प्रभु की वापसी के बारे में किसकी सुनें?

28 अक्टूबर, 2020

प्रभु के आगमन का स्वागत करने की कुंजी क्या है? प्रभु यीशु ने कहा था, "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं" (यूहन्ना 10:27)। "आधी रात को धूम मची : 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो'" (मत्ती 25:6)। प्रकाशित-वाक्य की भविष्यवाणी है : "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। "जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:7)। इन भविष्यवाणियों से पता चलता है कि परमेश्वर की वाणी सुनना प्रभु का स्वागत करने की कुंजी है। परमेश्वर की वाणी सुनना ही एकमात्र रास्ता है। लेकिन बहुत से विश्वासियों का मानना है कि पादरी समूह बाइबल को जानते हैं और हर समय उसकी व्याख्या करते हैं, इसलिए इतनी महत्वपूर्ण बात उन्हें ज़रूर पता होनी चाहिए। मगर जब वे यह गवाही सुनते हैं कि प्रभु लौट आए हैं, तो वे इस पर गौर नहीं करते हैं, जब वे देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सत्य हैं, तब भी वे उनकी उपेक्षा करते हैं। इस तरह के लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, या पादरी समूह में? प्रभु के आगमन के संबंध में हमें किसकी बात सुननी चाहिए? हमें परमेश्वर की वाणी सुननी चाहिए या अपने पादरियों की बातें? मैंने अपनी आस्था में इसे पहले कभी नहीं समझा, बल्कि आँख बंद करके अपने पादरी की बात सुनी और प्रभु की वापसी का स्वागत करने का मौका लगभग गंवा ही दिया।

जून 2017 में, मैं जर्मनी की बहन लियू और भाई डुआन से फेसबुक पर मिली। उनसे बातचीत करके, मैंने देखा कि वे विनम्र और भरोसेमंद लोग हैं, उनके पास बाइबल की शुद्ध समझ और प्रबुद्ध करने वाली सहभागिता है। इससे मुझे बहुत फायदा हुआ। हमने कुछ सभाएं की। मैंने बहुत सारे सत्य जान लिए जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पायी थी, जैसे कि सच्ची आस्था और सच्चा पश्चाताप क्या है, परमेश्वर का अनुसरण और उसके प्रति समर्पण क्या है, लोगों का अनुसरण और उनके प्रति समर्पण क्या है, फरीसियों के प्रभु यीशु का विरोध करने का सार और मूल क्या है, परमेश्वर की वाणी सुनकर प्रभु का स्वागत कैसे करें, और ऐसी कई सारी बातें। लगा कि मुझे इससे बहुत सारा पोषण मिला। मेरा हृदय रोशन हुआ। मैंने इन सभाओं का आनंद लिया। एक सभा में, भाई डुआन ने बाइबल के कुछ पद पढ़े : "क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ" (लूका 17:24-25)। उन्होंने कहा कि अंत के दिनों में, प्रभु धरती पर आकर कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में फिर से देहधारण करता है, और यह भविष्यवाणी कुछ समय पहले पूरी हो चुकी थी। उन्होंने कहा, "प्रभु देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में लौट आया है, वह सत्य व्यक्त कर रहा है और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय का कार्य कर रहा है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने वे सारे सत्य व्यक्त किए हैं जो मनुष्य को शुद्ध करके बचाते हैं। यह पूरब में चमकने वाले महान प्रकाश की तरह है, और यही चमकती पूर्वी 'बिजली' है।" यह सुनकर मैं थोड़ी चौंक गई। मैंने सोचा, "प्रभु यीशु पहले ही लौट आया है?" फिर मुझे पादरी समूह की कही हुई बात याद आई, केवल चमकती पूर्वी बिजली ही इस बात की गवाह है कि परमेश्वर देह में लौट आया है, हमें इस पर विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही मसीह है। यह सुनकर मैं बहुत बेचैन हो उठी। मैं भाई डुआन की सहभागिता पर ध्यान नहीं दे सकी। मैंने सोचा, "पादरी और एल्डर प्रभु की सेवा करते हैं और बाइबल को अच्छी तरह से जानते हैं। इतनी अहम चीज के बारे में उन्हें सब कुछ पता होना चाहिए, इसलिए मैं पहले उनसे पूछूंगी।"

उस रविवार कलीसिया जाकर मैंने पादरी से पूछा, उन्होंने कहा, "सर्वशक्तिमान परमेश्वर के विश्वासी जो प्रचार करते हैं उसमें तथ्य है, लेकिन वे गवाही देते हैं कि प्रभु सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में देह में लौट आया है। यह संभव नहीं है। केवल प्रभु यीशु ही देहधारी परमेश्वर है, वे एक मनुष्य में विश्वास करते हैं। उनकी कलीसिया को चीनी कम्युनिस्ट सरकार द्वारा सताया जा रहा है, चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करना प्रभु यीशु के साथ विश्वासघात होगा।" यह सुनकर डर के मारे मेरे हाथ-पैर ढीले पड़ गए। मैंने सोचा, अगर यह बात सही है तो बहन लियू और भाई डुआन प्रभु से जरूर भटक चुके हैं। मेरे मन में उनके बारे में संदेह पैदा होने लगा और मैं चौकन्नी हो गई। मैं अब उनसे मिलना नहीं चाहती थी। लेकिन जब मैंने उनकी गवाही के बारे में सोचा कि प्रभु यीशु लौट आए हैं तो मैं दुविधा में पड़ गई। अगर यह सच है और मैं इस पर गौर नहीं करती, तो क्या प्रभु मुझे बाहर नहीं निकाल देगा? लेकिन फिर, अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही देहधारी परमेश्वर है, तो पादरी ने इस बात को क्यों नहीं मान लिया, उल्टा कहने लगे कि वे एक मनुष्य में विश्वास करते हैं? मुझे लगा कि पादरी बाइबल को जानते हैं और चीज़ों को मुझसे ज्यादा समझते हैं, इसलिए मुझे भटकने से बचने के लिए उन लोगों से दूर रहना चाहिए। लेकिन घर जाने के बाद मुझे बड़ी बेचैनी और परेशानी महसूस हुई। मैं दुखी थी और उदास महसूस कर रही थी। मैंने प्रभु से प्रार्थना की : "हे प्रभु, मैंने आज पादरी की बात सुनी, अब मुझे बहन लियू और भाई डुआन पर संदेह होने लगा है। अब चमकती पूर्वी बिजली के बारे में और जानने से मुझे डर लगता है। प्रभु, मैं तुम्हारी वापसी के लिए तरस रही हूं, लेकिन मैं गलत रास्ता अपनाने और तुम्हें धोखा देने से डरती हूं। मैं सच में नहीं जानती मुझे क्या करना चाहिए। मुझे प्रबुद्ध कर और मेरा मार्गदर्शन कर, ताकि मैं सही-गलत का भेद जान सकूं।"

प्रार्थना करने के बाद मुझे धीरे-धीरे शांति का एहसास हुआ, फिर बहन लियू की सहभागिता में कही हुई एक बात मुझे याद आई : हमारी आस्था में परमेश्वर सर्वश्रेष्ठ है और सब कुछ, ख़ासकर सच्चे मार्ग की जांच करने जैसा इतना महत्वपूर्ण विषय परमेश्वर के वचनों पर आधारित होना चाहिए। अगर हम हर बात में दूसरे लोगों की बात सुनेंगे, उन लोगों पर विश्वास करके उनका अनुसरण करेंगे, तो हम प्रभु के मार्ग से भटक जाएंगे। मैंने आत्ममंथन करना शुरू कर दिया। जब मैंने सुना कि प्रभु लौट आया है, तो मैंने पहले प्रभु की इच्छा जानने की कोशिश नहीं की या यह नहीं देखा कि प्रभु के वचन इसके बारे में क्या कहते हैं या फिर यह परमेश्वर से आया है या नहीं। इसके बजाय मैंने पादरी की पूजा की और उसकी बात सुनी। यह प्रभु की इच्छा नहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्यों के साथ हर सभा में उनकी सहभागिता प्रबुद्ध करने वाली और बाइबिल के अनुरूप थी, परमेश्वर की इच्छा के