परिचय
राज्य के युग में परमेश्वर नए युग की शुरुआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने और उस संपूर्ण युग का काम करने के लिए वचनों का उपयोग करता है। यही वह सिद्धांत है जिसके द्वारा परमेश्वर वचन के युग में कार्य करता है। वह देहधारी हुआ है और विभिन्न दृष्टिकोणों से बोलता है, जिससे मनुष्य सचमुच परमेश्वर को देखे, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, और उसकी बुद्धि और चमत्कार को देखे। परमेश्वर इस तरह कार्य करता है ताकि लोगों को जीतने, लोगों को पूर्ण बनाने और लोगों को निकाल देने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल करे। वचन के युग में कार्य करने के लिए वचनों के उपयोग का यही वास्तविक अर्थ है। वचनों के द्वारा लोग परमेश्वर के कार्यों को, परमेश्वर के स्वभाव को, मनुष्य के सार के साथ ही यह जान पाते हैं कि मनुष्य को किसमें प्रवेश करना चाहिए। वचन के युग में परमेश्वर जो भी कार्य करना चाहता है, वह सारा वचनों के जरिए पूरा होता है। वचनों के माध्यम से लोगों को प्रकट किया और निकाला जाता है और उनका परीक्षण किया जाता है। लोगों ने इन वचनों को देखा है, इन वचनों को सुना है और इन वचनों के अस्तित्व को पहचाना है। इसके परिणामस्वरूप वे परमेश्वर के अस्तित्व पर विश्वास करने लगे हैं, परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और बुद्धि के साथ ही साथ मनुष्य के लिए परमेश्वर के प्रेममय और बचाने वाले हृदय पर विश्वास करने लगे हैं। यद्यपि “वचन” शब्द साधारण और सरल है, पर देहधारी परमेश्वर के मुख से निकले वचन ब्रह्माण्ड को झकझोरते हैं; लोगों के हृदय को रूपांतरित करते हैं, उनकी धारणाओं और पुराने स्वभावों को रूपांतरित करते हैं और समस्त संसार के पुराने स्वरूप में परिवर्तन लाते हैं। युगों-युगों में केवल आज का परमेश्वर इस प्रकार से कार्य करता है और केवल वही इस प्रकार से बोलता है और इस प्रकार मनुष्य को बचाता है। इसके बाद से मनुष्य परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन में, उसके वचनों की चरवाही और आपूर्ति में जीवन जीता है; सभी लोग वचनों के संसार में जीते हैं, परमेश्वर के वचनों के अभिशापों और आशीषों के बीच जीते हैं और अधिकतर लोग परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना के अधीन जीते हैं। ये वचन और यह कार्य सब कुछ मनुष्य के उद्धार, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने और पुरानी सृष्टि के संसार के मूल स्वरूप को बदलने के लिए हैं। परमेश्वर ने संसार की सृष्टि वचनों के उपयोग से की, वह समस्त ब्रह्माण्ड में मनुष्य की अगुवाई वचनों के द्वारा करता है, वह वचनों के द्वारा उन्हें जीतता और उनका उद्धार करता है और अंत में वह वचनों के उपयोग से समस्त पुरानी दुनिया का अंत कर देगा और इस प्रकार अपनी संपूर्ण प्रबंधन योजना पूरी करेगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, राज्य का युग वचन का युग है
इस युग में, और तुम लोगों के बीच परमेश्वर इस तथ्य को पूरा करेगा : कि प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के वचन को जिएगा, सत्य को अभ्यास में लाएगा और अपने दिल से परमेश्वर से प्रेम करेगा; कि सभी लोग परमेश्वर के वचनों को अपनी नींव के रूप में और अपनी वास्तविकता के रूप में इस्तेमाल करेंगे और उनके पास परमेश्वर का भय मानने वाला दिल होगा; और परमेश्वर के वचन का अभ्यास करके मनुष्य परमेश्वर के साथ राज करेगा। यही कार्य परमेश्वर को पूरा करना है। क्या तुम परमेश्वर के वचन को पढ़े बिना रह सकते हो? आज, ऐसे बहुत से लोग हैं जो महसूस करते हैं कि वे एक-दो दिन भी परमेश्वर के वचन को बिना पढ़े नहीं रह सकते। उन्हें परमेश्वर का वचन प्रतिदिन पढ़ना आवश्यक है, और यदि समय न मिले तो वचन को सुनना काफी है। यही अहसास पवित्र आत्मा मनुष्य को प्रदान करता है, और इसी प्रकार वह मनुष्य को प्रेरित करना शुरू करता है। अर्थात वह वचनों के द्वारा मनुष्य को नियंत्रित करता है ताकि वे परमेश्वर के वचन की वास्तविकता में प्रवेश कर सकें। यदि परमेश्वर के वचन को केवल एक दिन भी बिना खाए-पिए तुम्हें अंधकार और प्यास का अनुभव हो, तुम्हें यह असह्य लगता हो, तब ये बातें दर्शाती हैं कि पवित्र आत्मा तुम्हें प्रेरित कर रहा है और वह तुमसे विमुख नहीं हुआ है। तब तुम इस धारा में हो। किंतु यदि परमेश्वर के वचन को खाए-पिए बिना एक या दो दिन के बाद, तुम्हें कोई अंतर महसूस न हो या तुम्हें प्यास महसूस न हो, तुम थोड़ा भी प्रेरित महसूस न करो तो यह दर्शाता है कि पवित्र आत्मा तुमसे विमुख हो चुका है। इसका अर्थ है कि तुम्हारी भीतरी दशा सही नहीं है; तुमने वचन के युग में प्रवेश नहीं किया है और तुम उन लोगों में से हो जो पीछे छूट गए हैं। परमेश्वर लोगों को नियंत्रित करने के लिए वचनों का उपयोग करता है; जब तुम परमेश्वर के वचनों को खाते-पीते हो तो तुम्हें अच्छा महसूस होता है, और जब तुम इन वचनों को नहीं खाते-पीते हो, तब तुम्हारे पास अनुसरण का कोई मार्ग नहीं होता है। परमेश्वर का वचन मनुष्यों का भोजन और उन्हें संचालित करने वाली शक्ति बन जाता है। बाइबल में लिखा है, “मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा” (मत्ती 4:4)। यही वह कार्य है जो परमेश्वर आज संपन्न करेगा। वह इस तथ्य को तुम लोगों में पूरा करेगा। ऐसा कैसे होता था कि पहले लोग परमेश्वर का वचन बिना पढ़े बहुत दिन रहते थे, पर खाते-पीते और काम करते थे? अब ऐसा क्यों नहीं होता? इस युग में परमेश्वर सभी चीजों को नियंत्रित करने के लिए मुख्य रूप से वचनों का उपयोग करता है। परमेश्वर के वचन के द्वारा मनुष्य का न्याय किया जाता है और उन्हें पूर्ण बनाया जाता है और अंत में इन वचनों के द्वारा राज्य में ले जाया जाता है। केवल परमेश्वर का वचन मनुष्य को जीवन दे सकता है, केवल परमेश्वर का वचन ही मनुष्य को ज्योति और अभ्यास का मार्ग दे सकता है, विशेषकर राज्य के युग में। जब तक तुम परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता से नहीं भटकते, हर दिन उसके वचनों को खाते-पीते हो, तो परमेश्वर तुम्हें पूर्ण बनाएगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, राज्य का युग वचन का युग है
पूरे ब्रह्मांड में मैं अपना कार्य कर रहा हूँ और पूर्व में भारी गर्जनाएँ निरंतर जारी हैं और सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरे कथन ही हैं जो सभी लोगों को वर्तमान में ले आए हैं। मैं सब लोगों को अपने कथनों से जीत लेता हूँ, उन्हें इस धारा में गिराता हूँ और उनसे अपने आगे आत्मसमर्पण करवाता हूँ, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा वापस लेकर उसे नए सिरे से पूर्व में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा देखने के लिए लालायित नहीं होता? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतजार नहीं करता? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी मनोहरता के लिए नहीं तरसता? कौन रोशनी की ओर नहीं आएगा? कौन कनान की समृद्धि नहीं देखेगा? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन उसकी सराहना नहीं करता जिसके पास महान सामर्थ्य है? मेरे कथन पूरी पृथ्वी पर प्रसारित होंगे और मैं अपने चुने हुए लोगों के सामने और अधिक वचन व्यक्त करूँगा और कहूँगा, जैसे शक्तिशाली गर्जन पर्वतों और नदियों को हिला रहा हो। मैं अपने वचन पूरे ब्रह्मांड से और मानवजाति से बोलता हूँ। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य की निधि बन गए हैं और सभी लोग मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूर्व से लेकर पश्चिम तक कौंधती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य इनसे अलग होने का अनिच्छुक होता है और ये मनुष्य के लिए अथाह भी हैं और यही नहीं, इनके कारण मनुष्य आनन्द का अनुभव करता है। नवजात शिशुओं की तरह सभी लोग खुशी और आनंद से भरे हैं और मेरे आगमन का जश्न मनाते हैं। अपने कथनों के माध्यम से मैं सब लोगों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद मैं औपचारिक रूप से मानवजाति के बीच प्रवेश करूँगा और ऐसा करूँगा कि वे मेरी पूजा करने आएँ। मुझसे प्रवाहित होती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों के चलते सब लोग मेरे समक्ष आते हैं और देखते हैं कि बिजली पूर्व से चमकती है और मैं भी पूर्व में “जैतून के पर्वत” पर उतर चुका हूँ, और मैं बहुत पहले पृथ्वी पर आ चुका हूँ, और मैं अब यहूदियों का पुत्र नहीं हूँ, बल्कि पूर्व की बिजली हूँ। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मानवजाति के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ उसके बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अब से असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे अब से असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। उससे भी अधिक, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामय मुखमंडल को देखें, मेरे कथन सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरा संपूर्ण इरादा है; यही मेरी योजना का अंत और चरमोत्कर्ष है और साथ ही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है : तमाम राष्ट्र मेरी पूजा करें, तमाम मुख मुझे स्वीकार करें, तमाम लोग मुझ पर भरोसा रखें और मेरे चुने तमाम लोग मेरे सामने आत्मसमर्पण करें!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सात गर्जनाएँ गरजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा
परमेश्वर ने एक बार कहा था कि सहस्राब्दि राज्य में भी लोगों को उसके कथनों का पालन आगे करते रहना होगा और भविष्य में कनान के उत्तम देश में परमेश्वर के कथन मनुष्य के जीवन का सीधे तौर पर मार्गदर्शन करेंगे। जब मूसा निर्जन प्रदेश में था, तो परमेश्वर ने सीधे तौर पर उसे निर्देश दिया और उससे बात की। परमेश्वर ने लोगों के आनंद के लिए स्वर्ग से भोजन, पानी और मन्ना भेजा था और आज भी ऐसा ही है : लोगों के आनंद के लिए परमेश्वर ने स्वयं खाने और पीने की चीजें भिजवाई हैं और उसने लोगों को ताड़ना देने के लिए स्वयं शाप भेजे हैं। और इसलिए, अपने कार्य का प्रत्येक कदम व्यक्तिगत तौर पर परमेश्वर द्वारा ही उठाया जाता है। आज लोग तथ्यों के घटित होने की ताक में रहते हैं, वे संकेत और चमत्कार देखने का प्रयास करते हैं और संभव है कि ऐसे सभी लोग त्याग दिए जाएँगे, क्योंकि परमेश्वर का कार्य अधिकाधिक व्यावहारिक होता जा रहा है। कोई नहीं जानता कि परमेश्वर स्वर्ग से अवरोहण कर चुका है, वे इस बात से भी अनभिज्ञ हैं कि परमेश्वर ने स्वर्ग से भोजन और शक्तिवर्धक पेय भेजे हैं—किंतु परमेश्वर वास्तव में विद्यमान है और लोग सहस्राब्दि राज्य के जिस रोमांचक दृश्य की कल्पना करते हैं, वह भी परमेश्वर के स्वयं कथन व्यक्त करने का दृश्य है। यह तथ्य है, और केवल इसे ही पृथ्वी पर परमेश्वर के साथ राज करना कहा जाता है। पृथ्वी पर परमेश्वर के साथ राज करना देह को संदर्भित करता है। जो देह का नहीं होता है वह पृथ्वी पर विद्यमान नहीं होता है, और इस प्रकार जो तीसरे स्वर्ग में जाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं वे सब ऐसा व्यर्थ ही करते हैं। एक दिन, जब संपूर्ण विश्व परमेश्वर के पास वापस लौट जाएगा, तो ब्रह्मांड में उसके कार्य का केंद्र उसके कथनों का अनुसरण करेगा। अन्यत्र परमेश्वर के कथनों को प्राप्त करने के लिए कुछ लोग टेलीफोन का उपयोग करेंगे, कुछ लोग विमान पकड़ेंगे, कुछ लोग समुद्र के पार जाने के लिए नाव लेंगे और कुछ लोग लेज़र का उपयोग करेंगे। हर कोई सराहना और लालसा से परिपूर्ण होगा। वे सभी परमेश्वर के निकट आएँगे और परमेश्वर की ओर एकत्र हो जाएँगे और सभी परमेश्वर की आराधना करेंगे। और ये सब परमेश्वर के कर्म होंगे। इसे स्मरण रखो! परमेश्वर निश्चित रूप से कभी अन्यत्र कहीं फिर से आरंभ नहीं करेगा। परमेश्वर इस तथ्य को पूर्ण करेगा : वह ब्रह्मांड के सभी लोगों को अपने सम्मुख लाएगा और उनसे पृथ्वी के परमेश्वर की आराधना कराएगा। अन्य स्थानों पर उसका कार्य समाप्त हो जाएगा और लोगों को सच्चा मार्ग तलाशने के लिए मजबूर किया जाएगा। यह यूसुफ की तरह होगा : हर कोई भोजन के लिए उसके पास आया, और उसके सामने झुका, क्योंकि उसके पास खाने की चीजें थीं। अकाल के प्रकोप से बचने के लिए लोग सच्चा मार्ग तलाशने के लिए बाध्य होंगे। संपूर्ण धार्मिक जगत गंभीर अकाल से ग्रस्त होगा और केवल आज का परमेश्वर ही मनुष्य के आनंद के लिए हमेशा बहने वाले स्रोत से युक्त, जीवन देने वाले जल का स्रोत है और लोग आकर उस पर निर्भर हो जाएँगे। यह वह समय होगा जब परमेश्वर के कर्म प्रकट होंगे और जब परमेश्वर महिमा प्राप्त करेगा; ब्रह्मांड के सभी लोग इस साधारण “मनुष्य” के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने आएंगे। क्या यह परमेश्वर के महिमा प्राप्त करने का दिन नहीं होगा? एक दिन, बूढ़े पादरी जीवन के जल के झरने से पानी की माँग करते हुए टेलीग्राम भेजेंगे। वे बुज़ुर्ग होंगे, फिर भी वे