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देहधारी परमेश्वर को बेहद चिंता है अपने अनुयायियों की

I

परमेश्वर ने देह बनकर, इंसानों के बीच रहकर,

देखी उनकी बुराई, और हालात ज़िंदगी के।

देहधारी परमेश्वर ने महसूस कीं इंसान की मजबूरियां,

इंसान की दयनीयता, इंसान का दुख-दर्द।

देह में परमेश्वर अपने सहज-ज्ञान से, हो गये ज़्यादा दयालु

मानव की हालत के लिये, हो गये ज़्यादा चिंतित अपने भक्तों के लिये।

अपने भक्तों के लिये।

अपने भक्तों के लिये।

II

प्रभु जिनका प्रबंधन करना और जिनको बचाना चाहते हैं,

क्योंकि अपने दिल में वो, उनको बहुत चाहते हैं।

उनके लिये वो ही सबसे ऊपर हैं।

प्रभु ने बड़ी कीमत चुकाई है।

कपट भोगा है और चोट खाई है।

मगर हारते नहीं हैं परमेश्वर, काम करते हैं निरंतर,

ना कोई शिकवा, ना पछतावा कोई।

देह में परमेश्वर अपने सहज-ज्ञान से, हो गये ज़्यादा दयालु

मानव की हालत के लिये, हो गये ज़्यादा चिंतित अपने भक्तों के लिये।

अपने भक्तों के लिये।

अपने भक्तों के लिये।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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