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तुम्हीं बचा सकते हो मुझे केवल

I

छिपकर दीन बनकर, साथ देते हो तुम्हीं मुश्किलों में इंसान का,

प्रदान करते हो उन्हें मार्ग अनंत जीवन का।

बहुत चाहते हो तुम इंसान को, अपने देह और रक्त की तरह,

हे परमेश्वर, हे परमेश्वर।

तुम लायक हो उनके प्रेम के, हे परमेश्वर।

II

ख़ुद तो सह लोगे तुम कष्ट, इंसान को देते हो सुख-चैन मगर।

और तुम कर देते हो जीवन की बरसात उन पर।

सचमुच सुंदर है हृदय तुम्हारा, हे परमेश्वर, हे परमेश्वर, हे परमेश्वर।

धार्मिक हो, पात्र हो बहुत तुम, मानव के गुणगान के।

III

तुम्हारा प्रेम निकाल लेता है, मुश्किल राहों से मुझे,

और मधुरता का आनंद लेती हूँ मैं।

इंसान कमज़ोर है, जानते हो तुम अच्छी तरह,

दिखा सकते हो तुम हमदर्दी उन्हें।

इंसान कैसे भूल सकता है कभी तुम्हें। हे परमेश्वर।

लोगों के साथ रहते हो, लोगों के बीच रहकर ख़ुद राह दिखाते हो उन्हें,

देते हो उन्हें ऐसा कुछ, जो उनका सहारा बने।

यातना सहकर पहले, आदर्श मिसाल बनते हो।

लोगों के मध्य है प्रेम तुम्हारा। हे परमेश्वर।

IV

जीत लेते हैं मुझे वचन तुम्हारे, न्याय तुम्हारा करता है शुद्ध मुझे।

तुम्हीं बचा सकते हो मुझे केवल।

काटते-छांटते हो मुझे, निपटते हो मुझसे,

इम्तहान लेते हो, शुद्ध करते हो मुझे।

तुम्हीं पूर्ण कर सकते हो मुझे केवल।

बेशकीमती प्रेम तुम्हारा, बेहद सुंदर।

लोगों में छोड़े हैं तुमने, अपने सच्चे एहसास।

भरोसा करके तुम पर अगर दिया न अपना दिल पूरा तुमको,

पश्चाताप करूँगी मैं जीवन भर।

तो क्या कहलाऊंगी इंसान अगर न रख पाई निष्ठा तुम पर?

तुम लायक हो उनके प्रेम के, हे परमेश्वर।

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