बारे में उनकी व्याख्या स्पष्ट थी। कुछ ही सभाओं से मैंने कई सारे सत्य समझ लिए, जिन्हें मैं पहले कभी नहीं जानती थी, मुझे लगा कि मैं परमेश्वर के और करीब आ गई हूं, मेरी आस्था बढ़ गई है। यह साफ़ तौर पर परमेश्वर से आया हुआ पवित्र आत्मा का कार्य है। लेकिन मैंने यह नहीं देखा कि कलीसिया में पवित्र आत्मा का कार्य या सत्य का पोषण था या नहीं। मैंने अनुमान लगा लिया कि पादरी बाइबल अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए मैंने उनका कहा मान लिया कि प्रभु वापस नहीं लौटा है। मुझे यकीन था कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में सत्य और पवित्र आत्मा का कार्य है लेकिन फिर भी मैंने इस पर गौर नहीं किया। क्या यह पादरी में विश्वास करने जैसा नहीं था? इसे परमेश्वर में विश्वास या उसका अनुसरण करना कैसे कहा जा सकता है? मैंने उस समय के बारे में सोचा जब प्रभु यीशु ने प्रकट होकर कार्य किया। मंदिर में परमेश्वर की सेवा करने वाले मुख्य याजक, शास्त्री और फरीसी, सभी धर्मशास्त्रों और नियमों की बारीकियों को जानते थे, लेकिन उन्होंने प्रभु यीशु को मसीहा नहीं माना। उल्टा, उन्होंने उसका विरोध करके उसकी निंदा की और उसे सूली पर चढ़ा दिया। मुझे एहसास हुआ कि बाइबल से अच्छी तरह परिचित होना परमेश्वर को जानने के समान नहीं है, अगर मैंने आंखें बंद करके पादरी की बात सुनी, तो वह परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध होगा। शायद मैं परमेश्वर का विरोध कर दूं! मैंने बहन लियू और भाई डुआन के साथ सभाओं में भाग लेते रहने का फैसला किया, अगर मुझे यकीन हुआ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया प्रभु है, तो मैं उसे स्वीकार करके उसका अनुसरण करूंगी।

अगली सभा में मैंने उनको अपनी उलझनों के बारे में बताया। भाई डुआन ने कहा, "आपके पादरी ने कहा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक व्यक्ति में विश्वास करती है, क्या इसका कोई आधार है? क्या उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ा है या उसके कार्य पर गौर किया है? क्या उन्हें इस तरह कलीसिया की निंदा करके परमेश्वर का विरोध करने का डर नहीं लगता? फरीसियों ने प्रभु यीशु को सिर्फ एक सामान्य व्यक्ति समझ लिया था। उन्होंने उसके व्यक्त किए हुए सत्य को नहीं सुना, बल्कि पागलों की तरह उसका विरोध करके उसकी निंदा की, सांठ-गांठ करके उसे सूली पर चढ़ा दिया और वे परमेश्वर के दंड के हकदार बन गए। आज के पादरी समूह यह नहीं देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सत्य हैं या नहीं, वे परमेश्वर की वाणी हैं या नहीं, बल्कि वे केवल उसे नकारकर उसकी निंदा करते हैं। क्या यही गलती फरीसियों ने नहीं की थी? क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में देहधारी परमेश्वर है, क्या वह लौटकर आया हुआ प्रभु यीशु है, इसका निर्णय धार्मिक जगत या सरकार की मंजूरी से नहीं होता है। हमें यह देखना होगा कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सत्य हैं, क्या वह परमेश्वर का कार्य करता है। यही सबसे अहम है।" देहधारण को बेहतर ढंग से समझाने के लिए, भाई डुआन ने मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर सुनाए। "'देहधारण' परमेश्वर का देह में प्रकट होना है; परमेश्वर सृष्टि के मनुष्यों के मध्य देह की छवि में कार्य करता है। इसलिए, परमेश्वर को देहधारी