बाइबल को मानने और उसकी आराधना करने वाले लोग अनंत जीवन पाने में असफल क्यों रहेंगे

18 मार्च, 2018

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (यूहन्ना 5:39-40)।

"यीशु ने उससे कहा, “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना 14:6)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

बहुत से लोग मानते हैं कि बाइबल को समझना और उसकी व्याख्या कर पाना सच्चे मार्ग की खोज करने के समान है—परन्तु वास्तव में, क्या बात इतनी सरल है? बाइबल की इस वास्तविकता को कोई नहीं जानता कि यह परमेश्वर के कार्य के ऐतिहासिक अभिलेख और उसके कार्य के पिछले दो चरणों की गवाही से बढ़कर और कुछ नहीं है, और इससे तुम्हें परमेश्वर के कार्य के लक्ष्यों की कोई समझ हासिल नहीं होती। बाइबल पढ़ने वाला हर व्यक्ति जानता है कि यह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य के दो चरणों को लिखित रूप में प्रस्तुत करता है। पुराने नियम सृष्टि के समय से लेकर व्यवस्था के युग के अंत तक इस्राएल के इतिहास और यहोवा के कार्य को लिपिबद्ध करता है। पृथ्वी पर यीशु के कार्य को, जो चार सुसमाचारों में है, और पौलुस के कार्य नए नियम में दर्ज किए गए हैं; क्या ये ऐतिहासिक अभिलेख नहीं हैं? अतीत की चीज़ों को आज सामने लाना उन्हें इतिहास बना देता है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी सच्ची और यथार्थ हैं, वे हैं तो इतिहास ही—और इतिहास वर्तमान को संबोधित नहीं कर सकता, क्योंकि परमेश्वर पीछे मुड़कर इतिहास नहीं देखता! तो यदि तुम केवल बाइबल को समझते हो और परमेश्वर आज जो कार्य करना चाहता है, उसके बारे में कुछ नहीं समझते और यदि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, किन्तु पवित्र आत्मा के कार्य की खोज नहीं करते, तो तुम्हें पता ही नहीं कि परमेश्वर को खोजने का क्या अर्थ है। यदि तुम इस्राएल के इतिहास का अध्ययन करने के लिए, परमेश्वर द्वारा समस्त लोकों और पृथ्वी की सृष्टि के इतिहास की खोज करने के लिए बाइबल पढ़ते हो, तो तुम परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते। किन्तु आज, चूँकि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो और जीवन का अनुसरण करते हो, चूँकि तुम परमेश्वर के ज्ञान का अनुसरण करते हो और मृत पत्रों और सिद्धांतों या इतिहास की समझ का अनुसरण नहीं करते हो, इसलिए तुम्हें परमेश्वर की आज की इच्छा को खोजना चाहिए और पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा की तलाश करनी चाहिए। यदि तुम पुरातत्ववेत्ता होते तो तुम बाइबल पढ़ सकते थे—लेकिन तुम नहीं हो, तुम उनमें से एक हो जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं। अच्छा होगा तुम परमेश्वर की आज की इच्छा की खोज करो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (4)' से उद्धृत

बाइबल को पढ़ने से लोग जीवन के अनेक मार्ग भी प्राप्त कर सकते हैं जो अन्य पुस्तकों में नहीं मिल सकते। ये मार्ग पवित्र आत्मा के कार्य के जीवन के मार्ग हैं जिनका अनुभव नबियों और प्रेरितों ने बीते युगों में किया था, बहुत से वचन अनमोल हैं, जो लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। इस प्रकार, सभी लोग बाइबल पढ़ना पसंद करते हैं। क्योंकि बाइबल में इतना कुछ छिपा है, इसके प्रति लोगों के विचार महान आध्यात्मिक हस्तियों के लेखन के प्रति उनके विचारों से भिन्न हैं। बाइबल पुराने और नए युग में यहोवा और यीशु की सेवा-टहल करने वाले लोगों के अनुभवों और ज्ञान का अभिलेख एवं संकलन है, और इसलिए बाद की पीढ़ियाँ इससे अत्यधिक प्रबुद्धता, रोशनी और अभ्यास करने के मार्ग प्राप्त कर रही हैं। बाइबल किसी भी महान आध्यात्मिक हस्ती के लेखन से उच्चतर है, तो उसका कारण यह है कि उनका समस्त लेखन बाइबल से ही लिया गया है, उनके समस्त अनुभव बाइबल से ही आए हैं, और वे सभी बाइबल ही समझाते हैं। इसलिए, यद्यपि लोग किसी भी महान आध्यात्मिक हस्ती की पुस्तकों से पोषण प्राप्त कर सकते हैं, फिर भी वे बाइबल की ही आराधना करते हैं, क्योंकि यह उन्हें ऊँची और गहन प्रतीत होती है! यद्यपि बाइबल जीवन के वचनों की कुछ पुस्तकों, जैसे पौलुस के धर्मपत्र और पतरस के धर्मपत्र, को एक साथ लाती है। यद्यपि ये पुस्तकें लोगों को पोषण और सहायता प्रदान कर सकती हैं, किन्तु फिर भी ये पुस्तकें अप्रचलित हैं और पुराने युग की हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी अच्छी हैं, वे केवल एक कालखंड के लिए ही उपयुक्त हैं, चिरस्थायी नहीं हैं। क्योंकि परमेश्वर का कार्य निरन्तर विकसित हो रहा है, यह केवल पौलुस और पतरस के समय पर ही नहीं रुक सकता या हमेशा अनुग्रह के युग में ही बना नहीं रह सकता जिसमें यीशु को सलीब पर चढ़ा दिया गया था। अत:, ये पुस्तकें केवल अनुग्रह के युग के लिए उपयुक्त हैं, अंत के दिनों के राज्य के युग के लिए नहीं। ये केवल अनुग्रह के युग के विश्वासियों को पोषण प्रदान कर सकती हैं, राज्य के युग के संतों को नहीं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी अच्छी हैं, वे अब भी अप्रचलित ही हैं। यहोवा के सृष्टि के कार्य या इस्राएल के उसके कार्य के साथ भी ऐसा ही हैः इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह कार्य कितना बड़ा था, यह अब भी अप्रचलित हो जाएगा, और वह समय अब भी आएगा जब यह व्यतीत हो जाएगा। परमेश्वर का कार्य भी ऐसा ही हैः यह महान है, किन्तु एक समय आएगा जब यह समाप्त हो जाएगा; यह न तो सृष्टि के कार्य के बीच और न ही सलीब पर चढ़ाने के कार्य के बीच हमेशा बना रह सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सलीब पर चढ़ाने का कार्य कितना विश्वास दिलाने वाला था या शैतान को पराजित करने में यह कितना कारगर था, कार्य आख़िर कार्य ही है, और युग आख़िर युग ही हैं; कार्य हमेशा उसी नींव पर टिका नहीं रह सकता, न ही ऐसा हो सकता है कि समय कभी न बदले, क्योंकि सृष्टि थी और अंत के दिन भी अवश्य होंगे। यह अवश्यम्भावी है! इस प्रकार, आज नया नियम—प्रेरितों के धर्मपत्र और चार सुसमाचार—में जीवन के वचन ऐतिहासिक पुस्तकें बन गए हैं, वे पुराने पंचांग बन गए हैं, और पुराने पंचांग लोगों को नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? चाहे ये पंचांग लोगों को जीवन प्रदान करने में कितने भी समर्थ हों, वे सलीब तक लोगों की अगुवाई करने में कितने भी सक्षम हों, क्या वे पुराने नहीं हो गए हैं? क्या वे मूल्य से वंचित नहीं हैं? इसलिए, मैं कहता हूँ कि तुम्हें आँख बंद करके इन पंचांगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। ये अत्यधिक पुराने हैं, ये तुम्हें नए कार्य में नहीं पहुँचा सकते, ये केवल तुम्हारे ऊपर बोझ लाद सकते हैं। केवल यही नहीं कि ये तुम्हें नए कार्य में और नए प्रवेश में नहीं ले जा सकते, बल्कि ये तुम्हें पुरानी धार्मिक कलीसियाओं में ले जाते हैं—और यदि ऐसा हो, तो क्या तुम परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास में पीछे नहीं लौट रहे हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (4)' से उद्धृत

