सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का ऐप

परमेश्वर की आवाज़ सुनें और प्रभु यीशु की वापसी का स्वागत करें!

सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना

ठोस रंग

विषय-वस्तुएँ

फॉन्ट

फॉन्ट का आकार

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

0 खोज परिणाम

कोई परिणाम नहीं मिला

225 परमेश्वर के साथ सामान्य संबंध रखना महत्वपूर्ण है

1 जब भी तुम कुछ करते हो, तो तुम्हें यह जांचना आवश्यक है कि क्या तुम्हारी प्रेरणाएँ सही हैं। यदि तुम परमेश्वर की माँगों के अनुसार कार्य कर सकते हो, तो परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य है। यह निम्नतम मापदंड है। जब तुम अपनी प्रेरणाओं को जाँचते हो, तो यदि उनमें ऐसी प्रेरणाएँ मिल जाएँ जो सही न हों, और यदि तुम उनसे फिर सकते हो और परमेश्वर के वचनों के अनुसार कार्य कर सकते हो, तो तुम एक ऐसे व्यक्ति बन जाओगे जो परमेश्वर के समक्ष सही है, और जो दर्शाएगा कि परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य है, और तुम जो कुछ करते हो वह परमेश्वर के लिए है, न कि तुम्हारे अपने लिए।

2 तुम जब भी कुछ करते या कहते हो, तो तुम्हें अपने हृदय को सही रखना, और धर्मी बनना चाहिए, और अपनी भावनाओं में नहीं बहना चाहिए, या तुम्हारी अपनी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं करना चाहिए। ये ऐसे सिद्धांत हैं जिनमें परमेश्वर के विश्वासी स्वयं आचरण करते हैं। एक व्यक्ति की प्रेरणाएँ और उसका महत्व छोटी बातों में प्रकट हो सकता है, और इस प्रकार, परमेश्वर द्वारा सिद्ध बनाए जाने के मार्ग में प्रवेश करने के लिए लोगों को पहले उनकी अपनी प्रेरणाओं और परमेश्वर के साथ उनके संबंध का समाधान करना आवश्यक है।

3 जब परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य होता है, केवल तभी तुम परमेश्वर के द्वारा सिद्ध किए जाओगे, और केवल तभी तुम में परमेश्वर का व्यवहार, काट-छाँट, अनुशासन और शोधन अपने वांछित प्रभाव को पूरा कर पाएगा। कहने का अर्थ यह है कि लोग अपने हृदयों में परमेश्वर को रख सकेंगे, और व्यक्तिगत लाभों को नहीं खोजेंगे, अपने व्यक्तिगत भविष्य (अर्थात् शरीर के बारे में सोचना) के बारे में नहीं सोचेंगे, बल्कि वे जीवन में प्रवेश करने के बोझ को रखेंगे, सत्य का अनुसरण करने में अपना सर्वोत्तम प्रयास करेंगे, और परमेश्वर के कार्य के प्रति समर्पित रहेंगे। इस प्रकार से, जिन लक्ष्यों को तुम खोजते हो वे सही हैं, और परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य है। यद्यपि मनुष्य का गंतव्य या उसकी मंजिल परमेश्वर के हाथों में है, और परमेश्वर के द्वारा पूर्वनिर्धारित की जा चुकी है, और उनके स्वयं के द्वारा बदली नहीं जा सकती, फिर भी तुम सिद्ध बनाए जा सकते हो या नहीं या परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किए जा सकते हो या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य है या नहीं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध कैसा है?" से रूपांतरित

पिछला:अंत तक अनुसरण करने के लिये आत्मा के कार्य का पालन करो

अगला:जो परमेश्वर के सामने शांत रहते हैं, केवल वही जीवन पर ध्यान केंद्रित करते हैं

सम्बंधित मीडिया

  • देहधारी परमेश्वर को किसने जाना है

    I चूँकि हो तुम एक नागरिक परमेश्वर के घराने के, चूँकि हो तुम निष्ठावान परमेश्वर के राज्य में, फिर जो कुछ भी तुम करते हो उसे जरूर खरा उतरना चाहिए परमेश्…

  • प्रभु यीशु का अनुकरण करो

    I पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को, क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की, इसमें न उसका स्वार्थ था, न योजना…

  • परमेश्वर स्वर्ग में है और धरती पर भी

    I परमेश्वर, परमेश्वर। परमेश्वर जब धरती पर होता है, तो इंसानों के दिल में वो व्यवहारिक होता है। स्वर्ग में वो सब जीवों का स्वामी होता है। नदियाँ लांघी…

  • पवित्र आत्मा के कार्य के सिद्धांत

    I पवित्र आत्मा इक-तरफा कार्य नहीं करता, इंसान नहीं कर सकता काम अकेले। पवित्र आत्मा इक-तरफा कार्य नहीं करता, इंसान नहीं कर सकता काम अकेले। इंसान काम …

वचन देह में प्रकट होता है अंत के दिनों के मसीह के कथन (संकलन) मेमने ने पुस्तक को खोला न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंतिम दिनों के मसीह, के उत्कृष्ट वचन राज्य के सुसमाचार पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के उत्कृष्ट वचन -संकलन मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना अंत के दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ राज्य के सुसमाचार पर उत्कृष्ट प्रश्न और उत्तर (संकलन) परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) विजेताओं की गवाहियाँ मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप