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अपना हृदय परमेश्वर की ओर मोड़ कर ही तुम परमेश्वर की सुंदरता कर सकते हो महसूस

I

ईश्वर को संतुष्ट करोगे जितना, दिल तुम्हारा उसकी ओर होगा उतना।

करोगे जितनी तुम प्रार्थना उतनी सुंदरता उसकी खोज सकोगे।

उसे संतुष्ट करोगे जितना, उतना ही देगा बोझ अपना वो तुम्हें,

जितना प्रेम करोगे, उसकी ओर होगा दिल भी उतना।

जब तुम पहुँचो वहाँ, जहाँ उसकी सुंदरता दिखे,

तब तुम तह-ए-दिल से उसकी स्तुति कर सकोगे।

न रोक कोई सकेगा जब स्तुति तुम करोगे।

उसकी सुंदरता देखोगे जब उसकी ओर हो तुम्हारा दिल,

जब उसकी ओर हो तुम्हारा दिल।

II

ईश्वर के लिए प्रेम तुम्हारा बढ़े जितना,

उतना कम ग़लत हो सोच-विचार तुम्हारा।

शैतान को मौका न मिलेगा कि तुम में अपना काम कर सके।

तब बहिष्कृत मौत का माहौल होगा पूरी तरह,

तुम्हारा दिल होगा ईश्वर की ओर देखने को उसकी सुंदरता।

जब तुम पहुँचो वहाँ, जहाँ उसकी सुंदरता दिखे,

तब तुम तह-ए-दिल से उसकी स्तुति कर सकोगे।

न रोक कोई सकेगा जब स्तुति तुम करोगे।

उसकी सुंदरता देखोगे जब उसकी ओर हो तुम्हारा दिल,

जब उसकी ओर हो तुम्हारा दिल।

परमेश्वर की सहभागिता के अनुसार

पिछला:राज्य के युग में परमेश्वर मनुष्य को वचनों के द्वारा पूर्ण करता है

अगला:कोई भी परमेश्वर के आगमन को नहीं जानता है

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प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है