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परमेश्वर के लिए पतरस के प्रेम की अभिव्यक्ति

I

पतरस के जीवन की कोई भी चीज़,

जो करती नहीं थी परमेश्वर की इच्छा संतुष्ट,

बेचैन कर देती थी पतरस को।

अगर परमेश्वर को उससे नहीं मिलती थी संतुष्टि,

महसूस होता था उसे मलाल।

तलाश करता था वो परमेश्वर के दिल को संतुष्ट करने का तरीक़ा।

पतरस के जीवन की छोटी-छोटी चीज़ों में भी,

वो चाहता था परमेश्वर की इच्छा पूरी करना,

अपने पुराने स्वभाव से दिखाता नहीं था वो कोई उदारता,

करता था मांग वो ख़ुद से सच्चाई की गहराई में जाने की।

II

पतरस ने किया प्यार परमेश्वर को उस हद तक, जो मांग थी परमेश्वर की।

सिर्फ़ ऐसे लोग दे सकते हैं गवाही।

अपने विश्वास में,

पतरस हर चीज़ में करता था कोशिश परमेश्वर को संतुष्ट करने की,

पालन करने की हर चीज़ जो आती थी परमेश्वर से।

कोई शिकायत नहीं, ताड़ना और न्याय, शुद्धिकरण,

जीवन में कमी और परीक्षण करता था वो मंज़ूर।

इनमें से कुछ भी परमेश्वर के लिए उसके प्यार को हिला सका नहीं।

क्या नहीं ये परमेश्वर के लिए अत्यंत प्यार?

क्या नहीं ये पूरा करता परमेश्वर के प्राणी का कर्तव्य?

III

चाहे हो ताड़ना, न्याय, या परीक्षण,

तुम मौत तक प्राप्त कर सकते हो आज्ञाकारिता।

परमेश्वर के प्राणी को इसे प्राप्त करना चाहिए।

यह है परमेश्वर के प्यार की शुद्धता।

ये है परमेश्वर के प्यार की शुद्धता।

ये है परमेश्वर के प्यार की शुद्धता।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:इंसान को जो करना है उस पर उसे अटल रहना चाहिये

अगला:इंसान के लिये परमेश्वर की इच्छा कभी नहीं बदलेगी

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