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881 मनुष्य को परमेश्वर की रचनाओं को संजोकर रखना चाहिए

1 परमेश्वर ने मनुष्य को सभी चीज़ों को सम्भालने और उनके ऊपर प्रभुता रखने की अनुमति दी है, पर क्या मनुष्य अच्छा काम करता है? मानवजाति विनाश की ओर झुक जाती है; मानवजाति न केवल उन चीज़ों का संरक्षण करने में असमर्थ है जिन्हें परमेश्वर ने सृजा है, बल्कि उसने वास्तव में उनको नष्ट कर दिया है। मनुष्य ने पर्वतों को काटकर मलबे में तब्दील कर दिया है, मिट्टी से समुद्रों को पाट दिया है, और मैदानों को निर्जन स्थानों में बदल दिया है, जहाँ कोई नहीं रह सकता है। फिर भी निर्जन स्थानों में मनुष्य ने उद्योग की स्थापना कर दी है और परमाणु संयंत्रों का निर्माण कर दिया है और हर दिशा में विनाश का साम्राज्य है। नदियाँ अब नदियाँ नहीं रहीं, समुद्र अब समुद्र नहीं रहे...।

2 जब मानवजाति प्रकृति के संतुलन एवं नियमों को तोड़ती है, तो उसके विनाश एवं मृत्यु के दिन अधिक दूर नहीं होते और यह अवश्‍यंभावी है। जब विनाश आएगा, तो उन्हें पता चलेगा कि परमेश्वर की सृष्टि कितनी बहुमूल्य है और यह सब मानवजाति के लिए कितना महत्वपूर्ण है; मनुष्य का किसी वातावरण में रहना एक अच्छी जलवायु में स्वर्गलोक में रहने के समान है। लोग इस आशीष का एहसास नहीं करते हैं, परन्तु जिस क्षण वे इसे खो देंगे तब वे यह देखेंगे कि यह सब कितना दुर्लभ एवं बेशकीमती है।

3 यह सब इंसान को वापस कैसे मिलेगा? यदि परमेश्वर इसे फिर से बनाने के लिए तैयार न हुआ तो लोग क्या करेंगे? यदि परमेश्वर कुछ नहीं करे, यदि परमेश्वर आगे से मानवजाति के लिए कुछ भी करने की इच्छा न करे—कहने का तात्पर्य है, वह हस्तक्षेप न करना चाहे—तो इस विनाश को रोकने के लिए और चीज़ों को पुनः वैसा ही बनाने के लिए जैसे वे थीं, मानवजाति के लिए सबसे उत्तम तरीका यह होगा कि वह इस विनाश को रोक दे। इस समस्त विनाश को समाप्त करने का अर्थ है कि उन चीज़ों की लूट एवं बर्बादी को रोका जाए जिन्हें परमेश्वर ने सृजा है। इससे उस वातावरण को धीरे-धीरे सुधरने का अवसर मिलेगा जिसमें मनुष्य रहता है। ऐसा करने में असफल होने का परिणाम होगा वातावरण का और अधिक विनाश तथा यह और अधिक गम्भीर हो जाएगा। मनुष्य अन्य चीज़ों के बिना नहीं रह सकता है, इस एक मूलभूत सिद्धान्त से तुम्हें पता चल जाता है कि मनुष्य को अन्य चीज़ों की आवश्यकता होती है। अतः सभी चीज़ों के प्रति मनुष्य की मनोवृत्ति कैसी होनी चाहिए? उन्हें सँजोकर रखिए, उनकी सुरक्षा कीजिए, प्रभावी ढंग से उनका उपयोग कीजिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" से रूपांतरित

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