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परमेश्वर की सारी सृष्टि उसकी प्रभुता के अधीन होनी चाहिए

I

परमेश्वर ने बनाया सब कुछ,

और इसलिए वह सृष्टि को लेता है,

अधीन अपने, और झुकाता आगे अपने प्रभुत्व के।

आदेश वो देता है सब को, हाथों में लेकर नियंत्रण।

जीव-जंतु, पहाड़, नदी, और मानव को अधीन उसके आना होगा।

चीज़ें जो आसमाँ और धरती पर हैं,

परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन सभी को आना है।

करना होगा समर्पण, विकल्प के बिना।

है आज्ञा यही परमेश्वर की और उसका है अधिकार।

II

परमेश्वर ने बनाया सब कुछ,

और इसलिए वह सृष्टि को लेता है,

अधीन अपने, और झुकाता आगे अपने प्रभुत्व के।

परमेश्वर की आज्ञा से है सब कुछ।

वो दे क्रम और दे वो सबको स्थान,

प्रकार के अनुसार मिले वर्ग

और परमेश्वर की इच्छा से मिलता है पद।

चीज़ें जो आसमाँ और धरती पर हैं,

परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन सभी को आना है।

करना होगा समर्पण, विकल्प के बिना।

है आज्ञा यही परमेश्वर की और उसका है अधिकार।

III

चाहे जितना ही कुछ भी हो महान,

परमेश्वर की प्रभुत्व के पार जा सकेगा नहीं।

ईश्वर द्वारा रचे मानव की सब सेवा करते,

अवज्ञा करने या मांगने की न हिम्मत करे।

ईश्वर के द्वारा रचे मानव को पालन कर्तव्यों का है करना।

चाहे मानव प्रभु हो या हो शासक सब चीज़ों का,

चाहे जितना हो रुतबा ऊँचा,

परमेश्वर के अधीन मानव छोटा सा है।

एक तुच्छ सा प्राणी है, परमेश्वर की सृष्टि,

कभी परमेश्वर से ऊपर न होगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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