होने के लिए, सबसे पहले देह बनना होता है, सामान्य मानवता वाला देह; यह सबसे मौलिक आवश्यकता है। वास्तव में, परमेश्वर के देहधारण का निहितार्थ यह है कि परमेश्वर देह में रह कर कार्य करता है, परमेश्वर अपने वास्तविक सार में देहधारी बन जाता है, वह मनुष्य बन जाता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार')। "देहधारी हुए परमेश्वर को मसीह कहा जाता है, और इसलिए वह मसीह जो लोगों को सत्य दे सकता है परमेश्वर कहलाता है। इसमें कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि वह परमेश्वर का सार धारण करता है, और अपने कार्य में परमेश्वर का स्वभाव और बुद्धि धारण करता है, जो मनुष्य के लिए अप्राप्य हैं। वे जो अपने आप को मसीह कहते हैं, परंतु परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते हैं, धोखेबाज हैं। मसीह पृथ्वी पर परमेश्वर की अभिव्यक्ति मात्र नहीं है, बल्कि वह विशेष देह भी है जिसे धारण करके परमेश्वर मनुष्य के बीच रहकर अपना कार्य करता और पूरा करता है। यह देह किसी भी आम मनुष्य द्वारा उसके बदले धारण नहीं की जा सकती है, बल्कि यह वह देह है जो पृथ्वी पर परमेश्वर का कार्य पर्याप्त रूप से संभाल सकती है और परमेश्वर का स्वभाव व्यक्त कर सकती है, और परमेश्वर का अच्छी तरह प्रतिनिधित्व कर सकती है, और मनुष्य को जीवन प्रदान कर सकती है" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है')। "जो देहधारी परमेश्वर है, उसके पास परमेश्वर का सार होगा और जो देहधारी परमेश्वर है, उसके पास परमेश्वर की अभिव्यक्ति होगी। चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया है, इसलिए वह उस कार्य को सामने लाएगा, जो वह करना चाहता है, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया है, इसलिए वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है और वह मनुष्य के लिए सत्य को लाने, उसे जीवन प्रदान करने और उसे मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस देह में परमेश्वर का सार नहीं है, वह निश्चित रूप से देहधारी परमेश्वर नहीं है; इसमें कोई संदेह नहीं। अगर मनुष्य यह पता करना चाहता है कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, तो इसकी पुष्टि उसे उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव और उसके द्वारा बोले गए वचनों से करनी चाहिए। इसे ऐसे कहें, व्यक्ति को इस बात का निश्चय कि यह देहधारी परमेश्वर है या नहीं और कि यह सही मार्ग है या नहीं, उसके सार से करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने की कुंजी कि यह देहधारी परमेश्वर की देह है या नहीं, उसके बाहरी स्वरूप के बजाय उसके सार (उसका कार्य, उसके कथन, उसका स्वभाव और कई अन्य पहलू) में निहित है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी स्वरूप की ही जाँच करता है, और परिणामस्वरूप उसके सार की अनदेखी करता है, तो इससे उसके अनाड़ी और अज्ञानी होने का पता चलता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" की 'प्रस्तावना')।

फिर भाई डुआन ने यह सहभागिता की : "देहधारी परमेश्वर शरीर धारण किया हुआ परमेश्वर का आत्मा है। मनुष्यों को बचाने के लिए वह पृथ्वी पर वचन बोलने और कार्य करने वाला एक सामान्य व्यक्ति बन जाता है। देहधारी परमेश्वर बहुत साधारण, बहुत मामूली दिखाई देता है। उसमें सामान्य मानवता होती है। वह किसी भी इंसान की तरह खाना खाता है और कपड़े पहनता है, उसमें सामान्य मानवीय भावनाएं होती हैं। लेकिन उसका सार दिव्य होता है। वह कभी भी, कहीं भी मनुष्य का पोषण करने के लिए सत्य व्यक्त कर सकता है। वह परमेश्वर का कार्य करता है, परमेश्वर के स्वभाव और परमेश्वर के स्वरूप को व्यक्त करता है। यह ऐसा कार्य है जो कोई सृजित प्राणी नहीं कर सकता। यह बिलकुल प्रभु यीशु की तरह है, जो एक सामान्य व्यक्ति की तरह दिखता था, लेकिन उसने सत्य को व्यक्त किया और पश्चाताप का रास्ता दिखाया। उसने मनुष्य के पापों को क्षमा किया, परमेश्वर के दयालु और प्रेमपूर्ण स्वभाव को व्यक्त किया। उसने बीमारों को चंगा किया, राक्षसों को निकाल भगाया, कई संकेत और चमत्कार दिखाए, जैसे पांच रोटियों और दो मछलियों से 5,000 लोगों को खाना खिलाना, एक शब्द से समुद्र को शांत करना, मुरदों को जिन्दा करना, आदि आदि । उसने परमेश्वर की सामर्थ्य और अधिकार को दिखाया। आखिरकार उसे सूली पर चढ़ा दिया गया, जिससे मानवजाति को पाप से छुटकारा दिलाने का उसका कार्य पूरा हुआ। प्रभु के कार्य, उसके वचन और उसके व्यक्त किए हुए स्वभावों से हम देख सकते हैं कि वह देहधारी परमेश्वर था—वह मसीह था। अंत के दिनों में परमेश्वर एक बार फिर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में देहधारी हुआ है। प्रभु यीशु की तरह, वह बाहर से किसी सामान्य व्यक्ति की तरह दिखता है। वह मनुष्यों के बीच रहता है और बिलकुल भी अलौकिक नहीं है, लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर उन सभी सत्यों को व्यक्त करता है जो मनुष्यों को शुद्ध करके बचाते हैं। वह मनुष्यों को शुद्ध करके और पूरी तरह पाप से बचाकर परमेश्वर के राज्य में ले जाने के लिए, अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय-कार्य करता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन मनुष्य को बचाने की परमेश्वर की प्रबंधन योजना के सभी रहस्यों को खोल देते हैं। इनमें व्यवस्था, अनुग्रह और राज्य के युगों में परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों का सत्य और उनसे क्या हासिल होता है, परमेश्वर के नाम और उसके देहधारण के रहस्य, अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय का अर्थ, परमेश्वर किसी युग का अंत कैसे करता है और लोगों को किस तरह चुनता है, अलग-अलग लोगों के परिणाम, पृथ्वी पर मसीह का राज्य कैसे साकार होगा, और अन्य कई रहस्य शामिल हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने शैतान द्वारा हमारी भ्रष्टता के सत्य और परमेश्वर-विरोध की हमारी शैतानी प्रकृति का भी खुलासा किया है, ताकि हम अहंकार, धोखेबाज़ी और सत्य से घृणा करने जैसे अपने शैतानी स्वभावों को देख सकें। उसने परमेश्वर के धार्मिक, अपमान न किए जा सकने वाले स्वभाव को भी हमारे सामने प्रकट करके हमें अपने स्वभावों को बदलने के लिए विशिष्ट रास्ता दिखाया है। परमेश्वर के अलावा सत्य को व्यक्त करके परमेश्वर की प्रबंधन योजना के रहस्यों को और कौन प्रकट कर सकता है? मनुष्यों को शुद्ध करके बचाने के लिए न्याय का कार्य और कौन कर सकता है? परमेश्वर के धार्मिक, अपमान न किए जा सकने वाले स्वभाव को और कौन प्रकट कर सकता है? साथ ही, लोगों के परिणाम और कौन निश्चित कर सकता है? सिर्फ देहधारी परमेश्वर मनुष्यों के उद्धार के लिए इस तरह का व्यावहारिक कार्य कर सकता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सभी कार्य और वचनों की नींव प्रभु का छुटकारे का कार्य है। यह कार्य का एक नया, अधिक ऊंचा चरण है। यह प्रभु की भविष्यवाणियों को सम्पूर्ण रूप से पूरा करता है : 'मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा' (यूहन्ना 16:12-13)। 'मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा' (यूहन्ना 12:47-48)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए हुए सत्य, उसका न्याय कार्य और उसका स्वभाव, सभी साबित करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर देहधारी परमेश्वर है, वह लौटकर आया प्रभु यीशु है। वह अंत के दिनों का मसीह है। वह मसीह है या नहीं, यह हम उसके रूप-रंग से निश्चित नहीं कर सकते। अहम बात यह है कि वह सत्य व्यक्त करता है या नहीं, मनुष्यों को छुटकारा दिलाकर बचा सकता है या नहीं।"

भाई डुआन की सहभागिता मेरे लिए बड़ी प्रेरणादायक थी। देहधारण का अर्थ एक सामान्य व्यक्ति का शरीर धारण किया हुआ स्वर्गिक परमेश्वर है। वह दिखने में किसी भी इंसान की तरह ही है, लेकिन उसमें परमेश्वर का सार है। वह सत्य को व्यक्त करके परमेश्वर का कार्य कर सकता है। यह एक ऐसा कार्य है जो कोई मनुष्य नहीं कर सकता। इससे मुझे बाइबल का यह पद याद आया : "परमेश्‍वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्‍वर का आत्मा" (1 कुरिन्थियों 2:11)। देहधारण के रहस्यों को इतने स्पष्ट रूप से देहधारी परमेश्वर के अलावा और कौन समझा सकता है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सत्यों को पढ़े बिना, बाहरी स्वरूप से आप मसीह को एक सामान्य व्यक्ति समझने की गलती कर सकते हैं, फिर आप परमेश्वर को अस्वीकार करके उसका विरोध कर सकते हैं!

फिर बहन लियू ने कुछ सहभागिता की। उन्होंने कहा, "सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रकटन और कार्य बाइबल की भविष्यवाणियों को संपूर्ण रूप से पूरा करते हैं। वह लौटकर आया प्रभु यीशु है। कई संप्रदायों के बहुत से सच्चे विश्वासियों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़कर यह जाना है कि वे सत्य और परमेश्वर की वाणी हैं, और वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर मुड़ गए हैं। उसके कार्य और वचनों ने पूरी धार्मिक दुनिया को हिलाकर रख दिया है। पादरी समूह के लोगों ने इस बारे में जरूर सुना है, तो फिर वे इस पर गौर करके सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को क्यों नहीं पढ़ते? वे इसका विरोध करने पर क्यों तुले हुए हैं? फरीसी जानते थे कि प्रभु यीशु ने बीमारों को चंगा किया, राक्षसों को निकाल भगाया, पश्चाताप के मार्ग का प्रचार किया। वे जानते थे यह परमेश्वर से आया है, लेकिन उन्होंने जानबूझकर उसे नकारा, यह कहते हुए कि वह एक नाजरीन, एक बढ़ई का बेटा था। उन्होंने उसका पागलों की तरह विरोध करके उसकी निंदा की, रोमन सरकार के साथ सांठ-गांठ करके उसे क्रूस पर चढ़ाया। उन्होंने मसीह को नकारकर उसकी निंदा की। वे उसके दुश्मन थे। वे परमेश्वर के कार्य से उजागर हुए मसीह-विरोधी थे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में प्रकट हुआ है, अब पादरी और एल्डर जानते हैं कि वह न्याय का कार्य करने के लिए सत्य व्यक्त करता है। वे न सिर्फ इसकी जांच करने से इनकार करते हैं, बल्कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर को नकारकर उसकी निंदा करने वाली अफवाहें