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देह में प्रकट हुआ परमेश्वर का अधिकार और सामर्थ्य

I

"वचन के देहधारी होने" के सच को पूरा करने,

धरती पर आया परमेश्वर।

यानी, परमेश्वर के वचन प्रकट होते हैं देह से।

पूर्व विधान से अलग, मूसा के ज़माने में,

जब परमेश्वर सीधे आसमाँ से बोलता था।

तब वे सारे होंगे पूरे, हज़ार साल के राज्य के युग में,

और बनेंगे ऐसा सच जो, सारे इंसाँ देख पाएंगे।

देख पाएगा ख़ुद अपनी आँखों से हर जन

पूरी तरह पूरा होते, हर एक वचन।

II

परमेश्वर के देहधारण का गहरा अर्थ यही है।

इसके मायने, काम आत्मा का निष्पादित होता है,

होता है वचन से और देह से।

"वचन के देहधारी होने" का सच्चा अर्थ यही है।

वचन के देह में प्रकट होने का सच्चा अर्थ यही है।

परमेश्वर ही व्यक्त कर पाता है, आत्मा के मन को।

है देहधारी परमेश्वर ही जो बोल सके, आत्मा की तरफ़ से।

देहधारी परमेश्वर में होते, वचन प्रकट परमेश्वर के।

III

यह सबको राह दिखाएगा,

हर कोई इसकी सीमा में ही रहता है,

कोई इसकी हद को पार नहीं कर पाएगा।

इसी कथन से लोगों में आएगा ज्ञान।

इस उक्ति के बिना, स्वर्ग से मिल जाएगा कथन,

सपने में भी सोच नहीं कोई पाएगा।

ये ही है अधिकार जिसे, देहधारी परमेश्वर दिखलाता है,

इसकी वजह से, सबको यकीन हो जाएगा,

इसकी वजह से, सबको यकीं हो जाएगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है