एक आवारा दिल घर आया
नोवो, फिलीपींस मेरा नाम नोवो है और मैं फिलीपींस का रहने वाला हूँ। जब मैं छोटा था, तभी से मैंने अपनी माँ के प्रभु में विश्वास का अनुसरण किया...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
मैं स्थानीय कलीसिया में एक सह-कार्यकर्ता थी। अप्रैल 1997 में, सह-कार्यकर्ताओं की एक सभा में, अगुआ, भाई झांग ने कहा, “हाल ही में, चमकती पूर्वी बिजली का प्रचार करने वाला एक समूह उभरा है और वे वाकई दुर्जेय हैं। उन्हें बाइबल का बहुत गहरा ज्ञान है और अगर हम सावधान और सतर्क नहीं रहे, तो हम गुमराह हो सकते हैं। वे कहते हैं कि प्रभु यीशु पहले ही लौट आए हैं और वे ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं। वे अपनी सभाओं में अब बाइबल नहीं पढ़ते, बल्कि सिर्फ़ सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं। बाइबल कहती है : ‘सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धार्मिकता की शिक्षा के लिये लाभदायक है’ (2 तीमुथियुस 3:16)। शास्त्र का यह अंश हमें साफ-साफ बताता है कि बाइबल के सारे वचन परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं। हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि बाइबल में सब कुछ परमेश्वर का वचन है और बाइबल प्रभु में हमारी आस्था का आधार है और प्रभु में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है। बाइबल से भटकना प्रभु में विश्वास करना नहीं है—यह उसके साथ विश्वासघात करना है!” वहाँ मौजूद सभी ने उनकी बात से सहमति जताई। भाई झांग ने अपना हाथ हिलाया और अपनी बात जारी रखी, “आप लोगों को यह याद रखना चाहिए : चाहे उनका उपदेश कितना भी गहरा या अच्छा क्यों न लगे, अगर वह बाइबल में नहीं है, तो हमें उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। भले ही आपके अपने माता-पिता ही आपको इसका प्रचार क्यों न करें, इस पर विश्वास मत करना। अगर ये लोग आपके घर प्रचार करने आएँ, तो उन्हें भगा देना! अगर आप गुमराह हो गए और भटक गए, तो प्रभु यीशु आपको स्वीकार नहीं करेंगे और तब, कितना भी रोने से कोई फायदा नहीं होगा।” उस समय, मुझे प्रभु यीशु की कही एक बात याद आई : “आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी” (मत्ती 24:35)। और मैंने सोचा, “बाइबल में जो कुछ भी है, वह सब प्रभु का वचन है, तो वह कैसे टल सकता है? बाइबल स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने का हमारा पास है और यह हमारे जीवन की गारंटी भी है, इसलिए बाइबल न पढ़ने का मतलब है प्रभु में विश्वास न करना। मुझे बाइबल को मजबूती से थामे रहना चाहिए।” फिर, उसने कुछ सनसनीखेज निराधार अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं। मैंने भाई झांग की बातों को सच मान लिया। झुंड की रक्षा करने और प्रभु के मार्ग का बचाव करने के लिए, घर आने के बाद, मैंने विश्वासियों से कहा कि उन्हें चमकती पूर्वी बिजली से सावधान रहना होगा। लेकिन बाद में, फिर भी ज्यादा से ज्यादा भाई-बहनों ने चमकती पूर्वी बिजली को स्वीकार कर लिया।
एक सभा में, भाई झांग ने कहा कि बहन लियू को चमकती पूर्वी बिजली ने अपनी ओर खींच लिया है। मुझे इस पर विश्वास करना मुश्किल लगा। बहन लियू बाइबल से बहुत अच्छी तरह परिचित थी और अच्छे उपदेश देती थी। इतनी काबिलियत वाला कोई व्यक्ति कैसे बहकाया जा सकता है? बाद में, भाई वांग, जो अक्सर भाई झांग के साथ प्रचार करते थे, उन्होंने भी चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करना शुरू कर दिया। मैं सोचने लगी, “हर सभा में, हमसे कहा जाता है कि चमकती पूर्वी बिजली के लोगों से न मिलें और न ही उनकी सुनें या उनकी किताबें पढ़ें। लेकिन फिर भी भाई-बहन एक के बाद एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास क्यों करते जा रहे हैं? चमकती पूर्वी बिजली की शिक्षाओं में आखिर ऐसा क्या खास है? उनकी किताबों में आखिर लिखा क्या है? भाई वांग और बहन लियू, कुछ अन्य सह-कार्यकर्ताओं के साथ, वाकई अनुसरण करते थे और उनमें बहुत आस्था थी और वे अक्सर प्रचार करते थे और बाइबल से बहुत अच्छी तरह परिचित थे, तो वे इतनी आसानी से कैसे बहकाए जा सकते थे? हमारी कलीसिया सुधार की धारा है और हमारी शिक्षाएँ अन्य संप्रदायों की तुलना में अधिक गहरी हैं। क्या ऐसा हो सकता है कि चमकती पूर्वी बिजली की शिक्षाएँ हमारी स्थानीय कलीसिया से भी अधिक गहरी हों? वरना, ये सभी लोग एक के बाद एक क्यों बहकाए गएऔर वापस आने से बिल्कुल इनकार क्यों कर दिया?” इसके बाद, भाई झांग ने विशेष रूप से एक प्रार्थना सभा आयोजित की, जिसका मुख्य उद्देश्य चमकती पूर्वी बिजली का प्रचार करने वालों के लिए प्रार्थना करना और उन्हें श्राप देना था। मुझे लगा कि यह प्रभु के इरादों के अनुरूप नहीं है। प्रभु यीशु ने हमें सिखाया कि घृणा करना हत्या करने जितना ही बुरा है और हमें अपने दुश्मनों से प्रेम करना चाहिए। क्या वे जो कर रहे थे, वह प्रभु यीशु के वचनों के विरुद्ध नहीं था? मैं इससे सहमत नहीं थी, इसलिए मैंने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
अक्टूबर 2002 के अंत में, मेरी भतीजी मेरे घर आई। उसने कहा कि प्रभु यीशु लौट आए हैं, उन्होंने सत्य व्यक्त किया है और वे न्याय और शुद्धिकरण का कार्य कर रहे हैं। उसने यह भी कहा कि मानव-जाति के लिए परमेश्वर का उद्धार-कार्य तीन चरणों में किया गया था। पहला चरण व्यवस्था के युग में यहोवा द्वारा किया गया कार्य था, दूसरा चरण अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु द्वारा किया गया कार्य था और तीसरा चरण राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा किया गया कार्य है। कार्य के ये तीन चरण कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हैं, हर बार और ऊँचे उठ जाते हैं। मुझे एहसास हुआ कि मेरी भतीजी ने शायद चमकती पूर्वी बिजली को स्वीकार कर लिया है, इसलिए मैंने उसे बीच में ही टोक दिया, “पहला चरण व्यवस्था का युग है और दूसरा चरण अनुग्रह का युग है—क्या तुम्हें वाकई इसका जिक्र करने की ज़रूरत है? तुम्हें लगता है कि मैं यह पहले से नहीं जानती? चाहे कार्य के कितने भी चरण क्यों न हों, तुम बाइबल के बिना किसी भी चीज़ पर विश्वास नहीं कर सकती! मैंने तुम्हें कितनी बार बताया है? बाइबल के अलावा