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परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम के परिणाम वचन से मिलते हैं

I

परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम का परिणाम वचन से मिलता है।

वचन से मानव राज़ और पूरे इतिहास में परमेश्वर का काम जान पाता है।

वचन से मानव पवित्र आत्मा का प्रबोधन,

और सदियों बंद रहे राज़ का ज्ञान पाता है।

वचन नबियों और प्रेरितों के काम और कानून को,

जब पूरा किया उन्होंने इसे, बयान करता है।

वचन से मानव परमेश्वर का स्वभाव

और ख़ुद अपना विद्रोही सार जान पाता है।

परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम का परिणाम वचन से मिलता है।

II

ये जितने काम हैं और जो बोले गए हैं वचन सारे,

मानव इनसे ही तो जान पाता है काम आत्मा के,

देहधारी परमेश्वर के काम,

और पूर्णता में स्वभाव उसका।

परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम का परिणाम वचन से मिलता है।

वचन से ही तो पाया तुमने परमेश्वर के 6000 सालों के काम का ये सारा ज्ञान।

तुम अपनी धारणा जानो पुरानी और उसे कर दो किनारे—

उसे भी तो किया था हासिल तुमने वचन के ही सहारे, वचन के ही सहारे।

III

प्रभु यीशु ने दिखलाए चमत्कार पिछले चरण में।

मगर ऐसा नहीं है इस अंतिम चरण में।

क्या वचनों से न जाने तुम कि आख़िरकार

संकेत क्यों दिखते नहीं अबकी बार, अबकी बार?

वचन बोले गए हैं जो इस बार वो सारे,

पहले के प्रेरितों और नबियों के काम को पीछे छोड़ आए।

नबियों ने जो भविष्य-कथन किये थे,

उनसे ऐसे नतीजे मुमकिन नहीं थे।

IV

नबियों ने तो बस इतना ही कहा की आगे क्या होगा,

मगर उस वक्त क्या करेगा काम परमेश्वर ये ना बतलाया।

न मानव की अगुवाई पे कुछ बोले, न दी सच्चाई, ना कुछ राज़ ही खोले,

वो कुछ भी नहीं बोले,

ज़िंदगी देने पे भी वो कुछ नहीं बोले।

V

इस बार के वचनों में सच और भविष्यवाणी है जो,

मगर जो ख़ास दी है इंसां को, वो ज़िंदगानी है।

नबियों की भविष्यवाणी से बिल्कुल जुदा,

वचन जो आज हैं वो काम का चरण है मानव जीवन के लिये,

उसके स्वभाव में बदलाव के लिये, के लिये।

परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम का परिणाम वचन से मिलता है।

परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम का परिणाम वचन से मिलता है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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