इस व्यक्ति की आराधना करने आएँगे जिसे वे तुच्छ निगाहों से देखते थे। वे उसे अपने मुँह से स्वीकृति देंगे और अपने हृदय से उस पर विश्वास करेंगे—क्या यही संकेत और चमत्कार नहीं है? जिस दिन संपूर्ण राज्य आनंद करेगा, वह परमेश्वर के महिमा प्राप्त करने का दिन होगा, और जो कोई तुम लोगों के पास आएगा और परमेश्वर के शुभ समाचार को स्वीकार करेगा, वह परमेश्वर द्वारा धन्य किया जाएगा, और जो देश तथा लोग ऐसा करेंगे, वे परमेश्वर द्वारा धन्य किए जाएँगे और उनकी देखभाल की जाएगी। भविष्य की दिशा यह होगी : जो लोग परमेश्वर के कथन प्राप्त करेंगे उनके पास पृथ्वी पर आगे का मार्ग होगा और जो लोग परमेश्वर के कथनों से रहित हैं, वे चाहे व्यवसाय, वैज्ञानिक शोध या शिक्षा या उद्योग में लगे हुए हों, वे एक कदम चलना भी असंभव पाएंगे और सच्चा मार्ग खोजने के लिए बाध्य होंगे। “सत्य के साथ तुम संपूर्ण संसार में चलोगे; सत्य के बिना तुम कहीं नहीं पहुँचोगे” का यही अर्थ है। ये तथ्य हैं : संपूर्ण ब्रह्मांड को नियंत्रित करने और मानवजाति का स्वामी बनने और इसे जीतने के लिए परमेश्वर मार्ग का (अर्थात अपने समस्त वचनों का) उपयोग करता है। लोग हमेशा उन साधनों में एक बड़े बदलाव की आशा करते हैं, जिनके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। ईमानदारी से कहें तो, वचनों के माध्यम से ही परमेश्वर लोगों को नियंत्रित करता है, और तुम्हें वह जो कहता है, उसे पूरा करना चाहिए, चाहे तुम्हारी वैसा करने की इच्छा हो या न हो; यह एक वस्तुनिष्ठ तथ्य है और सबको अवश्य स्वीकार होना चाहिए, और इसी तरह यह अपरिहार्य है और सबको ज्ञात है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सहस्राब्दि राज्य आ चुका है
परमेश्वर के वचन असंख्य घरों में फैलेंगे, सबको ज्ञात हो जाएँगे और केवल तभी उसका कार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में फैल चुका होगा। कहने का अर्थ है कि अगर परमेश्वर का कार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में फैलना है तो उसके वचनों का फैलना आवश्यक है। जिस दिन परमेश्वर महिमा प्राप्त करेगा, उस दिन परमेश्वर के वचन अपना अधिकार और शक्ति प्रदर्शित करेंगे। युगों के पहले से लेकर आज तक का उसका हर एक वचन पूरा और घटित होगा। इस प्रकार से, परमेश्वर पृथ्वी पर महिमा प्राप्त कर चुका होगा—कहने का अर्थ है, कि उसके वचन पृथ्वी पर सामर्थ्य का उपयोग करेंगे। परमेश्वर के मुँह से बोले गए वचनों के परिणामस्वरूप सभी बुरे लोगों को ताड़ित किया जाएगा और उसके मुँह से बोले गए वचनों के परिणामस्वरूप सभी धार्मिक लोग धन्य होंगे और उसके मुँह से बोले गए वचनों द्वारा सब कुछ स्थापित और संपन्न किया जाएगा। वह कोई संकेत या चमत्कार नहीं दिखाएगा; सब-कुछ उसके वचनों के द्वारा पूर्ण होगा, और उसके वचन तथ्यों को उत्पन्न करेंगे। पृथ्वी पर हर व्यक्ति परमेश्वर के वचनों का गुणगान और स्तुति करेगा; चाहे बालिग हों या बच्चे, स्त्री, पुरुष, बूढ़े या युवा, सभी लोग परमेश्वर के वचनों के अधीन आत्मसमर्पण करेंगे। परमेश्वर के वचन देह में प्रकट होते हैं, और लोगों को उन्हें पृथ्वी पर जीवंत और सजीव रूप में देखने में सक्षम बनाते हैं। वचन के देहधारी होने का यही अर्थ है। परमेश्वर पृथ्वी पर मुख्य रूप से “वचन देहधारी हुआ” के तथ्य को पूर्ण करने आया है, जिसका अर्थ है कि वह इसलिए आया है, ताकि उसके वचन देह से निर्गत हों (पुराने नियम में मूसा के समय की तरह नहीं, जब परमेश्वर की वाणी सीधे स्वर्ग से निर्गत होती थी)। इसके बाद उसके सारे वचन सहस्राब्दि राज्य के युग के दौरान पूर्ण होंगे, वे मनुष्यों की नजरों के सामने दिखाई देने वाले तथ्य बन जाएँगे और उनमें लेशमात्र भी अंतर के बिना लोग उन्हें अपनी आँखों से देखेंगे। यही परमेश्वर के देहधारण की बहुत बड़ी सार्थकता है। कहने का अर्थ है कि आत्मा का कार्य देह के माध्यम से और वचनों के माध्यम से पूर्ण होता है। यही “वचन देहधारी हुआ” और “वचन का देह में प्रकट होना” का सही अर्थ है। केवल परमेश्वर ही आत्मा के इरादों को व्यक्त कर सकता है और केवल देहधारी परमेश्वर ही आत्मा की ओर से बोल सकता है; परमेश्वर के वचन देहधारी परमेश्वर में अभिव्यक्त होते हैं और अन्य सभी उनके द्वारा मार्गदर्शित होते हैं। कोई भी इससे बाहर नहीं हो सकता है, सभी इसके दायरे के भीतर मौजूद हैं। केवल इन कथनों से ही लोग जागरूक हो सकते हैं; इनके बिना अगर लोग यह सोचते हैं कि वे कथनों को स्वर्ग से प्राप्त कर सकते हैं तो वे सपना देख रहे हैं। देहधारी परमेश्वर की देह में इस तरह का अधिकार प्रदर्शित होता है, जिससे सभी लोग उस पर पूरी आस्था के साथ विश्वास करते हैं। यहाँ तक कि सर्वाधिक सम्मानित विशेषज्ञ और धार्मिक पादरी भी इन वचनों को नहीं बोल सकते। उन सबको इनके नीचे आत्मसमर्पण करना चाहिए, और अन्य कोई भी दूसरी शुरुआत करने में सक्षम नहीं होगा। परमेश्वर ब्रह्मांड को जीतने के लिए वचनों का उपयोग करेगा। वह ऐसा अपने देहधारी शरीर के द्वारा नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के सभी लोगों को जीतने के लिए देहधारी हुए परमेश्वर के मुँह से कथनों के उपयोग द्वारा करेगा; केवल यही है देह बनने का तरीका और केवल यही है वचन का देह में प्रकट होना। शायद लोगों को ऐसा प्रतीत होता है कि मानो परमेश्वर ने कोई महान कार्य नहीं किया है—किंतु जब परमेश्वर अपने वचन कहेगा तो वे पूरी तरह आश्वस्त और स्तब्ध हो जाएँगे। बिना तथ्यों के, लोग चीखते और चिल्लाते हैं; परमेश्वर के वचनों से वे शांत हो जाते हैं। परमेश्वर इस तथ्य को निश्चित रूप से पूरा करेगा, क्योंकि यह परमेश्वर की लंबे समय से स्थापित योजना है : पृथ्वी पर वचन के आगमन के तथ्य का पूर्ण होना। वास्तव में, मुझे इसे बताने की कोई आवश्यकता नहीं है—पृथ्वी पर सहस्राब्दि राज्य का आगमन ही पृथ्वी पर परमेश्वर के वचनों का आगमन है। स्वर्ग से नए यरूशलेम का अवरोहण मनुष्य के बीच रहने, मनुष्य के प्रत्येक क्रियाकलाप और उसके प्रत्येक विचार और ख्याल में साथ देने के लिए परमेश्वर के वचनों का आगमन है। यह भी एक तथ्य है, जिसे परमेश्वर पूरा करेगा; यही सहस्राब्दि राज्य की खूबसूरती है। यह परमेश्वर द्वारा निर्धारित योजना है : उसके वचन एक हज़ार वर्षों तक पृथ्वी पर प्रकट होंगे, और वे उसके सभी कर्मों को प्रकट करेंगे और पृथ्वी पर उसके समस्त कार्य को पूरा करेंगे, जिसके बाद मानवजाति के इस चरण का अंत हो जाएगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सहस्राब्दि राज्य आ चुका है