किसी भी चीज़ पर विश्वास मत करो। तुम सुनती क्यों नहीं हो? वे कहते हैं कि प्रभु लौट आए हैं। प्रभु कहाँ हैं? उन्हें किसने देखा है?” मेरी भतीजी ने कहा, “प्रभु लौट आए हैं और उन्होंने कई सत्य व्यक्त किए हैं। अगर हम परमेश्वर को देखना चाहते हैं, तो हमें उनके वचनों में खोजना होगा। अगर आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़ेंगी, तो आप परमेश्वर की वाणी सुनेंगी और उनका प्रकटन देखेंगी।” उसकी यह बात सुनकर मुझे और भी ज़्यादा प्रतिरोध महसूस हुआ। मुझे याद आया कि भाई झांग हमेशा कहते थे, “चाहे प्रचार कितना भी गहरा क्यों न लगे, अगर वह बाइबल के बाहर से है, तो हमें उसे नहीं सुनना चाहिए। हमें चमकती पूर्वी बिजली का प्रचार करने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत नहीं करना चाहिए, भले ही वे परिवार या दोस्त ही क्यों न हों।” तब मैंने उसे डाँटा, “क्या परमेश्वर के सारे वचन बाइबल में नहीं हैं? बाइबल के बाहर का कोई भी प्रचार कितना भी गहरा या अच्छा क्यों न लगे, हम उस पर विश्वास नहीं कर सकते! तुम कितने सालों से बाइबल पढ़ रही हो? तुम जानती ही क्या हो? तुम गुमराह हो गई हो और तुम्हें इसका एहसास भी नहीं है, फिर भी तुम मेरे सामने प्रचार करने की कोशिश कर रही हो! अगर तुम मुझसे मिलने आई हो, तो कुछ और दिन रुक सकती हो, लेकिन अगर तुम प्रचार करने आई हो, तो बाहर निकल जाओ! इसके बाद, मैं तुमसे सारे रिश्ते तोड़ दूँगी!” मेरी भतीजी ने कहा, “मौसी, कृपया इसकी जाँच कीजिए! आपने इतने सालों तक प्रभु में विश्वास किया है और बहुत कष्ट सहे हैं। अगर आप अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को स्वीकार नहीं करेंगी, तो आपके सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएँगे। सच्चा मार्ग स्वीकार करने के बाद, आप ही पहली इंसान थीं जिसके बारे में मैंने सोचा।” चाहे मेरी भतीजी ने मुझे कितना भी समझाने की कोशिश की, मैंने बस सुना ही नहीं और अंत में, वह रोते हुए चली गई। बाद में, मुझे बहुत दुख हुआ। मेरी भतीजी इतनी दूर से मेरे सामने सुसमाचार का प्रचार करने आई थी, फिर भी मैंने उसे भगा दिया। यह प्रभु की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं था! लेकिन फिर मैंने सोचा, “उसने प्रभु के साथ विश्वासघात किया है, इसलिए उसे भगाना वास्तव में गलत नहीं था।”
जनवरी 2003 में एक दिन, मेरी भतीजी का फोन आया और उसने कहा कि उसकी माँ को गैस से ज़हर चढ़ गया है और वह चाहती थी कि मैं आकर उसे देखूँ। मैंने सोचा कि मैं इस मौके का फायदा उठाकर उससे फिर से बात करूँगी और उसे चमकती पूर्वी बिजली का मार्ग छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश करूँगी। अगले दिन, मैं अपनी बड़ी बहन से मिलने गई और रात के खाने के बाद, एक भाई आया और उसने गर्मजोशी से मेरा अभिवादन किया, लेकिन उस समय, मैं उससे सतर्क थी। भाई ने कहा, “बहन, प्रभु के आने के बारे में आपका क्या विचार है?” मैंने कहा, “अगर आप प्रभु में विश्वास करते हैं, तो हम बाइबल से मामलों पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन अगर आप मुझे चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करने के लिए मनाने आए हैं, तो हमारे पास चर्चा करने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं केवल बाइबल के वचनों में विश्वास करती हूँ और मैं बाइबल के अलावा किसी भी चीज़ में विश्वास नहीं करती!” भाई ने कहा, “मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूँ; मैं भी आपकी तरह ही बाइबल से चिपका रहता था। तो, चलिए आज इसी विषय पर बात करते हैं।” उस पल, मुझे याद आया कि भाई झांग ने क्या कहा था, “चाहे उनका प्रचार कितना भी गहरा या अच्छा क्यों न लगे, कभी मत सुनना, ताकि गुमराह न हो जाओ।” तो मैंने एक बहाना बनाया और कहा कि मैं थक गई हूँ और आराम करना चाहती हूँ। अगले दिन, दो बहनें आईं और मैं उन्हें अस्वीकार करने के लिए बहाने बनाती रही उस समय, मैं बस घर जाना चाहती थी। हालाँकि, बाहर आधा फुट से ज़्यादा बर्फ थी और बसें बंद हो गई थीं, इसलिए मैं जा नहीं सकी। मैं बेचैन और असहज महसूस कर रही थी और भाई झांग के शब्द मेरे दिमाग में घूमते रहे। दोनों बहनों ने मुझसे आग्रह किया कि मैं ध्यान से सुनूँ वरना मैं प्रभु के आगमन का स्वागत करने का मौका चूक जाऊँगी। उनमें से एक ने अपनी बात जारी रखी : “प्रभु यीशु ने कहा था : ‘ढूँढ़ो तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा’ (मत्ती 7:7)। प्रकाशितवाक्य में लिखा है : ‘देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ’ (प्रकाशितवाक्य 3:20)। ‘जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है’ (प्रकाशितवाक्य 2:7)। अगर हम परमेश्वर के लिए अपना दिल नहीं खोलेंगे, तो वह हमें कैसे प्रबुद्ध कर सकता है?” मैंने देखा कि उनमें से हर एक का व्यवहार गरिमापूर्ण, शालीन और प्रेम से भरा था। चाहे मैंने उनके साथ कितना भी बुरा व्यवहार किया, वे मुझसे कभी नाराज़ नहीं हुए और वे बस प्रभु के वचनों से मेरा मार्गदर्शन करते रहे। वे भाई झांग के बताए अनुसार बिल्कुल भी नहीं थे और अब मुझे उनके प्रति उतना विरोध महसूस नहीं हो रहा था। तीसरे दिन, कुछ भाई-बहन आए। मैंने उनसे कहा, “‘सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है’ (2 तीमुथियुस 3:16)। बाइबल के वचन सभी परमेश्वर के वचन हैं और प्रभु में विश्वास को बाइबल से अलग नहीं किया जा सकता। अगर आप बाइबल नहीं पढ़ते, तो क्या आप प्रभु के मार्ग से भटक नहीं रहे हैं?” एक भाई ने कहा, “पहले यह देखते हैं कि ‘सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है’ यह वाक्यांश किसने कहा था और क्या परमेश्वर के वचनों में इसका कोई आधार है। प्रभु यीशु ने कभी नहीं कहा कि सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और ‘सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है’ यह वाक्यांश पौलुस ने कहा था, न कि प्रभु यीशु ने।” यह कहते हुए उसने बाइबल निकाली और मुझे “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है” वाला वचन दिखाया। मैंने एक नज़र डाली और वाकई, यह पौलुस ने कहा था, प्रभु यीशु ने नहीं। मैं आमतौर पर सिर्फ़ इस वचन को पढ़ने पर ध्यान देती थी, लेकिन मैंने इस बात पर ध्यान कैसे नहीं दिया?
फिर, भाई ने मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़कर सुनाया : “आज लोग यह विश्वास करते हैं कि बाइबल परमेश्वर है और परमेश्वर बाइबल है। इसलिए वे यह भी विश्वास करते हैं कि बाइबल के सारे वचन ही वे वचन हैं, जिन्हें परमेश्वर ने बोला था, और कि वे सब परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन थे। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, वे यह भी मानते हैं कि यद्यपि पुराने और नए नियम की सभी छियासठ पुस्तकें लोगों द्वारा लिखी गई थीं, फिर भी वे सभी परमेश्वर की अभिप्रेरणा द्वारा दी गई थीं, और वे पवित्र आत्मा के कथनों के अभिलेख हैं। यह मनुष्य की विकृत समझ है, और यह तथ्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाती। वास्तव में, भविष्यवाणियों की पुस्तकों को छोड़कर, पुराने नियम का अधिकांश भाग ऐतिहासिक अभिलेख है। नए नियम के कुछ धर्मपत्र लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों से आए हैं, और कुछ पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता से आए हैं; उदाहरण के लिए, पौलुस के धर्मपत्र एक मनुष्य के कार्य से उत्पन्न हुए थे, वे सभी पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता के परिणाम थे, और वे कलीसियाओं के लिए लिखे गए थे, और वे कलीसियाओं के भाइयों एवं बहनों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन के वचन थे। वे पवित्र आत्मा द्वारा बोले गए वचन नहीं थे—पौलुस पवित्र आत्मा की ओर से नहीं बोल सकता था, और न ही वह कोई नबी था, और उसने उन दर्शनों को तो बिल्कुल नहीं देखा था जिन्हें यूहन्ना ने देखा था। उसके धर्मपत्र इफिसुस, कुरिंथुस और गलातिया की कलीसियाओं, और उस समय की अन्य कलीसियाओं के लिए लिखे गए थे। और इस प्रकार, नए नियम में पौलुस के धर्मपत्र वे धर्मपत्र हैं, जिन्हें पौलुस ने कलीसियाओं के लिए लिखा था, और वे पवित्र आत्मा की अभिप्रेरणाएँ नहीं हैं, न ही वे पवित्र आत्मा के प्रत्यक्ष कथन हैं। वे महज प्रेरणा, सुविधा और प्रोत्साहन के वचन हैं, जिन्हें उसने अपने कार्य के दौरान कलीसियाओं के लिए लिखा था। इस प्रकार वे पौलुस के उस समय के अधिकांश कार्य के अभिलेख भी हैं। वे प्रभु में विश्वास करने वाले सभी भाई-बहनों के लिए लिखे गए थे, ताकि उस समय की कलीसियाओं के भाई-बहन उसकी सलाह मानें और प्रभु यीशु के बताए पश्चात्ताप के मार्ग पर चलें। किसी भी तरह से पौलुस ने यह नहीं कहा कि, चाहे वे उस समय की कलीसियाएँ हों या भविष्य की, सभी को उसके द्वारा लिखी गई चीज़ों को खाना और पीना चाहिए, न ही उसने कहा कि उसके सभी वचन परमेश्वर से आए हैं। उस समय की कलीसियाओं की परिस्थितियों के अनुसार, उसने बस भाइयों एवं बहनों से संवाद किया था और उन्हें प्रोत्साहित किया था, और उन्हें उनके विश्वास में प्रेरित किया था, और उसने बस लोगों में प्रचार किया था या उन्हें स्मरण दिलाया था और उन्हें प्रोत्साहित किया था। उसके वचन उसके स्वयं के दायित्व पर आधारित थे, और उसने इन वचनों के जरिये लोगों को सहारा दिया था। उसने उस समय की कलीसियाओं के प्रेरित का कार्य किया था, वह एक कार्यकर्ता था जिसे प्रभु यीशु द्वारा इस्तेमाल किया गया था, और इस प्रकार कलीसियाओं की ज़िम्मेदारी लेने और कलीसियाओं का कार्य करने के लिए उसे भाइयों एवं बहनों की स्थितियों के बारे में जानना था—और इसी कारण उसने प्रभु में विश्वास करने वाले सभी भाइयों एवं बहनों के लिए धर्मपत्र लिखे थे। यह सही है कि जो कुछ भी उसने कहा, वह लोगों के लिए शिक्षाप्रद और सकारात्मक था, किंतु वह पवित्र आत्मा के कथनों का प्रतिनिधित्व नहीं करता था, और वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता था। यह एक बेहद गलत समझ और एक ज़बरदस्त ईश-निंदा है कि लोग एक मनुष्य के अनुभवों के अभिलेखों और धर्मपत्रों को पवित्र आत्मा द्वारा कलीसियाओं को बोले गए वचनों के रूप में लें!” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, बाइबल के विषय में (3))। भाई ने अपनी बात जारी रखी, “परमेश्वर के वचन बहुत स्पष्ट हैं। पुराने नियम में, यहोवा परमेश्वर द्वारा भविष्यवक्ताओं पर प्रकट की गई भविष्यसूचक पुस्तकों के अलावा, इसका अधिकांश हिस्सा व्यवस्था के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य के लोगों के अनुभवों का लेखा-जोखा है, उदाहरण के लिए, इस्राएली मिस्र से कैसे बाहर आए, याकूब, दाऊद, सुलैमान वगैरह के अनुभव। ये सभी लोगों के अनुभव हैं और इन्हें परमेश्वर की प्रेरणा नहीं कहा जा सकता। बाइबल में परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए वचन सभी स्पष्ट रूप से चिह्नित हैं, ‘यहोवा यों कहता है’ और ‘यहोवा यह कहता है’ जैसे वाक्यांशों के साथ। नया नियम यीशु के कार्य का लेखा-जोखा है और उसमें प्रभु यीशु के वचन परमेश्वर के वचन हैं। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक वह दर्शन है जिसे यूहन्ना ने पत्मोस द्वीप पर देखा था और यह परमेश्वर द्वारा प्रेरित है और यह परमेश्वर का वचन है। बाकी सब लोगों के वचन और अनुभवजन्य समझ है और भले ही लोगों के वचनों में पवित्र आत्मा का प्रबोधन हो, उन्हें परमेश्वर के वचन या परमेश्वर की प्रेरणा नहीं कहा जा सकता। बाइबल केवल परमेश्वर के कार्य का एक ऐतिहासिक लेखा-जोखा है, परमेश्वर के कार्य की एक गवाही है और बाइबल के सभी वचन परमेश्वर की प्रेरणा नहीं हैं। अगर हम बाइबल के सभी वचनों को परमेश्वर से प्रेरित मानकर उन्हें परमेश्वर के वचन मानें, तो क्या यह परमेश्वर के विरुद्ध ईशनिंदा नहीं है?” भाई की यह बात सुनकर, मुझे लगा जैसे मेरा दिल रोशन हो गया हो और मैंने सोचा, “तो बाइबल पूरी तरह से परमेश्वर की प्रेरणा नहीं है, इसमें लोगों के वचन भी हैं। अगर हम लोगों के वचनों को परमेश्वर के वचन मानें, तो यह परमेश्वर के विरुद्ध ईशनिंदा है। मैं अब परमेश्वर के वचनों को लोगों के वचनों के साथ नहीं मिला सकती। स्थानीय कलीसिया में, किसी ने भी कभी परमेश्वर के वचनों और लोगों के वचनों के बीच इतना स्पष्ट अंतर नहीं किया है। यह पहली बार है जब मैंने ऐसी संगति सुनी है।” भाई ने अपनी बात जारी रखी, “मैं भी यही सोचता था कि बाइबल के अलावा, परमेश्वर का कोई और कार्य या वचन नहीं है, कि परमेश्वर के सभी वचन बाइबल में दर्ज हैं और बाइबल में परमेश्वर के वचन पूर्ण और समग्र हैं, लेकिन हमने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को नज़रअंदाज़ कर दिया है।” उसकी यह बात सुनकर, मेरी जिज्ञासा बढ़ गई और मैंने जल्दी से पूछा, “हमने किस महत्वपूर्ण मुद्दे को नज़रअंदाज़ कर दिया?” उसने मुझसे पूछा, “मुझे बताओ, पहले कौन आया, परमेश्वर या बाइबल? परमेश्वर बड़ा है या बाइबल बड़ी है?” जब उसने यह पूछा तो मैं हैरान रह गई। मुझसे यह कभी किसी ने नहीं पूछा था और इसने मुझे सचमुच चौंका दिया। मुझे याद आया कि उत्पत्ति के पहले अध्याय में परमेश्वर द्वारा सभी चीजों के सृजन की बात कही गई है। जब परमेश्वर का अस्तित्व था, तब तक कोई बाइबल नहीं थी, इसलिए बेशक, परमेश्वर पहले आए। मैं बोल पड़ी, “पहले परमेश्वर आए, फिर बाइबल। बेशक परमेश्वर बड़ा है।” यह कहने के बाद, मुझे अचानक स्पष्टता महसूस हुई, “सभी चीजें परमेश्वर द्वारा बनाई गई हैं, इसलिए निश्चित रूप से परमेश्वर बड़ा है, लेकिन अतीत में, मैंने बाइबल को परमेश्वर से ऊपर रखा है। क्या यह गलत नहीं था?” भाई ने अपनी बात जारी रखी, “पहले परमेश्वर का कार्य और वचन आए, फिर बाइबल का लेखा-जोखा आया। तो अगर हम परमेश्वर को बाइबल तक सीमित कर दें और सोचें कि बाइबल के बाहर परमेश्वर के कोई वचन नहीं हैं, तो क्या यह दृष्टिकोण सही है? आइए देखें कि प्रभु यीशु ने क्या कहा। यूहन्ना 16:12-13 में : ‘मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा।’ प्रकाशितवाक्य 2:7 में : ‘जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्वर के स्वर्गलोक में है, फल खाने को दूँगा।’ प्रभु यीशु ने हमें स्पष्ट रूप से बताया कि ऐसी कई बातें हैं जो उन्होंने अभी तक लोगों को नहीं बताई हैं, क्योंकि उस समय के लोग उन्हें सहन नहीं कर सकते थे। तो, जब प्रभु अंत के दिनों में लौटेंगे, तो वे और अधिक वचन व्यक्त करेंगे और वे मानवजाति के लिए सत्य के सभी रहस्यों को खोल देंगे, जिससे वे इसे समझ सकें और इसमें प्रवेश कर सकें। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक यह भी भविष्यवाणी करती है कि अंत के दिनों में, पवित्र आत्मा सभी कलीसियाओं से बात करेगा, छोटा सूचीपत्र खोला जाएगा और छिपा हुआ मन्ना अंत के दिनों के लोगों को दिया जाएगा। अगर बाइबल के बाहर परमेश्वर के कोई वचन नहीं हैं, तो ये भविष्यवाणियाँ कैसे पूरी हो सकती हैं? इसलिए, जब परमेश्वर अंत के दिनों में आएगा, तो वह और अधिक वचन व्यक्त करेगा, जिनमें से कोई भी बाइबल में नहीं है।” मुझे याद आया कि प्रभु यीशु ने वास्तव में ऐसे वचन कहे थे। परमेश्वर के वचन अथाह और प्रचुर हैं। यह कहना कि बाइबल के परे परमेश्वर के कोई वचन नहीं हैं, वास्तव में तथ्यों के अनुरूप नहीं है। उसने जो कहा वह बाइबल के अनुरूप है। लेकिन फिर मुझे याद आया कि प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में लिखा है : “मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ : यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा” (प्रकाशितवाक्य 22:18-19)। चमकती पूर्वी बिजली के लोग कहते हैं कि परमेश्वर ने नया कार्य किया है और नए वचन बोले हैं, जिसका अर्थ है बाइबल के बाहर के वचन। क्या यह बाइबल में कुछ जोड़ना नहीं था? अगर मैंने उनके प्रचार को स्वीकार कर लिया, तो मैं बाइबल के बाहर के वचनों को स्वीकार कर रही होऊँगी, जो प्रभु के साथ विश्वासघात होगा। तो मैं बहाना बनाकर बाहर चली गई, अब और नहीं सुनना चाहती थी।
रात में, मैं करवटें बदलती रही, सो नहीं पाई। मैंने सोचा कि इस भाई ने क्या कहा था और यह कितना अच्छा था और सब कुछ बाइबल पर आधारित था। अगर भाई झांग की यह बात सच थी कि “बाइबल के बाहर परमेश्वर के कोई वचन नहीं होंगे”, तो प्रभु की भविष्यवाणी पूरी नहीं हो सकती थी और छोटा सूचीपत्र नहीं खोला जा सकता था। लेकिन फिर मैंने सोचा कि कैसे भाई झांग ने एक विशेष सभा में कहा था कि वे लोग बाइबल में निपुण हैं और चाहे उनका प्रचार कितना भी गहरा या अच्छा क्यों न लगे, हमें उनकी नहीं सुननी चाहिए, तो मैं अभी भी चिंतित थी, “क्या होगा अगर मैं गलत चीज़ में विश्वास कर लूँ?”
