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मनुष्य के लिए परमेश्वर जो करता वो हर काम नेकनीयत है

I

निष्ठावान परमेश्वर, जो कहता वो करता है, जो करता वो होता है।

निष्ठावान परमेश्वर, खरा है उसका हर काम।

सिर्फ बातें नहीं वो करता है काम।

वैसे ही कीमत चुकाता है, जैसे वो कहता है,

इंसान की जगह लेकर, उसके बदले में दुख सहता है,

धरती पर आकर रहता है, ख़ुद अपने भीतर,

हकीकत में दर्द इंसान के महसूस करता है।

ख़ुद ही सारी चीज़ों को करने दो ऐलान,

सारे कर्म, सही हैं, सच्चे हैं, धर्मी हैं परमेश्वर के।

दमदार है ये प्रमाण, प्रमाण।

परमेश्वर जो करता है, करता है ईमानदारी से,

परमेश्वर जो बोलता है, बोलता है ईमानदारी से।

जो भी संकल्प किया उसने, वो पूरा हुआ हकीकत में।

परमेश्वर ने कीमत चुकाई हकीकत में।

धर्मी, भरोसेमंद, व्यावहारिक परमेश्वर, परमेश्वर, परमेश्वर।

II

व्यावहारिक परमेश्वर आता नहीं सिर्फ बातें बनाने और फिर चले जाने।

व्यावहारिक परमेश्वर दीनता से आता है इंसान बनके,

दुख भोगता है सारी दुनिया के,

इन दर्दों की अनुभूति करने के बाद, वो जाएगा इंसानी जगत से।

कितना सच्चा, व्यावहारिक है उसका काम।

जो रह गए, वो गुणगान करेंगे उसके किए काम का।

परमेश्वर के देहधारण में दर्शन करो

उसकी निष्ठा का, दरियादिली का, सुंदरता का, अच्छाई का।

परमेश्वर जो करता है, करता है ईमानदारी से,

परमेश्वर जो बोलता है, बोलता है ईमानदारी से।

जो भी संकल्प किया उसने, वो पूरा हुआ हकीकत में।

परमेश्वर ने कीमत चुकाई हकीकत में।

धर्मी, भरोसेमंद, व्यावहारिक परमेश्वर,

परमेश्वर, परमेश्वर, परमेश्वर, परमेश्वर, परमेश्वर।

"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से

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प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं? केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं