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151 कोई थाह लगा नहीं सकता परमेश्वर के अधिकार और सामर्थ्य

I

जब परमेश्वर के शब्द बोले जाते हैं, उसका अधिकार कमान लेता है

और जो उसने वचन दिया है सब धीरे धीरे सच हो जाता है।

सारी चीज़ों में बदलाव चारों तरफ़ होने लगता है।

ये हैं चमत्कार बनाने वाले के हाथों के।

जैसे बहारों में, घास हरी हो, फूल खिले,

कोंपलें फूटे, पंछी गाए, भर जाए मैदान लोगों से।

परमेश्वर के अधिकार और सामर्थ्य, बंधे नहीं हैं समय से,

जगह, व्यक्ति और वस्तु से, किन्हीं चीज़ों से।

उसके अधिकार और सामर्थ्य, आदमी की कल्पना के पार हैं।

उनके लिए है मुश्किल थाह लगाना या पूरा समझना।

II

जब परमेश्वर वचन पूरा करता है, सारी चीज़ें स्वर्ग और धरती में

उसके विचारों से नई होतीं, बदलती हैं।

सारी चीज़ें उसके वचन को पूरा करने के लिए कार्य करती हैं।

सारे प्राणी उसके प्रभुत्व के अधीन हैं।

सब अपनी भूमिका निभाते हैं; सब अपना कार्य करते हैं।

ये परमेश्वर के अधिकार की घोषणा करता है।

जैसे बहारों में, घास हरी हो, फूल खिले,

कोंपलें फूटे, पंछी गाए, भर जाए मैदान लोगों से।

परमेश्वर के अधिकार और सामर्थ्य, बंधे नहीं हैं समय से,

जगह, व्यक्ति और वस्तु से, किन्हीं चीज़ों से।

उसके अधिकार और सामर्थ्य, आदमी की कल्पना के पार हैं।

उनके लिए है मुश्किल थाह लगाना या पूरा समझना।

III

अधिकार की अभिव्यक्तियाँ एक आदर्श प्रदर्शन है

उसकी बातों का, जो लोगों और चीज़ों को दिखाई गई।

उसके अधिकार से सब पूरा हुआ,

तुलना से परे सुंदर और निर्दोष है।

जैसे बहारों में, घास हरी हो, फूल खिले,

कोंपलें फूटे, पंछी गाए, भर जाए मैदान लोगों से।

परमेश्वर के अधिकार और सामर्थ्य, बंधे नहीं हैं समय से,

जगह, व्यक्ति और वस्तु से, किन्हीं चीज़ों से।

उसके अधिकार और सामर्थ्य, आदमी की कल्पना के पार हैं।

उनके लिए है मुश्किल थाह लगाना या पूरा समझना।

IV

उसके काम, विचार, शब्द, अधिकार,

सब बनाते हैं चित्र, सुंदर, अतुलनीय।

सभी प्राणियों के लिए, मानवीय भाषा

बता नहीं पाते इसका मूल्य और अभिप्राय।

परमेश्वर के अधिकार और सामर्थ्य, बंधे नहीं हैं समय से,

जगह, व्यक्ति और वस्तु से, किन्हीं चीज़ों से।

उसके अधिकार और सामर्थ्य, आदमी की कल्पना के पार हैं।

उनके लिए है मुश्किल थाह लगाना या पूरा समझना।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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