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परमेश्वर सदा से काम करता रहा है इंसान को राह दिखाने के लिए

I

जबसे परमेश्वर ने अपना प्रबंधन शुरु किया है,

तब से वो बस अपने काम में लगा है।

छुपा है मगर, सदा इंसान के वो साथ रहता है,

और अपने सारतत्व से उसे राह दिखाता है।

अपनी बुद्धि से, सामर्थ से, अधिकार से,

सबपर कार्य करता है, अपना स्वभाव दिखाता है,

और व्यवस्था का, अनुग्रह का, राज्य का युग लेकर आया है।

अपने व्यक्तित्व को हालांकि छुपाता है,

अपने स्वभाव को, इच्छा को और वो जो है, उसे दिखाता है,

ताकि इंसान देखे और महसूस करे।

परमेश्वर का सारतत्व और स्वभाव असल में उसकी अभिव्यक्ति हैं।

परमेश्वर का सारतत्व और स्वभाव असल में उसकी अभिव्यक्ति हैं।

II

परमेश्वर अपने काम के तरीके से बेपरवाह,

इंसान से वैसा ही बर्ताव करता, जैसा परमेश्वर है,

वही कहता है जो उसे कहना चाहिये,

वही करता है जो उसे करना चाहिये।

वो देह से बोले, आसमान से या इंसान की तरह,

वो अपने दिल से, अपने मन से बोलता है,

उसमें ना कोई छल है, ना कुछ छुपाता है।

जब परमेश्वर काम करता है तो अपने वचन,

स्वभाव और स्वरूप को व्यक्त करता है।

उसके मन में कोई छिपाव नहीं है।

परमेश्वर इंसान को अपने जीवन से,

अपने स्वरूप से राह दिखाता है, राह दिखाता है।

जबसे परमेश्वर ने अपना प्रबंधन शुरु किया है,

तब से वो बस अपने काम में लगा है।

छुपा है मगर, सदा इंसान के वो साथ रहता है,

और अपने सारतत्व से उसे राह दिखाता है।

अपनी बुद्धि से, सामर्थ से, अधिकार से,

सबपर कार्य करता है, अपना स्वभाव दिखाता है,

और व्यवस्था का, अनुग्रह का, राज्य का युग लेकर आया है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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