चौथे दिन, मैंने उनसे कहा, “प्रकाशितवाक्य 22 कहता है : ‘मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ : यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा’ (प्रकाशितवाक्य 22:18-19)। ये दो वचन स्पष्ट रूप से कहते हैं कि बाइबल में कुछ भी जोड़ा या घटाया नहीं जाना चाहिए। आप अकेले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं—क्या यह प्रभु के वचनों को त्यागना नहीं है? अगर मैं गलत चीज़ में विश्वास कर लूँ, तो न केवल मुझे परमेश्वर की स्वीकृति नहीं मिलेगी, बल्कि परमेश्वर मुझ पर विपत्तियाँ भी लाएगा।” यह सुनकर, भाई मुस्कुराया और बोला, “तो आप इन बातों को लेकर चिंतित हैं! परमेश्वर के वचन सभी सत्य हैं और चाहे जब भी हों, कभी नहीं टलेंगे। यह बिल्कुल सच है। जब बाइबल कहती है कि किसी को भी बाइबल में कुछ जोड़ना या घटाना नहीं चाहिए, तो इसका अर्थ है कि इंसान ऐसा नहीं कर सकता, लेकिन अगर परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से कार्य करने आता है और अपने वचन व्यक्त करता है, तो हम यह नहीं कह सकते कि यह कुछ जोड़ना है। ठीक वैसे ही जैसे प्रभु यीशु ने व्यवस्था के युग के आधार पर नया कार्य किया और नए वचन व्यक्त किए, क्या हम कह सकते हैं कि उसने पुराने नियम में कुछ जोड़ा?” उस पल, मैंने सोचा, “हाँ, बाइबल कहती है कि किसी को भी भविष्यवाणियों में कुछ जोड़ना या घटाना नहीं चाहिए, लेकिन यह नहीं कहती कि परमेश्वर नए वचन नहीं बोलेगा।” उस पल, मेरा दिल रोशन हो गया और मुझे भाई की संगति में कुछ दिलचस्पी हो गई।
भाई ने मुझे परमेश्वर के कुछ वचन पढ़कर सुनाए, जिससे मुझे बाइबल की अंदरूनी कहानी और बाइबल के साथ सही तरीके से कैसे पेश आना है, इस बारे में कुछ बेहतर समझ मिली। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “क्या परमेश्वर के कार्य पर विनियमों को लागू किया जाना आवश्यक हैं? और क्या परमेश्वर के कार्य का नबियों के पूर्वकथनों के अनुसार होना आवश्यक है? आखिरकार कौन बड़ा है : परमेश्वर या बाइबल? परमेश्वर को बाइबल के अनुसार कार्य क्यों करना चाहिए? क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर को बाइबल से आगे निकलने का कोई अधिकार न हो? क्या परमेश्वर बाइबल से दूर नहीं जा सकता और अन्य काम नहीं कर सकता? यीशु और उनके शिष्यों ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया? यदि उसे सब्त के प्रकाश में और पुराने विधान की आज्ञाओं के अनुसार अभ्यास करना था, तो आने के बाद यीशु ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया, बल्कि इसके बजाय क्यों उसने पाँव धोए, सिर ढका, रोटी तोड़ी और दाखरस पीया? क्या यह सब पुराने विधान की आज्ञाओं में अनुपस्थित नहीं है? यदि यीशु पुराने विधान का सम्मान करता था, तो उसने इन विनियमों को क्यों तोड़ा? तुम्हें पता होना चाहिए कि पहले कौन आया, परमेश्वर या बाइबल! सब्त का प्रभु होते हुए, क्या वह बाइबल का भी प्रभु नहीं हो सकता?” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, बाइबल के विषय में (1))। “नए विधान के दौरान यीशु द्वारा किए गए कार्य ने नए कार्य की शुरुआत की : उसने पुराने विधान के कार्य के अनुसार कार्य नहीं किया, न ही उसने पुराने विधान के यहोवा द्वारा बोले गए वचनों को लागू किया। उसने अपना कार्य किया, और उसने बिल्कुल नया और ऐसा कार्य किया जो व्यवस्था से ऊँचा था। इसलिए, उसने कहा : ‘यह न समझो, कि मैं व्यवस्था या भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकों को लोप करने आया हूँ, लोप करने नहीं, परन्तु पूरा करने आया हूँ।’ इसलिए, जो कुछ उसने संपन्न किया, उससे बहुत-से सिद्धांत टूट गए। सब्त के दिन जब वह अपने शिष्यों को अनाज के खेतों में ले गया, तो उन्होंने अनाज की बालियों को तोड़ा और खाया; उसने सब्त का पालन नहीं किया, और कहा ‘मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है।’ उस समय, इस्राएलियों के नियमों के अनुसार, जो कोई सब्त का पालन नहीं करता था, उसे पत्थरों से मार डाला जाता था। फिर भी यीशु ने न तो मंदिर में प्रवेश किया और न ही सब्त का पालन किया, और उसका कार्य पुराने विधान के समय के दौरान यहोवा द्वारा नहीं किया गया था। इस प्रकार, यीशु द्वारा किया गया कार्य पुराने विधान की व्यवस्था से आगे निकल गया, यह उससे ऊँचा था, और यह उसके अनुसार नहीं था। अनुग्रह के युग के दौरान यीशु ने पुराने विधान की व्यवस्था के अनुसार कार्य नहीं किया, और उसने उन सिद्धांतों को पहले ही तोड़ दिया था। लेकिन इस्राएली कसकर बाइबल से चिपके रहे और उन्होंने यीशु की निंदा की—क्या यह यीशु के कार्य को नकारना नहीं था? आज धार्मिक जगत भी बाइबल से कसकर चिपका हुआ है, और कुछ लोग कहते हैं, ‘बाइबल एक पवित्र पुस्तक है, और इसे अवश्य पढ़ा जाना चाहिए।’ कुछ लोग कहते हैं, ‘समय चाहे जो भी हो, परमेश्वर के कार्य को छोड़ा नहीं जा सकता, पुराना विधान इस्राएलियों के साथ परमेश्वर की वाचा है, और उसे छोड़ा नहीं जा सकता, और सब्त का हमेशा पालन करना चाहिए!’ क्या वे हास्यास्पद नहीं हैं? यीशु ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया? क्या वह पाप कर रहा था? कौन ऐसी चीज़ों को अच्छी तरह से समझ सकता है? चाहे लोग बाइबल को कैसे भी पढ़ते हों, उनके लिए अपनी समझने की क्षमता का उपयोग करके परमेश्वर के कार्य को जानना असंभव होगा। न केवल वे परमेश्वर का शुद्ध ज्ञान प्राप्त नहीं करेंगे, बल्कि उनकी धारणाएँ पहले से कहीं अधिक ख़राब हो जाएँगी, इतनी ख़राब कि वे परमेश्वर का विरोध करना आरंभ कर देंगे। यदि आज परमेश्वर का देहधारण न होता, तो लोग अपनी धारणाओं के कारण बरबाद हो जाते, और वे परमेश्वर की ताड़ना के बीच मर जाते” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, बाइबल के विषय में (1))। परमेश्वर के वचन पढ़ने के बाद, भाई ने संगति की, “परमेश्वर के वचनों से, हम समझते हैं कि परमेश्वर के कार्य के बाद, लोगों ने परमेश्वर के कार्य के तथ्यों को दर्ज किया और संकलित किया और यही बाइबल बन गई। बाइबल केवल एक ऐतिहासिक पुस्तक है और परमेश्वर के पिछले दो चरणों के कार्य का एक लेखा-जोखा है। बाइबल परमेश्वर की गवाही है, जो परमेश्वर के कार्य की सेवा करती है और इसका उद्देश्य परमेश्वर के कार्य को सीमित करना नहीं है। पुराना नियम व्यवस्था के युग में यहोवा के कार्य को दर्ज करता है, मुख्य रूप से यह दर्ज करता है कि परमेश्वर ने दुनिया कैसे बनाई और व्यवस्था के युग में उसका कार्य क्या था। नया नियम अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य को दर्ज करता है, प्रभु यीशु के कार्य और वचनों को दर्ज करता है, लोगों को पश्चात्ताप करने और पाप-स्वीकार करने, अपने पड़ोसियों से अपने समान प्रेम करने और सत्तर गुना सात बार माफ करने का आह्वान करने के साथ ही प्रभु यीशु द्वारा पापों को क्षमा करना, बीमारों को चंगा करना, दुष्टात्माओं को निकालना, मरे हुओं को जिलाना वगैरह भी दर्ज है। क्या प्रभु यीशु के कार्य और वचन भी पुराने नियम में दर्ज बातों के बाहर नहीं थे? इंसानी नज़रों से देखें, तो क्या यह भी बाइबल से परे नहीं था? लेकिन यह बाइबल के बाहर कुछ जोड़ा जाना नहीं था, बल्कि परमेश्वर के कार्य का एक उत्कर्ष था। आज, सर्वशक्तिमान परमेश्वर आए हैं, अनुग्रह के युग के कार्य पर निर्माण करते हुए राज्य के युग का कार्य शुरू करने के लिए और उन्होंने नए वचन व्यक्त किए हैं। ये कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन हैं जिसकी भविष्यवाणी प्रकाशितवाक्य में की गई है, और छोटा सूचीपत्र खोल दिया गया है। यह कैसे कहा जा सकता है कि बाइबल में कुछ जोड़ा गया है? यह पूरी तरह से एक अलग मामला है। जब लोग देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने इतने सारे सत्य व्यक्त किए हैं, और छोटे सूचीपत्र के रहस्य खोल दिए गए हैं और कि ये वचन ठीक वही हैं जिनकी मानवजाति को अभी ज़रूरत है—ऐसे सत्य जो इस बात से संबंधित हैं कि क्या मानवजाति को बचाया जा सकता है और वह स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकती है—तो क्या लोग अब भी धर्म में लौटेंगे और हर दिन बाइबल का प्रचार सुनेंगे? ठीक वैसे ही जैसे अनुग्रह के युग में प्रभु का अनुसरण करने वाले; जब उन्होंने प्रभु यीशु को नए वचन व्यक्त करते और नया कार्य करते सुना, तो क्या वे अब भी फरीसियों को पुराना नियम प्रचार करते सुनने के लिए मंदिर जाते? अगर हम परमेश्वर के नए वचनों को इसलिए अस्वीकार करते हैं क्योंकि परमेश्वर का नया कार्य बाइबल से परे या उससे ऊपर है, तो क्या हम परमेश्वर का विरोध करने वाले फरीसियों जैसी ही गलती नहीं कर रहे हैं?” भाई के शब्दों ने मुझे पूरी तरह से कायल कर दिया और मेरे पास कोई जवाब नहीं था। मैंने सचमुच बाइबल को आदर्श मान लिया था और मैंने उसे परमेश्वर से ऊपर रखा। मैं यह भी समझ गई कि चमकती पूर्वी बिजली के लोगों का बाइबल न पढ़ना यह मतलब नहीं है कि वे बाइबल को नकार रहे हैं; बल्कि वे परमेश्वर के कार्य के कदमों का अनुसरण कर रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे प्रभु में विश्वास करने वालों ने नए नियम पर ध्यान देते हैं; इसका मतलब यह नहीं था कि वे परमेश्वर के मार्ग से भटक गए थे। मुझे एहसास हुआ कि मैं अब इस गलत तरीके से आगे नहीं बढ़ सकती और अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में लौटे हुए प्रभु थे और मैं सावधानी से जाँच करने में विफल रही और प्रभु की वापसी का स्वागत करने का मौका चूक गई, तो क्या मैं एक मूर्ख कुँवारी नहीं बन जाऊँगी? मैंने प्रभु से प्रार्थना की, “प्रभु, अगर आप सचमुच लौट आए हैं, तो मैं अपनी धारणाओं को अलग रखने और पवित्र आत्मा के प्रबोधन और मार्गदर्शन का अनुसरण करने को तैयार हूँ। अगर यह आपका कार्य है, तो कृपया मुझे प्रबुद्ध करें ताकि मैं आपकी वाणी को पहचान सकूँ।” इस तरह प्रार्थना करने के बाद, मैंने अपने दिल में बहुत शांति और सहजता महसूस की।
इसके बाद, हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के और वचन पढ़े : “स्वयं परमेश्वर ही जीवन और सत्य है और उसका जीवन और सत्य दोनों साथ-साथ विद्यमान हैं। जो लोग सत्य प्राप्त करने में असमर्थ हैं, वे कभी जीवन प्राप्त नहीं करेंगे। सत्य के मार्गदर्शन, सहारे और प्रावधान के बिना तुम केवल शब्द, धर्म-सिद्धांत और इससे भी अधिक मृत्यु ही प्राप्त करोगे। परमेश्वर का जीवन सदा विद्यमान है, और उसका सत्य और जीवन सह-अस्तित्व में हैं। यदि तुम सत्य का स्रोत नहीं खोज सकते तो तुम जीवन का पोषण प्राप्त नहीं करोगे; यदि तुम जीवन का प्रावधान प्राप्त नहीं कर सकते तो तुम्हारे पास निश्चित ही कोई सत्य नहीं होगा, कल्पनाओं और धारणाओं के अलावा, तुम्हारा पूरा शरीर तुम्हारी देह—तुम्हारी दुर्गंधित देह—ही होगा। यह जान लो कि किताबों के शब्द जीवन नहीं माने जाते, इतिहास के अभिलेखों को सत्य के रूप में पूजित नहीं किया जा सकता और अतीत के विनियम परमेश्वर के मौजूदा वचनों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। पृथ्वी पर आकर मनुष्य के बीच रहकर परमेश्वर जो वचन अभिव्यक्त करता है, वही सत्य हैं, वही जीवन हैं, वही परमेश्वर के इरादे और उसके कार्य करने का वर्तमान तरीका हैं। यदि तुम अतीत के युगों के दौरान परमेश्वर द्वारा कहे गए वचनों के अभिलेखों को लेते हो और आज उनका पालन करते हो तो यह तुम्हें पुरातत्ववेत्ता बना देता है, ऐसे में तुम्हें ऐतिहासिक धरोहरों का विशेषज्ञ कहना ही सबसे उचित होगा। तुम हमेशा परमेश्वर द्वारा विगत युगों में किए गए कार्य के चिह्नों पर विश्वास करते हो, तुम केवल पूर्व में मनुष्यों के बीच कार्य करते समय छोड़ी गई परमेश्वर की परछाई में विश्वास करते हो और केवल पिछले युगों में परमेश्वर द्वारा अपने अनुयायियों को दिए गए मार्ग में विश्वास करते हो, लेकिन तुम परमेश्वर के आज के कार्य की दिशा पर विश्वास नहीं करते, परमेश्वर के आज के महिमामय मुखमंडल में विश्वास नहीं करते और परमेश्वर द्वारा वर्तमान में व्यक्त किए जा रहे सत्य के मार्ग पर विश्वास नहीं करते। इसलिए तुम निर्विवाद रूप से एक दिवास्वप्नदर्शी हो जो पूरी तरह वास्तविकता से दूर है। यदि तुम अब भी उन शब्दों से चिपके रहते हो जो मनुष्य को जीवन प्रदान करने में असमर्थ हैं तो तुम एक लाइलाज सड़ी-गली लकड़ी हो, क्योंकि तुम अत्यंत रूढ़िवादी, अत्यंत हठी, अत्यंत तर्कहीन हो!” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है)। “अंत के दिनों का मसीह जीवन लाता है, और सत्य का स्थायी और शाश्वत मार्ग लाता है। यह सत्य वह मार्ग है, जिसके द्वारा मनुष्य जीवन प्राप्त करता है, और यही एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह द्वारा प्रदान किया गया जीवन का मार्ग नहीं खोजते, तो तुम यीशु की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं करोगे, और स्वर्ग के राज्य के द्वार में प्रवेश करने के योग्य कभी नहीं हो पाओगे, क्योंकि तुम इतिहास की कठपुतली और कैदी दोनों ही हो। जो लोग विनियमों से, शब्दों से और इतिहास की बेड़ियों से नियंत्रित होते हैं, वे न तो कभी जीवन प्राप्त कर पाएँगे और न ही जीवन का अनंत मार्ग प्राप्त कर पाएँगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उनके पास सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन के जल के बजाय बस मैला पानी ही है, जिससे वे हजारों सालों से चिपके हुए हैं। जिन्हें जीवन के जल की आपूर्ति नहीं की जाती, वे हमेशा मुर्दे, शैतान के खिलौने और नरक की संतानें बने रहेंगे। फिर वे कैसे परमेश्वर के दर्शन कर सकते हैं? तुम केवल अतीत को पकड़े रखने की खोज में रहते हो, स्थिर खड़े रहने और चीजों को वैसे ही रखने की कोशिश करते हो