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सच्चे परमेश्वर की भक्ति करने से ही मानवता को मिलेगी खुशकिस्मती

I

परमेश्वर ने रची दुनिया और ये मानवता।

वह था पुराने यूनानी और इंसानी सभ्यता का रचयिता।

केवल परमेश्वर देता इंसान को दिलासा।

बस वही दिन और रात करता मानवता की चिंता।

इंसान का विकास और प्रगति नहीं हो सकती अलग प्रभु की सत्ता से।

उसका इतिहास और भविष्य है गुंथा हुआ परमेश्वर के इरादों में।

II

अगर तुम हो सच्चे ईसाई,

तो करोगे इस पर विश्वास निश्चय ही,

कि किसी वतन का उठना और गिरना,

होता है प्रभु के इरादों से ही।

बस परमेश्वर ही जानता है किस्मत वतन की।

सिर्फ वो ही जानता है मानवता किस ओर जायेगी।

वतन या इंसान, गर चाहे खुशकिस्मती,

सर झुकाकर करनी होगी परमेश्वर की भक्ति,

सर झुकाकर करनी होगी परमेश्वर की भक्ति।

परमेश्वर के आगे गर जो इंसान न पछतायेगा,

उसकी मंजिल और किस्मत का अंजाम होगा बस बर्बादी।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है