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परमेश्वर की एकमात्र इच्छा है कि इंसान उसकी बात सुने और माने

I

जबसे परमेश्वर ने कई साल पहले बनाया इस दुनिया को,

तबसे किया है बहुत काम उसने इस धरती पर,

मानवता के सबसे बुरे तिरस्कार को सहा है,

सही हैं उसने झूठी निंदा।

किसी ने भी पृथ्वी पर परमेश्वर के आगमन का स्वागत नहीं किया।

सबने उसे अनादर के साथ ठुकरा दिया।

उसने सहीं हैं हज़ारों सालों की कठिनाइयां।

मनुष्य के आचरण ने बहुत पहले तोड़ दिया उसका दिल।

मनुष्य के विद्रोह पर वो अब ध्यान देता नहीं,

बल्कि उन्हें बदलने और शुद्ध करने की योजना है उसकी।

II

देहधारी परमेश्वर ने सहा है काफ़ी उपहास,

किया है अनुभव बहिष्कार और सूली पर चढ़ने का।

सहा है उसने मनुष्य की दुनिया के सबसे बुरे दुखों को।

स्वर्ग में पिता सह न पाए इसे।

उसने झटका पीछे अपना सिर, बंद कर ली अपनी आँखें,

अपने प्रिय पुत्र की वापसी का इंतज़ार करने के लिए।

परमेश्वर की एकमात्र इच्छा है इंसान सुने और माने उसकी बात।

उसकी देह के सामने हो शर्मसार और विद्रोह न करे।

उसकी है यही एकमात्र इच्छा आज सभी लोगों से,

वे करें बस विश्वास कि है परमेश्वर का अस्तित्व।

III

परमेश्वर ने बहुत पहले मनुष्य से मांगना छोड़ दिया।

जो कीमत उसने चुकाई, वो है पहले ही बहुत अधिक।

फिर भी मनुष्य करता है आराम,

मानो देख पाता नहीं वो परमेश्वर के कार्य को।

परमेश्वर की एकमात्र इच्छा है इंसान सुने और माने उसकी बात।

उसकी देह के सामने हो शर्मसार और विद्रोह न करे।

उसकी है यही एकमात्र इच्छा आज सभी लोगों से,

वे करें बस विश्वास कि है परमेश्वर का अस्तित्व।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो।