15. राज्य की सुंदरता और मानवजाति के गंतव्य की भविष्यवाणी एवं परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं और आशीषों पर वचन

686. मेरा कार्य केवल छह हजार वर्षों तक चलता है और मैंने समस्त मानवजाति पर उस दुष्ट का नियंत्रण भी छह हजार वर्षों तक ही चलते रहने की अनुमति दी है। इसलिए, अब समय पूरा हुआ। मैं अब और न तो जारी रखना चाहता हूँ और न ही विलंब करना चाहता हूँ : अंत के दिनों के दौरान मैं शैतान को परास्त कर दूँगा, मैं अपनी संपूर्ण महिमा वापस ले लूँगा और मैं पृथ्वी पर उन सभी आत्माओं को वापस ले लूँगा जो मेरी हैं, ताकि ये व्यथित आत्माएँ दुःख के सागर से बच सकें और इस प्रकार पृथ्वी पर मेरे समस्त कार्य का समापन होगा। इस दिन के बाद से मैं पृथ्वी पर फिर कभी देहधारी नहीं बनूँगा और फिर कभी मेरा आत्मा, जो सबका संप्रभु है, पृथ्वी पर कार्य नहीं करेगा। मैं पृथ्वी पर केवल एक मानवजाति की पुनर्रचना करूँगा, एक ऐसी मानवजाति जो पावनीकृत है और जो पृथ्वी पर मेरा विश्वासयोग्य शहर है। पर जान लो कि मैं संपूर्ण संसार को जड़ से नहीं मिटाऊँगा, न ही मैं समस्त मानवजाति का संहार करूँगा। मैं उस शेष तृतीयांश को रखूँगा—वह तृतीयांश जो मेरे द्वारा पूरी तरह से जीत लिया गया है और जो मुझसे प्रेम करता है और मैं इस तृतीयांश को पृथ्वी पर फलने-फूलने और बढ़ने दूँगा, ठीक वैसे जैसे इस्राएली व्यवस्था के तहत करते थे; उन्हें प्रचुर मात्रा में भेड़ें और मवेशी मिलेंगे जिनसे मैं उनका पोषण करता हूँ, साथ ही पृथ्वी की सारी समृद्धि मिलेगी। यह मानवजाति हमेशा मेरे साथ रहेगी, मगर यह आज की घोर रूप से गंदी मानवजाति नहीं होगी, बल्कि वह मानवजाति होगी जो मेरे द्वारा प्राप्त किए गए सभी लोगों का समूह है। इस प्रकार की मानवजाति शैतान द्वारा नष्ट, बाधित या घेरी नहीं जाएगी और वही एकमात्र मानवजाति होगी जो मेरे शैतान को हरा देने के बाद पृथ्वी पर जीना जारी रखेगी। यही वह मानवजाति है, जो आज मेरे द्वारा जीत ली गई है और जिसे मेरी प्रतिज्ञा हासिल है। और इसलिए, अंत के दिनों में जीती गई मानवजाति भी वही मानवजाति है जो बची रहेगी और जिसे मेरे अनंत आशीष प्राप्त होंगे। वे शैतान पर मेरी विजय का एकमात्र प्रमाण होंगे और शैतान से मेरे युद्ध का एकमात्र विजयोपहार। युद्ध के ये विजयोपहार मेरे द्वारा शैतान की सत्ता से बचाए गए हैं और ये मेरी छह-हजार-वर्षीय प्रबंधन योजना की एकमात्र सारगर्भित निष्पत्ति और फल हैं। ये संपूर्ण ब्रह्मांड के हर राष्ट्र और संप्रदाय, हर स्थान और देश से हैं। ये भिन्न-भिन्न जातियों के हैं, भिन्न-भिन्न भाषाओं, रीति-रिवाजों और त्वचा के रंगों वाले हैं और ये विश्व के हर देश और संप्रदाय में और यहाँ तक कि संसार के हर कोने में भी फैले हैं। अंततः वे पूर्ण मानवजाति बनाने के लिए साथ आएँगे, लोगों का एक समूह, जिस तक शैतान की शक्तियाँ नहीं पहुँच सकतीं।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, कोई भी जो देह में है, क्रोध के दिन से नहीं बच सकता

687. मेरे वचन ज्यों-ज्यों पूर्ण होते हैं, पृथ्वी पर धीरे-धीरे राज्य बनता जाता है और मनुष्य धीरे-धीरे सामान्यता की ओर लौटता है, और इस प्रकार पृथ्वी पर वह राज्य स्थापित हो जाता है जो मेरे हृदय में है। राज्य में, परमेश्वर के सभी लोग सामान्य मनुष्य का जीवन पुनः प्राप्त कर लेते हैं। पाले वाली शीत ऋतु विदा हो रही है, उसका स्थान वासंती नगरों का संसार ले रहा है, जहाँ पूरे साल बहार रहती है। लोग अब कभी मनुष्य के संसार की वीरानी का अनुभव नहीं करते हैं और न ही वे मनुष्य के संसार की ठंडी सिहरन सहते हैं। लोग एक दूसरे से लड़ते नहीं हैं, देश एक दूसरे के विरुद्ध युद्ध में नहीं उतरते हैं, नरसंहार अब और नहीं हैं और न वह लहू जो नरसंहार से बहता है; सारे भूभाग आनंद से भरे हैं, और हर जगह लोगों की आपसी गर्माहट से भरी है। मैं पूरे संसार में चलता हूँ, मैं ऊपर अपने सिंहासन से आनंदित होता हूँ, और मैं तारों के बीच रहता हूँ। स्वर्गदूत मेरे लिए नए-नए गीत और नए-नए नृत्य प्रस्तुत करते हैं। उनकी अपनी भंगुरता अब कभी उनकी आँखों से आँसू बहने का कारण नहीं बनती है। अब मुझे अपने सामने स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनाई देती, और अब कोई भी मुझे अपने दुख नहीं बताता है। आज, तुम सब लोग मेरे सामने रहते हो; कल तुम सब लोग मेरे राज्य में रहोगे। क्या यह सबसे बड़ा आशीष नहीं है जो मैं मनुष्य को देता हूँ?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 20

