परमेश्वर उन्हें पूर्ण बनाता है, जो उसके इरादों के अनुरूप हैं

परमेश्वर अब एक विशेष लोगों के समूह को प्राप्त करना चाहता है, ऐसे लोगों का समूह जो उसके साथ सहयोग करने के लिए भरसक प्रयास करते हैं, जो उसके कार्य के प्रति समर्पण कर सकते हैं, जो विश्वास करते हैं कि परमेश्वर द्वारा बोले हुए वचन सत्य हैं, जो परमेश्वर की अपेक्षाओं को अपने अभ्यास में ला सकते हैं; ये वे लोग हैं जिनके हृदयों में सच्ची समझ है, ये वे लोग हैं, जिन्हें पूर्ण बनाया जा सकता है, और वे निःसंदेह पूर्णता के पथ पर चलने में समर्थ होंगे। जिन्हें पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर के कार्य की स्पष्ट समझ से रहित हैं, जो परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते नहीं हैं, जो उसके वचनों पर कोई ध्यान नहीं देते हैं और जिनके पास कोई परमेश्वर-प्रेमी हृदय नहीं है। जो देहधारी परमेश्वर पर संदेह करते हैं, जो उसके बारे में हमेशा अनिश्चित रहते हैं, जो उसके वचनों को कभी भी गंभीरता से नहीं लेते हैं और हमेशा उसे धोखा देने का प्रयास करते हैं वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं और शैतान के हैं; ऐसे लोगों को पूर्ण बनाने का कोई तरीका नहीं है।

यदि तू पूर्ण बनाया जाना चाहता है, तो पहले तुझे परमेश्वर की नजरों का कृपापात्र बनना चाहिए, क्योंकि वह उन्हें पूर्ण बनाता है जिन पर वह कृपादृष्टि डालता है और जो उसके इरादों के अनुरूप होते हैं। यदि तू परमेश्वर के इरादों के अनुरूप होना चाहता है, तो तेरे पास ऐसा हृदय अवश्य होना चाहिए जो उसके कार्य के प्रति समर्पण करता हो, तुझे सत्य का अनुसरण करने के लिए भरसक प्रयास अवश्य करना चाहिए, और तुझे सभी बातों में परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को अवश्य स्वीकार करना चाहिए। तू जो कुछ भी करता है, क्या वह परमेश्वर की जाँच-पड़ताल से गुजरता है? क्या तेरा इरादा सही है? यदि तेरा इरादा सही है, तो परमेश्वर तेरा अनुमोदन करेगा; यदि तेरा इरादा गलत है, तो यह दिखाता है, कि जिसे तेरा दिल प्यार करता है वह परमेश्वर नहीं है, बल्कि यह देह और शैतान है। इसलिए तुझे सभी बातों में परमेश्वर की छानबीन को स्वीकार करने के लिए प्रार्थना को माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। जब तू प्रार्थना करता है, तब भले ही मैं व्यक्तिगत रूप से तेरे सामने खड़ा नहीं होता हूँ, लेकिन पवित्र आत्मा तेरे साथ होता है, और यह स्वयं मुझसे और पवित्र आत्मा से तू प्रार्थना कर रहा होता है। तू इस देह पर क्यों भरोसा करता है? तू इसलिए भरोसा करता है क्योंकि उसमें परमेश्वर का आत्मा है। यदि वह व्यक्ति परमेश्वर के आत्मा के बिना होता तो क्या तू उस पर भरोसा करता? जब तू इस व्यक्ति पर विश्वास करता है, तो तू परमेश्वर के आत्मा पर विश्वास कर रहा होता है। तुम्हारा इस व्यक्ति का भय मानना परमेश्वर के आत्मा का भय मानना है। परमेश्वर के आत्मा पर आस्था इस व्यक्ति पर आस्था है, और इस व्यक्ति पर आस्था परमेश्वर के आत्मा पर भी आस्था है। जब तू प्रार्थना करता है, तो तू महसूस करता है कि परमेश्वर का आत्मा तेरे साथ है और परमेश्वर तेरे सामने है; इसलिए तू उसके आत्मा से प्रार्थना करता है। आज, अधिकांश लोग अपने कृत्यों को परमेश्वर के सम्मुख लाने से डरते हैं; तू परमेश्वर की देह को तो धोखा दे सकता है, परन्तु उसके आत्मा को धोखा नहीं दे सकता है। जो भी मामला परमेश्वर की जाँच-पड़ताल का सामना नहीं कर सकता है वह सत्य के अनुरूप नहीं है और उसे दरकिनार कर देना चाहिए; ऐसा न करना परमेश्वर को नाराज करना है। इसलिए तू चाहे अपने भाई-बहनों के साथ प्रार्थना, बातचीत और संगति कर रहाहै या अपना कर्तव्य निभा रहा है और चीजों को करवा रहा है, तुझे अपना हृदय परमेश्वर के सम्मुख खोलकर अवश्य रख देना चाहिए। जब तू अपना कार्य पूरा करता है, तो परमेश्वर तेरे साथ होता है, और जब तक तेरा इरादा सही है और परमेश्वर के घर के कार्य के लिए है, तब तक जो कुछ भी तू करेगा, परमेश्वर उसे स्वीकार करेगा; तुझे अपने कार्य को दिल से पूरा करना चाहिए। जब तू प्रार्थना करता है तो तेरे पास परमेश्वर-प्रेमी हृदय होना चाहिए और तुझे परमेश्वर की देखरेख, संरक्षण और जाँच-पड़ताल खोजनी चाहिए। अगर तेरे ये इरादे हैं, तो तेरी प्रार्थनाएँ फलेंगी। उदाहरण के लिए, जब तू सभाओं में प्रार्थना करता है, यदि तू अपना हृदय खोल कर परमेश्वर से प्रार्थना करता है, और बिना झूठ बोले परमेश्वर से बोल देता है कि तेरे हृदय में क्या है, तब तेरी प्रार्थनाएँ निश्चित रूप से प्रभावशाली होंगी। यदि तेरे पास ईमानदार परमेश्वर-प्रेमी दिल है, तो परमेश्वर से प्रतिज्ञा कर : “परमेश्वर, जो कि स्वर्ग में और पृथ्वी पर और सब वस्तुओं में है, मैं तुझसे प्रतिज्ञा करता हूँ : तेरा आत्मा, जो कुछ मैं करता हूँ, उसकी पड़ताल करेऔर हर समय मेरी सुरक्षा और देखरेख करे, ताकि जो कुछ भी मैं करूँ वह तुम्हारी उपस्थिति में अडिग रह सके। यदि मेरा हृदय तुझसे प्रेम न करे या यह कभी भी तुझसे विश्वासघात करे, तो तू मुझे कठोरता से ताड़ना और श्राप दे। मुझे न तो इस जीवन में और न आने वाले जगत में क्षमा करना!” क्या तू ऐसी शपथ खाने की हिम्मत करता है? यदि तू नहीं करता है, तो यह दर्शाता है कि तू कायर है, और तू अभी भी खुद से ही प्रेम करता है। क्या तुम लोगों के पास यह संकल्प है? यदि वास्तव में यही तेरा संकल्प है, तो तुझे यह प्रतिज्ञा लेनी चाहिए। यदि तेरे पास संकल्प है और तू ऐसी प्रतिज्ञा लेता है, तो परमेश्वर तेरे संकल्प को पूरा करेगा। जब तू परमेश्वर से प्रतिज्ञा करता है, तो वह सुनता है। परमेश्वर तेरी प्रार्थना और तेरे अभ्यास के आधार पर यह निर्धारित करता है कि तू पापी है या धार्मिक। अभी तुम लोग पूर्ण बनाए जाने की प्रक्रिया में हो और यदि तुझे पूर्ण बनाए जाने में वाकई आस्था है, तो तू जो कुछ भी करता है, वह सब परमेश्वर के सम्मुख लाएगा और उसकी जाँच-पड़ताल को स्वीकार करेगा। यदि तू कुछ ऐसा करता है जो उग्र रूप से विद्रोहशील है या यदि तू परमेश्वर के साथ विश्वासघात करता है, तो परमेश्वर तेरी प्रतिज्ञा को साकार करेगा; उस समय तू चाहे विनाश का सामना करता है या ताड़ना का, यह तेरी अपनी करनी होगी। तूने प्रतिज्ञा ली थी, इसलिए तुझे ही इसका पालन करना चाहिए। यदि तूने कोई प्रतिज्ञा की, लेकिन उसका पालन नहीं किया, तो तुझे विनाश भुगतना होगा। चूँकि प्रतिज्ञा तेरी थी, परमेश्वर तेरी प्रतिज्ञा को साकार करेगा। कुछ लोग प्रार्थना के बाद डरते हैं और विलाप कहते हैं, “सब खत्म हो गया! मेरे असंयमी होने का मौका चला गया; बुरी चीजें करने का मेरा मौका चला गया; सांसारिक लालचों में लिप्त होने का मेरा मौका चला गया!” ऐसे लोग अभी भी संसार और पाप को प्यार करते हैं, और उन्हें निश्चित ही विनाश भुगतना पड़ेगा।

परमेश्वर के विश्वासी होने के नाते तुम्हें अपने सारे कर्म और क्रियाकलाप उसके सामने लाने और उसकी जाँच-पड़ताल स्वीकार करने में सक्षम होना चाहिए। यदि तुम जो कुछ भी करते हो वह परमेश्वर के आत्मा के सम्मुख लाया जा सकता है लेकिन परमेश्वर की देह के सम्मुख नहीं लाया जा सकता है तो यह दर्शाता है कि तुमने उसके आत्मा की जाँच-पड़ताल स्वीकार नहीं की है। परमेश्वर का आत्मा कौन है? वह व्यक्ति कौन है जिसकी गवाही परमेश्वर देता है? क्या वे एक और एक ही समान नहीं हैं? अधिकतर उसे दो अलग अस्तित्वों के रूप में देखते हैं, विश्वास करते हैं कि परमेश्वर का आत्मा तो परमेश्वर का आत्मा है और परमेश्वर जिसकी गवाही देता है वह मात्र एक मानव है। लेकिन क्या तुम गलत नहीं हो? किसकी ओर से यह व्यक्ति काम करता है? जो लोग देहधारी परमेश्वर को नहीं जानते, उनके पास आध्यात्मिक समझ नहीं होती है। परमेश्वर का आत्मा और उसका देहधारी देह एक ही हैं, क्योंकि परमेश्वर का आत्मा देह रूप में प्रकट हुआ है। यदि यह व्यक्ति तुम्हारे प्रति निर्दयी है, तो क्या परमेश्वर का आत्मा दयालु होगा? क्या तुम भ्रमित नहीं हो? आज, जो कोई भी परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को स्वीकार नहीं कर सकता है, वह परमेश्वर की स्वीकृति नहीं पा सकता है, और जो देहधारी परमेश्वर को न जानता हो, उसे पूर्ण नहीं बनाया जा सकता। तुम जो कुछ भी करते हो उसे देखो और यह देखो कि क्या यह परमेश्वर के सम्मुख लाया जा सकता है कि नहीं। यदि तुम जो कुछ भी करते हो उसे परमेश्वर के सम्मुख नहीं ला सकते हो तो यह दर्शाता है कि तुम एक दुष्कर्मी हो। क्या दुष्कर्मियों को पूर्ण बनाया जा सकता है? तुम जो कुछ भी करते हो, हर क्रियाकलाप, हर इरादा और हर प्रतिक्रिया, अवश्य ही परमेश्वर के सम्मुख लाई जानी चाहिए। इसका मतलब है कि तुम्हारे दैनिक आध्यात्मिक जीवन की हर चीज—प्रार्थना करना, परमेश्वर के करीब आना, परमेश्वर के वचन खाना और पीना, अपने भाइयों और बहनों के साथ संगति करना और कलीसियाई जीवन जीना—से लेकर दूसरों के साथ सहयोग में की जाने वाली तुम्हारी सेवा तक, सब कुछ परमेश्वर के सामने उसकी जाँच-पड़ताल के लिए लाया जाना चाहिए। यह ऐसा अभ्यास है, जो तुम्हें जीवन में संवृद्धि हासिल करने में मदद करेगा। परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को स्वीकार करने की प्रक्रिया शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। तुम परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को जितना अधिक स्वीकार करते हो, तुम उतने ही अधिक शुद्ध होते जाते हो और तुम उतने ही अधिक परमेश्वर के इरादों के अनुरूप होते जाते हो, ताकि तुम असंयमता में न गिरो और तुम्हारा हृदय उसकी उपस्थिति में जी पाए। जितना तुम उसकी जाँच-पड़ताल को स्वीकार करते हो, शैतान उतना ही लज्जित होता है और उतना ही अधिक तुम देह के खिलाफ विद्रोह करने में सक्षम होते हो। इसलिए, परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को स्वीकार करना अभ्यास का वह मार्ग है जिसका सभी को अनुसरण करना चाहिए। चाहे तुम जो भी करो, यहाँ तक कि अपने भाई-बहनों के साथ संगति करते हुए भी, तुम्हें अपने कर्म परमेश्वर के सम्मुख लाने चाहिए और उसकी जाँच-पड़ताल खोजनी चाहिए और तुम्हें उद्देश्यपूर्ण ढंग से स्वयं परमेश्वर के प्रति समर्पण करना चाहिए; यह तुम्हारे अभ्यास को और अधिक सटीक बना देगा। केवल जब तुम जो कुछ भी करते हो वह सब कुछ परमेश्वर के सम्मुख लाते हो और परमेश्वर की जाँच-पड़ताल को स्वीकार करते हो, तभी तुम ऐसे व्यक्ति हो सकते हो जो परमेश्वर की उपस्थिति में जीता है।

जिनके पास परमेश्वर की समझ नहीं होती वे कभी भी पूरी तरह परमेश्वर के प्रति समर्पित नहीं हो सकते। ऐसे लोग विद्रोह के पुत्र हैं। वे बहुत महत्वाकांक्षी हैं, और उनमें बहुत अधिक विद्रोहीपन है, इसलिए वे खुद को परमेश्वर से दूर कर लेते हैं और उसकी छानबीन को स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं हैं। ऐसे लोग आसानी से पूर्ण नहीं बनाए जा सकते हैं। कुछ लोग परमेश्वर के वचनों को खाने और पीने के अपने ढंग के मामले में, और उनके प्रति अपनी स्वीकृति में चयनशील होते हैं। वे परमेश्वर के वचन के उन भागों को ग्रहण करते हैं जो उनकी धारणा के अनुसार होते हैं जबकि उन्हें अस्वीकार कर देते हैं जो उनकी धारणा के अनुसार नहीं हैं। क्या यह परमेश्वर के खिलाफ सबसे स्पष्ट विद्रोह और प्रतिरोध नहीं है? यदि कोई परमेश्वर के बारे में थोड़ी-सी भी समझ हासिल किए बगैर वर्षों से उस पर विश्वास कर रहा हो, तो वह एक छद्म-विश्वासी है। जो लोग परमेश्वर की छानबीन को ग्रहण करने के इच्छुक हैं वे परमेश्वर की समझ पाने की कोशिश करते हैं, वे उसके वचनों को ग्रहण करना चाहते हैं। ये वे हैं, जो परमेश्वर का उत्तराधिकार और आशीषें प्राप्त करेंगे, और वे सबसे धन्य हैं। परमेश्वर उन्हें श्राप देता है जिनके दिलों में उसके लिए कोई स्थान नहीं है। वह ऐसे लोगों को ताड़ना देता है और उन्हें त्याग देता है। यदि तू परमेश्वर से प्यार नहीं करता, तो वो तुझे त्याग देगा और यदि मैं जो कहता हूँ तू उसे नहीं सुनता है, तो मैं वादा करता हूँ कि परमेश्वर का आत्मा तुझे त्याग देगा। यदि तुझे भरोसा नहीं है, तो कोशिश करके देख ले! आज, मैं तुझे अभ्यास के लिए एक रास्ता स्पष्ट रूप से बताता हूँ, लेकिन तू इसे अभ्यास में लाता है या नहीं यह तेरे ऊपर है। यदि तू इसमें विश्वास नहीं करता है, यदि तू