96. पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के भंवर से मुक्ति

शिआओली, चीन

मैं एक साधारण कामकाजी परिवार में पैदा हुआ था। मेरे माता-पिता निष्कपट और कर्तव्यनिष्ठ लोग थे जिनमें कोई खास काबिलियत नहीं थी और हमारे रिश्तेदार और दोस्त उन्हें नीची नजर से देखते थे। मैंने मन में सोचा, “मैं अपने माता-पिता की तरह नहीं हो सकता, जो औसत दर्जे का जीवन जी रहे हैं और जिन्हें नीची नजर से देखा जाता है। मैं सफल होने के लिए संघर्ष करूँगा और करियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत करूँगा। मैं चाहता हूँ कि सबका ध्यान मेरी तरफ रहे और मेरा जिक्र करते समय हर कोई मेरी तारीफ करे।”

2017 में मैंने कॉलेज से स्नातक किया और एक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के रूप में रियल एस्टेट कंपनी में शामिल हो गया। उस समय प्रॉपर्टी बाजार फल-फूल रहा था और बतौर एक इंटर्न, अपने पहले महीने में ही मैंने आसानी से तीन घर बेच दिए। एक घर बेचने का बोनस और कमीशन मेरे सहपाठियों के एक महीने के वेतन के बराबर था, मैंने मन ही मन सोचा, “मुझे स्नातक होने के तुरंत बाद इतनी पैसे वाली नौकरी मिल गई है। मैं अपने सभी सहपाठियों में सबसे अच्छा कर रहा हूँ। दो साल बाद जब मैं और भी ज्यादा पैसा कमाऊँगा तो मेरे सहपाठी और दोस्त मेरी प्रशंसा करेंगे।” मार्च 2018 में घर की कीमतें फिर से बढ़ गईं और लोगों में घर खरीदने का उत्साह तुरंत बढ़ गया। मेरे सहकर्मी और उद्योग के कई बड़े निवेशक सभी घर खरीद रहे थे। उन्होंने कीमतें बढ़ने से पहले रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने की योजना बनाई, कुछ साल इंतजार करके घर की कीमतें आसमान छूने पर उन्हें दोगुनी कीमत पर बेच देंगे। यह देखकर मुझे बहुत ईर्ष्या हुई। मुझे डर था कि मैं आवासीय बाजार में आई इस तेजी के साथ नहीं चल पाऊँगा और अगर घर की कीमतें बढ़ती रहीं तो मेरा खरीदने का मौका और भी कम होता जाएगा। मुझे डर था कि अगर मैं यह सुनहरा मौका चूक गया तो पता नहीं मैं दूसरों से आगे निकलने का अपना लक्ष्य कब हासिल कर पाऊँगा। साथ ही, अगर मेरे रिश्तेदारों और दोस्तों को पता चला कि मैंने एक घर खरीदा है तो वे निश्चित रूप से मुझे एक नई रोशनी में देखेंगे और मेरे काबिल होने के कारण तारीफ करेंगे। इसलिए मैंने कर्ज लेकर घर खरीदने का फैसला किया। उस समय मेरी माँ पहले ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने लगी थीं जब उन्होंने सुना कि मैं घर खरीदने की योजना बना रहा हूँ तो उन्होंने मुझे सलाह दी, “अंत के दिनों में मानवजाति को बचाने का परमेश्वर का कार्य समाप्त होने वाला है और आपदाएँ बड़ी होती जाएँगी। जब आपदाएँ आएँगी तो क्या तुम इन भौतिक चीजों को अपने साथ ले जा पाओगे? परमेश्वर में विश्वास करना, उसके वचन अधिक पढ़ना और जीवन का अनुसरण करना अधिक महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, हमारे परिवार में इतना पैसा नहीं है तो तुम घर खरीदने के लिए पैसे कहाँ से लाओगे?” लेकिन उस समय मैंने उनकी एक न सुनी और सोचा कि वह दूर की नहीं सोच रही हैं। मैंने सोचा कि आपदाएँ कब आएँगी यह तो पता नहीं और चूँकि मैं अभी भी जवान था, इसलिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात थी पैसा कमाने और सबसे अलग दिखने के तरीके खोजना। इसलिए मैंने कर्ज लेकर घर खरीदा। बाद में, अपने सहकर्मियों की नजरों में नीचा दिखने से बचने और ग्राहकों के सामने अपना रुतबा दिखाने के लिए, मैंने एक और कर्ज लेकर कार खरीद ली। मैंने सोचा कि आज के जमाने में कार और घर होना ही एक सफल जीवन का मानक है, तभी व्यक्ति का हर जगह सम्मान होता है। बाद में, रिश्तेदारों और दोस्तों ने मेरी प्रशंसा करते हुए कहा, “तुम बहुत अच्छा कर रहे हो; अमीर हो जाओ तो हमें भूल मत जाना!” यह सुनकर मुझे खुशी हुई और मेरे अहंकार को बहुत संतुष्टि मिली। यह दिखाने के लिए कि मैं बहुत पैसा कमाता हूँ और बड़े काम करता हूँ, मैंने अंधाधुंध खर्च भी किया, ऐसे दिखाया कि मैं ठीक-ठाक सफल व्यक्ति हूँ। सभी बड़े रेस्तरां और मनोरंजन स्थलों में, जहाँ भी अमीर लोग जाते थे, वहाँ मैं भी जाता था। मैं सदस्यता कार्ड पर सैकड़ों, यहाँ तक कि हजारों युआन पानी की तरह बहा देता था। इस तरह, जैसे ही मेरा वेतन आता, मैं तुरंत उसका उपयोग अपने क्रेडिट कार्ड के कर्ज और मासिक किश्तें चुकाने में कर देता था। कभी-कभी, मैं एक पैसा नहीं बचा पाता था, यहाँ तक कि जो कमी होती थी उसे भी पूरा करना पड़ता था, इसलिए मेरे क्रेडिट कार्ड के बिल बढ़ते ही गए। पहले तो मैं चिंतित था कि अगर मैं अपना कर्ज नहीं चुका पाया तो क्या होगा। लेकिन मैंने सोचा कि जैसी मेरी क्षमता है, उससे पैसा कमाना कोई मसला नहीं होगा और इसके अलावा, मेरे पास अचल संपत्ति के रूप में एक घर है, जिसे मैं कुछ सालों में कीमत बढ़ने पर बेचकर एक बड़ी रकम कमा सकता हूँ। इतने मजबूत सहारे के साथ मुझे किस बात का डर था? इसलिए मैंने इसकी चिंता करना छोड़ दिया।

लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ कि 2019 के अंत में एक दुर्घटना ने मेरे खूबसूरत सपने को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया। एक दिन काम के बाद, मैं तीन सहकर्मियों के साथ शराब पीने गया और घर लौटते समय, ड्राइवर ने मजे के लिए गाड़ी तेज चलानी शुरू कर दी। चूँकि वह बहुत तेज गाड़ी चला रहा था, इसलिए वह समय पर ब्रेक नहीं लगा पाया और कार सड़क से उतरकर एक घर से जा टकराई। कार मौके पर ही पूरी तरह से नष्ट हो गई और हम चारों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। आखिर में ड्राइवर की आँत फट गई और आँतों से खून बहने लगा और सामने बैठे यात्री की रीढ़ की हड्डी टूट गई। सौभाग्य से, मैं ड्राइवर के पीछे बैठा था और हम चारों में मुझे सबसे कम चोट लगी थी, मेरे दाहिने हाथ में केवल एक फ्रैक्चर आया था। लेकिन मेरे बगल में बैठा मेरा सहकर्मी इतना भाग्यशाली नहीं था। घर के सामने एक बिजली का खंभा था और ड्राइवर ने घर से बचने के लिए स्टीयरिंग व्हील को बाईं ओर घुमा दिया था। नतीजतन, पिछली सीट पर बैठा मेरा सहकर्मी खंभे से जोर से टकरा गया, उसका जिगर फट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जब भी मैं इसके बारे में सोचता हूँ तो मेरी रूह काँप जाती है। साथ ही मैं वाकई हिल गया था और खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा था। मुझे इस बात ने झकझोर दिया कि इंसान की जिंदगी कितनी नाजुक होती है, जीवन और मौत एक क्षण में हो सकते हैं और कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता कि अगले पल क्या होगा। मेरा तो सौभाग्य था नहीं तो अगर ड्राइवर ने स्टीयरिंग व्हील दाईं ओर घुमाया होता या मैं अपने सहकर्मी की सीट पर बैठा होता, तो मरने वाला मैं होता। मुझे ऐसा लगा जैसे, स्वर्ग ने मेरे अनजाने यह सब व्यवस्थित किया, मुझे इस विपत्ति से बचने दिया। बाद में, मृतक के परिवार ने मुआवजे की माँग की। हम तीनों ने मिलकर मामले को सुलझाने के लिए मुआवजे के तौर पर 8,00,000 युआन जमा किए। उस समय मुझ पर 3,00,000 युआन का कर्ज हो गया था। जब भी मैं कार के कर्ज, घर के कर्ज और लाखों के क्रेडिट कार्ड के बिलों के बारे में सोचता तो मैं बहुत उदास हो जाता। मैंने सोचा, भविष्य में मैं कैसे जियूँगा? कुछ समय तक हताश रहने के बाद, मैंने खुद को सँभालने और पैसे कमाने और अपना कर्ज चुकाने के लिए घर बेचना जारी रखने का फैसला किया। लेकिन उसके ठीक बाद, 2020 की शुरुआत में अचानक फैली वैश्विक कोविड-19 महामारी ने मेरे जीवन को एक और जानलेवा झटका दिया। लंबे समय तक शहर में लॉकडाउन के कारण सभी लोग घर पर ही अलग-थलग थे, बिक्री कार्यालय खाली था और बिक्री ठप हो गई। बाद में, लागत में कटौती करने के लिए, कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन का केवल 50% भुगतान किया। मैंने मन में सोचा, “सब खत्म हो गया। इस बार उबरने के लिए मैं कुछ नहीं कर सकता। यह तो कार और घर की मेरी मासिक किस्तों के लिए भी काफी नहीं है और फिर लाखों के क्रेडिट कार्ड के बिलों के बारे में भी सोचना है। अगर मैंने भुगतान करना बंद कर दिया तो बैंक घर ले लेगा और उसकी नीलामी कर देगा और अगर मैं अपना कर्ज नहीं चुका पाया तो मेरा क्रेडिट काली सूची में डाल दिया जाएगा, और फिर मैं सब कुछ खो दूँगा।” मैंने अपना नया खरीदा हुआ घर बेचने के बारे में सोचा, लेकिन ठीक उसी समय डेवलपर खुद को दिवालिया घोषित कर भाग गया, जिससे घर अधूरे रह गए और उन्हें सौंपने में अनिश्चितकाल के लिए देरी हो गई। कार और घर की मासिक किस्तों को पूरा करने के लिए मेरे पास अपने क्रेडिट कार्ड पर कई किस्त योजनाएँ लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। तब से मैं ऊँची ब्याज दरों के बोझ तले दब गया और मैंने खुद को कर्ज के दलदल में जीते हुए पाया।

उस दौरान मैं हताश हो गया, जीने का साहस खो दिया और जीवन से पूरी तरह निराश हो गया। मैं अक्सर सोचता, “कार और घर खरीदने का क्या मतलब था? अब कार बेकार पड़ी है और घर अधूरा है और बेचा नहीं जा सकता। अगर मैं उस कार दुर्घटना में मर गया होता तो कार और घर का मालिक होने का क्या मतलब होता?” मेरे दुख में मेरी माँ ने एक बार फिर मुझे अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार किया। माँ ने कहा, “लोगों का जीवन परमेश्वर के हाथों में है। तुम्हें परमेश्वर के सामने आकर उसके वचन ईमानदारी से पढ़ने चाहिए, और तुम्हें जो भी कठिनाइयाँ या दर्द हो, तुम्हें परमेश्वर को बताना चाहिए और इस कठिनाई से निकलने में उसकी मदद माँगनी चाहिए।” उस समय मुझे परमेश्वर के वचनों का एक अंश याद आया जो मेरी माँ अक्सर मुझे सुनाती थीं : “एक के बाद एक सभी तरह की आपदाएँ आ पड़ेंगी; सभी देश और स्थान आपदाओं का सामना करेंगे : हर जगह महामारी, अकाल, बाढ़, सूखा और भूकंप हैं। ये आपदाएँ बस एक-दो जगहों पर नहीं आ रही हैं, न ही वे एक-दो दिनों में समाप्त होंगी, बल्कि वे अधिकाधिक बड़े क्षेत्र तक फैल जाएँगी और अधिकाधिक गंभीर होती जाएँगी। इस दौरान एक के बाद एक तमाम तरह के कीट-प्रकोप आएँगे, और हर जगह नरभक्षण की घटनाएँ होंगी। असंख्य देशों और लोगों पर यह मेरा न्याय है(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 65)। परमेश्वर ने बहुत पहले ही कह दिया था कि आपदाएँ और भी बड़ी होती जाएँगी और अब ये वचन पूरे हो गए हैं। मेरी माँ अक्सर मुझसे परमेश्वर में आस्था के बारे में बात करती थीं, लेकिन मैं हमेशा उदासीन रहता था, घर और कार खरीदने पर जोर देता था और दूसरों की प्रशंसा पाने के लिए अलग दिखने की कोशिश करता था। लेकिन चीजें वैसी नहीं हुईं जैसी मैंने चाही थीं। अपने कर्ज चुकाने के लिए घर का उपयोग करने की मेरी उम्मीदें टूट गईं और मैं भारी कर्ज के बोझ तले दब गया। महामारी के दुनिया भर में फैलने और प्रतिदिन हजारों लोगों के मरने के साथ, जलवायु लगातार बिगड़ रही थी और वैश्विक आपदाएँ और युद्ध एक के बाद एक हो रहे थे, मुझे सच में लगा कि अंत के दिनों के महाविनाश आ गए हैं। अगर मैंने अब भी परमेश्वर में विश्वास नहीं किया तो एक दिन मैं भी आपदा में पड़ सकता हूँ। मैं जिद करते हुए गलत तरीके से चीजें करते नहीं रह सकता था और मैंने लगन से परमेश्वर के वचन पढ़ने का मन बना लिया। बाद में परमेश्वर के वचन पढ़कर मैं कुछ सत्य समझ गया, मेरे दिल को सहारा मिला और मुझे जीते रहने की आशा मिली।