फैलाते हैं। वे अपनी कलीसियाओं में सीसीपी की अफवाहें फैलाकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को बदनाम करते हैं वे नास्तिक पार्टी से हाथ मिलाकर उसका विरोध करते हैं। उनमें और प्रभु यीशु का विरोध करने वाले फरीसियों में क्या फर्क है? बाइबल कहती है 'क्योंकि बहुत से ऐसे भरमानेवाले जगत में निकल आए हैं, जो यह नहीं मानते कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया; भरमानेवाला और मसीह-विरोधी यही है' (2 यूहन्ना 1:7)। 'जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्‍वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है, जिसकी चर्चा तुम सुन चुके हो कि वह आनेवाला है, और अब भी जगत में है' (1 यूहन्ना 4:3)। अंत के दिनों के मसीह की निंदा करके और परमेश्वर का विरोध करने की जिद में पादरी समूह मसीह को नकारते हैं। क्या वे अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य से उजागर हुए मसीह-विरोधी नहीं हैं?"

आखिरकार मेरा संदेह बहन लियू की सहभागिता से दूर हो गया। मैं समझ गयी कि मसीह या देहधारण के बारे में पादरी समूह के लोग कुछ भी नहीं जानते। वे प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं, लेकिन उसके सार को बिल्कुल नहीं जानते। प्रभु यीशु देह धारण करके कार्य करने के लिए लौटा है, उसने कई सारे सत्य व्यक्त किए हैं, लेकिन वे इस पर गौर नहीं करते या उसे स्वीकार भी नहीं करते हैं। वे बेधड़क उसकी निंदा और विरोध करते हैं। वे परमेश्वर के दुश्मन हैं! मैं जान गयी कि अब उनका अनुसरण करने के बजाय मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करके परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलना चाहिए। मेरे पादरी चाहे जो करें, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अनुसरण करने की ठान ली।

जल्द ही मेरे पादरी को सर्वशक्तिमान परमेश्वर में मेरी आस्था के बारे में पता चल गया। तुरंत गुस्से में आकर उन्होंने मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने के लिए फटकार दिया। उन्होंने कहा कि मैं एक व्यक्ति में विश्वास कर रही हूँ, जो गलत बात है, उन्होंने मेरे पति को मेरा मन बदलने की कोशिश करने के लिए कहा। मेरे पति पादरी के झूठ को समझ नहीं सके, इसलिए वे मेरी आस्था में बाधा डालने लगे। मानों उनकी जगह किसी दूसरे इंसान ने ले ली थी। जब उन्हें पता चलता कि मैं किसी सभा में गई थी तो वे आग बबूला हो उठते और चीजों की तोड़-फोड़ देते थे। अपनी आस्था का त्याग करने को मुझे मजबूर करने के लिए उन्होंने हमारे पारिवारिक व्यवसाय की भी उपेक्षा की। यह मेरे लिए बड़ा दर्दनाक था। पादरी की पत्नी भी मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी। वह घंटों हमारे घर पर बैठी रहती। मैं परमेश्वर के वचनों को पढ़ नहीं पाती थी, क्योंकि मुझे उसके साथ बैठना पड़ता था। मैं घर का कामकाज भी नहीं कर पाती थी। इन सब से मुझे बड़ी बेचैनी होती थी।

पादरी की इन करतूतों पर मुझे बड़ा गुस्सा आता था। प्रभु यीशु की वापसी पर गौर करने के बजाय मुझे सत्य की राह पर चलने से रोकने के लिए उन्होंने मुझे झूठी बातों से बहकाने कोशिश की। मेरी राह में बाधा डालने के लिए उन्होंने मेरे पति को भी इस्तेमाल किया ताकि मैं परमेश्वर का उद्धार गंवा दूं। कितना घिनौना है यह! मैंने प्रभु यीशु द्वारा फरीसियों को उजागर करके दंड दिये जाने के बारे में सोचा : "हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो" (मत्ती 23:13)। मुझे लगा कि आधुनिक समय के पादरी और एल्डर ऐसे ही होते हैं। परमेश्वर की वाणी सुनकर वे प्रभु का स्वागत नहीं करेंगे, बल्कि हममें से जो लोग प्रभु का स्वागत करके परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना चाहते हैं उन्हें रोकने के लिए झूठ फैलाते हैं। वे चाहते हैं कि हम नरक में जाएं। हम भी उनके साथ दण्डित हों, उनके साथ दफनाए जाएं। वे स्वर्गिक राज्य के मार्ग पर हमारे लिए रुकावटें हैं। वे आत्मा को भक्षण करने वाले मसीह-विरोधी और राक्षस हैं! जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : "ऐसे भी लोग हैं जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में दिन-भर बाइबल पढ़ते रहते हैं, फिर भी उनमें से एक भी ऐसा नहीं होता जो परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को समझता हो। उनमें से एक भी ऐसा नहीं होता जो परमेश्वर को जान पाता हो; उनमें से परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप तो एक भी नहीं होता। वे सबके सब निकम्मे और अधम लोग हैं, जिनमें से प्रत्येक परमेश्वर को सिखाने के लिए ऊँचे पायदान पर खड़ा रहता है। वे लोग परमेश्वर के नाम का झंडा उठाकर, जानबूझकर उसका विरोध करते हैं। वे परमेश्वर में विश्वास रखने का दावा करते हैं, फिर भी मनुष्यों का माँस खाते और रक्त पीते हैं। ऐसे सभी मनुष्य शैतान हैं जो मनुष्यों की आत्माओं को निगल जाते हैं, ऐसे मुख्य राक्षस हैं जो जानबूझकर उन्हें विचलित करते हैं जो सही मार्ग पर कदम बढ़ाने का प्रयास करते हैं और ऐसी बाधाएँ हैं जो परमेश्वर को खोजने वालों के मार्ग में रुकावट पैदा करते हैं। वे 'मज़बूत देह' वाले दिख सकते हैं, किंतु उसके अनुयायियों को कैसे पता चलेगा कि वे मसीह-विरोधी हैं जो लोगों से परमेश्वर का विरोध करवाते हैं? अनुयायी कैसे जानेंगे कि वे जीवित शैतान हैं जो इंसानी आत्माओं को निगलने को तैयार बैठे हैं?" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर को न जानने वाले सभी लोग परमेश्वर का विरोध करते हैं')। पादरी के पाखंडी, सत्य से घृणा करने वाले सार को पहचानकर, मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए और भी ज्यादा प्रेरित हुई। मैं हमेशा से पादरियों को देवता मानती आई थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि बाइबल जानने वाले और परमेश्वर की सेवा करने वाले ये लोग वास्तव में सत्य से घृणा करने वाले मसीह-विरोधी हैं जो परमेश्वर के राज्य में विश्वासियों के प्रवेश में बाधा डालते हैं। अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने देह में प्रकट होकर कार्य करके कलीसियाओं में छिपे हुए इन दुष्ट सेवकों और मसीह-विरोधियों को उजागर नहीं किया होता तो उस पादरी ने मुझे बरबाद कर दिया होता और मुझे पता भी नहीं चलता। परमेश्वर की दया और उद्धार से ही मैंने अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार किया है!

उसके बाद मैंने परमेश्वर का सहारा लेकर उसकी गवाही दी। मेरे पति ने मेरी राह में रुकावट बनना बंद कर दिया। अब मैं भाई-बहनों के साथ सभाओं में जाती हूं, कलीसिया में अपना कर्तव्य निभाती हूं। मेरा मन शांति और आनंद से सराबोर है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद!

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