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परमेश्वर के अधिकार की जगह नहीं ले सकता कोई

I

सृष्टिकर्ता अपने अधिकार द्वारा

देता है जीवन-शक्ति

अचल प्रतीत होने वाली चीज़ों को,

ताकि वे कभी विलुप्त या गुम न हों।

वो देता है प्रकृति वंशवृद्धि की

हर जीव को, ताकि वे कभी विलुप्त न हों।

उनके जीने के सिद्धांत और नियम

पीढ़ी दर पीढ़ी संचारित होते हैं।

ये सब कुछ सृष्टिकर्ता के द्वारा दिया गया है!

ये सब कुछ सृष्टिकर्ता के द्वारा दिया गया है!

कोई भी सृष्टिकर्ता की पहचान का स्थान नहीं ले सकता।

इसलिए किसी भी सृजित प्राणी द्वारा

उसके अधिकार का स्थान नहीं लिया जा सकता,

न ही किसी भी अरचित प्राणी द्वारा

उसके अधिकार को प्राप्त किया जा सकता है।

सृष्टिकर्ता हे सृष्टिकर्ता।

II

सृष्टिकर्ता के अधिकार का प्रयोग

सूक्ष्म और विशाल स्तर तक सीमित नहीं है,

किसी आकार में बंधा नहीं है।

वो कायनात के कार्यों का संचालन करता है।

वो जीवन और मृत्यु पर प्रभुत्व रखता है।

वो हर चीज़ को अपनी सेवा में लाता है।

वो पहाड़, नदी और झीलों पर नियंत्रण रखता है।

वो सब पर शासन करता है और उनकी ज़रूरतें पूरी करता है।

ये सब कुछ सृष्टिकर्ता के द्वारा किया गया है!

ये सब कुछ सृष्टिकर्ता के द्वारा किया गया है!

कोई भी सृष्टिकर्ता की पहचान का स्थान नहीं ले सकता।

इसलिए किसी भी सृजित प्राणी द्वारा

उसके अधिकार का स्थान नहीं लिया जा सकता,

न ही किसी भी अरचित प्राणी द्वारा

उसके अधिकार को प्राप्त किया जा सकता है।

सृष्टिकर्ता है सृष्टिकर्ता।

III

सृष्टिकर्ता के पास है अनोखा अधिकार।

इसकी अभिव्यक्ति हर चीज़ में

सिर्फ़ एक जीवनकाल के लिए नहीं है।

ये अनंत है, न रुकेगा कभी न ख़त्म होगा।

ये कभी लड़खड़ा और टूट नहीं सकता है।

न कोई मानव, न कोई चीज़ इसे बदल सकती है,

न ही कोई इसमें जोड़ सकता है,

और न कोई इससे घटा सकता है।

ये सब कुछ सृष्टिकर्ता के द्वारा दिखाया गया है!

ये सब कुछ सृष्टिकर्ता के द्वारा दिखाया गया है!

कोई भी सृष्टिकर्ता की पहचान का स्थान नहीं ले सकता।

इसलिए किसी भी सृजित प्राणी द्वारा

उसके अधिकार का स्थान नहीं लिया जा सकता,

न ही किसी भी अरचित प्राणी द्वारा

उसके अधिकार को प्राप्त किया जा सकता है।

सृष्टिकर्ता है सृष्टिकर्ता।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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