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इंसान को परमेश्वर के वचनों के अनुसार चलना चाहिये

I

इंसान को परमेश्वर के वचनों के अनुसार चलना चाहिये।

हर युग में, जब परमेश्वर अपना काम करता है,

तो इंसान को कुछ वचन प्रदान करता है।

कुछ सच्चाई व्यक्त करता है। कुछ सच्चाई व्यक्त करता है।

ये वो सच्चाई है जिस पर इंसान को चलना चाहिये,

ये वो राह है जिस पर इंसान को चलना चाहिये।

ये वो राह है जिस पर चलकर इंसान,

परमेश्वर का भय माने, और बुराई से दूर रहे,

ज़िंदगी के सफ़र में इंसान जिस पर अमल करे।

यही वजह है कि परमेश्वर इंसान को वचन प्रदान करता है।

II

ये वचन ख़ुद परमेश्वर प्रदान करता है,

ताकि इंसान उन पर अमल करे।

गर इंसान अमल करता है तो ज़िंदगी पाता है,

गर इंसान उन पर नहीं चलता, अमल नहीं करता,

गर इंसान ज़िंदगी में उन्हें नहीं अपनाता,

तो वो सच्चाई पर अमल नहीं करता।

सच्चाई पर अमल ना करने के मायने हैं,

परमेश्वर का भय ना मानना, बुराई से दूर ना रहना।

इस तरह इंसान परमेश्वर को ख़ुश ना कर पाएगा।

परमेश्वर को ख़ुश ना कर पाने के मायने हैं उसकी प्रशंसा ना पाना,

ऐसा इंसान कोई नतीजे नहीं पा सकता।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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