3. परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की गवाही देने पर वचन
165. स्तुति सिय्योन तक आ गई है और परमेश्वर का निवास स्थान प्रकट हो गया है। महिमाशाली पवित्र नाम का परमेश्वर के चुने असंख्य लोग गुणगान कर रहे हैं और यह फैलता जा रहा है। आह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! ब्रह्मांड का मुखिया, अंत के दिनों का मसीह—वह जगमगाता सूर्य है जो पूरे ब्रह्मांड में उदित हुआ है, प्रतापी और भव्य पर्वत सिय्योन के ऊपर ...
सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम हर्षोल्लास में तुझे पुकारते हैं; हम नाचते और गाते हैं। तू वास्तव में हमारा मुक्तिदाता, ब्रह्मांड का महान सम्राट है! तूने विजेताओं का एक समूह बनाया है और परमेश्वर की प्रबंधन योजना पूरी की है। परमेश्वर के चुने हुए असंख्य लोग नदी की तरह इस पर्वत की ओर बढ़ेंगे। वे सिंहासन के सामने घुटने टेकेंगे! तू एकमात्र सच्चा परमेश्वर है और तू महिमा और सम्मान के योग्य है। समस्त महिमा, स्तुति और अधिकार सिंहासन का हो! जीवन का झरना सिंहासन से प्रवाहित होता है, जो परमेश्वर के समस्त लोगों को सींचता और पोषित करता है। हमारा जीवन प्रतिदिन बदलता है; नई रोशनी और नए प्रकाशन हमारा अनुसरण करते हैं, जो लगातार परमेश्वर के बारे में नई अंतर्दृष्टियाँ देते हैं। अनुभवों के बीच हम परमेश्वर के बारे में पूर्ण निश्चितता पर पहुँचते हैं। उसके वचन निरंतर प्रकट होते हैं, सही लोगों के भीतर प्रकट होते हैं। हम सचमुच बहुत धन्य हैं! हम प्रतिदिन परमेश्वर से रूबरू होते हैं, हम सभी चीजों में परमेश्वर के साथ संगति करते हैं और परमेश्वर को हर चीज का प्रभार लेने देते हैं। हम सावधानीपूर्वक परमेश्वर के वचन पर विचार करते हैं, हमारे हृदय परमेश्वर में शांति पाते हैं और इस प्रकार हम परमेश्वर के सामने आते हैं, जहाँ हमें उसकी रोशनी मिलती है। हम प्रतिदिन अपने जीवन, क्रियाकलापों, शब्दों, सोच और विचारों में परमेश्वर के वचन के भीतर जीते हैं और हम हमेशा चीजों का भेद पहचानने में सक्षम होते हैं। परमेश्वर का वचन सुई में धागा पिरोता है; अप्रत्याशित ढंग से हमारे भीतर छिपी हुई चीजें एक के बाद एक प्रकाश में आती हैं। परमेश्वर के साथ संगति देर सहन नहीं करती; हमारी सोच और विचार परमेश्वर द्वारा उघाड़कर रख दिए जाते हैं। हर पल हम मसीह के आसन के सामने जी रहे हैं, जहाँ हम न्याय से गुजरते हैं। हमारे शरीर के भीतर हर जगह पर शैतान का कब्जा बना रहता है। आज परमेश्वर का राजपद बहाल करने के लिए उसके मंदिर को शुद्ध करना होगा। पूरी तरह से परमेश्वर के कब्जे में होने के लिए हमें जीवन-मरण के संघर्ष से गुजरना होगा। जब हमारी पुरानी मानव प्रकृति सलीब पर चढ़ाई जा चुकी होगी केवल तभी मसीह का पुनरुत्थित जीवन सर्वोच्च शासन कर सकता है।
अब पवित्र आत्मा हमारे उद्धार की लड़ाई लड़ने के लिए हमारे हर कोने में धावा बोलता है! जब तक हम अपने आपको नकारने और परमेश्वर के साथ सहयोग करने के लिए राजी हैं, तब तक परमेश्वर निश्चित रूप से हमें हर समय भीतर से रोशन और शुद्ध करेगा और जिस पर शैतान ने कब्जा कर रखा है उसे नए सिरे से प्राप्त करेगा, ताकि हम परमेश्वर द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण किए जा सकें। समय बरबाद मत करो—हर क्षण परमेश्वर के वचन के भीतर रहो। संतों के साथ उन्नति करो, राज्य में लाए जाओ और परमेश्वर के साथ महिमा में प्रवेश करो।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 1
166. फिलाडेल्फिया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है जो पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है। संतों में परमेश्वर-प्रेमी हृदय उत्पन्न हुए हैं और वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर डगमगाते नहीं हैं। वे अपने इस विश्वास पर दृढ़ रहते हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीजों पर शासन करता है : इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और यह पूरी तरह निर्विवाद है! और यह कभी नहीं बदलेगा!
ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आज तुम ही हो, जिसने हमारी आध्यात्मिक आँखें खोल दी हैं, जिससे अंधे देख रहे हैं, अपाहिज चल रहे हैं और कुष्ठरोगी चंगे हो रहे हैं। यह तुम ही हो जिसने स्वर्ग की खिड़की खोल दी है, हमें आध्यात्मिक जगत के रहस्यों को देखने दिया है। तुम्हारे पवित्र शब्द हमारे भीतर समा गए हैं और शैतान द्वारा भ्रष्ट की गई हमारी मानवता से हम बचा लिए गए हैं। ऐसा तुम्हारा अपरिमेय महान काम है और तुम्हारी महान अपरिमेय दया है। हम तुम्हारे गवाह हैं!
तुम लंबे समय से खामोशी से विनम्र और छिपे रहे हो। तुमने मृत्यु से पुनरुत्थित होने का और सूली पर चढ़ने की पीड़ा सहने का, मानव जीवन के सुखों और दुखों का, और साथ-साथ उत्पीड़न और क्लेश का अनुभव किया है; तुमने मानव संसार के दर्द का अनुभव और स्वाद लिया है, और तुम्हें युग द्वारा त्यागा गया है। देहधारी परमेश्वर स्वयं परमेश्वर है। तुमने हमें परमेश्वर की इच्छा की खातिर मैले के ढेर से बचाया है, हमें अपने दाहिने हाथ से उठाया है और मुक्त रूप से अपना अनुग्रह हम पर बरसाया है। कोई प्रयास बाकी न रखते हुए, तुमने अपना जीवन हममें गढ़ा है; तुम्हारे दिल का खून और जो कीमत तुमने चुकाई है, वह संतों में ठोस रूप में उपस्थित है। हम तुम्हारे दिल के खून के परिणाम[क] हैं; हम वह कीमत हैं जो तुमने चुकाई है।
ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारी प्रेमपूर्ण उदारता और दया, तुम्हारी धार्मिकता और प्रताप, तुम्हारी पवित्रता और विनम्रता के कारण ही तुम्हारे चुने हुए असंख्य लोग तुम्हारे सामने झुकेंगे और अनंत काल तक तुम्हारी आराधना करेंगे।
आज तुमने सभी कलीसियों को पूर्ण किया है—फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया—और तुम्हारी 6,000 साल की प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। सभी संत अब नम्रता से तुम्हारे सामने समर्पित हो सकते हैं; वे एक दूसरे से आत्मा में जुड़े हुए हैं और एक दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक आगे बढ़ते हैं। वे झरने के स्रोत से जुड़े हैं। जीवन का जीवित पानी निरंतर बहता है और वह कलीसिया की सभी गंदगी और कीचड़ को बहा ले जाता और दूर कर देता है, और एक बार फिर तुम्हारे मंदिर को शुद्ध करता है। हमने व्यावहारिक सच्चे परमेश्वर को जाना है, उसके वचनों में चले हैं, और अपने कार्यों और कर्तव्यों को पहचाना है, कलीसिया के लिए खुद को खपाने के लिए जो कुछ हम कर सकते थे वो हम करते हैं। तुम्हारे सामने हर एक पल शांत रहते हुए, हमें पवित्र आत्मा के काम पर ध्यान देना चाहिए ताकि तुम्हारी इच्छा हमारे भीतर अवरुद्ध न हो। संतों के बीच आपसी प्रेम है, और कुछ की मज़बूतियां दूसरों की कमियों की भरपाई करेंगी। वे हर पल आत्मा में चल सकते हैं और पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध और रोशन किए गए हैं। सत्य समझने के तुरंत बाद वे उसे अभ्यास में ले आते हैं। वे नई रोशनी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हैं।
सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो; उसे अधिकार का इस्तेमाल करने देने का अर्थ है उसके साथ चलना। हमारे सभी विचार, धारणाएँ, सोच और सांसारिक उलझनें, धुएं की तरह हवा में गायब हो जाती हैं। हम परमेश्वर को अपनी आत्माओं पर शासन करने देते हैं, उसके साथ चलते हैं और इस तरह उत्थान हासिल करते हुए दुनिया पर विजय प्राप्त करते हैं, और हमारी आत्माएं मुक्त हो जाती हैं और रिहाई प्राप्त करती हैं : जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर राजा के रूप में राज करता है तो ये परिणाम होते हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि हम नृत्य न करें और स्तुति में न गाएं, अपनी प्रशंसा भेंट न करें, और अपने नए भजन न पेश करें?
वास्तव में परमेश्वर की स्तुति करने के कई तरीके हैं : उसका नाम पुकारना, उसके पास आना, उसके बारे में सोचना, प्रार्थना-पाठ करना, संगति में शामिल होना, चिंतन करना, सोच-विचार करना, प्रार्थना करना और प्रशंसा के गीत गाना। इस तरह की स्तुति में आनंद है, और अभिषेक है। स्तुति में शक्ति है और एक भार भी है। स्तुति में विश्वास है, और एक नई अंतर्दृष्टि भी है।
सक्रिय रूप से परमेश्वर के साथ सहयोग करो, सेवा में सहयोग करो और एक हो जाओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इरादों को पूरा करो, एक पवित्र आध्यात्मिक शरीर बनने के लिए जल्दी करो, शैतान को कुचलो, और उसकी नियति समाप्त करो। फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया परमेश्वर के सामने उठा ली गई है और परमेश्वर की महिमा में प्रकट की जाती है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 2
फुटनोट :
क. मूल पाठ में, “के परिणाम” यह वाक्यांश नहीं है।
167. विजयी राजा अपने गौरवशाली सिंहासन पर विराजमान है। उसने छुटकारे का कार्य संपन्न कर लिया है और वह अपने सारे लोगों को महिमा में प्रकट होने लाया है। सारी चीजें उसके हाथों में रहती हैं और उसने अपनी दिव्य बुद्धि और पराक्रम से सिय्योन को निर्मित और मजबूत कर दिया है। अपने प्रताप से वह पापी दुनिया का न्याय करता है; उसने असंख्य देशों और लोगों, पृथ्वी और समुद्रों और उनमें रहने वाले सभी जीवों और व्यभिचार की मदिरा से मदहोश लोगों का न्याय किया है। परमेश्वर उनका न्याय अवश्य करेगा और वह यकीनन उनसे क्रोधित होगा और उसका प्रताप प्रकट किया जाएगा। उसका न्याय त्वरित होगा और बिना देरी के किया जाएगा। उसके क्रोध की अग्नि यकीनन उनके घृणित पापों को भस्म कर देगी और किसी भी क्षण उन पर विपत्ति टूटेगी; उन्हें बचने के किसी भी मार्ग का पता नहीं होगा और उनके पास छिपने का कोई स्थान नहीं होगा, वे रोएंगे और अपने दाँत पीसेंगे और स्वयं अपना विनाश कर लेंगे।
परमेश्वर के प्यारे विजयी पुत्र निश्चित रूप से सिय्योन में रहेंगे, इससे कभी बाहर नहीं जाएंगे। परमेश्वर के चुने हुए असंख्य लोग ध्यान से उसकी आवाज सुनेंगे, वे सावधानी से उसके क्रियाकलापों पर ध्यान देंगे और उनकी प्रशंसा की आवाजें कभी बंद नहीं होंगी। एकमात्र सच्चा परमेश्वर प्रकट हुआ है! हम आत्मा में उसके बारे में निश्चित होंगे और करीब से उसका अनुसरण करेंगे; हम अपनी पूरी ताकत से आगे बढ़ेंगे और अब और नहीं झिझकेंगे। दुनिया का नतीजा हमारे सामने प्रकट हो रहा है; कलीसिया के एक उपयुक्त जीवन के साथ-साथ लोग, घटनाएँ और चीजें, जिनसे हम घिरे हैं, हमारे प्रशिक्षण को तेज कर रही हैं। आओ, जल्दी से अपने हृदयों को वापस लें, जो दुनिया से बहुत प्रेम करते हैं! आओ, जल्दी से अपनी दृष्टि वापस लें, जो इतनी धुँधली है! आओ, अपने कदम रोक लें, ताकि हम सीमाएँ न लाँघ जाएँ। आओ, अपना मुँह बंद करें, ताकि हम परमेश्वर के वचन के अनुसार चल सकें, और अब अपनी लाभ-हानियों पर झगड़ा न करें। आह, सांसारिक दुनिया और धन-दौलत के प्रति अपना लालची अनुराग—इसे त्याग दो! पतियों, बेटियों और बेटों के साथ तुम्हारा अडिग लगाव—इससे अपने को मुक्त करो! आह, तुम्हारे दृष्टिकोण और पूर्वाग्रह—इनकी ओर पीठ कर लो! आह, जागो; समय कम है! ऊपर देखो, ऊपर देखो, आत्मा के भीतर से और परमेश्वर को नियंत्रण लेने दो। कुछ भी हो जाए, दूसरी लूत की पत्नी न बनो। छोड़ दिया जाना कितना दयनीय होता है! सचमुच, कितना दयनीय! आह, जागो!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 3
168. पर्वत और नदियाँ बदल जाती हैं, धाराएँ अपनी दिशा में बहती रहती हैं और मनुष्य का जीवन उतना स्थायी नहीं होता जितना पृथ्वी और आकाश का। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही शाश्वत और पुनर्जीवित जीवन है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी शाश्वत रूप से चलता रहता है! सभी चीज़ें और घटनाएं उसके हाथों में हैं, और शैतान उसके पैरों तले है।
आज परमेश्वर अपने पूर्व-निर्धारित चयन के कारण ही हम लोगों को शैतान के चंगुल से बचाता है। वह वास्तव में हमारा उद्धारक है। मसीह का शाश्वत, पुनर्जीवित जीवन हमारे भीतर वास्तव में गढ़ दिया गया है, जो हमें परमेश्वर के जीवन से जुड़ने के लिए नियत कर रहा है, ताकि हम वास्तव में उसके रूबरू आएँ, उसे खाएँ, उसे पिएँ और उसका आनंद लें। यह परमेश्वर के दिल के खून की निःस्वार्थ भेंट है।
मौसम आते हैं, जाते हैं, परमेश्वर आँधी-तूफान से गुजरते हुए, जीवन की कितनी ही पीड़ाओं, उत्पीड़न और क्लेशों को झेलता है, दुनिया के इतने अधिक अस्वीकरण और बदनामी को बर्दाश्त करते हुए, सरकार के कितने ही झूठे आरोपों का सामना करता है, फिर भी न तो परमेश्वर का विश्वास और न ही उसका संकल्प जरा-सा कम होता है। तहेदिल से परमेश्वर की इच्छा और परमेश्वर के प्रबंधन और योजना को पूरा करने के लिए समर्पित रहते हुए, वह अपने जीवन को दरकिनार कर देता है। अपने सभी लोगों के लिए, वह कोई प्रयास नहीं छोड़ता, सावधानी से उनका पोषण और सिंचन करता है। हम चाहे कितने भी मूर्ख हों, या कितने भी जिद्दी हों, हमें केवल उसके प्रति समर्पित होने की ज़रूरत है, और मसीह का पुनर्जीवित जीवन हमारी पुरानी प्रकृति को बदल देगा...। इन सभी पहलौठे पुत्रों के लिए, वह दिन-रात अथक परिश्रम करता है, खाने और आराम की परवाह नहीं करता। कितने ही दिन और रात गुज़रें, कितनी ही तेज़ गर्मी और जमाने वाली ठंड से गुज़रना पड़े, वह सिय्योन में तहेदिल से निगरानी करता है।
दुनिया, घर, काम और हर चीज को प्रसन्नता और स्वेच्छा से पूरी तरह त्याग देता है, सांसारिक सुख-सुविधाओं से उसे कोई लेना-देना नहीं...। उसके मुँह के वचन हमारे भीतर वास्तव में वार करते हैं, हमारे दिल में गहरी छिपी चीज़ों को उजागर करते हैं। हम कैसे आश्वस्त नहीं हो सकते? उसके मुँह से निकलने वाला हर वाक्य हमारे भीतर किसी भी समय सच साबित हो सकता है। हम जो भी करते हैं, उसके सामने या उससे छिपाकर, ऐसा कुछ नहीं है जो वह नहीं जानता, ऐसा कुछ नहीं है जो वह नहीं समझता। हमारी योजनाओं और व्यवस्थाओं के बावजूद सब कुछ निश्चय ही उसके सामने प्रकट किया जाता है।
उसके सामने बैठकर, अपनी आत्मा में प्रसन्नता महसूस करते हुए, सुखी और शांत रहते हुए, फिर भी हमेशा खालीपन और परमेश्वर के प्रति सचमुच ऋणी महसूस करना : यह एक अकल्पनीय आश्चर्य है और इसे हासिल करना असंभव है। पवित्र आत्मा पर्याप्त रूप से साबित करता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सच्चा परमेश्वर है! यह एक अकाट्य प्रमाण है! इस समूह के हम लोग, वास्तव में अवर्णनीय रूप से धन्य हैं! यदि परमेश्वर का अनुग्रह और दया नहीं होती, तो हम बरबादी की ओर चले जाते और शैतान का अनुसरण करने लगते। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही हमें बचा सकता है!
अहा! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यावहारिक परमेश्वर! तुम ही हो जिसने हमारी आध्यात्मिक आंखें खोली हैं, और हमें आध्यात्मिक क्षेत्र के रहस्य दिखाए हैं। राज्य की संभावनाएँ अनंत हैं। आओ, सावधान रहकर प्रतीक्षा करें। वह दिन बहुत दूर नहीं हो सकता।
युद्ध की लपटें चक्कर लगाती हैं, तोप का धुआँ हवा में भर गया है, मौसम गर्म हो रहा है, जलवायु परिवर्तित हो रही है, महामारी फैलेगी, लोग मरेंगे और बचने की कोई उम्मीद न होगी।
आह! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यावहारिक परमेश्वर! तुम हमारा मजबूत किला हो। तुम हमारा आश्रय हो। हम तुम्हारे पंखों के नीचे सिमटते हैं, और आपदा हम तक नहीं पहुंच सकती। ऐसी है तुम्हारी दिव्य सुरक्षा और देखभाल।
हम सब ऊँचे सुर में गाते हैं; स्तुति करते हैं और हमारा स्तुति-गान पूरे सिय्योन में गूँजता है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, व्यावहारिक परमेश्वर ने हमारे लिए वह खूबसूरत मंजिल तैयार की है। सावधान रहो—नज़र रखो! अभी भी वह घड़ी दूर नहीं है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 5
169. जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर—राज्य के राजा—की गवाही दी गई है, तब से पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर के प्रबंधन का दायरा पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। परमेश्वर के प्रकटन की गवाही न केवल चीन में दी गई है, बल्कि सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही दी गई है। वे सभी इस पवित्र नाम को पुकार रहे हैं, किसी भी तरह से परमेश्वर के साथ सहभागिता करने का प्रयास कर रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इरादों को समझ रहे हैं और कलीसिया में सहयोग देते हुए सेवा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा इसी अद्भुत तरीके से काम करता है।
विभिन्न राष्ट्रों की भाषाएँ एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आत्मा एक ही है। यह आत्मा ब्रह्मांड भर की कलीसियाओं को जोड़ता है और बिना किसी अंतर के, परमेश्वर के साथ पूरी तरह एक है, और इसमें कोई शक नहीं है। पवित्र आत्मा अब उन्हें पुकारता है और सतर्क रखता है। यह परमेश्वर की दया की वाणी है। वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पवित्र नाम को पुकार रहे हैं! वे स्तुति भी करते हैं और गाते भी हैं। पवित्र आत्मा के कार्य में कभी भी कोई विचलन नहीं हो सकता; और सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाते हैं, वे पीछे नहीं हटते हैं—चमत्कारों पर चमत्कार होते रहते हैं। लोगों के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है और इसका अनुमान लगाना उन्हें असंभव लगता है।
सर्वशक्तिमान परमेश्वर ब्रह्मांड में जीवन का राजा है! वह महिमामय सिंहासन पर बैठता है और दुनिया का न्याय करता है, सभी पर संप्रभुता रखता है, और सभी राष्ट्रों पर शासन करता है; सभी लोग उसके सामने घुटने टेकते हैं, उससे प्रार्थना करते हैं, उसके करीब आते हैं और उसके साथ संवाद करते हैं। चाहे तुमने परमेश्वर में कितने भी लम्बे समय से विश्वास रखा हो, चाहे तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊंचा हो या तुम्हारी वरिष्ठता कितनी भी अधिक हो, यदि तुम अपने दिल में परमेश्वर का विरोध करते हो तो तुम्हारा न्याय किया जाना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सामने दंडवत होकर दर्द भरा अनुनय-विनय करना चाहिए; यह वास्तव में तुम्हारा अपने कर्मों के फल को भुगतना है। यह विलाप का स्वर आग और गंध की झील में यातना सहने का स्वर है, और यह परमेश्वर की लोहे की छड़ी से ताड़ना पाने का क्रंदन है; यह मसीह के आसन के सामने किया गया न्याय है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 8
170. सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसने अपना गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट कर दिया है, उसका पवित्र आध्यात्मिक शरीर प्रकट हो चुका है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और उसकी देह दोनों ही बदल गई हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्यक्तित्व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सुनहरा पटुका बाँधे हुए है और दुनिया व सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें ज्वालाओं के समान हैं, उसके मुख में पैनी दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम रूप से उज्ज्वल है और उसकी महिमामयी रोशनी उदित होती और चमकती है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्य मग्न हैं और सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, उस एक सच्चे परमेश्वर की विजयी वापसी का स्वागत करते हैं जो अपनी छह हजार वर्ष की प्रबंधन योजना पूरी कर चुका है। खुशी से सब कूद और नाच रहे हैं! खुशी मनाओ! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज प्रतापी, भव्य सिय्योन पर्वत पर ऊँचा लहराता है! हर राष्ट्र खुशी मना रहा है, परमेश्वर के असंख्य चुने हुए लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्नता से हँस रहा है और परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का मुखमंडल देखूँगा, फिर भी आज मैंने इसे देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने मैं उससे बात करता हूँ और अपना दिल खोलकर रखता हूँ। खाने और पीने का सभी कुछ वह प्रचुरता से प्रदान करता है। उसकी महिमामयी रोशनी जीवन में, वचनों में, क्रियाकलापों में, सोच में और विचारों में रोशन होती है, वह मार्ग के हर कदम की अगुआई करता है और अगर कोई दिल से विद्रोह करता है तो उसका न्याय तेजी से आता है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 15
171. मनुष्य के पुत्र की गवाही दी जा चुकी है, और स्वयं परमेश्वर खुले रूप से प्रकट हो चुका है। जमकर चमकते सूरज की तरह परमेश्वर की महिमा प्रकट की गई है! परमेश्वर का तेजस्वी मुख अपनी चमक से चकाचौंध करता है; किसकी आंखें उसके विरोध की हिम्मत कर सकती हैं? प्रतिरोध मृत्यु की ओर ले जाता है! अपने दिल में जो कुछ भी तुम सोचते हो, जो भी शब्द तुम कहते हो या जो कुछ भी तुम करते हो, उसके लिए थोड़ी-सी भी दया नहीं दिखाई जाती है। तुम लोग सब समझोगे और देखोगे कि तुम लोगों ने क्या पाया है—मेरे न्याय के अलावा कुछ नहीं! अगर तुम लोग मेरे वचनों को खाने और पीने के लिए अपना प्रयास नहीं करते हो, बल्कि मनमाने ढंग से गड़बड़ी करते हो और मेरा निर्माण नष्ट करते हो, तो क्या मैं इसे बरदाश्त कर सकता हूँ? मैं इस तरह के व्यक्ति के साथ नरमी नहीं करूँगा! यदि तुम्हारा व्यवहार और अधिक बिगड़ा, तो तुम आग में भस्म हो जाओगे! सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक आध्यात्मिक शरीर में प्रकट हुआ है, और सिर से पैर तक देह या रक्त से बिल्कुल जुड़ा नहीं है। वह ब्रह्मांडीय दुनिया से परे है, और तीसरे स्वर्ग के गौरवशाली सिंहासन पर बैठा सभी चीजों पर शासन करता है! ब्रह्मांड और सभी चीजें मेरे हाथों में हैं। मैं कहता हूँ और यह अस्तित्व में आ जाता है। मैं नियत करता हूँ और यह इस प्रकार नियत हो जाता है। शैतान मेरे पैरों के तले है; वह एक अथाह कुंड में है! जब मेरी वाणी प्रकट होगी, स्वर्ग और पृथ्वी गायब हो जाएंगे और उनका कोई अस्तित्व नहीं रहेगा! सभी चीज़ें नवीनीकृत हो जाएंगी; यह एक सदा अपरिवर्तनीय सत्य है जो पूरी तरह सही है। मैंने दुनिया को जीत लिया है, सभी बुरों पर विजय प्राप्त की है। मैं यहाँ बैठा तुम लोगों से बात कर रहा हूँ; जिनके पास कान हैं, उन्हें सुनना चाहिए और जो जीवित हैं, उन्हें स्वीकार करना चाहिए।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 15
172. सर्वशक्तिमान सच्चा परमेश्वर, सिंहासन पर विराजमान राजा, समस्त राष्ट्रों और लोगों की ओर मुख किए हुए पूरे ब्रह्मांड पर शासन करता है और परमेश्वर का भव्य प्रकाश दुनिया भर में चमकता है। ब्रह्मांड में और पृथ्वी के अंतिम छोरों तक सभी जीवित प्राणी देखेंगे। सच्चे परमेश्वर के मुखमंडल के प्रकाश में पर्वतों, नदियों, झीलों, भूमियों, महासागरों और सभी जीवित प्राणियों ने अपने पर्दे खोल दिए हैं और वे पुनर्जीवित हो गए हैं, मानो किसी सपने से जाग उठे हों, मानो वे मिट्टी को चीरकर निकलने वाले अंकुर हों!
आह! एकमात्र सच्चा परमेश्वर दुनिया के लोगों के सामने प्रकट होता है। उससे प्रतिरोधपूर्वक पेश आने का दुस्साहस कौन करता है? सभी भय से काँपते हैं। सभी पूरी तरह से अधीन हो जाते हैं और सभी बारम्बार उसकी दया और क्षमा की याचना करते हैं। असंख्य लोग उसके सामने घुटने टेक देते हैं और असंख्य मुँह उसकी आराधना करते हैं! महाद्वीप, महासागर, पर्वत, नदियाँ और सब वस्तुएँ उसकी निरंतर प्रशंसा करती हैं! वसंत की महक से भरी गर्म बयार अपने साथ हल्की, निरंतर वसंत-वर्षा लाती है। कलकल बहती सरिताएँ और जनसमूह समान हैं, दोनों शोक और आनंद से भरे हुए ऋणभाव और आत्मग्लानि के आँसू बहाते हैं। नदियाँ, झीलें, लहरें और हिलोरें, सभी सच्चे परमेश्वर के पवित्र नाम की प्रशंसा करते हुए गा रही हैं! प्रशंसा की ध्वनि इतनी स्पष्ट सुनाई देती है! पुरानी चीजें, जिन्हें कभी शैतान ने भ्रष्ट कर दिया था—उनमें से प्रत्येक अब नवीनीकृत और परिवर्तित होकर पूर्णतः एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेगी ...
यह पवित्र तुरही है और इसने बजना शुरू कर दिया है! ध्यान से सुनो। यह इतनी मधुर ध्वनि सिंहासन का कथन है। यह प्रत्येक राष्ट्र और परमेश्वर के चुने हुए प्रत्येक इंसान के लिए घोषणा कर रही है कि समय आ गया है, अंत के दिनों का परिणाम आ गया है। मेरी प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। मेरा राज्य पृथ्वी पर खुलकर प्रकट हो गया है और दुनिया के राज्य मेरे, यानी परमेश्वर के राज्य बन गए हैं। सिंहासन से मेरी सात तुरहियाँ बजती हैं और ऐसी चमत्कारी चीजें घटित होंगी! धरती के कोने-कोने से लोग हिमस्खलन और वज्रपात की प्रचंडता के साथ हर दिशा से एक-साथ लपककर आते हैं, कुछ समुद्र की यात्रा करते हुए, तो कुछ विमानों में उड़कर, कुछ हर आकार और स्वरूप के वाहनों पर सवार होकर, तो कुछ घोड़ों की सवारी करके। नज़दीक से देखो। ध्यान से सुनो। हर रंग के घोड़ों के ये सवार, बुलंद हौसलों के साथ, पराक्रमी और भव्य लगते हैं, मानो युद्ध के मैदान में जा रहे हों और उन्हें मृत्यु की परवाह न हो। घोड़ों की हिनहिनाहट और सच्चे परमेश्वर के लिए चीखते-चिल्लाते लोगों के कोलाहल के बीच बहुत सारे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे पल भर में उनके खुरों से कुचले जाते हैं। कुछ लोग मारे जाते हैं, कुछ अंतिम साँस ले रहे होते हैं, कुछ क्षत-विक्षत होते हैं, कोई भी उनकी देखभाल के लिए नहीं होता, वे उन्मत्त होकर चीखते हैं, दर्द से चिल्लाते हैं। विद्रोह के पुत्र! क्या यह तुम लोगों का अंतिम परिणाम नहीं है?
मैं अपने लोगों को आनंदित होकर देखता हूँ, जो मेरी वाणी सुन पाते हैं और हर राष्ट्र और भूमि से इकट्ठे होते हैं। सच्चे परमेश्वर का नाम हमेशा अपने मुख पर रखकर जनसमूह अनवरत रूप से उसकी स्तुति करते और उछलते-कूदते हैं! वे दुनिया के लोगों को गवाही देते हैं और सच्चे परमेश्वर के लिए उनकी गवाही की आवाज अनेक जलधाराओं की गर्जना जैसी है। जनसमूह मेरे राज्य में उमड़ पड़ेंगे।
मेरी सात तुरहियाँ बजकर सोए हुए लोगों को जगाती हैं! जल्दी उठो, ज्यादा देर नहीं हुई। अपने जीवन की ओर झुको! अपनी आँखें खोलो और देखो कि अभी क्या समय हुआ है। खोजने लायक क्या चीज़ है? सोचने के लिए क्या रखा है? और चिपके रहने के लिए क्या है? क्या तुमने कभी मेरे जीवन को पाने और उन सभी चीज़ों को पाने के मूल्य के अंतर पर विचार नहीं किया, जिनसे तुम प्यार करते हो और जिनसे चिपके रहते हो? अब और मनमाने मत बनो या खिलवाड़ मत करो। इस अवसर को मत गँवाओ। यह समय फिर नहीं आएगा! तुरंत खड़े हो जाओ, अपनी आत्मा से काम लेने का अभ्यास करने में खुद को प्रशिक्षित करने में सक्षम बनो और शैतान की अनेक साजिशों और चालों की असलियत जानने और उन्हें नाकाम करने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करने में सक्षम बनो, और शैतान पर विजय प्राप्त करो, ताकि तुम्हारे जीवन का अनुभव गहरा हो सके और तुम मेरे स्वभाव को जी सको, ताकि तुम्हारा जीवन परिपक्व और अनुभवी बन सके और तुम हमेशा मेरे पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाकर चल सको। न तो हतोत्साहित हो और न ही कमजोर बनो, बल्कि हमेशा कदम-दर-कदम, ठीक मार्ग के अंत तक आगे बढ़ते रहो!
जब सात तुरहियाँ फिर से बजेंगी, तो यह न्याय की तुरही की जोरदार आवाज होगी, विद्रोह के पुत्रों के न्याय के लिए, अनगिनत राष्ट्रों और लोगों के न्याय के लिए, और प्रत्येक राष्ट्र परमेश्वर के सामने झुकेगा। परमेश्वर का भव्य मुख-मंडल निश्चित रूप से अनगिनत राष्ट्रों और लोगों के सामने प्रकट होगा। हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त हो जाएगा, और निरंतर सच्चे परमेश्वर को पुकारेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर और अधिक महिमा-मंडित होगा, और मेरे पुत्र और मैं एक साथ महिमा प्राप्त करेंगे और शासन करेंगे, अनगिनत राष्ट्रों और लोगों का न्याय करेंगे, बुरे को दंडित करेंगे और जो मेरे द्वारा चुने गए हैं उन्हें बचाएँगे और उन पर दया करेंगे, और राज्य को ठोस और स्थिर बनाएँगे। सात तुरहियों की आवाज़ से बहुत सारे लोगों को बचाया जाएगा, जो निरंतर प्रशंसा के साथ मेरे सामने घुटने टेकने और मेरी आराधना करने के लिए लौट आएँगे!
जब सात तुरहियाँ एक बार फिर से बजेंगी, तो यह युग का समापन होगा, दानवों और शैतान पर जीत का तूर्यनाद, पृथ्वी पर राज्य में खुलकर जीने की शुरुआत की सूचना देने वाली सलामी! कितनी बुलंद आवाज़ है, वह आवाज़ जो सिंहासन के चारों ओर गूँजती है, यह तूर्यनाद स्वर्ग और पृथ्वी को हिला देता है, जो मेरी प्रबंधन योजना की जीत का संकेत है, और जो शैतान का न्याय है; यह इस पुरानी दुनिया को पूरी तरह से मौत की सज़ा और अथाह कुंड में डाल देने की सज़ा देता है! तुरही का यह तूर्यनाद दर्शाता है कि अनुग्रह का द्वार बंद होने वाला है, पृथ्वी पर राज्य का जीवन शुरू होगा, जो पूरी तरह से उचित और उपयुक्त है। परमेश्वर उन्हें बचाता है, जो उससे प्रेम करते हैं। एक बार जब वे उसके राज्य में वापस लौट जाएँगे, तो धरती पर लोग अकाल और महामारी का सामना करेंगे, और परमेश्वर के सात कटोरे और सात विपत्तियाँ एक के बाद एक सामने आ जाएँगी। पृथ्वी और स्वर्ग मिट जाएँगे, परंतु मेरा वचन नहीं!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 36
173. जब पूर्व से बिजली चमकती है, यह निश्चित रूप से वही क्षण भी होता है जब मैं अपने वचन बोलना आरंभ करता हूँ—जब बिजली चमकती है, तो सभी स्वर्ग रोशन हो उठते हैं और सभी तारों का रूपान्तरण हो जाता है। पूरी मानवजाति ऐसी है मानो शुद्धिकरण से गुजर चुकी हो। पूर्व से आने वाले इस प्रकाश की चमक में, समस्त मानवजाति अपने मूल स्वरूप में प्रकट हो जाती है, उनकी आँखें चुँधिया जाती हैं, उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करें, और यह तो वे और भी नहीं समझ पाते कि अपने कुरूप चेहरों को कैसे छिपाएँ। वे पशुओं जैसे भी हैं, मेरे प्रकाश से दूर भाग रहे हैं और पहाड़ी गुफाओं में शरण ले रहे हैं; फिर भी, मेरे प्रकाश में से कुछ भी नहीं मिटाया जा सकता है। सभी मनुष्य भौचक्के हैं, सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन के लिए सौभाग्यशाली महसूस करते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोसते हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को व्यक्त करना कठिन है; आत्म-ताड़ना के आँसुओं की नदियाँ बन जाती हैं और वे एक के बाद एक व्यापक जल प्रवाह में बह जाती हैं और फिर पल भर में ही उनका नामोनिशान मिट जाता है। एक बार फिर, मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जागृत कर रहा है और मानवजाति को एक और नई शुरुआत दे रहा है। मेरा हृदय उमड़ता है और पहाड़ लयबद्ध, आनन्दमय संगत में उछलते हैं, समुद्र खुशी से नाचते हैं और लहरें चट्टानों पर थाप देती हैं। जो मेरे हृदय में है, उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं सभी अशुद्ध चीजों को अपनी नजरों के अधीन भस्म कर दूँगा; मैं विद्रोह के सारे पुत्रों को अपनी नजरों के सामने से ओझल कर दूँगा, उनका आगे से कोई अस्तित्व ही नहीं रहेगा। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरुआत की है, बल्कि समस्त ब्रह्मांड में एक नए कार्य की शुरुआत भी की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य बन जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य, मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए अस्तित्वहीन हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी होकर लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा में, बड़ा लाल अजगर मेरी योजना में रुकावट डालने का हर हथकंडा आज़मा चुका है, लेकिन क्या मैं उसकी साजिशों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या मैं उसकी धमकियों से डरकर आत्मविश्वास खो सकता हूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी एक भी ऐसा प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैंने अपनी हथेली में न रखा हो; बड़े लाल अजगर के बारे में यह बात कैसे और भी अधिक सच है जो मेरे लिए एक विषमता की तरह है? क्या वह भी ऐसी चीज नहीं है जिसे मैं अपने हाथों अपने हिसाब से चलाता हूँ?
मानव जगत में मेरे देहधारण के दौरान मानवजाति मेरे मार्गदर्शन में अनजाने में इस दिन तक आ पहुँची है, और अनजाने में मुझे जान गयी है। लेकिन जहाँ तक इसकी बात है कि जो मार्ग सामने है उस पर कैसे चला जाए, तो किसी को कोई आभास नहीं है, कोई नहीं जानता है और किसी के पास इसका कोई सुराग तो और भी नहीं है कि वह मार्ग उन्हें किस दिशा में ले जाएगा। सर्वशक्तिमान की निगरानी में ही कोई भी मार्ग पर अंत तक चल पाएगा; केवल चमकती पूर्वी बिजली के मार्गदर्शन से ही कोई भी मेरे राज्य तक ले जाने वाली दहलीज़ को पार कर पाएगा। लोगों में कभी ऐसा कोई नहीं हुआ है जिसने मेरा चेहरा देखा हो, जिसने चमकती पूर्वी बिजली को देखा हो; ऐसा कौन हुआ है जिसने मेरे सिंहासन से जारी कथनों को सुना हो? वास्तव में, प्राचीन काल से ही कोई भी मनुष्य सीधे मेरे व्यक्तित्व के सम्पर्क में नहीं आया है; केवल आज जबकि मैं संसार में आ चुका हूँ, तो लोगों के पास मुझे देखने का अवसर है। किंतु आज भी लोग मुझे नहीं जानते, ठीक वैसे ही जैसे वे बस मेरा चेहरा देखते हैं और केवल मेरी आवाज सुनते हैं, लेकिन मेरा अभिप्राय नहीं समझते। सभी मनुष्य ऐसे ही हैं। मेरे लोगों में से एक होने के नाते, जब तुम लोग मेरा चेहरा देखते हो, तो क्या तुम लोग बहुत ज़्यादा गर्व महसूस नहीं करते? और क्या तुम लोग शर्मिन्दगी महसूस नहीं करते क्योंकि तुम लोग मुझे नहीं जानते? मैं लोगों के बीच चलता-फिरता हूँ और उन्हीं के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैंने देहधारण कर लिया है और मानव जगत में आ गया हूँ। मेरा उद्देश्य मात्र इतना नहीं है कि इंसान मेरे देह को देख पाए; अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इंसान मुझे जान सके। इसके अलावा मैं अपने देहधारण के माध्यम से मानवजाति को उसके पापों का दोषी सिद्ध करूँगा। मैं अपने देहधारण के माध्यम से उस बड़े लाल अजगर को परास्त करूँगा और उसके अड्डे को नष्ट कर दूँगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 12
174. जब मैं पूरे ब्रह्मांड से बोलता हूँ, सब लोग मेरी आवाज सुनते हैं, यानी सभी लोग उन सभी कर्मों को देखते हैं जिन्हें मैंने समूचे ब्रह्मांड में अंजाम दिया है। जो मेरे इरादों के विरुद्ध जाते हैं, अर्थात जो मनुष्य के कर्मों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के बीच गिरेंगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को नया बनाऊँगा; मेरी बदौलत, सूर्य और चंद्रमा नए हो जाएँगे, आकाश अब वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; और पृथ्वी पर सभी चीजें फिर से नई बना दी जाएँगी—यह सब मेरे वचनों के कारण संपन्न किया जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर सारे देशों को नए सिरे से बाँटा जाएगा और मेरे राज्य द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिससे पृथ्वी पर विद्यमान देश हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे, और केवल वह राज्य होगा जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी देशों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर मनुष्यों में से वे सभी जो दानवों के हैं पूर्णतया नष्ट कर दिए जाएँगे। वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं वे मेरी जलती हुई आग के बीच गिर पड़ेंगे—अर्थात् उनको छोड़कर जो अभी धारा के अन्तर्गत हैं, शेष सभी को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं प्रत्येक जनसमूह को ताड़ना दूँगा तो धार्मिक समुदाय मेरे राज्य में अलग-अलग पैमाने पर लौट आएँगे और मेरे कर्मों के माध्यम से जीत लिए जाएँगे, क्योंकि वे यह देख चुके होंगे कि “सफेद बादल पर सवार पवित्र दिव्य जन” पहले ही आ चुका है। सब लोग अपनी किस्म के अनुसार छाँटे जाएँगे और वे अपने क्रियाकलापों के अनुरूप विविध प्रकार की ताड़नाएँ प्राप्त करेंगे; वे सब जिन्होंने मेरा प्रतिरोध किया है नष्ट हो जाएँगे और जहाँ तक उनकी बात है जिनके पृथ्वी पर कर्मों ने मुझे शामिल नहीं किया है, उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया है उस कारण वे पृथ्वी पर मेरी संतान और मेरे लोगों के शासन के अधीन अस्तित्व में बने रहेंगे। मैं असंख्य देशों और असंख्य लोगों के सामने प्रकट होऊँगा और अपनी वाणी को पृथ्वी पर व्यक्त करूँगा, अपने महान कार्य के पूरे होने की उद्घोषणा करूँगा और सब लोगों को अपनी-अपनी आँखों से यह देखने दूँगा।
जैसे-जैसे मेरे कथन गहन होते जाते हैं, मैं ब्रह्मांड की दशा को भी देखता हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से सभी चीजें नई बन जाती हैं। स्वर्ग बदल जाता है और पृथ्वी भी बदल जाती है। मनुष्य को उसके मूल रूप में उजागर किया जाता है और धीरे-धीरे लोगों को अपनी किस्म के अनुसार छाँटा जाता है और अनजाने में अपने “परिवारों” में लौटा दिया जाता है। इससे मुझे अत्यधिक प्रसन्नता होती है। मैं विघ्न से मुक्त हो जाता हूँ और किसी को पता चले बिना मेरा महान कार्य संपन्न होता है और सभी चीजें भी बदल जाती हैं। जब मैंने संसार की सृष्टि की थी, मैंने सभी चीजों को उनकी किस्म के अनुसार छाँट दिया था, सभी आकार वाली चीजों का वर्गीकरण किया था। जब मेरी प्रबंधन योजना समापन के निकट आएगी, मैं सृष्टि की पूर्व दशा बहाल कर दूँगा, मैं हर चीज को उसी प्रकार बहाल कर दूँगा जैसी वह मूलतः थी, प्रत्येक चीज को पूरी तरह बदल दूँगा और हर चीज को अपनी योजना में शामिल करूँगा। समय आ चुका है! मेरी योजना का अंतिम चरण पूरा होने वाला है। आह, गंदी पुरानी दुनिया! इसका मेरे वचनों के बीच पतन तय है! यह पक्का मेरी योजना से मिट्टी में मिल जाएगी! आह, सारी चीजें! वे सब मेरे वचनों के बीच नया जीवन प्राप्त करेंगी—उनके पास उनका संप्रभु होगा! आह, पवित्र और निष्कलंक नया संसार! यह पक्का मेरी महिमामई रोशनी के भीतर पुनर्जीवित होगा! आह, सिय्योन पर्वत! अब और मौन मत रह। मैं विजयी बनकर लौट आया हूँ! मैं सभी चीजों के बीच समूची पृथ्वी को देखता हूँ। पृथ्वी पर रहने वाले लोगों ने नए जीवन की शुरुआत कर दी है और उनके पास नई आशाएँ हैं। आह, मेरे लोगो! ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम मेरे प्रकाश के बीच पुनर्जीवित न होओ? ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम लोग मेरे मार्गदर्शन में आनन्द से न उछलो? भूमि उल्लास से गूँज रही है, जल हर्षोल्लासपूर्ण ठहाकों से गूँज रहा है! आह, पुनर्जीवित इस्राएल! मेरे द्वारा पूर्वनिर्धारित किए जाने की वजह से तुम कैसे गर्व महसूस नहीं कर सकते हो? कौन रोया है? किसने विलाप किया है? पहले का इस्राएल समाप्त हो गया है, और आज के इस्राएल का उदय हुआ है, जो संसार में सीधा और बहुत ऊँचा खड़ा है, और समस्त मानवता के हृदय में तनकर डटा हुआ है। आज का इस्राएल मेरे लोगों के माध्यम से अस्तित्व का आधार निश्चित रूप से प्राप्त करेगा! आह, घृणास्पद मिस्र! कहीं तू अब भी मेरा प्रतिरोध तो नहीं कर रहा है? तू कैसे मेरी दया का लाभ उठा सकता है और मेरी ताड़ना से बचने की कोशिश कर सकता है? ऐसा कैसे हो सकता है कि तू मेरी ताड़ना के दायरे में न रहे? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरा प्रतिरोध करते हैं, निश्चय ही अनन्त काल तक मेरे द्वारा ताड़ित किए जाएँगे। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ और मैं सभी लोगों को उनकी करनी के लिए हल्के में नहीं छोड़ूँगा। मैं पूरी पृथ्वी की पड़ताल करूँगा और धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ संसार के पूरब में प्रकट होते हुए मैं खुद को असंख्य मनुष्यों के सामने प्रकट करूँगा!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 26
175. मेरे लोगों की भीड़ मेरी जय-जयकार करती है, मेरे लोगों की भीड़ मेरी स्तुति करती है; असंख्य मुख एकमात्र सच्चे परमेश्वर का गुणगान करते हैं, अनगिनत लोग मेरे कर्मों को देखने के लिए अपनी आँखें उठाकर दूर निहारते हैं। राज्य मनुष्यों के जगत में अवतरित होता है, मेरा व्यक्तित्व समृद्ध और प्रचुर है। इस पर कौन खुश नहीं होगा? कौन आनंदित होकर नृत्य नहीं करेगा? ओह, सिय्योन! मेरा जश्न मनाने के लिए अपनी विजय-पताका उठाओ! मेरा पवित्र नाम घोषित करने के लिए अपना विजय-गीत गाओ! पृथ्वी की समस्त सृष्टि! जल्दी से स्वयं को शुद्ध करो, ताकि तुम मुझे अर्पित की जा सको! ऊपर के असंख्य तारो! नभ-मंडल में मेरा प्रबल सामर्थ्य दिखाने के लिए जल्दी से अपने स्थानों पर लौट जाओ! मैं पृथ्वी पर अपने लोगों की आवाजें ध्यान से सुनने के लिए कान लगाता हूँ, जो मेरे प्रति अपना असीम प्रेम और श्रद्धा गीत में उड़ेलते हैं! इस दिन, जब पूरी सृष्टि पुनर्जीवित होती है, मैं मनुष्य के जगत में आता हूँ। ठीक इसी पल, सभी फूल जोरों से खिलते हैं, सभी पक्षी एक सुर में गाते हैं, सभी चीजें उल्लास से इकट्ठा झूम उठती हैं! राज्य की तोप की सलामी के बीच शैतान का राज्य ध्वस्त हो जाता है, राज्य-गान की गड़गड़ाहट में नष्ट हो जाता है, और फिर कभी सिर नहीं उठा पाता!
पृथ्वी पर कौन सिर उठाने और प्रतिरोध करने का साहस करता है? जब मैं पृथ्वी पर उतरता हूँ तो दाह लाता हूँ, कोप लाता हूँ, सभी प्रकार की आपदाएँ लाता हूँ। पृथ्वी के राज्य अब मेरा राज्य हैं! ऊपर आकाश में बादल लुढ़कते और लहराते हैं; आकाश के नीचे झीलें और नदियाँ आनंदपूर्वक उमड़-घुमड़कर उद्वेलित करने वाला राग उत्पन्न करती हैं। विश्राम करते जानवर अपनी माँदों से बाहर निकलते हैं, और मेरे असंख्य लोग मेरे द्वारा अपनी नींद से जगा दिए जाते हैं। असंख्य लोग जिस दिन की प्रतीक्षा में थे, वह दिन आखिरकार आ ही गया! वे मुझे सर्वाधिक सुंदर गीत भेंट करते हैं!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, राज्य-गान
176. जब राज्य की सलामी गूँजती है—और वही वह क्षण होता है जब सात बार मेघगर्जन होते हैं—तब यह ध्वनि स्वर्ग और पृथ्वी को झकझोर देती है, सर्वोच्च आसमान में हलचल मचा देती है और प्रत्येक मानव के हृदय के तारों को कंपकंपा देती है। बड़े लाल अजगर के देश में राज्य का स्तुतिगान आधिकारिक तौर पर गूँज उठता है, यह सिद्ध करते हुए कि मैंने उस देश को नष्ट करके अपना राज्य स्थापित कर लिया है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह बात है कि पृथ्वी पर मेरा राज्य स्थापित हो गया है। इस क्षण मेरे स्वर्गदूत संसार के प्रत्येक देश में घूमने के लिए भेजे जाने लगे हैं, ताकि वे मेरे पुत्रों और मेरे लोगों की चरवाही कर सकें। यह मेरे कार्य के अगले चरण की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी है। तथापि मैं व्यक्तिगत रूप से उस स्थान पर आता हूँ जहाँ वह बड़ा लाल अजगर कुंडली मारकर बैठा है और उसके साथ “प्रतिस्पर्धा” करता हूँ। एक बार जब सभी लोग मुझे देह में जानने लगेंगे और देह में मेरे कर्मों को देख पाएँगे, तब बड़े लाल अजगर की माँद राख में बदल जाएगी और इस तरह विलुप्त हो जाएगी कि उसका नामो-निशान तक नहीं रहेगा। ...
आज, मैं न केवल बड़े लाल अजगर के देश के ऊपर उतर रहा हूँ, बल्कि मैं अपना चेहरा समूचे ब्रह्माण्ड की ओर भी मोड़ रहा हूँ, जिसने समूचे सर्वोच्च आसमान में कंपकंपाहट उत्पन्न कर दी है। क्या कहीं कोई एक भी स्थान है जो मेरे न्याय के अधीन नहीं है? क्या कोई एक भी स्थान है जो उन आपदाओं के बीच नहीं है जो मैं उस पर बरसाता रहता हूँ? हर उस स्थान पर जहाँ मैं जाता हूँ, मैंने तरह-तरह के “विनाश के बीज” छितरा दिए हैं। यह मेरे कार्य करने के तरीक़ों में से एक है, और यह निस्संदेह मानवता के उद्धार का एक कार्य है, और जो मैं उन्हें देता हूँ वह अब भी एक प्रकार की प्रेमपूर्ण दयालुता है। मैं चाहूँगा कि और भी अधिक लोग मुझे जानें और मुझे देखें और इस तरह उस परमेश्वर का भय मानने लगें जिसे वे इतने सारे वर्षों से देख नहीं सके हैं, किंतु जो ठीक इस समय व्यावहारिक है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 10
177. कई सहस्राब्दियों से मनुष्य ने उद्धारकर्ता के आगमन को देखने की लालसा की है। मनुष्य उद्धारकर्ता यीशु को एक सफेद बादल पर सवार होकर व्यक्तिगत रूप से उन लोगों के बीच उतरते देखने के लिए तरसा है, जो हज़ारों सालों से उसके लिए लालायित रहे हैं और उसकी आशा की है। मनुष्य ने यह भी लालसा की है कि उद्धारकर्ता वापस लौटे और उसके साथ फिर से जुड़े; अर्थात् लोगों से हज़ारों सालों से अलग हुए उद्धारकर्ता यीशु के वापस आने और एक बार फिर से छुटकारे के उस कार्य को करने की, जो उसने यहूदियों के बीच किया था, मनुष्य के प्रति दयालु और प्रेममय होने की, मनुष्य के पाप क्षमा करने और उन्हें अपने ऊपर लेने की, यहाँ तक कि मनुष्य के सभी अपराध ग्रहण करने और उसे पाप से बचाने की लालसा की है। मनुष्य उद्धारकर्ता यीशु के पहले के समान होने की लालसा करता है—ऐसा उद्धारकर्ता जो प्यारा, दयालु और आदरणीय है, जो मनुष्य से कभी गुस्सा नहीं होता, और जो कभी मनुष्य को धिक्कारता नहीं, बल्कि जो मनुष्य के सारे पाप क्षमा करता है और उन्हें अपने ऊपर ले लेता है, यहाँ तक कि जो एक बार फिर से मनुष्य के लिए सलीब पर अपनी जान दे देगा। जब से यीशु गया है, वे चेले जो उसका अनुसरण करते थे, और वे सभी संत जिन्हें उसके नाम पर बचाया गया था, वे बेतहाशा उसे याद कर रहे और उसके आने की अपेक्षा कर रहे हैं। वे सभी, जो अनुग्रह के युग के दौरान यीशु मसीह के अनुग्रह द्वारा बचाए गए थे, अंत के दिनों के दौरान उस उल्लास भरे दिन की लालसा कर रहे हैं, जब उद्धारकर्ता यीशु सफेद बादल पर सवार होकर असंख्य लोगों के बीच प्रकट होगा। निस्संदेह, यह उन सभी लोगों की सामूहिक इच्छा भी है, जो आज उद्धारकर्ता यीशु के नाम को स्वीकार करते हैं। विश्व भर में वे सभी, जो उद्धारकर्ता यीशु के उद्धार को जानते हैं, वे अत्यधिक लालायित हैं कि यीशु मसीह अचानक आकर, पृथ्वी पर कहे अपने ये वचन पूरे करे : “मैं जैसे गया था वैसे ही मैं वापस आऊँगा।” मनुष्य मानता है कि सलीब पर चढ़ने और पुनरुत्थान के बाद यीशु सर्वोच्च परमेश्वर की दाईं ओर अपना स्थान ग्रहण करने के लिए सफेद बादल पर सवार होकर स्वर्ग वापस चला गया था। इसी प्रकार यीशु फिर से सफेद बादल पर सवार होकर (यह बादल उस बादल को संदर्भित करता है, जिस पर यीशु तब सवार हुआ था, जब वह स्वर्ग वापस गया था), उन लोगों के बीच वापस आएगा, जिन्होंने हज़ारों सालों से उसके लिए बेतहाशा लालसा की है, और वह यहूदियों का स्वरूप और उनके कपड़े धारण करेगा। उनके सामने प्रकट होने के बाद वह उन्हें भोजन प्रदान करेगा, उनके लिए जीवंत जल को उड़ेलेगा और मनुष्यों के बीच में रहेगा, अनुग्रह और प्रेमपूर्ण अनुकंपा से भरा हुआ, जीवंत और वास्तविक। ये सभी वे धारणाएँ हैं, जिन्हें लोग मानते हैं। किंतु उद्धारकर्ता यीशु ने ऐसा नहीं किया; उसने जो किया वह मनुष्य की धारणाओं के बिल्कुल विपरीत था। वह उन लोगों के बीच में नहीं आया, जिन्होंने बेसब्री से उसकी वापसी की लालसा की थी, और वह सफेद बादल पर सवार होकर असंख्य मनुष्यों के सामने प्रकट नहीं हुआ। वह पहले ही आ चुका है, किंतु मनुष्य उसे नहीं जानता, वह इससे अनभिज्ञ बना हुआ है। मनुष्य केवल निरुद्देश्य होकर उसका इंतज़ार कर रहा है—उसे थोड़ा भी अंदाजा नहीं है कि वह तो पहले ही “सफेद बादल” पर सवार होकर नीचे आ चुका है (वह सफेद बादल, जो उसका आत्मा, उसके वचन, उसका संपूर्ण स्वभाव और उसका स्वरूप है), और वह अब उन विजेताओं के समूह के बीच है, जिसे वह अंत के दिनों के दौरान बनाएगा। मनुष्य इसे कैसे जान सकता था कि भले ही पवित्र उद्धारकर्ता यीशु मनुष्य के प्रति प्रेमपूर्ण अनुकंपा और प्रेम से भरा हुआ है, पर उसका उन “मंदिरों” में कार्य करना संभव नहीं है जो गंदगी से भरे हैं और जहाँ अशुद्ध आत्माएँ रहती हैं? यद्यपि मनुष्य उसके आगमन का इंतज़ार करता रहा है, फिर भी वह उनके सामने कैसे प्रकट हो सकता है जो अधार्मिक का मांस खाते हैं, अधार्मिक का रक्त पीते हैं और अधार्मिकों के वस्त्र पहनते हैं, जो उस पर विश्वास तो करते हैं फिर भी उसे जानते नहीं, और लगातार उससे जबरदस्ती माँगते रहते हैं? मनुष्य केवल यही जानता है कि उद्धारकर्ता यीशु प्रेमपूर्ण अनुकंपा और दयालुता से परिपूर्ण है, और वह एक पाप-बलि है जो छुटकारे से भरपूर है। परंतु मनुष्य को नहीं पता कि वह स्वयं परमेश्वर है, जो धार्मिकता, प्रताप, कोप और न्याय से लबालब भरा है, और अधिकार और गौरव से संपन्न है। इसलिए, भले ही मनुष्य छुटकारा दिलाने वाले की वापसी के लिए उत्सुकता से लालायित रहता है और उसके लिए तरसता है, यहाँ तक कि उसकी प्रार्थनाएँ “स्वर्ग” को भी द्रवित कर देती हैं, किंतु उद्धारकर्ता यीशु उन लोगों के सामने प्रकट नहीं होता, जो उस पर विश्वास तो करते हैं किंतु उसे जानते नहीं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, उद्धारकर्ता पहले ही एक “सफेद बादल” पर सवार होकर वापस आ चुका है
178. मैंने अपनी महिमा इस्राएल को दी और फिर उसे हटा लिया, और इस प्रकार इस्राएलियों को पूर्व में ले आया और सभी मनुष्यों को भी पूर्व में ले आया, उन सभी को रोशनी में ले आया, ताकि वे इससे फिर से मिल सकें, इससे जुड़े रहें और इसे अब और न खोजें। मैं ऐसा करूँगा कि जो लोग खोज रहे हैं वे सब फिर से रोशनी देख सकें, उस महिमा को देखें जो मेरे पास इस्राएल में थी, यह देखें कि मैं बहुत पहले सफेद बादल पर सवार होकर मनुष्यों के बीच आ चुका हूँ और वे सफेद बादलों के समूहों और फलों के गुच्छों को प्रचुर मात्रा में देख लें। यही नहीं, मैं ऐसा करूँगा कि वे इस्राएल के यहोवा परमेश्वर को देख सकें, यहूदियों के “स्वामी” को देख सकें, इच्छित मसीहा को देख सकें और मेरा पूर्ण रूप देख सकें जिसका युगों-युगों से राजाओं ने उत्पीड़न किया है। मैं संपूर्ण ब्रह्मांड पर काम करूँगा और मैं महान कार्य करूँगा, और अंत के दिनों के मनुष्य के सामने अपनी पूरी महिमा और अपने सभी कर्म प्रकट कर दूँगा, और मैं अपना सारा महिमामय मुखमंडल उनके सामने प्रकट करूँगा जिन्होंने कई वर्षों से मेरी प्रतीक्षा की है, और उनके सामने जो मुझे सफेद बादल पर सवार होकर आते हुए देखने के लिए लालायित रहे हैं, उस इस्राएल के सामने प्रकट करूँगा जो मेरे एक बार फिर प्रकट होने के लिए लालायित है, और उस समस्त मानवजाति के सामने प्रकट करूँगा जो मुझे सताती है, ताकि सभी यह जान सकें कि मैंने बहुत पहले ही अपनी महिमा हटा ली है और उसे पूर्व में ले आया हूँ, और वह अब यहूदिया में नहीं है, क्योंकि अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं!
पूरे ब्रह्मांड में मैं अपना कार्य कर रहा हूँ और पूर्व में भारी गर्जनाएँ निरंतर जारी हैं और सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरे कथन ही हैं जो सभी लोगों को वर्तमान में ले आए हैं। मैं सब लोगों को अपने कथनों से जीत लेता हूँ, उन्हें इस धारा में गिराता हूँ और उनसे अपने आगे आत्मसमर्पण करवाता हूँ, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा वापस लेकर उसे नए सिरे से पूर्व में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा देखने के लिए लालायित नहीं होता? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतजार नहीं करता? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी मनोहरता के लिए नहीं तरसता? कौन रोशनी की ओर नहीं आएगा? कौन कनान की समृद्धि नहीं देखेगा? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन उसकी सराहना नहीं करता जिसके पास महान सामर्थ्य है? मेरे कथन पूरी पृथ्वी पर प्रसारित होंगे और मैं अपने चुने हुए लोगों के सामने और अधिक वचन व्यक्त करूँगा और कहूँगा, जैसे शक्तिशाली गर्जन पर्वतों और नदियों को हिला रहा हो। मैं अपने वचन पूरे ब्रह्मांड से और मानवजाति से बोलता हूँ। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य की निधि बन गए हैं और सभी लोग मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूर्व से लेकर पश्चिम तक कौंधती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य इनसे अलग होने का अनिच्छुक होता है और ये मनुष्य के लिए अथाह भी हैं और यही नहीं, इनके कारण मनुष्य आनन्द का अनुभव करता है। नवजात शिशुओं की तरह सभी लोग खुशी और आनंद से भरे हैं और मेरे आगमन का जश्न मनाते हैं। अपने कथनों के माध्यम से मैं सब लोगों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद मैं औपचारिक रूप से मानवजाति के बीच प्रवेश करूँगा और ऐसा करूँगा कि वे मेरी पूजा करने आएँ। मुझसे प्रवाहित होती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों के चलते सब लोग मेरे समक्ष आते हैं और देखते हैं कि बिजली पूर्व से चमकती है और मैं भी पूर्व में “जैतून के पर्वत” पर उतर चुका हूँ, और मैं बहुत पहले पृथ्वी पर आ चुका हूँ, और मैं अब यहूदियों का पुत्र नहीं हूँ, बल्कि पूर्व की बिजली हूँ। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मानवजाति के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ उसके बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अब से असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे अब से असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। उससे भी अधिक, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामय मुखमंडल को देखें, मेरे कथन सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरा संपूर्ण इरादा है; यही मेरी योजना का अंत और चरमोत्कर्ष है और साथ ही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है : तमाम राष्ट्र मेरी पूजा करें, तमाम मुख मुझे स्वीकार करें, तमाम लोग मुझ पर भरोसा रखें और मेरे चुने तमाम लोग मेरे सामने आत्मसमर्पण करें!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सात गर्जनाएँ गरजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा
179. एक समय मैं यहोवा के नाम से पुकारा जाता था, एक समय मुझे लोग मसीहा के रूप में भी जानते थे और एक समय लोग मुझे प्यार और सम्मान से उद्धारकर्ता यीशु भी कहते थे। आज मैं वह यहोवा या यीशु नहीं हूँ, जिसे लोग अतीत में जानते थे। बल्कि मैं वह परमेश्वर हूँ जो अंत के दिनों में वापस आया है, वह परमेश्वर जो युग का समापन करेगा; मैं स्वयं परमेश्वर हूँ, जो अपने संपूर्ण स्वभाव से भरा है और अधिकार, आदर और महिमा से भरा, पृथ्वी के छोर से उदित होता है। लोग कभी मेरे संपर्क में नहीं रहे हैं, उन्होंने मुझे कभी जाना नहीं है और वे मेरे स्वभाव से हमेशा अनभिज्ञ रहे हैं। संसार की रचना के समय से लेकर आज तक एक भी मनुष्य ने मुझे नहीं देखा है। यह वह परमेश्वर है जो अंत के दिनों के दौरान लोगों पर प्रकट होता है, किंतु उनके बीच छिपा हुआ है। वह सामर्थ्य से भरपूर और अधिकार से लबालब भरा हुआ, दहकते हुए सूर्य और धधकती हुई आग के समान, सच्चे और वास्तविक रूप में, लोगों के बीच निवास करता है। ऐसा एक भी व्यक्ति या चीज नहीं है जिसका मेरे वचनों द्वारा न्याय नहीं किया जाएगा, और ऐसा एक भी व्यक्ति या चीज नहीं है जिसे जलती आग के माध्यम से शुद्ध नहीं किया जाएगा। अंततः मेरे वचनों के कारण तमाम देश धन्य हो जाएँगे और मेरे वचनों के कारण टुकड़े-टुकड़े भी कर दिए जाएँगे। इस तरह अंत के दिनों में सभी लोग देखेंगे कि मैं ही वह उद्धारकर्ता हूँ जो वापस लौट आया है, और मैं ही वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ जो समस्त मानवजाति को जीतता है। और सभी देखेंगे कि मैं एक बार मनुष्य के लिए पाप-बलि था, किंतु अंत के दिनों में मैं धधकते सूर्य की ज्वाला बन गया हूँ जो सभी चीजों को जला देती है, और साथ ही मैं धार्मिकता का सूर्य बन गया हूँ जो सभी चीजों को प्रकट कर देता है। यह मेरा अंत के दिनों का कार्य है। मैं इस नाम को अपनाता हूँ और यह स्वभाव धारण करता हूँ ताकि सभी लोग देख सकें कि मैं धार्मिक परमेश्वर हूँ, दहकता हुआ सूर्य हूँ और धधकती हुई ज्वाला हूँ, और ताकि सभी मेरी, एक सच्चे परमेश्वर की आराधना कर सकें, और ताकि वे मेरे असली चेहरे को देख सकें : मैं केवल इस्राएलियों का परमेश्वर नहीं हूँ, और मैं केवल छुटकारा दिलाने वाला नहीं हूँ; बल्कि मैं समस्त आकाश, पृथ्वी और महासागरों के सारे प्राणियों का परमेश्वर हूँ।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, उद्धारकर्ता पहले ही एक “सफेद बादल” पर सवार होकर वापस आ चुका है
180. परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है, जो उसका प्रकटन खोजते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है, जो तुम खोज रहे हो? क्या तुम परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम उसके पदचिह्न खोज रहे हो? परमेश्वर के प्रकटन के लिए कितनी लालसा है! और परमेश्वर के पदचिह्नों को पाना कितना कठिन है! इस तरह के युग में, इस तरह की दुनिया में, हमें उस दिन को देखने के लिए क्या करना चाहिए, जिस दिन परमेश्वर प्रकट होता है? हमें परमेश्वर के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों से उन सभी का सामना होता है, जो परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तुम लोगों ने उन सभी पर एक से अधिक अवसरों पर विचार किया है—लेकिन परिणाम क्या रहा? परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है? परमेश्वर के पदचिह्न कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को उत्तर मिल गए हैं? बहुत-से लोग इस तरह उत्तर देंगे : “परमेश्वर उन सभी के बीच प्रकट होता है, जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिह्न हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है!” कोई भी फार्मूलाबद्ध उत्तर दे सकता है, किंतु क्या तुम लोग समझते हो कि परमेश्वर के प्रकटन या उसके पदचिह्नों का क्या अर्थ है? परमेश्वर के प्रकटन का अर्थ है कि परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से कार्य करने के लिए पृथ्वी पर आता है। वह अपनी स्वयं की पहचान, अपने स्वभाव और अपने अंतर्निहित तरीके से, एक नए युग का आरंभ करने और पुराने युग का अंत करने का कार्य करने के लिए मनुष्यजाति के बीच उतरता है। इस तरह का प्रकटन किसी अनुष्ठान का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तसवीर, कोई चमत्कार या एक प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो दूर की बात है। बल्कि यह एक असली और वास्तविक तथ्य है, जिसे किसी के भी द्वारा छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन केवल औपचारिकता निभाने के लिए या एक प्रकार के अल्पकालिक कार्य की खातिर नहीं है। इसके बजाय यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है। परमेश्वर का प्रकटन हमेशा अर्थपूर्ण होता है और हमेशा उसकी प्रबंधन योजना से इसका कुछ संबंध होता है। यहाँ जिसे “प्रकटन” कहा गया है, वह उस प्रकार के “प्रकटन” से बिल्कुल ही भिन्न है, जिसमें परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन, अगुआई और प्रबोधन करता है। हर बार जब परमेश्वर प्रकट होता है, वह अपने महान कार्य के एक चरण को कार्यान्वित करता है। यह कार्य किसी भी अन्य युग के कार्य से भिन्न होता है। यह मनुष्य के लिए अकल्पनीय है, और इसका मनुष्य द्वारा पहले कभी भी अनुभव नहीं किया गया है। यह वह कार्य है, जो एक नए युग का आरंभ करता है और पुराने युग का समापन करता है, और यह मनुष्यजाति के उद्धार के कार्य का एक अधिक नया और उच्चतर चरण है; और भी अधिक, यह वह कार्य है जो मनुष्यजाति को नए युग में ले जाता है। यह परमेश्वर के प्रकटन का महत्त्व है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है
181. एक बार जब तुम लोग समझ जाते हो कि परमेश्वर के प्रकटन का क्या अर्थ है, तो तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्न कैसे खोजने चाहिए? इस प्रश्न को समझाना कठिन नहीं है : जहाँ कहीं भी परमेश्वर का प्रकटन होता है, वहाँ तुम्हें उसके पदचिह्न मिलेंगे। इस तरह की व्याख्या बहुत स्पष्ट लगती है, किंतु इसे अभ्यास में लाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि बहुत लोग नहीं जानते कि परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है, और यह तो बिल्कुल भी नहीं जानते कि वह कहाँ प्रकट होना चाहता है, या उसे कहाँ प्रकट होना चाहिए। कुछ लोग आवेगपूर्वक यह मान लेते हैं कि जहाँ भी पवित्र आत्मा कार्य पर है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। या फिर वे यह मानते हैं कि जहाँ भी आध्यात्मिक हस्तियाँ होती हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। या फिर वे यह मानते हैं कि जहाँ कहीं अत्यधिक प्रसिद्धि वाले लोग होते हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। फिलहाल, आओ इस बात को छोड़ दें कि ऐसी मान्यताएँ सही हैं या ग़लत। इस तरह के प्रश्न को समझाने के लिए पहले हमारे पास एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए : हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं। हम आध्यात्मिक हस्तियों की खोज नहीं कर रहे हैं, हम विख्यात हस्तियों का अनुसरण तो बिल्कुल नहीं कर रहे हैं; हम परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण कर रहे हैं। चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हम परमेश्वर के इरादों, उसके वचनों और कथनों की खोज करें। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं; जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में तुम लोगों ने इन वचनों की अनदेखी कर दी है कि “परमेश्वर ही सत्य, मार्ग और जीवन है।” और इसलिए, बहुत-से लोग सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करते। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर का प्रकटन मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप नहीं हो सकता और परमेश्वर उस तरह तो और भी प्रकट नहीं हो सकता जैसा इंसान उससे माँग करता है। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसके बारे में उसे मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, और अपने कार्य के बारे में हर-एक व्यक्ति को सूचित करने की आवश्यकता तो उसे बिल्कुल भी नहीं है। यह परमेश्वर का स्वभाव है, और हर व्यक्ति को इसे और भी अधिक पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकटन को देखने और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करने की इच्छा रखते हो, तो तुम लोगों को पहले अपनी धारणाओं से दूरी बना लेनी चाहिए। तुम लोगों को यह माँग नहीं करनी चाहिए कि परमेश्वर ऐसा करे या वैसा करे, तुम्हें उसे अपनी सीमाओं और अपनी धारणाओं तक सीमित तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, तुम लोगों को खुद से यह माँग करनी चाहिए कि तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश कैसे करनी चाहिए, तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन को कैसे स्वीकार करना चाहिए, और तुम्हें परमेश्वर के नए कार्य के प्रति कैसे समर्पण करना चाहिए : मनुष्य को ऐसा ही करना चाहिए। चूँकि मनुष्य सत्य नहीं है, और उसके पास भी सत्य नहीं है, इसलिए उसे खोजना, स्वीकार करना और समर्पण करना चाहिए।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है
182. आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है। हो सकता है, तुम इन वचनों को स्वीकार न कर पाओ और ये तुम्हें असामान्य लगें, पर मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम फिलहाल अपनी स्वाभाविकता प्रकट मत करो, क्योंकि जो लोग परमेश्वर के समक्ष धार्मिकता के लिए सचमुच भूख-प्यास रखते हैं केवल वे ही सत्य को प्राप्त कर सकते हैं, और जो सचमुच धर्मनिष्ठ हैं केवल वे ही परमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध किए जा सकते हैं और उसका मार्गदर्शन पा सकते हैं। नतीजे संयम और शांति के साथ सत्य खोजने से मिलते हैं, झगड़े और विवाद से नहीं। जब मैं यह कहता हूँ कि “आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है” तो मैं परमेश्वर के देह में लौटने की बात कर रहा हूँ। शायद ये वचन तुम्हें व्याकुल न करते हों; शायद तुम इनका तिरस्कार करते हो; या शायद ये तुम्हारे लिए बड़े रुचिकर हों। चाहे जो भी मामला हो, मुझे आशा है कि जो लोग वास्तव में परमेश्वर के प्रकट होने की लालसा रखते हैं, वे इस तथ्य का सामना करेंगे और इसके बारे में जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालने के बजाय इसकी सावधानीपूर्वक जाँच करेंगे; एक बुद्धिमान व्यक्ति को यही करना चाहिए।
ऐसी चीज की जाँच करना कठिन नहीं है, परंतु इसके लिए जरूरी है कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति पहले इस सत्य को जान ले : जो देहधारी परमेश्वर है उसके पास परमेश्वर का सार है और जो देहधारी परमेश्वर है उसके पास परमेश्वर की अभिव्यक्ति है। चूँकि परमेश्वर देहधारी बना है, इसलिए वह उस कार्य को अपने साथ लाता है जो वह करना चाहता है और चूँकि वह देहधारी परमेश्वर है, इसलिए वह परमेश्वर का स्वरूप व्यक्त करता है और वह मनुष्य के लिए सत्य ला सकता है, उसे जीवन प्रदान कर सकता है और उसे मार्ग दिखा सकता है। जिस देह में परमेश्वर का सार नहीं है, वह निश्चित रूप से देहधारी परमेश्वर नहीं है; इसमें कोई संदेह नहीं। अगर मनुष्य यह जाँच करना चाहता है कि क्या यह परमेश्वर की देहधारी देह है, तो उसे इसका निर्धारण उसके द्वारा व्यक्त स्वभाव और उसके द्वारा बोले गए वचनों से करना चाहिए। अर्थात्, यह निर्धारित करने के लिए कि वह परमेश्वर का देहधारी स्वरूप है या नहीं और वह सच्चा मार्ग है या नहीं, व्यक्ति को उसके सार के आधार पर उसकी परख करनी चाहिए। अतः यह देहधारी परमेश्वर की देह है कि नहीं, यह निर्धारित करने की कुंजी उसके बाहरी स्वरूप के बजाय उसके सार (यानी उसके कार्य, उसके वचनों, उसके स्वभाव और बहुत-से अन्य पहलुओं) में निहित होती है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी स्वरूप की ही जाँच करता है, और परिणामस्वरूप उसके सार की अनदेखी करता है, तो इससे उसके मूर्ख और अज्ञानी होने का पता चलता है। बाहरी स्वरूप सार का निर्धारण नहीं कर सकता; इतना ही नहीं, परमेश्वर का कार्य कभी भी मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप नहीं हो सकता। क्या यीशु का बाहरी स्वरूप मनुष्य की धारणाओं के विपरीत नहीं था? क्या उसका चेहरा और पहनावा उसकी असली पहचान को दर्शाने में असमर्थ नहीं थे? क्या उस समय के फरीसियों ने यीशु का ठीक इसीलिए विरोध नहीं किया था क्योंकि उन्होंने केवल उसके बाहरी स्वरूप को देखा और उसके मुख से निकले वचनों को गंभीरता से स्वीकार नहीं किया? मुझे उम्मीद है कि प्रत्येक भाई-बहन जो परमेश्वर के प्रकटन की खोज में है, वह इतिहास की त्रासदी को नहीं दोहराएगा, आधुनिक काल का फरीसी नहीं बनेगा और परमेश्वर को फिर से सलीब पर नहीं चढ़ाएगा। तुम्हें सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि परमेश्वर की वापसी का स्वागत कैसे किया जाए और तुम्हारे मस्तिष्क में यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति कैसे बना जाए, जो सत्य के प्रति समर्पण करता है। यह हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है, जो यीशु के बादल पर सवार होकर लौटने का इंतजार कर रहा है। हमें अपनी आध्यात्मिक आँखों को साफ करना चाहिए और कल्पना के शब्दों के दलदल में नहीं फँसना चाहिए। हमें परमेश्वर के वास्तविक कार्य के बारे में सोचना चाहिए और परमेश्वर के व्यावहारिक पक्ष पर दृष्टि डालनी चाहिए। खुद को दिवास्वप्नों में बहने या खोने मत दो और हमेशा यह आशा मत करते रहो कि प्रभु यीशु अचानक बादल पर सवार होकर तुम्हारे बीच उतर आएँगे और तुम्हें—जिन्होंने उन्हें कभी जाना या देखा नहीं है और जो उनकी इच्छा के अनुसार चलना नहीं जानते—अपने साथ ले जाएँगे। इससे अधिक यथार्थवादी मामलों के बारे में सोचना बेहतर है!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, प्रस्तावना
183. इस बार परमेश्वर कार्य करने के लिए आध्यात्मिक देह में नहीं, बल्कि बहुत ही साधारण शरीर में आया है। इसके अलावा, यह परमेश्वर के दूसरे देहधारण का शरीर है और यह वह शरीर भी है, जिसके द्वारा वह देह में लौटकर आया है। यह एक बहुत साधारण देह है। उस पर नजर डालकर तुम ऐसा कुछ भी नहीं देख सकते हो जो उसे दूसरों से भिन्न दिखाता हो, लेकिन तुम उससे अब तक अनसुने सत्य प्राप्त कर सकते हो। महज यह तुच्छ देह परमेश्वर के सत्य के समस्त वचनों का मूर्त रूप है, अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य की वाहक है और मनुष्य के समझने के लिए परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है। क्या तुम स्वर्ग के परमेश्वर को देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते? क्या तुम स्वर्ग के परमेश्वर को समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते? क्या तुम मानवजाति का गंतव्य देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते? वह तुम्हें ये सभी रहस्य बताएगा—वे रहस्य जो कोई मनुष्य तुम्हें कभी नहीं बता पाया है—और वह तुम्हें वे सत्य भी बताएगा जिन्हें तुम नहीं समझते। वह राज्य में जाने का तुम्हारा द्वार है, और नए युग में जाने के लिए तुम्हारा मार्गदर्शक है। यह साधारण देह कई रहस्यों को समेटे हुए है जिनकी थाह मनुष्य नहीं ले सकता है। उसके कर्म तुम्हारे लिए गूढ़ हैं, लेकिन उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य का संपूर्ण लक्ष्य तुम्हें यह सब देखने की क्षमता देने के लिए पर्याप्त है कि वह कोई साधारण देह नहीं है, जैसा कि लोग मानते हैं, क्योंकि वह अंत के दिनों के परमेश्वर के इरादों और अंत के दिनों में मानवजाति के प्रति परमेश्वर की परवाह का प्रतिनिधित्व करता है। यद्यपि तुम उसके द्वारा बोले गए उन वचनों को नहीं सुन सकते जो आकाश और पृथ्वी को कँपाते-से लगते हैं, यद्यपि तुम उसकी आँखें आग की लपटों जैसी नहीं देख सकते, और यद्यपि तुम उसके लौह-दंड का अनुशासन नहीं पा सकते, फिर भी तुम उसके वचनों से यह सुन सकते हो कि परमेश्वर क्रोधित हो रहा है और यह जान सकते हो कि परमेश्वर मानवजाति पर दया दिखा रहा है, और तुम परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव और उसकी बुद्धि देख सकते हो, और उससे भी अधिक, समस्त मानवजाति के लिए परमेश्वर की परवाह को समझ सकते हो। अंत के दिनों में परमेश्वर का कार्य मनुष्य को स्वर्ग के परमेश्वर का पृथ्वी पर मनुष्य के बीच रहना दिखाना है और परमेश्वर को जानने, उसके प्रति समर्पण करने, उसका भय मानने और उससे प्रेम करने में सक्षम बनाना है। यही कारण है कि वह दूसरी बार देह में लौटा है। यूँ तो आज मनुष्य जो देखता है वह एक ऐसा परमेश्वर है जो बिल्कुल मनुष्य के ही समान है, एक नाक और दो आँखों वाला परमेश्वर और एक बहुत ही साधारण परमेश्वर, लेकिन अंत में परमेश्वर तुम लोगों को दिखाएगा कि अगर यह व्यक्ति न हो, तो आकाश और धरती में जबरदस्त बदलाव आएँगे; अगर यह व्यक्ति न हो तो आकाश धुँधला जाएगा, पृथ्वी पर उथल-पुथल मच जाएगी और समस्त मानवजाति अकाल और महामारियों के बीच जिएगी। वह तुम लोगों को दिखाएगा कि यदि अंत के दिनों का देहधारी परमेश्वर तुम लोगों को बचाने के लिए न आता तो परमेश्वर समस्त मानवजाति को बहुत पहले ही नरक में नष्ट कर चुका होता; यदि यह देह न होती तो तुम लोग सदैव महापापी होते और तुम हमेशा के लिए लाश होते। तुम लोगों को जानना चाहिए कि यदि यह देह न होती तो समस्त मानवजाति के लिए एक महा आपदा से बचना असंभव होता, और उसके लिए अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा मानवजाति को दिए जाने वाले और भी कठोर दंड से बच पाना असंभव होता। यदि इस साधारण देह का जन्म न हुआ होता तो तुम सबकी ऐसी हालत होती कि तुम लोग जीवन की भीख माँगते लेकिन जी न पाते और मरने की भीख माँगते लेकिन मर न पाते; यदि यह देह न होती तो तुम लोग सत्य प्राप्त न कर पाते और आज परमेश्वर के सिंहासन के सामने न आ पाते, बल्कि अपने जघन्य पापों के लिए परमेश्वर द्वारा दंडित किए जाते। क्या तुम लोग जानते थे कि यदि परमेश्वर देह में लौटा न होता तो किसी के पास भी उद्धार का अवसर न होता; और यदि इस देह का आगमन न होता तो परमेश्वर ने बहुत पहले ही पुराने युग को समाप्त कर दिया होता? ऐसा होने से क्या तुम लोग अभी भी परमेश्वर के दूसरे देहधारण को नकारोगे? चूँकि तुम लोग इस साधारण व्यक्ति से इतने बड़े लाभ प्राप्त कर सकते हो तो तुम उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार क्यों नहीं करोगे?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, क्या तुम जानते थे? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक महान काम किया है
184. परमेश्वर का कार्य ऐसा है, जिसे तुम समझ नहीं सकते। यदि तुम न तो पूरी तरह से यह समझ सकते हो कि तुम्हारा चुनाव सही है या नहीं, और न ही तुम यह जान सकते हो कि परमेश्वर का कार्य सफल हो सकता है या नहीं, तो तुम अपनी किस्मत क्यों नहीं आजमाते और क्यों नहीं यह देखते कि क्या यह साधारण व्यक्ति तुम्हारी बड़ी मदद कर सकता है और क्या परमेश्वर ने वास्तव में महान काम किया है? लेकिन मैं तुम्हें बता दूँ कि नूह के दिनों में मनुष्य इस हद तक खाने-पीने और शादी-ब्याह करने में लीन रहते थे कि परमेश्वर के लिए यह सब देखना असहनीय हो गया था, इसलिए उसने समस्त मानवजाति के विनाश के लिए एक बड़ी बाढ़ भेजी और बस आठ सदस्यों वाले नूह के परिवार और सभी प्रकार के पशु-पक्षियों को बचाया। लेकिन अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा बचाए गए लोग वे हैं, जो अंत तक उसके वफादार रहे हैं। यद्यपि दोनों युग अत्यधिक भ्रष्टाचार के युग हैं जो परमेश्वर के लिए असहनीय हैं और दोनों युगों में मानवजाति बहुत भ्रष्ट हो चुकी है और उसने परमेश्वर को अपना प्रभु मानने से इनकार कर दिया है, फिर भी परमेश्वर ने नूह के समय के लोगों को ही नष्ट किया। दोनों युगों में मानवजाति परमेश्वर को बहुत कष्ट देती है, फिर भी परमेश्वर ने अब तक अंत के दिनों के लोगों के प्रति धीरज रखा है। ऐसा क्यों है? क्या तुम लोगों ने कभी सोचा नहीं कि ऐसा क्यों है? यदि तुम लोग सचमुच नहीं जानते, तो चलो, मैं तुम्हें बता देता हूँ। अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा लोगों को अनुग्रह प्रदान कर पाने का कारण यह नहीं है कि वे नूह के समय के लोगों की तुलना में कम भ्रष्ट हैं या उनमें परमेश्वर के सामने पश्चात्ताप का इरादा है और यह कारण तो बिल्कुल नहीं है कि अंत के दिनों में तकनीक इतनी उन्नत हो गई है कि परमेश्वर लोगों को नष्ट नहीं कर सकता। बल्कि इसका कारण यह है कि अंत के दिनों में परमेश्वर को लोगों के एक समूह में कार्य करना है और परमेश्वर यह कार्य अपने देहधारण में स्वयं करने का इरादा रखता है। इतना ही नहीं, परमेश्वर इस समूह के एक भाग को अपने उद्धार का पात्र चुनना चाहता है और अपनी प्रबंधन योजना का परिणाम बनाने का इरादा रखता है, और इन लोगों को अगले युग में लाने का इरादा है। इसलिए किसी भी हालत में परमेश्वर ने जो कीमत चुकाई है, वह पूरी तरह से अंत के दिनों में उसके द्वारा देह धारण वाले कार्य की तैयारी में है। यह तथ्य कि तुम लोग आज तक पहुँच गए हो, इसी देह के कारण है। चूँकि परमेश्वर देह में जीता है, इसीलिए तुम लोगों के पास जीवित रहने का मौका है। ये सारे आशीष इसी साधारण व्यक्ति के कारण मिले हैं। इतना ही नहीं, बल्कि अंत में अनेक राष्ट्र इस साधारण व्यक्ति की उपासना करेंगे और साथ ही इस मामूली व्यक्ति को धन्यवाद देंगे और उसके प्रति समर्पण करेंगे, क्योंकि उसके द्वारा लाए गए सत्य, जीवन और मार्ग ने ही समस्त मानवजाति को बचाया है, मनुष्य और परमेश्वर के बीच के संघर्ष को शांत किया है, उनके बीच की दूरी कम की है, और परमेश्वर के विचारों और मनुष्य के बीच संबंध स्थापित किया है। इसी ने परमेश्वर के लिए और अधिक महिमा हासिल की है। क्या ऐसा साधारण व्यक्ति तुम्हारे विश्वास और श्रद्धा के योग्य नहीं है? क्या यह साधारण देह मसीह कहलाने के योग्य नहीं है? क्या ऐसा साधारण व्यक्ति मनुष्य के बीच परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं बन सकता? क्या ऐसा व्यक्ति, जिसने मानवजाति को आपदा से बचाया है, तुम लोगों के प्रेम और उसे थामे रखने की तुम्हारी इच्छा का अधिकारी नहीं है? यदि तुम लोग उसके मुख से व्यक्त सत्य को नकारते हो, और अपने बीच उसके अस्तित्व से घृणा करते हो, तो अंत में तुम लोगों का क्या होगा?
