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परमेश्वर के अधिकार को जानने का मार्ग

I

परमेश्वर के अधिकार के ज्ञान को,

उसकी सामर्थ्य को, पहचान को और सार को,

तुम हासिल कर नहीं सकते

अपनी कल्पनाओं से।

कल्पना न करो, के मायने ये नहीं कि तुम कुछ न करो,

या बस बैठकर तबाही का इंतज़ार करो।

इसके मायने हैं – तर्क से अनुमान ना लगाओ,

ना जानकारी या विज्ञान के ज़रिये अध्ययन करो।

परमेश्वर के वचनों को खा-पीकर,

अनुभव करो और उन वचनों की संगति करो,

परमेश्वर के अधिकार का तुम अनुभव करोगे, उसे सत्यापित करोगे,

और धीरे-धीरे उसकी समझ और ज्ञान को हासिल करोगे।

बस यही एक राह है, और कोई छोटा रास्ता नहीं है।

II

उसके वचनों के, सत्य के,

ज़िंदगी में जिसका तुम सामना करते हो, उसके ज़रिये,

सराहना करो, सत्यापित करो, पुष्टि करो,

जिस परमेश्वर में विश्वास है तुम्हें,

अधिकार है उसमें, तुम्हारी नियति पर है प्रभुत्व उसका,

जानो कि उसकी सामर्थ्य हर समय

करती है सिद्ध सच्चा स्वयं परमेश्वर उसे।

बस यही एक रास्ता है परमेश्वर को समझने का,

बस यही एक रास्ता है परमेश्वर को समझने का,

परमेश्वर के वचनों को खा-पीकर,

अनुभव करो और उन वचनों की संगति करो,

परमेश्वर के अधिकार का तुम अनुभव करोगे, उसे सत्यापित करोगे,

और धीरे-धीरे उसकी समझ और ज्ञान को हासिल करोगे।

बस यही एक राह है, और कोई छोटा रास्ता नहीं है।

बस यही एक राह है, और कोई छोटा रास्ता नहीं है।

बस यही एक राह है, और कोई छोटा रास्ता नहीं है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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