सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना

ठोस रंग

विषय-वस्तुएँ

फॉन्ट

फॉन्ट का आकार

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

0 खोज परिणाम

कोई परिणाम नहीं मिला

`

मानव का अस्तित्व परमेश्वर पर निर्भर है

I

परमेश्वर का अंतिम कार्य सिर्फ़ सज़ा देना नहीं है,

काम है उसका इंसान को मंज़िल तक पहुँचाना,

और जो कुछ भी किया परमेश्वर ने, हर किसी से उसकी पहचान पाना।

परमेश्वर चाहता है हर इंसान देखे जो कुछ किया उसने वह है सही,

और जो कुछ किया उसने वह है उसके स्वभाव की अभिव्यक्ति।

बनाया नहीं इंसान ने इंसान को, न ही प्रकृति ने बनाया इंसान को।

बल्कि बस परमेश्वर ही है जो हर जीवित आत्मा

और हर चीज़ को देता है पोषण।

परमेश्वर के बिना मानव जाति का होगा नाश,

होगी वह तबाही से त्रस्त,

कोई नहीं देखेगा इस हरियाले विश्व को दुबारा।

कोई नहीं देखेगा सूरज और चाँद की ख़ूबसूरती।

II

मानव जाति करेगी सामना सिर्फ़ सर्द रातों

और मौत की निष्ठुर घाटियों का।

बिन परमेश्वर इंसान आगे बढ़ न सकेगा।

बिन परमेश्वर इंसान सिर्फ़ तड़पेगा।

प्रेतों के हर एक रूप से कुचला जाएगा,

फिर भी कोई सुनता नहीं उसकी।

परमेश्वर ही इंसान का मात्र उद्धार और उम्मीद है,

वही है जिसपर निर्भर मानव जाति का अस्तित्व।

III

जो कार्य किया परमेश्वर ने, ले सकता नहीं है उसकी जगह कोई।

उसकी बस एक ही उम्मीद है कि इंसान उसका कर्ज़ चुकाए

करके कार्य अच्छे,

अच्छे कार्य, अच्छे कार्य, अच्छे कार्य।

जो कार्य किया परमेश्वर ने, ले सकता नहीं है उसकी जगह कोई।

उसकी बस एक ही उम्मीद है कि इंसान उसका कर्ज़ चुकाए

करके कार्य अच्छे,

अच्छे कार्य, अच्छे कार्य, अच्छे कार्य।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:मनुष्य को बचाने का परमेश्वर का इरादा बदलेगा नहीं

अगला:सहता है बहुत से कष्ट परमेश्वर इंसान को बचाने को

शायद आपको पसंद आये

केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है