अस्थायी रूप से लॉकडाउन के हटने के साथ मेरा काम धीरे-धीरे सामान्य हो गया। चूँकि मैंने कई क्रेडिट कार्डों के लिए किस्त योजनाएँ बना रखी थीं, इसलिए हर महीने मुझे भारी ब्याज शुल्क देना पड़ रहा था और मेरा मासिक वेतन लगभग पूरी तरह से इसे चुकाने में ही चला जाता था। तब मुझे एहसास हुआ कि हालाँकि बैंक की किस्त योजना ने उस समय मेरे पुनर्भुगतान के दबाव को कम कर दिया था, पर यह असल में सूदखोरी थी! मुझे ऐसा लगा जैसे मैं कर्ज के अथाह कुंड में गिर गया हूँ, अगर ऐसा ही चलता रहा तो मैं कभी भी भुगतान पूरा नहीं कर पाऊँगा और मैं अपना बाकी का जीवन अपना कर्ज चुकाने की कोशिश में बिता दूँगा। मासिक बिलों को देखकर मैं खुद को रोने से नहीं रोक पाता था। अपनी पीड़ा में मैं परमेश्वर से गुहार लगाने लगा, “परमेश्वर, मैं जानता हूँ कि तुम पर विश्वास करना ही जीवन का सही मार्ग है और मैं ईमानदारी से सत्य का अनुसरण करने को तैयार हूँ। लेकिन अभी मैं वास्तविक कठिनाइयों में हूँ और मुझे नहीं पता कि उन्हें कैसे हल किया जाए। मैं बहुत पीड़ा में हूँ। कृपया मेरे लिए एक रास्ता खोलो।” बाद में, संयोग से, मैंने ऑनलाइन देखा कि वीडियो संपादन करके पैसा कमाया जा सकता है, इसलिए मैंने ऑनलाइन वीडियो संपादन करने की कोशिश की। मुझे आश्चर्य हुआ कि मेरे द्वारा पोस्ट किया गया एक वीडियो अचानक वायरल हो गया। उसके बाद मैं वीडियो संपादन करता रहा और उन्हें मंचों पर पोस्ट करता रहा, तीन महीनों में मैंने लगभग 1,00,000 युआन कमा लिए, जिससे मुझ पर आर्थिक दबाव काफी कम हो गया। मैं बहुत भावुक हो गया। मैंने सच में परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और संप्रभुता का अनुभव किया था। परमेश्वर ने मेरी प्रार्थनाएँ सुन ली थीं और मेरी कठिनाइयों में मेरी मदद की थी। और मुझे उसके वचन इकट्ठा करने और पढ़ने के लिए अधिक समय मिल सका। इसलिए, मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया, फिर मैंने वीडियो संपादन करते हुए सभाओं में भाग लेने के लिए और समय निकाला। मेरे इस्तीफा देने के कुछ समय बाद अगुआ ने मेरे लिए पाठ-आधारित कर्तव्य की व्यवस्था की और मैं सच में बहुत उत्साहित था। मैं दिन में सभा करता और अपने कर्तव्य निभाता और शाम को अपना कर्ज चुकाने के लिए वीडियो संपादन करके पैसा कमाता। बाद में और अधिक लेख आने लगे जिन्हें छाँटने की जरूरत थी, मुझे वीडियो संपादन के लिए और समय नहीं मिल पा रहा था। मैं हर दो दिन में एक वीडियो पोस्ट करने की जगह हर पाँच दिन में केवल एक बार पोस्ट करने लगा और कभी-कभी छुट्टियों के दौरान, ग्राहकों को तत्काल वीडियो संपादन की जरूरत होती थी, लेकिन चूँकि वे मुझसे संपर्क नहीं कर पाते थे, इसलिए वे किसी और के पास चले जाते थे, जिससे बहुत सारे ऑर्डर हाथ से निकल गए। अपनी आय को धीरे-धीरे कम होते देखकर मेरा दिल बदलने लगा। मैंने सोचा, “मेरा कर्तव्य सच में मेरा समय ले रहा है। मुझे आखिरकार पैसा कमाने का यह अवसर मिला है, वापसी करने का शायद यह मेरा एकमात्र मंच हो। अगर मैं लगभग एक और साल तक इसी तरह लगा रहा तो मैं न केवल अपना सारा कर्ज चुका पाऊँगा, बल्कि आर्थिक आजादी भी मिल जाएगी और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की प्रशंसा फिर से हासिल करूँगा। अगर मैं पैसा कमाने का यह मौका चूक गया तो पता नहीं मुझे कब तक इंतजार करना पड़ेगा? मैं इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ सकता। इसके अलावा, पर्याप्त पैसा कमाकर ही मैं अपने कर्तव्यों को ठीक से करने के लिए अपने मन को शांत रख सकूँगा। वरना मैं कर्ज से परेशान रहूँगा और अपने कर्तव्यों पर ध्यान नहीं दे पाऊँगा।” बाद में हालाँकि मैं हर दिन अपने कर्तव्य निभाता था, पर अपने दिल में मैं यही सोचता रहता था कि वीडियो के लिए कॉपी कैसे लिखूँ। जब मैं घर आता, तो मैं सामग्री इकट्ठा करने और वीडियो संपादन करने के लिए अपने कंप्यूटर पर बैठ जाता, भाई-बहनों द्वारा भेजे गए लेखों को छाँटने के लिए समय निकालने की जहमत नहीं उठाता था। मैंने तीन महीनों में एक भी लेख जमा नहीं किया था।

फरवरी 2023 में एक दिन एक वीडियो मंच ने मुझे एक वीडियो बनाने के लिए आमंत्रित किया। मैंने सिर्फ चार घंटे में वीडियो पूरा कर लिया, अप्रत्याशित रूप से, वीडियो जारी होने के बाद तुरंत वायरल हो गया और सात दिनों में मैंने 1,30,000 युआन की शुद्ध आय अर्जित की, जिससे मैं अपना आधा कर्ज चुका सका। मैंने सोचा, “इस गति से पैसा कमाने के साथ, अगर मैं और छह महीने कड़ी मेहनत करता रहा तो मैं अपना सारा कर्ज चुका पाऊँगा, फिर मैं प्रसिद्धि और लाभ दोनों फिर से पा सकूँगा और मुझे मेरे दोस्तों और रिश्तेदारों की प्रशंसा मिलेगी। मैं अपने समृद्ध और प्रशंसित होने के दिनों में वापस लौट पाऊँगा। मैं ऐसा दुर्लभ अवसर नहीं चूक सकता! मुझे पैसा कमाने के लिए जितना हो सके उतना समय निकालना होगा और अपने कर्तव्यों पर खर्च होने वाले समय में कटौती करनी होगी।” लेकिन जब मैंने इस तरह सोचा, तो मुझे बेचैनी हुई। मैंने उस समय के बारे में सोचा जब मैं गहरे कर्ज में डूबा था, बेबस था और सोचता था कि मर जाना ही बेहतर है। यह परमेश्वर का अनुग्रह था जो मुझे आस्था के मार्ग पर ले आया। मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की थी, उससे मेरे लिए एक रास्ता खोलने और मेरी कठिनाइयों से निकलने में मेरी मदद करने के लिए कहा था और मैंने ठीक से परमेश्वर में विश्वास करने और सत्य का अनुसरण करने का फैसला किया था। अब परमेश्वर ने मेरे लिए एक रास्ता खोल दिया था और मेरे कर्ज का एक बड़ा हिस्सा चुकाने में मेरी मदद की थी। अगर मैं पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के पीछे भागता रहा तो क्या मैं परमेश्वर को धोखा नहीं दे रहा होऊँगा? मैंने यह भी सोचा कि कैसे मैंने प्रसिद्धि और लाभ के अनुसरण में पैसा कमाने के लिए हर संभव तरीका आजमाया था, अंत में न केवल मैं पैसा कमाने में असफल रहा, बल्कि कार दुर्घटना के कारण मैंने बहुत कुछ खो भी दिया। अब मैंने सिर्फ चार घंटे में पूरे किए गए एक वीडियो से लगभग एक साल के बराबर पैसा कमा लिया था। यह सब परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और संप्रभुता थी। मैंने देखा कि एक व्यक्ति अपने जीवन में कितना कमाता है, यह सब परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत है। जब उसका पैसा कमाने का समय नहीं होता तो भले ही वह पैसा कमाने के लिए हाड़-तोड़ मेहनत करे, पैसा विभिन्न तरीकों से खो जाएगा। लेकिन जब उसका पैसा कमाने का सही समय होता है तो वह बिना किसी मेहनत के इसे कमा सकता है। मैं हमेशा अपनी क्षमताओं पर भरोसा करके बहुत सारा पैसा कमाना चाहता था, लेकिन अगर मेरी किस्मत में ज्यादा पैसा नहीं है तो मैं चाहे कितनी भी कोशिश कर लूँ, अंत में यह व्यर्थ ही होगा। यह सोचकर, मैंने जल्दी से प्रार्थना की, “परमेश्वर, मैं अब जो भी पैसा कमा रहा हूँ, वह तुम्हारा मेरे लिए मेरा कर्ज कम करने का एक रास्ता खोलना है, जिससे मैं ठीक से तुम पर विश्वास कर सकूँ और अपने कर्तव्य निभा सकूँ, लेकिन पैसा कमाने के प्रलोभन का सामना करते हुए मैं इसे छोड़ ही नहीं पा रहा हूँ। कृपया मेरा मार्गदर्शन करो और मुझे तुम्हारे इरादों को समझने और अभ्यास का मार्ग खोजने में सक्षम करो।”

बाद में मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े और अभ्यास करना सीखा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “परमेश्वर ने बहुत पहले ही लोगों से कह दिया था कि उन्हें केवल भोजन और वस्त्र से ही संतुष्ट रहना चाहिए। चाहे तुम किसी भी काम या पेशे में संलग्न रहो, उसके साथ एक करियर के रूप में पेश मत आओ; उसे दुनिया में आगे बढ़ने या भाग्य बनाने और आराम से जीने के एक साधन या माध्यम के रूप में मत देखो। तुम जिस किसी भी काम या पेशे में संलग्न रहते हो, वह केवल तुम्हारी आजीविका चलाने का एक साधन है। जब तक यह एक सामान्य जीवन जीने में सहयोग कर सकता है और तुम्हारे दिन में तीन बार के भोजन और बुनियादी आवश्यकताओं की गारंटी दे सकता है, तुम्हें संतुष्ट रहना चाहिए; तुम्हें अपने जीवन की आवश्यकताओं के मामले में असंयत उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए। यदि तुम विशेष परिस्थितियों का सामना करते हो और कुछ अस्थायी कठिनाइयाँ होती हैं, तो तुम अपनी तत्काल जरूरतों का समाधान करने के लिए कोई और नौकरी करने की कोशिश कर सकते हो—यह स्वीकार्य है। चाहे तुम कोई भी काम करो, जब तक वह उचित और कानूनी है और किसी भी मुसीबत या मुकदमे का कारण नहीं बनेगा, तुम उसे कर सकते हो। अपनी असंयत दैहिक इच्छाओं को संतुष्ट करने के लिए कुछ जोखिम भरे या यहाँ तक कि अवैध चीजें मत करो, जिसके परिणामस्वरूप तुम प्रलोभन में पड़ जाओ या दलदल में फँस जाओ। यह खतरनाक होगा। कम गंभीर मामलों में, तुम एक ऋण संकट में पड़ सकते हो; अधिक गंभीर मामलों में, तुम जेल जा सकते हो और अपने शेष जीवन के लिए, तुम्हारे लिए अपने पैरों पर वापस खड़ा होना मुश्किल होगा। यह बहुत मुसीबत भरा होगा। यदि परमेश्वर में विश्वास करने वाला कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो वह उद्धार पाने का अपना मौका बर्बाद कर देगा। बाइबल में एक अंश है जो कहता है, ‘यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्हीं पर सन्तोष करना चाहिए’ (1 तीमुथियुस 6:8)। जब तुम काम नहीं कर रहे हो, उस समय का उपयोग परमेश्वर में विश्वास करने, सभाओं में भाग लेने, अपने कर्तव्यों को करने और सत्य का अनुसरण करने के लिए करो। यह तुम्हारा मिशन है और यही एक विश्वासी के जीवन का मूल्य और अर्थ है। ... यदि तुम परमेश्वर में अपने विश्वास में सत्य प्राप्त करना और जीवन प्राप्त करना चाहते हो, तो तुम्हें अपने अनुसरण में कड़ी मेहनत करनी चाहिए, तुमसे जितना हो सके तुम्हें सत्य का अनुसरण करने और अपना कर्तव्य अच्छी तरह से करने पर अधिक समय और ऊर्जा खर्च करने का प्रयास करना चाहिए। लोगों के लिए परमेश्वर में अपने विश्वास में सत्य का अनुसरण करने का रास्ता चुनना बहुत महत्वपूर्ण है और इसके लिए उन्हें कीमत चुकानी पड़ती है। परमेश्वर लोगों के परिणाम इस आधार पर निर्धारित करता है कि उनके पास सत्य है या नहीं। यदि तुम देह के जीवन के लालची हो, केवल भोजन और वस्त्र से संतुष्ट नहीं हो और एक बेहतर जीवन जीना चाहते हो, अधिक पैसा कमाना चाहते हो और दूसरों से बेहतर जीवन शैली चाहते हो, तो तुम अपनी ऊर्जा और समय सत्य का अनुसरण करने पर बिल्कुल भी खर्च नहीं कर सकते। यदि तुम्हारे दैहिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है, फिर भी तुम कई वर्षों तक परमेश्वर में विश्वास करने के बाद सत्य प्राप्त करने में असफल रहते हो, क्योंकि तुम अपना अधिकांश समय और ऊर्जा दैहिक आनंद पर खर्च करते हो और सत्य का अनुसरण करने और अपना कर्तव्य करने पर नहीं, तो क्या तुम्हारे जीवन को नुकसान नहीं होगा? यह तुम्हारे परिणाम और मंजिल को प्रभावित करेगा, है न? (हाँ।)” (वचन, खंड 6, सत्य के अनुसरण के बारे में, सत्य का अनुसरण कैसे करें (20))। “चाहे लोग कोई भी नौकरी करें, यदि वे भोजन और वस्त्र के बिंदु तक पहुँचने पर संतुष्ट नहीं हैं, तो वे जिन चीजों के पीछे भागते हैं वह प्रसिद्धि, लाभ और दैहिक आनंद से जुड़ा है। और यदि उनकी असंयत इच्छाएँ हैं—न केवल अधिक दैहिक सुख का आनंद लेना चाहते हैं, बल्कि अमीरों की सूची में भी आना चाहते हैं—तो वे जिन चीजों के पीछे भागते हैं वे विशुद्ध रूप से प्रसिद्धि और लाभ हैं। वे जो भी कीमत चुकाते हैं वह प्रसिद्धि, लाभ, रुतबे और दैहिक आनंद के लिए है; यह अर्थहीन है और यह खोखला है, ठीक एक सपने की तरह। अंत में वे जो प्राप्त करते हैं वह बिल्कुल कुछ भी नहीं है(वचन, खंड 6, सत्य के अनुसरण के बारे में, सत्य का अनुसरण कैसे करें (20))। परमेश्वर के वचनों ने मुझे अभ्यास का मार्ग दिखाया। मुझे अपने करियर को ऊँची छलाँग लगाने या वापसी करने का मंच नहीं समझना चाहिए, और मुझे सिर्फ भोजन और कपड़ों से ही संतुष्ट रहना चाहिए। परमेश्वर का इरादा था कि मैं एक सामान्य जीवन बनाए रखूँ ताकि मेरे पास अपना कर्तव्य निभाने और सत्य का अनुसरण करने के लिए अधिक समय और ऊर्जा हो, ताकि मैं पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के पीछे भागने के भँवर में वापस गिरने से बच सकूँ। जब मैंने देखा कि वीडियो संपादन में कितना पैसा है और इससे मैंने जल्दी से अपना बहुत सारा कर्ज चुका दिया तो मैं वीडियो संपादन करके और पैसा कमाना चाहता था—न केवल अपना कर्ज चुकाने के लिए, बल्कि वापसी करने और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की प्रशंसा फिर से हासिल करने के लिए भी। इसलिए मैंने अपने सारे विचार और समय वीडियो संपादन में लगा दिए और मैंने अपने कर्तव्यों पर न कोई विचार किया, न ध्यान दिया। जब मेरे कर्तव्य व्यस्त होते थे तो मुझे अपने दिल में प्रतिरोध महसूस होता था, क्योंकि मैं बस पैसा कमाने के लिए अधिक समय का उपयोग करना चाहता था। अपनी इच्छा पूरी करने के लिए मैंने अपना सारा समय और ऊर्जा पैसा कमाने में लगा दिया। मैंने अपने कर्तव्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया और मैंने सत्य पाने के कई अवसर खो दिए। अगर मैं इसी तरह चलता रहा, दस हजार कमाकर एक लाख चाहा, फिर एक लाख कमाकर और अधिक चाहा, तो मेरी इच्छाएँ अंतहीन होंगी और कभी संतुष्ट नहीं होंगी। मैं बस पैसे, प्रसिद्धि और लाभ से नियंत्रित होता रहूँगा और फिर से पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के भँवर में गिर जाऊँगा। भले ही भविष्य में मुझे पैसा, प्रसिद्धि और लाभ मिल भी जाए, मैं परमेश्वर से और दूर होता जाऊँगा, अपना कर्तव्य निभाना बंद कर दूँगा और सत्य को समझने में नाकाम रहूँगा। इस तरह जीने का क्या मतलब होगा? उस समय के बारे में सोचता हूँ, जब मैं लाचार था और कोई उम्मीद नहीं थी, यह परमेश्वर के वचन का मार्गदर्शन था जिसने मुझे जीने की उम्मीद दी, जब मैं भारी कर्ज में था और कोई रास्ता नहीं था तो परमेश्वर ने मेरे लिए एक रास्ता खोला, मुझे पैसा कमाने और मेरी वास्तविक कठिनाइयों को हल करने में सक्षम बनाया और अपना कर्तव्य निभाने के लिए समय और ऊर्जा दी। लेकिन अब, पैसे के प्रलोभन का सामना करते हुए मैं एक बार फिर बड़ा पैसा कमाना और अलग दिखना चाहता था। मैंने तो अपना कर्तव्य भी लापरवाही से किया और काम में देरी की। मैं निश्चित रूप से कर्ज चुकाने में देरी किए बिना अपना कर्तव्य पूरा कर सकता था, लेकिन मैं संतुष्ट नहीं था, बार-बार पैसा कमाने के प्रलोभनों का सामना करते हुए, मैंने अपना कर्तव्य एक तरफ रख दिया। मुझमें सच में कोई जमीर नहीं था! मैंने परमेश्वर से किए अपने संकल्प का उल्लंघन किया था; मैंने जो कुछ भी कहा था, वह उसे धोखा देना था! मैं सच में जीने के लायक नहीं था! मैं अब और बड़े पैसे का पीछा नहीं कर सकता था और मुझे अपनी ऊर्जा अपने कर्तव्य में लगानी थी। मैं पैसा कमाने और अपना कर्ज चुकाने के लिए वीडियो संपादन करने का समय निकाल सकता था, जब तक कि इससे मेरे कर्तव्य में कोई बाधा न आए। बाद में, मुझे अपने कर्तव्य के प्रति एक बोझ का एहसास होने लगा। मैंने शेष छूटे लेखों के ढेर की छँटाई पूरी कर ली और मैं सभाओं में अपना दिल लगा सका।

बाद में मैंने परमेश्वर का एक और वचन पढ़ा और मुझे धन, प्रसिद्धि और लाभ के प्रति अपने लगाव के मूल कारण की कुछ समझ मिली। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “वास्तव में, मनुष्य की आकांक्षाएँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, उसकी इच्छाएँ चाहे कितनी भी यथार्थपरक क्यों न हों या वे कितनी भी उचित क्यों न हों, वह सब जो मनुष्य हासिल करना चाहता है और वह सब जो मनुष्य खोजता है, वह अटूट रूप से दो शब्दों से जुड़ा है। ये दो शब्द हर व्यक्ति के लिए उसके संपूर्ण जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और ये ऐसी चीजें हैं जिन्हें शैतान मनुष्य के भीतर बैठाना चाहता है। वे दो शब्द कौन-से हैं? वे हैं ‘प्रसिद्धि’ और ‘लाभ’। शैतान एक बहुत ही सौम्य तरीका चुनता है, एक ऐसा तरीका जो मनुष्य की धारणाओं के बहुत ही अनुरूप है और जो बहुत आक्रामक नहीं है, ताकि वह लोगों से अनजाने में ही जीवित रहने के अपने साधन और नियम स्वीकार करवा ले, जीवन लक्ष्य और जीवन की दिशाएँ विकसित करवा ले और जीवन की आकांक्षाएँ रखवाने लगे। अपने जीवन की आकांक्षाओं के बारे में लोगों के वर्णन कितने ही आडंबरपूर्ण क्यों न लगते हों, ये आकांक्षाएँ हमेशा ‘प्रसिद्धि’ और ‘लाभ’ के इर्द-गिर्द घूमती हैं। कोई भी महान या प्रसिद्ध व्यक्ति—या वास्तव में कोई भी व्यक्ति—जीवन भर जिन सारी चीजों का पीछा करता है वे केवल इन दो शब्दों से जुड़ी होती हैं : ‘प्रसिद्धि’ और ‘लाभ’। लोगों को लगता है कि एक बार उनके पास प्रसिद्धि और लाभ आ जाए तो उनके पास ऊँचे रुतबे और अपार धन-संपत्ति का आनंद लेने और जीवन का आनंद लेने के लिए पूँजी आ जाती है। उन्हें लगता है कि एक बार उनके पास प्रसिद्धि और लाभ आ जाए तो उनके पास वह पूँजी होती है जिसका इस्तेमाल वे सुख खोजने और देह के उच्छृंखल आनंद में लिप्त रहने के लिए कर सकते हैं। लोग जिस प्रसिद्धि और लाभ की कामना करते हैं उसकी खातिर वे खुशी से और अनजाने में, अपने शरीर, दिल और यहाँ तक कि अपनी संभावनाओं और नियतियों समेत वह सब जो उनके पास है, शैतान को सौंप देते हैं। वे ऐसा बिना किसी हिचकिचाहट के करते हैं, बिना एक पल के संदेह के करते हैं और उनके पास कभी जो कुछ था उसे वापस लेने की जागरूकता के बिना करते हैं। लोग जब इस प्रकार खुद को शैतान को सौंप देते हैं और उसके प्रति वफादार हो जाते हैं तो क्या वे खुद पर कोई नियंत्रण बनाए रख सकते हैं? कदापि नहीं। वे पूरी तरह से और शत-प्रतिशत शैतान से नियंत्रित होते हैं। वे पूरी तरह से और सर्वथा इस दलदल में धँस जाते हैं और अपने आप को मुक्त कराने में असमर्थ रहते हैं। जब कोई प्रसिद्धि और लाभ की दलदल में फँस जाता है तो फिर वह कभी उसे नहीं खोजता जो उजला है, जो न्यायोचित है या वे चीजें नहीं खोजता जो खूबसूरत और अच्छी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों के लिए प्रसिद्धि और लाभ का प्रलोभन बहुत बड़ा होता है और ये ऐसी चीजें हैं जिनका अनुसरण लोग अंतहीन ढंग से अपने पूरे जीवन भर और यहाँ तक कि अनंत काल तक कर सकते हैं। क्या यह असली स्थिति नहीं है?(वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI)। परमेश्वर के उजागर करने वाले वचन पढ़ने के बाद मैं समझ गया कि मेरी लगातार और अधिक पैसा कमाने और प्रशंसा पाने की इच्छा की जड़ यह थी कि मैं “प्रसिद्धि” और “लाभ” से मजबूती से बँधा हुआ था। छोटी उम्र से ही मैंने देखा कि मेरे माता-पिता को रिश्तेदार और दोस्त नीची नजर से देखते थे और मुझे लगा कि इस तरह जीना सच में अपमानजनक है, इसलिए मैंने फैसला किया कि मुझे समृद्धि के लिए प्रयास करना होगा और प्रशंसा पानी होगी। मैं “आदमी ऊपर की ओर जाने के लिए संघर्ष करता है; पानी नीचे की ओर बहता है,” और “भीड़ से ऊपर उठो” जैसे शैतानी जहरों के साथ जी रहा था। दूसरों को घर खरीदने में निवेश करते और प्रसिद्धि और लाभ दोनों प्राप्त करते देखकर, मैं भी इस तरीके का उपयोग करके अलग दिखना और दोस्तों और रिश्तेदारों की प्रशंसा पाना चाहता था। साफ था कि मेरे पास आर्थिक साधन नहीं थे, फिर भी मैंने घर और कार खरीदने के लिए कर्ज लेने में संकोच नहीं किया और मैंने बड़ी मात्रा में खरीदारी भी की, विभिन्न ऊँचे दर्जे की जगहों पर जाता और विलासिता की वस्तुएँ खरीदता, खुद को एक सफल व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता। हालाँकि मेरा जीवन समृद्ध और अंतहीन रूप से मोहक लग रहा था, परदे के पीछे मैं ऊँची ब्याज दरों के पुनर्भुगतान के बोझ तले दबा हुआ था। दूसरों की प्रशंसा पाने के लिए मैं पूरी तरह से सतही हो गया और मैंने बार-बार परमेश्वर द्वारा उद्धार को ठुकरा दिया। मैंने कार और घर खरीदने के लिए कर्ज लिया, जिससे लाखों का कर्ज जमा हो गया और फिर मुझे एक कार दुर्घटना और महामारी के दोहरे झटके लगे। मैं एक जगह का कर्ज चुकाने के लिए दूसरी जगह से उधार लेने के तरीके खोजने में अपना दिमाग दौड़ाते हुए दिन बिताता था। उस दौरान, कर्ज से मेरा दिमाग चकरा गया था और चिंता से मेरे बाल सफेद हो गए थे। मुझे लगा कि मर जाना ही बेहतर है। जब मैंने परमेश्वर को पाया तो उसने मेरे लिए एक रास्ता खोला, मुझे सभाओं और अपने कर्तव्य निभाने के लिए अधिक समय दिया, लेकिन पैसा कमाने का मौका मिला तो मैं पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के पीछे जाना चाहता था। इस पूरी यात्रा के दौरान, मैं पैसे, प्रसिद्धि और लाभ के पीछे भागता रहा और जब मैं धक्के खाकर आहत हो गया, तब भी मुझे वापस मुड़ना नहीं सूझा। मेरा दिल पूरी तरह से अड़ियल हो गया था! परमेश्वर के उद्धार और ऊँचा उठाए जाने के समक्ष मैंने न केवल इसे सँजोया नहीं, बल्कि यह भी सोचा कि मेरे कर्तव्यों से मेरे पैसे के अनुसरण में देरी हो रही है, मैंने तो लगभग सत्य का अनुसरण करने और बचाए जाने का मौका खो ही दिया था। मुझे आखिरकार एहसास हुआ कि पैसा, प्रसिद्धि और लाभ का अनुसरण एक ऐसा मार्ग है जहाँ से कोई वापसी नहीं है और अगर मैं वापस नहीं मुड़ा तो मैं मौत में पूरी तरह से शैतान का साथी बन जाऊँगा।

