स्वर्ग, पृथ्वी और सभी चीज़ों को बनाने वाला सच्चा परमेश्वर एक है या तीन

18 मार्च, 2018

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्‍वर है, यहोवा एक ही है" (व्यवस्थाविवरण 6:4)।

"यीशु ने उससे कहा, 'मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते; और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।' फिलिप्पुस ने उससे कहा, 'हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे, यही हमारे लिये बहुत है।' यीशु ने उससे कहा, 'हे फिलिप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? क्या तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। मेरा विश्‍वास करो कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरा विश्‍वास करो'" (यूहन्ना 14:6-11)।

"मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना 10:30)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर ही एकमात्र है जो सभी चीज़ों पर शासन करता है, और सभी चीज़ों को चलाता है। जो कुछ है वह उसी ने रचा है, जो कुछ है वही उसे चलाता है और जो कुछ है उस सब पर वही शासन करता है और जो कुछ है उस सब का वही भरण-पोषण करता है। यह परमेश्वर की हैसियत और परमेश्वर की पहचान है। सभी चीजों के लिए और जो कुछ भी है उस सब के लिए, परमेश्वर की असली पहचान, सृजनकर्ता, और सभी चीज़ों के शासक की है। परमेश्वर उसी प्रकार की पहचान धारण करता है और वह सभी चीज़ों में अद्वितीय है। परमेश्वर की कोई भी रचना—चाहे वह मनुष्य के बीच हो या आध्यात्मिक दुनिया में हो—परमेश्वर की पहचान और हैसियत का वेष धारण करने या उसका स्थान लेने के लिए किसी भी साधन या बहाने का उपयोग नहीं कर सकती है, क्योंकि सभी चीज़ों में एकमात्र वही है जो इस पहचान, सामर्थ्य, अधिकार, और सभी बातों पर शासन करने की क्षमता से सम्पन्न है: हमारा अद्वितीय परमेश्वर स्वयं। वह सभी चीज़ों के बीच रहता और चलता है; वह सभी चीज़ों से ऊपर, सर्वोच्च स्थान तक उठ सकता है; वह मनुष्य बनकर, जो मांस और लहू के हैं उनमें से एक बन कर, लोगों के साथ आमने-सामने होकर और उनके सुख—दुःख बाँट कर, अपने आप को विनम्र बना सकता है; साथ ही, जो कुछ भी है वह सब को नियंत्रित करता है, और जो कुछ भी है उस का भाग्य और किस दिशा में इसे जाना है यह तय करता है, इसके अलावा, वह संपूर्ण मनुष्यजाति के भाग्य, और मनुष्यजाति की दिशा का पथप्रदर्शन करता है। इस तरह के परमेश्वर की सभी जीवित प्राणियों के द्वारा आराधना की जानी चाहिए, उसका आज्ञापालन किया जाना चाहिए और उसे जानना चाहिए। और इसलिए, इस बात की परवाह किए बिना कि तुम मनुष्यजाति में से किस समूह और किस प्रकार सम्बन्धित हो, परमेश्वर में विश्वास करना, परमेश्वर का अनुसरण करना, परमेश्वर का आदर करना, परमेश्वर के शासन को स्वीकार करना, और अपने भाग्य के लिए परमेश्वर की व्यवस्थाओं को स्वीकार करना ही किसी भी व्यक्ति के लिए, किसी जीवित प्राणी के लिए एकमात्र विकल्प और आवश्यक विकल्प है। परमेश्वर की अद्वितीयता में, लोग देखते हैं कि उसका अधिकार, उसका धार्मिक स्वभाव, उसका सार, और वे साधन जिनके द्वारा वह सभी चीज़ों का भरण-पोषण करता है, सभी अद्वितीय हैं; उसकी अद्वितीयता, स्वयं परमेश्वर की असली पहचान को निर्धारित करती है, और यह उसकी हैसियत को निर्धारित करती है। और इसलिए, सभी प्राणियों के बीच, यदि आध्यात्मिक दुनिया में या मनुष्यों के बीच कोई जीवित प्राणी परमेश्वर की जगह खड़ा होने की इच्छा करता है, तो यह असंभव होगा, जैसे कि परमेश्वर का रूप धरने का प्रयास कर रहा हो। यह तथ्य है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X' से उद्धृत

केवल एक परमेश्वर है, इस परमेश्वर में केवल एक ही व्यक्ति है, और परमेश्वर का केवल एक आत्मा है, वैसा ही जैसा कि बाइबल में लिखा गया है कि "केवल एक पवित्र आत्मा और केवल एक ही परमेश्वर है"। जिस पिता और पुत्र के बारे में तुम बोलते हो वे चाहे अस्तित्व में हों, फिर भी एक ही परमेश्वर है, और पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का सार जिसे तुम सब मानते हो, वह पवित्र आत्मा का सार है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर एक आत्मा है, लेकिन वह देहधारण में और मनुष्यों के बीच रहने के साथ-साथ सभी चीजों से ऊँचा होने में सक्षम है। उसका आत्मा समस्त-समावेशी और सर्वव्यापी है। वह एक ही समय पर देह में हो सकता है और पूरे विश्व में और विश्व के ऊपर हो सकता है। चूंकि सभी लोग कहते हैं कि परमेश्वर एकमात्र सच्चा परमेश्वर है, फिर एक ही परमेश्वर है, जो किसी की इच्छा पर विभाजित नहीं होता! परमेश्वर केवल एक आत्मा है, और केवल एक ही व्यक्ति है; और वह परमेश्वर का आत्मा है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'क्या त्रित्व का अस्तित्व है?' से उद्धृत

यह अधिकांश लोगों को उत्पत्ति से परमेश्वर के वचनों को याद दिला सकता है: "हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ।" यह देखते हुए कि परमेश्वर कहता है, "हम" मनुष्य को "अपनी" छवि में बनाएँ, तो "हम" इंगित करता है दो या अधिक; चूंकि उसने "हम" कहा, फिर सिर्फ एक ही परमेश्वर नहीं है। इस तरह, मनुष्य ने अलग व्यक्तियों की कल्पना पर विचार करना शुरू कर दिया, और इन वचनों से पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का विचार उभरा। तो फिर पिता कैसा है? पुत्र कैसा है? और पवित्र आत्मा कैसा है? क्या संभवत: यह हो सकता है कि आज की मानवजाति एक ऐसी छवि में बनाई गई थी, जो तीनों से मिलकर बनती है? तो मनुष्य की छवि क्या पिता की तरह है, या पुत्र की तरह या पवित्र आत्मा की तरह है? मनुष्य परमेश्वर के किस जन की छवि है? मनुष्य का यह विचार बिल्कुल ग़लत और अतर्कसंगत है! यह केवल एक परमेश्वर को कई परमेश्वरों में विभाजित कर सकता है। जिस समय मूसा ने उत्पत्ति ग्रन्थ लिखा था, उस समय दुनिया के सृजन के बाद मानव जाति का सृजन हो चुका था। बिल्कुल शुरुआत में, जब दुनिया शुरू हुई, तो मूसा मौजूद नहीं था। और मूसा ने बहुत बाद में बाइबल लिखी, तो वह यह कैसे जान सकता था कि स्वर्ग में परमेश्वर ने क्या बात की? उसे ज़रा भी भान नहीं था कि परमेश्वर ने कैसे दुनिया बनायी। बाइबिल के पुराने नियम में, पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का उल्लेख नहीं है, केवल एक ही सच्चे परमेश्वर यहोवा का है, जो इस्राएल में अपने काम को पूरा करता है। उसे जैसे जैसे युग बदलता है उसके अनुसार अलग-अलग नामों से बुलाया जाता है, लेकिन यह साबित नहीं कर सकता कि प्रत्येक नाम एक अलग व्यक्ति को दर्शाता है। यदि ऐसा होता तो, क्या परमेश्वर में असंख्य व्यक्ति नहीं होते? पुराने नियम में जो लिखा है, वह यहोवा का काम है, व्यवस्था के युग की शुरुआत के लिए स्वयं परमेश्वर के कार्य का चरण है। यह परमेश्वर का काम था, जहां जैसा उसने कहा, वह हुआ, और जैसा उसने आज्ञा दी, वैसा खड़ा हुआ। यहोवा ने कभी नहीं कहा कि वह पिता है जो काम करने के लिए आया है, या उसने कभी पुत्र के मानव जाति के उद्धार के लिए आने कि भविष्यवाणी नहीं की। जब यीशु के समय की बात आई, तो केवल यह कहा गया कि परमेश्वर सभी मनुष्यों को छुड़ाने के लिए देह बन गया, न कि यह कि पुत्र आया है। चूंकि युग एक जैसे नहीं होते और जो काम परमेश्वर खुद करता है, वह भी अलग होता है, उसे अपने काम को अलग राज्यों में पूरा करना होता है। इस तरह, वह पहचान भी अलग होती है जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है। मनुष्य का मानना है कि यहोवा यीशु का पिता है, लेकिन यह वास्तव में यीशु ने स्वीकार नहीं किया था, जिसने कहा: "हम पिता और पुत्र के रूप में कभी भी अलग नहीं थे; मैं और स्वर्ग में पिता एक हैं। पिता मुझ में है और मैं पिता में हूं; जब मनुष्य पुत्र को देखता है, तो वह स्वर्गीय पिता को देखता है।" यह सब कहे जाने के बाद, पिता हो या पुत्र हो, वे एक आत्मा हैं, अलग-अलग व्यक्तियों में विभाजित नहीं हैं। एक बार जब मनुष्य समझाने की कोशिश करता है, तो अलग-अलग व्यक्तियों के विचार के साथ मामला जटिल हो जाता है, साथ ही पिता, पुत्र और आत्मा के बीच का संबंध भी। जब मनुष्य अलग-अलग व्यक्तियों के बारे में बोलता है, तो क्या यह परमेश्वर को मूर्तरूप नहीं देता? मनुष्य व्यक्तियों को पहले, दूसरे और तीसरे के रूप में स्थान भी देता है; ये सभी बस मनुष्य की अवधारणा हैं, संदर्भ के योग्य नहीं हैं, और बिल्कुल अवास्तविक है! यदि तुम ने उससे पूछा: "कितने परमेश्वर हैं?" वह कहेगा कि परमेश्वर पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का त्रित्व है: एक सच्चा परमेश्वर। यदि तुम ने फिर से पूछा: "पिता कौन है?" वह कहेगा: "पिता स्वर्ग में परमेश्वर का आत्मा है; वह सब का प्रभारी है, और स्वर्ग का स्वामी है।" "तो क्या आत्मा यहोवा है?" वह कहेगा: "हाँ!" यदि तुम ने फिर उससे पूछा, "पुत्र कौन है?" तो वह कहेगा कि निश्चित रूप से यीशु पुत्र है। "तो यीशु की कहानी क्या है? वह कहाँ से आया था?" वह कहेगा: "यीशु का जन्म पवित्र आत्मा के द्वारा मरियम के गर्भधारण करने से हुआ था।" "तो क्या उसका सार भी आत्मा नहीं है? क्या उसका काम भी पवित्र आत्मा का प्रतिनिधि नहीं है? यहोवा आत्मा है, और उसी तरह यीशु का सार भी आत्मा है। अब आखिरी दिनों में, यह कहना अनावश्यक है कि अभी भी काम आत्मा कर रहा है; वे अलग-अलग व्यक्ति कैसे हो सकते हैं? क्या यह सिर्फ परमेश्वर का आत्मा नहीं जो आत्मा के काम को अलग-अलग परिप्रेक्ष्यों से कर रहा है?" ऐसे तो, व्यक्तियों के बीच कोई अंतर नहीं है। यीशु पवित्र आत्मा के द्वारा गर्भ में आया था, और निस्संदेह, उसका काम बिल्कुल पवित्र आत्मा का काम था। यहोवा द्वारा किए गए काम के पहले चरण में, वह न तो देह बना और न ही मनुष्य के सामने प्रकट हुआ। तो मनुष्य ने कभी उसके प्रकटन को नहीं देखा। कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कितना महान और कितना ऊंचा था, वह फिर भी आत्मा था, स्वयं परमेश्वर जिसने पहले मनुष्य को बनाया था। अर्थात, वह परमेश्वर का आत्मा था। जब वह बादलों में से मनुष्य से बात करता था, वह केवल एक आत्मा था। किसी ने भी उसके प्रकटन को नहीं देखा; केवल अनुग्रह के युग में जब परमेश्वर का आत्मा शरीर में आया और यहूदिया में देहधारी हुआ, तो मनुष्य ने पहली बार एक यहूदी के रूप में देहधारण की छवि को देखा। यहोवा की भावना को महसूस नहीं किया जा सका। हालांकि, वह पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आया था, अर्थात स्वयं यहोवा के आत्मा से गर्भ में आया था, और यीशु का जन्म तब भी परमेश्वर के आत्मा के मूर्तरूप में हुआ था। मनुष्य ने जो सबसे पहले देखा वह यह था कि पवित्र आत्मा यीशु पर एक कबूतर की तरह उतर रहा है; यह यीशु के लिए विशेष आत्मा नहीं था, बल्कि पवित्र आत्मा था। तो क्या यीशु का आत्मा पवित्र आत्मा से अलग हो सकता है? अगर यीशु यीशु है, पुत्र है, और पवित्र आत्मा पवित्र आत्मा है, तो वे एक कैसे हो सकते हैं? यदि ऐसा है तो काम नहीं किया जा सकता है। यीशु के भीतर का आत्मा, स्वर्ग में आत्मा, और यहोवा का आत्मा सब एक हैं। इसे पवित्र आत्मा, परमेश्वर का आत्मा, सात गुना सशक्त आत्मा और सर्व सयुंक्त आत्मा कहा जा सकता है। परमेश्वर का आत्मा बहुत से काम कर सकता है। वह दुनिया को बनाने और पृथ्वी को बाढ़ द्वारा नष्ट करने में सक्षम है; वह सारी मानव जाति को मुक्ति दिला सकता है, और इसके अलावा, सारी मानव जाति को जीत और नष्ट कर सकता है। ये सारे काम स्वयं परमेश्वर द्वारा किये गए हैं और उसके स्थान पर परमेश्वर के किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता था। उसके आत्मा को यहोवा और यीशु के नाम से, साथ ही सर्वशक्तिमान के नाम से भी बुलाया जा सकता है। वह प्रभु और मसीह है। वह मनुष्य का पुत्र भी बन सकता है। वह स्वर्ग में भी है और पृथ्वी पर भी है; वह ब्रह्मांडों के ऊपर और भीड़ के बीच में है। वह स्वर्ग और पृथ्वी का एकमात्र स्वामी है! सृष्टि के समय से अब तक, यह काम खुद परमेश्वर के आत्मा द्वारा किया गया है। यह कार्य स्वर्ग में हो या देह में, सब कुछ उसकी आत्मा से किया जाता है। सभी प्राणी, चाहे स्वर्ग में हों या पृथ्वी पर, उसकी सर्वशक्तिमान हथेली में हैं; यह सब स्वयं परमेश्वर का काम है और उसके स्थान पर किसी अन्य के द्वारा नहीं किया जा सकता है। स्वर्ग में, वह आत्मा है, लेकिन खुद परमेश्वर भी है; मनुष्यों के बीच में, वह शरीर है लेकिन वह स्वयं परमेश्वर बना रहता है। यद्यपि उसे हज़ारों हज़ार नामों से बुलाया जाता है, तो भी वह स्वयं है, और सारे काम उसके आत्मा की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति हैं। उसके क्रूसीकरण के माध्यम से सारी मानव जाति का छुटकारा उसके आत्मा का प्रत्यक्ष काम था, और वैसे ही अंत के दिनों के दौरान सभी देशों और सभी भू भागों के लिए उसकी घोषणा भी। हर समय, परमेश्वर को केवल सर्वशक्तिमान और एक सच्चा परमेश्वर, सभी समावेशी स्वयं परमेश्वर कहा जा सकता है। अलग-अलग व्यक्ति अस्तित्व में नहीं हैं, पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का यह विचार तो बिल्कुल नहीं है! स्वर्ग और पृथ्वी में केवल एक ही परमेश्वर है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'क्या त्रित्व का अस्तित्व है?' से उद्धृत

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