इसे अभ्यास में नहीं लाता है, तो तू स्वयं देखेगा कि पवित्र आत्मा तुझमें कार्य करता है या नहीं! यदि तू परमेश्वर के बारे में समझ पाने की कोशिश नहीं करता है, तो पवित्र आत्मा तुझमें कार्य नहीं करेगा। परमेश्वर उसमें कार्य करता है जो उसके वचनों को सँजोता है और उनका अनुसरण करता है। जितना तू परमेश्वर के वचनों को सँजोयेगा, उतना ही उसका आत्मा तुझमें कार्य करेगा। कोई व्यक्ति परमेश्वर के वचनों को जितना ज्यादा सँजोता है, वह परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने के उतने ही अधिक अवसर प्राप्त करेगा। परमेश्वर उन्हें पूर्ण बनाता है जो वास्तव में उससे प्रेम करते हैं और वह उन्हें पूर्ण बनाता है, जिनके हृदय उसके सम्मुख शांत रहते हैं। तुझे परमेश्वर के समस्त कार्य को सँजोना चाहिए, उसकी प्रबुद्धता को सँजोना चाहिए, परमेश्वर की उपस्थिति को सँजोना चाहिए, परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा को सँजोना चाहिए और इस बात को सँजोना चाहिए कि कैसे परमेश्वर के वचन तेरे जीवन की वास्तविकता बन जाते हैं और तेरे जीवन की आपूर्ति करते हैं—यह परमेश्वर के इरादों के सबसे अनुरूप है। यदि तू परमेश्वर के कार्य को सँजोता है, यानी उसने तुझ पर जो कार्य किया है अगर तू उस सबको सँजोता है, तो वह तुझे आशीष देगा और जो कुछ तेरा है उसे बहुगुणित करेगा। यदि तू परमेश्वर के वचनों को नहीं सँजोता है, तो वह तुझ पर कार्य नहीं करेगा; वह तेरे विश्वास के लिए केवल थोड़ा-सा अनुग्रह देगा, तुझे कुछ धन का आशीष लेने देगा या तेरे परिवार के लिए थोड़ी-सी सुरक्षा देगा। तुझे परमेश्वर के वचनों को अपनी वास्तविकता बनाने, उसे संतुष्ट कर पाने और उसके इरादों के अनुरूप होने का प्रयास करना चाहिए; तुझे केवल परमेश्वर के अनुग्रह का आनंद लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए। विश्वासियों के लिए परमेश्वर के कार्य को प्राप्त करने, पूर्णता पाने, और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलने वाला बनने की अपेक्षा कुछ भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। यह वो लक्ष्य है जिसका तुझे अनुसरण करना चाहिए।

अनुग्रह के युग में जिसका मनुष्य ने अनुसरण किया, वह अब अप्रचलित हो गया है क्योंकि वर्तमान में अनुसरण का एक उच्चतर मानक है; जिसका अनुसरण किया जाता है वह अधिक उत्कृष्ट भी है और अधिक व्यावहारिक भी, जिसका अनुसरण किया जाता है वो मनुष्य की भीतरी आवश्यकता को बेहतर ढंग से संतुष्ट कर सकता है। पिछले युगों में, परमेश्वर लोगों पर उस तरह कार्य नहीं करता था जैसे वह आज करता है; वह उनसे उतनी बातें नहीं करता था जितनी आज करता है, न ही उसे उनसे उतनी अपेक्षाएँ थीं जितनी कि आज के लोगों से हैं। आज परमेश्वर की तुम लोगों से ये अपेक्षाएँ हैं, यह दिखाता है कि परमेश्वर का अंतिम इरादा तुम लोगों पर, यानि लोगों के इस समूह पर केन्द्रित है। यदि तू वास्तव में परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाया जाना चाहता है, तो सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य के रूप में इसका अनुसरण कर। चाहे तू भाग-दौड़ कर रहा है, खुद को खपा रहा है, किसी काम में आ रहा है या परमेश्वर का आदेश स्वीकार कर रहा है, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा पूर्ण बनाए जाने और परमेश्वर के इरादों को पूरा करने का लक्ष्य रख। यदि कोई कहता है कि वह परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जानेया जीवन प्रवेश का अनुसरण नहीं करता है, बल्कि केवल दैहिक सुकून और आनंद का अनुससरण करता है, तो वह लोगों में सबसे अंधा है। जो जीवन वास्तविकता का अनुसरण नहीं करते हैं, बल्कि केवल आने वाली दुनिया में अनन्त जीवन और इस दुनिया में सुरक्षा का अनुसर करते हैं, वे लोगों में अधिक अंधे हैं। इसलिए तू जो भी करता है, वह सब परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने और उसके द्वारा प्राप्त किए जाने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।

परमेश्वर लोगों पर जो कार्य करता है, वह उनकी विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं के आधार पर उनकी आपूर्ति करने के लिए है। जितनी बड़ी एक आदमी की जिन्दगी होती है, उसकी आवश्यकताएं उतनी ही ज्यादा होती हैं, और उतना ही ज्यादा वह अनुसरण करता है। यदि इस चरण में तेरे पास कोई लक्ष्य नहीं हैं, यह साबित करता है कि पवित्र आत्मा ने तुझे छोड़ दिया है। सभी जो जीवन की तलाश करते हैं, वे कभी भी पवित्र आत्मा के द्वारा नहीं त्यागे जाएंगे; ऐसे लोगों के पास अनुसरण करने के लिए हमेशा कुछ होता है, उनके दिल में हमेशा लालसा होती है। इस प्रकार के लोग अपनी वर्तमान स्थिति से कभी भी संतुष्ट नहीं होते। पवित्र आत्मा के कार्यों के प्रत्येक चरण का उदेश्य तुम में एक प्रभाव प्राप्त करना है, लेकिन यदि तुम अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में आत्मसंतुष्ट हो जाते हो, यदि तुम्हारी कोई आवश्यकता नहीं रह जाती है, यदि तुम पवित्र आत्मा के कार्य को स्वीकार नहीं करते हो, तो वह तुम्हें छोड़ देगा। लोगों को हर दिन परमेश्वर के पड़ताल की आवश्यकता होती है; उन्हें परमेश्वर से हर दिन भरपूर मात्रा में प्रावधान की आवश्यकता होती है। क्या लोग प्रतिदिन परमेश्वर के वचनों को खाए और पीए बिना रह सकते हैं? यदि कोई ऐसा हमेशा महसूस करता है कि वह परमेश्वर के वचनों को जितना भी खा-पी ले, यह कम ही रहेगा, यदि वह इसे हमेशा खोजता है, और हमेशा इसके लिए भूखा-प्यासा रहता है, तो पवित्र आत्मा हमेशा उसमें कार्य करेगा। जितना ज्यादा कोई धार्मिकता के लिए भूखा-प्यासा होता है, उतना ही ज्यादा वह व्यावहारिक चीजों पर सहभागिता करने में सक्षम होता है। कोई व्यक्ति सत्य खोजने पर जितना अधिक ध्यान देता है, उतनी ही तेजी से वह अपने जीवन में वृद्धि हासिल करता है, जिससे वह परमेश्वर के घर में विशद अनुभवी और समृद्ध हो जाता है।

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परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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