हो सकता है कि अब तुम जीवन प्राप्त करना चाहते हो या हो सकता है कि सत्य प्राप्त करना चाहते हो। बात जो भी हो लेकिन तुम परमेश्वर को खोजना चाहते हो, ऐसे परमेश्वर को खोजना चाहते हो जिस पर कि तुम भरोसा कर सको, और जो तुमको अनंत जीवन प्रदान कर सके। यदि तुम अनंत जीवन को प्राप्त करने की इच्छा करते हो, तो तुम्हें सबसे पहले अनंत जीवन के स्रोत को समझने की आवश्यकता है, और यह जानने की आवश्यकता है कि परमेश्वर कहाँ है। मैं पहले ही कह चुका हूँ कि केवल परमेश्वर अपरिवर्तनीय जीवन है, और केवल परमेश्वर ही जीवन का मार्ग धारण करता है। चूँकि उसका जीवन अपरिवर्तनीय है, इसलिए वह जीवन अनंत है; चूँकि केवल परमेश्वर ही जीवन का मार्ग है, इसलिए परमेश्वर स्वयं ही अनंत जीवन का मार्ग है। अत: सबसे पहले तुम्हें जानने की आवश्यकता है कि परमेश्वर कहाँ है, और अनंत जीवन के इस मार्ग को कैसे प्राप्त करना है। आओ, हम इन दोनों मामलों पर अलग-अलग संगति करें।

यदि तुम वास्तव में अनंत जीवन के मार्ग को प्राप्त करने की इच्छा रखते हो, और यदि तुम इसको खोजने के लिए भूखे हो, तो पहले इस प्रश्न का उत्तर दो : आज परमेश्वर कहाँ है? हो सकता है कि तुम कहो, "परमेश्वर स्वर्ग में रहता है, बिल्कुल—वह तुम्हारे घर में तो रहेगा नहीं, है न?" हो सकता है कि तुम कहो कि परमेश्वर ज़ाहिर तौर पर हर चीज़ में बसता है। या तुम कह सकते हो कि परमेश्वर प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में रहता है, या वह आत्मिक संसार में है। मैं इनमें से किसी से भी इन्कार नहीं करता हूँ, परन्तु मैं इस मामले को स्पष्ट करना चाहता हूँ। ऐसा कहना पूरी तरह से उचित नहीं है कि परमेश्वर मनुष्यों के हृदयों में रहता है, परन्तु यह पूरी तरह से गलत भी नहीं है। इसका कारण यह है कि परमेश्वर में विश्वासियों के मध्य, कुछ लोग ऐसे हैं जिनका विश्वास सत्य है और कुछ ऐसे हैं जिनका विश्वास गलत है, कुछ ऐसे हैं जिन्हें परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त है और कुछ ऐसे हैं जिन्हें परमेश्वर अस्वीकार करता है। कुछ ऐसे हैं जो उसको प्रसन्न करते हैं कुछ ऐसे हैं जिनसे वो उससे घृणा करता है, और कुछ ऐसे हैं जिन्हें वह पूर्ण बनाता है और कुछ ऐसे हैं जिन्हें वह मिटा देता है। इसलिए मैं कहता हूँ कि परमेश्वर कुछ ही लोगों के हृदयों में रहता है, और ये कुछ लोग निस्संदेह सच्चाई से परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, वे जिन्हें परमेश्वर अनुमोदन प्रदान करता है, जिनसे वह प्रसन्न है और जिन्हें वह पूर्ण बनाता है। ये वे लोग हैं जो परमेश्वर के द्वारा अगुवाई प्राप्त करते हैं। चूँकि ये परमेश्वर के द्वारा अगुवाई प्राप्त करते हैं, इसलिए ये वे लोग हैं जिन्होंने पहले से ही परमेश्वर के अनंत जीवन के मार्ग के बारे में सुन लिया है और उस मार्ग को देख लिया है। जिनका परमेश्वर पर विश्वास गलत है, जो परमेश्वर के द्वारा स्वीकृत नहीं हैं, जिनसे परमेश्वर घृणा करता है, जो परमेश्वर के द्वारा मिटा दिए जाते हैं—उनका परमेश्वर के द्वारा अस्वीकार किया जाना तय है, निश्चित है कि वे बिना जीवन के मार्ग के रहेंगे, और परमेश्वर कहाँ है इससे भी अनभिज्ञ रहेंगे। इसके विपरीत, जिनके हृदयों में परमेश्वर रहता है वे जानते हैं कि वह कहाँ है। ये ही वे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर ने अनंत जीवन का मार्ग प्रदान किया है, और ये ही परमेश्वर का अनुसरण करते हैं। अब, क्या तुम जानते हो कि परमेश्वर कहाँ है? परमेश्वर मनुष्यों के हृदय में भी है और मनुष्यों के साथ भी। वह न केवल आत्मिक संसार में है, और सभी चीज़ों के ऊपर है, बल्कि उससे ज़्यादा पृथ्वी पर उसका वास है जहां मनुष्य का अस्तित्व है। अत: अंत के दिनों के आगमन ने परमेश्वर के कार्य के चरणों को नये क्षेत्र में अग्रसर किया है। परमेश्वर ब्रह्माण्ड की सभी चीज़ों पर प्रभुता रखता है, और वह मनुष्यों के हृदयों में उनका मुख्य आधार है, और इसके अलावा, वह मनुष्यों के मध्य में रहता है। केवल इसी तरह से वह मानवजाति तक जीवन का मार्ग ला सकता है और मनुष्य को जीवन के मार्ग में लेकर आ सकता है। परमेश्वर धरती पर आकर मनुष्यों के बीच इसलिये रहता है ताकि मनुष्य जीवन का मार्ग प्राप्त कर सके और मनुष्य अस्तित्व में रहे। इसी के साथ-साथ, परमेश्वर ब्रह्माण्ड की सभी चीज़ों को आदेश देता है, ताकि वे मनुष्यों के मध्य में उसके प्रबंधकारणीय कार्य में सहयोग प्रदान करें। इसलिए, यदि तुम केवल इस सिद्धांत को मानते हो कि परमेश्वर स्वर्ग में है और मनुष्यों के हृदय में है, लेकिन मनुष्यों के मध्य परमेश्वर के अस्तित्व के सत्य को नहीं मानते, तो तुम कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते, न कभी सत्य का मार्ग प्राप्त करोगे।

परमेश्वर स्वयं ही जीवन है, सत्य है, और उसका जीवन और सत्य साथ-साथ अस्तित्व में रहते हैं। जो सत्य को प्राप्त करने में असफल रहते हैं वे कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते। बिना मार्गदर्शन, सहायता और सत्य के प्रावधान के तुम केवल शब्दों, सिद्धांतों और इन सबसे बढ़कर मृत्यु को ही प्राप्त करोगे। परमेश्वर का जीवन सतत विद्यमान है, और उसका सत्य और जीवन एक साथ अस्तित्व में रहते हैं। यदि तुम सत्य के स्रोत को नहीं खोज पाते, तो तुम जीवन के पोषण को प्राप्त नहीं कर पाओगे; यदि तुम जीवन के प्रावधान को प्राप्त नहीं कर सकते तो तुम्हारे पास निश्चय ही सत्य नहीं होगा, और इसलिए कल्पनाओं और धारणाओं के अलावा, तुम्हारे शरीर की संपूर्णता केवल देह ही होगी, तुम्हारी बदबूदार देह। जान लो कि किताबों की बातें जीवन नहीं मानी जाती हैं, इतिहास के लेखों को सत्य के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता, और अतीत के नियम, आज के समय में परमेश्वर के द्वारा कहे गए वचनों का लेखा-जोखा नहीं माने जा सकते। केवल वही जो परमेश्वर ने पृथ्वी पर आकर और लोगों के बीच रहकर अभिव्यक्त किया है, सत्य, जीवन, परमेश्वर की इच्छा और उसका कार्य करने का वर्तमान तरीका है। यदि तुम अतीत के युगों में परमेश्वर के द्वारा कहे गए वचनों को आज के संदर्भ में लागू करते हो, तो तुम एक पुरातत्ववेत्ता हो, और तुम्हें सबसे बेहतर ढंग से चित्रित करने के लिए ऐतिहासिक विरासत का विशेषज्ञ कहा जा सकता है, क्योंकि तुम हमेशा उन कार्यों के निशानों पर विश्वास करते हो जो परमेश्वर ने अतीत में किए हैं, केवल परमेश्वर की उस छाया पर विश्वास करते हो जो अतीत में परमेश्वर के लोगों के बीच रह कर कार्य करने से बनी है। तुम केवल उसी मार्ग पर विश्वास करते हो जो परमेश्वर ने पुराने समय में अपने अनुयायियों को दिया था। तुम आज के समय में परमेश्वर के कार्य के मार्गदर्शन पर विश्वास नहीं करते, आज परमेश्वर के महिमामय मुखाकृति में विश्वास नहीं करते, और परमेश्वर के द्वारा आज के समय में व्यक्त किये गये सत्य के मार्ग पर विश्वास नहीं करते। अत: तुम निश्चित रूप से एक ऐसे दिवास्वप्न दर्शी हो जो वास्तविकता से कोसों दूर है। यदि तुम अभी भी उन वचनों से चिपके रहोगे जो मनुष्य को जीवन प्रदान करने में असमर्थ हैं, तो तुम एक निर्जीव काष्ठ[क] के बेकार टुकड़े के समान हो, क्योंकि तुम बहुत ही रूढ़िवादी, असभ्य हो, विवेकबुद्धि का इस्तेमाल करने में अक्षम हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है' से उद्धृत

अंत के दिनों का मसीह जीवन लेकर आता है, और सत्य का स्थायी एवं अनंत मार्ग प्रदान करता है। ये सत्य वो मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य जीवन को प्राप्त करेगा, और एकमात्र इसी मार्ग से मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करेगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह के द्वारा प्रदान किए गए जीवन के मार्ग को नहीं खोजते हो, तो तुम कभी भी यीशु के अनुमोदन को प्राप्त नहीं कर पाओगे और कभी भी स्वर्ग के राज्य के फाटक में प्रवेश करने के योग्य नहीं बन पाओगे क्योंकि तुम इतिहास के कठपुतली और कैदी दोनों हो। जो लोग नियमों, शाब्दिक अर्थों के नियंत्रण में हैं और इतिहास की ज़ंजीरों में जकड़े हुए हैं वे कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते हैं, और कभी भी सतत जीवन के मार्ग को प्राप्त करने के योग्य नहीं बन सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन जल की अपेक्षा, उनके पास मैला पानी है जिससे हज़ारों सालों से लोग चिपके हुए हैं। जिनके पास जीवन का जल नहीं है वे हमेशा के लिए एक लाश, शैतान के खेलने की वस्तु और नरक की संतान बने रहेंगे। फिर वे परमेश्वर को कैसे देख सकते हैं? यदि तुम केवल अतीत को पकड़े रहने की कोशिश करोगे, केवल शांत ठहर कर चीज़ों को वैसा ही बनाए रखने की कोशिश में लगे रहोगे जैसी वे हैं, और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को तिलांजलि देने की कोशिश नहीं करोगे, तो क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरोध में नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के चरण बहुत ही विशाल और सामर्थी हैं, जैसे कि हिलोरे मारती हुई लहरें और गरजता हुआ तूफान—फिर भी तुम निष्क्रियता से बैठकर विनाश का इंतजार करते हो, अपनी ही मूर्खता से चिपके रहते हो और कुछ भी नहीं करते। इस प्रकार से, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला कैसे माना जा सकता है? और तुम जिस परमेश्वर को थामे हो उसे उस परमेश्वर के रूप में न्यायोचित कैसे ठहरा सकते हो जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के वचन तुम्हें नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के चरणों को ढूँढ़ने में तुम्हारी अगुवाई कैसे कर सकते हैं? वे तुम्हें कैसे स्वर्ग लेकर जायेंगे? तुम्हारे हाथों में शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना ही दे सकते हैं, वह सत्य नहीं दे सकते जो जीवन देने में सक्षम हैं। जो शास्त्र तुम पढ़ते हो वे तुम्हारी जिह्वा को सम्पन्न बना सकते हैं लेकिन ये वे विवेकपूर्ण वचन नहीं हैं जो तुम्हें मानव जीवन का बोध करने में मदद कर सकते हैं, ये वो मार्ग तो बिल्कुल ही नहीं हैं जो तुम्हें पूर्णता की ओर ले जायें। क्या यह भिन्नता तुम्हें विचार-मंथन का कारण नहीं देती? क्या यह तुम्हें अपने भीतर समाहित रहस्यों को समझने नहीं देता है? क्या तुम अपने आप को परमेश्वर से मिलने के लिए स्वर्ग में ले जाने के लिए खुद ही योग्य हो? परमेश्वर के आये बिना, क्या तुम अपने आप को परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनन्द मनाने के लिए स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? मैं तुम्हें सुझाव देता हूँ, कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो, और उसकी ओर देखो जो अभी कार्य कर रहा है, उसकी ओर देखो जो अब अंत के दिनों में मनुष्यों को बचाने का कार्य कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते हो, तो तुम कभी भी सत्य को नहीं प्राप्त कर सकते, न कभी जीवन प्राप्त कर सकते हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है' से उद्धृत

फुटनोट :

क. निर्जीव काष्ठ का टुकड़ा : एक चीनी मुहावरा, जिसका अर्थ है—"सहायता से परे"।

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