अंत के दिनों में परमेश्वर का सारा कार्य इस साधारण व्यक्ति के माध्यम से किया जाता है। वह तुम्हें सब-कुछ प्रदान करेगा और इतना ही नहीं, वह तुमसे संबंधित हर चीज तय करने में सक्षम है। क्या ऐसा व्यक्ति वैसा हो सकता है जैसा तुम लोग मानते हो : एक ऐसा व्यक्ति जो इतना सरल है कि उल्लेख करने योग्य नहीं है? क्या उसका सत्य तुम लोगों को पूरी तरह से कायल करने के लिए पर्याप्त नहीं है? क्या अपनी आँखों से उसके कर्म देखकर भी तुम लोग कायल नहीं होते? या फिर जिस मार्ग पर वह लोगों को ले जाता है वह मार्ग तुम लोगों के लिए चलने के लायक नहीं है? आखिरकार वह क्या चीज है जिसके कारण तुम लोग उससे अरुचि महसूस करते हो, उसे अस्वीकार करते हो और उससे दूर रहते हो? यही वह व्यक्ति है जो सत्य व्यक्त करता है, यही वह व्यक्ति है जो सत्य प्रदान करता है और यही वह व्यक्ति है जो तुम लोगों को अनुसरण करने के लिए मार्ग प्रदान करता है। क्या तुम लोग अभी भी इन सत्यों के भीतर परमेश्वर के कार्य के निशान खोज पाने में असमर्थ हो? यीशु के कार्य के बिना मानवजाति सूली से नहीं उतर सकती थी, लेकिन आज के देहधारी परमेश्वर के बिना सूली से उतरे लोग कभी परमेश्वर का अनुमोदन नहीं पा सकते या नए युग में प्रवेश नहीं कर सकते। इस साधारण व्यक्ति के आगमन के बिना तुम लोगों को कभी परमेश्वर के सच्चे मुखमंडल का दर्शन करने का अवसर नहीं मिलता, न ही तुम इसके योग्य होते, क्योंकि तुम सब ऐसे हो जिन्हें बहुत पहले ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए था। परमेश्वर के द्वितीय देहधारण के आगमन के कारण परमेश्वर ने तुम लोगों को क्षमा कर दिया है और तुम लोगों पर दया दिखाई है। खैर अंत में मुझे तुम लोगों को जिन वचनों के साथ छोड़ना होगा, वे अभी भी यही हैं : यह साधारण व्यक्ति, जो देहधारी परमेश्वर है, तुम लोगों के लिए बड़े महत्व का है। यह वह महान काम है जिसे परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच पहले ही कर दिया है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, क्या तुम जानते थे? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक महान काम किया है
185. यदि अंत के दिनों के दौरान उद्धारकर्ता का आगमन होता और उसे तब भी यीशु कहकर पुकारा जाता, और उसने दोबारा यहूदिया में जन्म लिया होता और वहीं अपना काम किया होता, तो इससे यह प्रमाणित होता कि मैंने केवल इस्राएल के लोगों की ही रचना की थी और केवल इस्राएल के लोगों को ही छुटकारा दिलाया था, और अन्य जातियों से मेरा कोई वास्ता नहीं है। क्या यह मेरे इन वचनों का खंडन न करता कि “मैं वह प्रभु हूँ जिसने आकाश, पृथ्वी और सभी वस्तुओं को बनाया है?” मैंने यहूदिया को छोड़ दिया और अन्य जातियों के बीच कार्य करता हूँ, क्योंकि मैं मात्र इस्राएल के लोगों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि सभी सृजित प्राणियों का परमेश्वर हूँ। मैं अंत के दिनों के दौरान अन्य जातियों के बीच प्रकट होता हूँ, क्योंकि मैं केवल इस्राएल के लोगों का परमेश्वर यहोवा नहीं हूँ, बल्कि, इससे भी बढ़कर, अन्य-जाति राष्ट्रों में भी मेरे चुने हुए सभी लोगों का सृष्टिकर्ता मैं ही हूँ। मैंने न केवल इस्राएल, मिस्र और लेबनान की रचना की, बल्कि इस्राएल से बाहर के सभी अन्य जाति के राष्ट्रों की भी रचना की। इस कारण, मैं सभी सृजित प्राणियों का प्रभु हूँ। मैंने इस्राएल का मात्र अपने कार्य के आरंभिक बिंदु के रूप में इस्तेमाल किया था, मैंने यहूदिया और गलील को छुटकारे के अपने कार्य के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया था, और अब मैं एक अन्य जाति राष्ट्र को ऐसे आधार के रूप में इस्तेमाल करता हूँ, जहाँ से मैं पूरे युग का समापन करूँगा। मैंने कार्य के दो चरण इस्राएल में पूरे किए थे (ये दो चरण हैं व्यवस्था का युग और अनुग्रह का युग), और मैं कार्य के आगे के दो चरण (अनुग्रह का युग और राज्य का युग) इस्राएल के बाहर तमाम देशों में करता आ रहा हूँ। अन्य जाति के राष्ट्रों के बीच मैं विजय का कार्य करूँगा और इस तरह युग का समापन करूँगा। यदि मनुष्य मुझे हमेशा यीशु मसीह कहता है, किंतु यह नहीं जानता कि मैंने अंत के दिनों के दौरान एक नए युग की शुरुआत कर दी है और एक नया कार्य प्रारंभ कर दिया है, और यदि मनुष्य हमेशा मूर्खतापूर्ण ढंग से उद्धारकर्ता यीशु के आगमन का इंतज़ार करता रहता है, तो मैं कहूँगा कि ऐसे लोग वे हैं जो मुझ पर विश्वास नहीं करते; वे वो लोग हैं जो मुझे नहीं जानते, जो विश्वासी होने का दिखावा करते हैं। क्या ऐसे लोग उद्धारकर्ता यीशु का स्वर्ग से आगमन देख सकते हैं? वे मेरे आगमन का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि यहूदियों के राजा के आगमन का इंतज़ार करते हैं। वे मेरे द्वारा इस पुराने गंदे संसार के विनाश की लालसा नहीं करते, बल्कि इसके बजाय यीशु के द्वितीय आगमन की लालसा करते हैं, जिसके पश्चात् उन्हें छुटकारा दिया जाएगा—वे यीशु द्वारा एक बार फिर से पूरी मानवजाति को इस अशुद्ध और अधार्मिक भूमि से छुटकारा दिलाए जाने की प्रतीक्षा करते हैं। ऐसे लोग अंत के दिनों के दौरान मेरे कार्य को पूरा करने वाले कैसे बन सकते हैं? मनुष्य की कामनाएँ मेरी इच्छाएँ पूरी करने या मेरा कार्य पूरा करने में अक्षम हैं, क्योंकि मनुष्य केवल उस कार्य की प्रशंसा करता है और उस कार्य से प्यार करता है, जिसे मैंने पहले किया है, और उसे कोई अंदाजा नहीं है कि मैं स्वयं परमेश्वर हूँ जो हमेशा नया रहता है और कभी पुराना नहीं होता, और केवल इतना जानता है कि मैं यहोवा और यीशु हूँ, बगैर किसी आभास के कि मैं ही अंत के दिनों का वह परमेश्वर हूँ, जो मानवजाति का समापन करेगा। वह सब, जिसके लिए मनुष्य तरसता है और जो वह जानता है, उसकी अपनी धारणाओं से आता है, जो मात्र वह है जिसे वह अपनी आँखों से देख सकता है। वह उस कार्य के अनुरूप नहीं है, जो मैं करता हूँ, बल्कि उससे असंगत है। यदि मेरा कार्य मनुष्य के विचारों के अनुसार किया जाता, तो यह कब समाप्त होता? कब मानवजाति विश्राम में प्रवेश करती? और कैसे मैं सातवें दिन, सब्त, में प्रवेश करने में सक्षम होता? मैं अपनी योजना के अनुसार और अपने लक्ष्य के अनुसार कार्य करता हूँ—मनुष्य के इरादों के अनुसार नहीं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, उद्धारकर्ता पहले ही एक “सफेद बादल” पर सवार होकर वापस आ चुका है
186. चाहे तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश या फिर किसी अन्य देश के, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य को एक सृजित प्राणी की पहचान के परिप्रेक्ष्य से देखना चाहिए—इस तरह तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को किसी निश्चित दायरे में नहीं सीमित करोगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि अपनी धारणाओं के अनुसार आजकल बहुत-से लोग विश्वास करते हैं कि परमेश्वर का किसी देश विशेष में या किसी निश्चित राष्ट्र के बीच प्रकट होना संभव नहीं है। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन अर्थ है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है! मनुष्य की धारणाएँ और सोच भला उन्हें कैसे माप सकती हैं? और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की अपनी धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। केवल इसी प्रकार से तुम अपनी धारणाओं से बंधे नहीं होगे; केवल इसी प्रकार से तुम परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत करने के योग्य होगे। अन्यथा, तुम शाश्वत अंधकार में रहोगे, और कभी भी परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त नहीं करोगे।
परमेश्वर समस्त मानवजाति का परमेश्वर है। वह स्वयं को किसी भी देश या राष्ट्र की निजी संपत्ति नहीं मानता, बल्कि अपना कार्य अपनी बनाई योजना के अनुसार, किसी भी रूप, देश या राष्ट्र द्वारा बंधे बिना करता है। शायद तुमने इस रूप की कभी कल्पना नहीं की है या शायद इस रूप के प्रति तुम्हारा रवैया इनकार करने वाला है या शायद वह देश और वह राष्ट्र जिसके बीच परमेश्वर प्रकट होता है, वही ऐसा है जिसके साथ सभी भेदभाव करते हैं और वही पृथ्वी पर सर्वाधिक पिछड़ा हुआ है। लेकिन परमेश्वर के पास अपनी बुद्धि है। उसने अपने महान सामर्थ्य के साथ और अपने सत्य और स्वभाव के माध्यम से सचमुच ऐसे लोगों के समूह को हासिल कर लिया है जो उसके साथ एक मन वाले हैं और जिन्हें वह पूर्ण करना चाहता है—उसके द्वारा जीता गया एक समूह जिसने तमाम तरह के परीक्षण और पीड़ा और तमाम तरह का उत्पीड़न सहा है और बिल्कुल अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है। परमेश्वर का प्रकटन, जो किसी देश या रूप तक सीमित नहीं है, इसका लक्ष्य उसे अपनी योजना के अनुसार कार्य पूरा करने में सक्षम बनाना है। यह ठीक वैसा ही है जैसे जब परमेश्वर यहूदिया में देहधारी हुआ : उसका लक्ष्य समस्त मानवजाति के छुटकारे के लिए सलीब पर चढ़ने का कार्य पूरा करना था। फिर भी यहूदी मानते थे कि यह करना परमेश्वर के लिए असंभव है और उन्हें यह असंभव लगता था कि परमेश्वर देहधारी बन सकता है और प्रभु यीशु का रूप ग्रहण कर सकता है। उनका “असंभव” वह आधार बन गया जिस पर उन्होंने परमेश्वर की निंदा की और उसका विरोध किया और जो अंततः इस्राएल के विनाश का कारण बना। आज बहुत-से लोग वैसी ही गलती कर चुके हैं। वे अपनी समस्त शक्ति के साथ परमेश्वर के आसन्न प्रकटन की घोषणा करते हैं, मगर साथ ही उसके प्रकटन की निंदा भी करते हैं; उनका “असंभव” परमेश्वर के प्रकटन को एक बार फिर उनकी कल्पना के दायरे में सीमित कर देता है। और इसलिए मैंने बहुत-से लोगों को परमेश्वर के वचन उन्हें प्राप्त होने के बाद असभ्य और कर्कश हँसी का ठहाका लगाते देखा है। लेकिन क्या यह ठहाका यहूदियों द्वारा की गई निंदा और ईशनिंदा से किसी तरह भिन्न है? तुम लोग सत्य की उपस्थिति में श्रद्धावान नहीं हो और तुममें ललक का रवैया तो और भी कम है। तुम बस अड़े रहते हुए पड़ताल करते हो और लापरवाही भरी उदासीनता के साथ प्रतीक्षा करते हो। इस तरह पड़ताल और प्रतीक्षा करने से तुम क्या हासिल कर सकते हो? क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हें परमेश्वर से व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलेगा? यदि तुम परमेश्वर के कथनों का भेद नहीं पहचान सकते तो तुम किस प्रकार परमेश्वर का प्रकटन देखने के योग्य हो? जहाँ कहीं परमेश्वर प्रकट होगा, वहीं सत्य व्यक्त किया जाएगा और वहीं परमेश्वर की वाणी होगी। जो लोग सत्य स्वीकार कर सकते हैं केवल वे ही परमेश्वर की वाणी सुनने में सक्षम हैं और केवल इसी तरह के लोग परमेश्वर का प्रकटन देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को जाने दो! खुद को शांत करो और इन शब्दों को ध्यान से पढ़ो। जब तक तुम्हारे पास ऐसा दिल है जो सत्य के लिए लालायित रहता है, तब तक परमेश्वर तुम्हें प्रबुद्ध करेगा ताकि तुम उसके इरादे और वचन समझ सको। “असंभवता” के अपने तर्क छोड़ दो! लोग किसी चीज़ को जितना अधिक असंभव मानते हैं, उसके घटित होने की उतनी ही अधिक संभावना होती है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से ऊँची है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से ऊँचे हैं और परमेश्वर अपना कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमाओं से परे करता है। जितना अधिक कुछ असंभव होता है, उतना ही अधिक उसमें खोजने लायक सत्य होता है; जितना अधिक किसी चीज की कल्पना मनुष्य की धारणाओं द्वारा नहीं की जा सकती है, उसमें परमेश्वर के इरादे उतने ही अधिक होते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि परमेश्वर चाहे कहीं भी प्रकट क्यों न हो, वह फिर भी परमेश्वर है और उसका सार उसके प्रकटन के स्थान या तरीके के आधार पर कभी नहीं बदलेगा। परमेश्वर के पदचिह्न चाहे कहीं भी हों, उसका स्वभाव नहीं बदलेगा और चाहे परमेश्वर के पदचिह्न कहीं भी हों, वह समस्त मनुष्यजाति का परमेश्वर है, ठीक वैसे ही, जैसे कि प्रभु यीशु न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, बल्कि वह एशिया, यूरोप और अमेरिका के सभी लोगों का और इससे भी अधिक, वह समस्त ब्रह्मांड भर में और इसके ऊपर एकमात्र, अद्वितीय परमेश्वर है। तो आओ, हम परमेश्वर के इरादे खोजें और उसके कथनों और वचनों में उसके प्रकटन का पता लगाएँ और उसके पदचिह्नों के साथ तालमेल रखें! परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है। उसके वचन और उसका प्रकटन साथ-साथ विद्यमान हैं और उसका स्वभाव और पदचिह्न हर समय मानवजाति के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट किए जाते हैं। प्यारे भाई-बहनो, मुझे आशा है कि तुम सभी लोग इन वचनों में परमेश्वर का प्रकटन देख सकते हो, उसके पदचिह्नों के साथ-साथ चलना शुरू कर सकते हो और एक नए युग की तरफ बढ़ सकते हो और उस सुंदर नए स्वर्ग और पृथ्वी में प्रवेश कर सकते हो, जिसे परमेश्वर ने उन लोगों के लिए तैयार किया है, जो उसके प्रकटन का इंतजार करते हैं!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है