देहधारी मनुष्य के पुत्र को कैसे पहचानें

02 अप्रैल, 2026

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य में मुख्य रूप से वचन बोलना और सत्य व्यक्त करना शामिल हैं। धार्मिक दुनिया के बहुत-से लोग देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सभी वचन सत्य और परमेश्वर की वाणी हैं और वे पूरी तरह से आश्वस्त हैं, यह मानते हुए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया प्रभु यीशु है। लेकिन चूँकि धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर और सीसीपी सरकार अफवाहें गढ़ते हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की यह कहकर निंदा करते हैं कि वह बस एक साधारण व्यक्ति है और वह परमेश्वर नहीं हो सकता, इसलिए जिन लोगों में भेद पहचानने की क्षमता नहीं होती और वे गुमराह हो जाते हैं। वे यह निश्चित करने की हिम्मत नहीं करते कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही अंत के दिनों का मसीह है, देहधारी मनुष्य का पुत्र है। तो आखिर हम देहधारी मनुष्य के पुत्र को कैसे पहचान सकते हैं? सबसे पहले, हम सभी मानते हैं कि प्रभु यीशु ही प्रभु और मसीह है। क्या प्रभु यीशु एक साधारण व्यक्ति नहीं था? बाहर से प्रभु यीशु सच में एक साधारण व्यक्ति था। जब प्रभु यीशु प्रकट हुआ और उसने कार्य किया, तो यहूदी धर्म के सभी मुख्य याजकों, शास्त्रियों और फरीसियों ने कहा कि प्रभु यीशु एक नासरी है, एक बढ़ई का बेटा है। इसलिए उन्होंने यह नहीं माना कि प्रभु यीशु ही प्रभु और मसीह है और यहाँ तक कि उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ा दिया। आज सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट हुआ है और कार्य कर रहा है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर चाहे कितने भी सत्य क्यों न व्यक्त करे, धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर अभी भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आलोचना और निंदा करते हैं, यह कहते हुए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक साधारण व्यक्ति है और वह परमेश्वर नहीं हो सकता। वे यहूदी धर्म के मुख्य याजकों, शास्त्रियों और फरीसियों जैसी ही गलती कर रहे हैं। दरअसल आज सर्वशक्तिमान परमेश्वर में हमारा विश्वास सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए सभी सत्यों पर आधारित है और यह बाइबल में प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों पर भी आधारित है। प्रभु यीशु ने बार-बार भविष्यवाणी की थी कि उसकी वापसी “मनुष्य के पुत्र का आना” और “मनुष्य के पुत्र का आगमन” होगी। उदाहरण के लिए, उसने कहा था : “जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा(मत्ती 24:27)। “जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा(मत्ती 24:37)। तो फिर “मनुष्य के पुत्र का आना” किसे दर्शाता है? यह एक साधारण व्यक्ति के रूप में परमेश्वर के देहधारण करने को दर्शाता है, बिल्कुल प्रभु यीशु की तरह। परमेश्वर ने कभी नहीं कहा कि जब वह वापस लौटेगा, तो वह लोगों के सामने किसी असाधारण शख्सियत या महान व्यक्ति की छवि में प्रकट होगा। तो फिर बाहर से साधारण दिखने वाले इस मनुष्य के पुत्र और अन्य लोगों के बीच सबसे बड़ा अंतर क्या है? वह यह है कि वह सत्य व्यक्त कर सकता है। भले ही मनुष्य का पुत्र बाहर से साधारण है और उसमें किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह सामान्य मानवता है, उसके भीतर दिव्यता है और वह सत्य व्यक्त कर सकता है। लेकिन इंसानों के पास केवल उनकी मानवता है—और कुछ नहीं। मानवजाति सत्य व्यक्त नहीं कर सकती और कोई भी असाधारण शख्सियत या महान व्यक्ति सत्य व्यक्त नहीं कर सकता। अंत के दिनों में देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने इतने सारे सत्य व्यक्त किए हैं, जो उस समय प्रभु यीशु द्वारा व्यक्त किए गए सत्यों से सौ गुना—हजार गुना—ज्यादा हैं। परमेश्वर की वाणी सुनकर दुनिया भर के देशों में परमेश्वर के चुने हुए लोगों ने पहचान लिया है कि यह सत्य है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही परमेश्वर का प्रकटन है और वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए उमड़ पड़े हैं। वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना का अनुभव करते हैं, उनके भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध हो जाते हैं और परमेश्वर द्वारा उन्हें विजेता बना दिया जाता है। यह साधारण मनुष्य का पुत्र इतने सारे सत्य व्यक्त कर सकता है, इतना महान कार्य कर सकता है और इतने सारे लोगों को जीत सकता है और बचा सकता है—यह कुछ ऐसा है जो कोई भी इंसान हासिल नहीं कर सकता। बाहर से सर्वशक्तिमान परमेश्वर वाकई एक साधारण व्यक्ति है, लेकिन एक बार जब तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए सभी सत्य पढ़ लोगे, तो तुम यह नहीं कहोगे कि वह एक साधारण व्यक्ति है। बल्कि तुम कहोगे, “बिल्कुल प्रभु यीशु की तरह, उसमें मानवता और दिव्यता दोनों हैं। वह निश्चित रूप से स्वयं