688. जब राज्य पृथ्वी पर पूर्ण रूप से उतरेगा, तब सभी लोग अपने मूल स्वरूप में आ जाएँगे। इस प्रकार, परमेश्वर कहता है, “मैं ऊपर अपने सिंहासन से आनंदित होता हूँ, और मैं तारों के बीच रहता हूँ। स्वर्गदूत मेरे लिए नए-नए गीत और नए-नए नृत्य प्रस्तुत करते हैं। उनकी अपनी भंगुरता अब कभी उनकी आँखों से आँसू बहने का कारण नहीं बनती है। अब मुझे अपने सामने स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनाई देती, और अब कोई भी मुझे अपने दुख नहीं बताता है।” यह दर्शाता है कि जिस दिन परमेश्वर संपूर्ण महिमा प्राप्त करता है, उसी दिन मनुष्य भी विश्राम का आनंद लेता है; शैतान की बाधा के कारण लोग अब दौड़-भाग नहीं करते, संसार का आगे बढ़ना रुक जाता है, और लोग विश्राम में रहते हैं—क्योंकि स्वर्ग के तारे नए हो जाते हैं, सूर्य, चंद्रमा, तारे इत्यादि, स्वर्ग और पृथ्वी पर सारे पहाड़ और नदियाँ, सब बदल जाते हैं। चूँकि मनुष्य बदल गया और परमेश्वर बदल गया, सारी चीज़ें बदल जाएँगी। यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना का अंतिम लक्ष्य है, और अंततः यही प्राप्त किया जाएगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों का अनावरण, अध्याय 20

689. बिजली के बीच सभी प्रकार के जानवर अपने असली स्वरूप में प्रकट कर दिए जाते हैं। इसी प्रकार मेरे प्रकाश से रोशन होकर मनुष्य ने भी उस पवित्रता को वापस पा लिया है जो कभी उसके पास थी। ओह, अतीत का भ्रष्ट संसार! अंततः यह गंदे पानी में पलट गया है और सतह के नीचे डूबकर कीचड़ में बदल गया है! ओह, पूरी मानवजाति, मेरी अपनी सृष्टि! अंततः वह प्रकाश में फिर से जीवित हो गई है, उसने अस्तित्व का आधार प्राप्त कर लिया है और कीचड़ में संघर्ष करना बंद कर दिया है! ओह, वे सभी चीजें जिन्हें मैं अपने हाथों में थामे हूँ! मेरे वचनों के परिणामस्वरूप वे नवीनीकृत कैसे नहीं हो सकतीं? वे प्रकाश में अपने कार्यों को कैसे अंजाम नहीं दे सकतीं? पृथ्वी अब मौत के समान स्थिर और मूक नहीं है, स्वर्ग अब उजाड़ और नीरस नहीं है। स्वर्ग और पृथ्वी के बीच शून्य का विभाजक नहीं रह गया है, फिर कभी अलग न किए जाने के लिए वे एक हो गए हैं। इस हर्षोल्लास के अवसर पर, इस उल्लासपूर्ण क्षण में मेरी धार्मिकता और मेरी पवित्रता पूरे ब्रह्मांड के ऊपर और हर जगह फैल गई हैं और सभी लोगों के बीच निरंतर उनकी प्रशंसा की जाती है। स्वर्ग के नगर आनंद से हँस रहे हैं और पृथ्वी का राज्य आनंद से नृत्य कर रहा है। इस समय कौन आनंदित नहीं है? और कौन रो नहीं रहा है? अपनी आदिम अवस्था में पृथ्वी स्वर्ग की है और स्वर्ग पृथ्वी के साथ एक है। मनुष्य स्वर्ग और पृथ्वी को एक करने वाली डोर है। मनुष्य की पवित्रता के कारण, मनुष्य के नवीनीकरण के कारण स्वर्ग अब पृथ्वी से छिपा हुआ नहीं है और पृथ्वी अब स्वर्ग के प्रति मौन नहीं है। सभी लोगों के चेहरे संतुष्टि की मुस्कान से खिले हैं और उन सभी के दिलों में एक ऐसी मिठास छिपी है जिसकी कोई सीमा नहीं है। लोग एक-दूसरे के साथ झगड़ा या मारपीट नहीं करते हैं। क्या कोई ऐसा है जो मेरे प्रकाश में दूसरों के साथ शांति से नहीं रहता? क्या कोई ऐसा है जो मेरे दिन में मेरे नाम को कलंकित करता है? सभी अपनी भय से भरी नजरें मेरी ओर लगाते हैं और अपने दिलों में वे चुपचाप मुझे पुकारते हैं। मैंने उनके हर कार्य की पड़ताल की है : जिन लोगों को शुद्ध किया गया है उनमें से कोई भी मेरे खिलाफ विद्रोही नहीं है, कोई भी मेरी आलोचना नहीं करता। मेरा स्वभाव सभी लोगों में व्याप्त है। सभी मुझे जान रहे हैं, मेरे करीब आ रहे हैं और मेरा आदर कर रहे हैं। मैं मनुष्य की आत्मा में अडिग खड़ा हूँ, मनुष्य की आँखों में उच्चतम शिखर तक उन्नत हूँ और मनुष्य की नसों में रक्त के माध्यम से बहता हूँ। मनुष्य के दिल का आनंद पृथ्वी के हर स्थान को भर देता है, हवा तेज और ताजा है, घना कोहरा अब जमीन को नहीं ढकता और सूरज दीप्तिमान होकर चमकता है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 18

690. मेरे प्रकाश में, लोग फिर से रोशनी देखते हैं। मेरे वचन में, लोग अपने आनंद के लिए चीजें प्राप्त करते हैं। मैं पूरब से आया हूँ, मैं पूरब से चला हूँ। जब मेरी महिमा की रोशनी चमकती है, तो बेशुमार देश प्रकाशित हो उठते हैं, सब कुछ आलोकित हो उठता है, एक भी चीज़ अंधकार में नहीं रहती। राज्य में, परमेश्वर के साथ परमेश्वर के लोग जो जीवन जीते हैं, वह अत्यंत उल्लासमय है। जलसमूह लोगों के आशीषित जीवन पर आनंद से नृत्य करते हैं, पर्वत लोगों के साथ मेरी प्रचुरता का आनंद लेते हैं। सभी लोग प्रयास कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं, मेरे राज्य में अपनी लगन दिखा रहे हैं। राज्य में, अब न विद्रोह है, न प्रतिरोध है; स्वर्ग और धरती एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इंसान और मैं गहरी भावना के साथ निकट आते हैं, मधुरता से साथ में रहते हुए एक-दूसरे की ओर झुक रहे हैं...। इस समय, मैं औपचारिक रूप से स्वर्ग में अपना जीवन आरंभ करता हूँ। अब शैतान का व्यवधान नहीं है, और लोग विश्राम में प्रवेश करते हैं। कायनात में, मेरे चुने हुए लोग मेरी महिमा की रोशनी में जीते हैं, अतुलनीय रूप से आशीषित हैं, लोग ऐसे नहीं रहते जैसे इंसानों के बीच रहते हैं, बल्कि ऐसे रहते हैं जैसे परमेश्वर के साथ रहते हैं। सभी लोग शैतान की भ्रष्टता से गुजरे हैं, और उन्होंने पूरी तरह से जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव लिए हैं। अब, मेरी रोशनी में रहते हुए, वे आनंद कैसे न उठाएंगे? वे इस खूबसूरत पल को यों ही कैसे छोड़ देंगे और हाथ से कैसे जाने देंगे? ओ लोगो! जल्दी करो, मेरे लिए अपने दिलों के गीत गाओ और खुशी से नाचो! अपने सच्चे दिलों को उन्नत करने के लिए जल्दी करो और उन्हें मुझे अर्पित करो! जल्दी करो, अपने ढोल बजाओ और मेरे लिए खुशी से बाजे बजाओ! मैं ब्रह्मांड के ऊपर से अपनी प्रसन्नता बिखेरता हूँ! मैं सभी लोगों के सामने अपना महिमामय चेहरा प्रकट करता हूँ! मैं ऊँची आवाज़ में पुकारूँगा! मैं ब्रह्मांड के परे हो जाऊँगा! मैं पहले ही लोगों के मध्य शासन करता हूँ! लोगों ने मेरा उत्कर्ष किया है! मैं ऊपर नीले आसमान में बहता हूँ और लोग मेरे साथ चलते हैं। मैं अपने लोगों के मध्य चलता हूँ और वे मुझे घेर लेते हैं! लोगों के दिल उल्लास से भर जाते हैं, उनके जबर्दस्त गीत ब्रह्मांड को हिलाते हैं, आकाश भेद देते हैं! अब ब्रह्मांड धुंध से घिरा हुआ नहीं है; अब न कीचड़ है, न मल का जमाव है। ब्रह्मांड के पवित्र लोग! मेरे निरीक्षण में वे अपना असली चेहरा दिखाते हैं। वे गंदगी से ढके हुए लोग नहीं हैं, बल्कि हरिताश्म की तरह निर्मल पवित्र जन हैं, वे सभी मेरे प्रिय हैं, वे सभी मेरा आनंद हैं! हर चीज पुनः जीवन को प्राप्त होती है। सभी पवित्र जन स्वर्ग में मेरी सेवा के लिए लौट आए हैं, मेरे स्नेहपूर्ण आलिंगन में प्रवेश कर रहे हैं, अब वे विलाप नहीं कर रहे, अब वे चिंता नहीं कर रहे हैं, वे स्वयं को मुझे अर्पित कर रहे हैं, मेरे घर वापस आ रहे हैं, और वे अपनी जन्मभूमि में अनवरत मुझसे प्रेम करेंगे! यह अनंतकाल तक अपरिवर्तनीय होगा! कहाँ है दुख! कहाँ हैं आँसू! कहाँ है देह! धरती अब नहीं है, मगर स्वर्ग सदा के लिए है। मैं बेशुमार लोगों के समक्ष प्रकट होता हूँ और बेशुमार लोग मेरी स्तुति करते हैं। यह जीवन, यह सुंदरता, चिरकाल से समय के अंत तक, बदलेगी नहीं। यही राज्य का जीवन है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, ओ लोगो! आनंद मनाओ!

691. राज्य मानवजाति के बीच फैल रहा है, यह मानवजाति के बीच बन रहा है और यह मानवजाति के बीच खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। मेरे लोग, जो आज के राज्य में हैं, तुम लोगों में से कौन मानवजाति का सदस्य नहीं है? तुममें से कौन मानवीय स्थिति के बाहर है? जब मेरा नया शुरुआती बिंदु सार्वजनिक किया जाएगा तो लोग किस तरह से प्रतिक्रिया देंगे? तुम लोगों ने अपनी आँखों से मानव दुनिया की दशा देखी है; क्या तुमने अभी तक इस दुनिया में हमेशा के लिए रहने के विचार को नहीं छोड़ा है? अभी मैं अपने लोगों के बीच चल रहा हूँ और मैं उनके बीच रहता हूँ। आज जो लोग मुझसे सच्चा प्रेम करते हैं—ऐसे लोग धन्य हैं। धन्य हैं वे लोग जो मेरे प्रति समर्पण करते हैं, वे मेरे राज्य में बने रहेंगे। धन्य हैं वे लोग जो मुझे जानते हैं, वे मेरे राज्य में सत्ता का उपयोग करेंगे। धन्य हैं वे लोग जो मेरा अनुसरण करते हैं, वे शैतान के बंधनों से मुक्त हो जाएँगे और मेरे आशीषों का आनंद लेंगे। धन्य हैं वे लोग जो अपने खिलाफ विद्रोह कर पाते हैं; वे पूरी तरह मेरे हो जाएँगे और मेरे राज्य की प्रचुरता विरासत में प्राप्त करेंगे। जो लोग मेरे लिए दौड़-धूप करते हैं, उन्हें मैं याद रखूँगा, जो लोग मेरे लिए खुद को खपाते हैं, उन्हें मैं स्वीकार करूँगा और जो लोग मुझे भेंट अर्पित करते हैं, उन्हें मैं आनंद के लिए चीजें दूँगा। जो लोग मेरे वचनों का आनंद लेते हैं, उन्हें मैं आशीष दूँगा; वे मेरे राज्य के स्तंभ होंगे, वे मेरे घर में असीम रूप से समृद्ध होंगे और कोई भी उनसे तुलना नहीं कर सकेगा। क्या तुम लोगों ने कभी वे आशीष स्वीकार किए हैं जो तुम्हारे लिए तैयार किए गए थे? क्या तुम लोगों ने कभी उन वादों का अनुसरण किया है जो तुम लोगों के लिए किए गए थे? तुम लोग मेरे प्रकाश के मार्गदर्शन में अंधकार की शक्तियों का शिकंजा तोड़कर अवश्य बाहर आ जाओगे। तुम अवश्य ही अंधकार के बीच प्रकाश का मार्गदर्शन नहीं खोओगे। तुम अवश्य ही सभी चीजों के मालिक होगे। तुम अवश्य ही शैतान के सामने विजेता होगे। तुम बड़े लाल अजगर के देश के पतन पर मेरी विजय के प्रमाण के रूप में अनगिनत लोगों के बीच अवश्य खड़े होगे। तुम लोग अवश्य ही सिनिम की जमीन पर दृढ़ और अटल रहोगे। तुम जो कष्ट सहते हो उनके परिणामस्वरूप अवश्य ही विरासत में मेरे आशीष प्राप्त करोगे और तुम पूरे ब्रह्मांड में मेरी महिमा के प्रकाश की किरणें बिखेरोगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 19

692. मेरी बुद्धि पृथ्वी पर हर जगह और समूचे ब्रह्मांड में है। सभी चीजों में मेरी बुद्धि के फल हैं, असंख्य लोगों के बीच मेरी बुद्धि की उत्कृष्ट कृतियाँ भरी पड़ी हैं; सब कुछ मेरे राज्य की सारी चीजों के समान है, और सभी लोग मेरी चारागाहों पर भेड़ों के समान मेरे आसमानों के नीचे विश्राम में रहते हैं। मैं असंख्य लोगों से ऊपर चलता हूँ और हर जगह देख रहा हूँ। कुछ भी कभी पुराना दिखाई नहीं देता और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर विश्राम करता हूँ, मैं संपूर्ण ब्रह्मांड के ऊपर आराम से पीठ टिकाता हूँ, और मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ क्योंकि सभी चीजों ने अपनी पवित्रता पुनः प्राप्त कर ली है और मैं एक बार फिर सिय्योन के भीतर शांतिपूर्वक निवास कर सकता हूँ, और पृथ्वी पर लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन एक बार और शांति और संतोष के साथ जी सकते हैं और काम कर सकते हैं। मेरी पकड़ के भीतर मेरे असंख्य लोग हर चीज का प्रबंधन कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पूर्व बुद्धिमत्ता और मूल रूप-रंग पुनः प्राप्त कर लिया है; वे धूल से अब और ढके नहीं हैं, बल्कि, मेरे राज्य में, हरिताश्म के समान पवित्र हैं, प्रत्येक का चेहरा मनुष्य के हृदय के भीतर पवित्र जन के चेहरे के समान है, क्योंकि मनुष्यों के बीच मेरा राज्य स्थापित हो गया है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 16

693. “मैं असंख्य लोगों से ऊपर चलता हूँ और हर जगह देख रहा हूँ। कुछ भी कभी पुराना दिखाई नहीं देता और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर विश्राम करता हूँ, मैं संपूर्ण ब्रह्मांड के ऊपर पीठ टिकाकर विश्राम करता हूँ...।” यह परमेश्वर के वर्तमान कार्य का परिणाम है। परमेश्वर के चुने हुए सभी लोग अपने मूल स्वरूप में लौट आते हैं, जिसके कारण वे स्वर्गदूत, जिन्होंने इतने वर्षों तक कष्ट झेला है, मुक्त हो जाते हैं, जैसा कि परमेश्वर कहता है “उनके चेहरे मनुष्य के हृदय के भीतर एक पवित्र जन जैसे हैं।” चूँकि स्वर्गदूत पृथ्वी पर कार्य करते हैं और पृथ्वी पर परमेश्वर की सेवा करते हैं, और परमेश्वर की महिमा दुनिया भर में फैलती है, इसलिए स्वर्ग को पृथ्वी पर लाया जाता है, और पृथ्वी को स्वर्ग तक उठाया जाता है। इसलिए, मनुष्य वह कड़ी है जो स्वर्ग और पृथ्वी को जोड़ती है; स्वर्ग और पृथ्वी अब दूर-दूर नहीं हैं, अलग नहीं हैं, बल्कि जुड़कर एक हो गए हैं। दुनिया भर में, केवल परमेश्वर और मनुष्य हैं। कोई गुबार या गंदगी नहीं है, सब कुछ नया हो गया है, जैसे कि आकाश के नीचे हरे-भरे चरागाह में लेटा हुआ भेड़ का बच्चा, परमेश्वर के सभी अनुग्रहों का आनंद ले रहा हो। हरियाली के आगमन की वजह से जीवन की साँस दमकने लगती है, क्योंकि परमेश्वर मनुष्य के साथ सदा-सर्वदा रहने के लिए दुनिया में आता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे परमेश्वर के मुख से कहा गया था कि “मैं एक बार फिर से सिय्योन के भीतर शांतिपूर्वक निवास कर सकता हूँ।” यह शैतान की हार का प्रतीक है, यह परमेश्वर के विश्राम का दिन है और असंख्य लोग इस दिन की प्रशंसा और घोषणा करेंगे और इसे याद रखेंगे। जब परमेश्वर सिंहासन पर विश्राम करता है तभी वह पृथ्वी पर अपना कार्य भी समाप्त कर लेता है और इसी क्षण इंसान पर परमेश्वर के सभी रहस्य प्रकट किए जाते हैं; परमेश्वर और मनुष्य हमेशा सामंजस्य में रहेंगे, कभी अलग नहीं होंगे—ऐसे हैं राज्य के सुंदर दृश्य!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों का अनावरण, अध्याय 16

694. अपने विभिन्न कार्यों और गवाहियों के आधार पर राज्य के भीतर विजेता लोग याजकों और अनुयायियों के रूप में सेवा करेंगे, और जो क्लेश के बीच विजेता होंगे, वे राज्य के भीतर याजकों का एक निकाय बन जाएँगे। याजकों का निकाय तब बनाया जाएगा, जब संपूर्ण ब्रह्मांड के भीतर सुसमाचार का कार्य समाप्ति पर आ जाएगा। जब वह समय आएगा, तब जो मनुष्य के द्वारा किया जाना चाहिए, वह परमेश्वर के राज्य के भीतर अपने कर्तव्य का निष्पादन होगा, और राज्य के भीतर परमेश्वर के साथ उसका जीना होगा। याजकों के निकाय में महायाजक और याजक होंगे, और शेष लोग परमेश्वर के पुत्र और उसके लोग होंगे। उन्हें क्लेश के दौरान परमेश्वर के प्रति उनकी गवाहियों के आधार पर विभाजित किया जाएगा; ये सनक के आधार पर दी जाने वाली उपाधियाँ नहीं हैं। जब मनुष्य की हैसियत स्थापित कर दी जाएगी, तो परमेश्वर का कार्य रुक जाएगा, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को उसके प्रकार के अनुसार छाँट दिया जाएगा और उसकी मूल स्थिति में लौटा दिया जाएगा, यह परमेश्वर के महान कार्य के समापन का चिह्न है, यह परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के अभ्यास का अंतिम परिणाम है और यह परमेश्वर के कार्य के दर्शनों और मनुष्य के सहयोग का मूर्त परिणाम है। अंत में, मनुष्य परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करेगा और वहाँ विश्राम करेगा; साथ ही, परमेश्वर भी विश्राम करने के लिए अपने निवास-स्थान में लौट जाएगा। यह परमेश्वर और मनुष्य के बीच 6,000 वर्षों के सहयोग का अंतिम परिणाम होगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास

695. विजय का कार्य पूरा कर लिए जाने के बाद मनुष्य को एक सुंदर संसार में लाया जाएगा। यह जीवन बेशक अभी भी पृथ्वी पर होगा, किंतु यह मनुष्य के आज के जीवन से बिल्कुल भिन्न होगा। यह वह जीवन है जो मानवजाति के पास तब होगा जब संपूर्ण मानवजाति पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी, यह पृथ्वी पर मनुष्य के लिए एक नई शुरुआत होगी। मानवजाति के पास इस प्रकार का जीवन होना इस बात का सबूत होगा कि मानवजाति ने एक नए और सुंदर क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है; यह पृथ्वी पर परमेश्वर और मनुष्य के जीवन की शुरुआत होगी। ऐसे सुंदर जीवन के लिए यह पूर्वापेक्षा जरूर होनी चाहिए कि मनुष्य को शुद्ध कर दिए जाने और उस पर विजय पा लिए जाने के बाद वह सृष्टिकर्ता के सम्मुख समर्पण कर दे। और इसलिए, मानवजाति के अद्भुत मंजिल में प्रवेश करने से पहले विजय का कार्य परमेश्वर के कार्य का अंतिम चरण है। ऐसा जीवन पृथ्वी पर मनुष्य का भविष्य का जीवन है, पृथ्वी पर सबसे अधिक सुंदर जीवन है, उस प्रकार का जीवन है जिसके लिए मनुष्य लालायित रहता है और उस प्रकार का जीवन है जिसे मनुष्य ने संसार के इतिहास में पहले कभी प्राप्त नहीं किया है। यह 6,000 वर्षों के प्रबंधन के कार्य का अंतिम परिणाम है; यही वह चीज है जिसके लिए मानवजाति सर्वाधिक लालायित रहती है और यह मनुष्य से परमेश्वर का वादा भी है। किंतु यह वादा तुरंत पूरा नहीं हो सकता है : मनुष्य भविष्य की मंजिल में केवल तभी प्रवेश करेगा जब अंत के दिनों का कार्य पूरा हो चुका होगा और उस पर पूरी तरह से विजय पा ली गई होगी, अर्थात् जब शैतान पूरी तरह से पराजित किया जा चुका होगा। शोधन कर दिए जाने के बाद मनुष्य पापपूर्ण प्रकृति से रहित हो जाएगा, क्योंकि परमेश्वर ने शैतान को पराजित कर दिया होगा, अर्थात् विरोधी ताक़तों द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं होगा, और कोई विरोधी ताक़तें नहीं होंगी जो मनुष्य की देह पर आक्रमण कर सकें। और इसलिए मनुष्य स्वतंत्र और पावनीकृत होगा—वह शाश्वतता में प्रवेश कर चुका होगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

