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अंत के दिनों में न्याय का कार्य है युग को समाप्त करना

I

अंत के दिन सिर्फ़ नाम है युग का, व्यवस्था और अनुग्रह के युग की तरह,

अंत के महीने या साल नहीं, ये युग अलग है बहुत, उन दो युगों से।

अंत के दिनों का कार्य, किया नहीं जाता इस्राएल में,

बल्कि पूरा किया जाता है ये गैर जाति-राष्ट्र में।

ये विजय है परमेश्वर के सिंहासन के सामने, सभी देशों की,

और भर देगी अखिल ब्रह्माण्ड को, महिमा परमेश्वर की।

सभी देशों में, पीढ़ियों में इसका, ऐलान होगा।

हर जीव दर्शन करेगा उस महिमा का, जो धरती पर पाई है परमेश्वर ने।

II

अंत के दिन समय है विजय का, न कि लोगों के जीवन के मार्गदर्शन का।

बल्कि ये निष्कर्ष है,

इंसान की कभी न ख़त्म होने वाली अंतहीन यातना का।

अंत के दिन नहीं हैं उन बरसों बरस की तरह,

जब परमेश्वर ने अपने दूसरे देहधारण तक,

कार्य किया था यहूदा और इस्राएल में हज़ारों साल,

बल्कि है कम अवधि का।

अंत के दिनों के लोगों का सामना होता है, देह में वापस आये उद्धारक से,

पाते हैं निजी कार्य और वचन परमेश्वर का।

थोड़ा है अंत के दिनों का समय, उसी समय की तरह जब यीशु ने

अनुग्रह के युग का कार्य किया यहूदिया में।

अंत के दिन, अंत है एक युग का,

परमेश्वर की छह हजार साल की योजना की पूर्णता का।

अंत के दिन, इंसान की यात्रा का अंत, इंसान की यातना के सफ़र का अंत।

मगर नवयुग में कर नहीं सकते सब प्रवेश,

मानव जीवन चलेगा नहीं उसी तरह।

परमेश्वर की महान योजना में क्योंकि, अहमियत नहीं है कोई उसकी।

क्योंकि इंसान ने ज़िद की अगर, तो निगल जाएगा शैतान उसे,

और परमेश्वर की हैं जो आत्माएँ, शैतान के हाथों में गुम हो जाएंगी।

III

अंत के दिन, हो गया है समय पूरा।

जारी नहीं रखेगा परमेश्वर; देरी नहीं करेगा वो।

अंत के दिन, पराजय शैतान की।

वापस ले लेगा अपनी महिमा सारी, देरी नहीं करेगा वो।

परमेश्वर का कार्य, चलता है छह हज़ार साल तक केवल।

इंसान पर शैतान का वश, नहीं रहेगा छह हज़ार साल से ज़्यादा।

परमेश्वर से संबंधित हर आत्मा, बच जाएगी यातना के सागर से,

और हो जाएगा सारा काम पूरा परमेश्वर का धरती पर।

फिर नहीं करेगा देहधारण परमेश्वर धरती पर।

फिर नहीं करेगा उसका आत्मा काम धरती पर।

वो बनाएगा फिर से इंसान, पवित्र इंसान,

जो होगा उसका सच्चा शहर धरती पर।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है