मैंने सोचा, “किस तरह का जीवन वास्तव में मूल्यवान और सार्थक है?” मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े : “परमेश्वर प्रत्येक व्यक्ति के जन्म से लेकर वर्तमान तक के दशकों के दौरान केवल उसके लिए कीमत ही नहीं चुकाता। परमेश्वर के अनुसार, तुम अनगिनत बार इस दुनिया में आए हो, और अनगिनत बार तुम्हारा पुनर्जन्म हुआ है। इसका प्रभारी कौन है? परमेश्वर इसका प्रभारी है। तुम्हारे पास इन चीजों को जानने का कोई तरीका नहीं है। हर बार जब तुम इस दुनिया में आते हो, परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से तुम्हारे लिए व्यवस्थाएं करता है : वह व्यवस्था करता है कि तुम कितने साल जियोगे, किस तरह के परिवार में पैदा होगे, कब तुम अपना घर और करियर बनाओगे, और साथ ही, तुम इस दुनिया में क्या करोगे और कैसे अपनी आजीविका चलाओगे। परमेश्वर तुम्हारे लिए आजीविका चलाने के तरीके की व्यवस्था करता है, ताकि तुम इस जीवन में अपना मिशन सुचारु रूप से पूरा कर सको। ... जब तुम परमेश्वर का अनुसरण करते हो तो चाहे तुम कष्ट सहते हो या कीमत चुकाते हो, तुम वास्तव में परमेश्वर के साथ सहयोग कर रहे हो। परमेश्वर हमसे जो भी करने को कहता है, हमें परमेश्वर के वचन सुनने चाहिए और उनके अनुसार ही अभ्यास करना चाहिए। परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह या ऐसा कुछ मत करना जिससे उसे दुख हो। परमेश्वर के साथ सहयोग करने के लिए तुम्हें थोड़ा सा कष्ट सहना होगा और तुम्हें कुछ चीजें त्यागनी और दरकिनार करनी होंगी। तुम्हें शोहरत, लाभ, रुतबा, पैसा और सांसारिक सुखों को छोड़ना होगा—यहाँ तक कि तुम्हें शादी-विवाह, कामकाज और संसार में अपने उज्ज्वल भविष्य जैसी चीजों का भी त्याग करना होगा। क्या परमेश्वर यह जानता है कि तुम इन चीजों को छोड़ चुके हो? क्या परमेश्वर यह सब देख सकता है? (हाँ।) परमेश्वर जब यह देखेगा कि तुमने इन चीजों को छोड़ दिया है तो वह क्या करेगा? (परमेश्वर को सांत्वना मिलेगी और वह प्रसन्न होगा।) परमेश्वर न केवल प्रसन्‍न होगा बल्कि कहेगा, ‘जो कीमत मैंने चुकाई थी वह फलीभूत हो गई है। लोग मेरे साथ सहयोग करने के इच्छुक हैं, उनके पास यह संकल्प है और मैंने उन्हें हासिल कर लिया है।’ परमेश्वर खुश और प्रसन्न है या नहीं, वह संतुष्ट है या नहीं, उसे सांत्वना मिली या नहीं, परमेश्वर का केवल यही रवैया नहीं है। वह कार्य भी करता है और वह उन नतीजों को देखना चाहता है जो उसके कार्य से प्राप्त होते हैं, वरना लोगों से उसकी अपेक्षाएँ निरर्थक हो जाएँगी। परमेश्वर मनुष्य पर जो अनुग्रह, प्रेम और दया दिखाता है वह केवल एक रवैया भर नहीं है—वे वास्तव में तथ्य भी हैं। वह तथ्य क्या है? वह यह है कि परमेश्वर अपने वचन तुम्हारे अंदर डालता है, तुम्हें प्रबुद्ध करता है, तुम्हें यह देखने देता है कि उसके बारे में क्या मनोहर है और वास्तव में इस दुनिया का सार क्या है, तुम्हें अत्यंत मानसिक स्पष्टता देता है और अपने वचन और सत्य समझने देता है। इस तरह, अनजाने ही, तुम सत्य प्राप्त कर लेते हो। परमेश्वर बहुत वास्तविक तरीके से तुम पर बहुत सारा काम करता है, तुम्हें सत्य प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। जब तुम सत्य प्राप्त कर लेते हो, जब तुम सबसे अनमोल चीज, अर्थात अनंत जीवन प्राप्त कर लेते हो, तब परमेश्वर के इरादे पूरे होते हैं। जब परमेश्वर देखता है कि लोग सत्य का अनुसरण कर रहे हैं और उसके साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, तो वह खुश और संतुष्ट होता है। वह तब एक निश्चित रवैया रखता है और जब उसके पास यह रवैया होता है तो वह कार्रवाई करता है और मनुष्य का अनुमोदन करता है और उसे आशीष देता है। वह कहता है, ‘मैं तुम्हें इनाम दूँगा। ये वे आशीष हैं जिनके तुम पात्र हो।’ और तब तुम सत्य और जीवन प्राप्त कर लोगे। जब तुम्हें सृष्टिकर्ता का ज्ञान होता है और तुम उससे प्रशंसा प्राप्त कर लेते हो, तब भी क्या तुम अपने दिल में खालीपन महसूस करोगे? तुम नहीं करोगे। तुम संतुष्ट महसूस करोगे और तुममें आनंद की भावना होगी। क्या यह एक मूल्यवान जीवन जीना नहीं है? यह सबसे मूल्यवान और सार्थक जीवन है(वचन, खंड 3, अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन, सत्य प्राप्त करने के लिए कीमत चुकाना बहुत महत्वपूर्ण है)। परमेश्वर के वचन पढ़ने के बाद मैं समझ गया कि मैं जिस परिवार में पैदा हुआ था और जिस समय मैंने परमेश्वर को पाया और अपने कर्तव्य निभाए, वह सब बहुत पहले ही परमेश्वर द्वारा व्यवस्थित किया गया था। यह परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा थी जिसने मुझे उस कार दुर्घटना में जीवित रहने दिया, यह परमेश्वर ही था जिसने मेरे लिए एक रास्ता खोला, जिससे मैं कर्ज के धुंध में फँसने के बाद आखिरकार फिर से रोशनी देख पाया और मुझे एक सृजित प्राणी के कर्तव्यों को पूरा करने का मौका मिला। परमेश्वर की सुरक्षा के बिना शैतान ने मुझे कब का नुकसान पहुँचा दिया होता। परमेश्वर के वचनों ने मुझे जीवन में दिशा भी दी, जिससे मैं समझ सका कि केवल सत्य का अनुसरण करना और परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए अपने कर्तव्य निभाना ही वास्तव में सार्थक और मूल्यवान है। मैंने परमेश्वर के बहुत सारे अनुग्रह और आशीषों का आनंद लिया है! यह सोचकर, मैंने पूरे दिल से अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने का फैसला किया, जब तक मेरे कर्तव्य में कोई बाधा न आए, मैं थोड़ा पैसा कमाने के लिए वीडियो संपादन के लिए कुछ समय निकाल सकता था—बस इतना कि उससे मेरे मासिक भुगतान और जीवन-यापन के खर्च पूरे हो जाएँ।

