हैं—परंतु वे भूखे और हिंसक भेड़िए के जबड़ों से कैसे बच सकते हैं? वे उसके ख़तरों और प्रलोभनों से स्वयं को कैसे मुक्त कर सकते हैं? मेरी योजना की व्यवस्था के प्रति समर्पण के कारण मनुष्य अपना बलिदान कैसे नहीं दे सकते हैं? जब वे ज़ोर-ज़ोर से गिड़गिड़ाते हैं, मैं उनसे अपना मुँह फेर लेता हूँ, मैं उन्हें देखना अब और सहन नहीं कर सकता हूँ; परंतु मैं उनकी अश्रुपूरित पुकार को कैसे नहीं सुन सकता हूँ? मैं मानव संसार के अन्यायों को ठीक करूँगा। मैं समूचे संसार में स्वयं अपने हाथों से अपना कार्य करूँगा, अपने लोगों को पुनः हानि पहुँचाने से शैतान को रोकूँगा, शत्रुओं को पुनः उनका मनचाहा करने से रोकूँगा। अपने सभी शत्रुओं को धराशायी करते हुए और अपने सामने उनसे उनके अपराध स्वीकार करवाते हुए, मैं पृथ्वी पर राजा बन जाऊँगा और अपना सिंहासन वहाँ ले जाऊँगा। अपनी उदासी में, जिसमें क्रोध मिला हुआ है, मैं समूचे ब्रह्माण्ड को सपाट रौंद दूँगा, किसी को नहीं छोड़ूँगा, और अपने शत्रुओं के हृदय में आतंक बरपा दूँगा। मैं समूची पृथ्वी को खण्डहरों में बदल दूँगा, और अपने शत्रुओं को उन खण्डहरों में पटक दूँगा, ताकि उसके बाद मानवजाति को वे अब और भ्रष्ट नहीं कर सकें। मेरी योजना पहले से ही निश्चित है, और किसी को भी, वे चाहे जो हों, इसे बदलना नहीं चाहिए। जब मैं प्रतापी ठाट-बाट से ब्रह्माण्ड के ऊपर घूमूँगा, तब समस्त मानवजाति नई बना दी जाएगी, और सब कुछ पुनः जी उठेगा। मनुष्य अब और नहीं रोएगा, सहायता के लिए मुझे अब और नहीं पुकारेगा। तब मेरा हृदय आनंदित होगा, और लोग उत्सव मनाते हुए मेरे पास लौट आएँगे। समूचा ब्रह्माण्ड, ऊपर से नीचे तक, हर्षोल्लास में झूमेगा ...।

आज, संसार के देशों के बीच, मैं वह कार्य कर रहा हूँ जिसे संपन्न करने का मैंने बीड़ा उठाया है। अपनी योजना के अंतर्गत समस्त कार्य करते हुए, मैं मानवजाति के बीच घूम रहा हूँ, और समस्त मानवजाति मेरे इरादों के अनुसार नानाविध देशों को विभाजित कर रही है। पृथ्वी पर लोगों ने अपना ध्यान स्वयं अपनी मंज़िल पर जमा लिया है, क्योंकि दिन सचमुच नज़दीक आ रहा है और स्वर्गदूत अपनी तुरहियाँ बजा रहे हैं। अब और देरी नहीं होगी, और इसके तत्काल बाद समस्त सृष्टि हर्षविभोर होकर नृत्य करने लगेगी। मेरा दिन अपनी इच्छा से कौन आगे बढ़ा सकता है? क्या पृथ्वी का कोई मानव? या आकाश के तारे? या स्वर्गदूत? जब मैं इस्राएल के लोगों का उद्धार आरंभ करने के लिए कथन कहता हूँ, तब मेरा दिन संपूर्ण मानवजाति पर दबाव बनाता जाता है। प्रत्येक मनुष्य इस्राएल की वापसी से भय खाता है। जब इस्राएल वापस आएगा, वह मेरी महिमा का दिन होगा, और इसलिए यह वह दिन भी होगा जब सब कुछ बदल जाता है और नया हो जाता है। धार्मिक न्याय ज्यों-ज्यों आसन्न रूप से संपूर्ण ब्रह्माण्ड का सामना करता है, सारे मनुष्य कातर और भयभीत हो जाते हैं, क्योंकि मानव संसार में धार्मिकता अनसुनी है। जब धार्मिकता का सूर्य प्रकट होगा, पूर्वदिशा रोशन हो जाएगी, और फिर वह समूचे ब्रह्माण्ड को रोशन कर देगी, प्रत्येक के पास पहुँचेगी। यदि मनुष्य वास्तव में मेरी धार्मिकता को क्रियान्वित कर सकता है, तो किस बात का डर होगा? मेरे सारे लोग मेरे दिन के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं, वे सब मेरे दिन के आने की लालसा करते हैं। वे प्रतीक्षा करते हैं कि मैं संपूर्ण मानवजाति के ऊपर प्रतिफल लाऊँगा और धार्मिकता के सूर्य के रूप में अपनी भूमिका में मानवजाति की मंज़िल संजोऊँगा। मेरा राज्य समस्त ब्रह्माण्ड के ऊपर आकार ग्रहण कर रहा है, और मेरा सिंहासन हजारों-लाखों लोगों के हृदय में विराजमान होता है। स्वर्गदूतों के सहयोग से, मेरी महान उपलब्धि शीघ्र ही फलीभूत होगी। मेरे सभी पुत्र और लोग मेरी वापसी की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं, अपने साथ पुनः एक होने, फिर कभी अलग नहीं होने के लिए मेरी लालसा करते हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि मेरे राज्य के असंख्य जनसाधारण, मेरे उनके साथ होने की वजह से, एक दूसरे की ओर दौड़ न पड़ें और आनंदित न हों? क्या यह ऐसा पुनर्मिलन हो सकता है जिसके लिए कोई क़ीमत चुकाना आवश्यक नहीं हो? मैं सभी मनुष्यों की नज़रों में सम्मानीय हूँ, मैं सभी के वचनों में उद्घोषित होता हूँ। इतना ही नहीं, जब मैं लौटूँगा, मैं सारी शत्रु शक्तियों को जीत लूँगा। समय आ गया है! मैं अपने कार्य को गति दूँगा, मैं मनुष्यों के बीच राजा के रूप में शासन करूँगा! मैं वापसी की कगार पर हूँ! और मैं प्रस्थान करने ही वाला हूँ! यही है वह जिसकी सब आशा कर रहे हैं, यही है वह जो वे चाहते हैं। मैं संपूर्ण मानवजाति को मेरे दिन का आगमन देखने दूँगा और वे सब आनंदोल्लास से मेरे दिन के आगमन का स्वागत करेंगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 27

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 65

जिस दिन सभी चीज़ें पुनर्जीवित हुईं, मैं मनुष्यों के बीच आया, और मैंने उनके साथ अद्भुत दिन और रातें बिताई हैं। केवल इस बिंदु पर ही मनुष्य को मेरी सुलभता का थोड़ा-सा एहसास होता है, और जैसे-जैसे मेरे साथ उसकी अंतःक्रिया बढ़ने लगती है, वह मेरे पास जो है और जो मैं हूँ उसे थोड़ा-सा देखता है—और परिणामस्वरूप, वह मेरे बारे में कुछ ज्ञान प्राप्त करता है। सभी लोगों के बीच मैं अपना सिर उठाता हूँ और देखता हूँ, और वे सभी मुझे देखते हैं। फिर भी जब संसार पर आपदा आती है तो वे तुरंत व्याकुल हो जाते हैं और उनके हृदयों से मेरी छवि ग़ायब हो जाती है; आपदा आने से घबराकर वे मेरे उपदेशों पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। मैंने मनुष्य के बीच बहुत वर्ष बिताए हैं, फिर भी वह हमेशा अनभिज्ञ रहा है और उसने मुझे कभी नहीं जाना है। आज मैं उसे यह अपने मुँह से बताता हूँ, ताकि सभी लोग मुझसे कुछ प्राप्त करने के लिए मेरे पास आएँ, पर वे मुझसे अभी भी बहुत दूर रहते हैं और इसलिए वे मुझे नहीं जानते हैं। जब मेरे कदम ब्रह्मांड भर में और पृथ्वी के छोरों तक पड़ेंगे, तब मनुष्य खुद पर चिंतन करना शुरू करेगा, और सभी लोग मेरे पास आएँगे और मेरे सामने दंडवत करेंगे तथा मेरी आराधना करेंगे। यह मेरे महिमा प्राप्त करने का, मेरी वापसी का और साथ ही मेरे प्रस्थान का भी दिन होगा। अब मैंने पूरी मानवजाति के बीच अपना कार्य आरंभ कर दिया है और ब्रह्मांड के अंतर्गत अपनी प्रबंधन योजना के अंतिम अंश को औपचारिक रूप से खोलना शुरू कर दिया है। अगर कोई अभी भी असावधान है तो वह किसी भी क्षण निर्मम ताड़ना में गिर पड़ेगा। यह इसलिए नहीं कि मैं निर्दयी हूँ, बल्कि यह मेरी प्रबंधन योजना का एक चरण है; सब को मेरी योजना के चरणों के अनुसार आगे बढ़ना होगा और कोई भी मनुष्य इसे बदल नहीं सकता है। जब मैं औपचारिक रूप से अपना कार्य शुरू करता हूँ तो सभी लोग वैसे ही चलते हैं जैसे मैं चलता हूँ, इस तरह कि ब्रह्मांड में लोग मेरे साथ खुद को व्यस्त रखते हैं, समस्त ब्रह्मांड “हर्षोल्लास” की स्थिति में होता है और मनुष्य को मेरे द्वारा आगे की ओर प्रेरित किया जाता है। परिणामस्वरूप, स्वयं बड़े लाल अजगर तक को मेरे द्वारा अस्त-व्यस्तता और घबराहट भरी अनिश्चितता की स्थिति में डाल दिया जाता है, वह मेरे कार्य में सेवा करता है और अनिच्छुक होने के बावजूद वह अपनी ही इच्छाओं का अनुसरण करने में असमर्थ रहता है और उसके पास “मुझे मनचाहा आयोजन करने देने” के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता है। मेरी सभी योजनाओं में बड़ा लाल अजगर मेरी विषमता, मेरा शत्रु है, लेकिन यह मेरा “सेवक” भी है; इसलिए मैंने उससे अपनी “अपेक्षाओं” को कभी भी शिथिल नहीं किया है। इसलिए मेरे कार्य, मेरे देहधारण के कार्य का अंतिम चरण उसके घराने में पूरा होता है—यह बड़े लाल अजगर द्वारा मेरी उचित तरीके से सेवा करने में अधिक सहायक है, जिसके माध्यम से मैं उस पर विजय पाऊँगा और अपनी योजना पूरी करूँगा। जब मैं कार्य करता हूँ तो सभी स्वर्गदूत निर्णायक युद्ध में मेरे साथ हो लेते हैं और अंतिम चरण में मेरे इरादों को संतुष्ट करने का दृढ़ निश्चय करते हैं, ताकि पृथ्वी के लोग मेरे सामने स्वर्गदूतों के समान आत्मसमर्पण कर दें, और मेरा विरोध करने की इच्छा न करें और ऐसा कुछ न करें जो मुझे धोखा देता हो। समस्त ब्रह्मांड में ये मेरे कार्य की गतिशीलताएँ हैं।

मनुष्यों के बीच मेरे आगमन का उद्देश्य और महत्व संपूर्ण मानवजाति को बचाना, संपूर्ण मानवजाति को अपने घर में वापस लाना, स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से मिलाना, और मनुष्य से स्वर्ग और पृथ्वी के बीच “संकेतों” का संप्रेषण करवाना है, क्योंकि मनुष्य का अंतर्निहित कार्य ऐसा ही है। जब मैंने मानवजाति का सृजन किया था, उस समय मैंने मानवजाति के लिए सभी चीज़ें तैयार की थीं, और बाद में मैंने मानवजाति को अपनी अपेक्षाओं के अनुसार वह प्रचुरता प्राप्त करने की अनुमति दी, जो मैंने उसे दी थी। इसलिए मैं कहता हूँ कि यह मेरे मार्गदर्शन के अंतर्गत है कि संपूर्ण मानवजाति आज यहाँ तक पहुँची है। और यह सब मेरी योजना है। संपूर्ण मानवजाति के बीच अनगिनत संख्या में लोग मेरे प्रेम की सुरक्षा में विद्यमान हैं, और अनगिनत संख्या में ही लोग मेरी घृणा की ताड़ना के अधीन रहते हैं। यद्यपि सभी लोग मुझसे विनती करते हैं, फिर भी वे अपनी वर्तमान परिस्थितियों को बदलने में असमर्थ हैं; एक बार जब वे आशा खो देते हैं, तो वे केवल चीजों को स्वाभाविक रूप से होने दे सकते हैं और मेरे खिलाफ विद्रोह करने से रुक सकते हैं, क्योंकि बस इतना ही मनुष्य द्वारा किया जा सकता है। जब मनुष्य के जीवन की वर्तमान स्थिति की बात आती है, तो मनुष्य को अभी भी वास्तविक जीवन को ढूँढ़ना शेष है, उसने अभी भी अन्याय, वीरानी और संसार की दयनीय स्थितियों की असलियत नहीं जानी है—और इसलिए, अगर यह आपदा के आगमन के लिए न होता, तो अधिकतर लोग अभी भी प्रकृति को गले से लगाते, और अभी भी अपने आपको “जीवन” के स्वाद में तल्लीन कर देते। क्या यह संसार की सच्चाई नहीं है? क्या यह उस उद्धार की आवाज़ नहीं है, जिसे मैं मनुष्य से कहता हूँ? क्यों मानवजाति में से कभी भी किसी ने मुझसे सच में प्रेम नहीं किया है? क्यों मनुष्य केवल ताड़ना और परीक्षणों के बीच ही मुझसे प्रेम करता है, और कोई भी मेरी सुरक्षा के अधीन मुझसे प्रेम नहीं करता? मैंने कई बार मानवजाति को ताड़ना दी है। वे उस पर एक नज़र डालते हैं, लेकिन फिर वे उसे अनदेखा कर देते हैं, और वे उस समय इसका अध्ययन और मनन नहीं करते, और इसलिए मनुष्य के ऊपर जो कुछ भी आकर पड़ता है, वह है निष्ठुर न्याय। यह मेरे कार्य करने के तरीकों में से केवल एक तरीका है, परंतु यह फिर भी मनुष्य को बदलने और उसे मुझसे प्रेम करवाने के लिए है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 29

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 66

मैं राज्य में शासन करता हूँ, और इससे भी अधिक, मैं पूरे ब्रह्मांड में शासन करता हूँ; मैं राज्य का राजा और ब्रह्मांड का मुखिया दोनों हूँ। अब से मैं उन सभी को इकट्ठा करूँगा, जो चुने हुए लोग नहीं हैं और अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच अपना कार्य आरंभ करूँगा, और मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए अपने प्रशासनिक आदेशों की घोषणा करूँगा, ताकि मैं सुचारु रूप से अपने कार्य के अगले चरण की शुरुआत कर सकूँ। अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच अपने कार्य को फैलाने के लिए मैं ताड़ना का उपयोग करूँगा, जिसका अर्थ है कि मैं उन सभी के विरुद्ध “बल” का उपयोग करूँगा, जो अन्यजातियाँ हैं। स्वाभाविक रूप से, यह कार्य उसी समय किया जाएगा, जिस समय मेरा कार्य चुने हुए लोगों के बीच किया जाएगा। जब मेरे लोग पृथ्वी पर बतौर राजा शासन करेंगे और सामर्थ्य का उपयोग करेंगे, तो यही वह दिन भी होगा जब पृथ्वी के सभी लोगों को जीत लिया जाएगा, और, इससे भी अधिक, यही वह समय होगा जब मैं विश्राम करूँगा—और तभी मैं उन सबके सामने प्रकट होऊँगा, जिन्हें जीता जा चुका है। मैं पवित्र राज्य के समक्ष प्रकट होता हूँ, और अपने आपको मलिनता की भूमि से छिपा लेता हूँ। वे सभी, जिन्हें जीता जा चुका है और जो मेरे सामने समर्पित हो गए हैं, अपनी आँखों से मेरे चेहरे को देखने और अपने कानों से मेरी वाणी सुनने में समर्थ हैं। यह उन लोगों के लिए आशीष है, जो अंत के दिनों में पैदा हुए हैं, यह मेरे द्वारा पूर्वनियत किया गया आशीष है, और यह किसी भी मनुष्य के द्वारा अपरिवर्तनीय है। आज मैं भविष्य के कार्य के वास्ते इस तरीके से कार्य करता हूँ। मेरा समस्त कार्य परस्पर-संबंधित है, इस सबमें एक आह्वान और अनुक्रिया है : कभी भी कोई चरण अचानक नहीं रुका है, और कभी भी किसी भी कदम को किसी भी अन्य कदम से स्वतंत्र रूप से नहीं किया गया है। क्या ऐसा नहीं है? क्या अतीत का कार्य आज के कार्य की नींव नहीं है? क्या अतीत के वचन आज के वचनों के अग्रदूत नहीं हैं? क्या अतीत के चरण आज के चरणों के उद्गम नहीं हैं? जब मैं औपचारिक रूप से पुस्तक खोलता हूँ, तो ऐसा तब होता है जब संपूर्ण ब्रह्मांड के लोगों को ताड़ना दी जाती है, जब दुनिया भर के लोगों को परीक्षणों के अधीन किया जाता है, और यह मेरे काम की पराकाष्ठा है; सभी लोग एक प्रकाशरहित भूमि में रहते हैं, और सभी लोग अपने वातावरण द्वारा खड़े किए गए खतरे के बीच रहते हैं। दूसरे शब्दों में, यही वह जीवन है, जिसे मनुष्य ने सृष्टि की उत्पत्ति के समय से लेकर आज तक कभी अनुभव नहीं किया है, और युगों-युगों से किसी ने भी इस प्रकार के जीवन का “आनंद” नहीं लिया है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि मैंने वह कार्य किया है, जो पहले कभी नहीं किया गया है। यह मामलों की वास्तविक स्थिति है, और यही आंतरिक अर्थ है। चूँकि मेरा दिन समस्त मानवजाति के नजदीक आ रहा है, चूँकि यह दूर प्रतीत नहीं होता, बल्कि यह मनुष्य की आँखों के बिल्कुल सामने ही है, तो परिणामस्वरूप कौन भयभीत नहीं हो सकता? और कौन इसमें आनंदित नहीं हो सकता? बेबिलोन के गंदे शहर का अंततः अपने आखिरी दिन से सामना हो गया है; मनुष्य का एक बिलकुल नए संसार से पुनर्मिलन करा दिया गया है, स्वर्ग और पृथ्वी परिवर्तित और नवीकृत कर दिए गए हैं।

जब मैं असंख्य राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने प्रकट होता हूँ, तो आसमान में सफेद बादल घुमड़ने लगते हैं और मुझे ढक लेते हैं। इसी प्रकार, पृथ्वी पर वातावरण को उभारते पृथ्वी के पक्षी भी मेरे लिए आनंद के साथ गाते और नृत्य करते हैं, और इस प्रकार पृथ्वी की सभी चीज़ों के सजीव होने का कारण बनते हैं, ताकि वे अब और “धीरे-धीरे नीचे की ओर न बहें”, बल्कि इसके बजाए जीवन-शक्ति से भरे हुए वातावरण के बीच जिएँ। जब मैं बादलों के मध्य होता हूँ, तो मनुष्य मेरे चेहरे और मेरी आँखों को धुँधले रूप में ही देखता है, और उस समय वह थोड़ा डर अनुभव करता है। अतीत में उसने मुझसे संबंधित ऐतिहासिक अभिलेखों को किंवदंतियों में सुना था, जिसके परिणामस्वरूप वह मेरे प्रति केवल आधा विश्वासी है और बाकी आधा संदिग्ध है। वह नहीं जानता कि मैं कहाँ हूँ, या मेरा चेहरा आखिर कितना बड़ा है—वह समुद्र के समान विशाल है या हरे चरागाहों जितना असीम है? कोई इन चीज़ों को नहीं जानता। जब आज मनुष्य मेरा चेहरा बादलों में देखता है, केवल तभी वह महसूस करता है कि किंवदंती में वर्णित मैं वास्तविक हूँ, और इसलिए वह मेरे प्रति थोड़ा अधिक अनुकूल हो जाता है और यह केवल मेरे कर्मों के कारण है कि मेरे लिए उसकी प्रशंसा थोड़ी बढ़ जाती है। परंतु मनुष्य अभी भी मुझे नहीं जानता और वह बादलों में मेरा केवल एक ही अंश देखता है। उसके बाद मैं अपनी बाँहें फैलाता हूँ और उन्हें मनुष्य को दिखाता हूँ। मनुष्य आश्चर्यचकित हो जाता है, और मेरे हाथों मार गिराए जाने से अत्यधिक डरकर अचानक अपने हाथ अपने मुँह पर रख लेता है, और इस प्रकार वह अपनी प्रशंसा में थोड़ा भय मिला देता है। मनुष्य इस बात से बेहद डरकर मेरी हर हलचल के ऊपर अपनी आँखें टिकाए रहता है, कि ध्यान न देने पर वह मेरे द्वारा मार न गिराया जाए—फिर भी मनुष्य द्वारा देखे जाने से मैं बाधित नहीं होता, और मैं अपने हाथों के कार्यों को करना जारी रखता हूँ। यह केवल उन सभी कर्मों के कारण है, जिन्हें मैं करता हूँ, कि मनुष्य मेरे प्रति कुछ अनुकूल है, और इस कारण मुझसे जुड़ने के लिए धीरे-धीरे मेरे सामने आता है। मैं जब अपनी संपूर्णता में मनुष्य के सामने प्रकट होऊँगा, तो मनुष्य मेरा चेहरा देखेगा, और उसके बाद से मैं मनुष्य से अपने आपको और नहीं छिपाऊँगा या अव्यक्त नहीं करूँगा। संपूर्ण ब्रह्मांड में मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा, और रक्त और माँस से बने सभी प्राणी मेरे सभी कर्मों को देखेंगे। सभी आत्मावान लोग निश्चित ही मेरे घर में शांति से रहेंगे, और वे निश्चित रूप से मेरे साथ अद्भुत आशीषों का आनंद उठाएँगे। वे सभी, जिनकी मैं परवाह करता हूँ, निश्चित रूप से ताड़ना से बच जाएँगे, और निश्चित रूप से आत्मा की पीड़ा और देह की यंत्रणा से दूर रहेंगे। मैं असंख्य लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा और बतौर राजा शासन करूँगा और सामर्थ्य का उपयोग करूँगा, ताकि लाशों की दुर्गंध संपूर्ण ब्रह्मांड में अब और न फैले; इसके बजाय मेरी मोहक सुगंध पूरे संसार में फैल जाएगी, क्योंकि मेरा दिन नजदीक आ रहा है, मनुष्य जाग रहा है, पृथ्वी पर हर चीज़ व्यवस्थित है, और पृथ्वी के बचे रहने के दिन अब और नहीं रहे हैं, क्योंकि मैं पहुँच गया हूँ!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 29