और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को छोड़ने की खोज में नहीं रहते, इसलिए क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरोधी नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के कदम उमड़ती लहरों और घुमड़ते गर्जनों की तरह विशाल और शक्तिशाली हैं—फिर भी तुम निष्क्रियता से बैठकर तबाही का इंतजार करते हो, अपनी मूर्खता से चिपके हो और कुछ नहीं करते। इस तरह, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? तुम जिस परमेश्वर को थामे हो, उसे उस परमेश्वर के रूप में सही कैसे ठहरा सकते हो, जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? और तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के शब्द तुम्हें पार कराकर नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के कदमों को ढूँढ़ने में तुम्हारी अगुआई कैसे कर सकते हैं? और वे तुम्हें ऊपर स्वर्ग में कैसे ले जा सकते हैं? जिन्हें तुम अपने हाथों में थामे हो, वे शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना दे सकते हैं, तुम्हें जीवन देने में सक्षम सत्य नहीं दे सकते। जो शास्त्र तुम पढ़ते हो, वे केवल तुम्हारी जिह्वा को समृद्ध कर सकते हैं और वे फलसफे के वे शब्द नहीं हैं, जो मानव-जीवन को जानने में तुम्हारी मदद कर सकते हों, तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाने वाला मार्ग देने की बात तो दूर रही। क्या यह विसंगति तुम्हारे लिए चिंतन का कारण नहीं है? क्या यह तुम्हें इसके भीतर समाहित रहस्यों का बोध नहीं करवाती? क्या तुम अपने बल पर परमेश्वर से मिलने के लिए अपने आप को स्वर्ग भिजवाने में समर्थ हो? परमेश्वर के आए बिना, क्या तुम परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनंद मनाने के लिए अपने आप को स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? तो मेरा सुझाव यह है कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो और उसकी ओर देखो, जो अभी कार्य कर रहा है—देखो कि अब अंत के दिनों में मनुष्य को बचाने का कार्य कौन कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो तुम कभी भी सत्य प्राप्त नहीं करोगे, और न ही कभी जीवन प्राप्त करोगे” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है)। परमेश्वर ने मेरी असली अवस्था को उजागर कर दिया। मैं अच्छी तरह से जानती थी कि परमेश्वर ही सत्य, मार्ग और जीवन है और परमेश्वर की प्रचुरता अथाह है और कभी खत्म नहीं होती। लेकिन मैं हठपूर्वक उस कार्य से चिपकी रही जो प्रभु यीशु ने अतीत में किया था। प्रभु अंत के दिनों में लौट आए हैं और नया कार्य कर रहे हैं, फिर भी मैं आज भी प्रभु के अतीत के वचनों और कार्य को पकड़े हुए थी। क्या मैं वह पुरातत्ववेत्ता नहीं थी जिसका जिक्र परमेश्वर करते हैं? प्रभु अब अपने अतीत के कार्य से नहीं चिपके रहता और उसने नया कार्य शुरू कर दिया है, फिर भी मैं परमेश्वर के अतीत के कार्य से चिपकी रही, यहाँ तक कि उसके नए कार्य को मापने के लिए भी उसका इस्तेमाल किया। क्या मैं इसमें परमेश्वर का विरोध नहीं कर रही थी? अगर मैं अब भी बाइबल को पकड़े रहती और अंत के दिनों में मसीह द्वारा प्रदान किए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करती, तो अंत तक प्रभु में मेरा विश्वास मुझे न तो जीवन देता, न ही प्रभु की स्वीकृति, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने की तो बात ही छोड़ दें। परमेश्वर के वचन मेरे दिल में गहराई से चुभ गए और मुझे शर्म से भर दिया। मेरा चेहरा शर्म से जल रहा था और मैंने अपने दिल में गहरी निंदा महसूस की। उस पल, मैं खुश भी थी और शर्मिंदा भी। मैं खुश थी क्योंकि मैंने आखिरकार प्रभु यीशु की वापसी देख ली थी, लेकिन मैं शर्मिंदा थी क्योंकि मैं इतनी अंधी थी, आँख मूँदकर लोगों की पूजा करती थी और निराधार अफवाहों पर विश्वास करती थी और क्योंकि मैंने बार-बार अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को यह सोचकर अस्वीकार कर दिया था कि मैं प्रभु के प्रति वफादार हूँ। मैं कितनी मूर्ख और हठी थी! पहले, मैंने निराधार अफवाहों पर विश्वास किया और कलीसिया को मुहरबंद कर दिया और जिन भाई-बहनों ने अभी-अभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया था, उन्हें भी वापस धार्मिक कलीसिया में खींच लिया। मैंने कई बुरे काम किए थे। मैं हर दिन स्थानीय कलीसिया में काम में व्यस्त रहती थी—क्या मैं खुद को परमेश्वर का विरोध करने और परमेश्वर के विरुद्ध जाने में व्यस्त नहीं रख रही थी? मैंने जो बुराई की, वह फरीसियों या यहूदी सदूकियों द्वारा की गई बुराई से अलग नहीं थी। मैंने अपने भाई-बहनों के लिए स्वर्ग के राज्य का दरवाज़ा बंद कर दिया, न तो खुद प्रवेश किया, न ही उन्हें प्रवेश करने दिया। मैंने परमेश्वर के विरोध में इतने बुरे काम किए, फिर भी परमेश्वर ने मेरे बुरे कर्मों के अनुसार मेरे साथ व्यवहार नहीं किया, बल्कि सुसमाचार का प्रचार करने के लिए भाई-बहनों को भेजा, मुझे अपने सामने लाया। मैं सचमुच परमेश्वर के इतने महान प्रेम के लायक नहीं थी! मैं अब अपने दिल में आत्म-ग्लानि और अपराध-बोध को रोक नहीं सकी और आँसुओं में, मैं अपने बिस्तर पर घुटने टेककर परमेश्वर से प्रार्थना करने और पाप-स्वीकार करने लगी, “प्रभु, मैंने आपकी वाणी सुनी है और आप सचमुच लौट आए हैं। मैं बहुत उत्साहित और खुश हूँ, फिर भी मैं पछतावे से भी भरी हूँ। आपने मुझे खुशखबरी देने, मेरे सामने सुसमाचार का प्रचार करने के लिए लोगों को भेजा, फिर भी मैंने न केवल सुना नहीं, बल्कि मैं धार्मिक अगुआओं द्वारा फैलाई गई निराधार अफवाहों पर भी विश्वास करती रही और अपनी धारणाओं से चिपकी रही और बार-बार, मैंने आपके लिए दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने अपने भाई-बहनों को भी आपके सामने आने से रोका। फरीसियों की तरह, मैंने आपको शास्त्रों के भीतर सीमित कर दिया। परमेश्वर, मैं कितनी गलत थी। मैं कितनी अंधी थी! मैं आपके सामने पाप-स्वीकार कर पश्चात्ताप करना चाहती हूँ, मैं अब फरीसियों के मार्ग पर नहीं चलना चाहती और मैं आपके कार्य के कदमों का अनुसरण करने को तैयार हूँ।” प्रार्थना करने के बाद, मेरा दिल बहुत रोशन और सहज महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे मैं एक अलग इंसान बन गई हूँ।
अगले दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहनों के साथ परमेश्वर के वचनों पर सभा और संगति करके, मेरे दिल की सारी उलझनें सुलझ गईं। मैंने अपने दिल में पूरी तरह से पुष्टि कर ली कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटे हुए प्रभु यीशु हैं, जिनका मैं लंबे समय से इंतजार कर रही थी। मेरा दिल बहुत उत्तेजित हो गया और मैं जल्दी से वापस जाकर यह खुशखबरी अपने भाई-बहनों के साथ साझा करना चाहती थी। मैं पहले अपनी माँ के घर गई और कुछ भाई-बहनों का मत-परिवर्तन करवाया। बाद में, मैं अपने इलाके में लौटी और अपने संप्रदाय की बहन ली को सुसमाचार का प्रचार किया। बहन ली यह सुनकर बहुत खुश हुई और सच्चे मार्ग की जाँच करने को तैयार हो गई। लेकिन अप्रत्याशित रूप से, उसे स्थानीय कलीसिया के सह-कार्यकर्ताओं ने परेशान किया और वापस खींच लिया।
बाद में, जब स्थानीय कलीसिया के सह-कार्यकर्ताओं को पता चला कि मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार कर लिया है, तो उन्होंने मुझे निष्कासित कर दिया। मैं उनसे बाधित नहीं हुई और सुसमाचार का प्रचार करती रही। यह देखकर कि वे मुझे रोक नहीं सकते, उन्होंने नरम तरीके अपनाना शुरू कर दिया। उन्होंने दो-तीन के समूहों में लोगों को मेरे घर भेजा, जो रो रहे थे और मुझसे स्थानीय कलीसिया में लौटने की विनती कर रहे थे। उन्होंने मुझसे माफी माँगी, कहा कि उन्हें मुझे निष्कासित नहीं करना चाहिए था। मैंने उन सभी वर्षों के बारे में सोचा जो मैंने उनके साथ सुसमाचार का प्रचार करते हुए, अपने भाई-बहनों का समर्थन करते और साथ में सह-कार्यकर्ताओं की सभाओं में भाग लेते हुए बिताए थे। ये सभी यादें एक फिल्म की तरह मेरे दिमाग में घूमती रहीं। मैं सचमुच बहुत व्यथित महसूस कर रही थी और इसलिए मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की, “परमेश्वर, मुझे क्या करना चाहिए? मेरे मन में अभी भी उनके लिए भावनाएँ हैं और मैं उन्हें छोड़ नहीं सकती, लेकिन मैं यह भी जानती हूँ कि आप न्याय और शुद्धिकरण का कार्य करने के लिए लौट आए हैं और अगर मैं उनके साथ धर्म में वापस चली गई, तो मैं आपके साथ विश्वासघात करूँगी। मैं आपके उद्धार के अयोग्य नहीं होना चाहती। मैं ऐसी इंसान नहीं हो सकती जिसमें जमीर ही नहीं है।” प्रार्थना करने के बाद, मुझे अचानक परमेश्वर के वे वचन याद आए जो मेरे भाई ने मुझे पढ़कर सुनाए थे : “परमेश्वर द्वारा मनुष्य पर किए जाने वाले कार्य का हर कदम बाहर से यह लोगों के मध्य अंतःक्रिया प्रतीत होता है, मानो यह मानव-व्यवस्थाओं द्वारा या मानवीय विघ्न से उत्पन्न हुआ हो। किंतु, कार्य के प्रत्येक कदम, और घटित होने वाली हर चीज के पीछे शैतान द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाजी है और इनमें अपेक्षित है कि लोग परमेश्वर के लिए अपनी गवाही में अडिग बने रहें। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब का परीक्षण हुआ : पर्दे के पीछे शैतान परमेश्वर के साथ शर्त लगा रहा था और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कर्म थे और मनुष्यों के विघ्न थे। परमेश्वर द्वारा तुम लोगों पर किए गए कार्य के हर कदम के पीछे शैतान की परमेश्वर के साथ बाजी होती है—इसके पीछे एक लड़ाई होती है” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल परमेश्वर से प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है)। परमेश्वर के वचनों ने मेरे दिल को रोशन कर दिया और मैं आखिरकार समझ गई कि उनका भाई-बहनों से मुझसे विनती करवाना और मुझे ऊँचा उठाने के लिए चापलूसी भरे शब्द कहलवाना, इन सबमें शैतान की चालें थीं। वे मुझे गुमराह करने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के साथ विश्वासघात करवाने के लिए इस नरम तरीके का इस्तेमाल कर रहे थे। मैं उनकी चालों में नहीं आ सकती थी। जब उन्होंने देखा कि वे मुझे मना नहीं सकते, तो वे चले गए। लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ, दस दिन बाद, भाई झांग दस से ज़्यादा सह-कार्यकर्ताओं को मुझे परेशान करने के लिए मेरे घर ले आए। मैंने मन ही मन सोचा, “प्रभु अब लौट आए हैं और स्थानीय कलीसिया का प्रमुख व्यक्ति होकर वे न केवल इसे स्वीकार करने से इनकार करते हैं, बल्कि हमें गुमराह करने के लिए धारणाएँ और भ्रांतियाँ भी फैलाते हैं और वे अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य की निंदा करते हैं। मैंने अपने भाई-बहनों को अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य के सुसमाचार का प्रचार किया और हर कोई खोजने और जाँच करने को तैयार था। लेकिन जैसे ही मैं गई, वे आए और उन्हें वापस खींचकर ले गए। क्या वे सचमुच प्रभु के विश्वासी हैं?” मुझे प्रभु यीशु के वे वचन याद आए, जिनमें उन्होंने फरीसियों की निंदा की और उन्हें श्राप दिया था : “हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो” (मत्ती 23:13)। “हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो” (मत्ती 23:15)। क्या भाई झांग और दूसरों के कार्य उन पाखंडी फरीसियों जैसे ही नहीं थे? अतीत में, जब फरीसियों ने प्रभु यीशु को इतने सारे सत्य व्यक्त करते देखा और इतने सारे चमत्कार करते देखा, तो उन्होंने खोज नहीं की, बल्कि प्रभु यीशु का विरोध किया और उनकी निंदा की। उन्होंने लोगों को गुमराह करने और उन्हें प्रभु का अनुसरण करने से रोकने के लिए झूठी गवाही भी दी और उनका प्रकृति सार परमेश्वर और सत्य से घृणा करने वाला था। अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने इतने सारे सत्य व्यक्त किए हैं और इतने सारे लोगों ने उन्हें स्वीकार किया है और उनका अनुसरण करने लगे हैं। लेकिन भाई झांग और दूसरों ने न केवल जाँच करने से इनकार किया, बल्कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध किया और उनकी निंदा भी की, कलीसिया को मुहरबंद कर दिया, विश्वासियों को डराने और उन्हें सच्चे मार्ग की जाँच करने से रोकने के लिए निराधार अफवाहें और भ्रांतियाँ फैलाईं। वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर रहे थे और दूसरों को भी प्रवेश करने से रोक रहे थे। अपने साथ वे दूसरों से भी परमेश्वर का विरोध करवा रहे थे, उन्हें नरक में ले जा रहे थे। क्या वे फरीसी और जीवित दानव नहीं थे, जो दूसरों को स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने से रोकते थे और उन्हें नरक की संतान बनाते थे? जब मैंने यह सोचा, तो मैं उनका भेद पहचान सकी और मैंने उनके परमेश्वर-प्रतिरोधी सार को साफ-साफ देख लिया। चाहे उन्होंने मुझे कितना भी परेशान करने की कोशिश की, मैं उनकी चालों में नहीं आई और मैंने मेमने के पदचिह्नों पर चलने का पक्का इरादा कर लिया था।
यह परमेश्वर के वचन ही थे जिन्होंने मुझे धार्मिक अगुआओं की निराधार अफवाहों के बंधन से मुक्त होने और शैतान की चालों की असलियत देखने में मेरा मार्गदर्शन किया। उसके बाद, मैं सक्रिय रूप से सुसमाचार का प्रचार करने वालों की श्रेणी में शामिल हो गई और अपने भाई-बहनों के साथ मिलकर काम करते हुए, हम स्थानीय कलीसिया से तीस से ज़्यादा लोगों को परमेश्वर के सामने ले आए। परमेश्वर का मार्गदर्शन देखकर, उसका अनुसरण करने में मेरी आस्था और भी मज़बूत हो गई। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद हो!
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