696. जब मनुष्य पृथ्वी पर असली मानवीय जीवन प्राप्त कर लेगा और शैतान की सभी ताकतों को बंधन में डाल दिया जाएगा, तब मनुष्य बड़ी आसानी से पृथ्वी पर जीवन-यापन करेगा। चीजें उतनी जटिल नहीं होंगी, जितनी आज हैं : पारस्परिक रिश्ते, सामाजिक रिश्ते, जटिल पारिवारिक रिश्ते—वे इतनी परेशानी, इतना दर्द लेकर आते हैं! इन सबके बीच जीना कितना कष्टदायक है! एक बार मनुष्य पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी, तो उसका दिल और मन बदल जाएगा। उसके पास परमेश्वर का भय मानने वाला और परमेश्वर-प्रेमी हृदय होगा। एक बार जब समस्त विश्व में परमेश्वर से प्रेम करने का प्रयास करने वाले लोगों पर विजय पा ली जाएगी, अर्थात् एक बार जब शैतान को हरा दिया जाएगा और एक बार जब शैतान—अंधकार की सभी शक्तियों को—बंधन में डाल दिया जाएगा, तब पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन निर्विघ्न हो जाएगा और वह पृथ्वी पर स्वतंत्र रूप से जीवन जी सकेगा। यदि मनुष्य का जीवन दैहिक रिश्तों और देह के जटिल मामलों से रहित होता, तो यह बहुत अधिक आसान होता। मनुष्य के दैहिक रिश्ते बहुत जटिल होते हैं, और मनुष्य के लिए ऐसी चीजों का होना इस बात का प्रमाण है कि उसने स्वयं को अभी तक शैतान के प्रभाव से मुक्त नहीं किया है। यदि प्रत्येक भाई-बहन के साथ तुम्हारा रिश्ता समान होता, यदि अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ तुम्हारा रिश्ता समान होता, तो तुम्हें परेशान करने के लिए कुछ न होता और तुम्हें किसी के बारे में चिंता करने की आवश्यकता न होती। इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता था, और इस तरह से मनुष्य को उसकी आधी तकलीफों से मुक्ति मिल गई होती। पृथ्वी पर एक सामान्य मानवीय जीवन जीने से मनुष्य स्वर्गदूतों के समान होगा; यद्यपि अभी भी वह देह का प्राणी होगा, फिर भी वह स्वर्गदूत के समान होगा। यही वह अंतिम प्रतिज्ञा है, आख़िरी वादा, जो मनुष्य को प्रदान किया गया है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

697. जिन लोगों को परमेश्वर पूर्ण बनाने का इरादा रखता है, वे सब उसके आशीष और उसकी विरासत प्राप्त करेंगे। अर्थात्, वे वह स्वीकार करते हैं जो परमेश्वर के पास है और जो वह स्वयं है, ताकि यह वह बन जाए जो उनके भीतर है; उनमें परमेश्वर के सारे वचन गढ़े हुए हैं; और परमेश्वर जो कुछ है, वे उस सबको ठीक जैसा है वैसा स्वीकार करने में सक्षम हैं। इस तरह वे सत्य को जीते हैं। ऐसे ही व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाया और प्राप्त किया जाता है। केवल इसी प्रकार का मनुष्य परमेश्वर द्वारा दिए जाने वाले आशीष का उत्तराधिकार पाने योग्य है :

1) परमेश्वर के संपूर्ण प्रेम को पाना।

2) सभी बातों में परमेश्वर के इरादों के अनुसार चलना।

3) परमेश्वर के मार्गदर्शन को पाना, परमेश्वर की रोशनी में जीवन व्यतीत करना और परमेश्वर का प्रबोधन प्राप्त करना।

4) पृथ्वी पर परमेश्वर को प्रिय लगने वाली छवि जीना; पतरस के समान होना, जो परमेश्वर से सच्चा प्रेम करता था, जिसे परमेश्वर के लिए सलीब पर चढ़ा दिया गया था और जो परमेश्वर के प्रेम को वापस चुकाने के लिए प्राण देने योग्य था; पतरस के समान महिमा प्राप्त करना।

5) पृथ्वी पर सभी का प्रिय, अति सम्मानित और प्रशंसित बनना।

6) मृत्यु और रसातल के सारे बंधनों पर काबू पाना, शैतान को कार्य करने का कोई अवसर न देना, परमेश्वर का होना, एक ताज़ा और जीवंत आत्मा के भीतर रहना, और ऊब न जाना।

7) जीवन भर हर समय उत्साह और उमंग की एक अवर्णनीय भावना रखना, मानो परमेश्वर की महिमा के दिन का आगमन देख लिया हो।

8) परमेश्वर के साथ महिमा को पाना और परमेश्वर के प्रिय पवित्र जनों जैसा चेहरा रखना।

9) वह बनना जो पृथ्वी पर परमेश्वर को प्रिय है, अर्थात्, परमेश्वर का प्रिय पुत्र।

10) स्वरूप बदलना और परमेश्वर के साथ तीसरे स्वर्ग में आरोहण करना तथा देह के पार जाना।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, पूर्ण बनाए जा चुके लोगों से प्रतिज्ञाएँ

698. जब मनुष्य अनंत मंज़िल में प्रवेश करेगा, तो मनुष्य सृष्टिकर्ता की आराधना करेगा और चूँकि मनुष्य बचाया जा चुका होगा और अनंतता में प्रवेश कर चुका होगा, इसलिए अब वह किसी लक्ष्य का अनुसरण नहीं करेगा, शैतान द्वारा घेरे जाने की चिंता करने की जरूरत पड़ना तो दूर की बात है। इस समय हर व्यक्ति अपने स्थान पर रहेगा और अपना कर्तव्य निभाएगा, और भले ही लोगों को ताड़ना न दी जाए या उनका न्याय न किया जाए, फिर भी प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य निभाएगा। उस समय मनुष्य पहचान और स्थिति दोनों में एक सृजित प्राणी होगा। तब ऊँच और नीच का भेद नहीं रहेगा; बस यह है कि प्रत्येक व्यक्ति एक भिन्न भूमिका निभाएगा। लेकिन मनुष्य अभी भी एक ऐसी मंजिल में जिएगा जो मानवजाति के लिए व्यवस्थित और उपयुक्त होगी; मनुष्य सृष्टिकर्ता की आराधना करने के वास्ते अपना कर्तव्य निभाएगा और यही वह मानवजाति होगी जो अनंतता की मानवजाति होगी। उस समय, मनुष्य ने परमेश्वर द्वारा रोशन किया गया जीवन प्राप्त कर लिया होगा, ऐसा जीवन जो परमेश्वर की देखरेख और रक्षा के अधीन हो, और वह परमेश्वर के साथ जिएगा। मानवजाति पृथ्वी पर एक सामान्य जीवन जिएगी और सभी लोग उचित मार्ग में प्रवेश करेंगे। 6,000-वर्षीय प्रबंधन योजना शैतान को पूरी तरह से पराजित कर चुकी होगी, अर्थात् परमेश्वर मनुष्य की उस मूल छवि को बहाल कर चुका होगा जो पृथ्वी पर उसे सृजित करने के बाद थी, और इस प्रकार परमेश्वर के मूल इरादे पूरे हो चुके होंगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के सामान्य जीवन को बहाल करना और उसे एक अद्भुत मंजिल पर ले जाना

699. विश्रामरत जीवन का अर्थ है युद्ध के बिना, गंदगी के बिना और किसी अधार्मिकता के बिना जीवन। कहने का अर्थ है कि यह जीवन शैतान के विघ्नों (यहाँ “शैतान” का अर्थ शत्रुतापूर्ण शक्तियों से है) और शैतान की भ्रष्टता से मुक्त है और यह परमेश्वर विरोधी किसी भी शक्ति के अतिक्रमण से मुक्त है; यह ऐसा जीवन है जिसमें हर चीज अपनी किस्म के अनुसार छाँट दी जाती है और सृष्टिकर्ता की आराधना कर सकती है और जिसमें स्वर्ग और पृथ्वी पूरी तरह शांत होते हैं। यही मनुष्यों के लिए विश्राम का जीवन है। जब परमेश्वर विश्राम करेगा तो पृथ्वी पर अधार्मिकता नहीं रहेगी, न ही शत्रुतापूर्ण शक्तियों का फिर कोई अतिक्रमण होगा और मानवजाति एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेगी—यह अब ऐसी मानवजाति नहीं होगी जो शैतान द्वारा भ्रष्ट बना दी गई है, बल्कि एक ऐसी मानवजाति होगी जिसे शैतान द्वारा भ्रष्ट बना दिए जाने के बाद बचाया गया है। मानवजाति का विश्राम का दिन परमेश्वर का विश्राम का दिन भी होगा। मानवजाति के विश्राम में प्रवेश करने में असमर्थता के कारण परमेश्वर ने अपना विश्राम खोया था; ऐसा नहीं है कि उसे शुरुआत से कोई विश्राम नहीं था। विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ यह नहीं है कि सभी चीजों की गतिविधि रुक जाती है या सभी मामलों का विकास रुक जाता है, न ही इसका यह अर्थ है कि परमेश्वर कार्य करना बंद कर देता है या मनुष्य जीना बंद कर देते हैं। विश्राम में प्रवेश करने का संकेत यह है कि शैतान नष्ट कर दिया गया है, कि उसके कुकर्म में शामिल बुरे लोग दंडित किए जा चुके हैं और मिटा दिए गए हैं और परमेश्वर के प्रति शत्रुतापूर्ण सारी शक्तियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। परमेश्वर के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि वह मानवजाति के उद्धार का कार्य अब और नहीं करेगा। मानवजाति के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि समस्त मानवजाति परमेश्वर की रोशनी के भीतर और उसके आशीष के अधीन, शैतान की भ्रष्टता के बिना जिएगी, कोई अधार्मिकता नहीं होगी और सारे मनुष्य परमेश्वर की देखरेख में सामान्य रूप से पृथ्वी पर जिएंगे। जब परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक साथ विश्राम में प्रवेश करते हैं तो इसका अर्थ है कि मानवजाति को बचा लिया गया है, शैतान को नष्ट किया जा चुका है और मनुष्यों पर परमेश्वर का कार्य पूरी तरह पूरा हो गया है। परमेश्वर अब मनुष्यों पर कार्य करना जारी नहीं रखेगा और वे अब शैतान की सत्ता के अधीन नहीं रहेंगे। इस तरह, परमेश्वर अब और व्यस्त नहीं रहेगा और मनुष्य अब लगातार भागदौड़ में नहीं रहेंगे; परमेश्वर और मानवजाति एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपने मूल स्थान पर लौट जाएगा और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने संबंधित स्थान पर लौट जाएगा। ये परमेश्वर का समस्त प्रबंधन पूरा होने पर परमेश्वर और मनुष्य की संबंधित मंजिलें होंगी। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंजिल है और मनुष्यों के पास वह जगह है जहाँ वे जाएँगे। विश्राम करते समय, परमेश्वर पृथ्वी पर जीने के लिए सभी मनुष्यों की अगुआई करता रहेगा, जबकि उसके प्रकाश में, वे स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेंगे। परमेश्वर अब मानवता के बीच नहीं रहेगा, न ही मनुष्य परमेश्वर के साथ उसकी मंजिल में रहने में समर्थ होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक ही क्षेत्र के भीतर नहीं रह सकते; बल्कि दोनों के जीने के अपने-अपने संबंधित तरीके हैं। परमेश्वर वह है जो समस्त मानवता की अगुआई करता है और समस्त मानवता परमेश्वर के प्रबंधन कार्य का मूर्त परिणाम है। मनुष्य वे हैं जिनकी अगुआई की जाती है और उनका सार परमेश्वर के सार के समान नहीं है। “विश्राम” का अर्थ है अपने मूल स्थान में लौटना। इसलिए, जब परमेश्वर विश्राम में प्रवेश करता है, तो इसका अर्थ है कि परमेश्वर अपने मूल स्थान में लौट जाता है। वह पृथ्वी पर अब और नहीं रहेगा या मानवता के बीच उसकी खुशी या पीड़ा साझा करने के लिए नहीं रहेगा। जब मनुष्य विश्राम में प्रवेश करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे सच्चे सृजित प्राणी बन गए हैं; वे पृथ्वी से परमेश्वर की आराधना करेंगे और सामान्य मानवीय जीवन जिएंगे। लोग अब और परमेश्वर से विद्रोह या उसका प्रतिरोध नहीं करेंगे और वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएँगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के अपने-अपने जीवन और गंतव्य होंगे। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इसी तरह, अपना प्रबंधन-कार्य पूरा करने के बाद परमेश्वर का विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश अपरिहार्य प्रवृत्ति बन गए हैं। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी पर है और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। मनुष्य विश्राम करते समय, पृथ्वी पर रहकर परमेश्वर की आराधना करेंगे। परमेश्वर स्वयं विश्राम करते हुए शेष मानवता की अगुआई करेगा; वह स्वर्ग से उनकी अगुआई करेगा, न कि पृथ्वी से। परमेश्वर तब भी आत्मा ही होगा, जबकि मनुष्य तब भी देह ही होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों के विश्राम करने के अपने-अपने अलग तरीके हैं। जब परमेश्वर विश्राम करता है, वह मनुष्यों के बीच आएगा और प्रकट होगा; जब मनुष्य विश्राम करते हैं, वे स्वर्ग का भ्रमण करने और साथ ही वहाँ के जीवन का आनंद उठाने के लिए परमेश्वर द्वारा ले जाए जाएँगे।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

700. जब मनुष्यों को उनकी मूल समानता में बहाल कर लिया जाएगा और जब वे अपने-अपने कर्तव्य अच्छे से निभा सकेंगे, अपने उचित स्थानों पर बने रह सकेंगे और परमेश्वर की सभी व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण कर सकेंगे, तब परमेश्वर ने पृथ्वी पर उन लोगों का एक समूह प्राप्त कर लिया होगा जो उसकी आराधना करते हैं और उसने पृथ्वी पर एक राज्य भी स्थापित कर लिया होगा जो उसकी आराधना करता है। पृथ्वी पर उसकी अनंत विजय होगी और वे सभी जो उसके विरोध में हैं, अनंतकाल के लिए नष्ट हो जाएँगे। इससे मनुष्य का सृजन करने की उसकी मूल इच्छा बहाल होगी; इससे सब चीजों के सृजन की उसकी मूल इच्छा बहाल होगी और इससे पृथ्वी पर, सभी चीजों के बीच, और शत्रुओं के बीच उसका अधिकार भी बहाल हो जाएगा। ये उसकी संपूर्ण विजय के चिह्न होंगे। इसके बाद से मानवता विश्राम में प्रवेश करेगी और ऐसे जीवन में प्रवेश करेगी, जो सही मार्ग पर है। मानवता के साथ परमेश्वर भी अनंत विश्राम में प्रवेश करेगा और एक ऐसा अनंत जीवन आरंभ करेगा जिसे स्वयं वह और मनुष्य दोनों ही साझा करते हों। पृथ्वी से गंदगी और विद्रोहीपन मिट जाएगा, पृथ्वी पर से सारा विलाप भी समाप्त हो जाएगा और परमेश्वर का विरोध करने वाली प्रत्येक चीज का अस्तित्व नहीं रहेगा। केवल परमेश्वर और वही लोग बचेंगे, जिनका उसने उद्धार किया है; केवल उसकी सृष्टि ही बचेगी।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

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परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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