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परमेश्वर की विजय के प्रतीक

I

मानव फिर से वही हो गया, जैसा वो आरंभ में था।

वो अपना फ़र्ज़ निभा सकते हैं, अपनी जगह रख सकते हैं,

परमेश्वर की व्यवस्था का पालन कर सकते हैं।

परमेश्वर का होगा ऐसा समूह, जो धरती पर उसको पूजे।

बना लेगा वो ऐसा राज्य भी, जो धरती पर भी उसको पूजे।

बना लेगा वो ऐसा राज्य भी, जो धरती पर भी उसको पूजे।

II

पा लेगा धरती पर वो ऐसी विजय जो शाश्वत हो,

विरोधी जो उसके होंगे, हो जाएंगे नष्ट सदा के लिये।

हो जाएंगे इससे पूरे इरादे उसके,

जब उसने मानव और सब चीज़ों का निर्माण किया,

पा लेगा वो अधिकार फिर से धरती पर,

अधिकार हर वस्तु पर अपने शत्रु पर।

अधिकार हर वस्तु पर अपने शत्रु पर।

हैं प्रतीक ये परमेश्वर-विजय के, उसकी पूर्ण विजय के।

हैं प्रतीक ये परमेश्वर-विजय के, उसकी पूर्ण विजय के।

III

अब मानव को विश्राम मिलेगा,

उसका जीवन सही राह पर होगा।

परमेश्वर को भी चिरकालिक, विश्राम मिलेगा मानव के संग,

परमेश्वर और मानव दोनों करेंगे साझा शाश्वत जीवन।

हो जाएगा लुप्त धरा से विप्लव और मलिन है जो कुछ,

मिट जाएगा, मिट जाएगा इस धरती से सकल क्रंदन।

जो ख़िलाफ़ हैं परमेश्वर के इस धरती पर,

आस-पास वो कभी नज़र न आएंगे फिर।

परमेश्वर और मानव जिनको छुड़ा लिया बस,

शेष रहेंगे, शेष रहेंगे।

केवल परमेश्वर और उसकी रचना शेष रहेगी।

केवल परमेश्वर और उसकी रचना शेष रहेगी।

केवल परमेश्वर और उसकी रचना शेष रहेगी।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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