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 67

मैं अपने क्रियाकलापों के प्रकटन से नभमंडल को भर दूँगा और पृथ्वी पर सब कुछ अपनी शक्ति के अधीन ढहा दूँगा, इस प्रकार “विश्व को एक करने” की अपनी योजना को साकार रहा हूँगा और अपनी इस एक अभिलाषा को फलीभूत कर रहा हूँगा, ताकि मानवजाति पृथ्वी पर और अधिक न “भटके”, बल्कि वह जल्द ही एक उपयुक्त मंजिल पा ले। मैं हर तरह से मानवजाति के हित में सोचता हूँ, इस तरह कि समस्त मानवजाति जल्द ही सुख-शांति से परिपूर्ण भूमि में रहने लगे, ताकि उनके जीवन के दिन अब और वीरान न हों और पृथ्वी पर मेरी योजना व्यर्थ न जाए। मनुष्य के अस्तित्व के कारण मैं पृथ्वी पर अपने राज्य का निर्माण करूँगा, क्योंकि मेरी महिमा की अभिव्यक्ति का एक हिस्सा पृथ्वी पर है। ऊपर स्वर्ग में, मैं अपनी नगरी को व्यवस्थित करूँगा और इस तरह, ऊपर और नीचे दोनों जगह सब कुछ नया बना दूँगा। स्वर्ग से ऊपर और नीचे जो कुछ भी अस्तित्व में है, मैं उसे एक कर दूँगा, ताकि पृथ्वी की सारी चीजें स्वर्ग में जो कुछ भी है, उससे एक हो जाएँ। यही मेरी योजना है; यही है जिसे मैं अंतिम युग में पूरा करूँगा—मेरे कार्य के इस हिस्से में कोई भी हस्तक्षेप न करे! अन्य-जाति राष्‍ट्रों में अपने कार्य का विस्तार करना पृथ्वी पर मेरे कार्य का अंतिम भाग है। जो कार्य मैं करूँगा, उसकी थाह लेने में कोई भी समर्थ नहीं है, और इसलिए लोग पूरी तरह से संभ्रमित हैं। चूँकि मैं पृथ्वी पर अपने काम में बहुत अधिक व्‍यस्‍त हूँ, इसलिए लोग इस अवसर का लाभ उठाकर “लापरवाही बरतने लगते हैं।” उन्हें बिना सोचे-समझे काम करने से रोकने के लिए, मैंने सबसे पहले उन्हें अपनी ताड़ना के अधीन आग की झील का “प्रशिक्षण” पाने के लिए रखा है। यह मेरे कार्य का एक चरण है, और मैं अपने इस कार्य को पूरा करने के लिए आग की झील की शक्ति का उपयोग करूँगा, अन्यथा मेरे लिए अपने कार्य को पूरा करना मुश्किल होगा। मैं सारे ब्रह्मांड के मनुष्यों से अपने सिंहासन के समक्ष आत्मसमर्पण करवाऊँगा, जो मेरे न्याय के कारण अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित हैं, इन श्रेणियों के कारण अपनी किस्म के अनुसार छाँटे गए हैं और इस प्रकार अपने परिवारों में इकट्ठे हैं, ताकि सारी मानवजाति मेरे खिलाफ विद्रोह करना बंद कर दे, इसके बजाय मेरे द्वारा नामित की गई श्रेणियों के अनुसार एक सुसंगठित और सुव्यवस्थित व्यवस्था में आ जाए—किसी को भी मनमाने ढंग से अपनी जगह बदलने की अनुमति नहीं होगी! पूरे ब्रह्मांड में और उसके ऊपर, मैंने नया कार्य किया है; ब्रह्मांड के सारे मनुष्य मेरे अचानक प्रकटन से अचंभित हैं, मेरे खुले रूप में किए गए प्रकटन से उनके क्षितिज बहुत विस्तृत हो गए हैं। क्या आज बिल्कुल ऐसा ही नहीं है?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 43

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 68

मैं अपने कार्य को अन्य-जाति राष्ट्रों में फैला रहा हूँ। मेरी महिमामयी रोशनी पूरे ब्रह्मांड में चमकती है; जहाँ-तहाँ बिखरे तमाम लोग मेरे इरादे अपने भीतर रखते हैं, और उन सबकी कमान मेरे हाथों में है और वे सब मेरे द्वारा सौंपा गया कार्य करने में लग गए हैं। इस क्षण से मैं सभी लोगों को दूसरी दुनिया में लाते हुए एक नए युग में प्रवेश कर गया हूँ। जब मैं अपने “वतन” लौटा, तो मैंने अपनी मूल योजना के कार्य का एक अन्य भाग भी शुरू कर दिया, ताकि मनुष्य मेरे बारे में और अधिक ज्ञान हासिल करे। मैं ब्रह्मांड को उसकी संपूर्णता में देखता हूँ और समझता हूँ कि[क] यह मेरे कार्य के लिए एक उचित अवसर है, इसलिए मनुष्य पर अपना नया कार्य करते हुए मैं जहाँ-तहाँ दौड़भाग करता हूँ। आखिरकार, यह एक नया युग है और मैं नया कार्य लेकर आया हूँ, और ज्यादा नए लोगों को नए युग में लेकर जा रहा हूँ और ऐसे और ज्यादा लोगों को त्याग रहा हूँ जिन्हें मैं निकाल दूँगा। बड़े लाल अजगर के देश में मैंने कार्य का एक ऐसा चरण पूरा कर लिया है जिसकी थाह मनुष्य नहीं पा सकते, जिसके कारण वे हवा में डोलने लगते हैं, जिसके बाद कई लोग हवा के वेग में चुपचाप बह जाते हैं। सचमुच, यह एक ऐसा “खलिहान” है जिसे मैं साफ करने वाला हूँ, यही मेरी लालसा है और यही मेरी योजना है। क्योंकि मेरे कार्य करते समय कई कुकर्मी घुस आए हैं, लेकिन मुझे उन्हें खदेड़ने की कोई जल्दी नहीं है। इसके बजाय, सही समय आने पर मैं उन्हें तितर-बितर कर दूँगा। केवल इसके बाद ही मैं जीवन का सोता बनूँगा, और जो लोग मुझसे सच में प्रेम करते हैं, उन्हें अपने से अंजीर के पेड़ का फल और कुमुदिनी की सुगंध प्राप्त करने दूँगा। जिस देश में शैतान का डेरा है, जो गर्दो-गुबार का देश है, वहाँ शुद्ध सोना नहीं रहा, सिर्फ रेत ही रेत है, और इसलिए, इन हालात को देखते हुए, मैं कार्य का ऐसा चरण पूरा करता हूँ। तुम्हें पता होना चाहिए कि मैं जो प्राप्त करता हूँ, वह रेत नहीं, शुद्ध, परिष्कृत सोना है। कुकर्मी लोग मेरे घर में कैसे रह सकते हैं? मैं लोमड़ियों को अपने स्वर्ग में परजीवियों की तरह जीने देना कैसे सहन कर सकता हूँ? मैं उन्हें खदेड़ने के लिए हर संभव तरीका अपनाता हूँ। मेरे इरादे प्रकट होने से पहले कोई यह नहीं जानता कि मैं क्या करने वाला हूँ। इस अवसर का लाभ उठाते हुए मैं उन कुकर्मियों को दूर खदेड़ देता हूँ, और वे मेरी उपस्थिति छोड़कर जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। मैं कुकर्मियों के साथ यही करता हूँ, लेकिन फिर भी उनके लिए एक ऐसा दिन होगा जब वे मेरे लिए सेवा करेंगे। लोगों की आशीष पाने की इच्छा अत्यंत प्रबल है; इसलिए मैं उनकी ओर पीठ फेर लेता हूँ और अन्य-जाति राष्ट्रों को अपना महिमामय मुखमंडल दिखाता हूँ, ताकि सब लोग अपनी दुनिया में जी सकें और अपना आकलन कर सकें, इस दौरान मैं वे वचन कहता रहता हूँ जो मुझे कहने चाहिए और लोगों को उस चीज की आपूर्ति करता रहता हूँ जिसकी उन्हें आवश्यकता है। जब लोगों को होश आएगा, उससे बहुत पहले ही मैं अपने कार्य को फैला चुका हूँगा। उसके बाद मैं उनके सामने अपने इरादे व्यक्त करूँगा और उन पर अपने कार्य का दूसरा भाग शुरू करूँगा और सब लोगों को करीब से अपना अनुसरण करने दूँगा ताकि वे मेरे कार्य के साथ सहयोग करें, और उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार वह सब कुछ करने दूँगा, जिससे वे मेरे साथ मिलकर उस कार्य को कर सकें जो मुझे अवश्य करना है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सात गर्जनाएँ गरजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा

फुटनोट :

क. मूल पाठ में, “समझता हूँ कि” यह वाक्यांश नहीं है।


परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 69

किसी में भी यह आस्था नहीं है कि वह मेरी महिमा देख पाएगा और मैं उसे मजबूर नहीं करता, बल्कि मैं मानवजाति के बीच से अपनी महिमा हटा लेता हूँ और उसे दूसरी दुनिया में ले जाता हूँ। जब मनुष्य एक बार फिर ग्लानि महसूस करेगा, तब मैं अपनी महिमा आस्था रखने वाले और अधिक लोगों के पास ले जाऊँगा और उन्हें इसे दिखाऊँगा। यही वह सिद्धांत है जिसके अनुसार मैं कार्य करता हूँ। क्योंकि एक समय ऐसा होता है जब मेरी महिमा कनान को छोड़ देती है और एक समय ऐसा भी होता है जब मेरी महिमा चुने हुए लोगों को छोड़ देती है। इतना ही नहीं, एक समय ऐसा होता है जब मेरी महिमा पूरी पृथ्वी को छोड़ देती है, जिससे यह धुँधली पड़ जाती है और अंधकार में डूब जाती है। यहाँ तक कि कनान की धरती भी सूरज की रोशनी नहीं देखेगी; सभी लोग अपनी आस्था खो देंगे, लेकिन कोई भी कनान की धरती की सुगंध छोड़ना सहन नहीं कर पाएगा। जब मैं नए स्वर्ग और पृथ्वी में प्रवेश करूँगा, तभी मैं अपनी महिमा का अन्य भाग लेकर उसे सबसे पहले कनान की धरती पर प्रकट करूँगा, जिससे घोर अंधकार से ढकी पूरी पृथ्वी पर प्रकाश की एक मद्धिम चमक फैल जाएगी। ऐसा इसलिए है ताकि पूरी पृथ्वी रोशनी की ओर आ जाए। ऐसा इसलिए है ताकि पूरी पृथ्वी के लोग रोशनी की शक्ति पर निर्भर कर सकें, जिससे मेरी महिमा और अधिक बढ़ सके और हर देश में नए सिरे से प्रकट हो सके और सारी मानवजाति यह जान सके कि मैं बहुत पहले मानव संसार में आ चुका हूँ और बहुत पहले मैं अपनी महिमा इस्राएल से पूर्व में ले आया हूँ, क्योंकि मेरी महिमा पूर्व से चमकती है और वह अनुग्रह के युग से आज के दिन तक लाई गई है। लेकिन मैं इस्राएल से ही चला था और वहीं से मैं पूर्व में पहुँचा। जब पूर्व का प्रकाश धीरे-धीरे सफेद होता जाएगा, केवल तभी पूरी धरती का अंधकार प्रकाश में बदलना शुरू होगा और केवल तभी मनुष्य को यह पता चलेगा कि मैं बहुत पहले इस्राएल से जा चुका हूँ और मैं नए सिरे से पूर्व में उदय हो रहा हूँ। ऐसा नहीं हो सकता कि एक बार इस्राएल में अवतरित होने और फिर वहाँ से चले जाने के बाद, मैं दोबारा इस्राएल में पैदा हो जाऊँ, क्योंकि मेरा कार्य पूरे ब्रह्मांड की अगुआई करता है और यही नहीं, बिजली पूर्व से आती है और पश्चिम तक पूरी तरह कौंधती है। इसी कारण मैं पूर्व में अवतरित हुआ हूँ और कनान को पूर्व में अपने चुने हुए लोगों तक लाया हूँ। मैं पूरी पृथ्वी से अपने चुने हुए लोगों को कनान की धरती पर लाऊँगा, इसलिए मैं पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित करने के लिए कनान की धरती से लगातार अपने कथन जारी करता रहा हूँ। इस समय पूरी पृथ्वी पर कोई प्रकाश नहीं है। कनान के लोगों को छोड़कर बाकी सभी लोग भूख और ठंड के खतरे में हैं। मैंने अपनी महिमा इस्राएल को दी और फिर उसे हटा लिया, और इस प्रकार इस्राएलियों को पूर्व में ले आया और सभी मनुष्यों को भी पूर्व में ले आया, उन सभी को रोशनी में ले आया, ताकि वे इससे फिर से मिल सकें, इससे जुड़े रहें और इसे अब और न खोजें। मैं ऐसा करूँगा कि जो लोग खोज रहे हैं वे सब फिर से रोशनी देख सकें, उस महिमा को देखें जो मेरे पास इस्राएल में थी, यह देखें कि मैं बहुत पहले सफेद बादल पर सवार होकर मनुष्यों के बीच आ चुका हूँ और वे सफेद बादलों के समूहों और फलों के गुच्छों को प्रचुर मात्रा में देख लें। यही नहीं, मैं ऐसा करूँगा कि वे इस्राएल के यहोवा परमेश्वर को देख सकें, यहूदियों के “स्वामी” को देख सकें, इच्छित मसीहा को देख सकें और मेरा पूर्ण रूप देख सकें जिसका युगों-युगों से राजाओं ने उत्पीड़न किया है। मैं संपूर्ण ब्रह्मांड पर काम करूँगा और मैं महान कार्य करूँगा, और अंत के दिनों के मनुष्य के सामने अपनी पूरी महिमा और अपने सभी कर्म प्रकट कर दूँगा, और मैं अपना सारा महिमामय मुखमंडल उनके सामने प्रकट करूँगा जिन्होंने कई वर्षों से मेरी प्रतीक्षा की है, और उनके सामने जो मुझे सफेद बादल पर सवार होकर आते हुए देखने के लिए लालायित रहे हैं, उस इस्राएल के सामने प्रकट करूँगा जो मेरे एक बार फिर प्रकट होने के लिए लालायित है, और उस समस्त मानवजाति के सामने प्रकट करूँगा जो मुझे सताती है, ताकि सभी यह जान सकें कि मैंने बहुत पहले ही अपनी महिमा हटा ली है और उसे पूर्व में ले आया हूँ, और वह अब यहूदिया में नहीं है, क्योंकि अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं!

पूरे ब्रह्मांड में मैं अपना कार्य कर रहा हूँ और पूर्व में भारी गर्जनाएँ निरंतर जारी हैं और सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरे कथन ही हैं जो सभी लोगों को वर्तमान में ले आए हैं। मैं सब लोगों को अपने कथनों से जीत लेता हूँ, उन्हें इस धारा में गिराता हूँ और उनसे अपने आगे आत्मसमर्पण करवाता हूँ, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा वापस लेकर उसे नए सिरे से पूर्व में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा देखने के लिए लालायित नहीं होता? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतजार नहीं करता? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी मनोहरता के लिए नहीं तरसता? कौन रोशनी की ओर नहीं आएगा? कौन कनान की समृद्धि नहीं देखेगा? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन उसकी सराहना नहीं करता जिसके पास महान सामर्थ्य है? मेरे कथन पूरी पृथ्वी पर प्रसारित होंगे और मैं अपने चुने हुए लोगों के सामने और अधिक वचन व्यक्त करूँगा और कहूँगा, जैसे शक्तिशाली गर्जन पर्वतों और नदियों को हिला रहा हो। मैं अपने वचन पूरे ब्रह्मांड से और मानवजाति से बोलता हूँ। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य की निधि बन गए हैं और सभी लोग मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूर्व से लेकर पश्चिम तक कौंधती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य इनसे अलग होने का अनिच्छुक होता है और ये मनुष्य के लिए अथाह भी हैं और यही नहीं, इनके कारण मनुष्य आनन्द का अनुभव करता है। नवजात शिशुओं की तरह सभी लोग खुशी और आनंद से भरे हैं और मेरे आगमन का जश्न मनाते हैं। अपने कथनों के माध्यम से मैं सब लोगों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद मैं औपचारिक रूप से मानवजाति के बीच प्रवेश करूँगा और ऐसा करूँगा कि वे मेरी पूजा करने आएँ। मुझसे प्रवाहित होती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों के चलते सब लोग मेरे समक्ष आते हैं और देखते हैं कि बिजली पूर्व से चमकती है और मैं भी पूर्व में “जैतून के पर्वत” पर उतर चुका हूँ, और मैं बहुत पहले पृथ्वी पर आ चुका हूँ, और मैं अब यहूदियों का पुत्र नहीं हूँ, बल्कि पूर्व की बिजली हूँ। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मानवजाति के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ उसके बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अब से असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे अब से असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। उससे भी अधिक, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामय मुखमंडल को देखें, मेरे कथन सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरा संपूर्ण इरादा है; यही मेरी योजना का अंत और चरमोत्कर्ष है और साथ ही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है : तमाम राष्ट्र मेरी पूजा करें, तमाम मुख मुझे स्वीकार करें, तमाम लोग मुझ पर भरोसा रखें और मेरे चुने तमाम लोग मेरे सामने आत्मसमर्पण करें!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सात गर्जनाएँ गरजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 70

कई सहस्राब्दियों से मनुष्य ने उद्धारकर्ता के आगमन को देखने की लालसा की है। मनुष्य उद्धारकर्ता यीशु को एक सफेद बादल पर सवार होकर व्यक्तिगत रूप से उन लोगों के बीच उतरते देखने के लिए तरसा है, जो हज़ारों सालों से उसके लिए लालायित रहे हैं और उसकी आशा की है। मनुष्य ने यह भी लालसा की है कि उद्धारकर्ता वापस लौटे और उसके साथ फिर से जुड़े; अर्थात् लोगों से हज़ारों सालों से अलग हुए उद्धारकर्ता यीशु के वापस आने और एक बार फिर से छुटकारे के उस कार्य को करने की, जो उसने यहूदियों के बीच किया था, मनुष्य के प्रति दयालु और प्रेममय होने की, मनुष्य के पाप क्षमा करने और उन्हें अपने ऊपर लेने की, यहाँ तक कि मनुष्य के सभी अपराध ग्रहण करने और उसे पाप से बचाने की लालसा की है। मनुष्य उद्धारकर्ता यीशु के पहले के समान होने की लालसा करता है—ऐसा उद्धारकर्ता जो प्यारा, दयालु और आदरणीय है, जो मनुष्य से कभी गुस्सा नहीं होता, और जो कभी मनुष्य को धिक्कारता नहीं, बल्कि जो मनुष्य के सारे पाप क्षमा करता है और उन्हें अपने ऊपर ले लेता है, यहाँ तक कि जो एक बार फिर से मनुष्य के लिए सलीब पर अपनी जान दे देगा। जब से यीशु गया है, वे चेले जो उसका अनुसरण करते थे, और वे सभी संत जिन्हें उसके नाम पर बचाया गया था, वे बेतहाशा उसे याद कर रहे और उसके आने की अपेक्षा कर रहे हैं। वे सभी, जो अनुग्रह के युग के दौरान यीशु मसीह के अनुग्रह द्वारा बचाए गए थे, अंत के दिनों के दौरान उस उल्लास भरे दिन की लालसा कर रहे हैं, जब उद्धारकर्ता यीशु सफेद बादल पर सवार होकर असंख्य लोगों के बीच प्रकट होगा। निस्संदेह, यह उन सभी लोगों की सामूहिक इच्छा भी है, जो आज उद्धारकर्ता यीशु के नाम को स्वीकार करते हैं। विश्व भर में वे सभी, जो उद्धारकर्ता यीशु के उद्धार को जानते हैं, वे अत्यधिक लालायित हैं कि यीशु मसीह अचानक आकर, पृथ्वी पर कहे अपने ये वचन पूरे करे : “मैं जैसे गया था वैसे ही मैं वापस आऊँगा।” मनुष्य मानता है कि सलीब पर चढ़ने और पुनरुत्थान के बाद यीशु सर्वोच्च परमेश्वर की दाईं ओर अपना स्थान ग्रहण करने के लिए सफेद बादल पर सवार होकर स्वर्ग वापस चला गया था। इसी प्रकार यीशु फिर से सफेद बादल पर सवार होकर (यह बादल उस बादल को संदर्भित करता है, जिस पर यीशु तब सवार हुआ था, जब वह स्वर्ग वापस गया था), उन लोगों के बीच वापस आएगा, जिन्होंने हज़ारों सालों से उसके लिए बेतहाशा लालसा की है, और वह यहूदियों का स्वरूप और उनके कपड़े धारण करेगा। उनके सामने प्रकट होने के बाद वह उन्हें भोजन प्रदान करेगा, उनके लिए जीवंत जल को उड़ेलेगा और मनुष्यों के बीच में रहेगा, अनुग्रह और प्रेमपूर्ण अनुकंपा से भरा हुआ, जीवंत और वास्तविक। ये सभी वे धारणाएँ हैं, जिन्हें लोग मानते हैं। किंतु उद्धारकर्ता यीशु ने ऐसा नहीं किया; उसने जो किया वह मनुष्य की धारणाओं के बिल्कुल विपरीत था। वह उन लोगों के बीच में नहीं आया, जिन्होंने बेसब्री से उसकी वापसी की लालसा की थी, और वह सफेद बादल पर सवार होकर असंख्य मनुष्यों के सामने प्रकट नहीं हुआ। वह पहले ही आ चुका है, किंतु मनुष्य उसे नहीं जानता, वह इससे अनभिज्ञ बना हुआ है। मनुष्य केवल निरुद्देश्य होकर उसका इंतज़ार कर रहा है—उसे थोड़ा भी अंदाजा नहीं है कि वह तो पहले ही “सफेद बादल” पर सवार होकर नीचे आ चुका है (वह सफेद बादल, जो उसका आत्मा, उसके वचन, उसका संपूर्ण स्वभाव और उसका स्वरूप है), और वह अब उन विजेताओं के समूह के बीच है, जिसे वह अंत के दिनों के दौरान बनाएगा। मनुष्य इसे कैसे जान सकता था कि भले ही पवित्र उद्धारकर्ता यीशु मनुष्य के प्रति प्रेमपूर्ण अनुकंपा और प्रेम से भरा हुआ है, पर उसका उन “मंदिरों” में कार्य करना संभव नहीं है जो गंदगी से भरे हैं और जहाँ अशुद्ध आत्माएँ रहती हैं? यद्यपि मनुष्य उसके आगमन का इंतज़ार करता रहा है, फिर भी वह उनके सामने कैसे प्रकट हो सकता है जो अधार्मिक का मांस खाते हैं, अधार्मिक का रक्त पीते हैं और अधार्मिकों के वस्त्र पहनते हैं, जो उस पर विश्वास तो करते हैं फिर भी उसे जानते नहीं, और लगातार उससे जबरदस्ती माँगते रहते हैं? मनुष्य केवल यही जानता है कि उद्धारकर्ता यीशु प्रेमपूर्ण अनुकंपा और दयालुता से परिपूर्ण है, और वह एक पाप-बलि है जो छुटकारे से भरपूर है। परंतु मनुष्य को नहीं पता कि वह स्वयं परमेश्वर है, जो धार्मिकता, प्रताप, कोप और न्याय से लबालब भरा है, और अधिकार और गौरव से संपन्न है। इसलिए, भले ही मनुष्य छुटकारा दिलाने वाले की वापसी के लिए उत्सुकता से लालायित रहता है और उसके लिए तरसता है, यहाँ तक कि उसकी प्रार्थनाएँ “स्वर्ग” को भी द्रवित कर देती हैं, किंतु उद्धारकर्ता यीशु उन लोगों के सामने प्रकट नहीं होता, जो उस पर विश्वास तो करते हैं किंतु उसे जानते नहीं।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, उद्धारकर्ता पहले ही एक “सफेद बादल” पर सवार होकर वापस आ चुका है

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 71

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है, जो उसका प्रकटन खोजते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है, जो तुम खोज रहे हो? क्या तुम परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम उसके पदचिह्न खोज रहे हो? परमेश्वर के प्रकटन के लिए कितनी लालसा है! और परमेश्वर के पदचिह्नों को पाना कितना कठिन है! इस तरह के युग में, इस तरह की दुनिया में, हमें उस दिन को देखने के लिए क्या करना चाहिए, जिस दिन परमेश्वर प्रकट होता है? हमें परमेश्वर के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों से उन सभी का सामना होता है, जो परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तुम लोगों ने उन सभी पर एक से अधिक अवसरों पर विचार किया है—लेकिन परिणाम क्या रहा? परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है? परमेश्वर के पदचिह्न कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को उत्तर मिल गए हैं? बहुत-से लोग इस तरह उत्तर देंगे : “परमेश्वर उन सभी के बीच प्रकट होता है, जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिह्न हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है!” कोई भी फार्मूलाबद्ध उत्तर दे सकता है, किंतु क्या तुम लोग समझते हो कि परमेश्वर के प्रकटन या उसके पदचिह्नों का क्या अर्थ है? परमेश्वर के प्रकटन का अर्थ है कि परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से कार्य करने के लिए पृथ्वी पर आता है। वह अपनी स्वयं की पहचान, अपने स्वभाव और अपने अंतर्निहित तरीके से, एक नए युग का आरंभ करने और पुराने युग का अंत करने का कार्य करने के लिए मनुष्यजाति के बीच उतरता है। इस तरह का प्रकटन किसी अनुष्ठान का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तसवीर, कोई चमत्कार या एक प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो दूर की बात है। बल्कि यह एक असली और वास्तविक तथ्य है, जिसे किसी के भी द्वारा छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन केवल औपचारिकता निभाने के लिए या एक प्रकार के अल्पकालिक कार्य की खातिर नहीं है। इसके बजाय यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है। परमेश्वर का प्रकटन हमेशा अर्थपूर्ण होता है और हमेशा उसकी प्रबंधन योजना से इसका कुछ संबंध होता है। यहाँ जिसे “प्रकटन” कहा गया है, वह उस प्रकार के “प्रकटन” से बिल्कुल ही भिन्न है, जिसमें परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन, अगुआई और प्रबोधन करता है। हर बार जब परमेश्वर प्रकट होता है, वह अपने महान कार्य के एक चरण को कार्यान्वित करता है। यह कार्य किसी भी अन्य युग के कार्य से भिन्न होता है। यह मनुष्य के लिए अकल्पनीय है, और इसका मनुष्य द्वारा पहले कभी भी अनुभव नहीं किया गया है। यह वह कार्य है, जो एक नए युग का आरंभ करता है और पुराने युग का समापन करता है, और यह मनुष्यजाति के उद्धार के कार्य का एक अधिक नया और उच्चतर चरण है; और भी अधिक, यह वह कार्य है जो मनुष्यजाति को नए युग में ले जाता है। यह परमेश्वर के प्रकटन का महत्त्व है।

एक बार जब तुम लोग समझ जाते हो कि परमेश्वर के प्रकटन का क्या अर्थ है, तो तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्न कैसे खोजने चाहिए? इस प्रश्न को समझाना कठिन नहीं है : जहाँ कहीं भी परमेश्वर का प्रकटन होता है, वहाँ तुम्हें उसके पदचिह्न मिलेंगे। इस तरह की व्याख्या बहुत स्पष्ट लगती है, किंतु इसे अभ्यास में लाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि बहुत लोग नहीं जानते कि परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है, और यह तो बिल्कुल भी नहीं जानते कि वह कहाँ प्रकट होना चाहता है, या उसे कहाँ प्रकट होना चाहिए। कुछ लोग आवेगपूर्वक यह मान लेते हैं कि जहाँ भी पवित्र आत्मा कार्य पर है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। या फिर वे यह मानते हैं कि जहाँ भी आध्यात्मिक हस्तियाँ होती हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। या फिर वे यह मानते हैं कि जहाँ कहीं अत्यधिक प्रसिद्धि वाले लोग होते हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। फिलहाल, आओ इस बात को छोड़ दें कि ऐसी मान्यताएँ सही हैं या ग़लत। इस तरह के प्रश्न को समझाने के लिए पहले हमारे पास एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए : हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं। हम आध्यात्मिक हस्तियों की खोज नहीं कर रहे हैं, हम विख्यात हस्तियों का अनुसरण तो बिल्कुल नहीं कर रहे हैं; हम परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण कर रहे हैं। चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हम परमेश्वर के इरादों, उसके वचनों और कथनों की खोज करें। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं; जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में तुम लोगों ने इन वचनों की अनदेखी कर दी है कि “परमेश्वर ही सत्य, मार्ग और जीवन है।” और इसलिए, बहुत-से लोग सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करते। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर का प्रकटन मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप नहीं हो सकता और परमेश्वर उस तरह तो और भी प्रकट नहीं हो सकता जैसा इंसान उससे माँग करता है। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसके बारे में उसे मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, और अपने कार्य के बारे में हर-एक व्यक्ति को सूचित करने की आवश्यकता तो उसे बिल्कुल भी नहीं है। यह परमेश्वर का स्वभाव है, और हर व्यक्ति को इसे और भी अधिक पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकटन को देखने और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करने की इच्छा रखते हो, तो तुम लोगों को पहले अपनी धारणाओं से दूरी बना लेनी चाहिए। तुम लोगों को यह माँग नहीं करनी चाहिए कि परमेश्वर ऐसा करे या वैसा करे, तुम्हें उसे अपनी सीमाओं और अपनी धारणाओं तक सीमित तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, तुम लोगों को खुद से यह माँग करनी चाहिए कि तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश कैसे करनी चाहिए, तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन को कैसे स्वीकार करना चाहिए, और तुम्हें परमेश्वर के नए कार्य के प्रति कैसे समर्पण करना चाहिए : मनुष्य को ऐसा ही करना चाहिए। चूँकि मनुष्य सत्य नहीं है, और उसके पास भी सत्य नहीं है, इसलिए उसे खोजना, स्वीकार करना और समर्पण करना चाहिए।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 72

चाहे तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश या फिर किसी अन्य देश के, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य को एक सृजित प्राणी की पहचान के परिप्रेक्ष्य से देखना चाहिए—इस तरह तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को किसी निश्चित दायरे में नहीं सीमित करोगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि अपनी धारणाओं के अनुसार आजकल बहुत-से लोग विश्वास करते हैं कि परमेश्वर का किसी देश विशेष में या किसी निश्चित राष्ट्र के बीच प्रकट होना संभव नहीं है। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन अर्थ है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है! मनुष्य की धारणाएँ और सोच भला उन्हें कैसे माप सकती हैं? और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की अपनी धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। केवल इसी प्रकार से तुम अपनी धारणाओं से बंधे नहीं होगे; केवल इसी प्रकार से तुम परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत करने के योग्य होगे। अन्यथा, तुम शाश्वत अंधकार में रहोगे, और कभी भी परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त नहीं करोगे।

परमेश्वर समस्त मानवजाति का परमेश्वर है। वह स्वयं को किसी भी देश या राष्ट्र की निजी संपत्ति नहीं मानता, बल्कि अपना कार्य अपनी बनाई योजना के अनुसार, किसी भी रूप, देश या राष्ट्र द्वारा बंधे बिना करता है। शायद तुमने इस रूप की कभी कल्पना नहीं की है या शायद इस रूप के प्रति तुम्हारा रवैया इनकार करने वाला है या शायद वह देश और वह राष्ट्र जिसके बीच परमेश्वर प्रकट होता है, वही ऐसा है जिसके साथ सभी भेदभाव करते हैं और वही पृथ्वी पर सर्वाधिक पिछड़ा हुआ है। लेकिन परमेश्वर के पास अपनी बुद्धि है। उसने अपने महान सामर्थ्य के साथ और अपने सत्य और स्वभाव के माध्यम से सचमुच ऐसे लोगों के समूह को हासिल कर लिया है जो उसके साथ एक मन वाले हैं और जिन्हें वह पूर्ण करना चाहता है—उसके द्वारा जीता गया एक समूह जिसने तमाम तरह के परीक्षण और पीड़ा और तमाम तरह का उत्पीड़न सहा है और बिल्कुल अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है। परमेश्वर का प्रकटन, जो किसी देश या रूप तक सीमित नहीं है, इसका लक्ष्य उसे अपनी योजना के अनुसार कार्य पूरा करने में सक्षम बनाना है। यह ठीक वैसा ही है जैसे जब परमेश्वर यहूदिया में देहधारी हुआ : उसका लक्ष्य समस्त मानवजाति के छुटकारे के लिए सलीब पर चढ़ने का कार्य पूरा करना था। फिर भी यहूदी मानते थे कि यह करना परमेश्वर के लिए असंभव है और उन्हें यह असंभव लगता था कि परमेश्वर देहधारी बन सकता है और प्रभु यीशु का रूप ग्रहण कर सकता है। उनका “असंभव” वह आधार बन गया जिस पर उन्होंने परमेश्वर की निंदा की और उसका विरोध किया और जो अंततः इस्राएल के विनाश का कारण बना। आज बहुत-से लोग वैसी ही गलती कर चुके हैं। वे अपनी समस्त शक्ति के साथ परमेश्वर के आसन्न प्रकटन की घोषणा करते हैं, मगर साथ ही उसके प्रकटन की निंदा भी करते हैं; उनका “असंभव” परमेश्वर के प्रकटन को एक बार फिर उनकी कल्पना के दायरे में सीमित कर देता है। और इसलिए मैंने बहुत-से लोगों को परमेश्वर के वचन उन्हें प्राप्त होने के बाद असभ्य और कर्कश हँसी का ठहाका लगाते देखा है। लेकिन क्या यह ठहाका यहूदियों द्वारा की गई निंदा और ईशनिंदा से किसी तरह भिन्न है? तुम लोग सत्य की उपस्थिति में श्रद्धावान नहीं हो और तुममें ललक का रवैया तो और भी कम है। तुम बस अड़े रहते हुए पड़ताल करते हो और लापरवाही भरी उदासीनता के साथ प्रतीक्षा करते हो। इस तरह पड़ताल और प्रतीक्षा करने से तुम क्या हासिल कर सकते हो? क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हें परमेश्वर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलेगा? यदि तुम परमेश्वर के कथनों का भेद नहीं पहचान सकते तो तुम किस प्रकार परमेश्वर का प्रकटन देखने के योग्य हो? जहाँ कहीं परमेश्वर प्रकट होगा, वहीं सत्य व्यक्त किया जाएगा और वहीं परमेश्वर की वाणी होगी। जो लोग सत्य स्वीकार कर सकते हैं केवल वे ही परमेश्वर की वाणी सुनने में सक्षम हैं और केवल इसी तरह के लोग परमेश्वर का प्रकटन देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को जाने दो! खुद को शांत करो और इन शब्दों को ध्यान से पढ़ो। जब तक तुम्हारे पास ऐसा दिल है जो सत्य के लिए लालायित रहता है, तब तक परमेश्वर तुम्हें प्रबुद्ध करेगा ताकि तुम उसके इरादे और वचन समझ सको। “असंभवता” के अपने तर्क छोड़ दो! लोग किसी चीज़ को जितना अधिक असंभव मानते हैं, उसके घटित होने की उतनी ही अधिक संभावना होती है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से ऊँची है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से ऊँचे हैं और परमेश्वर अपना कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमाओं से परे करता है। जितना अधिक कुछ असंभव होता है, उतना ही अधिक उसमें खोजने लायक सत्य होता है; जितना अधिक किसी चीज की कल्पना मनुष्य की धारणाओं द्वारा नहीं की जा सकती है, उसमें परमेश्वर के इरादे उतने ही अधिक होते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि परमेश्वर चाहे कहीं भी प्रकट क्यों न हो, वह फिर भी परमेश्वर है और उसका सार उसके प्रकटन के स्थान या तरीके के आधार पर कभी नहीं बदलेगा। परमेश्वर के पदचिह्न चाहे कहीं भी हों, उसका स्वभाव नहीं बदलेगा और चाहे परमेश्वर के पदचिह्न कहीं भी हों, वह समस्त मनुष्यजाति का परमेश्वर है, ठीक वैसे ही, जैसे कि प्रभु यीशु न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, बल्कि वह एशिया, यूरोप और अमेरिका के सभी लोगों का और इससे भी अधिक, वह समस्त ब्रह्मांड भर में और इसके ऊपर एकमात्र, अद्वितीय परमेश्वर है। तो आओ, हम परमेश्वर के इरादे खोजें और उसके कथनों और वचनों में उसके प्रकटन का पता लगाएँ और उसके पदचिह्नों के साथ तालमेल रखें! परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है। उसके वचन और उसका प्रकटन साथ-साथ विद्यमान हैं और उसका स्वभाव और पदचिह्न हर समय मानवजाति के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट किए जाते हैं। प्यारे भाई-बहनो, मुझे आशा है कि तुम सभी लोग इन वचनों में परमेश्वर का प्रकटन देख सकते हो, उसके पदचिह्नों के साथ-साथ चलना शुरू कर सकते हो और एक नए युग की तरफ बढ़ सकते हो और उस सुंदर नए स्वर्ग और पृथ्वी में प्रवेश कर सकते हो, जिसे परमेश्वर ने उन लोगों के लिए तैयार किया है, जो उसके प्रकटन का इंतजार करते हैं!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 73

परमेश्वर मौन है और हमारे सामने कभी प्रकट नहीं हुआ है, फिर भी उसका कार्य कभी नहीं रुका है। वह पूरी पृथ्वी की पड़ताल करता है, सारी चीजों पर शासन करता है और मनुष्य के सभी शब्दों, कर्मों और गतिविधियों को देखता है। वह अपना प्रबंधन एक योजना के साथ और चरणबद्ध ढंग से, चुपचाप और स्वर्गों और पृथ्वी को हिलाए बिना संचालित करता है, फिर भी उसके कदम एक-एक करके हमेशा मनुष्यों के निकट बढ़ते जाते हैं और उसका न्याय का आसन बिजली की रफ्तार से ब्रह्मांड में फैलता है, जिसके बाद हमारे बीच उसके सिंहासन का तुरंत अवरोहण होता है। वह कैसा प्रतापी दृश्य है, कितनी गौरवशाली और गंभीर झाँकी! एक कपोत के समान और एक गरजते हुए सिंह के समान, आत्मा हम जनसाधारण के बीच आ जाता है। वह बुद्धि है, वह धार्मिकता और प्रताप है और वह अधिकार से संपन्न होकर और प्रेमपूर्ण दयालुता और दया से भरा होकर चुपके से हमारे बीच आता है। उसके आगमन के बारे में कोई नहीं जानता है, उसके आगमन का स्वागत कोई नहीं करता है और इससे भी बढ़कर कोई भी यह नहीं जानता कि वह सब क्या करने वाला है। मनुष्य का जीवन पहले जैसा चलता रहता है, उसका हृदय भी वैसा ही रहता है और दिन पहले जैसे बीतते जाते हैं। परमेश्वर हमारे बीच एक साधारण मनुष्य के रूप में रहता है, सबसे मामूली अनुयायियों में से एक और एक साधारण विश्वासी के रूप में रहता है। उसके अपने अनुसरण हैं, अपने लक्ष्य हैं और इससे भी बढ़कर उसमें ऐसी दिव्यता है जो साधारण लोगों में नहीं होती है। किसी ने भी उसकी दिव्यता के अस्तित्व पर गौर नहीं किया है और किसी ने भी उसके सार और मनुष्य के सार के बीच का अंतर नहीं देखा है। हम उसके साथ बिना किसी संकोच और भय के मिलकर रहते हैं, क्योंकि हमारी दृष्टि में वह एक मामूली विश्वासी से अधिक कुछ नहीं है। वह हमारी हर गतिविधि देखता है और हमारे सभी विचार और धारणाएँ उसके सामने बेपर्दा कर दी जाती हैं। कोई भी उसके अस्तित्व में रुचि नहीं लेता, वह जो प्रकार्य करता है उसके बारे में कोई भी कुछ कल्पना नहीं करता है और इससे भी बढ़कर उसकी पहचान के बारे में किसी को रत्ती भर भी संदेह नहीं होता है। हम बस अपने अनुसरणों में लगे रहते हैं, मानो उसका हमसे कुछ लेना-देना न हो ...

संयोगवश, पवित्र आत्मा उसके “माध्यम से” वचनों का एक अंश व्यक्त करता है और भले ही यह बहुत अनपेक्षित महसूस होता हो, फिर भी हम दृढ़ता से विश्वास करते हैं कि यह परमेश्वर से आने वाला कथन है और परमेश्वर की ओर से आया मानकर तत्परता से उसे स्वीकार कर लेते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि चाहे इन वचनों को कोई भी व्यक्त करता हो, यदि ये पवित्र आत्मा से आते हैं, तो हमें उन्हें स्वीकार करना चाहिए, नकारना नहीं चाहिए। अगला कथन मेरे माध्यम से या तुम्हारे माध्यम से या किसी अन्य के माध्यम से आ सकता है। वह कोई भी हो, सब परमेश्वर का अनुग्रह है। परंतु यह व्यक्ति चाहे जो भी हो, हम इसकी आराधना नहीं कर सकते, क्योंकि चाहे कुछ भी हो, यह व्यक्ति परमेश्वर नहीं हो सकता; न ही हम किसी भी तरह से ऐसे किसी साधारण व्यक्ति को अपना परमेश्वर चुन सकते हैं। हमारा परमेश्वर बहुत महान और सम्माननीय है; ऐसा कोई मामूली व्यक्ति उसकी जगह कैसे ले सकता है? यही नहीं, हम सब परमेश्वर के आगमन की और उसके द्वारा हमें वापस स्वर्ग के राज्य में ले जाए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसलिए कोई इतना मामूली व्यक्ति कैसे इतना महत्वपूर्ण और कठिन कार्य करने में सक्षम हो सकता है? यदि प्रभु दोबारा आता है, तो उसे एक सफेद बादल पर आना चाहिए, ताकि असंख्य लोग उसे देख सकें। वह कितना महिमामय होगा! यह कैसे संभव है कि वह चुपके से साधारण मनुष्यों के एक समूह में छिप जाए?

और फिर भी लोगों के बीच छिपा हुआ यही वह साधारण इंसान है जो हमें बचाने का नया काम कर रहा है। वह हमें कोई स्पष्टीकरण नहीं देता, न ही वह हमें यह बताता है कि वह क्यों आया है, बल्कि जो काम करने का उसका इरादा होता है उस काम को अपनी योजना और प्रक्रिया के अनुसार करता है। उसके वचनों और कथनों की बारंबारता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। सांत्वना देने, प्रोत्साहन देने, याद दिलाने और चेतावनी देने से लेकर फटकारने और अनुशासित करने तक; मृदु और कोमल स्वर से लेकर प्रचंड और प्रतापी वचनों तक—यह सब मनुष्य को महान दया और घोर भय का अनुभव करवाता है। जो कुछ भी वह कहता है वह हमारे अंदर गहरे छिपे रहस्यों पर सीधे चोट करता है; उसके वचन हमारे दिलों में चुभते हैं, हमारी आत्माओं में चुभते हैं और हमें असहनीय शर्मिंदगी से भर देते हैं, हम समझ ही नहीं पाते कि खुद को कहाँ छिपाएँ। हमें इसे लेकर संदेह होने लगता है कि इस व्यक्ति के हृदय का परमेश्वर हमसे वास्तव में प्रेम करता भी है या नहीं और वास्तव में उसका इरादा क्या है। शायद ये कष्ट सहने के बाद ही हमें उठा लिया जा सकता हो? अपने मस्तिष्क में हम हिसाब लगा रहे हैं ... आने वाली मंजिल के बारे में और अपनी भावी नियति के बारे में। फिर भी पहले की तरह हममें से कोई भी यह विश्वास नहीं करता कि हमारे बीच कार्य करने के लिए परमेश्वर पहले ही देह धारण कर चुका है। भले ही वह इतने लंबे समय तक हमारे साथ रहा हो, भले ही वह हमसे आमने-सामने पहले ही इतने सारे वचन बोल चुका हो, फिर भी हम इतने साधारण व्यक्ति को अपने भविष्य का परमेश्वर स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, इस मामूली व्यक्ति को अपने भविष्य और नियति का नियंत्रण सौंपने को तो हम बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। उससे हम जीवित जल की अंतहीन आपूर्ति का आनंद लेते हैं और उसके माध्यम से हम ऐसा जीवन जीते हैं जिसमें मनुष्य और परमेश्वर आमने-सामने रहते हैं। लेकिन हम केवल स्वर्ग में मौजूद प्रभु यीशु के अनुग्रह के लिए धन्यवाद देते हैं, हमने कभी इस साधारण व्यक्ति की भावनाओं पर ध्यान नहीं दिया, जो दिव्यता से युक्त है। फिर भी, वह पहले की तरह विनम्रता से देह में छिपे रहकर अपना कार्य करता है, अपने हृदय की वाणी को अभिव्यक्ति देता है, मानो वह इंसान की अस्वीकृति से बेखबर हो, मानो वह इंसान की अपरिपक्वता और अज्ञानता को हमेशा के लिए क्षमा कर रहा हो और अपने प्रति इंसान के अपमानजनक रवैये के प्रति हमेशा के लिए सहिष्णु हो।

हमारे बिना जाने ही, यह मामूली व्यक्ति हमें परमेश्वर के कार्य के एक के बाद एक चरण में ले गया है। हम अनगिनत परीक्षणों और अनगिनत ताड़नाओं से गुजरते हैं और मृत्यु द्वारा हमारी परीक्षा ली जाती है। हम परमेश्वर के धार्मिक और प्रतापी स्वभाव को जानने लगते हैं, उसकी प्रेमपूर्ण दयालुता और दया का आनंद भी लेते हैं; परमेश्वर की महान सामर्थ्य और बुद्धि की समझ हासिल करते हैं, परमेश्वर की मनोहरता को निहारते हैं और मनुष्य को बचाने के परमेश्वर के उत्कट इरादे को देखते हैं। इस साधारण मनुष्य के शब्दों में, हम परमेश्वर के स्वभाव और सार को जान जाते हैं; परमेश्वर के इरादे समझ जाते हैं, मनुष्य का प्रकृति सार जान जाते हैं और हम उद्धार और पूर्णता का मार्ग देख लेते हैं। उसके वचन हमारी “मृत्यु” का कारण बनते हैं और वे हमारे “पुनर्जन्म” का कारण भी बनते हैं; उसके वचन हमें दिलासा देते हैं, लेकिन हमें ग्लानि और ऋणी होने की भावना से भी भर देते हैं; उसके वचन हमें आनंद और शांति देते हैं, परंतु अपार पीड़ा भी देते हैं। कभी-कभी हम उसके हाथों में मेमनों के समान होते हैं, जिनका जैसे वह चाहे वैसे वध कर दिया जाएगा; कभी-कभी हम उसकी आँख के तारे के समान होते हैं और उसके कोमल प्रेम का आनंद उठाते हैं; कभी-कभी हम उसके शत्रु के समान होते हैं और उसकी निगाह में उसके कोप द्वारा भस्म कर दिए जाते हैं। हम उसके द्वारा बचाई गई मानवजाति हैं, हम उसकी दृष्टि में कीड़े हैं, हम वे खोई हुई भेड़ें हैं जिन्हें ढूँढ़ने में वह दिन-रात लगा रहता है। वह हमारे प्रति दयालु है, वह हमसे बेहद घृणा करता है, वह हमें ऊपर उठाता है, वह हमें दिलासा और प्रोत्साहन देता है, वह हमारा मार्गदर्शन करता है, वह हमें प्रबुद्ध करता है, वह हमें ताड़ना देता है और अनुशासित करता है, यहाँ तक कि वह हमें शाप भी देता है। रात-दिन वह कभी हमारी चिंता करना बंद नहीं करता, हमारी सुरक्षा और परवाह करना बंद नहीं करता है, कभी हमारा साथ नहीं छोड़ता है। वह हमारे लिए अपने हृदय का रक्त उँडेल देता है और हर कीमत चुकाता है। इस मामूली और साधारण-सी देह के वचनों में हमने परमेश्वर की संपूर्णता का आनंद लिया है और उस मंजिल को देखा है, जो परमेश्वर ने हमें प्रदान की है। इसके बावजूद मिथ्याभिमान अभी भी हमारे हृदय को परेशान करता है और हम अभी भी ऐसे किसी व्यक्ति को अपने परमेश्वर के रूप में सक्रिय रूप से स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। यद्यपि उसने हमें बहुत अधिक मन्ना, आनंद लेने के लिए बहुत कुछ दिया है, किंतु इनमें से कुछ भी हमारे हृदय में प्रभु का स्थान नहीं ले सकता। हम इस व्यक्ति की विशिष्ट पहचान और रुतबे का बड़ी अनिच्छा से ही सम्मान करते हैं। जब तक वह हमसे यह स्वीकार करने के लिए कहने को अपना मुँह नहीं खोलता कि वह परमेश्वर है, तब तक हम स्वयं उसे शीघ्र आने वाले परमेश्वर के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेंगे, भले ही वह हमारे बीच बहुत लंबे समय से काम करता आ रहा है।

परमेश्वर विभिन्न तरीकों और कई परिप्रेक्ष्यों के उपयोग से हमें इस बारे में सचेत करते हुए कि हमें क्या करना चाहिए और साथ ही अपने हृदय की वाणी व्यक्त करते हुए अपने कथन जारी रखता है। उसके वचनों में जीवन की शक्ति है, वे हमें वह मार्ग देते हैं जिसका हमें अनुसरण करना चाहिए और हमें यह अच्छी तरह से समझने में सक्षम बनाते हैं कि सत्य वास्तव में क्या है। हम उसके वचनों से आकर्षित होने लगते हैं, हम उसके बोलने के लहजे और तरीके पर ध्यान देने लगते हैं और हम इस अगोचर व्यक्ति के हृदय की वाणी पर अवचेतन रूप से ध्यान देने लगते हैं। वह हमारे लिए अपने हृदय को मथ डालता है, हमारे लिए नींद और भूख त्याग देता है, हमारे लिए रोता है, हमारे लिए आहें भरता है, हमारे लिए बीमारी में कराहता है; वह हमारी मंजिल और उद्धार की खातिर अपमान सहता है; और हमारी संवेदनहीनता और विद्रोहशीलता के कारण उसका हृदय खून और आँसू बहाता है। जो परमेश्वर के पास है और जो वह स्वयं है, वे किसी साधारण व्यक्ति में नहीं हो सकते हैं, न ही वे किसी भ्रष्ट मनुष्य में हो सकते हैं या वह उन्हें हासिल कर सकता है। उसमें ऐसी सहनशीलता और धैर्य है जो किसी साधारण मनुष्य में नहीं होता है, और उसका प्रेम ऐसा है जो किसी सृजित प्राणी में नहीं होता है। उसके अलावा कोई भी हमारे समस्त विचारों को नहीं जान सकता या हमारी प्रकृति और सार को अपनी हथेली के पृष्ठ भाग की तरह भली-भाँति नहीं जान सकता या मानवजाति की विद्रोहशीलता और भ्रष्टता का न्याय नहीं कर सकता या इस तरह से स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से हमसे बातचीत और हम पर कार्य नहीं कर सकता। उसके अलावा किसी में परमेश्वर का अधिकार, बुद्धि और गरिमा नहीं है; उसमें परमेश्वर का स्वभाव और उसके पास जो है और जो वह स्वयं है, अपनी संपूर्णता में प्रकट होते हैं। उसके अलावा कोई हमें मार्ग नहीं दिखा सकता या हमारे लिए प्रकाश नहीं ला सकता। उसके अलावा कोई भी उन रहस्यों को प्रकट नहीं कर सकता, जिन्हें परमेश्वर ने सृष्टि के आरंभ से अब तक प्रकट नहीं किया है। उसके अलावा कोई हमें शैतान के बंधन और हमारे भ्रष्ट स्वभावों से नहीं बचा सकता। वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है; वह संपूर्ण मानवजाति के लिए परमेश्वर के हृदय की वाणी, परमेश्वर के प्रोत्साहनों और परमेश्वर के न्याय के वचनों को व्यक्त करता है। उसने एक नया युग, एक नया काल आरंभ किया है, वह एक नए स्वर्ग और पृथ्वी और नए कार्य में ले गया है, वह हमारे लिए आशा लेकर आया है और उसने उस जीवन को समाप्त कर दिया जिसे हम अस्पष्ट अवस्था में जी रहे थे, उसने हमारे संपूर्ण अस्तित्व को उद्धार का मार्ग पूरी स्पष्टता से देखने में सक्षम बनाया है। उसने हमारे संपूर्ण अस्तित्व को जीत लिया है और हमारे दिलों को प्राप्त कर लिया है। उस क्षण से हमारे दिल जागरूक हो गए हैं और हमारी आत्माएँ पुनर्जीवित हो गई लगती हैं : यह साधारण, मामूली व्यक्ति, जो हमारे बीच रहता है और जिसे हम इतने लंबे समय से ठुकराते आए हैं—क्या यह वही प्रभु यीशु नहीं है, जो सोते-जागते हमेशा हमारे विचारों में रहता है और जिसके लिए हम रात-दिन लालायित रहते हैं? यह वही है! यह वास्तव में वही है! वही हमारा परमेश्वर है! वही सत्य, मार्ग और जीवन है! उसने हमें फिर से जीने और प्रकाश देखने में सक्षम बनाया है और हमारे दिलों को भटकने से रोका है। हम परमेश्वर के घर लौट आए हैं, हम उसके सिंहासन के सामने लौट आए हैं, हम उसके आमने-सामने हैं, हमने उसका मुखमंडल देखा है और हमने आगे का मार्ग देखा है। इस समय हमारे दिल परमेश्वर द्वारा पूरी तरह से जीत लिए गए हैं; अब हमें संदेह नहीं है कि वह कौन है, अब हम उसके कार्य और उसके वचन को लेकर प्रतिरोधी महसूस नहीं करते और अब हम उसके सामने पूरी तरह से दंडवत हैं। हम अपने शेष जीवन में परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करने, उसके द्वारा पूर्ण बनाए जाने, उसके अनुग्रह का आभार चुकाने, हमारे प्रति उसके प्रेम का मूल्य चुकाने, उसके आयोजनों और व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने, उसके कार्य में सहयोग करने और उसके द्वारा सौंपा जाने वाला हर कार्य पूरा करने के लिए सब कुछ करने से अधिक कुछ नहीं चाहते।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 4 : परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 74

परमेश्वर और मनुष्य के बारे में बराबरी पर बात नहीं की जा सकती। परमेश्वर का सार और कार्य मनुष्य के लिए सर्वाधिक अथाह और समझ से परे हैं। यदि परमेश्वर मानवजाति के बीच व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य न करे और अपने वचन न कहे तो चाहे कुछ भी हो जाए, मनुष्य कभी भी परमेश्वर के इरादे नहीं समझ पाएगा। और इसलिए वे लोग भी जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन परमेश्वर को समर्पित कर दिया है, उसका अनुमोदन प्राप्त नहीं कर पाएँगे। यदि परमेश्वर कार्य करना शुरू न करे तो मनुष्य चाहे कितना भी अच्छा क्यों न करे, वह सब व्यर्थ हो जाएगा क्योंकि परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से सदैव ऊँचे रहेंगे और परमेश्वर की बुद्धि की थाह कोई भी व्यक्ति नहीं ले सकता है। और इसीलिए मैं कहता हूँ कि जो लोग परमेश्वर और उसके कार्य को “पूरी तरह से समझते हैं” वे अयोग्यों की जमात हैं; वे सभी अहंकारी और अज्ञानी हैं। मनुष्य को परमेश्वर के कार्य को सीमित नहीं करना चाहिए; और तो और, मनुष्य परमेश्वर के कार्य को सीमित नहीं कर सकता है। परमेश्वर की दृष्टि में मनुष्य तो एक चींटी से भी छोटा है; तो फिर वह परमेश्वर के कार्य की थाह कैसे पा सकता है? जो लोग हमेशा बढ़-चढ़कर कहते फिरते हैं, “परमेश्वर इस तरह से या उस तरह से कार्य नहीं करता,” या “परमेश्वर ऐसा है या वैसा है”—क्या वे अहंकारपूर्वक नहीं बोलते? हम सबको जानना चाहिए कि मनुष्य, जो कि देह का है, शैतान द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है, कि उसकी प्रकृति ही है परमेश्वर का विरोध करना, और यह कि वह परमेश्वर के समान नहीं हो सकता, परमेश्वर के कार्य की जहाँ तक बात है, उसके लिए तो वह कोई परामर्श बिल्कुल भी नहीं दे सकता। जहाँ तक इस बात का संबंध है कि परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन कैसे करता है, तो यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। यह उचित है कि इस या उस दृष्टिकोण को पालने के बजाय मनुष्य को समर्पण करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य धूल मात्र है। चूँकि हमारा उद्देश्य परमेश्वर की खोज करना है, इसलिए हमें अपनी धारणाएँ मानो परमेश्वर के विचारार्थ उसके कार्य पर नहीं थोपनी चाहिए और अपने भ्रष्ट स्वभाव का उपयोग करके जानबूझकर तथा हठपूर्वक परमेश्वर के कार्य का विरोध तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्या ऐसा करना हमें मसीह-विरोधी नहीं बनाएगा? ऐसे लोगों को बिल्कुल भी परमेश्वर में विश्वास करने वाले कैसे कहा जा सकता है? चूँकि हम विश्वास करते हैं कि परमेश्वर है, और चूँकि हम उसे संतुष्ट करना और उसे देखना चाहते हैं, इसलिए हमें सत्य का मार्ग खोजना चाहिए, और परमेश्वर की अनुरूपता का मार्ग खोजना चाहिए। हमें परमेश्वर के अड़ियल विरोध में खड़े नहीं होना चाहिए। ऐसे क्रियाकलापों से क्या भला हो सकता है?

आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है। हो सकता है, तुम इन वचनों को स्वीकार न कर पाओ और ये तुम्हें असामान्य लगें, पर मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम फिलहाल अपनी स्वाभाविकता प्रकट मत करो, क्योंकि जो लोग परमेश्वर के समक्ष धार्मिकता के लिए सचमुच भूख-प्यास रखते हैं केवल वे ही सत्य को प्राप्त कर सकते हैं, और जो सचमुच धर्मनिष्ठ हैं केवल वे ही परमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध किए जा सकते हैं और उसका मार्गदर्शन पा सकते हैं। नतीजे संयम और शांति के साथ सत्य खोजने से मिलते हैं, झगड़े और विवाद से नहीं। जब मैं यह कहता हूँ कि “आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है” तो मैं परमेश्वर के देह में लौटने की बात कर रहा हूँ। शायद ये वचन तुम्हें व्याकुल न करते हों; शायद तुम इनका तिरस्कार करते हो; या शायद ये तुम्हारे लिए बड़े रुचिकर हों। चाहे जो भी मामला हो, मुझे आशा है कि जो लोग वास्तव में परमेश्वर के प्रकट होने की लालसा रखते हैं, वे इस तथ्य का सामना करेंगे और इसके बारे में जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालने के बजाय इसकी सावधानीपूर्वक जाँच करेंगे; एक बुद्धिमान व्यक्ति को यही करना चाहिए।

ऐसी चीज की जाँच करना कठिन नहीं है, परंतु इसके लिए जरूरी है कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति पहले इस सत्य को जान ले : जो देहधारी परमेश्वर है उसके पास परमेश्वर का सार है और जो देहधारी परमेश्वर है उसके पास परमेश्वर की अभिव्यक्ति है। चूँकि परमेश्वर देहधारी बना है, इसलिए वह उस कार्य को अपने साथ लाता है जो वह करना चाहता है और चूँकि वह देहधारी परमेश्वर है, इसलिए वह परमेश्वर का स्वरूप व्यक्त करता है और वह मनुष्य के लिए सत्य ला सकता है, उसे जीवन प्रदान कर सकता है और उसे मार्ग दिखा सकता है। जिस देह में परमेश्वर का सार नहीं है, वह निश्चित रूप से देहधारी परमेश्वर नहीं है; इसमें कोई संदेह नहीं। अगर मनुष्य यह जाँच करना चाहता है कि क्या यह परमेश्वर की देहधारी देह है, तो उसे इसका निर्धारण उसके द्वारा व्यक्त स्वभाव और उसके द्वारा बोले गए वचनों से करना चाहिए। अर्थात्, यह निर्धारित करने के लिए कि वह परमेश्वर का देहधारी स्वरूप है या नहीं और वह सच्चा मार्ग है या नहीं, व्यक्ति को उसके सार के आधार पर उसकी परख करनी चाहिए। अतः यह देहधारी परमेश्वर की देह है कि नहीं, यह निर्धारित करने की कुंजी उसके बाहरी स्वरूप के बजाय उसके सार (यानी उसके कार्य, उसके वचनों, उसके स्वभाव और बहुत-से अन्य पहलुओं) में निहित होती है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी स्वरूप की ही जाँच करता है, और परिणामस्वरूप उसके सार की अनदेखी करता है, तो इससे उसके मूर्ख और अज्ञानी होने का पता चलता है। बाहरी स्वरूप सार का निर्धारण नहीं कर सकता; इतना ही नहीं, परमेश्वर का कार्य कभी भी मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप नहीं हो सकता। क्या यीशु का बाहरी स्वरूप मनुष्य की धारणाओं के विपरीत नहीं था? क्या उसका चेहरा और पहनावा उसकी असली पहचान को दर्शाने में असमर्थ नहीं थे? क्या उस समय के फरीसियों ने यीशु का ठीक इसीलिए विरोध नहीं किया था क्योंकि उन्होंने केवल उसके बाहरी स्वरूप को देखा और उसके मुख से निकले वचनों को गंभीरता से स्वीकार नहीं किया? मुझे उम्मीद है कि प्रत्येक भाई-बहन जो परमेश्वर के प्रकटन की खोज में है, वह इतिहास की त्रासदी को नहीं दोहराएगा, आधुनिक काल का फरीसी नहीं बनेगा और परमेश्वर को फिर से सलीब पर नहीं चढ़ाएगा। तुम्हें सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि परमेश्वर की वापसी का स्वागत कैसे किया जाए और तुम्हारे मस्तिष्क में यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति कैसे बना जाए, जो सत्य के प्रति समर्पण करता है। यह हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है, जो यीशु के बादल पर सवार होकर लौटने का इंतजार कर रहा है। हमें अपनी आध्यात्मिक आँखों को साफ करना चाहिए और कल्पना के शब्दों के दलदल में नहीं फँसना चाहिए। हमें परमेश्वर के वास्तविक कार्य के बारे में सोचना चाहिए और परमेश्वर के व्यावहारिक पक्ष पर दृष्टि डालनी चाहिए। खुद को दिवास्वप्नों में बहने या खोने मत दो और हमेशा यह आशा मत करते रहो कि प्रभु यीशु अचानक बादल पर सवार होकर तुम्हारे बीच उतर आएँगे और तुम्हें—जिन्होंने उन्हें कभी जाना या देखा नहीं है और जो उनकी इच्छा के अनुसार चलना नहीं जानते—अपने साथ ले जाएँगे। इससे अधिक यथार्थवादी मामलों के बारे में सोचना बेहतर है!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, प्रस्तावना

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 75

क्या तुम लोग इसकी जड़ जानना चाहते हो कि फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया? क्या तुम लोग फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे भी ज़्यादा, उन्होंने केवल इस पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, फिर भी जीवन सत्य का अनुसरण नहीं किया। इसलिए वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि उन्हें जीवन के मार्ग का कोई ज्ञान नहीं है, और वे नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है। तुम्हीं लोग बताओ ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर का आशीष कैसे प्राप्त कर सकते हैं? क्या वे मसीहा को देख सकते हैं? उन्होंने यीशु का विरोध किया क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु द्वारा बताए गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे और इससे भी अधिक इसलिए क्योंकि वे मसीहा को नहीं समझते थे। और चूँकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था और कभी मसीहा के साथ नहीं जुड़े थे, उन्होंने मसीहा के बस नाम के साथ चिपके रहने की ग़लती की, जबकि हर मुमकिन ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का आज्ञापालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत था : इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता, तुम मसीह नहीं हो। क्या यह सोच हास्यास्पद और बेतुकी नहीं है? मैं तुम लोगों से आगे पूछता हूँ : क्या तुम लोगों के लिए वो गलतियाँ करना बेहद आसान नहीं जो उस समय के फरीसियों ने की थीं, क्योंकि तुम लोगों के पास यीशु की थोड़ी-भी समझ नहीं है? क्या तुम सत्य के मार्ग का भेद पहचान सकते हो? क्या तुम सचमुच विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने में समर्थ हो? यदि तुम नहीं जानते कि तुम मसीह का विरोध करोगे या नहीं, तो मेरा कहना है कि तुम पहले ही मौत की कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने वाले कार्य करने, यीशु को अस्वीकार करने, उसे बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा-भला कहने में सक्षम हैं। इससे भी अधिक, वे यीशु के लौटने को शैतान द्वारा गुमराह किए जाने की तरह देखने में सक्षम हैं और ज्यादातर लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इस सब से तुम लोगों को डर नहीं लगता? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के खिलाफ निंदा होगी, कलीसियाओं के लिए कहे गए पवित्र आत्मा के वचनों को चीरना होगा और यीशु द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम हठपूर्वक होश में आने से इनकार करते हो तो तुम लोग उस कार्य को कैसे समझ सकते हो जिसे यीशु श्वेत बादल पर देह में लौटने पर करता है? मैं तुम लोगों को यह बताता हूँ : जो लोग सत्य स्वीकार नहीं करते, फिर भी अंधों की तरह श्वेत बादलों पर यीशु के आगमन का इंतजार करते हैं, वे निश्चित रूप से वो लोग हैं जो पवित्र आत्मा की ईश-निंदा करते हैं और ये वो वर्ग है जो निश्चित तौर पर नष्ट कर दिया जाएगा। तुम लोग सिर्फ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो और सिर्फ स्वर्ग के सुखद क्षेत्र का आनंद लेना चाहते हो, तुमने यीशु के कहे वचनों का कभी पालन नहीं किया और जब यीशु देह में लौटता है तो उसके द्वारा व्यक्त किए गए सत्य को तुमने कभी नहीं स्वीकारा। यीशु के एक श्वेत बादल पर लौटने के तथ्य के बदले तुम लोग क्या दोगे? क्या वही ईमानदारी जिससे तुम लोग बार-बार पाप करते हो और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? श्वेत बादल पर लौटने वाले यीशु को तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या यह कार्य के कई वर्षों की वह पूँजी है, जिसके जरिए तुम लोग अपनी बड़ाई करते हो? तुम किस चीज को पेश करोगे, ताकि लौटकर आए यीशु को तुम पर भरोसा हो? क्या वह तुम लोगों की अभिमानी प्रकृति है, जो किसी भी सत्य को समर्पित नहीं होती?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा

परमेश्वर के दैनिक वचन  अंश 76

तुम लोगों की निष्ठा सिर्फ वचन में है, तुम लोगों का ज्ञान सिर्फ सोच और धारणाओं का है, तुम लोगों की कड़ी मेहनत सिर्फ स्वर्ग की आशीष पाने के लिए है तो तुम लोगों की आस्था किस प्रकार की होगी? आज भी, तुम लोग सत्य के प्रत्येक वचन को अनसुना कर देते हो। तुम लोग नहीं जानते कि परमेश्वर क्या है, तुम लोग नहीं जानते कि मसीह क्या है, तुम लोग नहीं जानते कि यहोवा का भय कैसे मानें, तुम लोग नहीं जानते कि कैसे पवित्र आत्मा के कार्य में प्रवेश करें और तुम लोग नहीं जानते कि परमेश्वर स्वयं के कार्य और मनुष्य द्वारा गुमराह किए जाने के बीच कैसे भेद करें। तुम परमेश्वर द्वारा व्यक्त सत्य के किसी भी ऐसे वचन की केवल निंदा करना ही जानते हो, जो तुम्हारे विचारों के अनुरूप नहीं होता। तुम्हारी विनम्रता कहाँ है? तुम्हारा समर्पण कहाँ है? तुम्हारी निष्ठा कहाँ है? सत्य खोजने का तुम्हारा रवैया कहाँ है? परमेश्वर का भय मानने वाला तुम्हारा हृदय कहाँ है? मैं तुम लोगों को बता दूँ कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से वह श्रेणी होगी, जो नष्ट की जाएगी। जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकारने में अक्षम हैं, वे निश्चित ही नरक के वंशज, महा देवदूत के वंशज हैं, उस श्रेणी में हैं जो हमेशा के लिए नष्ट कर दी जाएगी। बहुत-से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु फिर भी मैं यीशु का अनुसरण करने वाले हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे तो यह धार्मिकता के सूर्य के सार्वजनिक प्रकटन का समय होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा। हालाँकि तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे तो यह वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे, वह समय होगा जब परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा की जा चुकी होगी और जब परमेश्वर अच्छे लोगों को पुरस्कार और बुरे लोगों को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय उस समय से पहले ही समाप्त हो चुका होगा जब मनुष्य चिह्न देखता है, जब सिर्फ सत्य की अभिव्यक्ति होती है। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और चिह्न नहीं खोजते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए जा चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि “ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है” अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो चिह्न प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को स्वीकार नहीं करते जो कड़ा न्याय अभिव्यक्त करता है और जीवन और सच्चा मार्ग प्रदान करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे तो वह उनसे निपटे। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अहंकारी हैं। ऐसे नीच लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं? यीशु की वापसी उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है, जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, पर जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं उनके लिए यह दोषी ठहराए जाने का संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के खिलाफ ईशनिंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करता हो और सत्य के लिए प्यासा होकर इसकी खोज करता हो; सिर्फ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। स्वेच्छाचारी रूप से निष्कर्ष पर मत पहुँचो; और परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और ढीले-ढाले तो और भी मत रहो। तुम लोगों को जानना चाहिए कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उनके पास विनम्र और परमेश्वर का भय मानने वाला दिल होना चाहिए। जिन्होंने सत्य सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक-भौंह सिकोड़ते हैं, वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जो सत्य को सुन चुके हैं और फिर भी लापरवाही से निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या इसे दोषी ठहराते हैं वे अहंकारी लोग हैं। जो भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को शाप देने या निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसके पास विवेक है और जो सत्य स्वीकार करता है। शायद सत्य का मार्ग सुन लेने और जीवन का वचन पढ़ लेने के बाद तुम्हें यह लगता है कि इन वचनों में से केवल दस हजार में एक वचन तुम्हारी समझ और बाइबल के अनुरूप है और फिर तुम्हें इन्हीं वचनों के उस दस हजारवें हिस्से में खोज जारी रखनी चाहिए। मैं तुम्हें सुझाव भी देता हूँ कि विनम्र बनो, अति-आत्मविश्वासी न बनो और बहुत अभिमानी न बनो। तुम्हारे पास परमेश्वर का भय मानने वाला जो थोड़ा-सा दिल है उसके चलते तुम और अधिक रोशनी प्राप्त करोगे। यदि तुम इन वचनों की सावधानी से जाँच करो और इन पर बार-बार मनन करो, तब तुम समझोगे कि वे सत्य हैं या नहीं, वे जीवन हैं या नहीं। शायद, केवल कुछ वाक्य पढ़कर, कुछ लोग इन वचनों की आँखें मूँदकर यह कहते हुए निंदा करेंगे, “यह पवित्र आत्मा की थोड़ी प्रबुद्धता से अधिक कुछ नहीं है” या “यह एक झूठा मसीह है जो लोगों को गुमराह करने आया है।” जो लोग ऐसी बातें कहते हैं वे बहुत अज्ञानी हैं! तुम परमेश्वर के कार्य और बुद्धि को बहुत कम समझते हो और मैं तुम्हें पुनः शुरू से आरंभ करने की सलाह देता हूँ! तुम लोगों को सिर्फ इस वजह से कि अंत के दिनों में झूठे मसीह प्रकट होंगे, परमेश्वर द्वारा अभिव्यक्त वचनों की आँख मूँदकर निंदा नहीं करनी चाहिए, तुम्हें गुमराह होने के डर से ऐसा व्यक्ति नहीं बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा की ईशनिंदा करता हो। क्या यह बहुत ही पछतावे की बात नहीं होगी? यदि बार-बार जाँच के बाद अब भी तुम्हें लगता है कि ये वचन सत्य नहीं हैं, मार्ग नहीं हैं और परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हैं, तो फिर अंततः तुम दंडित किए जाओगे और आशीष के बिना होगे। यदि तुम ऐसा सत्य, जो इतने सादे और स्पष्ट ढंग से कहा गया है, स्वीकार नहीं कर सकते, तो क्या तुम परमेश्वर के उद्धार के अयोग्य नहीं हो? क्या तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जिसमें परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आने की यह आशीष ही नहीं है? इस बारे में सोचो! उतावले और अविवेकी न बनो और परमेश्वर में विश्वास के साथ खेल की तरह पेश न आओ। अपनी मंज़िल के लिए, अपनी संभावनाओं के वास्ते, अपने जीवन के लिए सोचो और स्वयं को मूर्ख न बनाओ। क्या तुम इन वचनों को स्वीकार कर सकते हो?

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