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पवित्र आत्मा का कार्य पाने के लिए प्रार्थना में दिल से बात करो

I

कोई खो नहीं सकता संवाद ईश्वर से।

बिन प्रार्थना के तुम रहते हो देह में,

तुम रहते हो शैतान के बंधन में;

बिन सच्ची प्रार्थना के, तुम रहते हो अंधकार में।

ईश्वर आशा करता है कि भाई और बहनें

हर दिन सच्ची प्रार्थना करने के योग्य हों।

यह नहीं है किसी सिद्धांत का पालन करना।

एक प्रभाव पूरा किया जाना चाहिए।

निम्नतम स्तर जो परमेश्वर चाहता है

कि लोग दिलों को उसके प्रति खोल सकें।

गर मानव ईश्वर को दिल देता है, सच कहता है,

तो परमेश्वर कार्य करने को तैयार है उसमें।

परमेश्वर नहीं चाहता मानव का विकृत दिल,

बल्कि चाहता है उसका शुद्ध और सच्चा दिल।

गर मानव दिल से नहीं बोलता ईश्वर से,

तो ईश्वर कार्य नहीं करता या मानव का दिल छूता।

प्रार्थना सबसे महत्वपूर्ण बात है।

जब आत्मा का कार्य प्राप्त होता प्रार्थना में,

तब तुम्हारा दिल छूता है परमेश्वर,

प्रेम की शक्ति ईश्वर के लिए आगे आती है।

गर तुम नहीं करते प्रार्थना दिल से,

गर तुम दिल खोलकर नहीं करते संवाद,

तो ईश्वर को तुम में कार्य करने का रास्ता नहीं होगा।

II

सबसे ज़रूरी चीज़ है ये प्रार्थना के लिए

अपने सच्चे दिल के शब्द कहना।

ईश्वर को बताना अपनी कमी, अपना विद्रोह,

और ख़ुद को खोल देना ईश्वर के सामने।

फिर तुम्हारी प्रार्थनाओं में रूचि रखेगा ईश्वर,

नहीं तो ईश्वर छिपा लेगा अपना चेहरा तुमसे।

तुम अपना दिल शांतिपूर्ण रखो ईश्वर के समक्ष,

दूर मत करो अपना दिल ईश्वर से।

करो प्रार्थना चीज़ों को यूँ ही रखने को,

जब तुम नहीं पाते नया, उच्च दृष्टिकोण।

तुम्हें प्रार्थना करनी चाहिए ताकि फिर पीछे न हटो।

यह निम्नतम है जो तुम्हें करना चाहिए।

सबका प्रवेश इस यथार्थ में ज़रूरी है,

और प्रार्थना में सचेत प्रशिक्षण रखो

खोजो आत्मा का स्पर्श, प्रतीक्षा न करो।

ईश्वर के सच्चे खोजी यही करते हैं।

प्रार्थना सबसे महत्वपूर्ण बात है।

जब आत्मा का कार्य प्राप्त होता प्रार्थना में,

तब तुम्हारा दिल छूता है परमेश्वर,

प्रेम की शक्ति ईश्वर के लिए आती है आगे।

गर तुम नहीं करते प्रार्थना दिल से,

गर तुम दिल खोलकर नहीं करते संवाद,

तो ईश्वर को तुम में कार्य करने का रास्ता नहीं होगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:परमेश्वर के समक्ष शांत रहने का अभ्यास

अगला:काम परमेश्वर का, आगे बढ़ता रहता है

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