1. सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के माध्यम से, मेरे लिए यह निश्चित हो गया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी है, और मैं अब अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करता हूँ। लेकिन हाल ही में मेरे परिवार में कुछ नाराज़गी भरी और परेशान करने वाली बातें हुई हैं। ऐसी बातें क्यों होती हैं, और मुझे उनके साथ कैसे पेश आना चाहिए?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8)

“उस तिहाई को मैं आग में डालकर ऐसा निर्मल करूँगा, जैसा रूपा निर्मल किया जाता है, और ऐसा जाँचूँगा जैसा सोना जाँचा जाता है। वे मुझ से प्रार्थना किया करेंगे, और मैं उनकी सुनूँगा। मैं उनके विषय में कहूँगा, ‘ये मेरी प्रजा हैं,’ और वे मेरे विषय में कहेंगे, ‘यहोवा हमारा परमेश्वर है’” (जकर्याह 13:9)

“यहोवा ने शैतान से पूछा, ‘क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।’ शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, ‘क्या अय्यूब परमेश्वर का भय बिना लाभ के मानता है? क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।’ यहोवा ने शैतान से कहा, ‘सुन, जो कुछ उसका है, वह सब तेरे हाथ में है; केवल उसके शरीर पर हाथ न लगाना।’ तब शैतान यहोवा के सामने से चला गया” (अय्यूब 1:8-12)

“तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुँड़ाकर भूमि पर गिरा और दण्डवत् करके कहा, ‘मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है’” (अय्यूब 1:20-21)

“तब उसकी स्त्री उससे कहने लगी, ‘क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा।’ उसने उससे कहा, ‘तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दुःख न लें?’ इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुँह से कोई पाप नहीं किया” (अय्यूब 2:9-10)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

जब परमेश्वर कार्य करता है, किसी की देखभाल करता है, उसकी जाँच-पड़ताल करता है और जब वह उस व्यक्ति पर अनुग्रह करता और उसे स्वीकृति देता है, तब शैतान करीब से उसका पीछा करता है, उस व्यक्ति को गुमराह करने और गंभीरता से नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता है। अगर परमेश्वर इस व्यक्ति को पाना चाहता है, तो शैतान परमेश्वर को रोकने के लिए अपने सामर्थ्य में सब-कुछ करता है, वह परमेश्वर के कार्य को प्रलोभित करने, उसमें विघ्न डालने और उसे खराब करने के लिए विभिन्न दुष्ट हथकंडों का इस्तेमाल करता है, ताकि वह अपना छिपा हुआ उद्देश्य हासिल कर सके। क्या है वह उद्देश्य? वह नहीं चाहता कि परमेश्वर किसी भी मनुष्य को प्राप्त कर सके; परमेश्वर जिन्हें पाना चाहता है, वह उन पर कब्जा कर लेना चाहता है, वह उन पर नियंत्रण करना, उनको अपने अधिकार में लेना चाहता है, ताकि वे उसकी आराधना करें, ताकि वे बुरे कार्य करने और परमेश्वर का प्रतिरोध करने में उसका साथ दें। क्या यह शैतान का भयानक उद्देश्य नहीं है? तुम लोग अकसर कहते हो कि शैतान कितना दुष्ट, कितना खराब है, परंतु क्या तुमने उसे देखा है? तुम यह देख सकते हो कि मनुष्य जाति कितनी बुरी है; तुमने यह नहीं देखा है कि असल शैतान कितना बुरा है। पर अय्यूब के मामले में, तुम स्पष्ट रूप से देखा है कि शैतान कितना दुष्ट है। इस मामले ने शैतान के भयंकर चेहरे और उसके सार को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। परमेश्वर के साथ युद्ध करने और उसके पीछे-पीछे चलने में शैतान का उद्देश्य उस समस्त कार्य को नष्ट करना है, जिसे परमेश्वर करना चाहता है; उन लोगों पर कब्ज़ा और नियंत्रण करना है, जिन्हें परमेश्वर प्राप्त करना चाहता है; उन लोगों को पूरी तरह से मिटा देना है, जिन्हें परमेश्वर प्राप्त करना चाहता है। यदि वे मिटाए नहीं जाते, तो वे शैतान द्वारा इस्तेमाल किए जाने के लिए उसके कब्ज़े में आ जाते हैं—यह उसका उद्देश्य है।

—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV

परमेश्वर द्वारा मनुष्य पर किए जाने वाले कार्य का हर कदम बाहर से यह लोगों के मध्य अंतःक्रिया प्रतीत होता है, मानो यह मानव-व्यवस्थाओं द्वारा या मानवीय विघ्न से उत्पन्न हुआ हो। किंतु, कार्य के प्रत्येक कदम, और घटित होने वाली हर चीज के पीछे शैतान द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाजी है और इनमें अपेक्षित है कि लोग परमेश्वर के लिए अपनी गवाही में अडिग बने रहें। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब का परीक्षण हुआ : पर्दे के पीछे शैतान परमेश्वर के साथ शर्त लगा रहा था और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कर्म थे और मनुष्यों के विघ्न थे। परमेश्वर द्वारा तुम लोगों पर किए गए कार्य के हर कदम के पीछे शैतान की परमेश्वर के साथ बाजी होती है—इसके पीछे एक लड़ाई होती है। ... जब परमेश्वर और शैतान आध्यात्मिक क्षेत्र में लड़ाई करते हैं, तो तुम्हें परमेश्वर को कैसे संतुष्ट करना चाहिए और किस प्रकार उसकी गवाही में अडिग रहना चाहिए? तुम्हें यह पता होना चाहिए कि जो कुछ भी तुम्हारे साथ होता है, वह एक महान परीक्षण है और वह समय है जब परमेश्वर को तुम्हारी गवाही की आवश्यकता है। हालाँकि ये बाहर से महत्त्वहीन लग सकती हैं, किंतु जब ये चीजें होती हैं तो ये दर्शाती हैं कि तुम परमेश्वर से प्रेम करते हो या नहीं। यदि तुम करते हो, तो तुम उसके लिए गवाही देने में अडिग रह पाओगे, और यदि तुम उसके प्रति प्रेम को अभ्यास में नहीं लाए हो, तो यह दर्शाता है कि तुम वह व्यक्ति नहीं हो जो सत्य को अभ्यास में लाता है, तुम सत्य से रहित हो, और जीवन से रहित हो, तुम भूसा हो! लोगों के साथ होने वाली हर बात में परमेश्वर चाहता है कि लोग उसके लिए अपनी गवाही में अडिग रहें। भले ही इस क्षण में तुम्हारे साथ कुछ बड़ा घटित न हो रहा हो, और तुम बड़ी गवाही नहीं देते, किंतु तुम्हारे जीवन का प्रत्येक विवरण परमेश्वर के लिए गवाही से जुड़ा है। यदि तुम अपने भाइयों और बहनों, अपने परिवार के सदस्यों और अपने आसपास के सभी लोगों की प्रशंसा प्राप्त कर सकते हो; यदि किसी दिन अविश्वासी आएँ और जो कुछ तुम करते हो उसकी तारीफ करें, और देखें कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह अद्भुत है, तो तुमने गवाही दे दी होगी। यद्यपि तुम्हारे पास कोई अंतर्दृष्टि नहीं है और तुम्हारी क्षमता कमज़ोर है, फिर भी परमेश्वर द्वारा तुम्हारी पूर्णता के माध्यम से तुम उसे संतुष्ट करने और उसके इरादों के प्रति विचारशील होने में समर्थ हो जाते हो और दूसरों को दर्शाते हो कि सबसे कमज़ोर क्षमता के लोगों में उसने कितना महान कार्य किया है। जब लोग परमेश्वर को जान जाते हैं और शैतान के सामने विजेता और परमेश्वर के प्रति अत्यधिक वफादार बन जाते हैं, तब किसी में इस समूह के लोगों से अधिक आधार नहीं होता, और यही सबसे बड़ी गवाही है। यद्यपि तुम महान कार्य करने में अक्षम हो, लेकिन तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने में सक्षम हो। अन्य लोग अपनी धारणाओं को एक ओर नहीं रख सकते, लेकिन तुम रख सकते हो; अन्य लोग अपने वास्तविक अनुभवों के दौरान परमेश्वर की गवाही नहीं दे सकते, लेकिन तुम परमेश्वर के प्रेम को चुकाने और उसके लिए ज़बर्दस्त गवाही देने के लिए अपनी वास्तविक कद-काठी और कार्यकलापों का उपयोग कर सकते हो। केवल इसी को परमेश्वर से वास्तव में प्रेम करना माना जाता है। यदि तुम इसमें अक्षम हो, तो तुम अपने परिवार के सदस्यों के बीच, अपने भाइयों और बहनों के बीच, या संसार के अन्य लोगों के सामने गवाही नहीं देते। यदि तुम शैतान के सामने गवाही नहीं दे सकते, तो शैतान तुम पर हँसेगा, वह तुम्हें एक मजाक के रूप में, एक खिलौने के रूप में लेगा, वह बार-बार तुम्हें मूर्ख बनाएगा, और तुम्हें विक्षिप्त कर देगा। भविष्य में तुम पर बड़े परीक्षण आ सकते हैं—किंतु आज यदि तुम परमेश्वर को सच्चे हृदय से प्रेम करते हो, और चाहे आगे कितनी भी बड़ी परीक्षाएँ हों, चाहे तुम्हारे साथ कुछ भी होता जाए, तुम अपनी गवाही में अडिग रहते हो, और परमेश्वर को संतुष्ट कर पाते हो, तब तुम्हारे हृदय को सांत्वना मिलेगी, और भविष्य में चाहे कितने भी बड़े परीक्षण क्यों न आएँ, तुम निर्भय रहोगे। तुम लोग नहीं देख सकते कि भविष्य में क्या होगा; तुम लोग केवल आज की परिस्थितियों में ही परमेश्वर को संतुष्ट कर सकते हो। तुम लोग कोई भी महान कार्य करने में अक्षम हो—तुम्हें वास्तविक जीवन में परमेश्वर के वचन अनुभव करके उसे संतुष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और एक तुम्हें एक जोरदार और गुंजायमान गवाही देनी चाहिए और इस प्रकार शैतान के लिए शर्मिंदगी लानी चाहिए। यद्यपि तुम्हारी देह असंतुष्ट रहेगी और उसने पीड़ा भुगती होगी, लेकिन तुमने परमेश्वर को संतुष्ट कर दिया होगा और तुम शैतान के लिए शर्मिंदगी लाए होगे। यदि तुम हमेशा इस तरह से अभ्यास करते हो, तो परमेश्वर तुम्हारे सामने एक मार्ग खोल देगा। किसी दिन जब कोई बड़ा परीक्षण आएगा, तो अन्य लोग गिर जाएँगे, लेकिन तुम तब भी अडिग रहने में समर्थ होगे : तुमने जो क़ीमत चुकाई है, उसकी वजह से परमेश्वर तुम्हारी रक्षा करेगा, ताकि तुम अडिग रह सको और गिरो नहीं। यदि, साधारणतया, तुम सत्य को अभ्यास में लाने और एक सच्चे परमेश्वर-प्रेमी हृदय से परमेश्वर को संतुष्ट करने में समर्थ हो, तो परमेश्वर भविष्य के परीक्षणों के दौरान निश्चित रूप से तुम्हारी सुरक्षा करेगा। यद्यपि तुम मूर्ख, छोटे आध्यात्मिक कद और खराब काबिलियत वाले हो, तब भी परमेश्वर तुम्हारे खिलाफ पूर्वाग्रहपूर्ण नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या तुम्हारी मंशाएँ सही हैं। मान लो कि आज, तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने में समर्थ हो, तुम छोटे-छोटे ब्योरों का ध्यान रखते हो और तुम सभी चीजों में परमेश्वर को संतुष्ट करते हो—तुम्हारे पास सच्चा परमेश्वर-प्रेमी हृदय है, तुम अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को देते हो और यद्यपि कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें तुम साफ-साफ देख नहीं सकते, लेकिन तुम अपनी मंशाओं को सुधारने और परमेश्वर के इरादों को खोजने के लिए परमेश्वर के सामने आ सकते हो और तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए सब-कुछ करते हो। और यूँ तो हो सकता है कि तुम्हारे भाई-बहन तुम्हारा परित्याग कर दें, किंतु तुम्हारा हृदय परमेश्वर को संतुष्ट कर रहा है, और तुम देह के सुखों के लिए ललचा नहीं रहे हो। यदि तुम हमेशा इस तरह से अभ्यास करते हो, तो जब तुम्हारे ऊपर बड़े परीक्षण आएँगे तुम्हारी रक्षा की जाएगी।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल परमेश्वर से प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है

अगर तुम पर ऐसी कई चीजें आ पड़ती हैं, जो तुम्हारी धारणाओं के अनुरूप नहीं होतीं, परंतु फिर भी तुम उन्हें एक तरफ रखने और इन चीजों से परमेश्वर के क्रियाकलापों का ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ होते हो, और अगर शोधनों के बीच तुम अपना परमेश्वर-प्रेमी हृदय प्रकट करते हो, तो यह अपनी गवाही में अडिग रहना है। अगर तुम्हारे घर में शांति है, तुम देह-सुख का आनंद लेते हो, कोई तुम्हारा उत्पीड़न नहीं करता, और कलीसिया में तुम्हारे भाई-बहन तुम्हारा आज्ञापालन करते हैं, तो क्या तुम अपना परमेश्वर-प्रेमी हृदय प्रदर्शित कर सकते हो? क्या यह स्थिति तुम्हारा शोधन कर सकती है? केवल शोधन के माध्यम से ही तुम्हारा परमेश्वर-प्रेमी हृदय दर्शाया जा सकता है, और केवल अपनी धारणाओं के विपरीत घटित होने वाली चीजों के माध्यम से ही तुम पूर्ण बनाए जा सकते हो। कई नकारात्मक और विपरीत चीजों की सेवा और शैतान की तमाम तरह की अभिव्यक्तियों—उसके कामों, उसके आरोपों, उसकी बाधाओं और गुमराह करने के माध्यम से—परमेश्वर तुम्हें शैतान का भयानक चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाता है और इस प्रकार शैतान को पहचानने की तुम्हारी क्षमता को पूर्ण बनाता है, ताकि तुम शैतान से नफरत करो और उसके खिलाफ विद्रोह करो।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जिन्हें पूर्ण बनाया जाना है उन्हें शोधन से गुजरना होगा

वह सब जो परमेश्वर करता है आवश्यक है और असाधारण महत्व रखता है, क्योंकि वह मनुष्य में जो कुछ करता है उसका सरोकार उसके प्रबंधन और मनुष्यजाति के उद्धार से है। स्वाभाविक रूप से, परमेश्वर ने अय्यूब में जो कार्य किया वह भी कोई भिन्न नहीं है, फिर भले ही परमेश्वर की नजरों में अय्यूब पूर्ण और खरा था। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर चाहे जो करता हो या वह जो करता है उसे चाहे जिन उपायों से करता हो, क़ीमत चाहे जो हो, उसका ध्येय चाहे जो हो, किंतु उसके कार्यकलापों का उद्देश्य नहीं बदलता है। उसका उद्देश्य है मनुष्य में परमेश्वर के वचनों, और साथ ही मनुष्य से परमेश्वर की अपेक्षाओं और उसके प्रति परमेश्वर के इरादों को आकार देना; दूसरे शब्दों में, यह मनुष्य के भीतर उस सबको आकार देना है जिसे परमेश्वर अपने सोपानों के अनुसार सकारात्मक मानता है, जो मनुष्य को परमेश्वर का हृदय समझने और परमेश्वर का सार बूझने में समर्थ बनाता है, और मनुष्य को परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने देता है, इस प्रकार मनुष्य को परमेश्वर का भय मानना और बुराई से दूर रहना प्राप्त करने देता है—यह सब परमेश्वर जो करता है उसमें निहित उसके उद्देश्य का एक पहलू है। दूसरा पहलू यह है कि चूँकि शैतान परमेश्वर के कार्य में विषमता और सेवा की वस्तु है, इसलिए मनुष्य प्रायः शैतान को दिया जाता है; यह वह साधन है जिसका उपयोग परमेश्वर लोगों को शैतान के प्रलोभनों और हमलों में शैतान की दुष्टता, कुरूपता और घृणास्पदता को देखने देने के लिए करता है, इस प्रकार लोगों में शैतान के प्रति घृणा उपजाता है और उन्हें वह जानने और पहचानने में समर्थ बनाता जो नकारात्मक है। यह प्रक्रिया उन्हें शैतान के नियंत्रण से और आरोपों, विघ्नों और हमलों से धीरे-धीरे स्वयं को स्वतंत्र करने देती है—जब तक कि परमेश्वर के वचनों, परमेश्वर के प्रति अपने ज्ञान और समर्पण, और परमेश्वर के प्रति अपनी आस्था और परमेश्वर का भय मानने की बदौलत वे शैतान के हमलों और आरोपों पर विजय नहीं पा लेते हैं; केवल तभी वे शैतान की सत्ता से पूर्णतः मुक्त कर दिए गए होंगे। लोगों की मुक्ति का अर्थ है कि शैतान को हरा दिया गया है; इसका अर्थ है कि वे अब और शैतान के मुँह का भोजन नहीं हैं—उन्हें निगलने के बजाय, शैतान ने उन्हें छोड़ दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसे लोग खरे हैं, क्योंकि उनमें परमेश्वर के प्रति आस्था, समर्पण और भय है, और क्योंकि उन्होंने शैतान के साथ पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। वे शैतान को लज्जित करते हैं, वे शैतान को कायर बना देते हैं, और वे शैतान को पूरी तरह हरा देते हैं। परमेश्वर का अनुसरण करने में उनकी आस्था, और परमेश्वर के प्रति समर्पण और उसका भय शैतान को हरा देता है, और उन्हें पूरी तरह छोड़ देने के लिए शैतान को विवश कर देता है। केवल इस जैसे लोग ही परमेश्वर द्वारा सच में प्राप्त किए गए हैं, और यही मनुष्य को बचाने में परमेश्वर का चरम उद्देश्य है। यदि वे बचाए जाना चाहते हैं, और परमेश्वर द्वारा पूरी तरह प्राप्त किए जाना चाहते हैं, तो उन सभी को जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं शैतान के बड़े और छोटे दोनों प्रलोभनों और हमलों का सामना करना ही चाहिए। जो लोग इन प्रलोभनों और हमलों से उभरकर निकलते हैं और शैतान को पूरी तरह परास्त कर पाते हैं ये वे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर द्वारा बचा लिया गया है। कहने का तात्पर्य यह, वे लोग जिन्हें परमेश्वर पर्यंत बचा लिया गया है ये वे लोग हैं जो परमेश्वर की परीक्षाओं से गुजर चुके हैं, और अनगिनत बार शैतान द्वारा लुभाए और हमला किए जा चुके हैं। वे जिन्हें परमेश्वर द्वारा बचा लिया गया है परमेश्वर के इरादों और अपेक्षाओं को समझते हैं, और परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण कर पाते हैं, और वे शैतान के प्रलोभनों के बीच परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। वे जिन्हें परमेश्वर पर्यंत बचा लिया गया है वे ईमानदारी से युक्त हैं, वे उदार हृदय हैं, वे प्रेम और घृणा के बीच अंतर करते हैं, उनमें न्याय की समझ है और वे तर्कसंगत हैं, और वे परमेश्वर के प्रति विचारशीलता दिखा पाते और वह सब जो परमेश्वर का है सँजोकर रख पाते हैं। ऐसे लोग शैतान की बाध्यता, जासूसी, दोषारोपण या दुर्व्यवहार के अधीन नहीं होते हैं, वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं, उन्हें पूरी तरह मुक्त और रिहा कर दिया गया है। अय्यूब बिल्कुल ऐसा ही स्वतंत्र मनुष्य था, और ठीक यही परमेश्वर द्वारा उसे शैतान को सौंपे जाने का महत्व था।

—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II

मनुष्य के चिरकालिक भरण-पोषण और सहारे के अपने कार्य के दौरान, परमेश्वर अपने इरादे और अपनी अपेक्षाएँ मनुष्य को संपूर्णता में बताता है, और मनुष्य को अपने कर्म, स्वभाव, और वह जो है और उसके पास जो है दिखाता है। उद्देश्य है मनुष्य को कद-काठी से सुसज्जित करना, और मनुष्य को परमेश्वर का अनुसरण करते हुए उससे विभिन्न सत्य प्राप्त करने देना—सत्य जो मनुष्य को परमेश्वर द्वारा शैतान से लड़ने के लिए दिए गए हथियार हैं। इस प्रकार सुसज्जित, मनुष्य को परमेश्वर की परीक्षाओं का सामना करना ही चाहिए। परमेश्वर के पास मनुष्य की परीक्षा लेने के लिए कई साधन और मार्ग हैं, किंतु उनमें से प्रत्येक को परमेश्वर के शत्रु, शैतान, के “सहयोग” की आवश्यकता होती है। कहने का तात्पर्य यह, शैतान से युद्ध करने के लिए मनुष्य को हथियार देने के बाद, परमेश्वर मनुष्य को शैतान को सौंप देता है और शैतान को मनुष्य की कद-काठी की “परीक्षा” लेने देता है। यदि मनुष्य शैतान की व्यूह रचनाओं को तोड़कर बाहर निकल सकता है, यदि वह शैतान की घेराबंदी से बचकर निकल सकता है और तब भी जीवित रह सकता है, तो मनुष्य ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली होगी। परंतु यदि मनुष्य शैतान की व्यूह रचनाओं से छूटने में विफल हो जाता है, और शैतान के आगे झुक जाता है, तो उसने परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की होगी। परमेश्वर मनुष्य के जिस किसी भी पहलू की जाँच करता है, उसकी कसौटी यही होती है कि मनुष्य शैतान द्वारा आक्रमण किए जाने पर अपनी गवाही पर डटा रहता है या नहीं, और उसने शैतान द्वारा फुसलाए जाने पर परमेश्वर को त्याग दिया है या नहीं और शैतान के आगे हार मानकर आत्मसमर्पण कर लिया है या नहीं। कहा जा सकता है कि मनुष्य को बचाया जा सकता है या नहीं यह इस पर निर्भर करता है कि वह शैतान को परास्त करके उस पर विजय प्राप्त कर सकता है या नहीं, और वह स्वतंत्रता प्राप्त कर सकता है या नहीं यह इस पर निर्भर करता है कि वह शैतान की दासता पर विजय पाने के लिए परमेश्वर द्वारा उसे दिए गए हथियार, अपने दम पर, उठा सकता है या नहीं, शैतान को पूरी तरह आस तजकर उसे अकेला छोड़ देने के लिए विवश कर पाता है या नहीं। यदि शैतान आस तजकर किसी को छोड़ देता है, तो इसका अर्थ है कि शैतान फिर कभी इस व्यक्ति को परमेश्वर से लेने की कोशिश नहीं करेगा, फिर कभी इस व्यक्ति पर दोषारोपण और उसे परेशान नहीं करेगा, फिर कभी उन्हें निर्दयतापूर्वक यातना नहीं देगा या आक्रमण नहीं करेगा; केवल इस जैसे किसी व्यक्ति को ही परमेश्वर द्वारा सचमुच प्राप्त किया गया होगा। यही वह संपूर्ण प्रक्रिया है जिसके द्वारा परमेश्वर लोगों को प्राप्त करता है।

