3. धार्मिक दुनिया के सभी पादरी और एल्डर्स कलीसियाओं में परमेश्वर की सेवा करते हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है वे प्रभु की वापसी की प्रतीक्षा में सतर्क और सावधान रहें। तो क्यों वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की खोज या जाँच करने का प्रयास तो नहीं ही करते हैं, बल्कि इसके बजाय अफवाहें फैलाते हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर निर्णय देते हैं और उसकी निंदा करते हैं और विश्वासियों को धोखा देने और उन्हें सच्चे मार्ग की जाँच करने से रोकने का प्रयास करते हैं।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“इस पर प्रधान याजकों और फरीसियों ने महासभा बुलाई, और कहा, ‘हम करते क्या हैं? यह मनुष्य तो बहुत चिह्न दिखाता है। यदि हम उसे यों ही छोड़ दें, तो सब उस पर विश्‍वास ले आएँगे, और रोमी आकर हमारी जगह और जाति दोनों पर अधिकार कर लेंगे।’ ... अतः उसी दिन से वे उसे मार डालने का षड्‍यन्त्र रचने लगे” (यूहन्ना 11:47-48, 53)

“परमेश्वर का आत्मा तुम इस रीति से पहचान सकते हो : जो आत्मा मान लेती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्वर की ओर से है, और जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है, जिसकी चर्चा तुम सुन चुके हो कि वह आनेवाला है, और अब भी जगत में है” (1 यूहन्ना 4:2-3)

“क्योंकि बहुत से ऐसे भरमानेवाले जगत में निकल आए हैं, जो यह नहीं मानते कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया; भरमानेवाला और मसीह-विरोधी यही है” (2 यूहन्ना 1:7)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

ऐसे भी लोग हैं, जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में बाइबल पढ़ते हैं और दिन भर उसके अंशों का पाठ करते रहते हैं, फिर भी उनमें से एक भी व्यक्ति परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य नहीं समझता, न ही उनमें से कोई ऐसा होता है जो परमेश्वर को जान सकता है—उनमें से किसी के परमेश्वर के इरादों के अनुरूप चलने वाला होने की तो बात ही छोड़ दो। वे सब बेकार, नीच लोग होते हैं, जो "परमेश्वर" को उपदेश देने के लिए ऊँचे स्थानों पर खड़े होते हैं। वे ऐसे लोग हैं, जो परमेश्वर के बैनर तले काम करते हैं, फिर भी जानबूझकर परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं, जो परमेश्वर में विश्वास करने का लेबल लगाते हैं, लेकिन मनुष्य का मांस खाते और उनका रक्त पीते हैं। ऐसे तमाम लोग दुष्ट दानव हैं जो मनुष्यों की आत्माएँ निगल जाते हैं, वे प्रधान राक्षस हैं जो जानबूझकर लोगों को सही मार्ग पर चलने से बाधित करते हैं और वे ऐसी अड़चनें हैं जो लोगों को परमेश्वर की खोज करने से रोकती हैं। वे देखने में भले ही "शारीरिक रूप से हृष्ट-पुष्ट" लगते हों, लेकिन उनके अनुयायियों को यह कैसे पता चलेगा कि वे मसीह-विरोधी हैं जो लोगों को परमेश्वर का प्रतिरोध करने की ओर ले जाते हैं? उनके अनुयायियों को यह कैसे पता चलेगा कि वे ऐसे जीवित दानव हैं जो मनुष्यों की आत्माएँ निगल जाने के लिए समर्पित हैं?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते, वे सभी परमेश्वर का प्रतिरोध करने वाले लोग हैं

यदि तुमने वर्षों परमेश्वर में विश्वास रखा है, फिर भी न तो कभी उसके प्रति समर्पण किया है, न ही उसके वचनों की समग्रता को स्वीकार किया है, बल्कि तुमने परमेश्वर को अपने आगे समर्पण करने और तुम्हारी धारणाओं के अनुसार कार्य करने को कहा है, तो तुम सबसे अधिक विद्रोही व्यक्ति हो, और छद्म-विश्वासी हो। एक ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के कार्य और वचनों के प्रति समर्पण कैसे कर सकता है जो मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप नहीं है? सबसे अधिक विद्रोही वे हैं जो जानबूझकर परमेश्वर के आगे झुकने से इनकार करते हैं और परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं। वे परमेश्वर के शत्रु हैं, मसीह-विरोधी हैं। वे हमेशा परमेश्वर के नए कार्य के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखते हैं; उनमें कभी भी समर्पण करने की जरा-सी भी प्रवृत्ति नहीं होती, न ही उन्होंने कभी खुशी-खुशी समर्पण किया है या खुद को विनम्र किया है। दूसरों के सामने, वे सबसे अधिक अभिमानी होते हैं और वे कभी किसी के आगे समर्पण नहीं करते। परमेश्वर के सामने, वे खुद को 'धर्मोपदेशों' का प्रचार करने में सर्वश्रेष्ठ और दूसरों पर कार्य करने में सबसे कुशल मानते हैं। वे अपने पास मौजूद 'खजानों' को कभी नहीं छोड़ते; बल्कि वे उन्हें पारिवारिक विरासत मानते हैं जिनकी पूजा की जानी चाहिए और जिनके बारे में दूसरों को प्रचार किया जाना चाहिए; वे उनका उपयोग उन बुद्धुओं को व्याख्यान देने के लिए करते हैं जो उन्हें पूजते हैं। कलीसिया में वास्तव में ऐसे कुछ लोग हैं। यह कहा जा सकता है कि वे 'अदम्य नायकों का एक राजवंश' हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी परमेश्वर के घर में डेरा डाले रहते हैं। वे 'धर्मोपदेशों' (सिद्धांतों) का प्रचार करने को अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानते हैं। साल-दर-साल, पीढ़ी-दर-पीढ़ी, वे अपने 'पावन और अलंघनीय' कर्तव्य को सख्ती से पूरा करते रहते हैं। कोई भी उन्हें छूने की हिम्मत नहीं करता; एक भी व्यक्ति खुले तौर पर उनकी निंदा करने की हिम्मत नहीं करता। वे परमेश्वर के घर में 'राजा' बन जाते हैं, युग-युग तक दूसरों पर अत्याचार करते हुए निरंकुश होकर कहर ढाते हैं। दुष्ट दानवों का यह झुंड मेरे कार्य को नष्ट करने के लिए हाथ मिलाना चाहता है; मैं इन जीते-जागते दानवों को अपनी आँखों के सामने कैसे रहने दे सकता हूँ?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के प्रति समर्पण करते हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाएँगे

परमेश्वर के देहधारी होने से पहले इस बात का पैमाना कि कोई व्यक्ति परमेश्वर का प्रतिरोध करता था या नहीं, इस बात पर आधारित होता था कि वह स्वर्ग में स्थित अदृश्य परमेश्वर की आराधना और उसका आदर करता था या नहीं। उस अवधि की "परमेश्वर का प्रतिरोध करने" की परिभाषा उतनी व्यावहारिक नहीं थी, क्योंकि लोग परमेश्वर को देख नहीं सकते थे और यह नहीं जानते थे कि परमेश्वर की छवि कैसी है या वह वास्तव में कैसे काम करता और बोलता है। लोगों के मन में परमेश्वर के बारे में कोई धारणाएँ नहीं थीं और वे एक अस्पष्टता की स्थिति से परमेश्वर में विश्वास करते थे क्योंकि परमेश्वर अभी तक मनुष्य के सामने प्रकट नहीं हुआ था। इसलिए चाहे लोग अपनी कल्पनाओं के आधार पर परमेश्वर में कैसे भी विश्वास करते हों, परमेश्वर ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया या उनसे बहुत ज्यादा माँगें नहीं कीं क्योंकि वे परमेश्वर को देखने में पूरी तरह असमर्थ थे। जब परमेश्वर देहधारी होता है और लोगों के बीच कार्य करने आता है तो सभी उसे देखते हैं और उसके वचन सुनते हैं और देहधारी परमेश्वर के कर्म देखते हैं, जिसके बाद हर किसी की धारणाएँ बुलबुलों की तरह फूट जाती हैं। जहाँ तक उन लोगों की बात है जो परमेश्वर को देह में प्रकट होते देखते हैं, अगर वे इरादतन उसके प्रति समर्पण कर देते हैं तो उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाएगा, जबकि जो उसका उद्देश्यपूर्वक प्रतिरोध करते हैं उन लोगों का निरूपण ऐसे लोगों के रूप में किया जाएगा जो परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं। ऐसे लोग मसीह-विरोधी होते हैं, वे शत्रु होते हैं जो जानबूझकर परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते, वे सभी परमेश्वर का प्रतिरोध करने वाले लोग हैं