दो महीने बाद मुझे कलीसिया अगुआ चुन लिया गया। मैंने देखा कि लेखों की छँटाई करने की तुलना में एक अगुआ होने में अधिक काम और चिंताएँ शामिल थीं और इसके लिए अधिक समय और ऊर्जा की भी आवश्यकता थी। इसका मतलब यह था कि पैसा कमाने के मेरे अवसर कम होते जाएँगे। लेकिन इस बार मैं अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने के लिए तैयार था, इसलिए मैंने खुद को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित कर दिया। मुझे आश्चर्य हुआ कि तीन महीने बाद, जब मैं अपने फोन पर अपना व्यक्तिगत आयकर रिफंड सँभाल रहा था तो मैंने देखा कि 20,000 युआन का रिफंड सीधे मेरे खाते में जमा कर दिया गया था, जिससे आधे साल से भी अधिक समय के लिए मेरे घर के कर्ज की समस्या पूरी तरह से हल हो गई। मैंने सच में अनुभव किया कि जब तुम परमेश्वर के आयोजनों और व्यवस्थाओं के प्रति समर्पित होते हो और एक सृजित प्राणी का कर्तव्य अपनी पूरी क्षमता से निभाते हो तो परमेश्वर एक रास्ता खोलेगा ताकि तुम्हें कपड़े और भोजन मिल सके और तुम जी सको।

इस अनुभव से गुजरने के बाद, मैं समझ गया हूँ कि पैसे, प्रसिद्धि और लाभ जैसी भौतिक चीजें पूरी तरह से अस्थायी हैं, और सत्य का अनुसरण करना और उसे पाना अधिक कीमती, मूल्यवान और सार्थक है। मैं अपने कर्तव्यों के लिए अपना अधिक समय और ऊर्जा समर्पित करने को तैयार हूँ और परमेश्वर के प्रेम का प्रतिदान देने के लिए अपने कर्तव्यों को अच्छे से पूरा करने का प्रयास करूँगा!

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परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

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लेखिका: फांगफांग, चीनमेरे परिवार के सब लोग प्रभु यीशु में विश्वास रखते हैं। मैं कलीसिया में एक साधारण विश्वासी थी और मेरे डैड कलीसिया में...

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