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मनुष्य को बचाने का परमेश्वर का इरादा बदलेगा नहीं

I

अब मानव को थोड़ा ज्ञान है ईश्वर के स्वभाव का,

ईश्वर के स्वरूप का, और उसके कार्यों का।

फिर भी अधिकतर समझ उनकी शब्दों या सिद्धांतों

और विचारों से ज़्यादा कुछ भी नहीं।

परमेश्वर नहीं चाहता कि समझे कोई खुद को त्यागा हुआ

या ठंड में अकेला छोड़ा गया।

वो देखना चाहता है एक अटल दिल जो बढ़े

सच की राह पे और ईश्वर को जानने।

II

लोगों में है कमी सच्चे ज्ञान की और

उस सोच की जो मिले सच्चे अनुभव से।

ईश्वर करता है कोशिशें जगाने के लिए मानव का दिल,

पर तय है करना लम्बा सफर दिलों के जागने के लिए।

परमेश्वर नहीं चाहता कि समझे कोई खुद को त्यागा हुआ

या ठंड में अकेला छोड़ा गया।

वो देखना चाहता है एक अटल दिल जो बढ़े

सच की राह पे और ईश्वर को जानने।

वो चाहता है कि सभी आगे बढ़ें,

बिन बोझ उठाये, बिन किसी संदेह के।

III

चाहे कितनी ही हद पार की हो तुमने,

चाहे कितने ही दूर गए तुम गुमराह हो के,

ईश्वर को जानने के लक्ष्य में तुम न रुको।

तुम्हें लगातार आगे बढ़ना चाहिए।

मानव को बचाने को ईश्वर का दिल न बदलेगा।

सबसे कीमती है यही ईश्वर की बात।

परमेश्वर नहीं चाहता कि समझे कोई खुद को त्यागा हुआ

या ठंड में अकेला छोड़ा गया।

वो देखना चाहता है एक अटल दिल जो बढ़े

सच की राह पे और ईश्वर को जानने।

वो चाहता है कि सभी आगे बढ़ें,

बिन बोझ उठाये, बिन किसी संदेह के।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं?