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क्या परमेश्वर का राज और हुक्म तुम्हें स्वीकार है?

I

हम्म...हम्म...

परमेश्वर के शासन और सच के बारे में तुम क्या सोचते हो,

दिखाता है कि क्या है तुम्हारे पास दिल और आत्मा।

तय करता है वो कि तुम

समझ सकते हो परमेश्वर के अधिकार को या नहीं।

परमेश्वर के शासन को अगर तुमने किया नहीं महसूस कभी,

किया नहीं स्वीकार उसका अधिकार कभी,

तो परमेश्वर तुम्हें देगा ठुकरा।

तुम्हारी राह और तुम्हारा चयन ले जाएंगे तुम्हें वहाँ।

परमेश्वर के परिक्षणों और शासन को स्वीकार करो।

परमेश्वर के वचनों को जीवन में सच में महसूस करो।

जानोगे तुम परमेश्वर का सामर्थ्य,

मानोगे सृष्टिकर्ता का हुक़्म, बचा लिया जाएगा तुम्हें,

मानोगे सृष्टिकर्ता का हुक़्म, बचा लिया जाएगा तुम्हें।

II

जो जानते और स्वीकार करते हैं परमेश्वर का शासन,

वो पहचानते हैं और समर्पित हैं इस तथ्य के सामने

कि परमेश्वर करता है नियंत्रित मानव जाति के भाग्य को।

परमेश्वर के परिक्षणों और शासन को स्वीकार करो।

परमेश्वर के वचनों को जीवन में सच में महसूस करो।

जानोगे तुम परमेश्वर का सामर्थ्य,

मानोगे सृष्टिकर्ता का हुक़्म, बचा लिया जाएगा तुम्हें,

मानोगे सृष्टिकर्ता का हुक़्म, बचा लिया जाएगा तुम्हें।

III

जब आएगी मौत, उन्हें होगा नहीं डर।

वो बस हर चीज़ में कर देंगे ख़ुद को अर्पित,

करेंगे नहीं कोई चयन या माँग।

वही हैं जो आ सकते हैं सृष्टिकर्ता के पास

वापस उसके बनाए सच्चे प्राणी की तरह।

परमेश्वर के परिक्षणों और शासन को स्वीकार करो।

परमेश्वर के वचनों को जीवन में सच में महसूस करो।

जानोगे तुम परमेश्वर का सामर्थ्य,

मानोगे सृष्टिकर्ता का हुक़्म, बचा लिया जाएगा तुम्हें,

मानोगे सृष्टिकर्ता का हुक़्म, बचा लिया जाएगा तुम्हें।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो।