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परमेश्वर का सार सचमुच अस्तित्व में है

I

परमेश्वर का सारतत्व नहीं है बस एक दिखावा,

परमेश्वर की मनोहरता नहीं है दिखावा।

उसके सारतत्व का है अस्तित्व; इसे दूसरों ने दिया नहीं है,

और निश्चय ही यह स्थान, समय, युगों के साथ नहीं बदलता है।

II

चीज़ें जो वो करता है, जो जिक्र के लिए बहुत छोटी हैं,

जो हैं मनुष्य की आँखों में मामूली,

जो, मनुष्य सोचे, परमेश्वर कभी भी नहीं करेगा,

यह हैं वह बहुत छोटी चीज़ें जो असल में दिखा सकती है

परमेश्वर की विशुद्धता और उसकी मनोहरता।

वो नहीं है पाखंडी; उसका स्वभाव और सारतत्व

है नहीं अतिश्योक्ति भरा, ना भेष या अहंकार।

वह नहीं मारता है डींगे इसके बजाए, विश्वासी और सच्चे व्यवहार के साथ,

प्रेम करता है, ध्यान रखता है नेतृत्व करता है जिसे उसने था बनाया।

नहीं है कोई फर्क कितना वो समझते,

कितना कर सकते महसूस, या कितना वो सकते हैं देख,

सच है कि वो यह सब कर रहा, सब चीजें कर रहा।

सच है कि वो यह सब कर रहा, सब चीजें कर रहा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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