देहधारी परमेश्वर है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने इतने सारे सत्य व्यक्त किए हैं—यह किसी भी संकेत या चमत्कार से कहीं बड़ा है। अगर पवित्रात्मा उसमें निवास नहीं करता, तो उसके लिए इतने सारे सत्य व्यक्त करना बिल्कुल असंभव होता। इसलिए हम धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डरों की इस बात पर विश्वास नहीं कर सकते कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक साधारण व्यक्ति है’!” अगर यह मनुष्य का पुत्र सत्य व्यक्त नहीं कर पाता, तो तुम्हारा उसे एक साधारण व्यक्ति कहना गलत नहीं होता। लेकिन वह सभी सत्य व्यक्त कर सकता है और वह न्याय के कार्य का एक चरण कर रहा है, इसलिए वह देहधारी परमेश्वर है। अगर तुम अभी भी यह कहने की हिम्मत करते हो कि वह बस एक साधारण व्यक्ति है, तो तुम परमेश्वर की ईशनिंदा कर रहे हो। यह बिल्कुल वैसा ही है जब दो हजार साल पहले प्रभु यीशु प्रकट हुआ था और उसने देह धारण करके कार्य किया था। इससे पहले कि वह आधिकारिक रूप से अपनी सेवकाई करना शुरू करता, अगर तुमने उसे एक साधारण व्यक्ति कहा होता, तो यह काफी हद तक समझने लायक होता, क्योंकि लोग परमेश्वर को केवल उसके बाहरी रूप-रंग को देखकर नहीं पहचान सकते। लेकिन प्रभु यीशु द्वारा कई सत्य व्यक्त करने और पूरी मानवजाति को छुटकारा दिलाने के लिए क्रूस पर चढ़ाए जाने के बाद, दुनिया भर में दो अरब लोग उसे उद्धारकर्ता यीशु कहते हैं, उसका अनुसरण करते हैं और उस पर विश्वास करते हैं। क्या तुम अभी भी उसे एक साधारण व्यक्ति कहने की हिम्मत करोगे? अगर तुम अभी भी कहते हो कि वह एक साधारण व्यक्ति है, तो तुम ऐसे व्यक्ति होगे जो परमेश्वर की ईशनिंदा करता है। तो फिर वास्तव में यह भेद पहचानने का क्या आधार है कि कोई देहधारी परमेश्वर है या एक साधारण व्यक्ति? यह आधार उसका सार है, यानी उसके वचन और उसका कार्य। वह इतने सारे सत्य व्यक्त कर सकता है, यह तथ्य ही साबित करता है कि उसके पास दिव्य सार है और कम से कम पवित्रात्मा उसमें निवास करता है। भले ही तुम बाहर से उसके दिव्य सार को नहीं देख सकते, फिर भी यह तथ्य कि वह इतने सारे सत्य व्यक्त कर सकता है, सबसे अच्छा सबूत है। इसलिए, मुख्य रूप से इस तथ्य को देखकर कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने इतने सारे सत्य व्यक्त किए हैं और वह अंत के दिनों में न्याय का कार्य कर रहा है, तुम पूरी निश्चितता के साथ तय कर सकते हो कि वह एक साधारण व्यक्ति है या देहधारी परमेश्वर। ठीक जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “जो देहधारी परमेश्वर है उसके पास परमेश्वर का सार है और जो देहधारी परमेश्वर है उसके पास परमेश्वर की अभिव्यक्ति है। चूँकि परमेश्वर देहधारी बना है, इसलिए वह उस कार्य को अपने साथ लाता है जो वह करना चाहता है और चूँकि वह देहधारी परमेश्वर है, इसलिए वह परमेश्वर का स्वरूप व्यक्त करता है और वह मनुष्य के लिए सत्य ला सकता है, उसे जीवन प्रदान कर सकता है और उसे मार्ग दिखा सकता है। जिस देह में परमेश्वर का सार नहीं है, वह निश्चित रूप से देहधारी परमेश्वर नहीं है; इसमें कोई संदेह नहीं। अगर मनुष्य यह जाँच करना चाहता है कि क्या यह परमेश्वर की देहधारी देह है, तो उसे इसका निर्धारण उसके द्वारा व्यक्त स्वभाव और उसके द्वारा बोले गए वचनों से करना चाहिए। अर्थात, यह निर्धारित करने के लिए कि यह परमेश्वर की देहधारी देह है या नहीं और यह सच्चा मार्ग है या नहीं, व्यक्ति को उसके सार के आधार पर यह अंतर करना चाहिए। अतः यह देहधारी परमेश्वर की देह है कि नहीं, यह निर्धारित करने की कुंजी उसके बाहरी स्वरूप के बजाय उसके सार (यानी उसके कार्य, उसके कथनों, उसके स्वभाव और बहुत से अन्य पहलुओं) में निहित होती है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी स्वरूप की ही जाँच करता है, और परिणामस्वरूप उसके सार की अनदेखी करता है, तो इससे उसके मूर्ख और अज्ञानी होने का पता चलता है(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, प्रस्तावना)। आज चाहे उन्होंने कितने भी सालों तक परमेश्वर में विश्वास क्यों न किया हो, जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करते हैं और सत्य का अनुसरण करते हैं, वे बहुत-से सत्य समझ चुके हैं, वे खुद को जान सकते हैं और सत्य का अभ्यास कर सकते हैं और उन्होंने अपने भ्रष्ट स्वभावों को उतार फेंकने की कुछ अनुभवजन्य गवाहियाँ पेश की हैं। वे सभी भाग्यशाली महसूस करते हैं कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करते हैं, इतने सारे सत्य समझ चुके हैं, जीवन के सही मार्ग पर चल पड़े हैं और उन्होंने परमेश्वर का उद्धार पा लिया है। यह परमेश्वर द्वारा उन्हें दिया गया आशीष है! जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार नहीं करते, वे केवल आपदा में फँसेंगे, रोएँगे और दाँत पीसेंगे। सत्य व्यक्त करने वाले मनुष्य के पुत्र को स्वीकार न करने वाले और प्रभु का स्वागत करने में विफल रहने वाले लोगों का यही परिणाम है।

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