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परमेश्वर स्वर्ग में है और धरती पर भी

I

परमेश्वर, परमेश्वर।

परमेश्वर जब धरती पर होता है,

तो इंसानों के दिल में वो व्यवहारिक होता है।

स्वर्ग में वो सब जीवों का स्वामी होता है।

नदियाँ लांघी, पर्वत पर भी एकबार चढ़ा है परमेश्वर।

इंसानों के बीच कभी घूमा-फिरा है परमेश्वर।

स्वयं व्यवहारिक परमेश्वर का खुले-आम विरोध करे, किसमें साहस?

सर्वशक्तिमान के शासन से जाए बाहर, किसमें साहस?

स्वर्ग में है परमेश्वर कहे बेशक, किसमें साहस?

धरती पर है परमेश्वर कहे यकीनन, किसमें साहस?

कह नहीं सकता कोई यकीनन, कहाँ है परमेश्वर।

कह नहीं सकता कोई यकीनन, कहाँ है परमेश्वर।

II

परमेश्वर, परमेश्वर।

आसमाँ में होता है तो क्या, बस अलौकिक है परमेश्वर?

धरती पर होता है तो क्या, बस व्यवहारिक है परमेश्वर, परमेश्वर?

सब चीज़ों पर परमेश्वर का शासन,

या इंसानों की पीड़ा की उसकी अनुभूति,

क्या तय कर सकते हैं, कि वो व्यवहारिक परमेश्वर है?

परमेश्वर स्वर्ग में है और धरती पर भी

सब चीज़ों में, इंसानों में परमेश्वर है।

मानव हर दिन परमेश्वर के संग रह सकता है,

हर दिन परमेश्वर के दर्शन कर सकता है,

दर्शन कर सकता है, दर्शन कर सकता है।

परमेश्वर।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:चाहे बड़ा हो या छोटा, सबकुछ मायने रखता है जब परमेश्वर की राह का पालन कर रहे हो

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केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं? बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है