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परमेश्वर की विनम्रता बहुत प्यारी है

I

ईश्वर नम्र कर खुद को, करता है कार्य

अशुद्ध और भ्रष्ट मानव पर, करने को पूर्ण इन्हें।

ईश्वर है बनता मानव।

चरवाही और सेवा है करता,

वो आता है बड़े लाल अजगर के दिल में

भ्रष्टों को जीतने और उन्हें बचाने को,

उनको बदलने के कार्य और उन्हें नया करने के लिए।

स्वयं को दीन कर वो मानव है बनता

और इससे जुड़े सभी कष्टों को है सहता।

ये उस पवित्र आत्मा का अत्यधिक निरादर है।

ईश्वर, महान और ऊंचा; मानव, तुच्छ और नीच है।

फिर भी ईश्वर बात करता, चीज़ें देता और उनके बीच रहता है।

वो कितना नम्र है, कितना प्यारा है।

II

ईश्वर जीता है देह में सामान्य जीवन

और सामान्य उसकी ज़रूरतें

दर्शाता है कि वो विनम्र है।

उसका आत्मा उच्च और महान, आता है मानव के रूप में

अपने आत्मा के कार्य को करने।

तुम सब उसके कार्य के अयोग्य हो,

हर उस कष्ट के जिनको उसने सहा।

यह तुम्हारे गुणों में दिखता है, अंतर्दृष्टि और समझ में।

तुम सब उसके कार्य के अयोग्य हो,

हर उस कष्ट के जिनको उसने सहा।

ये दिखता है तुम्हारे मानवता में और तुम्हारे जीवन में।

ईश्वर, महान और ऊंचा; मानव, तुच्छ और नीच है।

फिर भी ईश्वर बात करता, चीज़ें देता और उनके बीच रहता है।

वो कितना नम्र है, कितना प्यारा है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं