2. हाल ही में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कुछ वचनों को पढ़ने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों और बहनों की सहभागिता तथा गवाहियों को सुनने के बाद, मैंने अपनी भावना में काफी प्रदत्त और शिक्षित महसूस किया है। प्रभु की उपासना करने के वर्षों में मैंने समझा था, उससे कहीं अधिक मैं अब समझता हूँ, इसलिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी होनी ही चाहिए। लेकिन जब से मेरे पादरी को पता चला कि मैं अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य में रुचि ले रहा हूँ, वह मुझे रोकने के लिए हर कोशिश करता रहा है। वह हर दिन मुझे इसके बारे में परेशान करता है। यहाँ तक कि उसने मेरे परिवार को भी मुझ पर नज़र रखने के लिए, और मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने या चर्च के उपदेशों को सुनने की अनुमति न देने के लिए, कहा है। मुझे अंदर ही अंदर आहत महसूस होता है। मुझे इन चीजों का अनुभव कैसे करना चाहिए?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद :
“हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो” (मत्ती 23:13)।
“हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो” (मत्ती 23:15)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :
ऐसे भी लोग हैं, जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में बाइबल पढ़ते हैं और दिन भर उसके अंशों का पाठ करते रहते हैं, फिर भी उनमें से एक भी व्यक्ति परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य नहीं समझता, न ही उनमें से कोई ऐसा होता है जो परमेश्वर को जान सकता है—उनमें से किसी के परमेश्वर के इरादों के अनुरूप चलने वाला होने की तो बात ही छोड़ दो। वे सब बेकार, नीच लोग होते हैं, जो "परमेश्वर" को उपदेश देने के लिए ऊँचे स्थानों पर खड़े होते हैं। वे ऐसे लोग हैं, जो परमेश्वर के बैनर तले काम करते हैं, फिर भी जानबूझकर परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं, जो परमेश्वर में विश्वास करने का लेबल लगाते हैं, लेकिन मनुष्य का मांस खाते और उनका रक्त पीते हैं। ऐसे तमाम लोग दुष्ट दानव हैं जो मनुष्यों की आत्माएँ निगल जाते हैं, वे प्रधान राक्षस हैं जो जानबूझकर लोगों को सही मार्ग पर चलने से बाधित करते हैं और वे ऐसी अड़चनें हैं जो लोगों को परमेश्वर की खोज करने से रोकती हैं। वे देखने में भले ही "शारीरिक रूप से हृष्ट-पुष्ट" लगते हों, लेकिन उनके अनुयायियों को यह कैसे पता चलेगा कि वे मसीह-विरोधी हैं जो लोगों को परमेश्वर का प्रतिरोध करने की ओर ले जाते हैं? उनके अनुयायियों को यह कैसे पता चलेगा कि वे ऐसे जीवित दानव हैं जो मनुष्यों की आत्माएँ निगल जाने के लिए समर्पित हैं? जो लोग परमेश्वर की उपस्थिति में खुद को कुलीन समझते हैं, वे वास्तव में सबसे नीच हैं, जबकि जो लोग खुद को नीचा समझते हैं, वे सबसे कुलीन हैं। और जो लोग यह मान बैठते हैं कि वे परमेश्वर के कार्य को जानते हैं और जो परमेश्वर पर अपनी नजरें जमाए हुए, बिना किसी रोक-टोक के दूसरों के सामने उसके कार्य की घोषणा कर सकते हैं, वे सबसे ज्यादा अज्ञानी हैं। ऐसे लोगों के पास परमेश्वर की कोई गवाही नहीं होती और वे सब अहंकारी और घमंडी होते हैं। जो लोग यह मानते हैं कि वे परमेश्वर के बारे में बहुत कम जानते हैं लेकिन वास्तव में जिनके पास परमेश्वर का व्यावहारिक अनुभव और व्यावहारिक ज्ञान होता है, वे ही परमेश्वर को सबसे ज्यादा प्रिय होते हैं। सिर्फ ऐसे लोगों के पास ही सच्ची गवाही होती है और सिर्फ ऐसे लोग ही वास्तव में परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जाने में सक्षम होते हैं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते, वे सभी परमेश्वर का प्रतिरोध करने वाले लोग हैं
क्या तुम लोग इसकी जड़ जानना चाहते हो कि फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया? क्या तुम लोग फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे भी ज़्यादा, उन्होंने केवल इस पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, फिर भी जीवन सत्य का अनुसरण नहीं किया। इसलिए वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि उन्हें जीवन के मार्ग का कोई ज्ञान नहीं है, और वे नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है। तुम्हीं लोग बताओ ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर का आशीष कैसे प्राप्त कर सकते हैं? क्या वे मसीहा को देख सकते हैं? उन्होंने यीशु का विरोध किया क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु द्वारा बताए गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे और इससे भी अधिक इसलिए क्योंकि वे मसीहा को नहीं समझते थे। और चूँकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था और कभी मसीहा के साथ नहीं जुड़े थे, उन्होंने मसीहा के बस नाम के साथ चिपके रहने की ग़लती की, जबकि हर मुमकिन ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का आज्ञापालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत था : इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता, तुम मसीह नहीं हो। क्या यह सोच हास्यास्पद और बेतुकी नहीं है? मैं तुम लोगों से आगे पूछता हूँ : क्या तुम लोगों के लिए वो गलतियाँ करना बेहद आसान नहीं जो उस समय के फरीसियों ने की थीं, क्योंकि तुम लोगों के पास यीशु की थोड़ी-भी समझ नहीं है? क्या तुम सत्य के मार्ग का भेद पहचान सकते हो? क्या तुम सचमुच विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने में समर्थ हो? यदि तुम नहीं जानते कि तुम मसीह का विरोध करोगे या नहीं, तो मेरा कहना है कि तुम पहले ही मौत की कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने वाले कार्य करने, यीशु को अस्वीकार करने, उसे बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा-भला कहने में सक्षम हैं। इससे भी अधिक, वे यीशु के लौटने को शैतान द्वारा गुमराह किए जाने की तरह देखने में सक्षम हैं और ज्यादातर लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इस सब से तुम लोगों को डर नहीं लगता? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के खिलाफ निंदा होगी, कलीसियाओं के लिए कहे गए पवित्र आत्मा के वचनों को चीरना होगा और यीशु द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम हठपूर्वक होश में आने से इनकार करते हो तो तुम लोग उस कार्य को कैसे समझ सकते हो जिसे यीशु श्वेत बादल पर देह में लौटने पर करता है? मैं तुम लोगों को यह बताता हूँ : जो लोग सत्य स्वीकार नहीं करते, फिर भी अंधों की तरह श्वेत बादलों पर यीशु के आगमन का इंतजार करते हैं, वे निश्चित रूप से वो लोग हैं जो पवित्र आत्मा की ईश-निंदा करते हैं और ये वो वर्ग है जो निश्चित तौर पर नष्ट कर दिया जाएगा। तुम लोग सिर्फ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो और सिर्फ स्वर्ग के सुखद क्षेत्र का आनंद लेना चाहते हो, तुमने यीशु के कहे वचनों का कभी पालन नहीं किया और जब यीशु देह में लौटता है तो उसके द्वारा व्यक्त किए गए सत्य को तुमने कभी नहीं स्वीकारा। यीशु के एक श्वेत बादल पर लौटने के तथ्य के बदले तुम लोग क्या दोगे? क्या वही ईमानदारी जिससे तुम लोग बार-बार पाप करते हो और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? श्वेत बादल पर लौटने वाले यीशु को तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या यह कार्य के कई वर्षों की वह पूँजी है, जिसके जरिए तुम लोग अपनी बड़ाई करते हो? तुम किस चीज को पेश करोगे, ताकि लौटकर आए यीशु को तुम पर भरोसा हो? क्या वह तुम लोगों की अभिमानी प्रकृति है, जो किसी भी सत्य को समर्पित नहीं होती?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा
परमेश्वर द्वारा मनुष्य पर किए जाने वाले कार्य का हर कदम बाहर से लोगों के बीच मेलजोल प्रतीत होता है, मानो यह मानवीय व्यवस्थाओं द्वारा या मानवीय विघ्न से उत्पन्न हुआ हो। किंतु, कार्य के प्रत्येक कदम, और घटित होने वाली हर चीज के पीछे शैतान द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई शर्त है और इनमें अपेक्षित है कि लोग परमेश्वर के लिए अपनी गवाही में अडिग बने रहें। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब का परीक्षण हुआ : पर्दे के पीछे शैतान परमेश्वर के साथ शर्त लगा रहा था और अय्यूब को जिन चीजों का सामना करना पड़ा, वे लोगों के क्रियाकलाप और विघ्न थे। परमेश्वर द्वारा तुम लोगों पर किए गए कार्य के हर कदम के पीछे शैतान की परमेश्वर के साथ शर्त होती है—इसके पीछे एक लड़ाई होती है। ... जब परमेश्वर और शैतान आध्यात्मिक क्षेत्र में लड़ाई करते हैं, तो तुम्हें परमेश्वर को कैसे संतुष्ट करना चाहिए और किस प्रकार उसके लिए गवाही में अडिग रहना चाहिए? तुम्हें यह पता होना चाहिए कि जो कुछ भी तुम्हारे साथ होता है वह एक महान परीक्षण है और वह समय है जब परमेश्वर को गवाही के लिए तुम्हारी आवश्यकता है। हालाँकि ये बाहर से मामूली लग सकती हैं, किंतु जब ये चीजें होती हैं तो ये दर्शाती हैं कि तुम परमेश्वर से प्रेम करते हो या नहीं। यदि तुम परमेश्वर से प्रेम करते हो, तो तुम उसके लिए अपनी गवाही में अडिग रह पाओगे और यदि तुमने परमेश्वर के प्रति प्रेम का अभ्यास नहीं किया है, तो यह दर्शाता है कि तुम वह व्यक्ति नहीं हो जो सत्य को अभ्यास में लाता है, तुम सत्य से रहित हो और जीवन से रहित हो, तुम भूसा हो!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल परमेश्वर से प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है
अगर तुम पर ऐसी कई चीजें आ पड़ती हैं, जो तुम्हारी धारणाओं के अनुरूप नहीं होतीं, परंतु फिर भी तुम उन्हें एक तरफ रखने और इन चीजों से परमेश्वर के कर्मों का ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ होते हो और अगर शोधनों के बीच तुम अपना परमेश्वर-प्रेमी हृदय प्रकट करते हो, तो यह अपनी गवाही में अडिग रहना है। अगर तुम्हारे घर में शांति है, तुम देह-सुख का आनंद लेते हो, कोई तुम्हारा उत्पीड़न नहीं करता, और कलीसिया में तुम्हारे भाई-बहन तुम्हारा आज्ञापालन करते हैं, तो क्या तुम्हारा परमेश्वर-प्रेमी हृदय प्रकट हो सकता है? क्या यह स्थिति तुम्हारा शोधन कर सकती है? केवल शोधन के माध्यम से ही तुम्हारा परमेश्वर-प्रेमी हृदय दर्शाया जा सकता है, और केवल अपनी धारणाओं के विपरीत घटित होने वाली चीजों के माध्यम से ही तुम पूर्ण बनाए जा सकते हो। कई नकारात्मक चीजों की सेवा और शैतान की तमाम तरह की अभिव्यक्तियों—उसके कामों, उसके आरोपों, उसकी बाधाओं और गुमराह करने के माध्यम से—परमेश्वर तुम्हें शैतान का भयानक चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाता है और इस प्रकार शैतान की असलियत पहचानने की तुम्हें क्षमता देता है, ताकि तुम शैतान से नफरत करो और उसके खिलाफ विद्रोह करो।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जिन्हें पूर्ण बनाया जाना है उन्हें शोधन से गुजरना होगा
तुम्हें इस या उस चीज से नहीं डरना चाहिए; चाहे तुम्हें कितनी भी मुसीबतों या खतरों का सामना करना पड़े, तुम्हें किसी भी अड़चन से बाधित हुए बिना मेरे सम्मुख अडिग रहने में सक्षम होना चाहिए ताकि मेरी इच्छा बेरोक-टोक कार्यान्वित हो सके। यह तुम्हारा कर्तव्य है; अन्यथा मैं अपना क्रोध तुम पर उतारूँगा और अपने हाथ से मैं...। फिर तुम अपने दिल में अंतहीन पीड़ा सहोगे। तुम्हें सब कुछ सहना होगा; मेरे लिए तुम्हें हर चीज छोड़ने और अपनी पूरी ताकत से मेरा अनुसरण करने को तैयार रहना होगा और कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना होगा। अब वह समय है जब मैं तुम्हें परखूँगा : क्या तुम अपनी वफादारी मुझे अर्पित करोगे? क्या तुम मार्ग के अंत तक वफादारी से मेरा अनुसरण कर सकते हो? डरो मत; तुम्हारे सहारे के रूप में मेरे रहते कौन कभी तुम्हारे रास्ते को अवरुद्ध कर सकता है? यह याद रखो! याद रखो! हर चीज में मेरे अच्छे इरादे निहित हैं और हर चीज मेरी जाँच-पड़ताल के अधीन है। क्या तुम्हारे हर शब्द और कर्म में मेरे वचन का पालन होता है? जब तुम पर अग्नि परीक्षाएँ आएँगी, तो क्या तुम घुटने टेकोगे और पुकारोगे? या तुम दुबक जाओगे और आगे बढ़ने में असमर्थ रहोगे?
तुममें मेरा साहस होना चाहिए और जब अविश्वासी रिश्तेदारों का सामना करने की बात आए तो तुम्हारे पास सिद्धांत होने चाहिए। लेकिन मेरी खातिर तुम्हें किसी भी अंधकार की शक्ति के आगे झुकना नहीं चाहिए। तुम्हें पूर्ण मार्ग पर चलने के लिए मेरी बुद्धि पर निर्भर रहना चाहिए और शैतान की किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देना चाहिए। अपने दिल को मेरे सम्मुख रखने के लिए जो बन पड़े वह सब करो, मैं तुम्हें दिलासा दूँगा और तुम्हारे दिल को शांति और आनंद प्रदान करूँगा। यह परवाह मत करो कि लोगों को तुम कैसे प्रतीत होते हो; क्या मुझे संतुष्ट करना अधिक मूल्य और महत्व नहीं रखता है? क्या यह तुम्हारे लिए इस तरह और भी अनंत और जीवनपर्यंत आनंद और शांति लेकर नहीं आएगा? तुम्हारा आज का कष्ट बताता है कि तुम्हारे भविष्य के आशीष कितने बड़े होंगे; वे अवर्णनीय हैं। तुम्हें जो आशीष प्राप्त होंगे, वे कितने बड़े होंगे, ये तुम नहीं जानते; तुम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज यह वास्तविक बन गया है; बिल्कुल वास्तविक! यह बहुत दूर नहीं है—क्या तुम उसे देख सकते हो? इसका हर अंतिम अंश मुझमें है; भविष्य कितना रोशन है! अपने आँसू पोंछो तथा और अधिक दुःख या दर्द महसूस मत करो। हर चीज का आयोजन मेरे हाथों से होता है और मेरा लक्ष्य यह है कि तुम लोगों को जल्द विजेता बनाऊँ और तुम्हें अपने साथ महिमा में ले चलूँ। तुम्हारे साथ जो सब होता है, उसके लिए तुममें इस तरह का आभार और प्रशंसा होनी चाहिए; इससे मुझे संतुष्टि मिलेगी।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 10
सृजित प्राणियों के रूप में लोगों को वे कर्तव्य पूरे करने चाहिए, जो उनसे अपेक्षित हैं, और शोधन के बीच परमेश्वर के प्रति अपनी गवाही में अडिग रहना चाहिए। हर परीक्षण में उन्हें उस गवाही पर कायम रहना चाहिए जो कि उन्हें देनी चाहिए और परमेश्वर के लिए गूँजती हुई गवाही देनी चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति विजेता होता है। परमेश्वर चाहे तुम्हारा कैसे भी शोधन करे, तुम्हें आस्था से भरा रहना चाहिए और उसमें कभी आस्था नहीं खोनी चाहिए और तुम्हें वह भी करना चाहिए जो मनुष्य को करना चाहिए। परमेश्वर मनुष्य से बस यही अपेक्षा करता है—वह अपेक्षा करता है कि मनुष्य का हृदय पूरी तरह से उसकी ओर लौट सके और हर पल उसकी ओर मुड़ सके। ऐसा व्यक्ति विजेता होता है। जिन्हें परमेश्वर "विजेता" कहता है, वे ऐसे लोग हैं जो शैतान के प्रभाव में और शैतान द्वारा घेरे जाने के दौरान—अर्थात्, जब वे अंधकार की शक्तियों के बीच होते हैं, तब भी अपनी गवाही में अडिग रह सकते हैं, अपनी आस्था और परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी बनाए रख सकते हैं और चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर के सामने एक शुद्ध हृदय बनाए रख सकते हैं और परमेश्वर के प्रति अपना सच्चा प्रेम बनाए रख सकते हैं। इस तरह, वे परमेश्वर के सामने अपनी गवाही में अडिग रहे हैं। ऐसे लोग वे हैं जिन्हें परमेश्वर "विजेता" कहता है। यदि परमेश्वर द्वारा तुम्हें आशीष दिए जाने पर तुम्हारा अनुसरण उत्कृष्ट होता है, लेकिन उसके आशीष न मिलने पर तुम पीछे हट जाते हो, तो क्या यह शुद्धता है? चूँकि तुम निश्चित हो कि यह मार्ग सच्चा है, इसलिए तुम्हें अंत तक इसका अनुसरण करना चाहिए; तुम्हें परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी कायम रखनी चाहिए। चूँकि तुमने देखा है कि परमेश्वर तुम्हें स्वयं पूर्ण बनाने के लिए पृथ्वी पर आया है, इसलिए तुम्हें अपना दिल पूरी तरह से उसे दे देना चाहिए। चाहे परमेश्वर कुछ भी करे—भले ही अंत में तुम्हें प्रतिकूल परिणाम ही क्यों न दे—यदि तुम फिर भी उसका अनुसरण कर सकते हो, तो इसका मतलब है कि तुमने परमेश्वर के सामने अपनी शुद्धता बनाए रखी है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम्हें परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी कायम रखनी चाहिए