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222 क्या मनुष्य अपने भाग्य को खुद नियंत्रित करता है?

1 आज, चूँकि मैं तुम लोगों को इस स्थिति तक ले आया हूँ, इसलिए मैंने कई उपयुक्त व्यवस्थाएँ की हैं, और मेरे स्वयं के लक्ष्य हैं। यदि मैं तुम लोगों को उनके बारे में आज बता देता, तो क्या तुम लोग उन्हें सच में जानने में समर्थ हो पाते? मैं मनुष्य के मन के विचारों और मनुष्य के हृदय की इच्छाओं से भली-भाँति परिचित हूँ: कौन है जिसने कभी अपने बच निकलने के तरीके की तलाश नहीं की? कौन है जिसने कभी अपने भविष्य की सम्भावना के बारे में नहीं सोचा? फिर भी भले ही मनुष्य एक समृद्ध और अत्यधिक विविध मेधा से सम्पन्न है, कौन पूर्वानुमान करने में समर्थ था कि, युगों के बाद, वर्तमान जैसा है वैसा हो जाएगा? क्या यह वास्तव में तुम्हारे व्यक्तिपरक प्रयासों का परिणाम है? क्या यही तुम्हारे अथक परिश्रम का प्रतिदान है? क्या यह तुम्हारे मन की सुंदर परिकल्पित मूक झाँकी है?

2 यदि मैंने सम्पूर्ण मनुष्यजाति का मार्गदर्शन नहीं किया होता, तो कौन स्वयं को मेरी व्यवस्थाओं से अलग करने और कोई अन्य तरीका ढूँढने में समर्थ हो पाता? क्या मनुष्यों के यही विचार और इच्छाएँ उसे आज यहाँ तक लेकर आई हैं? बहुत से लोगों का जीवन उनकी इच्छाओं के पूरा हुए बिना बीत जाता है। क्या यह वास्तव में उनकी सोच में किसी दोष की वजह से होता है? बहुत से लोगों का जीवन अप्रत्याशित खुशी और संतुष्टि से भरा होता है। क्या यह वास्तव में इसलिए है क्योंकि वे बहुत कम अपेक्षा करते हैं? सर्वशक्तिमान की नज़रों में सम्पूर्ण मनुष्यजाति में से किसकी देखभाल नहीं की जाती है? कौन सर्वशक्तिमान द्वारा पूर्वनियति के बीच नहीं रहता है? किसके जीवन और मृत्यु उसके स्वयं के चयन से आते हैं? क्या मनुष्य अपने भाग्य को खुद नियंत्रित करता है?

3 बहुत से लोग मृत्यु की कामना करते हैं, फिर भी वह उनसे काफी दूर रहती है; बहुत से लोग ऐसे होना चाहते हैं जो जीवन में मज़बूत हैं और मृत्यु से डरते हैं, फिर भी उनकी जानकारी के बिना, उन्हें मृत्यु की खाई में डुबाते हुए, उनकी मृत्यु का दिन निकट आ जाता है; बहुत से लोग आसमान की ओर देखते हैं और गहरी आह भरते हैं; बहुत से लोग अत्यधिक रोते हैं, क्रन्दन करते हुए सिसकते हैं; बहुत से लोग परीक्षणों के बीच गिर जाते हैं; बहुत से लोग प्रलोभन के बंदी बन जाते हैं। यद्यपि मैं मनुष्य को मुझे स्पष्ट रूप से देखने की अनुमति देने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रकट नहीं होता हूँ, तब भी बहुत से लोग मेरे चेहरे को देख कर भयभीत हो जाते हैं, गहराई तक डरते हैं कि मैं उन्हें मार गिराऊँगा, कि मैं उन्हें नष्ट कर दूँगा। क्या मनुष्य वास्तव में मुझे जानता है या नहीं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन के "अध्याय 11" से रूपांतरित

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