क्या बहुत-से लोग इसलिए परमेश्वर का प्रतिरोध नहीं करते और पवित्र आत्मा के कार्य में बाधा नहीं डालते क्योंकि वे परमेश्वर के विभिन्न और विविधतापूर्ण कार्यों को नहीं जानते हैं, और इसके अलावा, क्योंकि वे केवल थोड़े-से ज्ञान और धर्म-सिद्धांत से संपन्न होते हैं जिसका उपयोग करके वे पवित्र आत्मा के कार्य को मापते हैं? यद्यपि इन लोगों के पास केवल उथले अनुभव हैं, फिर भी इनकी प्रकृति अहंकारी, स्वेच्छाचारी और निरंकुश है, ये पवित्र आत्मा के कार्य को तिरस्कार की दृष्टि से देखते हैं, पवित्र आत्मा के अनुशासन की उपेक्षा करते हैं और इसके अलावा, पवित्र आत्मा के कार्य की "पुष्टि" करने के लिए अपने तुच्छ पुराने धर्म-सिद्धांतों का उपयोग करते हैं। वे दिखावा भी करते हैं और अपनी विद्वता के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त रहते हैं, यह मानते हुए कि वे पूरी दुनिया में बेरोकटोक घूम सकते हैं। क्या ऐसे लोग वे नहीं हैं जिन्हें पवित्र आत्मा द्वारा तिरस्कृत कर दिया जाता है और जिन्हें नए युग द्वारा हटा दिया जाता है? क्या वे लोग जो परमेश्वर के सामने आते हैं और खुलेआम उसका प्रतिरोध करते हैं, उथले और सीमित ज्ञान वाले ऐसे नीच व्यक्ति नहीं हैं जो अपनी कथित "बुद्धिमत्ता" का प्रदर्शन कर रहे हैं? उन्हें बाइबल का बस थोड़ा-सा ज्ञान है और फिर भी वे दुनिया के "शैक्षणिक हलकों" में बेरोकटोक राज करना चाहते हैं; उनके पास लोगों को सिखाने के लिए बस थोड़ा-सा उथला धर्म-सिद्धांत है और फिर भी वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा को पलटना चाहते हैं और इसे अपनी विचार प्रक्रियाओं के इर्द-गिर्द घुमाने का प्रयास करते हैं। वे अदूरदर्शी हैं, फिर भी वे परमेश्वर के 6,000 वर्षों के कार्य की भव्यता को देखना चाहते हैं। इन लोगों में नाममात्र की भी समझ नहीं है! वास्तव में, लोगों को परमेश्वर का जितना अधिक ज्ञान होता है, वे उसके कार्य के बारे में उतने ही कम हल्के ढंग से निर्णय करते हैं। वे परमेश्वर के वर्तमान कार्य के बारे में अपने ज्ञान की केवल थोड़ी-सी चर्चा करते हैं, लेकिन उस पर लापरवाही से कोई निर्णय नहीं सुनाते। लोग परमेश्वर को जितना कम जानते हैं, वे उतने ही अधिक अहंकारी होते हैं, स्वयं का उतना ही बढ़ा-चढ़ाकर आकलन करते हैं और उतनी ही मनमानी से यह घोषणा करते हैं कि परमेश्वर का स्वरूप क्या है; फिर भी वे जो घोषणा करते हैं, वह केवल धर्म-सिद्धांत होता है और उसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं होता। ये सबसे बेकार लोग हैं। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य को एक खेल मानते हैं, वे ओछे लोग हैं! पवित्र आत्मा के नए कार्य का सामना होने पर, वे इसके साथ सावधानी से व्यवहार नहीं करते, बल्कि इसके बजाय वे बिना सोचे-समझे बोलते हैं और जल्दी से राय बना लेते हैं, पवित्र आत्मा के कार्य के सही होने को नकारने के लिए अपनी मर्जी को खुली छूट देते हैं और यहाँ तक कि इसका अपमान या ईश-निंदा करते हैं—क्या ये अनादर करने वाले व्यक्ति पवित्र आत्मा के कार्य से अनजान नहीं हैं और इसके अलावा, क्या ये ऐसे घमंडी लोग नहीं हैं जो स्वाभाविक रूप से अहंकारी और निरंकुश हैं? भले ही एक दिन ऐसा आए जब ऐसे लोग पवित्र आत्मा के नए कार्य को स्वीकार कर लें, फिर भी उन्हें परमेश्वर की क्षमा प्राप्त नहीं होगी। वे न केवल परमेश्वर के लिए कार्य करने वालों को नीची दृष्टि से देखते हैं, बल्कि वे स्वयं परमेश्वर की ईश-निंदा भी करते हैं। ऐसे दुस्साहसी लोगों को न तो इस जीवन में और न ही आने वाले संसार में क्षमा किया जाएगा और वे हमेशा के लिए नरक में विनष्ट हो जाएँगे! ऐसे अनादर करने वाले और आत्म-भोगी लोग केवल विश्वासियों का लेबल लगाए रहते हैं, और वे जितने अधिक ऐसे होते हैं, उतनी ही अधिक संभावना होती है कि वे परमेश्वर के प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करेंगे। क्या वे सभी अहंकारी व्यक्ति जो स्वाभाविक रूप से निरंकुश हैं और जिन्होंने कभी किसी की आज्ञा नहीं मानी है, इसी मार्ग पर नहीं चलते हैं? क्या वे दिन-प्रतिदिन, इसी तरह से उस परमेश्वर का प्रतिरोध नहीं करते जो हमेशा नया रहता है और कभी पुराना नहीं होता?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है

मनुष्य केवल एक ही प्रकार का कार्य या एक ही प्रकार का अभ्यास स्वीकार करता है, और मनुष्य के लिए ऐसे कार्य या अभ्यासों को स्वीकार करना कठिन होता है, जो इनके साथ बेमेल प्रतीत होते हैं या इनसे उच्चतर होते हैं। परंतु पवित्र आत्मा हमेशा नया कार्य करता है और इसलिए एक के बाद एक ऐसे धार्मिक विशेषज्ञों के समूह उभरते रहते हैं जो परमेश्वर के नए कार्य का प्रतिरोध करते हैं। ये लोग ठीक इसलिए “विशेषज्ञ” बन गए हैं क्योंकि उनके पास यह ज्ञान ही नहीं है कि परमेश्वर किस प्रकार हमेशा नया रहता है और कभी भी पुराना नहीं पड़ता है, और उनके पास परमेश्वर के कार्य के सिद्धांतों का भी कोई ज्ञान नहीं है, और इसके अलावा, उन्हें उन विभिन्न तरीकों का ज्ञान नहीं है जिनके द्वारा परमेश्वर मनुष्य को बचाता है। मनुष्य यह पहचानने में सर्वथा असमर्थ है कि क्या यह वह कार्य है जो पवित्र आत्मा की ओर से आता है और क्या यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। कई लोग इस रवैये पर अड़े रहते हैं कि यदि कोई चीज़ पहले आए हुए वचनों के अनुरूप है, तो वे इसे स्वीकार करते हैं, और यदि पहले किए गए कार्य से कुछ अलग है, तो वे इसका विरोध करते हैं और इसे अस्वीकार कर देते हैं। क्या तुम लोग आज इसी प्रकार के सिद्धांतों से बँधे हुए नहीं हो? ... तुम लोगों को पता होना चाहिए कि तुम लोग परमेश्वर के कार्य का प्रतिरोध या आज के कार्य को मापने के लिए अपनी ही धारणाओं का उपयोग इसलिए करते हो, क्योंकि तुम लोग परमेश्वर के कार्य के सिद्धांतों को नहीं जानते हो, और क्योंकि तुम पवित्र आत्मा के कार्य के प्रति लापरवाही बरतते हो। तुम लोगों द्वारा परमेश्वर का प्रतिरोध और पवित्र आत्मा के कार्य में अवरोध तुम लोगों की धारणाओं और तुम लोगों के अंतर्निहित अहंकार के कारण है। ऐसा इसलिए नहीं है कि परमेश्वर का कार्य गलत है, बल्कि इसलिए है कि तुम लोग स्वाभाविक रूप से अत्यंत विद्रोही हो। परमेश्वर में विश्वास हो जाने के बाद भी, कुछ लोग यकीन से यह भी नहीं कह सकते हैं कि मनुष्य कहाँ से आया, फिर भी वे पवित्र आत्मा के कार्य के सही और गलत होने के बारे में राय बनाते हुए सार्वजनिक भाषण देने का साहस करते हैं। यहाँ तक कि वे उन प्रेरितों को भी नसीहतें देते हैं जिनके पास पवित्र आत्मा का नया कार्य है, उन पर टिप्पणी करते हैं और अभद्र बातें बोलते रहते हैं; उनकी मानवता बहुत ही निम्न स्तर की है और उनमें रत्ती-भर भी विवेक नहीं है। क्या वह दिन नहीं आएगा जब इस प्रकार के लोग पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा ठुकरा दिए जाएँगे और नरक की आग द्वारा भस्म कर दिए जाएँगे? वे परमेश्वर के कार्यों को नहीं जानते हैं, फिर भी उसके कार्य पर राय बनाते हैं और परमेश्वर को यह निर्देश देने की कोशिश करते हैं कि कार्य किस प्रकार किया जाए। इस प्रकार के विवेक से रहित लोग परमेश्वर को कैसे जान सकते हैं? मनुष्य खोजने और अनुभव करने की प्रक्रिया के दौरान ही परमेश्वर को जान पाता है; मनुष्य द्वारा मनमाने आकलन करने के दौरान पवित्र आत्मा के प्रबोधन के माध्यम से परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त नहीं होता। परमेश्वर के बारे में लोगों का ज्ञान जितना अधिक सटीक होता जाता है, उतना ही कम वे उसका प्रतिरोध करते हैं। इसके विपरीत, लोग परमेश्वर के बारे में जितना कम जानते हैं, उतनी ही ज्यादा उनके द्वारा परमेश्वर का प्रतिरोध करने की संभावना रहती है। तुम्हारी धारणाएँ, तुम्हारी पुरानी प्रकृति और तुम्हारी मानवता, चरित्र और नैतिक दृष्टिकोण वह पूँजी है जिससे तुम परमेश्वर का प्रतिरोध करते हो और जितनी अधिक तुम्हारी नैतिकता भ्रष्ट होती है, तुम्हारा चरित्र उतना ही अधिक नीच होता है और तुम्हारी मानवता जितनी निम्न स्तर की होती है, उतना ही अधिक तुम परमेश्वर के शत्रु बन जाते हो। जो लोग प्रबल धारणाएँ रखते हैं और आत्मतुष्ट स्वभाव के होते हैं, वे देहधारी परमेश्वर के प्रति और भी अधिक शत्रुतापूर्ण होते हैं; इस प्रकार के लोग मसीह-विरोधी हैं। यदि तुम्हारी धारणाओं में सुधार न किया जाए, तो वे सदैव परमेश्वर की विरोधी रहेंगी; तुम कभी भी परमेश्वर की अनुरूपता में नहीं होगे और सदैव उससे दूर रहोगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है

पिछला: 2. धार्मिक दुनिया के सभी पादरी और एल्डर्स बाइबल में पारंगत हैं और अक्सर इसके बारे में दूसरों के सामने व्याख्या करते हैं और कहते हैं कि लोग बाइबल का पालन करें। क्या ऐसा करने में वे प्रभु को ऊँचा नहीं उठाते और उसकी गवाही नहीं देते हैं? तुम कैसे कह सकते हो कि वे लोगों को धोखा दे रहे हैं, कि वे पाखंडी फरीसी हैं?

अगला: 4. धार्मिक विश्व सर्वशक्तिमान परमेश्वर का उन्मत्त विरोध करता है और उसकी निंदा करता है। इसने लगातार दुष्टतापूर्ण कार्य किये हैं, और कट्टर मसीह-विरोधियों का एक गढ़ बन गया है। लेकिन धार्मिक दुनिया द्वारा परमेश्वर पर विश्वास करने परन्तु परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य का विरोध करने का अंज़ाम और अंत क्या होगा?

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

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5. पुराने और नए दोनों नियमों के युगों में, परमेश्वर ने इस्राएल में काम किया। प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की कि वह अंतिम दिनों के दौरान लौटेगा, इसलिए जब भी वह लौटता है, तो उसे इस्राएल में आना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु पहले ही लौट चुका है, कि वह देह में प्रकट हुआ है और चीन में अपना कार्य कर रहा है। चीन एक नास्तिक राजनीतिक दल द्वारा शासित राष्ट्र है। किसी भी (अन्य) देश में परमेश्वर के प्रति इससे अधिक विरोध और ईसाइयों का इससे अधिक उत्पीड़न नहीं है। परमेश्वर की वापसी चीन में कैसे हो सकती है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है..., सेनाओं के यहोवा का यही वचन है” (मलाकी...

प्रश्न: प्रभु यीशु कहते हैं: "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं" (यूहन्ना 10:27)। तब समझ आया कि प्रभु अपनी भेड़ों को बुलाने के लिए वचन बोलने को लौटते हैं। प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात है, प्रभु की वाणी सुनने की कोशिश करना। लेकिन अब, सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि हमें नहीं पता कि प्रभु की वाणी कैसे सुनें। हम परमेश्वर की वाणी और मनुष्य की आवाज़ के बीच भी अंतर नहीं कर पाते हैं। कृपया हमें बताइये कि हम प्रभु की वाणी की पक्की पहचान कैसे करें।

उत्तर: हम परमेश्वर की वाणी कैसे सुनते हैं? हममें कितने भी गुण हों, हमें कितना भी अनुभव हो, उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। प्रभु यीशु में विश्वास...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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