—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II

पिछला: 9. आप गवाही देते हैं कि “चमकती पूर्वी बिजली” अंतिम दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, की उपस्थिति और कार्य है, लेकिन मैंने बाईडू और विकिपीडिया जैसी प्रसिद्ध वेबसाइटों पर कई लेख पढ़े हैं, जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की निंदा करते, उस पर हमला करते, और उसका अपमान करते हैं। मुझे पता है कि बाईडू पर दी गई जानकारी सीसीपी की निगरानी और उसके नियंत्रण में होती है, और यह ज़रूरी नहीं है कि यह विश्वसनीय हो। लेकिन विकिपीडिया जैसी विदेशी वेबसाइटों ने भी आपकी निंदा करने में सीसीपी और धार्मिक दुनिया का अनुसरण किया है। मैं इसे सुलझा नहीं सकता—इन वेबसाइटों पर दिए गए बयान सही हैं या गलत?

अगला: 2. हाल ही में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कुछ वचनों को पढ़ने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के बाद, मैंने अपनी भावना में काफी प्रदत्त और शिक्षित महसूस किया है। प्रभु की उपासना करने के वर्षों में मैंने समझा था, उससे कहीं अधिक मैं अब समझता हूँ, इसलिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी होनी ही चाहिए। लेकिन जब से मेरे पादरी को पता चला कि मैं अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य में रुचि ले रहा हूँ, वह मुझे रोकने के लिए हर कोशिश करता रहा है। वह हर दिन मुझे इसके बारे में परेशान करता है। यहाँ तक कि उसने मेरे परिवार को भी मुझ पर नज़र रखने के लिए, और मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने या चर्च के उपदेशों को सुनने की अनुमति न देने के लिए, कहा है। मुझे अंदर ही अंदर आहत महसूस होता है। मुझे इन चीजों का अनुभव कैसे करना चाहिए?

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

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5. पुराने और नए दोनों नियमों के युगों में, परमेश्वर ने इस्राएल में काम किया। प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की कि वह अंतिम दिनों के दौरान लौटेगा, इसलिए जब भी वह लौटता है, तो उसे इस्राएल में आना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु पहले ही लौट चुका है, कि वह देह में प्रकट हुआ है और चीन में अपना कार्य कर रहा है। चीन एक नास्तिक राजनीतिक दल द्वारा शासित राष्ट्र है। किसी भी (अन्य) देश में परमेश्वर के प्रति इससे अधिक विरोध और ईसाइयों का इससे अधिक उत्पीड़न नहीं है। परमेश्वर की वापसी चीन में कैसे हो सकती है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है..., सेनाओं के यहोवा का यही वचन है” (मलाकी...

प्रश्न: प्रभु यीशु कहते हैं: "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं" (यूहन्ना 10:27)। तब समझ आया कि प्रभु अपनी भेड़ों को बुलाने के लिए वचन बोलने को लौटते हैं। प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात है, प्रभु की वाणी सुनने की कोशिश करना। लेकिन अब, सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि हमें नहीं पता कि प्रभु की वाणी कैसे सुनें। हम परमेश्वर की वाणी और मनुष्य की आवाज़ के बीच भी अंतर नहीं कर पाते हैं। कृपया हमें बताइये कि हम प्रभु की वाणी की पक्की पहचान कैसे करें।

उत्तर: हम परमेश्वर की वाणी कैसे सुनते हैं? हममें कितने भी गुण हों, हमें कितना भी अनुभव हो, उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। प्रभु यीशु में विश्वास...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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